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कर्नाटक के राज्यपाल और पूर्व केन्द्रीय मंत्री थावरचंद गहलोत की तबीयत अचानक बिगड़ गई है। गुरुवार को पत्नी की तबीयत बिगड़ने की खबर लगते ही थावरचंद गहलोत अपने घर उज्जैन के नागदा पहुंचे हैं। बताया जा रहा है कि थावरचंद गहलोत की बीमार पत्नी का घर पर ही डॉक्टरों की निगरानी में इलाज चल रहा है। वहीं थावरचंद गहलोत के अचानक नागदा पहुंचने पर राजनीतिक हलकों में अटकलें लगना शुरू हो गई हैं।
थावरचंद गहलोत की पत्नी की तबीयत बिगड़ी
कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत की पत्नी अनीता गहलोत की तबीयत गुरुवार को अचानक बिगड़ गई। तबीयत बिगड़ने पर उन्हें तुरंत नागदा के निजी अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उनका इलाज किया। अभी अनीता गहलोत का घर पर ही डॉक्टरों की निगरानी में इलाज किया जा रहा है। बताया गया है कि अनीता गहलोत का ब्लड प्रेशर काफी बढ़ गया था।
मुंबई से नागदा पहुंचे थावरचंद गहलोत
जिस वक्त नागदा में अनीता गहलोत की तबीयत बिगड़ी उस वक्त थावरचंद गहलोत मुंबई में थे। जब उन्हें पत्नी की तबीयत खराब होने की सूचना मिली तो वो तुरंत मुंबई से सीधे उज्जैन पहुंचे और फिर वहां से नागदा स्थित अपने घर। अनीता गहलोत की तबीयत बिगड़ने की खबर लगते ही थावरचंद गहलोत के घर के बाहर मीडिया का जमावड़ा लग गया। पत्नी का हालचाल जानने के बाद थावरचंद गहलोत कुछ पर रुके और फिर कर्नाटक के लिए रवाना हो गए।
राज्यपाल की गैर मौजूदगी में कर्नाटक में सीएम का इस्तीफा
उधर कर्नाटक में राज्यपाल थावरचंद गहलोत की गैरमौजूदगी में बड़ा सियासी घटनाक्रम हुआ। कर्नाटक के सीएम सिद्धारमैया ने इस्तीफा दे दिया है। इससे पहले सीएम सिद्धारमैया ने राज्यपाल थावरचंद गहलोत से मिलने का समय मांगा था लेकिन राज्यपाल के बेंगलुरू से बाहर होने के कारण उन्हें समय नहीं मिला था। अब खबरें हैं कि सिद्धारमैया राज्यपाल दफ्तर को अपना इस्तीफा सौंप सकते हैं। जिसे राज्यपाल बाद में स्वीकार कर सकते हैं।
थावरचंद गहलोत के दामाद ने छोड़ी कांग्रेस
पांच दिन पहले 23 मई को थावरचंद गहलोत के दामाद विशाल मालवीय ने कांग्रेस पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। विशाल मालवीय थावरचंद गहलोत के दामाद होने के साथ ही मध्यप्रदेश कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और मंत्री रहे राधाकिशन मालवीय के पोते हैं। विशाल वर्तमान में इंदौर जनपद पंचायत में सदस्य हैं और देवास-शाजापुर से लोकसभा चुनाव लड़ने वाले राजेंद्र मालवीय के बेटे हैं। कांग्रेस से इस्तीफा देने के बाद विशाल मालवीय ने प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी (jitu patwari) की कार्यशैली पर सवाल उठाए थे। उन्होंने अपने इस्तीफे में लिखा था- जो लोग केवल नेताओं के आगे पीछे घूमकर व्यक्तिगत लाभ साधने में लगे हैं, उन्हें संगठन में पद व प्रतिष्ठा प्रदान की जा रही है। वर्षों से पार्टी के लिए समर्पित कार्यकर्ताओं को लगातार उपेक्षित कर हाशिये पर धकेला जा रहा है। संगठन में आज स्वयं को उपेक्षित व असहज महसूस करना अत्यन्त दुर्भाग्यपूर्ण है।
थावरचंद गहलोत एमपी के सीनियर नेता हैं। केंद्र की राजनीति में शुरू से सक्रिय रहे हैं। अभी कर्नाटक के राज्यपाल हैं। उन्हें उपराष्ट्रपति पद का प्रबल दावेदार माना जा रहा है। उनके राजनीतिक अनुभव और जाति के समीकरण को भी ध्यान में रखा जा रहा है। इससे उनका नाम इस दौड़ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
रतलाम के रहने वाले हैं थावरचंद गहलोत
थावरचंद गहलोत का राजनीतिक सफर मध्य प्रदेश के रतलाम जिले के आलोट से शुरू हुआ है। वह राजनीतिक और जातिगत समीकरणों में फिट बैठते हैं। उनके पास राज्यसभा का लंबा अनुभव है। वह राज्यसभा में सदन के नेता भी रह चुके हैं। इसके अलावा, वह मोदी सरकार में दो बार केंद्रीय मंत्री रहे हैं। वह बीजेपी की सबसे बड़ी संसदीय समिति के सदस्य भी रहे हैं।
अनुसूचित जनजाति से आते हैं गहलोत
77 साल के गहलोत अनुसूचित जनजाति से आते हैं। इस वजह से जातिगत समीकरणों में भी वह फिट बैठते हैं। माना जा रहा है कि बीजेपी किसी समर्पित कार्यकर्ता को उपराष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार बना सकती है। थावरचंद गहलोत उनमें से एक हो सकते हैं।
1980 में बने थे पहली बार विधायक
थावरचंद गहलोत 1980 में पहली बार मध्य प्रदेश में विधायक बने थे। 1990 में वह एमपी सरकार में राज्यमंत्री बन गए। 1996 में पहली बार लोकसभा चुनाव जीतकर सांसद बने। वहीं 1998 से 2004 तक लगातार लोकसभा सांसद रहे हैं। 2012 में पहली बार राज्यसभा के लिए चुने गए। 2018 में फिर से राज्यसभा गए। 2014 में मोदी सरकार में केंद्रीय मंत्री बने। 2019 में केंद्रीय मंत्री के साथ-साथ राज्यसभा में वह सदन के नेता भी बने। 2021 में कर्नाटक के राज्यपाल की जिम्मेदारी सौंपी गई। इसके बाद से पद पर बने हुए हैं।
पीएम मोदी के गुड बुक में हैं गहलोत
थावरचंद गहलोत को पीएम मोदी का करीबी माना जाता है। उनके पास राजनीतिक अनुभव के साथ-साथ बीजेपी में भी बड़ी जिम्मेदारियां निभाने का अनुभव है। वह बीजेपी के राष्ट्रीय सचिव और उत्तर पूर्व भारत के प्रभारी भी रह चुके हैं। इसके अलावा, वह बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी रहे हैं।हालांकि थावरचंद गहलोत के साथ अन्य भी कई नामों की चर्चा है। मध्य प्रदेश से वह अकेले हैं, जिनके नाम की चर्चा है। हालांकि अंतिम निर्णय बीजेपी और एनडीए गठबंधन को लेना है कि उनका संयुक्त उम्मीदवार कौन होगा।
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