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स्वच्छ सर्वेक्षण 2024-25 में स्वच्छ शहरों के मामले राजधानी भोपाल ने देश में दूसरा स्थान हासिल किया है. भोपाल की रैंकिंग में सुधार करते हुए दूसरा स्थान हासिल किया. देश के दूसरे क्लीनेस्ट सिटी में शुमार हुए भोपाल में अब जश्न की तैयारी है. भोपाल नगर निगम ने जनप्रतिनिधि स्वच्छता मित्रों और जनता के साथ जश्न मनाएंगी. स्वच्छता सर्वेक्षण-2024 में भोपाल देश के सबसे साफ शहरों में टॉप-3 पर है। राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू पुरस्कार देगी। निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने बताया, भोपाल ने 3 पायदान छलांग लगाई है और देश में दूसरे नंबर पर आया है
स्वच्छ सर्वेक्षण 2024 में राजधानी भोपाल ने पिछले साल की तुलना में तीन पायदान की छलांग लगाते हुए भारत के दूसरे क्लीनेस्ट सिटी का तमगा हासिल किया है.अहमदाबाद अव्वल आया है, जबकि लखनऊ ने 44वें पायदान से बड़ी छलांग लगाकर तीसरे स्थान पर पहुंच गई है.
17 जुलाई को राष्ट्रपति भवन में होगा स्वच्छ सर्वेक्षण 2024 अवॉर्ड वितरण कार्यक्रम
गौरतलब है 17 जुलाई को राष्ट्रपति भवन में होने वाले स्वच्छ सर्वेक्षण 2024 अवॉर्ड वितरण कार्यक्रम में होगा. अवॉर्ड समारोह में शामिल होने के लिए भोपाल मेयर और कमिश्नर आज नई दिल्ली के लिए रवाना होंगे, जहां आधिकारिक रूप से स्वच्छ शहर के विजेताओं की घोषणा भी होगी, इसके बाद अवॉर्ड दिए जाएंगे.
अवॉर्ड लेने नई दिल्ली के लिए रवाना होंगे भोपाल नगर निगम मेयर और कमिश्नर
रिपोर्ट के मुताबिक देश के स्वच्छ सिटी में दूसरा स्थान का अवॉर्ड पाने के लिए भोपाल नगर निगम मेयर और निगम कमिश्नर आज नई दिल्ली के लिए रवाना होंगे और 17 जुलाई यानी कल राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू के हाथों अवॉर्ड ग्रहण करेंगे.निगम शुक्रवार को भोपाल में जनप्रतिनिधि स्वच्छता मित्रों और जनता के साथ जश्न मनाने की तैयारी कर रही है.
राष्ट्रपति 17 जुलाई को सुपर लीग श्रेणी में इंदौर को अवॉर्ड देंगी. यह अवॉर्ड इंदौर को 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में मिलेगा. 3 से 10 लाख तक की जनसंख्या में उज्जैन और 20 हजार से अधिक जनसंख्या वाले में सीहोर जिले की बुदनी को यह अवॉर्ड मिलेगा.
इधर, पुरस्कार लेने के लिए मेयर मालती राय और निगम कमिश्नर हरेंद्र नारायण बुधवार को दिल्ली के रवाना होंगे। 17 जुलाई को नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में एक आयोजन होगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू करेंगी।
सबसे स्वच्छ राजधानी का तमगा मिलने की उम्मीद स्वच्छ सर्वेक्षण में इस बार भी मध्यप्रदेश के शहर बाजी मारेंगे। राजधानी भोपाल देश के सबसे स्वच्छ शहरों में दूसरे नंबर पर रहेगा। साथ ही सबसे स्वच्छ राजधानी का तमगा भी फिर मिलने की उम्मीद है।
पिछली बार पांचवें नंबर पर था भोपाल पिछले सर्वे में भोपाल 5वें नंबर पर था। कचरे की प्रोसेसिंग में सुधार व डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन की व्यवस्था को और पुख्ता कर भोपाल ने दावा मजबूत किया है। वहीं, फरवरी में हुई ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (जीआईएस) की वजह से भी भोपाल को फायदा मिलेगा।
जीआईएस के चलते राजधानी में 100 करोड़ रुपए से ज्यादा के काम शहर में हुए हैं। इसमें स्वच्छता से जुड़े काम भी शामिल थे। इसी दौरान स्वच्छता सर्वेक्षण टीमें भी भोपाल पहुंची थी। इसलिए दावा मजबूत है।
स्वच्छ सर्वेक्षण में भोपाल का अब तक का सफर स्वच्छ सर्वेक्षण में भोपाल ने 2017 और 2018 में लगातार दो साल देश में दूसरी रैंक हासिल की थी। 2019 में भोपाल खिसककर 19वें नंबर पर आ गया था। उस समय अफसरों के लगातार तबादले के कारण तैयारियों की दिशा ही तय नहीं हो पाई थी, लेकिन 2020 में कम बैक करते हुए 12 पायदान ऊपर खिसका और 7वीं रैंक हासिल की। 2021 के सर्वेक्षण में भी भोपाल ने 7वां स्थान हासिल किया था।
2022 के सर्वेक्षण में भोपाल की रैंक सुधरी और यह छठवें स्थान पर आ गया। वहीं, भोपाल को 5 स्टार मिला। 2023 के सर्वेक्षण में पांचवीं रैंकिंग रही थी। इस बार यह टॉप-3 में हो सकती है।
स्वच्छ सर्वेक्षण 2024 में इस बार प्रदेश के कुल 8 शहर सम्मानित किया गया हैं
दरअसल, स्वच्छ सर्वेक्षण 2024 में इस बार प्रदेश के कुल 8 शहर सम्मानित किए गए हैं. इनमें राजधानी भोपाल, देवास और शाहगंज को राष्ट्रपति पुरस्कार मिलेगा. इसके अलावा आवास व शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर जबलपुर और ग्वालियर को उल्लेखनीय प्रयासों के लिए सम्मानित करेंगे.
लगातार 7 बार नंबर-1 स्वच्छ शहर रहे इंदौर इस बार सुपर लीग श्रेणी में है
उल्लेखनीय है लगातार सात बार देश के नंबर-1 स्वच्छ शहरों में शुमार रहे इंदौर को इस बार नई कैटगरी स्वच्छ सुपर लीग में शामिल किया है. पिछले साल से जोड़ी स्वच्छ सुपर लीग में तीन साल से टॉप-3 में आने वाले शहरों को जोड़ा जाता है. इस साल इस लीग में एमपी के तीन शहरों क्रमशः इंदौर, उज्जैन और बुदनी को शामिल किया गया है.
]]>स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत नगरीय निकायों की टीम साल भर काम करती हैं। इसमें नियमित रूप से सफाई के अलावा, कचरा संग्रह, प्र-संस्करण, अधोसंरचना विस्तार, रख-रखाव और शहरों का सौंदर्यीकरण शामिल हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हस्तक्षेप से आज यह देश ही नहीं दुनिया का सबसे बड़ा आयोजन बन गया है। हर शहर को इसमें शामिल होना और अपनी रैंकिंग में सुधार करना गौरव का अनुभव कराता है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने स्वच्छ सर्वेक्षण के संबंध में मैदानी अमले को निर्देश भी जारी किये हैं।
वर्ष-2024 का स्वच्छ सर्वेक्षण अब तक का 9वां सर्वेक्षण है, जिसकी प्रमुख थीम 3-आर (रिसाइकल, रिड्यूस, रियूज) पर आधारित है। इसके प्रारंभ होने से मध्यप्रदेश ने देश के स्वच्छता परिदृश्य में अपनी बढ़त बना ली थी। अपने नियमित योगदान से मध्यप्रदेश शीर्ष स्थान पर बना हुआ है। वर्ष 2022 में मध्यप्रदेश को देश के सर्वश्रेष्ठ स्वच्छ प्रदेश का सम्मान प्राप्त हुआ एवं वर्ष 2023 में यह नजदीकी मुकाबले में देश के दूसरे नंबर का बेहतर राज्य घोषित किया गया। मध्यप्रदेश का शहर इंदौर लगातार सात सालों से देश का सबसे स्वच्छ शहर बना हुआ है। वर्ष 2024 में इसे सुपर लीग श्रेणी में शामिल किया गया है। इस वर्ष मध्यप्रदेश के सभी शहर इसमें अपनी दावेदारी कर रहे हैं। प्रदेश के सभी शहरों ने स्टार रेटिंग, ओडीएफ डबल प्लस के लिए अपना दावा किया है। इसके अलावा 44 शहरों ने वॉटर प्लस के लिए अपनी दावेदारी की है। हर शहर स्वच्छता के मापदंडों पर सफाई, संग्रहण, कचरा निपटान, प्रोसेसिंग आदि पर पूरा ध्यान दे रहा है। आज प्रदेश में लगभग 6700 टन कचरा प्रतिदिन संग्रह किया जाता है। इसके लिए 7500 से अधिक कचरा वाहन उपलब्ध कराए गए हैं। इस संग्रहित कचरे की प्रोसेसिंग के लिए हर छोटे-बड़े शहर में कम्पोस्टिंग इकाइयां, मटेरियल रिकवरी फैसिलिटीज, निर्माण अपशिष्ट प्रबंधन इकाई और मल-जल निस्तारण के लिये एफएसटीपी उपलब्ध हैं।
प्रदेश के बड़े शहरों में कचरा प्रोसेसिंग के लिए अत्याधुनिक इकाइयों की स्थापना की गई है। इसमें जबलपुर और रीवा में कचरे से बिजली, सागर व कटनी में कम्पोस्टिंग, के साथ इंदौर में कचरे से बॉयो सीएनजी निर्माण की इकाइयां लगाई जा चुकी हैं। इसके अलावा भोपाल में कपड़ा, थर्माकोल, प्लास्टिक, निर्माण के साथ मांसाहारी बाजारों से आने वाले कचरे के निपटान के लिए व्यवस्थाएं की गई हैं। प्रदेश में आज 700 से अधिक रिसाइकल, रिड्युज और रियूज़ (आरआरआर) केंद्र संचालित हैं। प्रदेश में एक लाख से कम जनसंख्या के शहरों में मल-जल प्रबंधन व्यवस्थाओं को तैयार करने के लिए कार्यवाही की जा रही है। इसके अंतर्गत जिन शहरों में सीवेज लाइन नहीं हैं, वहाँ नालियों को आपस में जोड़कर उन्हें एसटीपी तक ले जाने का कार्य किया जा रहा है।
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