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स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अपेक्स कमेटी की बैठक सम्पन्न
मुख्य सचिव श्री विकासशील की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) की अपेक्स कमेटी की बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) की गतिविधियों, वित्तीय वर्ष 2025-26 की भौतिक एवं वित्तीय प्रगति, वित्तीय वर्ष 2026-27 के एक्शन प्लान, स्वच्छता के लिए नवाचार तथा स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) हेतु अंतर्विभागीय अभिसरण पर व्यापक चर्चा हुई। बैठक में अधिकारियों को अपशिष्ट प्रबंधन अधोसंरचना के तहत गांवों में कम्पोस्ट पिट, सोखता गडड्ा और प्लास्टिक कचरा प्रबंधन के लिए ठोस कार्यवाही सुनिश्चित करने कहा गया है। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत ग्रामों की स्वच्छता के कार्यों की सर्टिफिकेशन ग्राम सभा द्वारा कराया जाना चाहिए।
मुख्य सचिव ने भारत स्वच्छ मिशन के अंतर्गत राज्य के सभी ग्रामों में स्वच्छता के कार्यों को नियमित रूप से मॉनिटरिंग कराने के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिए है। गांवों के हाट-बाजारों में सामूहिक शौचालय का उपयोग एवं स्वच्छता के संबंध में आवश्यक दिशा निर्देश दिए। इसी तरह से आवश्यकतानुसार सामूहिक शौचालय की उपयोगिता एवं रखरखाव सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए। अधिकारियों ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में सामुदायिक स्थलों पर करीब 14 हजार 279 सामुदायिक शौचालयोें का निर्माण किया जा चुका है। इसी तरह से वर्ष 2026-27 में 2014 सामुदायिक शौचालयों का निर्माण किए जाने का लक्ष्य रखा गया है। बैठक में प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट के सुचारू संचालन हेतु आवश्यक कार्ययोजना के निर्माण के संबंध में व्यापक विचार-विमर्श किया गया।
मुख्य सचिव ने इस हेतु देश के अन्य राज्यों के सफल प्लास्टिक वेस्ट मैंनेजमेंट के मॉडल को अपनाने की बात कही। अधिकारियों ने बताया कि छत्तीसगढ़ में प्लास्टिक वेस्ट से सशक्त सड़कों के निर्माण करने की अभिनव एवं सतत् पहल की जा रही है। राज्य के बस्तर, महासमुंद, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में प्लास्टिक मिक्स डामर रोड निर्माण किए जा रहे हैं। रोड निर्माण में करीब 3000 किलोग्राम से अधिक प्लास्टिक का उपयोग किया गया है। राज्य में ग्राम पंचायत स्तर पर स्वच्छता, जल प्रबंधन एवं प्रशासनिक व्यवस्था की मॉनिटरिंग एवं मूल्यांकन करने हेतु स्वच्छ पंचायत पोर्टल की शुरूआत की गई है। ग्राम पंचायत सरपंच द्वारा ग्राम की स्वच्छता, जल आपूर्ति एवं प्रशासन की ऑनलाइन प्रविष्टि की जा रही है। सभी ग्रामों की ब्लॉक स्तर, जिला स्तर एवं राज्य स्तर पर रैंकिंग की जाएगी। इसके लिए सभी ग्रामों की ऑनलाईन एंट्री का कार्यक्रम निर्धारित किया गया है।
बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती निहारिका बारिक सिंह, स्वास्थ्य विभाग के सचिव श्री अमित कटारिया, मिशन संचालक राज्य स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) श्री अश्वनी देवांगन सहित स्कूल शिक्षा, वित्त, जनसम्पर्क, आवास एवं पर्यावरण, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, महिला एवं बाल विकास, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा, यूनिसेफ के अधिकारी सहित अन्य विभागीय अधिकारी शामिल हुए।
]]>स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अपेक्स कमेटी की बैठक सम्पन्न
मुख्य सचिव श्री विकासशील की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) की अपेक्स कमेटी की बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) की गतिविधियों, वित्तीय वर्ष 2025-26 की भौतिक एवं वित्तीय प्रगति, वित्तीय वर्ष 2026-27 के एक्शन प्लान, स्वच्छता के लिए नवाचार तथा स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) हेतु अंतर्विभागीय अभिसरण पर व्यापक चर्चा हुई। बैठक में अधिकारियों को अपशिष्ट प्रबंधन अधोसंरचना के तहत गांवों में कम्पोस्ट पिट, सोखता गडड्ा और प्लास्टिक कचरा प्रबंधन के लिए ठोस कार्यवाही सुनिश्चित करने कहा गया है। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत ग्रामों की स्वच्छता के कार्यों की सर्टिफिकेशन ग्राम सभा द्वारा कराया जाना चाहिए।
मुख्य सचिव ने भारत स्वच्छ मिशन के अंतर्गत राज्य के सभी ग्रामों में स्वच्छता के कार्यों को नियमित रूप से मॉनिटरिंग कराने के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिए है। गांवों के हाट-बाजारों में सामूहिक शौचालय का उपयोग एवं स्वच्छता के संबंध में आवश्यक दिशा निर्देश दिए। इसी तरह से आवश्यकतानुसार सामूहिक शौचालय की उपयोगिता एवं रखरखाव सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए। अधिकारियों ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में सामुदायिक स्थलों पर करीब 14 हजार 279 सामुदायिक शौचालयोें का निर्माण किया जा चुका है। इसी तरह से वर्ष 2026-27 में 2014 सामुदायिक शौचालयों का निर्माण किए जाने का लक्ष्य रखा गया है। बैठक में प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट के सुचारू संचालन हेतु आवश्यक कार्ययोजना के निर्माण के संबंध में व्यापक विचार-विमर्श किया गया।
मुख्य सचिव ने इस हेतु देश के अन्य राज्यों के सफल प्लास्टिक वेस्ट मैंनेजमेंट के मॉडल को अपनाने की बात कही। अधिकारियों ने बताया कि छत्तीसगढ़ में प्लास्टिक वेस्ट से सशक्त सड़कों के निर्माण करने की अभिनव एवं सतत् पहल की जा रही है। राज्य के बस्तर, महासमुंद, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में प्लास्टिक मिक्स डामर रोड निर्माण किए जा रहे हैं। रोड निर्माण में करीब 3000 किलोग्राम से अधिक प्लास्टिक का उपयोग किया गया है। राज्य में ग्राम पंचायत स्तर पर स्वच्छता, जल प्रबंधन एवं प्रशासनिक व्यवस्था की मॉनिटरिंग एवं मूल्यांकन करने हेतु स्वच्छ पंचायत पोर्टल की शुरूआत की गई है। ग्राम पंचायत सरपंच द्वारा ग्राम की स्वच्छता, जल आपूर्ति एवं प्रशासन की ऑनलाइन प्रविष्टि की जा रही है। सभी ग्रामों की ब्लॉक स्तर, जिला स्तर एवं राज्य स्तर पर रैंकिंग की जाएगी। इसके लिए सभी ग्रामों की ऑनलाईन एंट्री का कार्यक्रम निर्धारित किया गया है।
बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती निहारिका बारिक सिंह, स्वास्थ्य विभाग के सचिव श्री अमित कटारिया, मिशन संचालक राज्य स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) श्री अश्वनी देवांगन सहित स्कूल शिक्षा, वित्त, जनसम्पर्क, आवास एवं पर्यावरण, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, महिला एवं बाल विकास, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा, यूनिसेफ के अधिकारी सहित अन्य विभागीय अधिकारी शामिल हुए।
]]>नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा स्वच्छ भारत मिशन में प्रति समाज के अलग-अलग समूहों से वर्चुअली संवाद किया जा रहा है। इस स्वच्छता में महिलाओं की भूमिका एवं योगदान विषय पर संवाद किया गया। संवाद में प्रदेश के नगरीय निकायों से महिला जन-प्रतिनिधियों, स्व-सहायता समूहों, स्वच्छता सहयोगियों से स्वच्छता में महिलाओं से सहयोग एवं योगदान पर अनुभव साझा किये गये। वर्चुअली जुड़ी महिलाओं से घर से निकलने वाले कचरे के संग्रहण के बाद पृथ्कीकरण, प्र-संस्करण से लेकर निष्पादन तक संपूर्ण प्रक्रिया में महिलाओं की क्या भूमिका है इस विषय पर विस्तार से चर्चा की गई। संवाद के दौरान बताया गया कि महिलाओं द्वारा अनुपयोगी सामग्री से प्रदेश के कई क्षेत्रों में विभिन्न कलाकृतियों का निर्माण भी किया जा रहा है।
महिलाओं से किये गये संवाद में नगरीय निकायों के अधिकारी-कर्मचारी और अशासकीय संगठनों के प्रतिनिधियों ने भागीदारी की। वक्ताओं ने कचरा वाहन में ही कचरा देने की आदतों में आये बदलाव, सिंगल यूज प्लास्टिक के स्थान पर थैला एवं पेपर बेग को अपनाने और इससे जुड़े मुद्दों पर विचार व्यक्त किये गये। संवाद में यह तय हुआ कि स्वच्छता अभियान से जुड़े सभी समूह टीम भावना के साथ अपने क्षेत्र में स्वच्छता अभियान में अधिक से अधिक जनसमुदाय को जोड़ने का कार्य करें। प्रदेश में प्रति रविवार होने वाले संवाद सत्र का यह 14वां संस्करण था।
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स्वच्छ भारत मिशन में नवाचारों के साथ मध्यप्रदेश ने रचे नये कीर्तिमान : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
भोपाल
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर देश में शुरू हुए स्वच्छता अभियान में मध्यप्रदेश अनेक कीर्तिमान स्थापित कर चुका है। प्रधानमंत्री की मंशानुरूप प्रदेशवासियों ने पूरे उत्साह और जन-सहयोग से स्वच्छता के क्षेत्र में नये आयाम भी स्थापित किये हैं। इसमें जहाँ एक ओर वर्ष 2022 के स्वच्छ सर्वेक्षण में मध्यप्रदेश को सबसे स्वच्छतम राज्य का दर्जा मिला, वहीं दूसरी ओर प्रदेश के इंदौर शहर ने लगातार 7वीं बार देश के सबसे स्वच्छ शहर होने का गौरव प्राप्त किया। इसके साथ ही वर्ष 2023 में प्रदेश में गीले कचरे से बॉयो सीएनजी का उत्पादन करने का अभिनव नवाचार भी हुआ है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्म-दिन 17 सितम्बर से स्वच्छता ही सेवा अभियान शुरू हो रहा है। यह अभियान 2 अक्टूबर महात्मा गाँधी की जयंती तक चलेगा। इस वर्ष अभियान की थीम “स्वभाव स्वच्छता-संस्कार स्वच्छता’’ रखी गयी है। स्वच्छता ही सेवा अभियान में अधिक से अधिक जन-भागीदारी और स्थानीय निकायों की भागीदारी पर जोर दिया गया है। मध्यप्रदेश ने स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) में कई मामलों में नये कीर्तिमान स्थापित किये हैं। प्रदेश के सभी शहरों ने पिछले 10 वर्षों के दौरान अपने सर्वश्रेष्ठ प्रयास किये हैं। जनता के सहयोग से स्वच्छ भारत मिशन को जन-आंदोलन का रूप दिया गया है। उन्होंने कहा कि इस बार भी शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में जन-भागीदारी के साथ बड़े पैंमाने पर स्वच्छता संबंधी विभिन्न गतिविधियाँ संचालित की जायेगी।
स्वच्छता के क्षेत्र में प्रदेश की उल्लेखनीय उपलब्धियाँ
स्वच्छ सर्वेक्षण पुरस्कार-2023 में इंदौर शहर को लगातार 7वीं बार देश के सबसे स्वच्छ शहर का पुरस्कार मिला है। यह इंदौर के नागरिकों की जन-भागीदारी का बेहतरीन उदाहरण है। मध्यप्रदेश कम लागत पर एसटीपी इंसेप्शन एण्ड डायवर्सन आधारित सीवेज उपचार प्रणाली के लिये दिशा-निर्देश तैयार करने और कार्यादेश जारी करने वाला पहला राज्य है। इस वर्ष मार्च-2024 में मध्यप्रदेश ने नगरीय निकायों के लिये “उपयोगिता जल और सेप्टेज प्रबंधन नीति’’ प्रकाशित की है, जिसमें सीवर और सैप्टिक टैंकों की मशीनीकृत सफाई 100 प्रतिशत सुनिश्चित की गयी है। इंदौर वाटर प्लस प्रमाणन और 7 स्टार रेटिंग प्राप्त करने वाला देश का पहला शहर है। हाल ही में नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम के तहत स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2024 में जबलपुर को 10 लाख से अधिक जनसंख्या वाले शहरों की श्रेणी में वायु गुणवत्ता में सुधार के लिये देश में दूसरा स्थान प्राप्त हुआ है।
शत-प्रतिशत मोटराइज्ड वाहनों से कचरा संग्रहण
प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों में 7 हजार 82 से अधिक मोटराइज्ड वाहनों से कचरा संग्रहण व्यवस्था का संचालन किया जा रहा है। इनमें सूखे, गीले, घरेलू हानिकारक और सेनेटरी अपशिष्ट को अलग-अलग रखने के लिये कम्पार्टमेंट बनाये गये हैं। जीपीएस और पीए सिस्टम से वाहनों की निगरानी और स्वच्छता विषयों का प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। गीले कचरे के प्र-संस्करण और निष्पादन के लिये स्पॉट कम्पोजिटिंग को प्रोत्साहित किया जा रहा है। प्रदेश में 850 से अधिक ठोस अपशिष्ट उत्पादकों द्वारा स्पॉट कम्पोजिटिंग की जा रही है। प्रदेश में फीकल स्लज के निष्पादन को प्राथमिकता देते हुए 368 नगरीय निकायों में 399 एफएसटीपी और 20 निकायों में 55 एसटीपी संचालित हो रहे हैं। प्रदेश में 401 नगरीय निकाय 368 केन्द्रीयकृत इकाइयों से कम्पोजिटिंग कर रहे हैं। सूखे कचरे के प्र-संस्करण के लिये 401 नगरीय निकायों में 360 मटेरियल रिकवरी फेसिलिटी इकाइयों का निर्माण किया गया है।
गीले कचरे से बॉयो सीएनजी का उत्पादन
निकायों में लीगेसी वेस्ट को वैज्ञानिक तरीके से खत्म करने की दिशा में निरंतर प्रयास किये जा रहे हैं। प्रदेश के 108 नगरीय निकायों के लीगेसी वेस्ट का उपचार किया जा रहा है। स्वच्छ भारत मिशन के पहले चरण में 50 नगरीय निकायों ने अपने लीगेसी वेस्ट का पूर्ण निपटान कर लिया है। गीले कचरे की कम्पोजिटिंग के लिये कटनी और सागर में अत्याधुनिक स्व-चलित इकाइयाँ कार्य कर रही हैं। इन इकाइयों में 16 शहरों से कचरा लाकर उसे कम्पोस्ट में बदला जा रहा है। इंदौर में गीले कचरे से बॉयो सीएनजी तैयार करने के लिये 550 टन प्रतिदिन क्षमता की गोवर्धन इकाई काम कर रही है। रीवा और जबलपुर में कचरे से बिजली बनाने की इकाइयाँ भी चल रही हैं। इन इकाइयों में प्रतिदिन 950 टन कचरे का प्र-संस्करण कर 18 मेगावॉट बिजली पैदा की जा रही है। प्रदेश के 10 निकायों के लिये क्लस्टर आधारित 1019 टन प्रतिदिन क्षमता की इकाइयों के लिये केन्द्र सरकार से स्वीकृति मिल चुकी है। इंदौर और उज्जैन में 660 टन कचरे से बिजली बनाने का काम प्रस्तावित है। इस यूनिट में करीब 12.15 मेगावॉट बिजली पैदा होगी। इन सब कामों से प्रदेश के नगरीय निकाय वर्ष 2027 तक कचरा प्रबंधन में आत्म-निर्भर बन सकेंगे।
स्वच्छ सर्वेक्षण में हासिल की नई ऊँचाइयाँ
स्वच्छ सर्वेक्षण-2022 में मध्यप्रदेश को देश के सबसे स्वच्छतम राज्य का दर्जा प्राप्त हुआ है। वहीं स्वच्छ सर्वेक्षण-2023 में मध्यप्रदेश देश का दूसरा सबसे स्वच्छतम राज्य घोषित किया गया है। स्वच्छता के मामले में मध्यप्रदेश को 7 राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। प्रदेश के 361 निकाय ओडीएफ डबल प्लस, 3 निकाय ओडीएफ प्लस और 7 निकाय को ओडीएफ का प्रमाणीकरण प्राप्त हुआ है। नगरीय निकायों में अपशिष्ट जल के शोधन एवं उपचारित जल के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिये 7 निकायों को वाटर प्लस का प्रमाणीकरण प्राप्त हुआ है। अब तक प्रदेश के 384 निकायों द्वारा स्वयं को सीपीएचईईओ मानदण्डों के आधार पर संरक्षित शहर घोषित किया गया है।
स्वच्छ सर्वेक्षण-2024
खुले में शौच से मुक्त शहरों की श्रेणी में 27 शहरों को वाटर प्लस और शेष सभी शहरों को डबल प्लस, वहीं कचरा मुक्त स्टार प्रमाणीकरण के लिये सभी शहरों को कम से कम 3 स्टार से प्रमाणित किये जाने का लक्ष्य तय किया गया है।
नवाचार एवं उत्कृष्ट प्रयास
प्रदेश में स्वच्छता विषयों के प्रति जागरूकता लाने के लिये स्वच्छता की पाठशाला नामक गतिविधि शुरू की गयी है। इसके लिये अब तक 388 प्रशिक्षण सत्रों में 44 हजार 639 सफाई मित्रों, 2004 अधिकारियों, 243 जन-प्रतिनिधियों और 200 अशासकीय संगठनों के प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण दिलाया गया है। आपसी अनुभव से सीखने की प्रक्रिया को सशक्त करने के मकसद से प्रतिदिन स्वच्छता संवाद परिचर्चा का आयोजन किया जा रहा है।
सफाई मित्रों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए नेशनल हेल्थ मिशन के सहयोग से सफाई मित्रों और उनके परिजनों के स्वास्थ्य परीक्षण के लिये शिविर लगाये गये। इनमें 44 हजार 701 सफाई मित्रों और उनके परिवार को फायदा पहुँचाया गया। स्वच्छ भारत मिशन के तहत स्वच्छता से जुड़े प्रमुख विषयों पर 10 से अधिक ऑनलाइन प्रशिक्षण सत्र आयोजित किये जा चुके हैं। हाल ही में आरसीव्हीपी नरोन्हा प्रशासन अकादमी में 16 प्रशिक्षण सत्रों का आयोजन किया गया। इन सत्रों में जमीनी स्तर पर बदलाव लाने की दिशा में 14 नगरीय निकायों और 311 निकायों में 600 से अधिक अधिकारी-कर्मचारियों को प्रशिक्षण के साथ सह एक्सपोजर विजिट कराया गया।
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उल्लेखनीय है कि विगत 10 वर्षो में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) में राज्य को कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां प्राप्त हुई हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के आहवान पर स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) का पहला चरण 2 अक्टूबर 2014 को प्रारंभ हुआ और 2 अक्टूबर 2019 तक सरकार और जनता की सक्रिय भागीदारी से सभी ग्रामों को खुले मे शौच से मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया। इस अवधि में राज्य में 70 लाख से अधिक घरों में नए शौचालय बने, सभी ने शौचालय का नियमित उपयोग प्रारंभ किया जिससे सभी 51 हजार ग्राम तय समय से पहले खुले में शौच मुक्त घोषित हुए। लोगों को इस अभियान से जोड़ने और जागरूक करने के लिए व्यापक सामाजिक व्यवहार परिवर्तन की मुहिम चलाई गई, जिससे समाज के सभी वर्ग इस जन आंदोलन का हिस्सा बने। लोगों के स्वच्छता व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन के लिए 50 हजार से अधिक स्थानीय स्वच्छग्राहियों ने प्रेरक की महत्वपूर्ण भूमिका निभाया।
वर्ष 2020 से स्वच्छ भारत मिशन का दूसरा चरण प्रारंभ हुआ, जिसमे 2024 तक सभी ग्रामों को खुले में शौच से मुक्त बनाए रखते हुए ठोस और तरल अपशिष्ट के प्रबंधन द्वारा मोडल श्रेणी में ओडीएफ प्लस बनाने का लक्ष्य रखा गया। इसके लिए अब तक 8 लाख से अधिक नए शौचालय बने, 16 हजार से अधिक सामुदायिक स्वच्छता परिसर बनाए गए, 44 हजार से अधिक ग्रामों मे ठोस कचरे को प्रबंधित करने की सुविधाएं और 48 हजार से अधिक ग्रामों में तरल अपशिष्ट प्रबंधन की संपत्तियों को निर्मित करके राज्य के 41 हजार से अधिक ग्रामों को ODF प्लस मॉडल बनाया गया है।
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए ग्रामों में 20 हजार से अधिक सेग्रगैशन शेड और 32 हजार से अधिक कचरा वाहन उपलब्ध कराये गये तथा 25 हजार से अधिक स्वच्छता मित्र इस कार्य में लगे हुए हैं और कार्यों के प्रबंधन हेतु 900 स्व-सहायता समूहों को संलग्न किया गया, जिससे उनकी आजीविका में वृद्धि हुई है।
अब ग्रामों में भी मल कीचड़ प्रबंधन की सुविधाओं के लिए FSTP (फिकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट) और प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन के लिए MRF (मेटेरियल रिकवरी फैसिलिटी) सेंटर बनाए जा रहे है और इसके लिए शहरी निकायों के साथ भी समन्वय किया गया है।
पशुओं के गोबर से गोबर खाद और बायो गैस बनाकर समुदाय को लाभ पहुंचने के लिए गोबर्धन योजना से 100 से अधिक इकाइयां बनी। ओडीएफ प्लस मॉडल ग्रामों को बनाने की दिशा में प्रदेश अग्रसर है और समय पर अपना लक्ष्य हासिल करने के लिए सतत प्रयासरत है।
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शहरों में किये जा रहे निर्माण या पुनर्निर्माण कार्य से निकलने वाले मलवे को विध्वंस अपशिष्ट कहा जाता है। नगरीय विकास विभाग द्वारा इस अपशिष्ट का रिसाइकिल और रियूज किया जा रहा है। स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत इस कार्य को करने के लिये नगरीय निकाय द्वारा ठोस कदम उठाये गये हैं।
निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट ईंटों, टाइल्स, पेवर ब्लॉक्स आदि को आकार देते हुए “वेस्ट टू वेल्थ’’ में परिवर्तित किया जा रहा है। नगरीय निकाय द्वारा निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट (सी एण्ड डी वेस्ट) को दोबारा इस्तेमाल करने योग्य उत्पाद बनाये जा रहे हैं, ताकि कहीं खुले में मलबे के ढेर न लगें और पर्यावरण भी साफ-सुथरा रहे। नगरीय निकाय द्वारा यह अपशिष्ट मलबा संग्रहण वाहन द्वारा प्रोसेसिंग प्लांट तक लाया जाता है। इसके लिये नगरीय निकायों द्वारा टोल-फ्री हेल्पलाइन नम्बर भी जारी किये गये हैं।
प्रदेश में स्वच्छ भारत, मिशन शहरी के अंतर्गत नगरीय निकायों द्वारा "सी" एण्ड "डी" अपशिष्ट संग्रहण के लिये अभियान चलाया गया। "सी" एण्ड "डी" संग्रहण के लिये सोशल मीडिया और नगर में काम कर रहे कचरा वाहन से व्यापक प्रचार-प्रसार किया गया। शहरी क्षेत्र में अनधिकृत रूप से पड़े "सी" एण्ड "डी" वेस्ट का संग्रहण कर प्र-संस्करण इकाई तक परिवहन किया गया। निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट उठवाने के लिये निर्धारित शुल्क नागरिकों द्वारा जमा किया गया। प्रदेश के 372 नगरीय निकायों ने 1318 स्थानों पर अनधिकृत रूप से "सी" एण्ड "डी" वेस्ट को चिन्हित किया। नगरीय निकाय द्वारा 2428 टन "सी" एण्ड "डी" का संग्रहण कर प्र-संस्करण इकाई तक वाहनों के माध्यम से परिवहन किया गया।
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