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खगोल वैज्ञानिक और आकाशीय घटनाओं में दिलचस्पी रखने वाले अगस्त 2027 का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, जब इस सदी का सबसे लंबा सूर्यग्रहण देखा जा सकेगा। लेकिन उससे पहले इसी साल पूर्ण सूर्यग्रहण की घटना होने जा रही है, जब दिन के कुछ समय के लिए सूरज चंद्रमा के पीछे पूरी तरह से छिप जाएगा। इस दुर्लभ खगोलीय संयोग के चलते दिन में अचानक कुछ समय के लिए अंधेरा छा जाएगा।
सूर्यग्रहण उस खगोलीय घटना को कहते है, जब चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी के बीच में आ जाता है। इसके चलते सूर्य के कोरोना का पूरा या कुछ हिस्सा चंद्रमा के पीछे छिप जाता है, जिससे सूर्य को रोशनी बाधित हो जाती है। पूर्ण सूर्यग्रहण तब होता है, जब चंद्रमा, सूर्य को पूरी तरह से ढंक लेता है।
स्पेन में एक सदी बाद दिखाई देगा
साल 2026 का पूर्ण सूर्यग्रहण यूरोप के लिए बेहद खास है। यह एक सदी से भी ज्यादा समय में स्पेन की मुख्य भूमि से दिखाई देने वाला पहला सूर्यग्रहण होगा। उत्तरी स्पेन, ग्रीनलैंड, आइसलैंड और पुर्तगाल के कुछ हिस्सों में लोग पूर्ण ग्रहण का अनुभव करेंगे। यहां सूरज पूरी तरह से छिप जाने के कारण कुछ देर के लिए आसमान में अंधेरा छा जाएगा।
ग्रीनलैंड में इसे 2 मिनट से थोड़ा ज्यादा समय तक देखा जा सकेगा।
उत्तरी स्पेन में सिर्फ 20 सेकंड तक ही यह दिखाई देगा।
इन इलाकों में आंशिक दिखेगा ग्रहण
यूरोप, अफ्रीका और उत्तरी अमेरिका के बड़े इलाकों में आंशिक ग्रहण दिखाई देगा, जहां सूरज का कुछ हिस्सा ही चंद्रमा के पीछे छिपेगा। हालांकि, इसकी छाया भारतीय उपमहाद्वीप से होकर नहीं गुजरेगी, जिसका मतलब है कि भारत में रहने वाले लोग इसे नहीं देख सकेंगे।
एक साल बाद सदी का सबसे लंबा सूर्यग्रहण
अगस्त 2026 के सूर्यग्रहण के ठीक एक साल बाद 2 अगस्त 2027 को दुनिया 21वीं सदी के सबसे लंबे सूर्यग्रहण का गवाह बनेगी। यह इस सदी में धरती से देखा जाने वाला सबसे लंबा सूर्यग्रहण होगा जो 6 मिनट 23 सेकंड तक चलेगा। इस दौरान दिन के दौरान लगभग अंधेरा हो जाएगा। यह स्पेन से शुरू होगा और अफ्रीका के मोरक्को, अल्जीरिया, मिस्र, सूडान होते हुए मध्य पूर्व तक देखा जाएगा। मिस्र के लक्सर में इसका चरम रूप दिखाई देगा, जहां इसकी अवधि 6.19 सेकंड होगी, जो पूर्णता से थोड़ी ही कम है।
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सूर्यग्रहण उस खगोलीय घटना को कहते है, जब चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी के बीच में आ जाता है। इसके चलते सूर्य के कोरोना का पूरा या कुछ हिस्सा चंद्रमा के पीछे छिप जाता है, जिससे सूर्य को रोशनी बाधित हो जाती है। पूर्ण सूर्यग्रहण तब होता है, जब चंद्रमा, सूर्य को पूरी तरह से ढंक लेता है।
स्पेन में एक सदी बाद दिखाई देगा
साल 2026 का पूर्ण सूर्यग्रहण यूरोप के लिए बेहद खास है। यह एक सदी से भी ज्यादा समय में स्पेन की मुख्य भूमि से दिखाई देने वाला पहला सूर्यग्रहण होगा। उत्तरी स्पेन, ग्रीनलैंड, आइसलैंड और पुर्तगाल के कुछ हिस्सों में लोग पूर्ण ग्रहण का अनुभव करेंगे। यहां सूरज पूरी तरह से छिप जाने के कारण कुछ देर के लिए आसमान में अंधेरा छा जाएगा।
ग्रीनलैंड में इसे 2 मिनट से थोड़ा ज्यादा समय तक देखा जा सकेगा।
उत्तरी स्पेन में सिर्फ 20 सेकंड तक ही यह दिखाई देगा।
इन इलाकों में आंशिक दिखेगा ग्रहण
यूरोप, अफ्रीका और उत्तरी अमेरिका के बड़े इलाकों में आंशिक ग्रहण दिखाई देगा, जहां सूरज का कुछ हिस्सा ही चंद्रमा के पीछे छिपेगा। हालांकि, इसकी छाया भारतीय उपमहाद्वीप से होकर नहीं गुजरेगी, जिसका मतलब है कि भारत में रहने वाले लोग इसे नहीं देख सकेंगे।
एक साल बाद सदी का सबसे लंबा सूर्यग्रहण
अगस्त 2026 के सूर्यग्रहण के ठीक एक साल बाद 2 अगस्त 2027 को दुनिया 21वीं सदी के सबसे लंबे सूर्यग्रहण का गवाह बनेगी। यह इस सदी में धरती से देखा जाने वाला सबसे लंबा सूर्यग्रहण होगा जो 6 मिनट 23 सेकंड तक चलेगा। इस दौरान दिन के दौरान लगभग अंधेरा हो जाएगा। यह स्पेन से शुरू होगा और अफ्रीका के मोरक्को, अल्जीरिया, मिस्र, सूडान होते हुए मध्य पूर्व तक देखा जाएगा। मिस्र के लक्सर में इसका चरम रूप दिखाई देगा, जहां इसकी अवधि 6.19 सेकंड होगी, जो पूर्णता से थोड़ी ही कम है।
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साल 2026 में होने वाले खगोलीय घटनाक्रमों में सूर्य ग्रहण भी खास माना जा रहा है. हिंदू धर्म में सूर्य ग्रहण का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व बताया गया है, इसलिए इस दौरान कई नियमों का पालन करने की परंपरा भी है. ग्रहण के समय पूजा-पाठ, खानपान और दैनिक कार्यों को लेकर विशेष सावधानियां बरती जाती हैं. ऐसे में लोग यह जानने के लिए उत्सुक रहते हैं कि साल का अगला सूर्य ग्रहण कब लगेगा, उसका प्रभाव भारत में दिखाई देगा या नहीं. दरअसल, साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी को लगा था, लेकिन यह भारत में दिखाई नहीं दिया. अब लोगों की नजर साल के दूसरे सूर्य ग्रहण पर है. आइए जानते हैं यह सूर्य ग्रहण कब लगेगा, इसका समय क्या रहेगा और क्या इसका सूतक काल भारत में मान्य होगा।
सूर्य ग्रहण 2026: तारीख और समय
साल 2026 का दूसरा सूर्य ग्रहण 12 अगस्त को लगेगा. इसी दिन हरियाली अमावस्या भी पड़ रही है, जिससे इस दिन का धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है. यह ग्रहण रात 09 बजकर 04 मिनट पर शुरू होगा. यह 13 अगस्त की सुबह 04 बजकर 25 मिनट पर समाप्त होगा. यह सदी का दूसरा लंबी अवधि तक दिखने वाला सूर्य ग्रहण है. हालांकि यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा।
सूर्य ग्रहण के दौरान क्या करें
सूतक काल के दौरान कोई भी नया और शुभ कार्य शुरू न करें, जैसे शादी, मुंडन या गृह प्रवेश.
ग्रहण के समय देवी-देवताओं की मूर्तियों को स्पर्श न करें और बाहरी पूजा-पाठ से बचें.
इस दौरान मन ही मन गायत्री मंत्र, महामृत्युंजय मंत्र और सूर्य मंत्र का जप करें.
ग्रहण समाप्त होने के बाद पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें.
इसके बाद घर और मंदिर की सफाई करें.
देसी घी का दीपक जलाकर भगवान की पूजा-अर्चना करें.
मंदिर या जरूरतमंद लोगों को अन्न, धन या अन्य वस्तुओं का दान करें.
सूतक काल शुरू होने से पहले खाने-पीने की चीजों में तुलसी के पत्ते डालकर रखें.
सूर्य ग्रहण में क्या न करें
ग्रहण के दौरान पूजा-पाठ न करें.
भगवान की मूर्तियों को स्पर्श न करें.
भोजन का सेवन न करें.
चाकू, सुई जैसी धारदार वस्तुओं का उपयोग न करें.
सगाई, विवाह जैसे शुभ कार्य न करें.
तुलसी के पत्ते न तोड़ें.
किसी से वाद-विवाद न करें.
किसी के बारे में नकारात्मक विचार न रखें.
सूर्य ग्रहण के समय करें इन मंत्रों का जप
ॐ घृणिं सूर्य्य: आदित्य:
ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय सहस्रकिरणराय मनोवांछित फलम् देहि देहि स्वाहा।।
ॐ ऐहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजो राशे जगत्पते,
अनुकंपयेमां भक्त्या, गृहाणार्घय दिवाकर:।
ॐ ह्रीं घृणिः सूर्य आदित्यः क्लीं ॐ ।
ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय नमः ।
सूर्य ग्रहण के दौरान करें ये उपाय
ग्रहण के समय भगवान सूर्य का ध्यान करते हुए सूर्य मंत्र या गायत्री मंत्र का जप करना शुभ माना जाता है. ग्रहण समाप्त होने के बाद गंगाजल मिलाकर स्नान करें. पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव करें. ग्रहण के बाद देसी घी का दीपक जलाकर भगवान सूर्य की पूजा करें.जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र या धन का दान करना पुण्यदायी माना जाता है.ग्रहण के समय तांबे के पात्र में जल भरकर उसमें लाल फूल डालें .ग्रहण समाप्त होने के बाद सूर्य देव को अर्घ्य दें.घर के मंदिर की साफ-सफाई करें .भगवान को ताजे फूल अर्पित करें. ग्रहण के बाद मीठा भोजन बनाकर प्रसाद के रूप में बांटना भी शुभ माना जाता है.नकारात्मक ऊर्जा से बचने के लिए ग्रहण के दौरान महामृत्युंजय मंत्र का जप करना भी लाभकारी माना जाता है.
राशियों पर ग्रहण का प्रभाव
मेष राशि
यह ग्रहण आपके सामाजिक जीवन और बड़े सपनों को प्रभावित कर सकता है. देखा जाए तो आप अपनी दोस्ती और काम-काज के रिश्तों को नए नजरिए से देख सकते हैं. पैसों को लेकर थोड़ी अस्थिरता महसूस हो सकती है, इसलिए निवेश या खर्च का कोई भी फैसला जल्दबाजी में न लें.
वृषभ राशि
करियर को लेकर यह समय थोड़ा संभलकर चलने का है. हो सकता है ऑफिस में काम का दबाव बढ़े या मेहनत का फल मिलने में थोड़ी देरी हो. अधिकारियों से उलझने के बजाय धैर्य रखें. ध्यान रहे, धीरे-धीरे ही सही लेकिन आपकी निरंतरता आपको बड़ी सफलता दिलाएगी.
मिथुन राशि
आपकी पढ़ाई, लंबी यात्राओं और भविष्य की सोच में कुछ बदलाव आ सकते हैं. मुमकिन है कि बनी-बनाई योजनाओं में फेरबदल करना पड़े. विशेष रूप से, इस दौरान आपकी आध्यात्मिक रुचि बढ़ेगी, जो आपको खुद को बेहतर तरीके से समझने में मदद करेगी.
कर्क राशि
ग्रहण के प्रभाव से आपकी भावनाएं काफी गहरी हो सकती हैं. पैसों के लेन-देन, लोन या पैतृक संपत्ति से जुड़े मामलों में सावधानी बरतें. बेमतलब की चिंताओं में न उलझें और मुश्किल समय में परिवार के साथ पर भरोसा रखें.
सिंह राशि
आपके रिश्तों और पार्टनरशिप के लिए यह समय धैर्य की परीक्षा जैसा है. अगर बातचीत में अहंकार आया, तो गलतफहमियां बढ़ सकती हैं. दूसरों की बातों को ध्यान से सुनें और शांति से जवाब दें; यही आपकी समझदारी होगी.
कन्या राशि
अपनी सेहत और रोजमर्रा के काम पर ध्यान दें. काम के बोझ को खुद पर हावी न होने दें, नहीं तो तनाव बढ़ सकता है. अनुशासन बनाए रखें और काम के साथ-साथ आराम के लिए भी वक्त निकालें. सेहत को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है.
तुला राशि
आपका मन रचनात्मक कामों में लगेगा, लेकिन भावनात्मक रूप से ध्यान भटक सकता है. प्रेम संबंधों में एक-दूसरे से बहुत ज्यादा उम्मीदें न पालें. अपनी बात को साफ और स्पष्ट रखें ताकि किसी भी तरह के भ्रम की गुंजाइश न रहे.
वृश्चिक राशि
यह समय आपके घर और परिवार के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. घर की चर्चाओं में धैर्य बनाए रखें, क्योंकि पुरानी बातें फिर से उभर सकती हैं. कड़वी भाषा का प्रयोग करने से बचें और घर के माहौल को शांत रखने की कोशिश करें.
धनु राशि
बातचीत करने और नई चीजें सीखने के मामले में सावधानी जरूरी है. किसी को कुछ भी बोलने से पहले सोच लें ताकि गलतफहमी न हो. छोटे भाई-बहनों या पड़ोसियों के साथ व्यवहार में नरमी बरतें और सकारात्मक रहें.
मकर राशि
पैसों के मामले में अनुशासन बनाए रखना ही आपके लिए सबसे बड़ा मंत्र है. फिजूलखर्ची या रिस्की निवेश से फिलहाल दूर रहें. यह ग्रहण आपको अपनी बचत और खर्च करने के तरीकों को सुधारने का एक अच्छा मौका दे रहा है.
कुंभ राशि
यह ग्रहण आपकी ही राशि में है इसलिए यह समय ‘खुद को पहचानने’ का है. आप अपने स्वास्थ्य, करियर और रिश्तों को लेकर दोबारा सोच सकते हैं. मन थोड़ा अशांत रह सकता है, इसलिए फिलहाल कोई बड़ा बदलाव न करें और खुद को समय दें.
मीन राशि
आपका झुकाव अध्यात्म की ओर ज्यादा रहेगा. आप अकेलापन महसूस कर सकते हैं, लेकिन इसे नकारात्मक न होने दें. यह पुराने जख्मों को भरने और प्रार्थना व ध्यान के जरिए खुद को शांत करने का बहुत अच्छा समय है.
ग्रहण के दौरान नकारात्मक प्रभाव कम करने के उपाय
शास्त्रों में ग्रहण के प्रभाव को संतुलित करने के लिए कुछ विशेष मार्गदर्शन दिए गए हैं, जो सभी जातकों के लिए लाभकारी हैं:
मंत्रों का आलंबन: स्पष्टता और सुरक्षा के लिए गायत्री मंत्र या महामृत्युंजय मंत्र का निरंतर जप करें.
दान और सेवा: चावल, दूध, तिल, पीले वस्त्र या अन्य वस्तुओं का दान करना सकारात्मकता लाता है.
आध्यात्मिक साधना: ध्यान, मौन और प्रार्थना को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं.
संयम: अनावश्यक विवादों से बचें और मानसिक शांति बनाए रखने का प्रयास करें.
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ये सूर्य ग्रहण भारत में नजर नहीं आने वाला है और न ही इसका सूतक काल भारत में माना जाएगा, लेकिन लोगों के मन में सवाल है कि ये रिंग ऑफ फायर क्या है और ये सूर्य ग्रहण विशेष क्यों हैं?
क्या है रिंग ऑफ फायर?
NASA के अनुसार, जब धरती से चंद्रमा की दूरी सबसे अधिक होती है और उस दौरान सूर्य ग्रहण लगता है, तो चंद्रमा दूर होने की वजह से सूर्य को पूरी तरह से ढक पाने में असफल रहता है. इसलिए आकार में छोटा नजर आता है. ऐसे में सूर्य का बीच वाला भाग काला दिखता है और उसके चारों ओर रौशनी की पतली चमकदार घेरा बन जाता है. ये चमकदार घेरा आग की अंगूठी जैसा नजर आता है. इसे ही रिंग ऑफ फायर कहते हैं.
दूसरा, वलयाकार या कुंडलाकार सूर्य ग्रहण के समय सूर्य, चंद्रमा और धरती एक सीध में होते हैं और चंद्रमा सूर्य के मध्य भाग को ढक लेता है. इस स्थिति में सूर्य एक रिंग जैसा दिखने लगता है.
सूर्य ग्रहण क्यों है विशेष?
साल 2026 का ये सूर्य ग्रहण इसलिए विशेष माना जा रहा है क्योंकि ये शनि देव की राशि कुंभ में और धनिष्ठा नक्षत्र में लगने वाला है. सूर्य के साथ-साथ इस राशि में राहु, बुध, शुक्र और चंद्रमा भी मौजूद रहने वाले हैं. ज्योतिष शास्त्र में बताया गया है कि सूर्य और राहु के एक साथ किसी राशि में रहने पर ग्रहण योग निर्मित होता है. कुंभ राशि में राहु और सूर्य की युति को परंपरागत तौर पर अशुभ माना जाता है.
कितने बजे लगेगा सूर्य ग्रहण
भारतीय समय के अनुसार, सूर्य ग्रहण 17 फरवरी को दोपहर 3 बजकर 26 मिनट पर लगेगा और शाम 7 बजकर 57 मिनट पर ये खत्म होगा. ये सूर्य ग्रहण कुल 04 घंटे 32 मिनट तक रहेगा.
Surya Grahan 2026: साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण आज से ठीक एक महीने बाद यानी 17 फरवरी को लगने वाला है. यह सूर्य ग्रहण धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में लगने वाला है. ज्योतिषविदों का कहना है कि यह एक कंकण सूर्य ग्रहण होगा. इसे वलयाकार सूर्य ग्रहण भी कहा जाता है. इस तरह के ग्रहण में चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के ठीक बीच में आ जाता है, लेकिन वो सूर्य को पूरी तरह नहीं ढक पाता है, जिससे सूर्य एक चमकदार कंगन की तरह प्रतीत होने लगता है. खगोलविदों की भाषा में इसे रिंग ऑफ फायर भी कहते हैं. आइए जानते हैं कि इस ग्रहण का भारत पर क्या प्रभाव रहने वाला है.
कितने बजे लगेगा सूर्य ग्रहण?
साल का यह पहला सूर्य ग्रहण भारतीय समयानुसार, 17 फरवरी को दोपहर 03.56 बजे से लेकर शाम 07.57 बजे तक रहने वाला है.
क्या भारत में दिखेगा सूर्य ग्रहण?
साल का यह पहला सूर्य ग्रहण भारत में दृश्यमान नहीं होगा. इसलिए भारतवर्ष पर इसका कोई खास प्रभाव भी नहीं रहने वाला है
क्या भारत में लगेगा सूतक काल?
सूर्य ग्रहण से ठीक 12 घंटे पहले सूतक काल मान्य हो जाता है. इस दौरान पूजा-पाठ और खान-पान जैसी चीजें वर्जित होती हैं. इतना ही नहीं, सूतक काल में मंदिरों के कपाट भी बंद रहते हैं और भगवान की प्रतिमा का स्पर्श वर्जित माना गया है. हालांकि सूतक तभी मान्य होता है, जब ग्रहण भारत में दृश्यमान हो. चूंकि आगामी सूर्य ग्रहण भारत में नहीं दिख रहा, इसलिए इसका सूतक काल भी यहां मान्य नहीं होगा.
कहां-कहां दिखेगा सूर्य ग्रहण?
यह सूर्य ग्रहण दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण अर्जेंटीना और अंटार्कटिका के क्षेत्रों में देखा जा सकेगा. यह वलयाकार सूर्य ग्रहण होगा, जिसमें सूर्य के चारों ओर आग की अंगूठी जैसी आकृति दिखाई देगी.
2026 के तीन अन्य ग्रहण कब कब लगेंगे?
दूसरा सूर्य ग्रहण: 12 अगस्त
वर्ष का दूसरा सूर्य ग्रहण 12 अगस्त 2026, बुधवार को लगेगा. यह पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा, जिसमें सूर्य पूरी तरह ढक जाएगा. भारत में यह दृश्य नहीं होगा, क्योंकि उस समय यहां रात्रि होगी. यह ग्रहण आर्कटिक, ग्रीनलैंड, आइसलैंड, स्पेन, रूस और पुर्तगाल में देखा जाएगा.
पहला चंद्र ग्रहण: 3 मार्च
2026 का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च, मंगलवार को होली के संयोग में लगने वाला है. यह ग्रहण भारत सहित एशिया के कई देशों में दिखाई देगा. इस ग्रहण का सूतक काल भी भारत में मान्य होगा. यह एक खंडग्रास चंद्र ग्रहण होगा, जिसे ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका समेत के क्षेत्रों में भी देखा जा सकेगा.
दूसरा चंद्र ग्रहण: 28 अगस्त
साल 2026 का दूसरा चंद्र ग्रहण 28 अगस्त को पड़ेगा. यह भारत में दृश्य नहीं होगा, लेकिन उत्तर और दक्षिण अमेरिका, यूरोप और अफ्रीका के कुछ हिस्सों में दिखाई देगा.
ग्रहण लगना एक विशेष खगोलीय घटना मानी जाती है। जिस समय में चंद्रमा सूर्य को अपनी रोशनी से पूरी तरह से ढक लेता है तो उस समय में सूर्य ग्रहण लगता है। साल 2025 में कुल चार ग्रहण लगेंगे। जिसमें से दो चंद्र ग्रहण और दो सूर्य ग्रहण होंगे। ज्योतिष शास्त्र में सूर्य ग्रहण के समय में बहुत सारे काम करने की मनाही होती है। 2 अक्तूबर 2024 को साल का आखिरी सूर्य ग्रहण था। अब साल 2025 आने वाला है। ऐसे में हम आपको बताने जा रहे हैं कि साल 2025 में सूर्य ग्रहण कब लगेगा और कितने सूर्य ग्रहण लगेंगे। आइए जानें कब लगेगा सूर्य ग्रहण।
साल 2025 में सूर्य ग्रहण कब-कब लगेगा
साल 2025 में कब है पहला सूर्य ग्रहण
साल 2025 का पहला सूर्य ग्रहण मार्च के महीने में लगेगा। ये ग्रहण 29 मार्च 2025 को लगेगा। ये ग्रहण एक आंशिक सूर्य ग्रहण लगेगा। भारत के समय के अनुसार ये ग्रहण 2:20 मिनट पर शुरू होगा और 6 बजकर 13 मिनट पर लगेगा।
साल 2025 का पहला सूर्य ग्रहण भारत में दिखेगा या नहीं
साल 2025 का पहला सूर्य ग्रहण मार्च में लगने जा रहा है। ये ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। ऐसे में भारत में सूतक काल भी मान्य नहीं होगा।
साल 2025 का पहला सूर्य ग्रहण कहां- कहा दिखाई देगा
मार्च 2025 में पड़ने वाला सूर्य ग्रहण साल का पहला सूर्य ग्रहण होगा। ये ग्रहण फ्रीका, नॉर्थ अमेरिका, एशिया अटलांटिक और आर्कटिक महासागर में दिखाई देगा।
साल 2025 का दूसरा सूर्य ग्रहण कब लगेगा
साल 2025 का दूसरा सूर्य ग्रहण 21 सितंबर 2025 को लगेगा। ये ग्रहण भी आंशिक सूर्य ग्रहण होगा।
साल 2025 का दूसरा सूर्य ग्रहण भारत में दिखेगा या नहीं
साल 2025 के सितंबर महीने का सूर्य ग्रहण साल का दूसरा और आखिरी सूर्य ग्रहण होगा। इस ग्रहण का भी भारत पर कोई अस नहीं होगा। ये भारत में नहीं नजर आएगा।
साल 2025 का दूसरा सूर्य ग्रहण कहां- कहां दिखेगा
साल 2025 का दूसरा सूर्य ग्रहण अटलांटिक महासागर, अंटार्कटिका, प्रशांत महासागर और ऑस्ट्रेलिया में दिखाई देगा।
आंशिक सूर्य ग्रहण क्या होता है
आंशिक सूर्य ग्रहण उस समय लगता है। जब चंद्रमा सूर्य के कुछ ही भाग को अपनी छाया से ढकता है। इस समय में सूर्य का आधा भाग ग्रहण से प्रभावित होता है, इसलिए इसे आंशिक सूर्य ग्रहण कहा जाता है। जिस समय में चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह से अपनी छाया में ढक लेता है। उस समय में पूर्ण चंद्र ग्रहण लगता है।
29 मार्च को पहला सूर्य ग्रहण (पूर्ण सूर्य ग्रहण)
पहला सूर्य ग्रहण 29 मार्च 2025 को चैत्र मास की कृष्ण पक्ष अमावस्या के दिन लगेगा. यह पूर्ण ग्रहण दोपहर 14:21 बजे से शाम 18:14 बजे तक रहेगा. यह विशेष रूप से बरमूडा, बारबाडोस, डेनमार्क, ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, उत्तरी ब्राज़ील, फिनलैंड, जर्मनी, फ्रांस, हंगरी, आयरलैंड, मोरक्को, ग्रीनलैंड, कनाडा का पूर्वी भाग, लिथुआनिया, हॉलैंड, पुर्तगाल, उत्तरी रूस, स्पेन, सूरीनाम, स्वीडन, पोलैंड, पुर्तगाल, नॉर्वे, यूक्रेन, स्विट्जरलैंड, इंग्लैंड और अमेरिका के पूर्वी क्षेत्र, आदि में देखा जा सकेगा.
यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए इसका कोई धार्मिक प्रभाव नहीं माना जाएगा. साथ ही इसका सूतक काल भी मान्य नहीं होगा. इस दौरान मीन राशि और उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र में ग्रहों का विशेष संयोग बनेगा.
इस दिन मीन राशि में सूर्य और राहु के अतिरिक्त शुक्र, बुध और चंद्रमा उपस्थित होंगे। इससे द्वादश भाव में शनि विराजमान होंगे. इससे तीसरे भाव में वृषभ राशि में बृहस्पति, चौथे भाव में मिथुन राशि में मंगल और सप्तम भाव में कन्या राशि में केतु स्थित होंगे. पांच ग्रहों का प्रभाव एक साथ होने के कारण इस ग्रहण का राशियों पर बहुत गहरा प्रभाव देखने को मिल सकता है.
21 सितंबर को दूसरा सूर्य ग्रहण (पूर्ण सूर्य ग्रहण)
दूसरा सूर्य ग्रहण 21 सितंबर की रात्रि में लगेगा, जो आश्विन मास की कृष्ण पक्ष अमावस्या के दिन रात 22:59 बजे से शुरू होकर 22 सितंबर की सुबह 03:23 बजे तक प्रभावी रहेगा। इस पूर्ण ग्रहण को न्यूजीलैंड, फिजी, अंटार्कटिका और ऑस्ट्रेलिया के दक्षिणी भागों में देखा जा सकेगा. यह ग्रहण भी भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां इसका धार्मिक प्रभाव भी नहीं होगा और न ही इसका सूतक काल मान्य होगा.
साल का दूसरा ग्रहण कन्या राशि और उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में आकार लेगा. इस दौरान सूर्य, चंद्रमा और बुध के साथ कन्या राशि में स्थित होंगे और उन पर मीन राशि में बैठे शनि देव की पूर्ण दृष्टि रहेगी. इससे दूसरे भाव में तुला राशि में मंगल होंगे, छठे भाव में कुंभ राशि में राहु, दशम भाव में बृहस्पति और द्वादश भाव में शुक्र और केतु की युति होगी. कन्या राशि और उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में जन्मे लोगों के लिए यह सूर्य ग्रहण विशेष रूप से प्रभावशाली हो सकता है.
14 मार्च को पहला चंद्र ग्रहण (पूर्ण चंद्र ग्रहण)
साल 2025 का पहला चंद्र ग्रहण 14 मार्च को फाल्गुन मास की शुक्ल पूर्णिमा के दिन लगेगा. यह ग्रहण भारतीय समयानुसार सुबह 10:41 बजे से दोपहर 14:18 बजे तक रहेगा. यह पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा जो मुख्य रूप से ऑस्ट्रेलिया के अधिकांश भाग यूरोप अफ्रीका के अधिकांश भाग, उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका, प्रशांत अटलांटिक आर्कटिक महासागर, पूर्वी एशिया और अंटार्कटिका, आदि क्षेत्रों में दिखाई देगा.
यह भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए इस ग्रहण का धार्मिक दृष्टि से भारत में कोई महत्व नहीं होगा. खगोलीय दृष्टि से यह चंद्र ग्रहण सिंह राशि और उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में लगेगा, इसलिए सिंह राशि और उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में जन्मे लोगों के लिए यह ग्रहण विशेष रूप से प्रभावशाली रहने वाला है.
चंद्र ग्रहण के दिन चंद्रमा से सप्तम भाव में सूर्य और शनि विराजमान रहेंगे और चंद्रमा को पूर्ण सप्तम दृष्टि से देखेंगे. ऐसे में इसका प्रभाव और भी गहरा देखने को मिलेगा. इस दिन चंद्रमा से दूसरे भाव में केतु, सप्तम भाव में सूर्य और शनि, अष्टम भाव में राहु, बुध और शुक्र, दशम भाव में बृहस्पति और एकादश भाव में मंगल विराजमान होंगे.
7 सितंबर को दूसरा चंद्र ग्रहण (पूर्ण चंद्र ग्रहण )
दूसरा चंद्र ग्रहण 7 सितंबर 2025 को भाद्रपद मास की शुक्ल पूर्णिमा के दिन लगेगा. यह रात्रि 21:57 बजे शुरू होकर 1:26 बजे तक प्रभावी रहेगा और भारत समेत संपूर्ण एशिया, ऑस्ट्रेलिया, यूरोप, न्यूजीलैंड, पश्चिमी और उत्तरी अमेरिका, अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका के पूर्वी क्षेत्रों में दिखाई देगा.
यह चंद्र ग्रहण भारत में भी नजर आएगा, इसलिए इसका सूतक काल मान्य होगा और धार्मिक दृष्टि से इसका महत्व होगा. इस ग्रहण का सूतक काल 7 सितंबर को दोपहर 12:57 बजे से आरंभ होगा और ग्रहण की समाप्ति तक रहेग.
यह पूर्ण चंद्र ग्रहण कुंभ राशि और पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में लगेगा, जिसमें चंद्रमा के साथ राहु और सप्तम भाव में सूर्य, केतु और बुध विराजमान होंगे. इस संयोजन का कुंभ राशि और पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में जन्मे व्यक्तियों पर विशेष प्रभाव पड़ सकता है. इन जातकों को सावधानी बरतने का आवश्यकता रहेगी.
प्राकृतिक आपदाओं की आशंका
चार ग्रहणों की वजह से प्राकृतिक आपदाओं का समय से ज्यादा प्रकोप देखने को मिलेगा.
इसमें भूकंप, बाढ़, सुनामी, विमान दुर्घटनाएं का संकेत मिल रहे हैं. प्राकृतिक आपदा में जनहानि कम ही होने की संभावना है.
फिल्म एवं राजनीति से दुखद समाचार. व्यापार में तेजी आएगी.
बीमारियों में कमी आएगी. रोजगार के अवसर बढ़ेंगे.
आय में इजाफा होगा. वायुयान दुर्घटना होने की संभावना.
पूरे विश्व में राजनीतिक अस्थिरता यानि राजनीतिक माहौल उच्च होगा.
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप ज्यादा होंगे. सत्ता संगठन में बदलाव होंगे.
पूरे विश्व में सीमा पर तनाव शुरू हो जायेगा. आंदोलन, हिंसा, धरना प्रदर्शन हड़ताल, बैंक घोटाला, उपद्रव और आगजनी की स्थितियां बन सकती है.
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अंतिम सूर्य ग्रहण 2024: इन 5 राशिवालों पर आएगा संकट!
मेष: साल का अंतिम सूर्य ग्रहण मेष राशिवालों के लिए अशुभ हो सकता है. जो लोग प्रेम संबंध में हैं, उनको ब्रेकअप हो सकता है. जिनकी शादी तय हुई है, वे कोई गलती न करें क्योंकि उनकी शादी टूटने की आशंका है. नौकरीपेशा लोगों को अपने तनाव और गुस्से पर कंट्रोल करना होगा, नहीं तो काम खराब हो सकता है. बिजनेस में घाटा लग सकता है. शेयर बाजार से दूर रहें, निवेश न करें, वरना चूना लग सकता है. इस दिन आपके धन में कमी का संकेत है.
मिथुन: सूर्य ग्रहण का नकारात्मक प्रभाव मिथुन वालों पर भी होने की अशंका है. आपकी तबीयत खराब हो सकती है, इसलिए खानपान और लाइफ स्टाइल में बदलाव करें. इससे आपके काम प्रभावित हो सकते हैं. दांपत्य जीवन में तनाव आ सकता है. किसी के कहने पर कोई बड़ा निवेश न करें, आपको घाटा लग सकता है. आपका पैसा डूब सकता है. अपने गुस्से और व्यवहार पर नियंत्रण रखें.
कर्क: बिजनेस करने वाले कर्क राशि के लोग सूर्य ग्रहण के दिन सतर्क रहें. ऑर्डर को पूरा कर सकते हैं, लेकिन आपका पैसा फंसने का डर रहेगा. इस वजह से आप उधारी का काम न करें, वरना आपको धन हानि हो सकती है. इससे आप आर्थिक तंगी में फंस सकते हैं. काम में सफलता मिलने में मुश्किलें आ सकती हैं. इससे आपका आत्मविश्वास प्रभावित हो सकता है. नौकरीपेशा लोगों को फिजूलखर्च रोकना होगा, नहीं तो कर्ज की स्थिति पैदा हो सकती है. परिवार में तनाव रहने की आशंका है.
सिंह: सूर्य आपकी राशि के स्वामी हैं और इन पर ही ग्रहण लगेगा. इस वजह से सिंह राशिवालों के वैवाहिक जीवन में कलेश हो सकता है. इससे मानसिक पीड़ा का सामना करना होगा. इस दिन आपको प्रॉपर्टी में निवेश से बचना चाहिए, वरना धोखा हो सकता है. कोई पैसे लेकर आपको चूना लगा सकता है. सावधान रहने की जरूरत है. बिजनेस करने वाले लोग जल्दीबाजी में कोई फैसला न करें, पैसा फंस सकता है.
मीन: सूर्य ग्रहण के नकारात्मक प्रभाव से मीन राशि के लोगों का पारिवारिक जीवन कलहपूर्ण हो सकता है. सदस्यों के बीच वाद विवाद की स्थिति बन सकती है. इससे घर का माहौल तनावपूर्ण होगा. आपको अपने रिश्तों को संभालने की जरूरत है. रुपए का सही से प्रबंधन करें, किसी को उधार न दें, धन हानि की आशंका है. व्यापारी वर्ग के लोगों का काम मंदा रह सकता है, जिससे आमदनी भी कम होगी.
सूर्य ग्रहण कब और कितने बजे से लग रहा है 2024
साल का दूसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण 2 अक्तूबर को रात्रि 9 बजकर 13 मिनट से शुरू होगा और इसकी समाप्ति रात 3 बजकर 17 मिनट पर होगी। भारत में इस समय रात रहेगी जिस वजह से आप सूर्य ग्रहण को नहीं देख पाएंगे।
सूर्य ग्रहण का सूतक कब लग रहा है
सूर्य ग्रहण का सूतक ग्रहण लगने से ठीक 12 घंटे पहले शुरू हो जाता है। इस दृष्टि से 2 अक्तूबर को लगने वाले सूर्य ग्रहण का सूतक सुबह 9 बजकर 13 मिनट से शुरू हो जाएगा।
सूतक काल लगेगा या नहीं?
2 अक्तूबर को रात्रि के समय सूर्य ग्रहण लगेगा, जिसका असर भारत में नहीं दिखाई देगा। ऐसे में सूतक काल भी मान्य नहीं होगा। सूतक काल के दौरान मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। पूजा-पाठ और कोई मांगलिक, धार्मिक कार्यों को करने की मनाही होती है। कहते हैं कि सूतक काल के दौरान भगवान का नाम लेकर उनके मंत्रों का जाप करना चाहिए। मंत्रों का जाप करने से ग्रहण का दुष्प्रभाव कम होता है। वहीं सूतक काल के समय गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के समय विशेष सावधानी बरतनी पड़ती है।
कहां-कहां दिखेगा
साल का आखिरी सूर्य ग्रहण भारत को छोड़कर अर्जेंटीना, प्रशांत महासागर, आर्कटिक, दक्षिणी अमेरिका, पेरू और फिजी आदि देशों में देखा जा सकेगा।
पूर्ण सूर्यग्रहण की तरह ही रिंग ऑफ फायर यानी वलयाकार ग्रहण अमावस्या को होता है। इस दौरान सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी एक सीध में होते हैं, लेकिन पूर्ण सूर्यग्रहण के विपरीत वलयाकार ग्रहण के दौरान चंद्रमा पृथ्वी के सबसे दूर बिंदु के पास होता है। रिंग ऑफ फायर कई चरणों से गुजरता है, जिसे पूरा होने में तीन घंटे से अधिक का समय लग सकता है। हालांकि, वास्तविक रिंग ऑफ फायर कुछ सेकंड से लेकर 12 मिनट से अधिक समय तक कहीं भी रह सकता है।
सूर्य ग्रहण कब होगा?
वलयाकार सूर्यग्रहण 2 अक्टूबर को होगा। इसी साल अप्रैल में हुए पूर्ण सूर्यग्रहण की तरह ही वलयाकार ग्रहण भी चरणों में होगा। अमेरिका के स्थानीय समयानुसार 11:42 बजे सुबह आंशिक ग्रहण शुरू होगा, जब चंद्रमा सूर्य के सामने से गुजरेगा। 12 बजकर 50 बजे दोपहर में वलयाकार सूर्यग्रहण दक्षिणी प्रशांत महासागर में शुरू होगा। शाम 4:39 बजे रिंग ऑफ फायर अटलांटिक महासागर में समाप्त होगा। शाम में 5:47 बजे दक्षिणी अटलांटिक महासागर में समाप्त होगा।
रिंग ऑफ फायर कहां आएगा नजर?
इस साल रिंग ऑफ फायर दक्षिणी प्रशांत महासागर, दक्षिणी पश्चिमी अटलांटिक महासागर और दक्षिण अमेरिका से होकर गुजरेगा। चिली और अर्जेंटीना के कुछ हिस्सों में यह पूरा दिखाई देगा। वहीं, हवाई एकमात्र अमेरिकी राज्य होगा। हालांकि, वहां केवल आंशिक ग्रहण ही दिखाई देगा।
क्या भारत में आएगा नजर?
सूर्यग्रहण केवल दिन में ही दिखाई देता है। 2 अक्टूबर को जब दक्षिणी अमेरिकी महाद्वीप में सूर्यग्रहण का नजारा दिख रहा होगा, उस समय भारत में रात हो रही होगी। ऐसे में वलायाकार सूर्यग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। हालांकि, पूर्ण सूर्यग्रहण की तरह ही इसे भी भारत में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए देखा जा सकेगा। अंतरिक्ष एजेंसियां सूर्यग्रहण या दूसरी खगोलीय घटनाओं का लाइव टेलीकास्ट करती हैं। अंतरिक्ष एजेंसियों के प्लेटफॉर्म पर इसे देखा जा सकता है।
]]>दो अक्टूबर को लगने वाला सूर्य ग्रहण एक वलयाकार सूर्य ग्रहण होगा, जिसे रिंग ऑफ फायर भी कहा जाता है। क्योंकि इस दौरान हमें आसमान में आग का एक छल्ला दिखाई देता है। ऐसा क्यों होता है यह समझने के लिए हमें सबसे पहले यह जानना होगा कि सूर्य ग्रहण क्या होता है? अंतरिक्ष में सूर्य स्थिर रहता है। वहीं पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करती है। चंद्रमा पृथ्वी की परिक्रमा करता है और इसके साथ चलते हुए सूर्य का भी चक्कर लगाता है। कई बार ऐसा होता है जब घूमते हुए चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच में आ जाता है। यह कुछ क्षण के लिए सूर्य के प्रकाश को रोक देता है, जो सूर्य ग्रहण कहलाता है। इस दौरान इसकी परछाई धरती पर पड़ती है।
क्या होता है वलयाकार सूर्य ग्रहण
चंद्रमा जब धरती का चक्कर लगाता है तो इस दौरान उसकी दूरी भी बदलती रहती है। कभी वह पृथ्वी के नजदीक होता है तो कभी वह दूर होता है। जब चंद्रमा पृथ्वी के करीब होता है तब इसका आकार हमें बड़ा दिखता है। वहीं जब यह धरती से दूर होता है तो हमें छोटा दिखता है। सूर्य ग्रहण के दौरान अगर यह धरती के करीब होता है, तो आकार के कारण पृथ्वी से यह हमें सूर्य को पूरी तरह ढकता हुआ दिखाई देता है। लेकिन जब यह पृथ्वी से दूर होता है तो अपने छोटे आकार के कारण सूर्य के बीच के हिस्से को ही ढक पाता है। सूर्य का बाकी किनारा दिखाई देता है, जो आसमान में आग का छल्ला बनाता है। वलयाकार सूर्य ग्रहण को एन्यूलर सोलर इकलिप्स (Annular Solar Eclipse) कहा जाता है।
क्या भारत में दिखेगा 2 अक्टूबर का सूर्य ग्रहण
2 अक्टूबर को लगने वाले सूर्य ग्रहण को लेकर आपके मन में यह सवाल होगा कि क्या यह भारत में भी दिखाई देगा? इसका जवाब है नहीं। यह वलयाकार सूर्य ग्रहण दक्षिण अमेरिका महाद्वीप और प्रशांत महासागर में दिखाई देगा। चंद्रमा इस दौरान सूर्य के 93 फीसदी हिस्से को कवर करेगा। आसमान में एक पूर्ण आग की रिंग 7 मिनट 25 सेकंड का होगा। अर्जेंटीना और चिली के कुछ जगहों पर इस सूर्य ग्रहण को देखा जा सकता है। महाद्वीप के बाकी हिस्सों में यह आंशिक रूप से दिखाई देगा।
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