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ईरान युद्ध के बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने खाड़ी देशों और अमेरिका को मदद भेजने की पेशकश की, लेकिन बदले में उन्होंने वित्तीय मदद और तकनीक की मांग की है, जबकि ईरान ने इसे 'मजाक' बताया है। ईरान युद्ध के चलते खाड़ी देशों में बढ़ते तनाव और मिसाइल-ड्रोन हमलों के बीच यूक्रेन ने अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को मदद देने की पेशकश की है। लेकिन यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने साफ कह दिया है कि यह मदद बिना शर्त नहीं होगी।
उन्होंने कहा है कि यूक्रेन ड्रोन पर अपनी विशेषज्ञता साझा कर सकता है, लेकिन इसके बदले उसे रूस से लड़ने के लिए आर्थिक सहायता और नई तकनीक की जरूरत है। रूस के साथ चार साल से जारी युद्ध के दौरान यूक्रेन ने ईरान के डिजाइन वाले 'कामिकाजे' ड्रोन से लड़ने का बड़ा अनुभव हासिल किया है। यही अनुभव अब यूक्रेन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक महत्वपूर्ण सुरक्षा साझेदार बना रहा है।
भारत भी करता है इस्तेमाल
दरअसल ‘शाहेद ड्रोन' कामिकाजे ड्रोन का ही एक प्रकार है जिसे ईरान और रूस इस्तेमाल करते हैं। इन्हें अमेरिका, भारत और यूक्रेन खुद भी इस्तेमाल करते हैं। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, यूक्रेन ने खाड़ी के चार देशों में अपने विशेषज्ञ भेजे हैं। राष्ट्रपति जेलेंस्की ने बताया कि हर टीम में कई दर्जन विशेषज्ञ शामिल हैं। उन्होंने कहा कि ये टीमें 'स्थिति का विशेष आकलन करेंगी और दिखाएंगी कि ड्रोन-रोधी सुरक्षा प्रणाली कैसे काम करनी चाहिए।'
एक्सपर्ट्स भेजे
यूक्रेन का कहना है कि रूस के साथ युद्ध में उसने ईरान के 'शाहेद' ड्रोन के खिलाफ काफी अनुभव हासिल किया है। रूस ने इन ड्रोन का इस्तेमाल यूक्रेनी शहरों और बुनियादी ढांचे पर हमलों में बड़े पैमाने पर किया है। इसलिए यूक्रेन का कहना है कि वह उन देशों की मदद करना चाहता है जो समान खतरे का सामना कर रहे हैं। यूक्रेन के मुताबिक उसके विशेषज्ञ कतर, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब में काम शुरू कर चुके हैं। यूक्रेन का कहना है कि वह अपनी एंटी-ड्रोन तकनीक और विशेषज्ञता साझा कर सकता है, लेकिन इसके बदले उसे सहयोगियों से मजबूत समर्थन चाहिए होगा।
यूक्रेन की जरूरतें
कीव लंबे समय से पश्चिमी देशों से वायु-रक्षा मिसाइलों और मॉडर्न तकनीक की मांग कर रहा है। यूक्रेन का मानना है कि रूस के लगातार हमलों के कारण उसे इन प्रणालियों की सख्त जरूरत है। जेलेंस्की ने यह भी कहा कि अमेरिका ने इस मुद्दे पर कई बार यूक्रेन से संपर्क किया है। लेकिन इस मामले में अलग-अलग बयान सामने आए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंपने फॉक्स न्यूज रेडियो से कहा कि उनके देश को ड्रोन रक्षा के लिए 'यूक्रेन की मदद की जरूरत नहीं है।' इसके बावजूद यूक्रेन अपनी विशेषज्ञता को एक रणनीतिक संपत्ति के तौर पर पेश कर रहा है, जिससे उसे आर्थिक सहायता और नई सैन्य तकनीक मिल सके।
ईरान की तीखी प्रतिक्रिया
यूक्रेन के इस कदम पर ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। कीव में ईरान के दूत शाह्रियार अमूजेगर ने यूक्रेन की भूमिका को खारिज करते हुए कहा, 'जहां तक खाड़ी देशों में ड्रोन के खिलाफ यूक्रेन की कार्रवाइयों का सवाल है, हम इसे मूल रूप से मजाक और दिखावटी कदम से ज्यादा कुछ नहीं मानते।' उन्होंने यह भी कहा, 'दुर्भाग्य से यूक्रेन अब प्रभावी रूप से हमारे साथ सीधे टकराव के चरण में प्रवेश कर चुका है; यानी उसने खुद को हमारे दुश्मनों के साथ खड़ा कर लिया है।'
अमूजेगर ने यह दावा भी किया कि ईरान रूस के आक्रमण में शामिल नहीं है और वह यूक्रेन की क्षेत्रीय अखंडता का समर्थन करता है। उनके मुताबिक कीव ने 'पश्चिम से अधिक संसाधन हासिल करने के लिए ‘ईरान कार्ड' खेला है।' ईरानी सांसद इब्राहिम अजीजी ने भी कड़ा बयान देते हुए कहा कि अब यूक्रेन ने 'अपने पूरे क्षेत्र को ईरान के टारगेट में बदल दिया है।'
उन्होंने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 का हवाला देते हुए इसे 'आत्मरक्षा' का अधिकार बताया। हालांकि यूक्रेन ने इस बयान को तुरंत खारिज कर दिया। यूक्रेन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता जॉर्जी तिखी ने कहा कि यह दावा 'बेतुका' है और यह 'ऐसा है जैसे कोई सीरियल किलर अपने अपराधों को सही ठहराने के लिए आपराधिक संहिता का हवाला दे।'
]]>उन्होंने कहा है कि यूक्रेन ड्रोन पर अपनी विशेषज्ञता साझा कर सकता है, लेकिन इसके बदले उसे रूस से लड़ने के लिए आर्थिक सहायता और नई तकनीक की जरूरत है। रूस के साथ चार साल से जारी युद्ध के दौरान यूक्रेन ने ईरान के डिजाइन वाले 'कामिकाजे' ड्रोन से लड़ने का बड़ा अनुभव हासिल किया है। यही अनुभव अब यूक्रेन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक महत्वपूर्ण सुरक्षा साझेदार बना रहा है।
भारत भी करता है इस्तेमाल
दरअसल ‘शाहेद ड्रोन' कामिकाजे ड्रोन का ही एक प्रकार है जिसे ईरान और रूस इस्तेमाल करते हैं। इन्हें अमेरिका, भारत और यूक्रेन खुद भी इस्तेमाल करते हैं। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, यूक्रेन ने खाड़ी के चार देशों में अपने विशेषज्ञ भेजे हैं। राष्ट्रपति जेलेंस्की ने बताया कि हर टीम में कई दर्जन विशेषज्ञ शामिल हैं। उन्होंने कहा कि ये टीमें 'स्थिति का विशेष आकलन करेंगी और दिखाएंगी कि ड्रोन-रोधी सुरक्षा प्रणाली कैसे काम करनी चाहिए।'
एक्सपर्ट्स भेजे
यूक्रेन का कहना है कि रूस के साथ युद्ध में उसने ईरान के 'शाहेद' ड्रोन के खिलाफ काफी अनुभव हासिल किया है। रूस ने इन ड्रोन का इस्तेमाल यूक्रेनी शहरों और बुनियादी ढांचे पर हमलों में बड़े पैमाने पर किया है। इसलिए यूक्रेन का कहना है कि वह उन देशों की मदद करना चाहता है जो समान खतरे का सामना कर रहे हैं। यूक्रेन के मुताबिक उसके विशेषज्ञ कतर, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब में काम शुरू कर चुके हैं। यूक्रेन का कहना है कि वह अपनी एंटी-ड्रोन तकनीक और विशेषज्ञता साझा कर सकता है, लेकिन इसके बदले उसे सहयोगियों से मजबूत समर्थन चाहिए होगा।
यूक्रेन की जरूरतें
कीव लंबे समय से पश्चिमी देशों से वायु-रक्षा मिसाइलों और मॉडर्न तकनीक की मांग कर रहा है। यूक्रेन का मानना है कि रूस के लगातार हमलों के कारण उसे इन प्रणालियों की सख्त जरूरत है। जेलेंस्की ने यह भी कहा कि अमेरिका ने इस मुद्दे पर कई बार यूक्रेन से संपर्क किया है। लेकिन इस मामले में अलग-अलग बयान सामने आए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंपने फॉक्स न्यूज रेडियो से कहा कि उनके देश को ड्रोन रक्षा के लिए 'यूक्रेन की मदद की जरूरत नहीं है।' इसके बावजूद यूक्रेन अपनी विशेषज्ञता को एक रणनीतिक संपत्ति के तौर पर पेश कर रहा है, जिससे उसे आर्थिक सहायता और नई सैन्य तकनीक मिल सके।
ईरान की तीखी प्रतिक्रिया
यूक्रेन के इस कदम पर ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। कीव में ईरान के दूत शाह्रियार अमूजेगर ने यूक्रेन की भूमिका को खारिज करते हुए कहा, 'जहां तक खाड़ी देशों में ड्रोन के खिलाफ यूक्रेन की कार्रवाइयों का सवाल है, हम इसे मूल रूप से मजाक और दिखावटी कदम से ज्यादा कुछ नहीं मानते।' उन्होंने यह भी कहा, 'दुर्भाग्य से यूक्रेन अब प्रभावी रूप से हमारे साथ सीधे टकराव के चरण में प्रवेश कर चुका है; यानी उसने खुद को हमारे दुश्मनों के साथ खड़ा कर लिया है।'
अमूजेगर ने यह दावा भी किया कि ईरान रूस के आक्रमण में शामिल नहीं है और वह यूक्रेन की क्षेत्रीय अखंडता का समर्थन करता है। उनके मुताबिक कीव ने 'पश्चिम से अधिक संसाधन हासिल करने के लिए ‘ईरान कार्ड' खेला है।' ईरानी सांसद इब्राहिम अजीजी ने भी कड़ा बयान देते हुए कहा कि अब यूक्रेन ने 'अपने पूरे क्षेत्र को ईरान के टारगेट में बदल दिया है।'
उन्होंने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 का हवाला देते हुए इसे 'आत्मरक्षा' का अधिकार बताया। हालांकि यूक्रेन ने इस बयान को तुरंत खारिज कर दिया। यूक्रेन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता जॉर्जी तिखी ने कहा कि यह दावा 'बेतुका' है और यह 'ऐसा है जैसे कोई सीरियल किलर अपने अपराधों को सही ठहराने के लिए आपराधिक संहिता का हवाला दे।'
]]>रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध ने एक बार फिर विनाशकारी मोड़ ले लिया है। रूसी रक्षा मंत्रालय ने शुक्रवार को पुष्टि की है कि उसने अपनी सबसे आधुनिक और घातक 'ओरेश्निक' (Oreshnik) मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल (IRBM) से यूक्रेन पर हमला किया है।
रूस का दावा है कि यह हमला दिसंबर में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के आवास पर हुए यूक्रेनी ड्रोन हमले का बदला है। इस ताजा मिसाइल हमले ने यूक्रेन के बुनियादी ढांचे और रिहायशी इलाकों को निशाना बनाया। यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा के अनुसार, इस हमले में 4 नागरिकों की मौत हो गई और 24 से अधिक लोग घायल हुए हैं। हमले के कारण कई इलाकों में पानी और हीटिंग की सप्लाई ठप हो गई है।
कितनी घातक है ओरेश्निक मिसाइल?
ओरेश्निक कोई साधारण मिसाइल नहीं है, बल्कि यह पारंपरिक हथियारों के साथ भी परमाणु जैसी तबाही मचाने में सक्षम है। इसकी रेंज करीब 1,000 से 5,500 किलोमीटर के बीच है और यह महज 15 मिनट में अपने लक्ष्य को भेद सकती है। इतनी तेज स्पीड के कारण दुनिया का कोई भी वर्तमान एयर डिफेंस सिस्टम इसे रोक नहीं सकता। पुतिन के अनुसार, हमले के वक्त इसका तापमान 4,000 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है, जो सूरज की सतह के करीब है। यह अपने रास्ते में आने वाली हर चीज को राख बना देती है।
यूक्रेन ने इसे रूस की "बर्बरता और आतंक" करार देते हुए कहा है कि पुतिन बमबारी के जरिए उन्हें अपनी शर्तें मानने पर मजबूर नहीं कर सकते। हालांकि, ओरेश्निक का दोबारा इस्तेमाल यह संकेत देता है कि रूस अब युद्ध को और अधिक आक्रामक स्तर पर ले जाने के लिए तैयार है।
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यूक्रेनी सेना के जनरल स्टाफ के मुताबिक, रूस ने अब तक कुल 10,07,160 सैनिक खो दिए हैं. सिर्फ पिछले 24 घंटे में ही 1,040 रूसी सैनिक मारे गए. इसके अलावा रूस के 10,947 टैंक, 22,845 बख्तरबंद वाहन, 52,312 सैन्य वाहन और ईंधन टैंकर, 29,265 तोप प्रणाली, 1,420 रॉकेट लॉन्चर, 1,187 एयर डिफेंस सिस्टम, 416 विमान, 337 हेलीकॉप्टर, 41,165 ड्रोन, 3,369 क्रूज मिसाइलें, 28 नौकाएं और एक पनडुब्बी भी तबाह हो चुकी है.
उत्तर कोरिया भेजेगा 5,000 सैनिक
रूसी समाचार एजेंसियों के मुताबिक, उत्तर कोरिया रूस के कुर्स्क क्षेत्र में अपने 5,000 सैनिक और 1,000 माइंस हटाने वाले विशेषज्ञ भेजने वाला है. इससे पहले भी उत्तर कोरिया के करीब 10,000 सैनिक रूस भेजे गए थे, जिनमें से 6,000 की जान जा चुकी है. यह जानकारी ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय ने इस सप्ताह दी है.
G-7 में पुतिन पर निशाना
G-7 सम्मेलन के दौरान फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि ‘अंतरराष्ट्रीय माहौल का फायदा उठाकर पुतिन निर्दोष नागरिकों पर हमला कर रहे हैं.’ इस हमले में एक अमेरिकी नागरिक की भी मौत हुई है.
कीव में मिसाइल हमला, 18 की मौत
रूस के मिसाइल और ड्रोन हमलों ने कीव शहर में तबाही मचा दी. अधिकारियों के मुताबिक, इस हमले में 18 लोगों की मौत और 151 लोग घायल हो गए. कीव के सोलोमियन्स्की जिले में नौ मंजिला बिल्डिंग को मिसाइल ने निशाना बनाया. घटनास्थल पर मौजूद 57 वर्षीय विक्टोरिया वोवचेंको ने कहा, ‘ऐसा मंजर पहले कभी नहीं देखा… यह आम लोगों को लगातार प्रताड़ित करने जैसा है.’
]]>रूसी हमले से सदमे में यूक्रेन
ज़ेलेंस्की ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, "यदि कोई दबाव नहीं डालता है और युद्ध को लोगों की जान लेने के लिए और समय देता है, तो वे दोषी और जिम्मेदार हैं। हमें निर्णायक रूप से कार्य करने की आवश्यकता है।" यूक्रेन के विदेश मंत्रालय ने राष्ट्रपति के आह्वान का समर्थन किया तथा सहयोगियों से अविलंब अंतर्राष्ट्रीय दबाव बढ़ाने का आग्रह किया। यूक्रेनी विदेश मंत्री एंड्री सिबिगा ने एक बयान में कहा, "रूस द्वारा रात में नागरिकों पर किया गया हमला एक बार फिर दर्शाता है कि मॉस्को पर अंतर्राष्ट्रीय दबाव यथाशीघ्र बढ़ाया जाना चाहिए।"
18 इमारतों को किया जमींदोज
यह हमला रूस की ओर से यूक्रेन पर हो रहे लगातार और व्यापक हमलों की कड़ी में एक और खतरनाक कदम है. खारकीव के मेयर इगोर टेरेखोव ने बताया कि हमले में 18 बहुमंजिला इमारतें और 13 निजी मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं.
यूक्रेन ने मचाई थी तबाही
पिछले दिनों यूक्रेन ने ड्रोन के जरिए रूस पर ताबड़तोड़ हमला किया. रॉयटर्स ने तीन ओपन सोर्स विश्लेषकों के हवाले से बताया है कि रूस के अंदर यूक्रेन द्वारा ड्रोन हमला किए जाने के तुरंत बाद ली गई रूसी एयर बेस की सैटेलाइट इमेज से पता चलता है कि कई बम गिराने वाले विमान नष्ट हो गए और बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए.
117 ड्रोन से किया अटैक
यूक्रेन ने टारगेट के करीब कंटेनरों से लॉन्च किए गए 117 मानव रहित एरियल व्हीकल का उपयोग करके रूस भर में करीब चार एयर बेस को निशाना बनाया. रॉयटर्स की ओर से वेरिफाइड ऑपरेशन के ड्रोन फुटेज से पता चलता है कि करीब दो जगहों पर कई एयरक्राफ्ट पर हमला किया गया.
चार लोगों की मौत की पुष्टि
कीव के मेयर विटाली क्लिट्स्को ने पुष्टि की कि चार लोगों की मौत हो गई है और कहा कि शहर में 20 लोग घायल हुए हैं। सोलोम्यांस्की जिले में, 16 मंजिला आवासीय इमारत की 11वीं मंजिल पर आग लग गई। आपातकालीन सेवाओं ने अपार्टमेंट से तीन लोगों को निकाला, और बचाव अभियान जारी है। इसके बाद एक धातु गोदाम में आग लग गई। क्षेत्रीय सैन्य प्रशासन प्रमुख दिमित्रो ब्रायज़िन्स्की के अनुसार, उत्तरी चेर्निहाइव क्षेत्र में, एक शाहेद ड्रोन एक अपार्टमेंट इमारत के पास फट गया, जिससे खिड़कियां और दरवाजे टूट गए। उन्होंने कहा कि शहर के बाहरी इलाकों में बैलिस्टिक मिसाइलों से विस्फोट भी दर्ज किए गए।
जेलेंस्की ने बताया कहां-कहां हुआ हमला
हमले के बाद जेलेंस्की ने एक्स पर लिखा, रूस अपनी नीति नहीं बदलता – शहरों और आम जीवन पर एक और बड़ा हमला। उन्होंने लगभग पूरे यूक्रेन को निशाना बनाया – वोलिन, लविवि, टेरनोपिल, कीव, सुमी, पोल्टावा, खमेलनित्सकी, चर्कासी और चेर्निहिव क्षेत्र। कुछ मिसाइलों और ड्रोन को मार गिराया गया। मैं अपने योद्धाओं को उनकी रक्षा के लिए धन्यवाद देता हूं। लेकिन दुर्भाग्य से, सभी को रोका नहीं जा सका।।"
400 ड्रोन, 40 मिसाइलों से हमला
उन्होंने आगे कहा, आज के हमले में कुल मिलाकर 400 से अधिक ड्रोन और 40 से अधिक मिसाइलों – बैलिस्टिक मिसाइलों सहित – का इस्तेमाल किया गया। 49 लोग घायल हुए। दुर्भाग्य से, संख्या बढ़ सकती है – लोग मदद के लिए आगे आ रहे हैं। अब तक, तीन मौतों की पुष्टि हुई है – वे सभी यूक्रेन की राज्य आपातकालीन सेवा के कर्मचारी थे। उनके परिवारों के प्रति मेरी हार्दिक संवेदना। सभी आवश्यक सेवाएं अब ग्राउंड पर काम कर रही हैं, मलबे को साफ कर रही हैं और बचाव अभियान चला रही हैं। सभी नुकसान निश्चित रूप से बहाल किए जाएंगे।"
]]>रूस और यूक्रेन में जारी जंग के बीच पश्चिमी देश जर्मनी ने बड़ा फैसला लिया है। जर्मनी का कहना है कि वह यूक्रेन को 5 अरब पाउंड की मदद करेगा ताकि वह लॉन्ग रेंज की मिसाइलें बना सके। जर्मनी ने साफ कहा कि रूस से मुकाबले में यूक्रेन को लॉन्ग रेंज मिसाइलों की जरूरत है और हम उसके लिए फंडिंग करेंगे। जर्मनी की ओर से दी जाने वाली मदद को साफ तौर पर सैन्य मदद कहा गया है। जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने पहले ही इस बारे में यूक्रेन से वादा किया था। जर्मनी के रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि हमारी यह मदद एक युद्ध ग्रस्त देश के लिए है, जिसे बड़े पैमाने पर हथियारों की जरूरत है। इस मदद से उसे उत्पादन बढ़ाने में सफलता मिलेगी।
यही नहीं जर्मनी का कहना है कि आर्थिक मदद के अलावा वह लॉन्ग रेंज की मिसाइलों के कंपोनेंट भी यूक्रेन को मुहैया कराएगा। दरअसल यूक्रेन के पास हथियारों की बड़ी किल्लत है। इसके अलावा आर्थिक तंत्र भी उसका टूट चुका है। ऐसी स्थिति में जर्मनी ने उसे दोहरी मदद करने का फैसला लिया है। एक तरफ उसे आर्थिक मदद देगा तो वहीं दूसरी तरफ हथियारों के पार्ट्स भी सीधे तौर पर मुहैया कराएगा। इसी सप्ताह जर्मन चांसलर मर्ज ने कहा था कि यूक्रेन के हमलों की अब कोई रेंज नहीं है। वह रूस में अंदर तक घुसकर मार कर रहा है। दरअसल हाल ही में रूस की राजधानी तक अटैक किया गया था, जिसमें व्लादिमीर पुतिन तक पर निशाना साधने की चर्चा थी।
दरअसल जर्मनी के अलावा कई यूरोपीय देश लगातार रूस पर दबाव बना रहे हैं कि वह जंग को समाप्त कर दे। यही नहीं अमेरिका भी रूस से जंग खत्म करने को कह रहा है। इसी महीने यूक्रेन और रूस के बीच सीधी वार्ता भी तुर्की में आयोजित करने का प्रयास हुआ था। इस वार्ता में यूक्रेन के वोलोदिमीर जेलेंस्की तो पहुंचे थे, लेकिन रूस ने अपने निचले लेवल के अधिकारियों को भेज दिया था। किसी भी मंत्री स्तर के व्यक्ति को भी नहीं भेजा था। इसके चलते दोनों देशों के बीच शांति वार्ता सिरे नहीं चढ़ सकी। हालांकि इस दौरान कई रातें ऐसी रही हैं, जब यूक्रेन पर भारी गुजरी हैं।
बता दें कि जेलेंस्की ने पश्चिमी देशों से मांग की थी कि उन्हें 30 अरब डॉलर इस साल के अंत दिए जाएं। ऐसा इसलिए ताकि घरेलू स्तर पर हथियारों के उत्पादन को बढ़ाया जा सके। उनका कहना था कि अमेरिका की ओर से हमें अब पर्याप्त मदद नहीं मिल रही है। ऐसी स्थिति में अपने स्तर पर ही संसाधन तैयार करने होंगे। फिलहाल रूस की ओर से जर्मनी के फैसले को लेकर कोई टिप्पणी नहीं की गई है।
]]>रूस और यूक्रेन के बीच पिछले 1000 दिनों से युद्ध जारी है। इस बीच यूक्रेन ने रूसी क्षेत्र कुर्स्क पर हमला किया। इस हमले पर बात करते हुए हुए यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने बताया कि इलाके में रूस ने अपने 38000 जवानों को खो दिए। इसके साथ ही उन्होंने क्षेत्र में बफर जोन और रूसी सैन्य संपत्तियों को नष्ट करने पर जोर दिया। उन्होंने सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी दी।
यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा, "कुर्स्क क्षेत्र में हमारी कार्रवाई को आज पांच महीने पूरे हो चुके हैं। हम रूसी क्षेत्र में बफर जोन को बरकरार रखे हुए हैं। वहां उनके सैन्य ताकतों को नष्ट कर रहे हैं। कुर्स्क अभियान के दौरान दुश्मनों ने अपने लगभग 38000 सैनिकों को खो दिया।" उन्होंने आगे कहा, "रूस ने कुर्स्क में अपने सबसे मजबूत सैनिकों को तैनात किया था, जिसमें उत्तर कोरिया के सैनिक भी शामिल थे। महत्वपूर्ण बात यह है कि इन लोगों को अब अन्य मोर्चों पर पुन:निर्देशित नहीं किया जा सकता है।" जेलेंस्की ने अपने सभी सैनिकों की सराहना की। उन्होंने कहा, "मैं अपने सभी योद्धाओं का धन्यवाद करता हूं। उन्होंने यूक्रेन को अधिक सुरक्षा और ताकत प्रदान की।" बता दें कि यूक्रेन ने रविवार को कुर्स्क में जवाबी हमले किए। इन हमलों के साथ रूस को चेतावनी दी गई कि मॉस्को को वह मिल रहा है, जिसका वह हकदार है। यूक्रेनी सेंटर फॉर काउंटरिंग डिसइनफॉर्मेशन के प्रमुख एंड्री कोवलेंको ने बताया कि क्षेत्र में घुसपैठ करने के कुछ दिन बाद ही यूक्रेनी सेना ने कुर्स्क के विभिन्न इलाकों में हमले किए। टेलीग्राम पर साझा की गई एक पोस्ट में उन्होंने कहा, "कुर्स्क क्षेत्र, अच्छी खबर है। रूस को वह मिल रहा है, जिसका वह हकदार है।"
यूक्रेनी सेना ने पहली बार अगस्त में कुर्स्क में घुसपैठ की थी। इस दौरान उन्होंने अधिकांश क्षेत्र पर कब्जा कर लिया था। रूस ने यूक्रेनी सेनाओं को क्षेत्र से हटाने के लिए उत्तर कोरिया के सैनिकों की मदद ली। रविवार को रूसी रक्षा मंत्रालय ने कहा कि यूक्रेनी सेना ने उनकी आक्रमण को रोकने के लिए जवाबी हमले किए थे और बर्डिन गांव के पास यूक्रेनी हमले को नाकाम किया। रूस ने हवाई शक्ति का इस्तेमाल किया और कहा कि सुदज़ा जिले में सक्रिय शत्रुता थी। दुश्मन बख्तरबंद वाहनों पर मोबाइल समूहों में काम कर रहा था।
]]>रिपोर्ट में तीन भारतीय अधिकारियों के हवाले से कहा गया कि रूस ने कम से कम दो मौकों पर इस मुद्दे को उठाया है। इसमें रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और डॉ.एस जयशंकर के बीच जुलाई में हुई मीटिंग भी शामिल है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक रूस और भारत के रक्षा मंत्रालयों ने इससे जुड़े सवाल का जवाब नहीं दिया। जनवरी में भारीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने कहा था कि भारत न यूक्रेन को तोपखाने के लिए गोले नहीं बेचे हैं।
वहीं रूस और भारत के विदेश और रक्षा मंत्रालयों ने इस से जुड़े सवालों के जवाब नहीं दिए। इससे पहले जनवरी में भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि भारत ने यूक्रेन को हथियार नहीं भेजे हैं और ना ही बेचे हैं। सूत्रों के मुताबिक यूक्रेन ने भारत में बने हुए हथियारों का बहुत कम मात्रा में इस्तेमाल किया है। एक अधिकारी ने अनुमान लगाया कि यह जंग के बाद से यूक्रेन द्वारा आयात किए गए कुल हथियारों का 1% से भी कम है। हालांकि अब तक यह पता नहीं चला है गोला-बारूद को यूरोपीय ग्राहकों ने यूक्रेन को फिर से बेचा गया या दान किया है।
गौरतलब है कि भारत के रूस के साथ भी अच्छे संबंध हैं जो दशकों से भारत को हथियार मुहैया करता है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के खिलाफ पश्चिमी देशों के रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों में शामिल होने से इनकार कर दिया है। भारत लंबे समय से दुनिया का सबसे बड़ा हथियार आयातक है। यह यूरोप में लंबे समय से चल रहे जंग को अपने हथियार निर्यात क्षेत्र को मजबूत करने के मौके के रूप में भी देख रहा है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट थिंक-टैंक के मुताबिक भारत ने 2018 और 2023 के बीच लगभग 3 बिलियन डॉलर के हथियारों का निर्यात किया।
कितने हथियार भेजे गए?
रिपोर्ट में कहा गया कि भारत के हथियार का इस्तेमाल यूक्रेन युद्ध में बेहद कम मात्रा में हुआ है। एक अधिकारी का अनुमान है कि यूक्रेन ने जितने भी गोला बारूद का आयात किया है यह उसका एक फीसदी से भी कम होगा। रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि नहीं हो सकी कि क्या यूरोप के देशों ने इसे यूक्रेन को दान में दिया या फिर उसे बेचा है। यूक्रेन को भारतीय युद्ध सामग्री भेजने वाले यूरोपीय देशों में इटली और चेक गणराज्य भी शामल हैं। यह यूक्रेन के लिए यूरोपीय संघ से अलग भी हथियार भेज रहे हैं। यूक्रेन युद्ध में सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी यंत्र इंडिया के हथियार इस्तेमाल हो रहे हैं।
'भारत ने नहीं की कार्रवाई'
भारतीय अधिकारी ने कहा कि भारत स्थिति पर नजर बनाए है। लेकिन ट्रांसफर की जानकारी रखने वाले एक रक्षा उद्योग के कार्यकारी के साथ उन्होंने कहा कि आपूर्ति को कम करने के लिए भारत ने कोई कार्रवाई नहीं की है। यूक्रेन, इटली, स्पेन और चेक गणराज्य के रक्षा मंत्रालयों ने भी इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है। यूक्रेन को सबसे ज्यादा समर्थन अमेरिका देता है। हाल ही में अमेरिका और भारत का रक्षा सहयोग बढ़ा है। इसके अलावा भारत का रूस से भी अच्छा संबंध है, जो उसके हथियारों का प्रमुख सप्लायर रहा है। भारत रूस के खिलाफ पश्चिमी नेतृत्व में शामिल होने से इनकार कर चुका है।
]]>रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन युद्ध को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि रूस-यूक्रेन के बीच शांति वार्ता के लिए भारत, चीन और ब्राजील मध्यस्थता कर सकते हैं। गुरुवार को एक कार्यक्रम के दौरान पुतिन ने कहा रूस और यूक्रेन की जंग शुरू होने के एक हफ्ते बाद ही इस्तांबुल में हुई बातचीत में जंग को लेकर एक प्राथमिक समझौते पर सहमति बनी थी, लेकिन इस समझौते को कभी लागू नहीं किया गया। अब अगर फिर से मध्यस्थता की बातचीत शुरू होती है तो इस्तांबुल में हुआ प्राथमिक समझौता इस बातचीत का आधार बन सकता है।
क्या PM मोदी के रूस दौरे से खुला था शांति का रास्ता?
पीएम मोदी जुलाई महीने में रूस के दौरे पर गए थे. उनका यह दौरा नाटो समिट के बीच हुआ था. इस दौरान राष्ट्रपति पुतिन को गले लगाते पीएम मोदी की तस्वीरें काफी चर्चा में रही थी. इस दौरान मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को याद दिलाया था कि युद्ध के मैदान से शांति का रास्ता नहीं निकलता.
इस दौरान पुतिन ने पीएम मोदी को रूस के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ऑर्डर ऑफ सेंट एंड्रयू द एपोस्टल से भी सम्मानित किया था. लेकिन यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की उनके इस दौरे से नाराज थे और सार्वजनिक तौर पर नाराजगी जाहिर की थी.
रूस के बाद यूक्रेन भी पहुंचे थे PM मोदी
प्रधानमंत्री मोदी रूस के बाद 23 अगस्त को यूक्रेन के दौरे पर गए थे. वह पोलैंड से ट्रेन के जरिए कीव पहुंचे थे. पीएम मोदी राष्ट्रपति जेलेंस्की के साथ यूक्रेन नेशनल म्यूजियम पहुंचे थे. इस मुलाकात की कई तस्वीरें और वीडियो वायरल हुई थीं, जिनमें दोनों नेताओं को भावुक होते देखा गया था.
इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि यूक्रेन बिना समय गंवाए शांति की बात करें. उन्होंने कहा कि समाधान का रास्ता बातचीत से ही निकलता है, डायलॉग-डिप्लोमेसी से निकलता है. और हमें बिना समय गंवाए इस दिशा में आगे बढ़ना चाहिए. जेलेंस्की से ये बात कहने से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें इस मुसीबत से बाहर निकालने में मदद का भरोसा भी दिया था.
इस दौरान पीएम मोदी ने जेलेंस्की से कहा था कि कुछ समय पहले मैं राष्ट्रपति पुतिन से मिला था, तो मीडिया के सामने आंख में आंख मिलाकर उनसे कहा था कि ये युद्ध का समय नहीं है. मैं पिछले दिनों रूस में मुलाकात के लिए गया था. वहां पर मैंने साफ-साफ अपनी बात कही है कि किसी भी समस्या का समाधान रणभूमि में कहीं भी नहीं होता है.
भारत लगातार शांति की अपील कर रहा
भारत लगातार रूस और यूक्रेन युद्ध को रोककर शांति की अपील कर रहा है. भारत लगातार इस मामले को जल्द से जल्द शांत करवाने का पक्षधर है. उन्होंने यूक्रेन दौरे पर जेलेंस्की को ऑफर भी दिया था कि शांति की कोशिश में भारत सक्रिय भूमिका निभाने को तैयार हैं. उन्होंने जेलेंस्की से कहा कि मैं आपको विश्वास दिलाना चाहता हूं कि शांति के हर प्रयास में भारत अपनी सक्रिय भूमिका निभाने को तैयार है.
ईस्टर्न इकॉनोमिक फोरम में दिया बयान
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईस्टर्न इकॉनोमिक फोरम के कार्यक्रम में पुतिन ने कहा कि हमारा प्रमुख उद्देश्य यूक्रेन के डोनबास क्षेत्र को कब्जे में लेना है। फिलहाल रूसी सेना कुर्स्क से यूक्रेनी सेना को पीछे खदेड़ रही है। रूस-यूक्रेन के बीच जारी युद्ध को दो साल से ज्यादा का समय बीत चुका है। कई बार रूस यूक्रेन के बीच मध्यस्थता की कोशिश की गई है, लेकिन पुतिन के इन शांति वार्ताओं में शामिल न होने के चलते इन बैठकों का कोई सकारात्मक नतीजा नहीं निकल पाया। अब खुद पुतिन ने संकेत दिए हैं कि वह बातचीत के लिए तैयार हैं। पुतिन का यह बयान ऐसे समय सामने आया है, जब बीते दिनों प्रधानमंत्री मोदी ने रूस के दौरे पर शांति की अपील की थी। बीते महीने ही यूक्रेन दौरे पर भी पीएम मोदी ने शांति की अपील की थी और कहा था कि भारत इसके लिए मदद करने के लिए तैयार है।
फर्स्टपोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, रूस के कुर्स्क क्षेत्र में यूक्रेनी सेना का आक्रमण द्वितीय विश्व युद्ध के बाद रूसी धरती पर सबसे बड़ा हमला था। यह घटनाक्रम मॉस्को के सैन्य नेतृत्व के लिए एक गंभीर शर्मिंदगी का सबब बन रही है। इसके लिए रूस की सेना और सरकार को युद्ध से निपटने के लिए बढ़ती आंतरिक आलोचना का भी सामना करना पड़ा है।
28 रूसी बस्तियों पर यूक्रेन का कब्जा
कुर्स्क गवर्नर एलेक्सी स्मिरनोव ने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को बताया कि यूक्रेनी सेना 40 किलोमीटर के मोर्चे पर 12 किलोमीटर तक क्षेत्र में घुस आई है। कीव की सेना ने 28 रूसी बस्तियों पर कब्जा कर लिया है। स्मिरनोव के मुताबिक, इस हमले में 12 नागरिक मारे गए हैं और 121 घायल हुए हैं। वहीं करीब एक लाख 21 हजार लोगों को घरों से भागना पड़ा है। रूसी सेना अभी भी आश्चर्यजनक यूक्रेनी हमले से जूझ रही है और एक सप्ताह की लड़ाई के बाद भी कोई प्रभावी जवाबी कार्रवाई नहीं कर पाई है।
रूसी राष्ट्रपति पुतिन का कहना है कि यूक्रेन स्थिति का फायदा उठाने की कोशिश में लगा है।पुतिन ने घुसपैठ पर अपनी टिप्पणी में सुझाव दिया कि यूक्रेन के इस हमले का उद्देश्य संभावित शांति वार्ता में अपना पक्ष मजबूत करना था। उन्होंने कीव पर रूस पर प्रभुत्व हासिल करने के लिए अपने पश्चिमी आकाओं की मदद से काम करने का आरोप लगाते हुए कहा कि ये अन्य क्षेत्रों में रूसी सेना की प्रगति को धीमा करने का प्रयास है। रूसी अधिकारियों ने अनुमान लगाया है कि यूक्रेन की घुसपैठ का उद्देश्य अपने पश्चिमी सहयोगियों को यह दिखाना है कि वह अभी भी बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान चला सकता है, भले ही दोनों पक्षों पर बातचीत पर विचार करने के लिए अंतरराष्ट्रीय दबाव बन रहा हो।
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