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प्रदेश के सभी जिलों में आटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (एटीएस) की संख्या का बैरियर खत्म होगा। अभी तक एक जिले में अधिकतम तीन एटीएस खोलने का नियम रहा है और एक आवेदक पूरे राज्य में अधिकतम तीन एटीएस ही संचालित कर सकता था।
यह मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) परिवहन विभाग ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के निर्देशों की अनदेखी करके तैयार किया था। तीन साल बाद अब केंद्रीय मंत्रालय के नियमों को अपनाने के लिए एसओपी में संशोधन होने जा रहा है। परिवहन विभाग ने शासन को प्रस्ताव भेज दिया है।
तो इस वजह से हो रहा नियमों में बदलाव
नियमों में बदलाव करने की नौबत इसलिए आई क्योंकि केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय ने पांच जनवरी को प्रदेशभर में वाहनों की मैनुअल फिटनेस जांच पूरी तरह बंद करने का आदेश दिया था। उस सयम फिटनेस के लिए आवेदन करने वालों को एटीएस से लगभग 100 किलोमीटर क्षेत्र को जोड़ा गया था, उस समय व्यावसायिक वाहनों को नजदीकी 13 निजी एटीएस आवंटित हुए थे।
लखनऊ के बख्शी का तालाब स्थित एकेआरएस एटीएस प्राइवेट लिमिटेड केंद्र पर लखनऊ के वाहनों के साथ इस केंद्र को रायबरेली, उन्नाव, बाराबंकी, हरदोई व सीतापुर जिलों के व्यावसायिक वाहन भी आवंटित किए गए थे। आदेश से व्यावसायिक वाहन चालक व स्वामी परेशान थे, क्योंकि उन्हें लंबी दौड़ लगानी पड़ रही थी।
केंद्रीय मंत्रालय के सचिव यतेंद्र कुमार ने 27 अप्रैल को जिलों को सशर्त मैनुअल फिटनेस जांच कराने का आदेश दिया। निर्देश है कि जिन जिलों में एटीएस जल्द तैयार हो रहे वहां उसी अवधि तक मैनुअल जांच होगी। यह समय सीमा अलग-अलग जिलों में 31 दिसंबर तक बढ़ाई गई है। इसी बीच परिवहन विभाग ने यूपी में खुलने वाले एटीएस की एसओपी का नए सिरे से परीक्षण किया।
इसमें सामने आया कि एसओपी में केंद्रीय मोटर वाहन अधिनियम 1989 के नियम 175 के तहत देशभर में खोले जा रहे एटीएस से इतर यूपी में 2023 में नियम बनाए गए और 23 अगस्त 2023 से आवेदन मांगे गए थे। वहीं, केंद्र सरकार की नियमावली में जिलों में खुलने वाले एटीएस की संख्या ही निर्धारित नहीं की गई है।
माना गया कि प्रदेश में एक जिले में अधिकतम तीन एटीएस की संख्या का बैरियर लगाने से एटीएस अपेक्षा के अनुरूप नहीं बन रहे और वाहन स्वामियों को दौड़ लगानी पड़ रही है। इतना ही नहीं एटीएस के लिए यूपी में दो एकड़ भूमि होने का नियम बना जबकि केंद्र सरकार इससे कम एरिया में एटीएस बनवा रही है।
यूपी में कड़े नियम होने की वजह से 25 जिलों में एटीएस निर्माण के लिए एक भी आवेदन नहीं हो सका। अपर परिवहन आयुक्त प्रवर्तन संजय सिंह ने बताया, परिवहन विभाग ने एटीएस निर्माण के लिए अब केंद्र सरकार की नियमावली को अपनाएगी। संशोधित प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है।
]]>प्रदेश के सभी जिलों में आटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (एटीएस) की संख्या का बैरियर खत्म होगा। अभी तक एक जिले में अधिकतम तीन एटीएस खोलने का नियम रहा है और एक आवेदक पूरे राज्य में अधिकतम तीन एटीएस ही संचालित कर सकता था।
यह मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) परिवहन विभाग ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के निर्देशों की अनदेखी करके तैयार किया था। तीन साल बाद अब केंद्रीय मंत्रालय के नियमों को अपनाने के लिए एसओपी में संशोधन होने जा रहा है। परिवहन विभाग ने शासन को प्रस्ताव भेज दिया है।
तो इस वजह से हो रहा नियमों में बदलाव
नियमों में बदलाव करने की नौबत इसलिए आई क्योंकि केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय ने पांच जनवरी को प्रदेशभर में वाहनों की मैनुअल फिटनेस जांच पूरी तरह बंद करने का आदेश दिया था। उस सयम फिटनेस के लिए आवेदन करने वालों को एटीएस से लगभग 100 किलोमीटर क्षेत्र को जोड़ा गया था, उस समय व्यावसायिक वाहनों को नजदीकी 13 निजी एटीएस आवंटित हुए थे।
लखनऊ के बख्शी का तालाब स्थित एकेआरएस एटीएस प्राइवेट लिमिटेड केंद्र पर लखनऊ के वाहनों के साथ इस केंद्र को रायबरेली, उन्नाव, बाराबंकी, हरदोई व सीतापुर जिलों के व्यावसायिक वाहन भी आवंटित किए गए थे। आदेश से व्यावसायिक वाहन चालक व स्वामी परेशान थे, क्योंकि उन्हें लंबी दौड़ लगानी पड़ रही थी।
केंद्रीय मंत्रालय के सचिव यतेंद्र कुमार ने 27 अप्रैल को जिलों को सशर्त मैनुअल फिटनेस जांच कराने का आदेश दिया। निर्देश है कि जिन जिलों में एटीएस जल्द तैयार हो रहे वहां उसी अवधि तक मैनुअल जांच होगी। यह समय सीमा अलग-अलग जिलों में 31 दिसंबर तक बढ़ाई गई है। इसी बीच परिवहन विभाग ने यूपी में खुलने वाले एटीएस की एसओपी का नए सिरे से परीक्षण किया।
इसमें सामने आया कि एसओपी में केंद्रीय मोटर वाहन अधिनियम 1989 के नियम 175 के तहत देशभर में खोले जा रहे एटीएस से इतर यूपी में 2023 में नियम बनाए गए और 23 अगस्त 2023 से आवेदन मांगे गए थे। वहीं, केंद्र सरकार की नियमावली में जिलों में खुलने वाले एटीएस की संख्या ही निर्धारित नहीं की गई है।
माना गया कि प्रदेश में एक जिले में अधिकतम तीन एटीएस की संख्या का बैरियर लगाने से एटीएस अपेक्षा के अनुरूप नहीं बन रहे और वाहन स्वामियों को दौड़ लगानी पड़ रही है। इतना ही नहीं एटीएस के लिए यूपी में दो एकड़ भूमि होने का नियम बना जबकि केंद्र सरकार इससे कम एरिया में एटीएस बनवा रही है।
यूपी में कड़े नियम होने की वजह से 25 जिलों में एटीएस निर्माण के लिए एक भी आवेदन नहीं हो सका। अपर परिवहन आयुक्त प्रवर्तन संजय सिंह ने बताया, परिवहन विभाग ने एटीएस निर्माण के लिए अब केंद्र सरकार की नियमावली को अपनाएगी। संशोधित प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है।
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परिवहन विभाग का संवेदनशील डेटा निजी डाटाबेस एडमिनिस्ट्रेटर (डीबीए) के हाथों में है। प्रदेश के कई जिलों में अफसरों के खास डीबीए वर्षों से एक ही स्थान पर जमे हुए हैं। सूत्रों के अनुसार, ये डीबीए दलालों को वाहनों और ड्राइविंग लाइसेंसों से संबंधित विवरण उपलब्ध करा रहे हैं। इससे विभाग का पूरा डेटा गंभीर खतरे में है और दलालों से इनकी मिलीभगत उजागर हुई है।
करीब बीस वर्ष पहले परिवहन विभाग को ऑनलाइन डेटा रखरखाव के लिए ऐसे कर्मचारियों की आवश्यकता महसूस हुई थी। आरटीओ-एआरटीओ को डेटा निकासी के लिए अधिकृत किया गया था, लेकिन डीबीए ही उनकी यूजर आईडी से डेटा निकालते हैं। ड्राइविंग लाइसेंस, गाड़ियों की फिटनेस, परमिट और उनकी संख्या सहित पूरा डेटा डीबीए की आसान पहुंच में है। वर्षों से एक ही जिले में तैनात डीबीए की दलालों से सांठगांठ हो गई है। वे दलालों को डीएल, परमिट और फिटनेस जैसी महत्वपूर्ण जानकारी देते हैं।
सूत्रों के मुताबिक, इस मिलीभगत की जानकारी वरिष्ठ अफसरों को भी है। प्रदेशभर में कुल 80 डीबीए कार्यरत हैं, जिनमें से दो लखनऊ में तैनात हैं। बरेली, बदायूं, पीलीभीत, शाहजहांपुर, अमरोहा, वाराणसी, मुरादाबाद, बाराबंकी, लखीमपुर खीरी और कानपुर में कई डीबीए वर्षों से एक ही जगह पर हैं।
भेदभावपूर्ण कार्रवाई पर सवाल
ट्रांसपोर्टनगर आरटीओ प्रशासन संजय तिवारी ने डीएल बनाने वाले निजीकर्मियों की शिकायत की थी। उन्होंने दलालों से मिलीभगत का हवाला देते हुए पूर्व परिवहन आयुक्त किंजल सिंह से शिकायत की। इसके बाद बिना किसी जांच के निजी डीएलकर्मियों का प्रदेशभर में स्थानांतरण और हटाने का सिलसिला शुरू हुआ। सूत्रों के अनुसार, पूर्व अपर परिवहन आयुक्त, आईटी पर निजीकर्मियों से वसूली के आरोप भी लगे थे। किंजल सिंह ने इन मामलों में कोई जांच नहीं करवाई। सवाल उठता है कि जब निजी डीएलकर्मियों का स्थानांतरण हो सकता है, तो डीबीए को क्यों बचाया जा रहा है।
डीबीए के स्थानांतरण में विफलता
ऐसा नहीं है कि डीबीए के स्थानांतरण की कोशिशें नहीं हुईं। तीन साल पहले परिवहन विभाग के आला अफसरों ने स्थानांतरण की कवायद शुरू की थी। हालांकि, अफसरों के खास और जुगाड़ी डीबीए इस प्रक्रिया से बच निकलने में सफल रहे। उन पर किसी भी तरह की आंच नहीं आई और वे अपनी जगह पर बने रहे। सूत्र बताते हैं कि ये डीबीए दलालों के साथ मिलकर अफसरों के लिए भी काम करते हैं। इसी कारण अफसरों ने उन्हें बचाने के लिए पूरा जोर लगा दिया।
डाटा सुरक्षा और मिलीभगत का खतरा
डीबीए की आसान पहुंच के कारण विभाग का संवेदनशील डाटा लगातार खतरे में है। दलालों को गोपनीय जानकारी मिलने से भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को बढ़ावा मिल रहा है। यह स्थिति परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। अफसरों की मिलीभगत या उदासीनता के कारण यह समस्या वर्षों से बनी हुई है। डाटा सुरक्षा सुनिश्चित करने और भ्रष्टाचार रोकने के लिए तत्काल कार्रवाई आवश्यक है। डीबीए की तैनाती और स्थानांतरण नीतियों की समीक्षा करना महत्वपूर्ण है।
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भोपाल
प्रदेश में वाहन के पंजीयन और ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त करते वक्त आवेदक को अपना मोबाइल नम्बर दर्ज करना अनिवार्य होता है। कई बार वाहन स्वामी की जगह डीलर अपना मोबाइल नम्बर दर्ज करा देते हैं। वाहन स्वामी और डीलर द्वारा सही मोबाइल नम्बर दर्ज कराने के बाद संबंधित व्यक्ति द्वारा मोबाइल नम्बर कुछ वर्षों बाद परिवर्तित कर देने के कारण डेटाबेस में संबंधित व्यक्ति का मोबाइल नंबर अपडेट नहीं रह पाता है। मोबाइल नम्बर अपडेट करने के लिये इन दिनों परिवहन विभाग द्वारा विशेष अभियान संचालित किया जा रहा है। वाहन स्वामी अथवा डीलर नेशनल इंफोर्मेशन सेन्टर (एनआईसी) के वाहन सारथी पोर्टल पर जाकर स्वयं ही आसानी से मोबाइल नंबर अपडेट कर सकते हैं।
वाहन सारथी पोर्टल पर आधार प्रमाणीकरण के माध्यम से मोबाइल नम्बर अपडेट करने की ऑनलाइन सुविधा उपलब्ध है। आधार में दर्ज आवेदक और उसके अभिभावक के नाम का वाहन पंजीयन और ड्रायविंग लायसेंस के डेटाबेस में दर्ज नाम से शत-प्रतिशत मिलान होने पर डेटाबेस में मोबाइल नम्बर तत्काल अपडेट हो जाता है। आधार पंजीयन और ड्राइविंग लायसेंस के डेटाबेस में दर्ज नाम में भिन्नता पाई जाती है, तो आवेदक को पोर्टल पर अपना कोई दूसरा परिचय पत्र जैसे आधार कार्ड, मतदाता परिचय पत्र और पासपोर्ट अपलोड करना पड़ता है। आरटीओ कार्यालय द्वारा दर्ज दस्तावेज और आधार से आवेदक और उसके अभिभावक के नाम का पंजीयन और ड्राइविंग लायसेंस में दर्ज नाम का सत्यापन किया जाता है। अप्रूवल के बाद मोबाइल नंबर डेटाबेस में अपडेट हो जाता है। अपडेड प्रक्रिया को विस्तृत रूप से स्क्रीन शॉट के माध्यम से समझाने के लिए मध्यप्रदेश परिवहन विभाग के पोर्टल के होमपेज पर लिंक उपलब्ध कराई गई है।
वर्तमान में वाहन रजिस्ट्रेशन एवं ड्राइविंग लायसेंस संबंधी समस्त सेवाओं के लिये ऑनलाइन आवेदन लिये जा रहे है। डेटाबेस रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर ओटीपी प्राप्त कर आवेदक को अपना सत्यापन कराना होता है। मोबाइल नंबर डेटाबेस पर उपलब्ध न होने पर कई बार आवेदक इन सेवाओं का लाभ नहीं ले पाते हैं। संबंधित वाहन के विरूद्ध अन्य प्रणालियों से चालान जारी होने पर डेटाबेस पर सही नंबर न होने के कारण कई बार वाहन स्वामियों को चालान के संबंध में जानकारी प्राप्त नहीं हो पाती है। चालान का भुगतान लंबित होने पर ऐसे व्यक्तियों को परिवहन विभाग की सेवाओं से वंचित रहना पड़ सकता है। न्यायालयीन कार्रवाई की जाने पर उन्हें कोर्ट से समन भी आ सकते हैं। इन कारणों से मोबाइल नंबर अपडेट होना आवश्यक है। मोबाइल अपडेशन की विस्तृत प्रक्रिया मध्यप्रदेश परिवहन पोर्टल transport.mp.gov.in पर उपलब्ध है।
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मध्य प्रदेश की परिवहन चौकियों में मिल रहीं भ्रष्टाचार की शिकायतों पर रोक लगाने मोहन सरकार ने सख्त निर्णय लिया है। परिवहन आयुक्त विवेक शर्मा ने वाहन चेकिंग के लिए नई गाइडलाइन जारी की है। कहा, बिना वर्दी और बॉडी वॉर्न कैमरे के बिना वाहनों की जांच नहीं की जा सकेगी। पॉइंट ऑफ सेल से चालानी कार्रवाई की जाएगी।
परिवहन आयुक्त विवेक शर्मा के मुताबिक, नई गाइडलाइन पायलट प्रोजेक्ट के तहत कुछ जिलों में पहले से लागू की थी। इससे न सिर्फ पारदर्शिता बनी रहती है, बल्कि वाहन चालकों को भी आसानी होती है। पायलट प्रोजेक्ट सफल रहा। 15 मई से यह व्यवस्था पूरे प्रदेश में लागू की जाएगी।
गाइडलाइन के अनुसार जांच के समय कम से कम एक सहायक परिवहन उप निरीक्षक का मौजूद होना जरूरी होगा। सभी स्टाफ को वर्दी पहनना अनिवार्य है और वर्दी पर नाम की प्लेट भी होनी चाहिए। जांच कार्यवाही में केवल विभागीय अधिकारी व कर्मचारी ही शामिल रहेंगे, किसी भी निजी व्यक्ति की भागीदारी पूरी तरह वर्जित है। चालान की प्रक्रिया केवल POS मशीन के माध्यम से ही की जाएगी। जहां POS मशीन उपलब्ध नहीं है, वहां इसके उपयोग की व्यवस्था प्राथमिकता से की जाएगी। एक बार में एक ही वाहन की जांच की जाएगी, और उसके बाद ही अगला वाहन रोका जाएगा।
किसी भी वाहन को 15 मिनट से अधिक बिना कारण के नहीं रोका जा सकेगा। रात्रिकालीन जांच के लिए अच्छी रोशनी वाले सुरक्षित स्थान का चयन अनिवार्य होगा। स्टाफ को LED बैटन और रिफ्लेक्टिव जैकेट उपलब्ध कराई जाएंगी। बॉडी वॉर्न कैमरे जांच की पूरी अवधि के दौरान सक्रिय रहेंगे। कम से कम दो कैमरे चालू रहेंगे, जिनमें से एक लाइव मोड में होगा। कैमरे संबंधित अधिकारी या कर्मचारी को ही आवंटित किए जाएंगे।
कैमरों की रिकॉर्डिंग और स्टोरेज की निगरानी भी यूनिट प्रभारी की जिम्मेदारी होगी। यदि जांच के दौरान किसी वाहन चालक या अन्य व्यक्ति से विवाद की स्थिति उत्पन्न होती है, तो उसकी रिकॉर्डिंग अनिवार्य रूप से की जाएगी। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि दिशा-निर्देशों के क्रियान्वयन की पूरी जिम्मेदारी संबंधित यूनिट प्रभारी की होगी। किसी भी प्रकार की लापरवाही की स्थिति में उनके खिलाफ अनुशासनात्मक या दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
यह दिए दिशा निर्देश
कम से कम एक सहायक परिवहन उप निरीक्षक स्तर के अधिकारी की मौजूदगी में ही चेकिंग की जाएगी।
चेकिंग के समय पूरा स्टाफ वर्दी में होना चाहिए। सभी की वर्दी पर नेम प्लेट भी लगी होनी चाहिए।
यूनिट के साथ अटैच ड्राइवर के अलावा कोई भी प्राइवेट व्यक्ति चेकिंग की कार्यवाही के दौरान प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से शामिल नहीं होना चाहिए।
बॉडी वॉर्न कैमरा उपलब्ध होते ही चेकिंग की पूरी अवधि के दौरान कम से कम दो बॉडी वॉर्न कैमरा चालू रहे।
कम से कम एक बॉडी वॉर्न कैमरा लाइव मोड में होना चाहिए।
का उपयोग वही करेंगे।
चेकिंग के दौरान रिकॉर्डिंग मोड के दो कैमरों के अलावा बाकी दूसरे कैमरे स्टैंड बाय मोड में रहेंगे।
चालानी कार्यवाही केवल पॉइंट ऑफ सेल मशीन ही की जाएगी।
यूनिट द्वारा एक बार में एक ही वाहन को रोका जाए और उसकी चेकिंग, उसके खिलाफ कार्यवाही के बाद ही किसी दूसरे वाहन को रोका जाए।
किसी भी वाहन को बिना किसी विशेष कारणों के 15 मिनट से ज्यादा न रोका जाए। अन्यथा ये माना जाएगा कि वाहन को रोकने के संबंध में यूनिट की मंशा सही नहीं हैं।
रात के समय अगर चेकिंग जरूरी हो तो ऐसे स्थान को चेकिंग के लिए चुना जाए, जहां रोशनी के अभाव में कोई दुर्घटना न हो। अंधेरे के समय स्टाफ के पास एलईडी बैटन और रिफ्लेक्टिव जैकेट पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हो। ये प्रभारी सुनिश्चित करेंगे।
चौकियां बंद, 45 चेक प्वाइंट में वसूली
मध्य प्रदेश में गुजरात की तर्ज पर एक साल पहले परिवहन चौकियों को बंद कर दिया है। उनकी जगह पर अंतरराज्यीय सीमा पर 45 चेक प्वाइंट बनाए गए हैं, लेकिन ट्रकों और वाहनों से अवैध वसूली की लगातार शिकायतें मिलती रहती हैं। इसके बाद परिवहन आयुक्त ने नया आदेश जारी किया है।
प्रभारी के खिलाफ होगी कार्रवाई
परिवहन आयुक्त विवेक शर्मा ने बताया कि चेकिंग पाइंट पर पारदर्शिता लाने के लिए जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इससे वाहन चालकों चेकिंग के दौरान होने वाली समस्या भी दूर हुई है। इन निर्देशों का पालन करने में चूक होने पर प्रभारी पर अनुशासनात्मक, दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
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बलरामपुर रामानुजगंज में कलेक्टर के निर्देश पर जिला परिवहन अधिकारी यशवंत यादव के नेतृत्व में ग्राम बरियों में राष्ट्रीय राजमार्ग 343 में ओवरलोड वाहनों की सघन जांच की गई इस दौरान गिट्टी लोड दो ओवरलोड वाहनों पर कार्रवाई करते हुए 81000 शमन शुल्क की चालानी कार्रवाई की गई गए जिला परिवहन अधिकारी ने कहा कि आगे भी यह कार्रवाई जारी रहेगी।
गौरतलब है कि राष्ट्रीय राजमार्ग 343 से होकर राजपुर विकासखंड के दर्जनों क्रेशरो से लगातार गिट्टी लोड करके ओवरलोड वालों की चलने की शिकायत है आते रहती है समय-समय पर परिवहन विभाग के द्वारा कार्रवाई भी की जाती रही है। कलेक्टर के निर्देश पर जिला परिवहन अधिकारी यशवंत यादव एवं अंबिकापुर से उड़न दस्ता दल के द्वारा संयुक्त रूप से ग्राम बारियों में ओवरलोड वाहनों की सघन जांच की गई जिसमें दो गिट्टी लोड हाईवे वाहनों को ओवरलोड पाया गया जिस पर चालानी कार्रवाई करते हुए 81000 शमन शुल्क की चलानी कार्यवाही की गई। जिला परिवहन अधिकारी यशवंत यादव ने कहा कि समय-समय पर परिवहन विभाग के द्वारा ओवरलोड वाहनों की जांच की जाती है एवं चालानी कार्रवाई भी की जाती रही है कलेक्टर के निर्देश पर ओवरलोड वाहनों की सघन जांच की जा रही है एवं कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।
]]>RTI, कटरों और पत्रकारों का गठजोड़ हुआ सक्रिय
नई परिवहन नीति को फेल करने के लिए विभाग के रसूखदार RTI , कटरों और कुछ तथाकथित पत्रकारों ने अपने हितों को साधने के लिए एक अनौपचारिक गठबंधन कर लिया है जिसके चलते जँहा विभाग के RTI नई नीति के विरुद्ध असहयोग जता रहे हैं तो वंही उनके तथाकथित पालतू पत्रकार अनापशनाप खबरें छाप कर नई व्यवस्था के खिलाफ माहौल बना रहे हैं अपने वित्तिय हितों को ध्यान में रखते हुए वो हर उस हतकंडे का उपयोग कर रहे है जिससे पुरानी व्यवस्था को दुबारा से लागू करवाया जा सके और उनका भ्रष्टाचार सुचारू रूप से चलता रहे और उनकी अवैध वसूली कटरों के माध्यम से चेकपोस्टों पर होती रहे । अपनी इस मनसा को पूरा करने के लिए वे किसी भी स्तर तक जाने को तैयार हैं।
नई नीति न लागू हो सके इसके लिए हर हद की पर
प्रदेश के मुख्यमंत्री व मंत्री का जनहितकारी फैसला कँही लागू न हो जाये इसके लिए जो तरीका अपनाया गया उसमें सबसे महत्वपूर्ण किरदार उन तथाकथित पत्रकारों ने निभाया जो झूठी खबरों के माध्यम से खबर फैला कर माहौल बना रहे हैं कि विभाग से पैसा दिल्ली तक जाता है। मंत्री और मुख्यमंत्री पर भी फर्जी आरोपों की झड़ी लगा दी गई है और उनकी छवि खराब की जा रही है ये सब खबरें महकमें के बड़े रसूखदार RTI अधिकारियों के कहने पर की जा रही है । ये पूरा एक सिंडिकेट है जो पिछले कई वर्षों से इसी तरह से काम कर रहा है । जो भी इनकी अवैध वसूली के खिलाफ आता है उसे टारगेट किया जाता है और उसका मनोबल इन्ही पत्रकारों की झूठी खबरों के माध्यम से तोड़ा जाता है । ताकि इनका खेल बदस्तूर ऐसे ही चलता रहे ।
लाखों की बंदरबांट होती हर महीने
पुरानी व्यवस्था के चलते परिवहन विभाग के ये रसूखदार RTI करोड़ो रूपये की उगाही करते है जिसमें इनका साथ चेकपोस्टों को ठेके पर लेने वाले कटर देते है और उगाही का एक हिस्सा इन तथाकथित पत्रकारों को भी रेवड़ी के तौर पर दिया जाता है । इस मे कितनी कमाई ही ये इस बात से ही जाहिर हो जाता है कि विभाग का ही एक सिपाही नौकरी छोड़कर चेकपोस्टों को ठेके पर चला रहा है और करोड़ो के वारे न्यारे कर रहा है । वहीँ कुछ पत्रकार भी लाखों रुपये इस बात का ले रहे हैं कि वे कँही पर भी इस वसूली की खबर नही छापने देंगे जिसके कई ऑडियो पूर्व में भी वायरल हुए हैं जिसमें साफ तौर से सुनाई देता है कि ये लोग किस तरह से विभाग के दलाल बने हुए हैं और इनकी कैसे उन रसूखदार आर टी आई अधिकारियों से सांठगांठ है । यदि एक उच्च स्तरीय जांच ही तो इन पत्रकारों व आर टी आईयों पर आय से अधिक धन संपदा निकलेगी कई पूर्व व वर्तमान अधिकारियों के स्कूल कॉलेज व मैरिज गार्डन संचालित हैं तो कोई अरबों की संपत्ति का मालिक है जिसकी खबर इनकी आपसी लड़ाई की वजह से कई बार सामने आ चुकी है । मुख्यमंत्री द्वारा यदि किसी योग्य एजेंसी के माध्यम से इसकी जांच कराई जाए तो बहुत से भ्रष्टाचारियों पकड़े जाएंगे ।
ट्रक ड्राइवर राजनैतिक दम पर आरटीओ स्टाफ पर दर्ज करा दी झूटी एफआईआर
वहि आपको बता दे की परिवहन चेकपोस्ट बंद के आदेश आने के बाद ट्रक संचालकों ने अपने ट्रक चालको को यह आदेश दे डाले है की अब रोड पर अपने ट्रको को राजधानी एकप्रेस के माफिक दौडओं और आम जनता को कीडे मकोडे समझ कर रौंदो और अगर कोइ भी आरटीओ स्टाफ आपको पकडे तो फर्जी बीडीओ बना कर उन इमानदार आरटीओ कर्मचारियों पर झूटी एफआईआर कराओं ऐसा ही एक मामला रीवा जिले के हनुमना चैकिंग पाइंट का सामने आ रहा है जिसमें एक ट्रक ड्राइवर ने राजनैतिक रसूख की दम पर आरटीओ स्टाफ पर झूटी ऐफआइआर करा दी और फर्जी बीडीओ बायरल कर दी.
रसूखदार आर टी आई करते है ईमानदार टी एस आईयों को परेशान
परिवहन विभग में कार्यरत आर टी आई पिछले पांच वर्षों से अपनी राजनैतिक पँहुच के चलते विभाग को वसूली का अड्डा बना चुके हैं बात पिछले पांच साल में यँहा तक पँहुच गई कि बड़े वैरियरों पर लगातार बने रहने वाले आर टी आई आज विभाग को दीमक की तरह चाट गए हैं और यदि कोई टी एस आई इनके विरोध में बोलता है तो उसे दूरदराज के इलाकों में पोस्ट करा दिया जाता था जिसमे इनके राजनैतिक आकाओं का महत्वपूर्ण रोल होता था पर जिस तरह से मुख्यमंत्री मंत्री व वरिष्ठ अधिकारियों ने पिछले पांच -छः माह में इनकी कारगुजारियों पर अंकुश लगाया है उससे ये पूरी तरह से छटपटा रहे है और पूरी ताकत से मंत्री मुख्यमंत्री और इन वरिष्ठ अधिकारियों की छवि धूमिल करने के लिए आमादा है पर मुख्य मंत्री के आदेश पर परिवहन मंत्री व उनके अधिकारियों ने भी इन आर टी आइयों पर नकेल कस दी है और जल्द ही इनकी चिठ्ठी पत्री खोल दी जाएगी