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मध्यप्रदेश में ट्रांसजेंडर के संबंध में बड़ा फैसला लिया गया है। जेंडर बदलने से पहले अब कलेक्टर को इसकी सूचना देनी होगी। मेडिकल जांच के बाद ही ट्रांसजेंडर को जिला प्रशासन आइडी देगा। स्वयं के शपथ पत्र पर ट्रांसजेंडर व्यक्ति अब पहचान पत्र नहीं ले पाएगा। अभी ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए ट्रांसजेंडर अधिकारों का संरक्षण संशोधन विधेयक 2026 लोकसभा में प्रस्तुत किया गया है। ये लागू होगा तो पुलिस व प्रशासन को जिले में अलग से ट्रांसजेंडर सेल का गठन करना होगा, जो ट्रांसजेंडर Transgender के साथ होने वाले अपराधों की निगरानी करेगी।
अब ट्रांसजेंडर को जिला प्रशासन से अपना पहचान पत्र बनवाना जरूरी होगा। जिलास्तर पर इसके लिए विशेष व्यवस्थाएं
करना होगी। जेंडर बदलने के लिए सर्जरी करवाने के लिए प्रमाण पत्र अब अनिवार्य कर दिया गया है।
भोपाल के कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह का कहना है कि जिले में ट्रांसजेंडर समेत सभी श्रेणी के व्यक्तियों को लेकर प्रशासन संवेदनशील है। नियमों के अनुसार व्यवस्थाएं कर दी जाएंगी। हाल में मतदाता सूची के वृहद गहन पुनरीक्षण में जिले में 72 ट्रांसजेंडर मतदाताओं के नाम सूची में शामिल किए गए।
जांच के बाद ही आइडी देगी सरकार
ट्रांसजेंडर Transgender व्यक्ति खुद के शपथ पत्र पर जिला मजिस्ट्रेट से पहचान पत्र नहीं ले पाएगा। जिले में एक मेडिकल बोर्ड का गठन होगा। सीएमएचओ की अध्यक्षता वाली ये समिति जिला मजिस्ट्रेट को सिफारिश करेगी। इसके बाद ही प्रमाण पत्र जारी होगा। यदि कोई व्यक्ति जेंडर बदलने के लिए सर्जरी करवाता है, तो उसके लिए संशोधित प्रमाण पत्र प्राप्त करना अब अनिवार्य कर दिया गया है।
ट्रांसजेंडर के लिए सरकार पुलिस भर्ती में अवसर देने की व्यवस्था कर रही
मध्यप्रदेश में ट्रांसजेंडर के लिए सरकार पुलिस भर्ती में अवसर देने की व्यवस्था कर रही है। एमपी पुलिस में कांस्टेबल और सब-इंस्पेक्टर के पदों पर ऐसे उम्मीदवारों का कलेक्टर द्वारा जारी प्रमाण पत्र ही मान्य होगा। राज्य सरकार ने किन्नर बोर्ड का गठन किया है, जो ट्रांसजेंडर समुदाय को सरकारी योजनाओं से जोड़ने और डेटाबेस रखने का काम करता है। ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए स्वास्थ्य बीमा की पहल भी की जा रही है। किन्नर कल्याण बोर्ड के माध्यम से नौकरियों के साथ ही कल्याण योजनाओं का लाभ भी दिया जा रहा है।
]]>बांग्लादेशी अवैध रूप से भारत में घुसकर यहां पहचान छिपाकर रह रहे हैं। इसी तरह का एक बांग्लादेशी अवैध रूप से भोपाल में रहते हुए पकड़ा गया है। बांग्लादेश का निवासी अब्दुल कलाम भोपाल में किन्नर बनकर वर्षों से रह रहा था। अब्दुल खुद का नाम नेहा किन्नर रखा था, वह इस नाम से पहचान पत्र भी बनवा चुका है और उसी का उपयोग कर वह खुद को भारतीय बताता था। केंद्र सरकार द्वारा बांग्लादेश के अवैध घुसपैठियों की तलाश शुरू की गई, तब भोपाल में अब्दुल कलाम के छिपे होने का खुलासा हुआ। अब अब्दुल कलाम को डिपोर्ट किए जाने की तैयारी शुरू हो चुकी है। वह बुधवारा क्षेत्र में रहता था। उसके खिलाफ तलैया पुलिस ने कार्रवाई की है। फिलहाल, वह भोपाल पुलिस की सुरक्षा में रह रहा है। खुलासा हुआ है कि अब्दुल जांच एजेंसियों से बचने के लिए किन्नर बनकर राजधानी में घूमता रहता था। यह कार्रवाई इंटेलीजेंस यूनिट द्वारा की गई है। पहचान छिपाने के लिए उसने लड़की का भेष बना रखा है और अपना नाम भी नेहा रखा है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार बांग्लादेशी नागरिक अब्दुल को भोपाल के बुधवारा इलाके से पकड़ा गया है। उसका असली नाम अदुल कलाम है। वह भोपाल में नेहा के नाम से रह रहा था। चोरी छुपे भोपाल में वह कई साल से रह रहा था। वह किन्नर बनकर शहर में यहां-वहां निकलता था। अब्दुल कलाम उर्फ नेहा ने बकायदा फर्जी तरीके से परिचय-पत्र भी बनवा लिया था। इसके संबंध में भी अंदरखाने पड़ताल की जा रही है। क्योंकि वह परिचय पत्र बनाने में कैसे सफल हो गया, बड़ा सवाल है। उससे लगभग भोपाल पुलिस पूछताछ कर रही है। पूछताछ भी बेहद गोपनीय तरीके से की जा रही है।
विशेष निगरानी में है अब्दुल, कोई नहीं मिल सकता
अब्दुल के मोबाइल कॉल रिकॉर्ड की भी जांच भी इंटेलीजेंस यूनिट कर रही है। उसके मोबाइल को जब्त कर सायबर क्राइम की मदद से चौटिंग से लेकर बातचीत की जानकारी जुटाई जा रही है। उसके जिन लोगों के साथ संपर्क थे, उनसे भी क्राइम ब्रांच में एक स्पेशल टीम अलग से पूछताछ कर रही है। अब्दुल कलाम के भोपाल में होने की जानकारी केंद्रीय जांच एजेंसियों को भी भेज दी गई है। अदुल कलाम को तलैया थाने में रखा गया है। थाना प्रभारी के अलावा दो महिला आरक्षकों को ही आने-जाने की अनुमति है।
खुद को महिला बताता है, इसलिए महिला आरक्षक तैनात
पुलिस सूत्रों ने बताया कि वह पुरूष है, लेकिन वह वर्षों से महिला किन्नर के भेष में छिपा था। वह हावभाव भी महिलाओं जैसा दिखाता है, इसलिए महिला आरक्षकों को भी तैनात किया गया है। उसने भारत आने और अपने अन्य साथियों के भी संबंध में जानकारी दी है। इस मामले में पुलिस के आला अधिकारी कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। अधिकारियों का तर्क है कि समय-समय पर संदिग्ध व्यक्तियों से पूछताछ की जा रही है। जब तक पूरी जांच नहीं हो जाती, कुछ नहीं कहा जा सकता।
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इस बार लोकसभा चुनाव लड़ने वाले सभी तीन ट्रांसजेंडर उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई है, जो देश में राजनीतिक प्रतिनिधित्व पाने के लिए इस समुदाय के सामने आने वाली चुनौतियों को उजागर करता है।
भारत में अभी तक किसी ट्रांसजेंडर ने लोकसभा चुनाव नहीं जीता है। तीनों ट्रांसजेंडर उम्मीदवारों ने निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ा था।
धनबाद से चुनाव लड़ने वाली सुनैना किन्नर को 3,462 मत मिले। दक्षिणी दिल्ली से उम्मीदवार राजन सिंह को 325 मत मिले। दमोह (मध्य प्रदेश) से चुनाव लड़ने वाली दुर्गा मौसी को 1,124 मत मिले।
इनमें से कोई भी ट्रांसजेंडर उम्मीदवार जीत के करीब भी नहीं पहुंच पाया और सभी अपनी जमानत राशि बचाने में भी असफल रहे।
निर्वाचन आयोग के नियमों के अनुसार जो उम्मीदवार कुल वैध मतों का कम से कम छठा हिस्सा प्राप्त करने में असफल रहते हैं उनकी जमानत राशि जब्त हो जाती है।
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