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भारत की वायु सेना को मजबूत बनाने के लिए एक बड़ा बदलाव हो रहा है. नासिक शहर की वह बड़ी फैक्ट्री, जो पहले रूसी लड़ाकू विमानों को जोड़ने का काम करती थी, अब भारत के अपने बनाए विमानों पर ध्यान दे रही है. यह फैक्ट्री लगभग 1000 रूसी विमान बना चुकी है. अब यह तेजस लड़ाकू विमान और एचटीटी-40 ट्रेनर विमान बनाने में जुटी है. वहां से पहली बार स्वदेशी तेजस एलसीए एमके1ए विमान की उड़ान दिखेगी.
पुराने दिनों की यादें: रूसी विमानों का कारखाना
नासिक की यह फैक्ट्री भारत का सबसे बड़ा लड़ाकू विमान बनाने वाला केंद्र है. यह हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड का हिस्सा है. पहले यह फैक्ट्री सोवियत यूनियन (अब रूस) के डिजाइन वाले विमानों को जोड़ती थी. यहां से निकले विमान भारतीय हवाई सेना की ताकत बने.
मिग-21 का जादू: यह फैक्ट्री ने 575 मिग-21 विमान बनाए. मिग-21 को 'बाइसन' भी कहते हैं. यह छोटा लेकिन तेज विमान था, जो दुश्मनों को डराता था.
सु-30एमकेआई की ताकत: इसके अलावा, सु-30एमकेआई जैसे बड़े विमान भी यहां जोड़े गए. कुल मिलाकर, लगभग 1000 रूसी मूल के विमान इस फैक्ट्री से बने.
ये विमान भारत को विदेश से मिले थे, लेकिन यहां जोड़कर तैयार किए जाते थे. इससे भारत की हवाई सेना मजबूत हुई, लेकिन अब समय बदल गया है. भारत अब खुद के विमान बना चुका है.
नया दौर: स्वदेशी विमानों की शुरुआत
अब नासिक की फैक्ट्री को नया रूप दिया गया है. पुराने हैंगर (बड़े गोदाम जैसे कमरे) को साफ-सुथरा और आधुनिक बनाया गया. पुराने उपकरण हटा दिए गए. अब नए जिग्स, फिक्सचर और टूल्स लगाए गए हैं, जो भारतीय डिजाइन वाले विमानों के लिए हैं.
निवेश का जुगाड़: इस बदलाव पर 500 करोड़ रुपये खर्च हुए. फैक्ट्री का इलाका 13 लाख वर्ग फुट का है. यह बहुत बड़ा है.
तेजस एलसीए एमके1ए: यह भारत का अपना लड़ाकू विमान है. यह हल्का, तेज और चालाक है. नासिक में नई असेंबली लाइन बनी है. यहां पहले साल में 8 तेजस विमान बनेंगे. बाद में और तेजी से बनाए जा सकेंगे.
एचटीटी-40 ट्रेनर: यह बेसिक ट्रेनर विमान है. पायलटों को फाइटर जेट उड़ाना सिखाने के लिए. यह विमान पूरी तरह भारतीय डिजाइन का है. बेंगलुरु और नासिक दोनों जगह बन रहा है, ताकि जल्दी डिलीवरी हो.
फैक्ट्री के अधिकारी कहते हैं कि नई लाइन पूरी तरह तैयार है. इसमें 30 से ज्यादा जिग्स हैं, जो विमान के मुख्य हिस्सों जैसे सेंटर फ्यूजलेज, फ्रंट फ्यूजलेज, रियर फ्यूजलेज, विंग्स और एयर इंटेक को जोड़ने के लिए हैं.
उत्पादन की क्षमता: कितने विमान बनेंगे?
भारत को हर साल ज्यादा विमान चाहिए. पुराने विमान जैसे मिग-21 को रिटायर कर दिया गया है. वायु सेना को 30-40 नए विमान सालाना चाहिए.
नासिक की भूमिका: यहां से 8 तेजस सालाना.
बेंगलुरु की मदद: वहां दो और लाइनें हैं. कुल मिलाकर, एचएएल 24 विमान सालाना बना सकेगी.
सु-30 का हिस्सा: फैक्ट्री का कुछ हिस्सा अभी भी सु-30एमकेआई के लिए है. जल्द 15 नए सु-30 के ऑर्डर पूरे होंगे.
आत्मनिर्भरता की उड़ान
नासिक की फैक्ट्री अब भारत की शान है. पहले रूसी जेट्स, अब स्वदेशी तेजस. यह बदलाव दिखाता है कि भारत अब खुद मजबूत हो रहा है. हवाई सेना को नई ताकत मिलेगी. आने वाले दिनों में और तेजी से उत्पादन होगा.
]]>भारत और अमेरिका के बीच टैरिफ को लेकर चिंता बनी हुई है, लेकिन सुरक्षा सहयोग के मोर्चे पर सकारात्मक प्रगति देखने को मिल रही है। अमेरिकी विमान इंजन निर्माता GE (जनरल इलेक्ट्रिक) इस महीने के अंत तक 99 GE-404 इंजनों में से पहला इंजन हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को सौंपने की तैयारी में है। यह डिलीवरी दो साल की देरी के बाद हो रही है, जिससे भारतीय वायुसेना (IAF) को काफी राहत मिलेगी। यह कदम तेजस एमके 1ए कार्यक्रम को गति देगा, जिसके तहत भारतीय वायु सेना को 83 विमानों की सप्लाई की जानी है। इस विमान ने मार्च 2024 में अपनी पहली उड़ान भरी थी, लेकिन तब इसमें नए इंजन के बजाय रिजर्व इंजन का उपयोग किया गया था।
GE-404 इंजन भारत में निर्मित तेजस मार्क 1-A लड़ाकू विमानों को पावर प्रदान करता है। HAL द्वारा इन विमानों की डिलीवरी में हो रही देरी को लेकर वायुसेना पहले ही चिंता जता चुकी है। मामले की जानकारी रखने वाले अधिकारियों के अनुसार, पहला इंजन वर्तमान में टेस्ट-बेड पर है और इस महीने के अंत तक HAL को मिल सकता है। इसके बाद 2025 में 12 इंजन और उसके बाद हर साल 20 इंजन की डिलीवरी की योजना है।
बता दें कि 2021 में 716 मिलियन डॉलर के कॉन्ट्रैक्ट के तहत, जीई को 99 एफ-404 इंजनों की आपूर्ति करनी थी, जिसकी शुरुआत मूल रूप से मार्च 2023 से होने वाली थी। हालांकि, सप्लाई चैन में समस्याओं और महामारी के दौरान पुराने सप्लायर के बंद होने के कारण इसमें देरी हुई। अब, अधिकारियों के अनुसार, पहला इंजन परीक्षण के दौर से गुजर रहा है और इसे मार्च के अंत तक एचएएल को सौंप दिया जाएगा।
भारत में GE-414 इंजन निर्माण पर काम
GE और HAL मिलकर भारत में GE-414 इंजन के निर्माण पर भी कार्य कर रहे हैं। यह इंजन एडवांस मल्टी-रोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) को शक्ति देगा, जिसे रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) विकसित कर रहा है। इस प्रोजेक्ट के तहत इंडिया-US के बीच iCET समझौते के तहत तकनीक ट्रांसफर की योजना बनाई गई है।
AMCA के लिए निजी क्षेत्र को शामिल करने की योजना
HAL द्वारा 83 LCA MK-1 A लड़ाकू विमानों की सप्लाई में देरी से भारतीय वायुसेना नाराज है। इसी वजह से रक्षा मंत्रालय ने रक्षा सचिव आर. के. सिंह की अध्यक्षता में एक समिति गठित की है, जो भारत के पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान के निर्माण के लिए व्यावसायिक मॉडल पर काम करेगी। यह समिति तकनीकी पहलुओं पर ध्यान नहीं देगी, बल्कि इसमें निजी क्षेत्र की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए एक रोडमैप तैयार करेगी। उद्देश्य यह है कि भारत भविष्य में केवल HAL पर निर्भर न रहे और अन्य निर्माता भी लड़ाकू विमान निर्माण में योगदान दें।
भारत को अमेरिकी F-35 या फ्रांसीसी राफेल का विकल्प
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को F-35 फिफ्थ-जनरेशन फाइटर जेट की आपूर्ति का प्रस्ताव दिया है, लेकिन भारत इस दौरान फ्रांसीसी विकल्प पर भी विचार कर रहा है। फ्रांस के साथ बातचीत के तहत ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत भारत में राफेल लड़ाकू विमान और उसके M-88 इंजन के निर्माण का प्रस्ताव भी शामिल है। सुरक्षा क्षेत्र में हो रही इन नई पहल से भारत के रक्षा क्षमताओं को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
]]>तेजस विमानों के लिए अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक (जीई) से इंजनों की आपूर्ति नहीं होने को लेकर भारत सरकार बेहद चिंतित है। जीई की तरफ से अब अप्रैल, 2025 से इंजनों की आपूर्ति को सुचारू करने का भरोसा दिलाया गया है। हालांकि, रक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने स्पष्ट कर दिया कि अगर इस तारीख के बाद भी आपूर्ति शुरू नहीं हुई तो फिर जीई से सीधे तकनीक हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) को सौंपे जाने की मांग की जाएगी। इसके बाद एचएएल में ही फिर इंजनों के निर्माण की प्रक्रिया शुरू होगी।
सूत्रों के अनुसार एचएएल और जीई के बीच 2021 में समझौता हुआ था, जिसके तहत तेजस विमानों के लिए 99 इंजनों की आपूर्ति जीई को करनी है। इसकी शुरुआत अप्रैल, 2023 से होनी थी और हर साल 16 इंजनों की आपूर्ति भारत को की जानी थी। लेकिन, पिछले डेढ़ साल में महज दो इंजन ही जीई ने दिए हैं, जबकि मार्च 2025 तक 32 इंजन की आपूर्ति करनी है।
सिर्फ इंजन के कारण रुका है निर्माण वहीं रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, इस देरी के कारण एचएएल तेजस का निर्माण नहीं कर पा रहा है। स्थिति यह है कि दर्जनभर तेजस बनकर तैयार हैं, लेकिन उनमें इंजन फिट करने का काम ही बचा है। बता दें, रक्षा मंत्रालय और एचएएल के बीच 2021 में वायुसेना के लिए 83 तेजस मार्क 1ए विमानों की खरीद को लेकर करार हुआ था। तीन साल बाद यानी मार्च, 2024 से एचएएल को उसे विमानों की आपूर्ति शुरू करनी थी। हर साल 24 विमान वायुसेना को सौंपने का लक्ष्य था, लेकिन अभी तक एक भी विमान नहीं सौंपा जा सका है। वायुसेना इसे लेकर चिंतित है।
जुर्माने से इनकार
रक्षा सूत्रों के अनुसार, ऐसे मामले में जीई कंपनी पर जुर्माना लगाने का विकल्प सरकार के पास है, लेकिन फिलहाल यह कदम उठाने जाने से सरकार ने इनकार किया है।
कंपनी के दिवालिया होने से हो रहा विलंब
रक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि इस मामले में बार-बार जीई को कहा गया है और कंपनी ने भरोसा दिलाया है कि अप्रैल, 2025 से इंजनों की आपूर्ति सुचारू हो जाएगी। जीई ने कहा कि दक्षिण कोरिया की जो कंपनी उसे पुर्जों की आपूर्ति करती थी, वह दिवालिया हो गई है। इसके चलते विलंब हुआ है।
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