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भोपाल
स्वच्छता सर्वेक्षण 2025-26 नगरीय प्रशासन एवं विकास आयुक्त संकेत भोंडवे ने सभी नगरीय निकायों को 'ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026' का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि अब शहर से कचरा केवल हटाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि 'वेस्ट टू वेल्थ' की परिकल्पना को साकार करते हुए रिसायकल के लिए इसका जिम्मेदारी से प्रबंधन करना आवश्यक है। इन नवीन नियमों के तहत अब प्रत्येक घर में कचरे का अलग-अलग संग्रहण अनिवार्य किया है, अब नागरिकों को गीला, सूखा और घरेलू हानिकारक कचरा पृथक डस्टबिन में देना होगा। इस सुव्यवस्थित प्रक्रिया के माध्यम से गीले कचरे से जैविक खाद का निर्माण किया जाएगा तथा सूखे कचरे का वैज्ञानिक तरीके से पुनर्चक्रण होगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि ''स्वच्छता अब सिर्फ आदत नहीं, बल्कि एक अनिवार्य जिम्मेदारी है।'' खुले में कचरा फेंकने, प्लास्टिक जलाने या सार्वजनिक स्थानों को गंदा करने जैसी गतिविधियों पर अब कड़ी कार्रवाई होगी तथा नियमों के उल्लंघन की स्थिति में दंडात्मक प्रक्रिया के साथ जुर्माना भी वसूला जाएगा। इसके अतिरिक्त, थोक कचरा उत्पादकों (BWG) को भी अपने परिसर में ही कचरे का ऑन-साइट प्रसंस्करण करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं।
स्वच्छता सर्वेक्षण 2025-26 के अंतर्गत सुरक्षित पर्यावरण और स्वस्थ भविष्य के निर्माण के लिए राज्य के 406 नगरीय निकाय पूर्णतः कटिबद्ध हैं, जिनमें 28 नए निकाय पहली बार इस प्रतिस्पर्धा में शामिल हो रहे हैं। नागरिकों की छोटी पहल से बड़े बदलाव का लक्ष्य लेकर चल रहे इन निकायों द्वारा जमीनी स्तर पर की जा रही तैयारियों का मूल्यांकन विभिन्न श्रेणियों में किया जाएगा। सर्वेक्षण में मैदानी स्तर पर उत्कृष्ट व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने तथा विभागीय अमले की दक्षता बढ़ाने के लिए प्रदेश में 51 क्षमता वर्धन कार्यशालाओं का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया है। इसके साथ ही, तीन वृहद राज्य स्तरीय कार्यशालाएं भी की गई। जिनके माध्यम से सभी 406 निकायों के मुख्य नगर पालिका अधिकारियों (CMO), यंत्रियों और स्वच्छता नोडल अधिकारियों का प्रभावी क्षमतावर्धन किया गया है। मैदानी स्तर पर कार्य कर रहे अमले को सशक्त बनाने के उद्देश्य से 874 महिला सफाई मित्रों को भी 15 विभिन्न बैचों में 'स्वास्थ्य एवं स्वच्छता' तथा 'कार्य के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों' पर विशेष रूप से प्रशिक्षित किया गया है। सुदृढ़ जन-भागीदारी और इन व्यापक प्रशासनिक तैयारियों के बल पर मध्यप्रदेश का लक्ष्य अपने शहरों को पूर्णतः स्वच्छ बनाकर राष्ट्रीय स्तर पर अपना गौरव स्थापित करना है।
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स्वच्छ सर्वेक्षण-2026 के अंतर्गत सिटीजन फीडबैक की प्रक्रिया प्रारंभ हो गई है। ऑनलाइन पोर्टल खुलते ही भोपाल को नंबर वन बनाने के लिए नागरिकों ने फीडबैक देना शुरू कर दिया है। यह प्रक्रिया शहर की स्वच्छता रैंकिंग निर्धारित करने में निर्णायक भूमिका निभाएगी, क्योंकि इसी फीडबैक के आधार पर अगले महीने केंद्र सरकार की टीमें भोपाल की जमीनी सफाई व्यवस्था का निरीक्षण करने आएंगी।
दरअसल, राजधानी में स्वच्छ सर्वेक्षण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और सर्वेक्षण के अंतिम चरण मई माह में दिल्ली की टीमें भोपाल आएंगी और सिटीजन फीडबैक के आधार पर शहर की सफाई व्यवस्था का निरीक्षण करेंगी। इसके बाद देशभर के शहरों का रिजल्ट जारी होगा। हर बार की तरह इस बार भी भोपाल नगर निगम ने नंबर वन का दावा किया है। इसके लिए पब्लिक फीडबैक ज्यादा से ज्यादा चाहिए। फीडबैक के दौरान सफाई व्यवस्था से जुड़े 13 सवालों के जवाब देने होंगे। शनिवार को पब्लिक फीडबैक की साइट खुलते ही महापौर मालती राय, सांसद आलोक शर्मा सहित विधायक और दूसरे जनप्रतिनिधियों ने अपने-अपने मोबाइल से फीडबैक दिया। अब शहरवासियों की जिम्मेदारी है कि वह भी अपने भोपाल के लिए वोट करें।
सफाई देखने अधिकारी फील्ड में उतरे
शहर की सफाई व्यवस्था पर नजर रखने के लिए नगर निगम अधिकारी फील्ड में उतर आए हैं। शनिवार को निगम कमिश्नर संस्कृति जैन ने जोन 19 के इलाकों का जायजा लिया। कमिश्नर ने 106 अधिकारी-कर्मचारियों को नोडल नियक्ति किया है, लेकिन इनमें से 40 ही फील्ड में उतरे।
सर्वे में पूछे जा रहे ये प्रश्न
नागरिकों का फीडबैक जरूरी –
भोपाल को स्वच्छता में शीर्ष स्थान दिलाने नागरिकों का फीडबैक जरूरी है। सर्वेक्षण में पूछे जा रहे सवालों के जवाब देकर शहर को नंबर वन बनाने में योगदान दें। यह प्रक्रिया स्वच्छता साख को मजबूती देगी।
– मालती राय, महापौर
स्वच्छता एक संकल्प है, जिसे मध्यप्रदेश में एक जन आंदोलन बनाया गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वच्छता संकल्प को प्रदेश ने आत्मसात किया है। स्वच्छता आंदोलन के परिणाम दिखाई देने लगे हैं। हर वर्ष की तरह दुनिया की सबसे बड़ी स्वच्छता प्रतियोगिता स्वच्छ सर्वेक्षण-2024 जारी है।
स्वच्छ सर्वेक्षण में प्रदेश के शहर बहुत गंभीरता के साथ अपनी भागीदारी कर रहे हैं। स्वच्छ सर्वेक्षण के दौरान भारत सरकार की सर्वेक्षण टीमें आकर शहरों में स्वच्छता व्यवस्थाओं का जायजा लेती हैं। इसमें स्वच्छता की आधारभूत तैयारियों का परीक्षण, खुले में शौच से मुक्ति और मल-जल का निस्तारण (ओडीएफ++ और वॉटर+) कचरा मुक्त शहरों के लिए स्टार रेटिंग (1,3 5 व 7 स्टार रेटिंग) सहित कुल तीन परीक्षण किए जाते हैं। अभी प्रदेश में आधारभूत तैयारियों का परीक्षण जारी है, जिसमें 269 शहरों में परीक्षण पूर्ण हो चुका है, शेष शहरों के परीक्षण के लिये टीमें पहुँच रही हैं। इसके बाद ओडीएफ++ और स्टार रेटिंग के परीक्षण शुरू होंगे।
उल्लेखनीय है की मध्यप्रदेश के नगरीय निकाय वर्ष भर शहरी स्वच्छता को सँवारने में जुटे रहते हैं। प्रदेश में नियमित कचरा संग्रहण, परिवहन और निपटान के लिए प्रभावी तंत्र विकसित किया गया है। जिसके माध्यम से शहरों की स्वच्छता सुनिश्चित की जा रही है। इसके साथ खुले में शौच पर प्रतिबंध को सफल बनाने के बाद शहरों को ओडीएफ़++ और वॉटर+ प्रमाण-पत्र दिलाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग प्रदेश के नागरिकों, युवाओं और जन-प्रतिनिधियों से शहरों को स्वच्छ बनाने में सहयोग की निरंतर अपील कर रहा है। शहरों का बदला हुआ स्वरूप शासन के प्रयासों की सफलता को प्रदर्शित कर रहा है।
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