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प्रदेश के सरकारी स्कूलों में स्मार्ट कक्षाओं के साथ-साथ शिक्षकों को भी तकनीक से लैस किया जा रहा है। स्कूलों को स्मार्ट बनाने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग नवाचार कर रहा है। इस सत्र में पहली से आठवीं कक्षा तक के शिक्षकों को टैबलेट से लैस किया जाएगा। इसके तहत प्रदेश के 75 हजार शिक्षकों को टैबलेट खरीदने के लिए राशि प्रदान की जाएगी। टैबलेट में पूरा पाठ्यक्रम अपलोड होगा। इसके माध्यम से शिक्षक कक्षा में बच्चों को पढ़ाएंगे। पिछले सत्र में प्राथमिक, हाई व हायर सेकेंडरी स्कूलों में पदस्थ शिक्षकों को टैबलेट खरीदने के लिए शासन ने राशि उपलब्ध कराई थी।इस संबंध में राज्य शिक्षा केंद्र ने आदेश जारी किए हैं।
जारी आदेश में निर्देशित किया गया है कि दिसंबर से पहले शिक्षकों को टैबलेट खरीदने की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। शिक्षकों को निर्देशित किया गया है कि 30 नवंबर तक टैबलेट खरीदकर उसकी रसीद राज्य शिक्षा केंद्र को भेजनी होगी, जिससे राशि का भुगतान 31 दिसंबर से पहले उनके खातों में कर दिया जाए।
टैबलेट के लिए 113 करोड़ रुपये की राशि होगी खर्च
शासन की ओर से टैबलेट खरीदने के लिए प्रति शिक्षक 15 हजार रुपये का भुगतान किया जाएगा। ऐसे में 75 हजार 598 शिक्षकों को टेबलेट खरीदने के लिए करीब 113 करोड़ रूपये की राशि मंजूर की गई है। विभाग ने निर्देशित किया है कि टैबलेट शिक्षक खुद खरीदकर रसीद राज्य शिक्षा केंद्र के पोर्टल पर अपलोड करना होगा। इसके बाद शिक्षकों के खाते में यह राशि भेजी जाएगी।
चार साल से पहले हुए रिटायर तो चुकानी होगी राशि
विभाग ने निर्देशित किया है कि दो साल से पहले सेवानिवृत्त होने वाले शिक्षकों को टैबलेट खरीदने की बाध्यता नहीं होगी।यदि शिक्षक दो साल नौकरी करने के बाद सेवानिवृत्त हो जाता है तो उन्हें टैबलेट की राशि शासन के खाते में जमा करानी होगी। अगर टैबलेट खरीदने के बाद शिक्षक तीन तक नौकरी कर सेवानिवृत्त हो जाता है, तो उसे बचे हुए एक साल का 3750 रूपये शासन के खाते में जमा करने होंगे। यदि दो साल पहले सेवानिवृत्त हुए तो सात हजार रुपये जमा करने होंगे।
मप्र बोर्ड की 10 वीं का परिणाम पिछले छह वर्षों में इस वर्ष सबसे खराब रहा था। 10 वीं का परिणाम 58.10 प्रतिशत रहा है। साथ ही इस साल से बेस्ट आफ फाइव योजना भी समाप्त कर दी गई है। इस कारण स्कूल शिक्षा विभाग ने 10 वीं बोर्ड परीक्षा का परिणाम सुधारने के लिए नौवीं कक्षा से जोर देना शुरू कर दिया है। इसके तहत अब उन स्कूलों में सुपर सेक्शन बनाया जाएगा, जहां 30 से अधिक विद्यार्थी फेल हुए हैं।
अलग से लगेंगी कक्षाएं
नौवीं कक्षा में फेल विद्यार्थियों की अलग से कक्षाएं लगाई जाएंगी। सभी विषयों की पढ़ाई के लिए शिक्षक लगाए जाएंगे। साप्ताहिक और मासिक टेस्ट के साथ ही तिमाही और छमाही परीक्षा की उत्तरपुस्तिकाओं से एक-एक सवाल पर चर्चा की जाएगी। शिक्षकों काे भी प्रशिक्षित किया जाएगा कि कमजोर विद्यार्थियों को कैसे पढ़ाया जाना चाहिए।
नौवीं के तिमाही व छमाही परीक्षा का भी आकलन होगा
स्कूल शिक्षा विभाग नौवीं कक्षा से ही गुणवत्ता सुधारने का प्रयास कर रहा है। साथ ही नौवीं कक्षा के तिमाही व छमाही परीक्षा परिणाम के पांच-पांच फीसद अंक वार्षिक परीक्षा के परिणाम में जोड़े जाएंगे। इससे विद्यार्थी तिमाही व छमाही परीक्षाओं को गंभीरता से लेंगे और ध्यान केंद्रित करेंगे।तिमाही व छमाही परीक्षा के परिणामों का भी आकलन किया जाएगा, ताकि वार्षिक परीक्षा में सुधार किया जा सके।
कमजोर विद्यार्थियों पर होगा फोकस
विभागीय अधिकारियों का मानना है कि कक्षाओं में शिक्षक दो स्तर पर पढ़ाता है। शिक्षक का ध्यान अधिकतर तेज विद्यार्थियों पर ही होता है। साथ ही सामान्य विद्यार्थियों के स्तर पर भी पढ़ाया जाता है। कक्षा के कमजोर विद्यार्थियों पर सामान्यत: शिक्षकों का विशेष ध्यान नहीं होता है। उनके लिए अलग से रणनीति बनाकर उन्हें पढ़ाया जाएगा।