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पीथमपुर के भस्मक संयंत्र में भोपाल गैस त्रासदी का 337 टन कचरा जलकर राख बन चुका है। अब पीथमपुर में ही ट्रीटमेंट, स्टोरेज, डिस्पोज फेसिलिटी (टीएसडीएफ) परिसर के लैंडफिल में दिसंबर तक इस राख का निपटान (डिस्पोज) किया जाएगा।
यह प्रक्रिया कोर्ट द्वारा निर्धारित एक्सपर्ट कमेटी के मार्गदर्शन में होगी। उक्त कमेटी में मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राष्ट्रीय पर्यावरण इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्थान (नीरी) के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
यूनियन कार्बाइड के कचरे को पीथमपुर में भस्मक संयंत्र में नष्ट करने के दौरान उसके चिमनी से निकलने वाले धुएं में हानिकारक तत्वों की जांच की गई। इसमें मर्करी, सल्फर डाइ आक्साइड, कार्बन मोनो आक्साइड जैसी जहरीली गैसों के अलावा डायक्सीन फ्यूरान गैस की भी जांच की गई। डायक्सीन फ्यूरान गैस की निर्धारित से अधिक मात्रा मनुष्य के लिए नुकसानदायक होती है।
बायो मेडिकल वेस्ट प्लांट, भस्मक संयंत्रों में वर्ष में एक बार अपने प्लांट की चिमनी से निकलने वाली गैसों में डायक्सीन फ्यूरान की जांच की जाती है। पीथमपुर के भस्मक संयंत्र का संचालन करने वाली एनर्जी एन्वायरो कंपनी ने यूनियन कार्बाइड का कचरा जलाने के दौरान 55 दिन में 14 बार (प्रत्येक सप्ताह में दो बार) डायक्सीन फ्यूरान गैस का सैंपल किया और इसे जांच के लिए गुरुग्राम की फेयर लैब में अलग-अलग समय के अंतराल पर भेजा गया।
वहीं मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा भी डायक्सीन फ्यूरान की अलग से जांच की गई और 55 दिन में चार बार सैंपल कोलकाता की इफरैक लैब में जांच के लिए भेजे गए।
गौरतलब है कि भस्मक संयंत्र की चिमनी से स्टैक मानीटरिंग किट के माध्यम से इस गैस के लिए सैंपल लेने की प्रक्रिया में आठ घंटे का समय लगता है। विज्ञानी व विशेषज्ञ खास हेलमेट व दस्ताने पहनकर किट के माध्यम से बोतलों में इसके सैंपल एकत्र करते हैं। देश में दो प्रमुख लैब में ही इसकी जांच की सुविधा है।
]]>पीथमपुर में यूनियन कार्बाइड के कचरे को जलाने का दूसरा चरण आज से शुरू होगा। दूसरे चरण के ट्रायल रन में कचरा 180 किलो प्रति घंटे की दर से डाला जाएगा। इस तरह 10 टन कचरा 55 घंटे में जलेगा। पहले चरण में 135 किलो प्रति घंटे की दर से कचरा जलाया गया था। कचरा जलाने के दौरान वायु प्रदूषण की निगरानी पूर्ववत रहेगी।
जेएनएन, इंदौर। भोपाल गैस त्रासदी की जिम्मेदार यूनियन कार्बाइड कंपनी के जहरीले कचरे को इंदौर से सटे पीथमपुर में जलाने का दूसरा चरण बुधवार को शुरू होगा। दूसरे चरण के पहले मंगलवार को भस्मक की सफाई व संधारण का काम हुआ।
कचरा 180 किलो प्रति घंटे की दर से डाला जाएगा
दूसरे चरण के ट्रायल रन में कचरा 180 किलो प्रति घंटे की दर से डाला जाएगा। इस तरह 10 टन कचरा 55 घंटे में जलेगा। पहले चरण में 135 किलो प्रति घंटे की दर से कचरा जलाया गया था। कचरा जलाने के दौरान वायु प्रदूषण की निगरानी पूर्ववत रहेगी।
निष्पादन के लिए कचरा जलाना शुरू
पहले चरण की तरह मशीन को रातभर खाली चलाकर तापमान 800 से 850 डिग्री तक पहुंचाया जाएगा। बता दें कि हाई कोर्ट के निर्देशानुसार भोपाल में 40 वर्षों से पड़े यूनियन कार्बाइड के कचरे के निष्पादन के लिए कचरा जलाना शुरू हो चुका है।
क्या हुआ था 40 साल पहले
उल्लेखनीय है कि तीन दिसंबर 1984 की सुबह की घटना जब भी लोगों के जहन में आती है, एक डरावनी तस्वीर सामने आने लगती है। इस दिन भोपाल में स्थित एक यूनियन कार्बाइड कॉर्पोरेशन के स्वामित्व वाली एक कीटनाशक फ़ैक्ट्री से मिथाइल आइसोसाइनेट गैस लीक होने लगी। लीक हुई गैस की चपेट में हजारों लोग आए थे। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि इस हादसे में पांच हजार लोगों की जान गई थी। हालांकि, स्थानीय लोगों ने कहा था कि इस हादसे में इससे भी ज्यादा लोगों ने जान गवाईं थी।
सुप्रीम कोर्ट का दखल से इनकार
यूनियन कार्बाइड का जहरीला कचरा धार जिले के पीथमपुर में ही जलेगा। सुप्रीम कोर्ट ने कचरा जलाने पर रोक लगाने से इनकार करते हुए कहा कि वो इसमें दखल नहीं देगी। गुरुवार सुबह हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता चाहें तो इस संबंध में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के समक्ष आपत्ति दर्ज करा सकते हैं।
कोर्ट ने राज्य सरकार के उस जवाब को भी रिकॉर्ड पर ले लिया है, जिसमें कहा है कि कचरा जलाने के दौरान सभी नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा।
हाई कोर्ट को सौंपी जाएगी रिपोर्ट
इसके प्रभाव की रिपोर्ट 27 मार्च के पूर्व हाई कोर्ट को सौंपी जाएगी। वर्ष 2015 में भी पीथमपुर के इसी संयंत्र में 10 टन जहरीला कचरा जलाकर ट्रायल रन किया गया था। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कचरे को जलाने पर प्रशासनिक अफसरों ने निर्णय लिया।
]]>उच्च न्यायालय जबलपुर द्वारा रिट याचिका क्रमांक 2802/2004 (आलोक प्रताप सिंह विरुद्ध यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य) में विगत 18 फरवरी 2025 को पारित आदेशानुसार यूनियन कार्बाइड के अपशिष्ट का प्रथम ट्रायल रन 27 फरवरी 2025 से मेसर्स पीथमपुर इंडस्ट्रीयल वेस्ट मैनेजमेंट प्रा.लि. पीथमपुर, जिला धार द्वारा संचालित इंसीनरेटर में किया जा रहा है।
संभागायुक्त दीपक सिंह ने बताया कि आज 02 मार्च,2025 को शाम 05 बजे तक 6750 किलोग्राम अपशिष्ट का दहन किया जा चुका है। अपशिष्ट के साथ लगभग 6750 किलोग्राम लाईम भी मिलाकर दहन किया गया है। फ्लू गैसेस की सफाई हेतु लगभग 7500 किलोग्राम लाईम, 3750 किलोग्राम एक्टीवेटेड कार्बन तथा 50 किलोग्राम सल्फर का उपयोग किया गया। अपशिष्ट को जलाने हेतु लगभग 33 हजार लीटर डीजल की खपत हो चुकी है। अपशिष्ट के दहन के दौरान चिमनी से हो रहे इमीशन की लगातार मॉनिटरींग केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड एवं म.प्र. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के लगभग 20 अधिकारी / कर्मचारियों द्वारा की जा रही है। साथ ही इमीशन के लगातार मॉनिटरींग के लिये ऑनलाईन कन्टीन्युअस इमीशन मॉनिटरींग सिस्टम (OCEMS) भी संचालित है। चिमनी से उत्सर्जन निर्धारित मानक सीमा के भीतर पाये जा रहे है।
संभागायुक्त सिंह ने बताया कि पर्टीक्यूरेट मेटर का उत्सर्जन 9.6 मिलीग्राम/सामान्य घनमीटर है, जिसकी निर्धारित अधिकतम मानक सीमा 50 मिलीग्राम/सामान्य घनमीटर है। इसी तरह सल्फर डाईऑक्साइड का उत्सर्जन 70 मिलीग्राम/सामान्य घनमीटर है, इसकी अधिकतम मानक सीमा 200 मिलीग्राम/सामान्य घनमीटर है। नाईट्रोजन ऑक्साईड्स का उत्सर्जन 116 मिलीग्राम/सामान्य घनमीटर है, इसकी निर्धारित अधिकतम मानक सीमा 400 मिलीग्राम/सामान्य घनमीटर है। कार्बन मोनो ऑक्साईड का उत्सर्जन 18 मिलीग्राम/सामान्य घनमीटर है, इसकी अधिकतम मानक सीमा 100 मिलीग्राम/सामान्य घनमीटर है।
इसी प्रकार कार्बन डाईऑक्साइड का उत्सर्जन 6.54 प्रतिशत हो रहा है, इसकी निर्धारित अधिकतम मानक सीमा 7 प्रतिशत है। हाईड्रोजन क्लोराईड का उत्सर्जन 3.86 मिलीग्राम/सामान्य घनमीटर है, इसकी अधिकतम मानक सीमा 50 मिलीग्राम/सामान्य घनमीटर है। हाईड्रोजन फ्लोराईड का उत्सर्जन 1.85 मिलीग्राम/सामान्य घनमीटर है, इसकी निर्धारित अधिकतम मानक सीमा 4 मिलीग्राम/सामान्य घनमीटर है तथा टोटल आर्गेनिक कार्बन का उत्सर्जन 2 मिलीग्राम/सामान्य घनमीटर है, इसकी निर्धारित अधिकतम मानक सीमा 20 मिलीग्राम/सामान्य घनमीटर है।
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उच्च न्यायालय जबलपुर द्वारा रिट याचिका क्रमांक 2802/2004 (आलोक प्रताप सिंह विरुद्ध यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य) में विगत 18 फरवरी 2025 को पारित आदेशानुसार यूनियन कार्बाइड के अपशिष्ट का प्रथम ट्रायल रन 27 फरवरी 2025 से मेसर्स पीथमपुर इंडस्ट्रीयल वेस्ट मैनेजमेंट प्रा.लि. पीथमपुर, जिला धार द्वारा संचालित इंसीनरेटर में किया जा रहा है।
संभागायुक्त दीपक सिंह ने बताया कि आज 02 मार्च,2025 को शाम 05 बजे तक 6750 किलोग्राम अपशिष्ट का दहन किया जा चुका है। अपशिष्ट के साथ लगभग 6750 किलोग्राम लाईम भी मिलाकर दहन किया गया है। फ्लू गैसेस की सफाई हेतु लगभग 7500 किलोग्राम लाईम, 3750 किलोग्राम एक्टीवेटेड कार्बन तथा 50 किलोग्राम सल्फर का उपयोग किया गया। अपशिष्ट को जलाने हेतु लगभग 33 हजार लीटर डीजल की खपत हो चुकी है। अपशिष्ट के दहन के दौरान चिमनी से हो रहे इमीशन की लगातार मॉनिटरींग केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड एवं म.प्र. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के लगभग 20 अधिकारी / कर्मचारियों द्वारा की जा रही है। साथ ही इमीशन के लगातार मॉनिटरींग के लिये ऑनलाईन कन्टीन्युअस इमीशन मॉनिटरींग सिस्टम (OCEMS) भी संचालित है। चिमनी से उत्सर्जन निर्धारित मानक सीमा के भीतर पाये जा रहे है।
संभागायुक्त सिंह ने बताया कि पर्टीक्यूरेट मेटर का उत्सर्जन 9.6 मिलीग्राम/सामान्य घनमीटर है, जिसकी निर्धारित अधिकतम मानक सीमा 50 मिलीग्राम/सामान्य घनमीटर है। इसी तरह सल्फर डाईऑक्साइड का उत्सर्जन 70 मिलीग्राम/सामान्य घनमीटर है, इसकी अधिकतम मानक सीमा 200 मिलीग्राम/सामान्य घनमीटर है। नाईट्रोजन ऑक्साईड्स का उत्सर्जन 116 मिलीग्राम/सामान्य घनमीटर है, इसकी निर्धारित अधिकतम मानक सीमा 400 मिलीग्राम/सामान्य घनमीटर है। कार्बन मोनो ऑक्साईड का उत्सर्जन 18 मिलीग्राम/सामान्य घनमीटर है, इसकी अधिकतम मानक सीमा 100 मिलीग्राम/सामान्य घनमीटर है।
इसी प्रकार कार्बन डाईऑक्साइड का उत्सर्जन 6.54 प्रतिशत हो रहा है, इसकी निर्धारित अधिकतम मानक सीमा 7 प्रतिशत है। हाईड्रोजन क्लोराईड का उत्सर्जन 3.86 मिलीग्राम/सामान्य घनमीटर है, इसकी अधिकतम मानक सीमा 50 मिलीग्राम/सामान्य घनमीटर है। हाईड्रोजन फ्लोराईड का उत्सर्जन 1.85 मिलीग्राम/सामान्य घनमीटर है, इसकी निर्धारित अधिकतम मानक सीमा 4 मिलीग्राम/सामान्य घनमीटर है तथा टोटल आर्गेनिक कार्बन का उत्सर्जन 2 मिलीग्राम/सामान्य घनमीटर है, इसकी निर्धारित अधिकतम मानक सीमा 20 मिलीग्राम/सामान्य घनमीटर है।
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धार के कलेक्टर प्रियांक मिश्रा ने ने बताया कि हम विज्ञान शिक्षकों, प्रोफेसरों और अधिकारियों सहित 50 मास्टर ट्रेनर्स को तैयार कर रहे हैं। उन्हें कचरे की सटीक स्थिति के बारे में सूचित किया जाएगा, ताकि वे लोगों तक सही जानकारी पहुंचा सकें और गलत धारणाओं को दूर कर सकें। बता दें कि विगत दिनों पीथमपुर में कचरे के निष्पादन के खिलाफ जनाक्रोश और दो आत्मदाह की कोशिशों के बाद राज्य सरकार को बैकफुट पर जाना पड़ा है। इससे पहले इस महीने की शुरुआत में पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र में विरोध प्रदर्शन हुए थे।
1 जनवरी को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर स्थित प्रधान पीठ ने राज्य सरकार को छह सप्ताह में यूनियन कार्बाइड फैक्टरी के कचरे के निष्पादन पर सुरक्षा दिशा-निर्देशों के तहत कार्रवाई करने का निर्देश दिया था। इसके बाद, अधिकारियों ने लोगों को शिक्षित करने और उनके डर को दूर करने के लिए समय मांगा था। कलेक्टर ने बताया कि मास्टर ट्रेनर्स मंगलवार से अपने काम की शुरुआत करेंगे और 50 और मास्टर ट्रेनर्स को शामिल किया जाएगा। उन्होंने कहा, "हम वीडियो प्रस्तुतियों और अन्य माध्यमों से मास्टर ट्रेनर्स को प्रशिक्षण देंगे।"
पीथमपुर किया गया था शिफ्ट
गौरतलब है कि 2 जनवरी 2025 को 12 सील कंटेनरों में पैक कचरा भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड फैक्टरी से पीथमपुर स्थित निष्पादन स्थल पर ले जाया गया था। यह जगह राजधानी भोपाल से 250 किलोमीटर दूर है। हालांकि कचरा पहुंचने के कुछ ही घंटों बाद पीथमपुर में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि कचरे का निष्पादन मानव और पर्यावरण के लिए हानिकारक होगा।
कोर्ट ने सरकार को लगाई थी फटकार
3 दिसंबर 2024 को हुई सुनवाई के दौरान मप्र हाईकोर्ट ने अधिकारियों को यूनियन कार्बाइड फैक्टरी के कचरे का निष्पादन करने में असफल रहने पर फटकार लगाई थी। अदालत ने सरकार को चार सप्ताह के भीतर साइट से कचरे को हटाने और स्थानांतरित करने का आदेश दिया था और चेतावनी दी थी कि निर्देश का पालन न करने पर अवमानना की कार्रवाई की जाएगी।
जहरीला है कचरा
बता दें कि 2-3 दिसंबर 1984 की रात मप्र की राजधानी भोपाल में यूनियन कार्बाइड की कीटनाशक फैक्टरी से अत्यंत जहरीली मिथाइल आइसोसाइनेट गैस का रिसाव हुआ था, जिससे कम से कम 5,479 लोगों की मौत हो गई थी और हजारों लोग गंभीर चोटों और दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याओं से प्रभावित हुए थे।
यूनियन कार्बाइड (यूका) के रासायनिक कचरे का निष्पादन धार जिले के पीथमपुर में करने को लेकर उठे विवाद के बीच सरकार ने तय किया है कि हाईकोर्ट से इसके लिए समय मांगा जाएगा। सोमवार को मुख्य सचिव की ओर से शपथ पत्र प्रस्तुत किया जाएगा, जिसमें जनभावनाओं का हवाला दिया जाएगा।
कहा जाएगा कि पहले लोगों को समझाया जाएगा और सहमति बनाकर ही कचरा जलाने का काम किया जाएगा। इसकी शुरुआत भी कर दी गई है। धार के प्रभारी मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, अपर मुख्य सचिव डा. राजेश राजौरा को लोगों से संवाद करने का दायित्व दिया गया है। प्रशासन भी भ्रांतियों को दूर करने का काम कर रहा है।
भ्रांतियों को दूर करने की कोशिश
मुख्य सचिव अनुराग जैन ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश पर पूरी कार्रवाई हो रही है। इसको लेकर जो भ्रांतियां हैं, उन्हें पहले दूर किया जाएगा और इसके लिए हर स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं।
जब त्वचा रोग, पानी की गुणवत्ता और फसल खराब होने की जानकारी आई तो केंद्रीय प्रदूषण बोर्ड और एम्स का दल भेजकर 12 गांवों में जांच कराई गई। यहां कहीं भी मापदंड से अधिक मात्रा में कोई चीज नहीं पाई गई। केंद्रीय एजेंसियों की रिपोर्ट भी ऐसी ही हैं। हर राज्य में रासायनिक कचरे के निष्पादन के लिए एक स्थान नियत है।
कचरा मानकों के अनुसार पीथमपुर भेजा गया
पीथमपुर में यह काम हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट में जब यूनियन कार्बाइड के कचरे का मामला गया तो चार मार्च 2013 को निर्देश दिए गए कि 10 टन हिन्दुस्तान इन्सेक्टीसाइड लिमिटेड प्लांट केरल कोच्चि से रासायनिक कचरे के निष्पादन का काम प्रायोगिक तौर पर पीथमपुर में किया जाए।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 2013 में सफलतापूर्वक ट्रायल किया गया। हाईकोर्ट जबलपुर ने तीन दिसंबर 2024 को राज्य शासन एवं राज्य प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड को रासायनिक कचरा यूनियन कार्बाइड स्थल से पीथमपुर चार सप्ताह के भीतर सुरक्षित परिवहन करने के निर्देश दिए थे। इसके पालन में कचरा मानकों के अनुरूप भेजा गया।
जलाया जा चुका है 10 टन कचरा
मुख्य सचिव अनुराग जैन ने बताया कि हिन्दुस्तान इन्सेक्टीसाइड लिमिटेड प्लांट केरल कोच्चि के कचरे का सफलतापूर्वक निष्पादन के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 17 अप्रैल 2014 को निर्देश दिए कि यूनियन कार्बाइड का 10 टन कचरा का पीथमपुर में ट्रायल रन किया जाए। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 2015 में सफलतापूर्वक ट्रायल रन किया।
बोर्ड द्वारा प्रायोगिक निपटान की सभी रिपोर्ट न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की। इसमें यह सामने आया कि इस प्रकार के कचरे के निपटान से वातावरण कोई नुकसान होना स्पष्ट नहीं हुआ है। उसके बाद ही न्यायालय ने आगे बढ़ने और कचरे को नष्ट करने के निर्देश दिए।
इसके परिपालन में कचरे का परिवहन किया जा चुका है। अब इसे जलाने के लिए परिस्थितियों को देखते हुए निर्णय लिया जाएगा। हाईकोर्ट के समक्ष सभी तथ्यों को रखा जाएगा।
कचरे में 60 प्रतिशत मिट्टी है
यूनियन कार्बाइड का 358 टन कचरा निकला है। इसमें 60 प्रतिशत से अधिक तो स्थानीय मिट्टी है। 40 प्रतिशत सेवन नेपथाल, रिएक्टररेसीड्यूस और प्रोसेस पेस्टीसाइड्स का अपशिष्ट है। सेवन नेपथाल रेसीड्यूस मूलतः मिथाइल आइसो साइनेट एवं कीटनाशकों के बनने की प्रक्रिया का सह-उत्पाद होता है।
इसका जहरीलापन 25 साल में लगभग पूरी तरह समाप्त हो जाता है। कचरे की निपटान की प्रक्रिया का गहन परीक्षण किया गया होगा। पीथमपुर में कचरे के निष्पादन की पूरी वीडियोग्राफी कराया जाएगी। निष्कर्ष को शपथ-पत्र के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत किया जाएगा।
कोई भ्रमित न हो, वैज्ञानिकों की देखरेख में होगी प्रक्रिया
मुख्य सचिव ने बताया कि किसी को भ्रमित नहीं होना चाहिए।सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देश पर वैज्ञानिकों की देखरेख में सारा काम हो रहा है। यूनियन कार्बाइड का कचरा पहले निष्पादित किया जा चुका है, यह जानकारी कम ही लोगों को थी।
जब तथ्य सामने आए तो जनप्रतिनिधियों को भी अवगत कराया गया। अधिकारियों के साथ भी वर्चुअली संवाद कर उन्हें भी तथ्यात्मक जानकारी दी जाएगी ताकि वे भी आमजन को वास्तविकता से अवगत करा सकें। सामाजिक संगठनों को भी विश्वास में लिया जाएगा ताकि कहीं कोई भ्रम की स्थिति न रहे।
कचरा निष्पादन में लगेंगे छह महीने
मुख्य सचिव के अनुसार, कचरा निष्पादन में छह माह का समय लगेगा। इसकी प्रक्रिया निर्धारित है। 800 से 1000 डिग्री पर कचरा जलाया जाता है। जो भी गैस निकलेगी, वो विभिन्न रिपोर्ट के अनुसार मानकों के अनुरूप होगी। कचरा जलने के बाद जो राख बनेगी, उसे कैप्सूल में रखा जाएगा। इसकी भी प्रक्रिया निर्धारित है।
इतना विरोध होगा अंदाजा नहीं था
सूत्रों के अनुसार, सरकार को यह अंदाजा नहीं था कि कचरा जलाने को लेकर इतना विरोध होगा। यह बताया गया था कि लोगों को इस संबंध में जानकारी दी जा चुकी है पर जनभावनाओं का आकलन करने में चूक हुई।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए ही मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार देर रात दोनों उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा और राजेंद्र शुक्ल, प्रभारी मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा, स्थानीय विधायक नीना वर्मा, महाधिवक्ता, प्रमुख सचिव विधि, प्रदूषण नियंत्रण मंडल के अधिकारियों के साथ बैठक की।
यूका की भूमि के उपयोग पर फिलहाल विचार नहीं
मुख्य सचिव ने बताया कि फिलहाल यूका की भूमि के उपयोग को लेकर कोई विचार नहीं किया गया है। वहां स्मारक बनाया जाए या फिर ग्रीन एरिया विकसित करें या फिर अन्य उपयोग, सभी से विचार-विमर्श करके उचित समय पर निर्णय लिया जाएगा।
दो बार कचरे का हो चुका निष्तारण, पैरामीटर मानक सीमा में
मुख्य सचिव ने यह भी कहा कि 2014 में रामकी प्लांट में कचरे के निष्तारण का ट्रायल रन हो चुका है। इस पर नीरी, आईसीटी और सीपीसीबी ने अध्ययन भी किया था। इस ट्रायल रन के लिए कोच्चि के हिन्दुस्तान इनसेक्टीसाइड लिमिटेड से 10 मीट्रिक टन कचरा मंगाया गया था। वो कचरा भी यूनियन कार्बाइड के कचरे की तरह था। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था। इसके बाद 2015 में भोपाल यूनियन कार्बाइड का 10 मीट्रिक टन कचरा जलाकर उसका निष्तारण किया गया था। इस पर सीपीसीबी ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी रिपोर्ट पेश की थी, जिसमें बताया गया कि कचरे के निपटान का वातावरण पर कोई नुकसान नहीं हुआ। आसपास के 12 गांवों के लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया, जिसमें स्थिति सामान्य पाई गई थी और सभी रिपोर्ट के पैरामीटर मानक सीमा के अंदर थे।
कचरे को तेजी से जलाने कर रहे परीक्षण
मुख्य सचिव ने यह भी बताया कि यूनियन कार्बाइड के 358 मीट्रिक टन कचरे को पीथमपुर भेजा गया है, जिसमें 60 प्रतिशत स्थानीय मिट्टी और 40 प्रतिशत सेवन नेपथॉल रेसीड्यूस तथा अन्य कीटनाशक का अपशिष्ट है। इस कचरे को जलाने में लगभग 6 महीने का समय लगेगा। हालांकि, सीपीसीबी और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कचरे को तेजी से जलाने के लिए परीक्षण कर रहे हैं। यह प्लांट नया है।
कचरा जलाने सहमति बनाने हर स्तर पर करेंगे प्रयास
मुख्य सचिव ने कहा कि लोगों के बीच कचरा जलाने के बाद होने वाले नुकसान को लेकर गलतफहमियां फैली हुई हैं, जिन्हें दूर करने के लिए हर स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। प्रदेश सरकार के अधिकारी इंदौर और धार जिलों में जाकर लोगों को समझाएंगे और स्थानीय अधिकारियों को भी अब तक की सभी रिपोर्ट की जानकारी देंगे, ताकि स्थानीय लोगों की भ्रांतियों को दूर किया जा सके।
धुएं बनते हैं कैंसर की वजह
कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. दिगपाल धारकर के मुताबिक, ‘कुछ धुएं कैंसर का कारण बन सकते हैं। इन्हें कार्सिनोजेनिक धुआं कहा जाता है, जिनमें ऐसे पदार्थ होते हैं जो कैंसर का खतरा बढ़ा सकते हैं। तंबाकू के धुएं से फेफड़ों, गले और अन्य प्रकार के कैंसर तो डीजल के धुएं से फेफड़े और मूत्राशय के कैंसर का खतरा होता है। रासायनिक धुएं में वाष्पशील कार्बनिक यौगिक होते हैं, जो कैंसरकारी हो सकते हैं। कई मामलों में तो सालों बाद भी कैंसर का खतरा रहता है। लोगों को सुझाव दिया जाता हैै कि अगर वे कार्सिनोजेनिक धुएं के संपर्क में आते हैं तो किसी स्वास्थ्य विशेषज्ञ से संपर्क करें।’
कचरे की राख जमीन में डंप करने से दुष्प्रभाव
डॉ. पीयूष जोशी(एमडी )के मुताबिक, ‘रासायनिक कचरे की राख को जमीन में डंप करने से दुष्प्रभाव की आशंका रहती है। राख को जमीन में डंप करने से भूमिगत जल के दूषित होने की पूरी आशंका रहती है। पीथमपुर से यशवंत सागर जुड़ा है, बेटमा इलाका भी लगा है, जहां तक प्रभाव हो सकता है। इस तरह का दूषित जल पीने से कैंसर का खतरा रहता है। साथ ही गर्भवती महिला संपर्क में आती है तो गर्भस्थ बच्चा प्रभावित हो सकता है और पैदा होने पर उसमें विकृति की आशंका रहती है। त्वचा रोग का भी खतरा रहता है।’
एक्सपर्ट व्यू
डॉ. योगेंद्र व्यास, शिशु रोग विशेषज्ञ व फिटनेस कोच के मुताबिक, ‘पीथमपुर पहुंचा यूनियन कार्बाइड का कचरा(Union Carbide waste) 40 साल पुराना है। इसमें कोई केमिकल बचा नहीं है। विशेषज्ञ एनालिसिस भी कर रहे हैं। भोपाल से पीथमपुर इसलिए आया है, क्योंकि यहां मौजूद रामकी कंपनी इंटरनेशनल होने के साथ वेस्ट मैनेजमेंट का अनुभव भी रखती है। कई लोग बोल रहे हैं कि कचरे से नुकसान होगा व पर्यावरण प्रदूषित होगा। इसके बारे में कहूंगा कि भोपाल में यूनियन कार्बाइड की 70 एकड़ जमीन है। इसमें से 30 एकड़ पर कई सालों से अतिक्रमण है। वहां लोग रह रहे हैं। उन्हें असर हुआ या नहीं, इसकी स्टडी पहले कर ली जाए। रामकी कंपनी नौ माह में पूरे मापदंड के साथ इसका निष्पादन करेगी। सभी उत्सर्जित गैसों की निगरानी होगी। फिल्टर भी लगा है। इसलिए चिंतित नहीं होना चाहिए।’
धुएं बनते हैं कैंसर की वजह
कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. दिगपाल धारकर के मुताबिक, ‘कुछ धुएं कैंसर का कारण बन सकते हैं। इन्हें कार्सिनोजेनिक धुआं कहा जाता है, जिनमें ऐसे पदार्थ होते हैं जो कैंसर का खतरा बढ़ा सकते हैं। तंबाकू के धुएं से फेफड़ों, गले और अन्य प्रकार के कैंसर तो डीजल के धुएं से फेफड़े और मूत्राशय के कैंसर का खतरा होता है। रासायनिक धुएं में वाष्पशील कार्बनिक यौगिक होते हैं, जो कैंसरकारी हो सकते हैं। कई मामलों में तो सालों बाद भी कैंसर का खतरा रहता है। लोगों को सुझाव दिया जाता हैै कि अगर वे कार्सिनोजेनिक धुएं के संपर्क में आते हैं तो किसी स्वास्थ्य विशेषज्ञ से संपर्क करें।’
कचरे की राख जमीन में डंप करने से दुष्प्रभाव
डॉ. पीयूष जोशी(एमडी )के मुताबिक, ‘रासायनिक कचरे की राख को जमीन में डंप करने से दुष्प्रभाव की आशंका रहती है। राख को जमीन में डंप करने से भूमिगत जल के दूषित होने की पूरी आशंका रहती है। पीथमपुर से यशवंत सागर जुड़ा है, बेटमा इलाका भी लगा है, जहां तक प्रभाव हो सकता है। इस तरह का दूषित जल पीने से कैंसर का खतरा रहता है। साथ ही गर्भवती महिला संपर्क में आती है तो गर्भस्थ बच्चा प्रभावित हो सकता है और पैदा होने पर उसमें विकृति की आशंका रहती है। त्वचा रोग का भी खतरा रहता है।’
एक्सपर्ट व्यू
डॉ. योगेंद्र व्यास, शिशु रोग विशेषज्ञ व फिटनेस कोच के मुताबिक, ‘पीथमपुर पहुंचा यूनियन कार्बाइड का कचरा(Union Carbide waste) 40 साल पुराना है। इसमें कोई केमिकल बचा नहीं है। विशेषज्ञ एनालिसिस भी कर रहे हैं। भोपाल से पीथमपुर इसलिए आया है, क्योंकि यहां मौजूद रामकी कंपनी इंटरनेशनल होने के साथ वेस्ट मैनेजमेंट का अनुभव भी रखती है। कई लोग बोल रहे हैं कि कचरे से नुकसान होगा व पर्यावरण प्रदूषित होगा। इसके बारे में कहूंगा कि भोपाल में यूनियन कार्बाइड की 70 एकड़ जमीन है। इसमें से 30 एकड़ पर कई सालों से अतिक्रमण है। वहां लोग रह रहे हैं। उन्हें असर हुआ या नहीं, इसकी स्टडी पहले कर ली जाए। रामकी कंपनी नौ माह में पूरे मापदंड के साथ इसका निष्पादन करेगी। सभी उत्सर्जित गैसों की निगरानी होगी। फिल्टर भी लगा है। इसलिए चिंतित नहीं होना चाहिए।’
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हाईकोर्ट से और समय मांगा जाएगा
सरकार ने हाईकोर्ट से कचरे के निस्तारण के लिए 7 जनवरी तक का समय मांगा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों और व्यावहारिक कठिनाइयों को अदालत के सामने रखा जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी प्राथमिकता अदालत के आदेश का पालन करना और जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। बैठक में तय हुआ कि सरकार जनता को इस मुद्दे पर जागरूक करने के लिए कोशिश करेगी। इसके साथ ही, पर्यावरण और स्वास्थ्य पर किसी भी खतरे को रोकने के लिए अतिरिक्त उपाय किए जाएंगे।
जहरीले कचरे को लेकर लोगों में नाराजगी
धार जिले के पीथमपुर इंडस्ट्रियल एरिया में यूनियन कार्बाइड से जुड़े जहरीले कचरे को जलाने के फैसले से स्थानीय लोग नाराज हो गए हैं। शुक्रवार को प्रदर्शनकारियों ने हाईवे पर जाम लगाकर अपना विरोध जताया। सड़कों पर स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि दो प्रदर्शनकारियों ने खुद को आग लगाने की कोशिश की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि यह कचरा उनके स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए खतरनाक है। पथराव और प्रदर्शन के कारण प्रशासन को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा। इसके बाद मुख्यमंत्री ने तुरंत बैठक बुलाकर स्थिति को काबू में करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने बुलाई इमरजेंसी बैठक
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शुक्रवार देर रात उच्चस्तरीय बैठक बुलाई। बैठक में दोनों उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा और राजेंद्र शुक्ला, नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष वीडी शर्मा और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। बैठक में निर्णय लिया गया कि अदालत से कचरे के निस्तारण के लिए और समय मांगा जाएगा। साथ ही, यह सुनिश्चित किया जाएगा कि जनता को किसी प्रकार का नुकसान न हो। सीएम ने कहा कि सरकार जनता की सुरक्षा और पर्यावरण को प्राथमिकता देगी।
जनता की सुरक्षा सबसे ऊपर है
मुख्यमंत्री मोहन यादव नेकहा कि सरकार लोगों की सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यूनियन कार्बाइड का कचरा अदालत के निर्देश के मुताबिक पीथमपुर लाया गया था। हालांकि, अगर इससे जनता के बीच कोई डर है या फिर किसी तरह का खतरा पैदा हो रहा है, तो इसे अदालत के सामने रखा जाएगा। सीएम ने कहा कि जनता की भावनाओं का सम्मान करते हुए सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने जनता से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की।
पार्टी के नेताओं को समझाने की योजना
बैठक में यह भी तय किया गया कि पहले पार्टी के भीतर फैले भ्रम को दूर किया जाएगा। पार्टी अध्यक्ष वीडी शर्मा को यह जिम्मेदारी सौंपी गई कि वह नेताओं से बातचीत करें। खासकर, नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और धार विधायक नीना वर्मा को इस मुद्दे पर स्थिति स्पष्ट की जाएगी। बैठक में कैलाश विजयवर्गीय और नीना वर्मा ने कहा कि उन्हें पर्यावरण रिपोर्टों और परीक्षणों की जानकारी नहीं दी गई। इसके बाद मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सभी संबंधित पक्षों को पूरी जानकारी दी जाए।
पुलिस ने दर्ज किए पांच केस
प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा के चलते पुलिस ने पांच एफआईआर दर्ज की हैं। धार के एसपी मनोज कुमार सिंह ने बताया कि इन मामलों में कुछ आरोपी नामजद हैं, जबकि कुछ अज्ञात हैं। प्रदर्शन के बाद से स्थिति नियंत्रण में है। शनिवार को शहर का जनजीवन सामान्य रहा और फैक्ट्रियों ने काम शुरू कर दिया। हालांकि, किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए पुलिस बल की तैनाती जारी है। प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और कानून व्यवस्था बनाए रखने की तैयारी पूरी है।
कोर्ट के आदेश का पालन जरूरी
सीएम मोहन यादव ने कहा कि यूनियन कार्बाइड का कचरा कोर्ट के आदेश को ध्यान में रखते ही पीथमपुर लाया गया था। कचरे को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने में सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन किया गया है। हालांकि, जनता की सुरक्षा सबसे पहले है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मामले में अदालत से और समय मांगा जाएगा ताकि जनता के बीच किसी तरह का भय न रहे। सीएम ने भरोसा जताया कि सरकार अदालत के आदेश और जनता की भलाई के बीच संतुलन बनाए रखेगी।
कांग्रेस इस मुद्दे पर राजनीति कर रही है
मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे पर राजनीति कर रही है। उन्होंने कांग्रेस पर जनता को गुमराह करने और अफवाहें फैलाने का आरोप लगाया। सीएम ने कहा कि सरकार ने पर्यावरणीय रिपोर्टों और सुरक्षा मानकों का पूरी तरह अध्ययन किया है। उन्होंने जनता से अपील की कि किसी भी तरह की भ्रामक खबरों पर विश्वास न करें। सीएम ने भरोसा दिलाया कि उनकी सरकार हर परिस्थिति में जनता के साथ खड़ी है।
दरअसल, शुक्रवार सुबह से ही पीथमपुर के बाजार बंद हैं. चाय पानी की दुकानें बंद रखकर रहवासियों ने इस बंद को समर्थन दिया है. यहां छोटी-छोटी दुकानें भी बंद हैं.
इधर, कुछ बंद समर्थकों ने धनगड, बस स्टैंड और आजाद चौक पर पहुंचकर सड़कें जाम करने का प्रयास किया था. लेकिन वहां पर मौजूद पुलिस अधिकारियों से झड़प हुई. पुलिस ने कुछ बंद समर्थकों पर लठियां चलाईं, हल्का बल प्रयोग कर उन्हें समझाइश देकर रवाना किया.
वहीं, गुरुवार से आमरण अनशन पर बैठे संदीप रघुवंशी के समर्थन में बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं. जबकि सैलाना विधायक कमलेश डोडियार भी धरना स्थल पर ही मौजूद हैं.
सैलाना MLA कमलेश डोडियार भी प्रदर्शन में शामिल
हालांकि, औद्योगिक क्षेत्र में कारखाने चालू हैं. कर्मचारी और मजदूरों के आवागमन में कोई बाधा नहीं हो रही है. बसों का संचालन भी हो रहा है. क्षेत्र में पर्याप्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है.
कांग्रेस ने बीजेपी सरकार को घेरा
धार के लाठीचार्ज पर कांग्रेस ने बीजेपी सरकार को घेर लिया है. एमपी कांग्रेस ने पूछा है, ''क्या मध्यप्रदेश में लोकतंत्र शेष है या नहीं? पीथमपुर में यूनियन कार्बाइड का जहरीले कचरा जलाने का विरोध करने पर लाठी, MPPSC के खिलाफ आंदोलन पर युवाओं को जेल. इस सरकार ने विरोध को केवल दमन करना सीख लिया है! मोहन सरकार के अराजक राज में हक अधिकार की बात करना दुश्वार है.''
कांग्रेस राजनीति कर रही: डिप्टी CM
धार में यूनियन कार्बाइड के कचरे को लेकर हुए लाठीचार्ज पर मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने कहा कि सरकार ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि कचरा अब हानिकारक नहीं है और घटना के 25 साल बाद भी इसका असर खत्म नहीं हुआ है. पीथमपुर में भी कचरे को जलाने से कोई नुकसान नहीं है, इसलिए वहां के लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है. कांग्रेस यूनियन कार्बाइड के नाम पर राजनीति कर रही है.
337 टन जहरीला कचरा भोपाल से भेजा गया 250 किमी दूर
भोपाल गैस कांड के 40 साल बाद यूनियन कार्बाइड कारखाने का 337 टन जहरीला कचरा गुरुवार तड़के इंदौर के पास स्थित पीथमपुर की एक औद्योगिक अपशिष्ट निपटान इकाई में पहुंचा दिया गया. कड़ी सुरक्षा व्यवस्था में ग्रीन कॉरिडोर बनाकर जहरीले अपशिष्ट को 12 सीलबंद कंटेनर ट्रकों में भोपाल से 250 किलोमीटर दूर धार जिले के पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र की अपशिष्ट निपटान इकाई में भेजा गया. एक निजी कंपनी द्वारा संचालित इस यूनिट के आस-पास बड़ी तादाद में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है.
डधर, स्थानीय नागरिक समूहों ने यूनियन कार्बाइड कारखाने के जहरीले कचरे को पीथमपुर में नष्ट नहीं किए जाने की मांग को लेकर इस औद्योगिक कस्बे में विरोध प्रदर्शन जारी रखने की घोषणा की है. करीब 1.75 लाख की आबादी वाले पीथमपुर में शुक्रवार को बंद का आह्वान भी किया गया है.
नागरिकों ने जहरीले कचरे को पीथमपुर में नष्ट किए जाने से इंसानी आबादी और पर्यावरण पर दुष्प्रभावों की आशंका जताई है. प्रदेश सरकार ने इस कचरे के सुरक्षित निपटान के पक्के इंतजामों का भरोसा दिलाते हुए हुए इन आशंकाओं को खारिज किया है.
दरअसल, पीथमपुर धार लोकसभा क्षेत्र में आता है. इस क्षेत्र की लोकसभा में नुमाइंदगी करने वाली सावित्री ठाकुर केंद्र सरकार में महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री हैं. ठाकुर ने बताया कि हम जन प्रतिनिधि राज्य के मुख्यमंत्री मोहन यादव तक पीथमपुर के नागरिकों का पक्ष पहुंचाएंगे और मुख्यमंत्री से उचित कदम उठाए जाने का आग्रह किया जाएगा.
पीथमपुर, राज्य के प्रमुख शहर इंदौर से करीब 30 किलोमीटर दूर है. इंदौर के नागरिक भी यूनियन कार्बाइड कारखाने का जहरीला कचरा पीथमपुर में जलाए जाने का विरोध कर रहे हैं.
इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने मांग की है कि इस कचरे को पीथमपुर में नष्ट किए जाने की योजना पर फिर से विचार किया जाना चाहिए और इस सिलसिले में राज्य सरकार की ओर से मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में पुनरीक्षण याचिका दायर की जानी चाहिए।
बता दें कि भोपाल में 2-3 दिसंबर 1984 की दरमियानी रात यूनियन कार्बाइड कारखाने से अत्यधिक जहरीली मिथाइल आइसोसाइनेट (MIC) गैस का रिसाव हुआ था. इससे कम से कम 5,479 लोग मारे गए थे और हजारों लोग अपंग हो गए थे. इसे दुनिया की सबसे बड़ी औद्योगिक आपदाओं में से एक माना जाता है.
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने तीन दिसंबर को इस कारखाने के जहरीले कचरे को स्थानांतरित करने के लिए चार सप्ताह की समय-सीमा तय की थी और सरकार को चेतावनी दी थी कि अगर उसके निर्देश का पालन नहीं किया गया, तो अवमानना की कार्यवाही की जाएगी.
राज्य के गैस राहत और पुनर्वास विभाग के निदेशक स्वतंत्र कुमार सिंह ने बताया कि पीथमपुर की अपशिष्ट निपटान इकाई में शुरुआत में कचरे के कुछ हिस्से को जलाकर देखा जाएगा और इसके ठोस अवशेष (राख) की वैज्ञानिक जांच की जाएगी ताकि पता चल सके कि इसमें कोई हानिकारक तत्व तो बचा नहीं रह गया है.
उन्होंने बताया कि भस्मक में कचरे के जलने से निकलने वाले धुएं को चार स्तरों वाले विशेष फिल्टर से गुजारा जाएगा ताकि आस-पास की वायु प्रदूषित न हो और इस प्रक्रिया के पल-पल का रिकॉर्ड रखा जाएगा. कचरे के भस्म होने और हानिकारक तत्वों से मुक्त होने के बाद इसके ठोस अवशेष (राख) को दो परतों वाली मजबूत ‘मेम्ब्रेन’ (झिल्ली) से ढक कर 'लैंडफिल साइट' में दफनाया जाएगा ताकि यह अपशिष्ट किसी भी तरह मिट्टी और पानी के संपर्क में न आ सके.
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