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यौन शोषण के मामले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद गिरी को इलाहाबाद हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य मुकुंदनंद ब्रह्मचारी को यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के तहत उनके खिलाफ दर्ज मामले में अग्रिम जमानत दे दी। यह आदेश न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा ने अविमुक्तेश्वरानंद और मुकुंदानंद की अग्रिम जमानत याचिका पर दिया है। कोर्ट ने शिकायतकर्ता और याची दोनों को इस संबंध में मीडिया के सामने कोई बयान नहीं देने का निर्देश भी दिया है।
आपको बता दें कि आशुतोष ब्रह्मचारी की अर्जी पर विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट के आदेश के क्रम में अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ प्रयागराज के झूंसी थाने में पॉस्को एक्ट व बीएनएस की धाराओं में मुकदमा दर्ज़ किया गया। इस पर गिरफ्तारी से बचने के लिए अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से अग्रिम जमानत अर्जी दाखिल की गई है।
पॉक्सो एक्ट की विशेष अदालत के आदेश पर झूंसी थाने में अविमुक्तेश्वरानंद व उनके शिष्य मुकुंदानंद समेत तीन अज्ञात के खिलाफ दर्ज मुकदमे की विवेचना के क्रम में पुलिस ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वालों का मेडिकल परीक्षण करवाया। पुलिस ने मेडिकल परीक्षण कराने की बात स्वीकार की।
पुलिस सूत्रों का कहना है कि उम्र के साथ उनके द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोप से संबंधित जांच भी की गई है। पुलिस के मुताबिक इस बारे में अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी क्योंकि इस परीक्षण के बाद अभी फोरेंसिक जांच होना बाकी है, निष्कर्ष उसी से निकाला जा सकता है। पुलिस ने बताया कि गुरुवार को ही दोनों का मजिस्ट्रेट के सामने कलमबंद बयान भी हुआ है, जिसके बाद दोनों प्रयागराज से वापस चले गए। बयान में क्या निकला, इस बारे में अधिकृत तौर पर कोई भी कुछ बोलने को तैयार नहीं है। फॉरेंसिक एक्सपर्ट व पोस्टमार्टम प्रभारी डॉ. राजीव रंजन ने बताया कि फॉरेंसिक चिकित्सा में 25 साल से कम उम्र की वास्तविक जानकारी के लिए दांत का एक्स-रे किया जाता है। साथ ही भौतिक रूप से दांतों की गिनती की जाती है। वहीं, 25 साल से अधिक उम्र के लोगों में गुस्ताफसन विधि का प्रयोग किया जाता है।
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शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ प्रयागराज के झूंसी थाने में दर्ज पॉक्सो एक्ट के हाई प्रोफाइल मुकदमे में मंगलवार को जांच ने रफ्तार पकड़ ली। पुलिस ने एक नाबालिग पीड़ित का मेडिकल परीक्षण कराया, जबकि दूसरे पीड़ित के बयान और साक्ष्यों के मिलान की प्रक्रिया जारी है। टीम ने माघ मेला क्षेत्र में कथित घटनास्थल का दोबारा निरीक्षण कर शिविरों की स्थिति, वहां की आवाजाही और उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज की पड़ताल की।
यह मुकदमा अविमुक्तेश्वरानंद, उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी और तीन अज्ञात के खिलाफ दर्ज हुआ है। शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी ने अदालत में दो नाबालिगों को बयान के लिए प्रस्तुत किया था, जिसके आधार पर पॉक्सो की विशेष अदालत के आदेश पर झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, मेडिकल रिपोर्ट और पूर्व में दर्ज कराए गए बयानों का मिलान किया जा रहा है। साथ ही मोबाइल कॉल डिटेल, लोकेशन डेटा और मेला क्षेत्र के सीसीटीवी फुटेज को खंगाला जा रहा है। जांच टीम यह भी पता लगा रही है कि कथित घटनाओं के समय संबंधित लोग किस स्थान पर मौजूद थे।
साधु-संतों और चश्मदीदों से होगी पूछताछ
पुलिस की विवेचना अब केवल तकनीकी साक्ष्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक और प्रत्यक्षदर्शी साक्ष्यों को भी जुटाया जा रहा है। जांच टीम ने उस शिविर क्षेत्र का मानचित्र तैयार किया है जहाँ कथित अनुष्ठान आयोजित होने की बात कही गई है। पुलिस अब आसपास के शिविरों के संचालकों, वहां तैनात सुरक्षाकर्मियों और नियमित आने-जाने वाले साधु-संतों से पूछताछ की तैयारी कर रही है।
पुलिस का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि क्या उस विशेष अवधि में नाबालिगों की उपस्थिति वहां देखी गई थी और क्या किसी संदिग्ध गतिविधि की भनक आसपास के लोगों को थी। उच्चाधिकारियों ने निर्देश दिए हैं कि जांच के हर चरण की वीडियोग्राफी कराई जाए ताकि भविष्य में किसी भी पक्ष द्वारा साक्ष्यों से छेड़छाड़ या पक्षपात का आरोप न लगाया जा सके।
उच्चाधिकारियों की निगरानी में हो रही है जांच
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए उच्चाधिकारियों की निगरानी में जांच जारी है। जांच के अगले चरण में आरोपित पक्ष से भी विस्तृत पूछताछ की तैयारी है। पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं की निष्पक्ष और गहन जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। उधर, अविमुक्तेश्वरानंद ने सोशल मीडिया पर प्रयागराज के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी की केक काटते हुए फोटो वायरल की है।
उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस और शिकायतकर्ता की मिलीभगत से उन्हें साजिश के तहत फंसाया जा रहा है। हालांकि, पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वायरल फोटो की सत्यता और संदर्भ की जांच की जा रही है। इससे विवेचना की निष्पक्षता पर कोई असर नहीं पड़ेगा। एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि ‘जांच तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ेगी, न कि आरोप-प्रत्यारोप के आधार पर।’
अविमुक्तेश्वरानंद ने दाखिल की अग्रिम जमानत की अर्जी
प्रयागराज। अविमुक्तेश्वरानंद ने पॉस्को एक्ट में मुकदमा दर्ज़ होने के बाद गिरफ्तारी से बचने के लिए हाईकोर्ट का रुख किया है। उनकी ओर से हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत अर्जी दाखिल की गई है, जिस पर जल्दी सुनवाई होने की संभावना है। आशुतोष ब्रह्मचारी की अर्जी पर प्रयागराज में नियुक्त विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट के आदेश के क्रम में रविवार को झूंसी थाने में पॉस्को एक्ट व बीएनएस की धाराओं में मुकदमा दर्ज़ किया गया था, जिसके बाद अविमुक्तेश्वरानंद की गिरफ्तारी की संभावना भी जताई जा रही है।
इसे देखते हुए गिरफ्तारी से बचने के लिए उनकी ओर से अग्रिम जमानत अर्जी दाखिल की गई है। झूंसी पुलिस ने मुकदमा दर्ज़ होने के बाद विवेचना को तेज कर दिया है। पीड़ितों का बयान लेने के लिए पुलिस हरदोई गई थी। ऐसे में मुकदमे की गंभीर धाराओं को देखते हुए हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत अर्जी दाखिल की गई है।
]]>सांसद ने कहा कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने जब गोरक्षा के लिए कदम उठाया तो मुझे बहुत अच्छा लगा। गाजीपुर के सांसद ने कहा कि शंकराचार्य जी के इस अभियान का मैं समर्थक हूं। सार्वजनिक मंचों पर प्रशंसा करता हूं। समय आएगा तो संसद में भी बोलूंगा।
गोरक्षा के लिए मुखर हैं शंकराचार्य
बता दें कि ज्योर्तिमठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद लंबे समय से गौ रक्षा के लिए मुखर हैं। वह गाय को राष्ट्र माता घोषित करने, गौ हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने और पूरे देश के लिए समान कानून बनाने की मांग करते हैं। अपनी इस मांग को लेकर उन्होंने 'गौ प्रतिष्ठा यात्रा' जैसे आंदोलन चलाए हैं। वह देश भर में गौ रक्षा के प्रति जन-जागृति लाने के लिए प्रयास कर रहे हैं। इसके साथ ही वह राजनीतिक दलों से इस मुद्दे पर स्पष्ट रुख अपनाने की अपील करते हैं। वह लोगों से गौ रक्षक उम्मीदवारों का समर्थन करने की अपील करते हैं।
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