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महाराष्ट्र से बड़ी खबर आ रही है. सूत्रों के मुताबिक- कांग्रेस हाईकमान ने शरद पवार को ऑफर दिया है कि वे अपनी पार्टी एनसीपीएस का कांग्रेस में विलय कर दें. जिस वक्त यह खबर आई ठीक उसी वक्त शरद पवार की पार्टी में फूट भी सामने आ गई. एनसीपीएस के तीन एमएलए महाराष्ट्र बीजेपी अध्यक्ष से मिले हैं और कहा जा रहा है कि वे बीजेपी ज्वाइन कर सकते हैं।
इससे पहले उद्धव गुट के नेता ने सुझाव दिया था कि कांग्रेस में TMC और NCP का विलय हो जाना चाहिए. इस पर जब शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि संजय राउत मेरे लिए बड़े भाई जैसे हैं, उन्होंने जो सुझाव दिया है, वो अच्छा है. अब आगे क्या होगा, कैसे होगा, ये वक्त बताएगा. बीजेपी पर हमला करते हुए सुप्रिया ने कहा, जो तृणमूल कांग्रेस में हुआ, वो हैरान करने वाला नहीं है. इन लोगों ने पहले शिवसेना तोड़ी, उसके बाद एनसीपी तोड़ी, अब तृणमूल कांग्रेस की बारी है. तो हम ये भुगत चुके हैं. इसीलिए हम तृणमूल के साथ खड़े दिख रहे हैं।
अशोक गहलोत भी इसी सुर में बोले
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता अशोक गहलोत ने कहा कि जो पार्टियां कांग्रेस से अलग हुई हैं, उन्हें वापस कांग्रेस में आ जाना चाहिए. सब पार्टियों को एकजुट होना चाहिए. राहुल गांधी को इंडिया अलायंस का नेता मान लेना चाहिए. संजय राउत की बात में दम है।
संजय राउत ने क्या कहा था
शिवसेना उद्धव गुट के नेता संजय राउत ने कहा था कि जो पार्टियां कांग्रेस से अलग हुई हैं, उन्हें कांग्रेस में शामिल हो जाना चाहिए. आज सभी दलों को अपने-अपने राज्यों में लड़ाई लड़ने के लिए कांग्रेस पार्टी की मदद चाहिए।
शरद पवार गुट में बढ़ी बेचैनी, तीन विधायक BJP प्रदेश अध्यक्ष से मिले
महाराष्ट्र की सोलापुर विधानसभा सीट पर चुनावी मुकाबले के बीच शरद पवार गुट की एनसीपी में अंदरूनी असंतोष खुलकर सामने आ गया है. पार्टी द्वारा वसंतराव देशमुख को उम्मीदवार बनाए जाने से नाराज तीन विधायकों उत्तमराव जानकर, अभिजीत पाटिल और नारायण पाटिल ने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण से मुलाकात की. सोलापुर में महायुति नेताओं की बैठक के दौरान हुई इस मुलाकात ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है. बैठक में सांगोला से शेकप विधायक बाबासाहेब देशमुख भी मौजूद रहे।
दरअसल, सोलापुर विधानसभा सीट पर भाजपा के राजेंद्र राउत का मुकाबला शरद पवार गुट के उम्मीदवार वसंतराव देशमुख से है. टिकट वितरण को लेकर नाराज इन तीनों विधायकों ने पहले भी सार्वजनिक रूप से अपनी आपत्ति जताई थी और भाजपा उम्मीदवार को समर्थन देने के संकेत दिए थे. वसंतराव देशमुख को सांसद धैर्यशील मोहिते पाटिल का करीबी माना जाता है, ऐसे में विधायकों की नाराजगी को मोहिते पाटिल के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।
]]>राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (SP) के संस्थापक और महाराष्ट्र के चार बार मुख्यमंत्री रह चुके दिग्गज नेता शरद पवार को रविवार को एक बार फिर पुणे के रूबी हॉल क्लिनिक में भर्ती कराया गया है। पिछले कुछ दिनों से उनकी सेहत में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। उनकी बेटी और बारामती की सांसद सुप्रिया सुले ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस खबर की पुष्टि की है।
ताजा जानकारी के अनुसार, शरद पवार पिछले कुछ दिनों से खांसी और गले के संक्रमण से जूझ रहे थे। शनिवार को अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद वे अपने आवास पर विश्राम कर रहे थे, लेकिन रविवार सुबह उन्हें अत्यधिक कमजोरी और शरीर में पानी की कमी महसूस हुई। डॉक्टरों की सलाह पर परिवार ने उन्हें तुरंत आगे की जांच और चिकित्सकीय देखरेख के लिए अस्पताल में भर्ती करने का निर्णय लिया।
सुप्रिया सुले ने एक्स पर लिखा, "हम बाबा को फॉलो-अप टेस्ट और हाइड्रेशन के लिए पुणे के रूबी हॉल में भर्ती कर रहे हैं। हम सभी डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों का आभार व्यक्त करते हैं।"
85 साल के शरद पवार को पिछले हफ्ते भी इसी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उस समय उन्हें सांस लेने में कठिनाई और सीने में संक्रमण की शिकायत थी। डॉक्टरों ने उन्हें एंटीबायोटिक्स का पांच दिनों का कोर्स दिया था और शनिवार को ही उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिली थी। हालांकि, डॉक्टरों ने उन्हें 3-4 दिन पूर्ण विश्राम की सलाह दी थी, लेकिन उनकी स्थिति में सुधार न होने के कारण उन्हें दोबारा भर्ती करना पड़ा।
आपको बता दें कि हाल ही में पवार परिवार पर आए दुखों के पहाड़ ने भी वरिष्ठ नेता के स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव डाला है। जनवरी के अंत में एक विमान हादसे में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और उनके भतीजे अजित पवार के असामयिक निधन के बाद से शरद पवार बारामती में परिवार को संभालने में व्यस्त थे। इस दौरान हुई भागदौड़ और मानसिक तनाव ने उनकी सेहत पर प्रतिकूल असर डाला है।
रूबी हॉल क्लिनिक के डॉक्टरों के अनुसार, शरद पवार की स्थिति फिलहाल स्थिर है। उनके महत्वपूर्ण अंगों की स्थिति सामान्य है, लेकिन उम्र और संक्रमण को देखते हुए उन्हें विशेष निगरानी में रखा गया है। अस्पताल प्रशासन ने समर्थकों और कार्यकर्ताओं से अपील की है कि वे अस्पताल में भीड़ न लगाएं ताकि अन्य मरीजों को असुविधा न हो।
]]>सोमवार को बारामती तालुका के काठेवाड़ी में दिवंगत नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री अजीत पवार की तेरहवीं पुण्यतिथि मनाई जा रही है. शरद पवार और उनके परिवार के अन्य सदस्यों को इस समारोह में शामिल होना था, लेकिन शरद पवार की आज सुबह से ही तबीयत खराब हो गयी. इसकी वजह से वह कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाए.
प्राप्त जानकारी के अनुसार शरद पवार को सुबह से ही खांसी, बुखार और जुकाम था, इसलिए डॉक्टरों की एक टीम सुबह ही बारामती के गोविंदबाग स्थित उनके आवास पर पहुंच गई थी. डॉक्टरों ने शरद पवार की नियमित जांच की. इसके बाद, डॉक्टरों की एक टीम दोपहर में शरद पवार की दोबारा जांच करने गई.
पुणे के रूबी अस्पताल में किया जाएगा भर्ती
शरद पवार को पुणे के रूबी अस्पताल में भर्ती कराने का फैसला किया गया है. कुछ मिनट पहले शरद पवार पुणे के लिए रवाना हुए. उनकी बेटी और सांसद सुप्रिया सुले भी उनके साथ हैं. शरद पवार के काफिले में एक एम्बुलेंस भी है. शरद पवार जल्द ही पुणे पहुंचेंगे. इसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया जाएगा. उनका आगे का इलाज पुणे के रूबी अस्पताल में होगा.
परिवार के करीबी सूत्रों ने बताया कि शरद पवार को लगातार खांसी और कफ की दिक्कत हो रही है, जिससे उन्हें सांस लेने में दिक्कत हो रही है. उन्होंने प्रोटेक्टिव मास्क पहना हुआ था और मेडिकल सपोर्ट स्टैंडबाय पर था.
पिछले कुछ दिनों से पवार की तबीयत ठीक नहीं
माना जा रहा है कि पिछले कुछ दिनों से शरद पवार की सेहत ठीक नहीं रही है. बीमारी की वजह से वह पिछले दो-तीन महीनों से ज्यादातर सार्वजनिक कार्यक्रम से दूर रहे थे, लेकिन अपने भतीजे और अजीत पवार की अचानक मौत के बाद उन्होंने पार्टी वर्कर्स और आम लोगों से मिलना फिर से शुरू कर दिया.
पिछले हफ्ते, उन्होंने लगातार तीन दिन कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी में बिताए, जहां अजीत पवार रहते थे, जहां पार्टी लीडर्स और शुभचिंतक शोक जताने के लिए इकट्ठा हुए थे. माना जा रहा है कि पिछले आठ दिनों से बारामती में लगातार आने वालों की वजह से वह थक गए थे. यह घटना ऐसे समय में हुई है जब राज्य भर में डिस्ट्रिक्ट काउंसिल और पंचायत चुनाव के नतीजे घोषित होने के साथ पॉलिटिकल एक्टिविटी बढ़ गई है.
]]>उन्होंने स्पष्ट किया कि संस्थान के खिलाफ कोई शिकायत नहीं है. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने वीएसआई में जांच शुरू होने की बात से इनकार किया है. उन्होंने कहा कि शुगर कमिश्नर ने केवल संस्थान द्वारा कुचले गए गन्ने के प्रति टन एक रुपये के उपयोग की जानकारी मांगी है. कोई जांच शुरू नहीं हुई. अगर वीएसआई के खिलाफ कोई गंभीर शिकायत मिलती है, तो हम जांच कर सकते हैं. फिलहाल किसी की कोई शिकायत नहीं है.
चीनी उद्योग के लिए अनुसंधान का काम करती है संस्था
1975 में सहकारी कारखानों के गन्ना उत्पादकों द्वारा स्थापित वीएसआई चीनी उद्योग के लिए अनुसंधान एवं विकास संस्थान है. यह सहकारी मिलों से कुचले गए गन्ने के प्रति टन एक रुपये प्राप्त करता है, जिससे अपनी गतिविधियां चलाता है. शरद पवार के अलावा उनके भतीजे एवं उपमुख्यमंत्री अजित पवार, पूर्व मंत्री दिलीप पाटील, जयंत पाटील और कांग्रेस नेता बालासाहेब थोरात इसके ट्रस्टी हैं. एन51सीपी-एसपी नेताओं ने इसे विपक्षी गढ़ों को निशाना बनाने का हिस्सा बताया. पार्टी के राज्य महासचिव रोहित पवार ने कहा कि मुख्यमंत्री का जांच का फैसला सामान्य प्रक्रिया नहीं है. ठाणे के बाद अब बारामती को निशाना बनाया जा रहा है. जब विपक्ष भ्रष्टाचार के सबूत देता है, तो सरकार चुप रहती है, लेकिन वीएसआई जैसी प्रतिष्ठित संस्था को टारगेट किया जा रहा है. यह बीजेपी की राजनीति के निम्न स्तर को दर्शाता है.
पुणे जिले का बारामती पवार परिवार का राजनीतिक गढ़ है, जबकि ठाणे उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना का घरेलू मैदान है. एनसीपी-एसपी का आरोप है कि सत्ता में आने के बाद बीजेपी और उसके सहयोगी विपक्षी नेताओं की संस्थाओं को कमजोर करने की रणनीति अपनाते हैं. वीएसआई चीनी उद्योग में तकनीकी नवाचार, प्रशिक्षण और अनुसंधान के लिए जाना जाता है. सहकारी मिलों से प्राप्त फंड का उपयोग वैज्ञानिक अध्ययन, किसान जागरूकता और उद्योग उन्नयन में होता है. संस्थान के ट्रस्टी बोर्ड में सभी प्रमुख दलों के नेता शामिल हैं, जो इसे गैर-राजनीतिक स्वरूप देते हैं. फिर भी, फंड ऑडिट का फैसला राजनीतिक रंग ले चुका है.
जांच पारदर्शी होगी
शुगर कमिश्नर कोल्टे ने बताया कि कमेटी का गठन जल्द पूरा होगा और जांच पारदर्शी होगी. लेकिन विपक्ष का मानना है कि यह कदम शरद पवार की साख को ठेस पहुंचाने का प्रयास है. रोहित पवार ने कहा कि वीएसआई ने दशकों से चीनी उद्योग को मजबूत किया है. अगर सरकार को पारदर्शिता चाहिए, तो सभी सहकारी संस्थाओं की जांच होनी चाहिए, न कि चुनिंदा.
महाराष्ट्र में सहकारिता क्षेत्र लंबे समय से राजनीतिक प्रभाव का केंद्र रहा है. पवार परिवार का चीनी सहकारिता पर मजबूत पकड़ है और बारामती में कई मिलें उनके समर्थकों के नियंत्रण में हैं. ऑडिट का फैसला ऐसे समय आया है जब राज्य में सत्ता गठबंधन और विपक्ष के बीच तनाव चरम पर है. फडणवीस ने स्पष्ट किया कि अभी केवल जानकारी मांगी गई है, लेकिन विपक्ष इसे जांच की शुरुआत मान रहा है. आने वाले दिनों में कमेटी की रिपोर्ट इस विवाद को और गहरा सकती है या शांत कर सकती है. फिलहाल, वीएसआई का मामला महाराष्ट्र की राजनीति में नया तूफान बनता दिख रहा है.
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बैठक का मुख्य उद्देश्य स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं के साथ-साथ पदवीधर (Graduates) और शिक्षक मतदार संघों के चुनावों को ध्यान में रखते हुए संगठनात्मक मजबूती और आगामी रणनीति तय करना था. मीटिंग में पार्टी के पदवीधर और शिक्षक सेल के पदाधिकारियों से सुझाव लेकर चुनावी तैयारियों की समीक्षा की गई.
50 फीसदी से ज्यादा युवा लड़ेंगे चुनाव
इस बीच, इस बैठक में एक बड़ा फैसला लिया गया है. आगामी स्थानीय निकाय चुनावों में, कुल सीटों में से 50 प्रतिशत सीटों पर उन युवाओं को चुनाव लड़ने का मौका दिया जाएगा जिनकी कोई राजनीतिक पृष्ठभूमि नहीं है. शरद पवार ने इस बैठक में अपने पदाधिकारियों को ज्यादा से ज्यादा युवाओं को कैसे मौका दिया जा सकता, इस गौर करने का निर्देश दिया. बैठक में यह भी बताया गया है कि आगामी स्थानीय निकाय चुनावों में गठबंधन कैसे बनाया जाए, इस पर चर्चा के लिए कल महाविकास अघाड़ी नेताओं की एक अहम बैठक होगी.
अजित पवार गुट के विधायक के बयान पर भी दी प्रतिक्रिया
शरद पवार ने इस बैठक में इस बात पर भी प्रतिक्रिया दी है कि एनसीपी अजित पवार गुट के विधायक संग्राम जगताप के विवादित बयान से माहौल गरमा गया है. उन्होंने कहा कि एक समय में एक विधायक हमारे साथ थे, लेकिन अब उनकी हर बात मीडिया में आ रही है, इसलिए हम सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ना नहीं चाहते, बनाए रखना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि सरकार में बैठे कुछ नेता इस समय विवादित बोल रहे हैं, लेकिन अपनी पार्टी के नेता से उन्होंने प्रेम की भाषा प्रयोग करने की हिदायत भी दी है.
मीटिंग में शामिल रहे ये नेता
इस बैठक में पार्टी की राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष और सांसद सुप्रिया सुले, प्रदेश अध्यक्ष और विधायक शशिकांत शिंदे, विधायक और विधानमंडल में पार्टी के नेता जयंत पाटिल, पूर्व मंत्री राजेश टोपे,बालासाहेब पाटिल, पुणे, सातारा, कोल्हापुर, सांगली, सोलापुर, छत्रपति संभाजी नगर, जालना, हिंगोली, परभणी, नांदेड़, बीड, धाराशिव और लातूर जिलों के सांसद और विधायक मौजूद थे.
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संजय राउत ने कहा, "महाराष्ट्र का राजनीतिक परिदृश्य बहुत अजीब दिशा में जा रहा है। कौन किसको धोखा देता है, कौन किसका समर्थन करता है, यह सब देखने वाली बात है। एकनाथ शिंदे ने महाराष्ट्र सरकार गिराई, विश्वासघात किया। ऐसे व्यक्ति को शरद पवार पुरस्कार दे रहे हैं, यह महाराष्ट्र के गौरव को ठेस पहुंचाने वाला है।"
उन्होंने आगे कहा, "महाराष्ट्र की जनता के सामने हम अब किस मुंह से जाएंगे? राजनीति में दोस्त और दुश्मन नहीं होते, यह मान्यता सही हो सकती है। लेकिन महाराष्ट्र के खिलाफ काम करने वाले लोगों को इस तरह से सम्मान देना, यह राज्य की पहचान के लिए हानिकारक है। यह हमारी भावना है, शायद पवार साहब की भावना अलग हो सकती हैय़ लेकिन यह महाराष्ट्र के लोगों को स्वीकार्य नहीं है।"
संजय राउत ने शरद पवार के राजनीतिक फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा, "जिन्होंने शिवसेना को तोड़ा, उन्हें सम्मान देना यह हमारे लिए दुखद है। दिल्ली का राजनीतिक माहौल कुछ और हो सकता है, लेकिन इस तरह की बात हम सहन नहीं कर सकते। कुछ चीजें राजनीति में अनावश्यक होती हैं।"
अंत में संजय राउत ने शरद पवार के साहित्य सम्मेलन में भूमिका पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा, "दिल्ली में हो रहा साहित्य सम्मेलन राजनीति से प्रेरित है, साहित्य से उसका कोई संबंध नहीं है। यह भाजपा का खेल है। क्या आपने मराठी माणुसों की सेवा की है? महाराष्ट्र की पीठ पर पांव रखने वालों का सम्मान करना गलत है।"
]]>दिल्ली विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी की नूराकुश्ती चल रही है। इंडिया ब्लॉक के अस्तित्व को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि क्या विधानसभा चुनावों में इंडिया गठबंधन खत्म हो गया है? इस सवालों का जवाब इंडिया गठबंधन के दिग्गज नेता शरद पवार ने दे दिया है। मुंबई के एक प्रेस कॉन्फ्रेंस उन्होंने कहा कि इंडिया गठबंधन सिर्फ राष्ट्रीय स्तर के चुनावों के लिए बना है। विधानसभा चुनाव में इसका कोई मतलब नहीं है। उन्होंने कहा कि लोकल चुनाव और राज्य के चुनावों के लिए कभी इंडिया गठबंधन में चर्चा नहीं हुई। बता दें कि किसी कारणवश मध्यावधि चुनाव नहीं हुए तो लोकसभा चुनाव पांच साल बाद 2029 में ही होंगे।
आरएसएस की तारीफ पर दी सफाई
मंगलवार को एनसीपी-एसपी के नेता शरद पवार ने बड़ा बयान दिया। उन्होंने इंडिया गठबंधन में विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इंडिया गठबंधन में लोकल और स्टेट लेवल के चुनाव पर कभी कोई चर्चा नहीं हुई। उन्होंने आरएसएस की तारीफ पर भी सफाई दी। पवार ने कहा कि उन्होंने आरएसएस की विचारधारा का समर्थन नहीं किया बल्कि कार्यकर्ताओं की मेहनत की प्रशंसा की। उन्होंने कहा था कि जिस तरह आरएसएस कार्यकर्ता अपने विचारधारा पर दृढ़ रहते हैं, वैसे कार्यकर्ताओं की जरूरत उनकी पार्टी को भी है।
उमर अब्दुल्ला और संजय राउत ने पूछे थे सवाल
बता दें कि इंडिया गठबंधन को लेकर शरद पवार का बयान उस समय आया है कि जब जम्मू-कश्मीर के सीएम उमर अब्दुल्ला ने मीटिंग नहीं बुलाने पर ऐतराज जताया था। अब्दुल्ला ने कहा था कि विधानसभा चुनावों के लिए चर्चा नहीं हो रही है। न ही गठबंधन का एजेंडा और नेतृत्व पर बात हो रही है। अगर गठबंधन खत्म हो गया है तो स्पष्ट कर देना चाहिए। शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत ने भी संवाद नहीं करने के लिए कांग्रेस की आलोचना की थी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस गठबंधन की बड़ी पार्टी है और उसे सहयोगी दलों से बातचीत करना चाहिए। इससे पहले टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने भी इंडिया गठबंधन के नेतृत्व की दावेदारी की थी और उन्हें शरद पवार के साथ लालू यादव का समर्थन हासिल था।
पांच साल तक नहीं होंगे नेशनल लेवल के चुनाव
अब शरद पवार के इस बयान से माना जा रहा है कि 2023 में बना विपक्षी दलों के इंडिया गठबंधन होने का ऐलान हो गया है क्योंकि नेशनल लेवल पर चुनाव अब पांच साल बाद ही होंगे। दिल्ली चुनाव के बाद बिहार, फिर पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। अगर शरद पवार के बयान को सच माना जाए तो बिहार में लालू यादव और पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी चुनावों में गठबंधन का फैसला करेंगी। लोकसभा चुनाव में ममता बनर्जी अकेले ही बंगाल की सभी सीटों पर चुनाव लड़ी थी और बड़ी जीत हासिल की थी।
उनका कहना था कि उम्मीदवार का फैसला श्रीगोंदा में होना चाहिए। इसका निर्णय मुंबई से होना गलत है। इसके बाद वह निर्दलीय ही उतरे थे और यहां मुकाबला त्रिकोणीय हो गया था। इसके चलते भाजपा कैंडिडेट को जीत मिली और राहुल जगताप निर्दलीय ही दूसरे नंबर पर आए थे। इससे समझा जा सकता है कि राहुल जगताप का अपने इलाके में निजी तौर पर ही कितना जनाधार है। अब खबर है कि वह अजित पवार के साथ ही जाने की तैयारी में हैं। राहुल जगताप को शरद पवार के करीबी नेताओं में शुमार किया जाता रहा है। ऐसे में चुनाव में बागी होकर लड़ना और अब अजित पवार के खेमे में जाना मराठा छत्रप के लिए करारा झटका है।
बता दें कि चुनाव नतीजों ने शरद पवार की पार्टी को बड़ा झटका दिया है। महज 10 सीटों पर शरद पवार के कैंडिडेट जीते हैं, जबकि महाविकास अघाड़ी की कुल सीटें भी 50 से कम ही हैं। वहीं अजित पवार की एनसीपी को अकेले ही 41 सीटों पर जीत मिली है। भाजपा ने तो 90 फीसदी के स्ट्राइक रेट के साथ 148 सीटों पर चुनाव लड़कर 132 पर जीत पाई है। इस लिहाज से देखें तो महाराष्ट्र चुनाव की सबसे बड़ी लूजर एनसीपी-शरद पवार ही रही है। इतनी कम सीटें महाराष्ट्र चुनाव के इतिहास में शरद पवार की पार्टी को कभी नहीं मिली हैं।
]]>यही नहीं सूत्रों का कहना है कि शरद पवार ने पार्टी के कई सीनियर नेताओं को जिम्मेदारी दी है कि वे निर्दलियों के संपर्क में रहें और यदि टाइट फाइट के हालात रहें तो उन्हें साथ लाया जाए। मीटिंग में शरद पवार ने भरोसा जताया कि महाविकास अघाड़ी को 157 सीटें मिल जाएंगी और आसानी से सरकार बन सकती है। वहीं मौजूदा सीएम एकनाथ शिंदे भी ऐक्टिव हैं। उन्होंने अपने कई नेताओं को आदेश दिया है कि निर्दलीय और वंचित बहुजन अघाड़ी जैसे छोटे दलों के संपर्क में रहें। उनका कहना है कि खासतौर पर उन बागी नेताओं से संपर्क में रहें, जो समान विचारधारा वाले हैं, लेकिन टिकट कटने के चलते निर्दलीय ही लड़ गए थे।
यही नहीं भाजपा की सक्रियता भी बढ़ गई है। भाजपा के नेता चाहते हैं कि इस बार सीएम उनका ही रहे और यदि महायुति जीता तो फिर एकनाथ शिंदे की जगह देवेंद्र फडणवीस को मौका मिलना चाहिए। ऐसी स्थिति में महायुति के अंदर भी एक होड़ है कि किसके पास ज्यादा समर्थन रहेगा। खबर है कि देवेंद्र फडणवीस पूरे राज्य के ही नेताओं के संपर्क में हैं। पालघर, पश्चिम महाराष्ट्र, विदर्भ, मराठवाड़ा, उत्तर महाराष्ट्र के नेताओं के वह लगातार संपर्क में बने हुए हैं।
भाजपा को अपने दम पर 100 सीटों पर जीत का भरोसा
भाजपा सूत्रों का कहना है कि पार्टी को अपने ही दम पर 100 सीटों की उम्मीद है। ऐसे में कुछ निर्दलीय, मनसे, वंचित बहुजन अघाड़ी जैसे छोटे दलों के समर्थन से वह अपनी ताकत बढ़ाने पर फोकस करेगी। भाजपा नेताओं की रणनीति है कि अपनी सीटों के अलावा निर्दलीय और छोटे दलों के समर्थन से ही करीब 125 सीटों का जुगाड़ कर लिया जाए। ऐसी स्थिति में एकनाथ शिंदे पर निर्भरता कम होगी और अपना सीएम बनाने के लिए दावेदारी की जा सकेगी।
शरद पवार का ऐलान- नई पीढ़ी को सौंपेंगे जिम्मेदारी
पवार ने जनता को संबोधित करते हुए कहा, "मैं अब लोकसभा का चुनाव नहीं लड़ूंगा। अब तक मैंने 14 चुनाव लड़े हैं, और आप लोगों ने हर बार मुझे विजयी बनाया। अब समय आ गया है कि नई पीढ़ी को मौका दिया जाए। मैं सामाजिक कार्य जारी रखूंगा, खासकर ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों के लिए। इस काम के लिए मुझे किसी चुनाव में जीतने की जरूरत नहीं है।" उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि 2026 में राज्यसभा का कार्यकाल समाप्त होने के बाद वह सोचेंगे कि क्या उन्हें पद से अलग होना चाहिए।
शरद पवार का केंद्र सरकार पर करारा प्रहार
चुनावी सभा को संबोधित करते हुए शरद पवार ने इस मौके पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि कई बड़े प्रोजेक्ट्स, जो महाराष्ट्र में आने चाहिए थे उन्हें गुजरात शिफ्ट कर दिया गया। उन्होंने कहा, "जब मैं सत्ता में था, तो मैंने पुणे के विकास पर जोर दिया। पर आज की सरकार सिर्फ एक राज्य के लिए काम कर रही है। टाटा एयरबस का कारखाना जो नागपुर में लगना था, उसे गुजरात भेज दिया गया। इसी तरह वेदांता-फॉक्सकॉन का सेमीकंडक्टर प्लांट भी गुजरात चला गया। अगर आप केवल एक राज्य के लिए काम करेंगे, तो प्रधानमंत्री बनने का क्या मतलब है?"
परिवार में फिर जंग का गवाह बनेगी बारामती की सीट
बारामती में पवार परिवार के बीच एक बार फिर चुनावी मुकाबला देखने को मिलेगा। इस बार विधानसभा चुनावों में अजित पवार और उनके भतीजे योगेंद्र पवार आमने-सामने होंगे। इससे पहले लोकसभा चुनाव में अजित पवार ने अपनी पत्नी सुनेत्रा पवार को अपनी ननद सुप्रिया सुले के खिलाफ खड़ा किया था। बारामती की सीट पर चुनावी तैयारियां तेज हो गई हैं, और यह सीट एक बार फिर पवार परिवार के भीतर ही संघर्ष का गवाह बनेगी।