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राष्ट्रीय जनता दल (RJD) नेता और महागठबंधन की ओर से मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार तेजस्वी यादव ने शनिवार को कहा कि बिहार को ‘नंबर एक' बनाने के लिए राज्य में निवेश आकर्षित करने, शिक्षा को बढ़ावा देने और स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने की आवश्यकता है। RJD नेता ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधते हुए कहा, “हमारे ‘चाचा' अब बूढ़े हो गए हैं और बिहार का नेतृत्व करने में सक्षम नहीं हैं। उन्हें मोदी जी और अमित शाह ने ‘हाइजैक' कर लिया है।”
खगड़िया में एक जन सभा को संबोधित करते हुए तेजस्वी ने कहा कि वह केवल सरकार बनाने नहीं आए हैं बल्कि “खगड़िया, परबत्ता और बिहार को बनाने” आए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार के पास कोई दृष्टि नहीं है और वह उनकी योजनाओं की नकल कर रही है, “लेकिन उसे सही तरह से नकल करना भी नहीं आता।”
सरकार बनने पर तेजस्वी करेंगे ये काम
पूर्व उपमुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार बनने के बाद महिलाओं को सालाना 30 हजार रुपए दिए जाएंगे, जो राजग सरकार द्वारा दिए जाने वाले 10 हजार रुपए के कर्ज़ से अलग होगा। उन्होंने दावा किया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि बिहार में जमीन की कमी के कारण कारखाने नहीं लगाए जा सकते। उन्होंने कहा कि वह बेरोजगार डिग्रीधारकों की पीड़ा को समझ सकते हैं। तेजस्वी ने कहा कि महागठबंधन सरकार बनने के 20 दिनों के भीतर “हर घर को सरकारी नौकरी देने” का कानून लाया जाएगा और 20 महीनों के भीतर नौकरियां दे दी जाएंगी। संसाधन कहां से आएंगे, इस बारे में तेजस्वी ने कहा, “कुछ दिन इंतजार कीजिए, मैं बताऊंगा कि पैसा कहां से लाऊंगा।”
अदालत ने तय किए आरोप
पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि आज अदालत ने लालू प्रसाद, उनकी पत्नी राबड़ी देवी और उनके पुत्र तेजस्वी यादव के खिलाफ आरोप तय किए हैं। ये आरोप बहुत गंभीर हैं, जिनमें सरकारी संपत्ति के आवंटन में भ्रष्टाचार, षड्यंत्र रचना और बेईमानी से सरकार की निर्णय प्रक्रिया में गड़बड़ी करने जैसे अपराध शामिल हैं। इन मामलों में आईपीसी की धारा 120-बी और 420 दोनों शामिल हैं। उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव बिहार बदलने निकले हैं, जबकि उन्हीं के खिलाफ 420 का आरोप अदालत ने तय किया है। सवाल यह है कि जब किसी की ऐसी छवि और ऐसे आरोप हों, तो वह बिहार को कैसे बदल सकता है?
'जमीन ले लेंगे, लेकिन नौकरी नहीं देंगे'
अपने प्रहार को धार देते हुए प्रसाद ने कहा कि अगर लालू प्रसाद के पूरे शासनकाल को तीन वाक्यों में कहा जाए तो वह होंगे- चारा खाना, अलकतरा पीना और सरकारी संपत्ति तथा टेंडर में हेराफेरी कर जमीन हड़पना। इसमें एक चौथा मॉडल भी जोड़ना चाहिए, 'जमीन दो, नौकरी लो।' यह चारों मॉडल लालू राज की पहचान रहे हैं। इस मॉडल की सबसे खास बात यह रही कि इसका सारा लाभ सिर्फ परिवार तक सीमित रहा, बाहर किसी को नहीं मिला।
उन्होंने आरोप लगाया कि जमीन दो, नौकरी लो योजना का सबसे बड़ा शिकार गरीब लोग हुए हैं। यह जमीन मजदूरों और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों से ली गई। नौकरी देने से पहले उनसे जमीन छीनी गई। यही कांग्रेस और राजद का तथाकथित सामाजिक न्याय है। मुकदमे की चार्जशीट में दर्ज तथ्यों को दोहराने के साथ ही सांसद रविशंकर प्रसाद ने तेजस्वी यादव का वर्ष 2020 के चुनाव का हलफनामा भी दिखाया।
सवाल उठाया कि 17 साल की उम्र में तेजस्वी के पास 11 संपत्ति कैसे हो गईं? राबड़ी देवी के नाम पद दर्ज संपत्तियों का ब्योरा साझा करते हुए प्रश्न किया कि राबड़ी देवी ऐसा क्या कार्य करती हैं? और आय का स्रोत क्या है? आईआरसीटीसी होटल घोटाला मामले में दाखिल चार्जशीट की बात करते हुए भाजपा सांसद ने कहा कि लालू परिवार के भ्रष्ट आचरण की पोल एक बार फिर खुल गई है। यह विषय बिहार में बड़ा मुद्दा है और जनता इस पर जरूर विचार करेगी।
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बिहार की चार सीटों पर हुए उपचुनाव में शनिवार (23 नवंबर) को जारी हुए नतीजों में इंडिया गठबंधन को भारी नुकसान हुआ है. सभी चार सीटों पर हार हुई है. इस हार के बाद बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की प्रतिक्रिया सामने आई है. उन्होंने कहा कि बिहार उपचुनाव की जहां तक बात है तो लोकसभा में हम लोग जीते थे. अभी 2024 के विधानसभा उपचुनाव में हारे हैं. 2025 के चुनाव में हम लोग जीतेंगे.
उधर दूसरी ओर तेजस्वी यादव ने झारखंड विधानसभा चुनाव में जीत को लेकर प्रतिक्रिया दी. कहा कि जो जनसमर्थन बिहार और झारखंड के लोगों ने दिया उसके लिए हम आभारी हैं. पिछली बार झारखंड में मात्र एक सीट हम लोग जीत पाए थे. इस बार आरजेडी ने झारखंड में बहुत ही अच्छा प्रदर्शन किया है. लगातार हम लोगों का प्रयास रहा था कि जितनी सीट पर हम लोग लड़ें वो जीतें. चार सीट पर हम लोगों की जीत हुई है. एक-दो सीट पर बहुत ही कम मार्जिन से हम लोगों की हार हुई है. अगली बार और कोशिश होगी. तेजस्वी यादव ने कहा कि एक बात तो तय है कि झारखंड में हम लोग जीते हैं. बहुत ही प्रचंड बहुमत के साथ दोबारा हेमंत सोरेन मुख्यमंत्री बने हैं. उनको भी हम धन्यवाद देते हैं. बता दें कि बिहार में चार सीट रामगढ़, बेलागंज, तरारी और इमामगंज में उपचुनाव हुआ था. तरारी सीट को माले से छीनकर बीजेपी ने यहां जीत दर्ज की है. रामगढ़ की बात करें तो आरजेडी से यह सीट छीनकर बीजेपी ने जीत दर्ज की है. इसके अलावा इमामगंज सीट 'हम' के खाते में थी और उपचुनाव में भी 'हम' के पास ही है. बेलागंज सीट आरजेडी के पास थी लेकिन यहां से जेडीयू ने जीत दर्ज की है.
]]>उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय जनता दल के संगठन को मजबूत करने के लिए कार्यकर्ता दिन रात मेहनत करते हैं। चूंकि, साल 2025 में विधानसभा चुनाव हैं। हम लोग बिहार के हर जिले में कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं। पहली बार ऐसा कार्यक्रम हो रहा है, जहां हम पंचायतों के अध्यक्षों से सीधे तौर पर बात करेंगे। इस दौरान, उनसे चर्चा की जाएगी कि कैसे संगठन को मजबूती प्रदान की जाए।
उन्होंने कहा, "डबल इंजन की सरकार के पास 10 माह में एक भी उपलब्धि नहीं है। सत्ता में रहकर विपक्ष को गाली दी जा रही है। जो काम हमने 17 माह में करके दिखाया था। वह काम 19 साल के एनडीए के शासन में नहीं हुआ। बिहार की डबल इंजन की सरकार को बस सत्ता में रहना है। बिहार में बेरोजगारी, महंगाई, पलायन, गरीबी है। सरकार इस पर काम नहीं करती है और न ही बताती है कि इन पर क्या योजना है। बिहार में सबसे महंगी बिजली मिलती है। स्मार्ट मीटर इनका 'स्मार्ट चीटर' हो चुका है। जनता त्रस्त हो चुकी है।"
तेजस्वी ने कहा, "अगर हमारी सरकार बनती है तो लोगों को 200 यूनिट फ्री बिजली दी जाएगी। कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हुए उन्होंने कहा, बिहार की कानून-व्यवस्था भगवान भरोसे हैं। ऐसा कोई दिन नहीं बीतता जब, हत्या, लूट, अपहरण रेप जैसे संगीन मामले सामने न आएं। लेकिन यहां कोई सुनवाई नहीं होती है। एफआईआर होती है तो कार्रवाई नहीं होती। दोषियों को सजा नहीं मिल रही है।"
तेजस्वी ने आरोप लगाया कि बिहार में अफसरशाही चरम पर है। जनता जानती है कि यहां पर अधिकारियों के ट्रांसफर-पोस्टिंग कैसे किए जाते हैं। हमें नया बिहार, विकसित बिहार बनाना है। डबल इंजन की सरकार में बिहार को क्या मिला? केंद्र में बिहार के वोटरों के दम पर सरकार बनी है। लेकिन, इसके बदले में बिहार को क्या मिला। चुनाव से पहले कहते हैं कि बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देंगे, चुनाव के बाद अपनी बात से मुकर जाते हैं।
]]>तेजस्वी यादव ने अपना पत्र सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट भी किया है। कहा है कि प्रधानमंत्री अब लोकतांत्रिक लड़ाई लड़ने के बजाय एक संघर्षरत 34 वर्षीय युवा को जेल भेजने की धमकी दे रहे हैं। वह ऐसी धमकियाँ देकर संविधान का उल्लंघन नहीं कर रहे हैं। तेजस्वी ने पीएम को संबोधित करते हुए कहा है कि चुनाव आते-जाते रहेंगे लेकिन संविधान, देश की सामाजिक संरचना और उसके ढाँचे पर अब और हमला मत कीजिए। आप बिहार आए और यहां आकर आप ने बहुत ही झूठी, आधारहीन और तथ्यहीन बातें कही। आपसे अब उंचे विमर्श की अपेक्षा नहीं बची है। उन्होंने ये भी लिखा कि एक विशाल ह्रदय वाले देश के प्रधानमत्री की भाषा ऐसी होनी चाहिए, आप खुद ही सोचिए। आगे लिखा कि आपके चुनावी भाषणों का गिरता पैमाना ही आपकी राजनैतिक सोच का सही प्रतिबिम्ब है। प्रधानमंत्री जी, आपके नाम खुला ख़त है। जरा समय निकाल जातिगत जनगणना, आरक्षण, मंडल कमीशन और संविधान पर अवश्य ही अपना ज्ञानवर्धन कर लीजिएगा।
पीएम के नाम अपने खत में तेजस्वी यादव ने नरेंद्र मोदी पर जमकर भड़ास निकाली है। पत्र में कहा है कि जब हम बिहार में सरकार में आए तो हमने सरकार में आते ही राज्य के खर्चे पर जातिगत सर्वेक्षण कराया। आपने तो उसके लिए मना कर दिया था। तेजस्वी ने पीएम को संवेदनहीन भी कहा है। आगे लिखा कि हमने अपने खर्चे से सर्वेक्षण कराया और उसकी रिपोर्ट के आधार पर आरक्षण का दायरा 75% तक बढ़ा दिया। अब आपसे बार-बार गुजारिश करते रहे और हाथ जोड़कर मांग करते रहे कि इसको संविधान की नौंवी अनुसूची में डाल दीजिए। लेकिन प्रधानमंत्री मूल रूप से आप पिछड़ा और दलित विरोधी मानसिकता के हैं। कौन भूल सकता है कि 1990 में जब मंडल कमीशन लागू हुआ था तब मंडल कमीशन के विरोध में मोदी जी आडवाणी जी के साथ आरक्षण विरोधी रथ के सारथी थे।
अपने पत्र में तेजस्वी यादव ने कहा है कि बाबा साहेब द्वारा दिए गए आरक्षण को समाप्त करने के लिए मोदी जी ने नया और नायाब तरीका ढूंढ लिया है। संविधान की धारा 15 और धारा 16 के तहत आरक्षण सरकारी नौकरियों में मिलता है। अपने रेलवे, सेना और अन्य विभागों से सरकारी नौकरियां ही खत्म कर दी है फिर आरक्षण की अवधारणा कहां जाएगी। लेकिन यह गंभीर चिंता की बात है कि आपकी प्राथमिकताओं में ये चीजें है ही नहीं। हम आपसे कई बार आग्रह कर चुके हैं कि आप प्राइवेट सेक्टर में भी आरक्षण की व्यवस्था कीजिए ताकि व्यापक बहुजन आबादी, दलित समुदाय और अन्य वंचित समूह को उसका संवैधानिक हक मिल सके।
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