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छत्तीसगढ़ राज्य में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल की सूचना मिली है। यहां खाद्य विभाग में कई अधिकारियों के तबादले किए गए है। कई जिलों में पदस्थ अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। वहीं, कुछ सहायक खाद्य अधिकारियों को प्रभारी खाद्य अधिकारी की जिम्मेदारी भी दी गई है। इन तबादलों को विभागीय कार्यों में बेहतर समन्वय और प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। विभाग ने इसके लिए आदेश जारी किया है।
जारी आदेश के मुताबिक, आशीष चतुर्वेदी को जशपुर से महासमुंद भेजा गया है। अरुण मेश्राम को राजनांदगांव से जशपुर भेजा गया है। शिवेंद्र कामठे को सरगुजा से संचालनालय में ट्रांसफर किया गया है। इसके अलावा सुरेश साहू को दुर्ग से दंतेवाड़ा की नई जिम्मेदारी दी गई है। वहीं, सहायक खाद्य अधिकारियों को भी नई जिम्मेदारियां दी गई हैं। देवेंद्र बग्गा को संचालनालय से प्रभारी खाद्य अधिकारी केसीजी नियुक्त किया गया है। जतिन देवांगन को एमसीबी से बस्तर भेजा गया है। सरगुजा में सहायक खाद्य अधिकारी चित्रकांत ध्रुव को प्रभारी खाद्य अधिकारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
खाद्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि सभी अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से अपने नए पदस्थापना स्थल पर कार्यभार ग्रहण करना होगा। विभागीय अधिकारियों का मानना है कि इस फेरबदल से प्रशासनिक कार्यों में गति आएगी और खाद्य वितरण व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।
]]>e-HRMS पोर्टल पर होगी प्रक्रिया
भोपाल
राज्य शासन की स्थानांतरण नीति 2026-27 के तहत जनजातीय कार्य एवं अनुसूचित जाति कल्याण विभाग ने स्थानांतरण आवेदनों के संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। आयुक्त, जनजातीय कार्य विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार स्वैच्छिक स्थानांतरण के आवेदन 3 जून से 8 जून तक e-HRMS पोर्टल पर ऑनलाइन स्वीकार किए जाएंगे। आवेदक स्थानांतरण के लिए अधिकतम 15 कार्यालयों/संस्थाओं का चयन कर सकेंगे। आवेदन में दर्शाए गए कारणों के समर्थन में आवश्यक दस्तावेज पीडीएफ स्वरूप में अपलोड करना अनिवार्य होगा, जिनका आकार अधिकतम 2 एमबी निर्धारित किया गया है। एक बार आवेदन सबमिट होने के बाद उसमें किसी प्रकार का संशोधन नहीं किया जा सकेगा।
विभाग ने यह स्पष्ट किया है कि आवेदन में गलत जानकारी देने या सत्यापन में अनियमितता पाए जाने पर संबंधित कर्मचारी एवं सत्यापन अधिकारी के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। पोर्टल पर प्रदर्शित रिक्तियां अस्थायी (टेंटेटिव) होंगी और समय-समय पर अपडेट की जा सकेंगी। माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक शिक्षकों के स्थानांतरण केवल उनके विषय की रिक्तियों पर ही किए जाएंगे। वहीं प्राथमिक, माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक शिक्षक संवर्ग के प्रशासनिक एवं स्वैच्छिक स्थानांतरण परिवीक्षा अवधि के दौरान नहीं किए जाएंगे।
जिला अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे 5 जून 2026 तक e-HRMS पोर्टल पर सभी रिक्त पदों की सही जानकारी दर्ज एवं सत्यापित करें। रिक्तियों की एंट्री और सत्यापन की जिम्मेदारी संबंधित कार्यालय प्रमुख, डीडीओ एवं ऑफिस एडमिन की होगी। केवल ऑनलाइन आवेदन करने मात्र से स्थानांतरण का अधिकार सुनिश्चित नहीं होगा। आवेदनों को स्वीकार या अस्वीकार करने का अंतिम निर्णय मुख्यालय स्तर पर लिया जाएगा और इस संबंध में शासन का निर्णय अंतिम माना जाएगा। यह आदेश प्रदेश के जनजातीय कार्य एवं अनुसूचित जाति कल्याण विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों तथा शिक्षकों पर लागू होगा।
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बता दें कि, जिले के अंदर होने वाले तबादले का अधिकार प्रभारी मंत्री के पास रहेगा। जबकि, प्रथम श्रेणी के अधिकारियों के तबादले मुख्यमंत्री मोहन यादव के समन्वय से अनुमति लेकर ही किए जा सकेंगे।
नीति के दायरे से बाहर रखी गई सेवाएं
मध्य प्रदेश न्यायिक सेवा, राज्य प्रशासनिक सेवा, राज्य पुलिस सेवा, राज्य वन सेवा और मंत्रालय के कर्मचारियों के तबादले इस नीति के दायरे के बाहर रखे गए हैं। शिक्षकों के तबादलों के लिए स्कूल शिक्षा विभाग की अलग नीति है। वहीं, पुलिस कर्मियों के स्थानांतरण तबादला बोर्ड के माध्यम से किए जाएंगे।
तृतीय, चतुर्थ श्रेणी और राज्य स्तर के स्थानांतरण की प्रक्रिया
जिले के भीतर तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के तबादले जिला कलेक्टर के अधिकार में होंगे। हालांकि, इसमें संबंधित जिले के प्रभारी मंत्री की मंजूरी होना अनिवार्य होगा। वहीं प्रथम, द्वितीय और तृतीय श्रेणी अधिकारियों – कर्मचारियों के राज्य स्तर के तबादले संबंधित विभाग के मंत्री की अनुमति से संबंधित प्रशासनिक विभाग ही करेगा। जबकि, डिप्टी कलेक्टर, संयुक्त कलेक्टर, तहसीलदार और नायब तहसीलदारों की पदस्थापना भी प्रभारी मंत्री की सलाह पर की जाएगी।
पुलिस विभाग में बढ़ी हलचल
पुलिस मुख्यालय की ओर से 5 जून तक आरक्षक से लेकर उप निरीक्षक स्तर तक के तबादले करने के निर्देश जारी किए गए हैं। इसके बाद विभिन्न जिलों में पुलिस अधीक्षकों और पुलिस आयुक्तों ने स्थानांतरण प्रक्रिया शुरू की गई है।
कई विभागों ने मांगा कर्मचारियों का विवरण
शिक्षा विभाग के साथ साथ कई अन्य विभागों ने जिलों में पदस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों की विस्तृत जानकारी तलब की है। वहीं, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने संविदा कर्मचारियों और अधिकारियों से 2 जून तक ऑनलाइन आवेदन करने के निर्देश दिए हैं।
कैबिनेट की मंजूरी के बाद नई नीति लागू
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में 20 मई को हुई कैबिनेट बैठक में तबादला नीति को मंजूरी दी गई थी। इसके बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने 22 मई को साल 2026 की तबादला नीति जारी की थी। नीति जारी होने के बाद विभागों को 9 दिन में अपनी विभागीय तबादला नीति तैयार करने के साथ – साथ जरूरी तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए थे। अब सभी विभाग नीति के अनुसार स्थानांतरण आदेश जारी कर सकेंगे।
विभागवार तय की गई तबादलों की सीमा
-नई तबादला नीति के तहत विभागों में कर्मचारियों की संख्या के आधार पर तबादलों की अधिकतम सीमा तय हुई है।
-200 तक कर्मचारियों वाले विभागों में अधिकतम 20 फीसदी तबादले हो सकेंगे।
-200 से 1000 कर्मचारियों वाले विभागों में अधिकतम 15 फीसदी स्थानांतरण किये जा सकेंगे।
-1000 से 2000 कर्मचारियों वाले विभागों में अधिकतम 10 फीसदी तबादलों की अनुमति।
-2001 से अधिक कर्मचारियों वाले विभागों में अधिकतम 5 फीसदी तबादलों की अनुमति दी गई है।
15 जून तक जारी रहेगी प्रक्रिया
मध्य प्रदेश सरकार के निर्देश के मुताबिक, 15 जून तक सभी विभाग स्थानांतरण आदेश जारी कर सकेंगे। इसके बाद तबादलों पर फिर से रोक लगा दी जाएगी।
]]>प्रदेश में तबादलों का काउंटडाउन शुरू हो गया है। सरकार द्वारा लंबे समय से एक ही जगह पर जमे अधिकारियों और कर्मचारियों को हटाने की तैयारी तेज कर दी गई है। खासतौर पर राजस्व विभाग और पुलिस महकमे में बड़े स्तर पर फेरबदल के संकेत मिल रहे हैं। विभागीय स्तर पर अधिकारियों की सूचियां तैयार होना शुरू हो गई हैं। तीन साल या उससे अधिक समय से एक ही जिले और अनुभाग में पदस्थ अधिकारियों की जानकारी जुटाई जा रही है। इससे एसडीएम, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक और पटवारियों सहित कई अधिकारी प्रभावित होंगे।
तबादले की अवधि नजदीक आने के साथ प्रदेश के अलग-अलग विभागों के विभागाध्यक्षों ने विभागीय तबादला नीति जारी करने के साथ जिलों में पदस्थ अलग-अलग कैडर के अफसरों का ब्यौरा जुटाना शुरू कर दिया है।
लोक निर्माण और जल संसाधन विभाग ने इंजीनियरों की वर्तमान पोस्टिंग, पदनाम और अतिरिक्त प्रभार की जानकारी मांगी है तो स्कूल शिक्षा विभाग ने हर विद्यालय में पदस्थ एक-एक शिक्षक का ब्यौरा पोर्टल पर अपलोड करने के निर्देश दिए हैं।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने संविदा कर्मचारियों के तबादले के लिए 2 जून तक ऑनलाइन आवेदन बुला लिए हैं, तो पीएचक्यू ने आरक्षक से सब इंस्पेक्टर तक के तबादले पांच जून तक करने की डेडलाइन तय कर दी है।
मोहन कैबिनेट के फैसले के बाद 22 मई को सामान्य प्रशासन विभाग ने प्रदेश के कर्मचारी अधिकारियों के राज्य और जिला संवर्ग स्तर पर तबादले की पॉलिसी जारी कर दी है। इसमें तबादले की अलग-अलग परिस्थितियों के आधार पर विभागों को ऑनलाइन आवेदन मंगाने के लिए कहा गया है। साथ ही यह भी साफ किया गया है कि अगर कोई अधिकारी कर्मचारी सरकार द्वारा तय टारगेट को अचीव नहीं कर पाता है तो उसे प्रशासनिक आधार पर तीन साल की अवधि के पहले भी स्थानांतरित किया जा सकता है।
जल संसाधन विभाग ने मांगी इंजीनियरों की पदस्थापना, अतिरिक्त प्रभार की जानकारी
जल संसाधन विभाग ने आयुक्त कमांड क्षेत्र और विकास संचालनालय, आयुक्त भू अर्जन और पुनर्वास बाणसागर रीवा, सभी मुख्य अभियंता, परियोजना संचालक, अधीक्षण यंत्री और कार्यपालन यंत्री को पत्र लिखकर कहा है कि विभाग के प्रथम, द्वितीय, तृतीय श्रेणी कर्मचारियों के नाम, पदनाम, पदस्थापना स्थल, जहां से वेतन निकलता है वहां की जानकारी के साथ गृह जिला, सेवानिवृत्ति तिथि, जिन पदों के अतिरिक्त प्रभार में हैं उस पद और कार्यालय का नाम तथा तारीख की जानकारी शासन को भेजें।
स्कूल शिक्षा विभाग ने तबादले के पहले मांगा हर टीचर की पोस्टिंग का ब्यौरा
उधर स्कूल शिक्षा विभाग ने भी एजुकेशन 3.0 पोर्टल पर हर विद्यालय में विषय वार पदस्थ शिक्षकों का ब्यौरा एंट्री करने के लिए कहा है। इसके लिए सभी जिला शिक्षा अधिकारियों से कहा गया है कि विद्यालय वार और विषय वार एंट्री कराएं और जिन शिक्षकों की मृत्यु हो गई है या रिटायर हो गए हैं, उनके नाम विद्यालय में पदस्थ शिक्षकों की सूची से हटाएं ताकि जब विभाग द्वारा तबादले की कार्यवाही की जाए तो यह स्थिति न बने कि विद्यालय में पहले से पर्याप्त शिक्षक पदस्थ हों और अतिरिक्त पदस्थापना हो जाए या फिर पद भरे होने की जानकारी पोर्टल पर हो जबकि वास्तव में टीचर न हों तो वहां पोस्टिंग न हो पाए। लोक शिक्षण आयुक्त इसकी जिलावार समीक्षा 30 मई को करेंगे।
जनगणना में लगे शिक्षकों के तबादले फरवरी 2027 तक नहीं होंगे
लोक शिक्षण आयुक्त ने एक अन्य निर्देश जारी कर कहा है कि जिन शिक्षकों की ड्यूटी जनगणना में लगी है उनके तबादले फरवरी 2027 तक नहीं होंगे। ऐसे शिक्षकों की संख्या 58 हजार से अधिक है जो जनगणना ड्यूटी में लगे हैं। इसलिए एक जून 2026 तक ऐसे सभी शिक्षकों की जानकारी एजुकेशन पोर्टल 3.0 पर एंट्री करने के लिए कहा गया है जो जनगणना में लगे हैं।
एनएचएम ने 2 जून तक मांगा संविदा कर्मचारियों की डिटेल
दूसरी ओर स्वास्थ्य विभाग ने भी इस पर काम शुरू कर दिया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) की अपर मिशन संचालक दिशा नागवंशी ने एनएचएम में काम करने वाले संविदा कर्मचारियों के स्वैच्छिक स्थानांतरण के ऑनलाइन प्रस्ताव 2 जून तक मांगे हैं। इसके लिए संविदा तबादले की पॉलिसी भी जारी कर दी गई है। ऑनलान आवेदन 27 मई से लेने का सिलसिला पोर्टल पर शुरू हुआ है और 2 जून की रात 12 बजे तक आवेदन किए जा सकेंगे। इसके बाद तबादले किए जाएंगे।
निर्देशों में कहा गया है कि तबादले के लिए तीन माह की सार्थक एप की उपस्थिति भी अपलोड करनी होगी। आवेदन सिर्फ ग्रामीण क्षेत्र से ग्रामीण क्षेत्र और शहरी क्षेत्र से शहरी क्षेत्र के लिए किए जा सकेंगे। रिक्त पद पर तबादले के लिए कम से कम और अधिकम 5 संस्थाओं की एंट्री आवेदन में करनी होगी। ऐसे कर्मचारी जिनकी नियुक्त दो साल के भीतर हुई है तथा दो साल में जिनका तबादला हो चुका है, उनके तबादले पर प्रतिबंध रहेगा।
5 जून तक आरक्षक से एसआई तक के तबादले करेंगे पुलिस आयुक्त-एसपी
इसी तरह गृह विभाग के अंतर्गत पुलिस मुख्यालय ने भोपाल, इंदौर के पुलिस आयुक्त, एसपी रेल समेत सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों से कहा है कि किसी एक थाने में आरक्षक से लेकर सब इंस्पेक्टर तक के कर्मचारी की एक पद पर पदस्थापना पांच साल से अधिक नहीं होना चाहिए।
साथ ही एक बार पोस्टिंग के बाद संबंधित कर्मचारी की पदस्थापना दोबारा उसी थाने में नहीं होनी चाहिए। अलग-अलग पदों पर पदस्थापना के मामले में किसी भी कर्मचारी की पोस्टिंग में तीन साल का अंतर होना चाहिए।
इसके अलावा यह भी कहा गया है कि आरक्षक से लेकर सब इंस्पेक्टर तक के कर्मचारी को एक ही पुलिस अनुविभाग में दस साल से अधिक समय तक नहीं रहना चाहिए। पुलिस मुख्यालय ने इस आधार पर पांच जून तक तबादला करके सूची मुख्यालय को भेजने कहा है।
सूत्रों के मुताबिक राज्य शासन जल्द ही तबादला नीति जारी कर सकता है। इसके पहले ही विभागों में अंदरखाने हलचल बढ़ गई है। कई अधिकारी अपने पसंदीदा जिलों में पदस्थापना के लिए राजनीतिक संपर्क साधने में जुट गए हैं। नेताओं और जनप्रतिनिधियों के यहां सिफारिशी पत्रों का दौर भी शुरू हो गया है। राजधानी भोपाल से लेकर जिला मुख्यालयों तक तबादलों को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है।
राजस्व विभाग में सबसे ज्यादा बदलाव की संभावना जताई जा रही है। जिन अधिकारियों पर लंबे समय से एक ही क्षेत्र में जमे रहने के आरोप लगते रहे हैं। उन्हें हटाने की तैयारी है। वहीं पुलिस विभाग में भी थाना प्रभारियों, एसडीओपी और अन्य अधिकारियों की सूची तैयार की जा रही है। कानून व्यवस्था और प्रशासनिक कसावट को ध्यान में रखते हुए सरकार इस बार बड़े पैमाने पर बदलाव कर सकती है।
]]>आलोक सिंह PAC के नए DG होंगे
इस फेरबदल में सबसे प्रमुख नियुक्तियों में आलोक सिंह को प्रोविंशियल आर्म्ड कांस्टेबुलरी (पीएसी) का नया डीजी बनाया गया है. इससे पहले वे कानपुर जोन में एडीजी पद पर कार्यरत थे. वहीं बिनोद कुमार सिंह को सीआईडी एवं साइबर क्राइम का डीजी नियुक्त किया गया है. वे इसी विभाग में एडीजी के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे।
इसके अलावा जय नारायण सिंह, जो अब तक पावर कारपोरेशन में डीजी के पद पर थे, उन्हें आर्थिक अपराध शाखा (EOW) का नया डीजी बनाया गया है. इसी तरह डीके ठाकुर को नागरिक सुरक्षा एवं विशेष सुरक्षा बल से स्थानांतरित कर होमगार्ड विभाग का डीजी नियुक्त किया गया है।
अनुपम कुलश्रेष्ठ को कानपुर जोन का ADG बनाया गया
एडीजी स्तर पर भी कई अहम बदलाव किए गए हैं. अनुपम कुलश्रेष्ठ, जो अब तक आगरा जोन की एडीजी थीं, उन्हें कानपुर जोन का नया एडीजी बनाया गया है. वहीं यातायात एवं सड़क सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाल रहे ए. सतीश गणेश को अब एडीजी क्राइम की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है।
एसके भगत ADG आगरा जोन बने
इसी क्रम में आरके स्वर्णकार, जो एडीजी पीएसी के पद पर कार्यरत थे, उन्हें पावर कारपोरेशन का एडीजी नियुक्त किया गया है. इसके साथ ही एसके भगत को एडीजी क्राइम से हटाकर आगरा जोन का नया एडीजी बनाया गया है. आईजी स्तर पर भी बदलाव किया गया है, जिसमें गीता सिंह को अभियोजन निदेशालय से स्थानांतरित कर प्रशिक्षण निदेशालय का नया आईजी नियुक्त किया गया है।
यह व्यापक तबादला आदेश उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जारी किया गया है. प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, इस फेरबदल का उद्देश्य पुलिस व्यवस्था में दक्षता बढ़ाना, कानून-व्यवस्था को मजबूत करना और विभिन्न महत्वपूर्ण विभागों में कार्यक्षमता को नई दिशा देना है. सरकारी आदेश के बाद पुलिस महकमे में नई जिम्मेदारियों को लेकर अधिकारियों के बीच हलचल तेज हो गई है और सभी अधिकारी जल्द ही अपने-अपने नए पदभार संभालेंगे।
IPS अधिकारियों की तबादला सूची
1. जय नरायन सिंह (बैच: 1994)
पुरानी तैनाती: पुलिस महानिदेशक / अपर पुलिस महानिदेशक, उ०प्र० पावर कॉरपोरेशन लि०, लखनऊ
नई तैनाती: पुलिस महानिदेशक, ई०ओ०डब्ल्यू० (EOW), उ०प्र०, लखनऊ
2. ध्रुव कान्त ठाकुर (बैच: 1994)
पुरानी तैनाती: पुलिस महानिदेशक, नागरिक सुरक्षा, उ०प्र० (अतिरिक्त प्रभार: विशेष सुरक्षा बल)
नई तैनाती: पुलिस महानिदेशक/महासमादेष्टा, होमगार्ड, उ०प्र०, लखनऊ (अतिरिक्त प्रभार: नागरिक सुरक्षा, उ०प्र०)
3. बिनोद कुमार सिंह (बैच: 1994)
पुरानी तैनाती: पुलिस महानिदेशक, सी०आई०डी०, उ०प्र०, लखनऊ (अतिरिक्त प्रभार: साइबर क्राइम, उ०प्र०)
नई तैनाती: पुलिस महानिदेशक, सी०आई०डी०, उ०प्र०, लखनऊ (अतिरिक्त प्रभार: साइबर क्राइम और यू०पी०-112, लखनऊ)
4. आलोक सिंह (बैच: 1995)
पुरानी तैनाती: पुलिस महानिदेशक / अपर पुलिस महानिदेशक, कानपुर जोन, कानपुर
नई तैनाती: पुलिस महानिदेशक, पीएसी (PAC) मुख्यालय, उ०प्र०, लखनऊ (अतिरिक्त प्रभार: विशेष सुरक्षा बल, उ०प्र०)
5. अनुपम कुलश्रेष्ठ (बैच: 1995)
पुरानी तैनाती: अपर पुलिस महानिदेशक, आगरा जोन, आगरा
नई तैनाती: अपर पुलिस महानिदेशक, कानपुर जोन, कानपुर
6. ए० सतीश गणेश (बैच: 1996)
पुरानी तैनाती: अपर पुलिस महानिदेशक, यातायात एवं सड़क सुरक्षा, निदेशालय, उ०प्र०, लखनऊ
नई तैनाती: अपर पुलिस महानिदेशक, यातायात एवं सड़क सुरक्षा, निदेशालय, लखनऊ (अतिरिक्त प्रभार: अपर पुलिस महानिदेशक, अपराध, उ०प्र०, लखनऊ)
7. डॉ० आर० के० स्वर्णकार (बैच: 1996)
पुरानी तैनाती: अपर पुलिस महानिदेशक, पीएसी (PAC) मुख्यालय, उ०प्र०
नई तैनाती: अपर पुलिस महानिदेशक, उ०प्र० पावर कॉरपोरेशन लि०, लखनऊ
8. एस० के० भगत (बैच: 1998)
पुरानी तैनाती: अपर पुलिस महानिदेशक, अपराध, उ०प्र०, लखनऊ
नई तैनाती: अपर पुलिस महानिदेशक, आगरा जोन, आगरा
9. गीता सिंह (बैच: 2007)
पुरानी तैनाती: पुलिस महानिरीक्षक (IG), अभियोजन, उ०प्र०, लखनऊ
नई तैनाती: पुलिस महानिरीक्षक (IG), प्रशिक्षण निदेशालय, उ०प्र०, लखनऊ
वर्षों से जमे बाबुओं का नाम सूची से गायब
मनेन्द्रगढ़
वनमण्डल कार्यालय में हाल ही में जारी किये गये कर्मचारियों के नवीन कार्य आबंटन (तबादला) आदेश के बाद विभाग में हलचल तेज हो गई है। आदेश जारी होते ही जहां कई कर्मचारियों के कार्यक्षेत्र बदले गये वहीं वर्षों से एक ही कुर्सी पर जमे कुछ बाबुओं का नाम सूची से गायब होने पर सवाल खड़े होने लगे हैं।
विश्वस्त सूत्रों के अनुसार जिन बाबुओं का नाम सूची में शामिल नहीं किया गया है वे लंबे समय से विभाग की कथित “मलाईदार” कुर्सियों पर काबिज हैं। बताया जा रहा है कि इनकी मजबूत राजनीतिक पकड़ है और वे अधिकारियों के भी खास माने जाते हैं जिसके चलते इन पर कार्यवाही नहीं हो पाती। सूत्र यह भी दावा कर रहे हैं कि यदि इन कर्मचारियों का स्थानांतरण किया जाये तो विभाग में करोड़ों रुपयों के संभावित भ्रष्टाचार के मामले उजागर हो सकते हैं। यही कारण है कि इनके नाम को सूची से बाहर रखा गया है।
गौरतलब है कि कुछ समय पहले मनेन्द्रगढ़ वनमण्डल में कथित घोटालों को लेकर सत्ताधारी दल भाजपा और विपक्षी कांग्रेस दोनों ने ही जोरदार तरीके से मुद्दा उठाया था। हालांकि अब मामला ठंडे बस्ते में जाता नजर आ रहा है।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या वनमण्डल के डीएफओ इन आरोपों पर संज्ञान लेते हुए निष्पक्ष कार्यवाही करेंगे या फिर पूर्व की तरह प्रभावशाली बाबुओं को संरक्षण मिलता रहेगा। विभागीय पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर अब आम लोगों की निगाहें प्रशासनिक कदमों पर टिकी हुई हैं।
उत्तर प्रदेश में एक बार फिर से बड़े स्तर पर प्रशासनिक फेरबदल किया गया है. जिसके तहत प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने 24 वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के तबादले कर दिए हैं. DG, ADG, IG, DIG समेत 11 जिलों के SP/SSP का ट्रांसफ़र किया गया है. संभल की अपर पुलिस अधीक्षक अनुकृति शर्मा को गौतमबुद्ध नगर का अपर पुलिस उपायुक्त बनाया गया है.
यूपी के जौनपुर, सहारनपुर, गोरखपुर, मेरठ के एसएसपी बदले गए वहीं अमेठी, पीलीभीत, रायबरेली, मिर्जापुर, बस्ती, खीरी के एसपी बदले गए. साल 1994 बैच के आईपीएस सुजीत पांडेय डीजी फायर बनाये गए. तो वहीं 2001 बैच के आईपीएस प्रवीण कुमार एडीजी जोन लखनऊ बनाये गए हैं. सोमेन वर्मा को अयोध्या की जिम्मेदारी दी गई है. उन्हें डीआईजी रेंज बनाया गया है.
जानें- किसे कहां मिली तैनाती
पुलिस महानिदेशक एवं अपर पुलिस महानिदेशक लखनऊ सुजीत पांडे को डीजी फायर सर्विसेज बनाया गया है. जबकि प्रवीण कुमार को एडीजी लखनऊ जोन बनाकर भेजा गया है. के एस इमानुएल को पुलिस महानिरीक्षक ईओडब्ल्यू से डीजीपी के जीएसओ की जिम्मेदारी दी गई है. आईपीएस विनोद कुमार सिंह को आईजी डॉ अंबेडकर पुलिस अकादमी मुरादाबाद भेजा गया है.
आईपीएस अधिकारी आलोक प्रियदर्शी को अपर पुलिस आयुक्त वाराणसी कमिश्नरेट की जिम्मेदारी दी गई है, राजकरण नैय्यर अपर पुलिस आयुक्त, कमिश्नरेट गाजियाबाद बनाया गया है. सोमेन बर्मा को पुलिस अधीक्षक मीरजापुर से डीआईजी अयोध्या रेंज भेजा गया है. संकल्प शर्मा, संयुक्त पुलिस आयुक्त कानपुर कमिश्नरेट बनाए गए हैं.
आईपीएस विपिन टाडा संयुक्त पुलिस आयुक्त कानपुर कमिश्नरेट बनाए गए हैं. अभिषेक यादव डीआईजी एटीएस लखनऊ बनाए गए हैं, आशीष तिवारी को वरिष्ठ पुलिस महानिरीक्षक सहारनपुर से डीआईजी टेक्निकल सर्विसेज लखनऊ में तबादला किया गया है. प्रताप गोपेंद्र यादव को डीआईजी यूपी पुलिस मुख्यालय लखनऊ भेजा गया है. कुंवर अनुपम सिंह को एसपी जौनपुर की जिम्मेदारी दी गई है.
डॉक्टर ख्याति गर्ग को सेनानायक, 9वीं वाहिनी पीएसी मुरादाबाद से एसपी लखीमपुर खीरी भेजा गया है. यशवीर सिंह एसपी बस्ती बनाए गए हैं. चारू निगम एसपी सुल्तानपुर बन गई हैं. अभिनंदन को एसएसपी सहारनपुर बनाया गया है. डॉक्टर कौस्तुभ को एसएसपी गोरखपुर की जिम्मेदारी दी गई है.
अविनाश पांडे को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मेरठ बनाया गया है. अपर्णा रजत कौशिक एसपी मिर्जापुर बन गई हैं. रवि कुमार को एसपी रायबरेली की जिम्मेदारी दी गई है. सुकीर्ति माधव को क्षेत्रीय अभिसूचना आगरा से एसपी पीलीभीत भेजा गया है. आईपीएस सर्वानन टी को एसपी अमेठी की जिम्मेदारी दी गई है और अनुकृति शर्मा को अपर पुलिस उपायुक्त नोएडा कमिश्नरेट बनाया गया है.
]]>6 माह की सीमा, उसके बाद कड़ा एक्शन
नए आदेश के अनुसार, भोपाल से बाहर स्थानांतरण होने की स्थिति में शासकीय सेवक अधिकतम 6 माह तक ही सरकारी आवास रख सकेगा।
इस अवधि में सामान्य किराया लिया जाएगा
6 माह के बाद आवास खाली नहीं करने पर दंडात्मक किराया वसूला जाएगा.. साथ ही जबरन बेदखली की कार्रवाई की जाएगी..दंडात्मक किराया 90 हजार रुपये तक हो सकता है।
कैबिनेट के फैसले के बाद मचा हड़कंप
यह फैसला पहले ही कैबिनेट में लिया जा चुका है। इसके बाद कई विधायकों, मंत्रियों और अधिकारियों को नोटिस जारी किए गए। कुछ अधिकारियों ने यह तर्क दिया कि उनके बच्चे भोपाल में पढ़ रहे हैं, इसलिए समय दिया जाए, लेकिन गृह विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि नियम सभी के लिए बराबर हैं।
सेवानिवृत्त कर्मचारियों को सीमित राहत
सेवानिवृत्ति की स्थिति में कर्मचारियों को कुल 6 माह की सशर्त अनुमति मिलेगी—
पहले 3 माह: सामान्य किराया
अगले 3 माह: सामान्य किराए का 10 गुना
6 माह बाद भी आवास नहीं छोड़ा तो दंडात्मक किराया और बेदखली
इस्तीफा या सेवा से पृथक होने पर सिर्फ 3 माह
यदि कोई कर्मचारी—
त्यागपत्र देता है सेवा से पृथक होता है. या अनधिकृत पाया जाता है, तो उसे केवल 3 माह तक ही सरकारी आवास में रहने की अनुमति होगी। इसके बाद तत्काल बेदखली और दंडात्मक वसूली की जाएगी।
सरकार का मकसद साफ
गृह विभाग का कहना है कि इन संशोधित नियमों का उद्देश्य — शासकीय आवासों के दुरुपयोग को रोकना वास्तविक जरूरतमंद अधिकारियों-कर्मचारियों को समय पर आवास उपलब्ध कराना.. अब मियाद खत्म होते ही सख्त कार्रवाई तय है, किसी भी स्तर पर ढील नहीं दी जाएगी। सरकारी आवास पर अनावश्यक कब्जा अब भारी पड़ेगा। तबादला, रिटायरमेंट या सेवा समाप्त—हर स्थिति में तय समय पर आवास खाली करना अनिवार्य होगा, वरना जेब पर सीधा असर पड़ेगा।
]]>मध्य प्रदेश में प्रशासनिक स्तर पर बड़ा फेरबदल किया गया है। राज्य सरकार ने पुलिस विभाग में कार्यरत एक दर्जन वरिष्ठ अधिकारियों को इधर से उधर करते हुए नई जिम्मेदारियां सौंपी हैं। यह सभी अधिकारी राज्य पुलिस सेवा के उप पुलिस अधीक्षक (DSP) संवर्ग से हैं।
प्रदेश के गृह विभाग द्वारा मंगलवार को इस संबंध में आदेश जारी किए गए। जारी आदेश के मुताबिक 12 उप पुलिस अधीक्षकों को उनके वर्तमान पदों से हटाकर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक एवं उप सेनानी के पदों पर प्रदेश के अलग-अलग जिलों एवं इकाइयों में तैनात किया गया है। यह तबादले तत्काल प्रभाव से लागू किए गए हैं।
गृह विभाग के अपर सचिव आशीर्ष भार्गव द्वारा 27 जनवरी को जारी आदेश में सभी अधिकारियों को नवीन पदस्थापना स्थल पर शीघ्र कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार यह फेरबदल पुलिस व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से किया गया है।
]]>सरकार ने देर रात नौ आइपीएस अफसरों के तबादले किए। नरसिंहपुर एसपी मृगाखी डेका की जगह इंदौर जोन-4 उपायुक्तत ऋषिकेश मीना को एसपी बनाया है। डेका को एआइजी भोपाल मुख्यालय पदस्थ किया है। मंदसौर एसपी अभिषेक आनंद को हटाकर सेनानी प्रथम वाहिनी विसबल इंदौर भेजा है तो मंदसौर का नया एसपी इंदौर जोन-1 के उपायुक्त विनोद कुमार मीना को बनाया है।
इन्हें भी किया इधर से उधर
भोपाल जोन-4 के उपायुक्त जितेंद्र सिंह पंवार को यातायात का जिम्मा दिया है। उज्जैन एएसपी मयूर खंडेलवाल को भोपाल जोन-4 का उपायुक्त बनाया है। खंडेलवाल की जगह सिंगरौली एएसपी अभिषेक रंजन को भेजा है। जबलपुर एएसपी आनंद कलादगी को हटाकर इंदौर के जोन-4 का पुलिस उपायुक्त बनाया है। ग्वालियर एएसपी कृष्ण लालचंदानी को इंदौर जोन-1 का उपायुक्त नियुक्त किया है।
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