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प्रदेश के ऊर्जा क्षेत्र की सबसे बड़ी राज्य सलाहकार समिति की 18 मई को बैठक बुलाई गई है। उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष अरविंद कुमार की अध्यक्षता में हाल ही में गठित समिति की पहली बैठक में विद्युत उपभोक्ता परिषद ने स्मार्ट प्रीपेड मीटर के मुद्दे पर चर्चा कराने की मांग की है।
विद्युत अधिनियम-2003 के तहत गठित राज्य सलाहकार समिति में राज्य सरकार के ऊर्जा, खाद्य, कृषि, आईआईडीसी व एमएसएमई विभाग के अपर मुख्य सचिव के साथ ही पावर कॉरपोरेशन, ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन व मध्यांचल डिस्कॉम के प्रबंध निदेशक सहित उपभोक्ता व अन्य संगठनों के प्रतिनिधि आदि रहते हैं।
उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने समिति के सदस्य होने के नाते आयोग के अध्यक्ष को विस्तृत प्रस्ताव भेज कहा है कि वर्तमान में स्मार्ट प्रीपेड मीटरिंग व्यवस्था से जुड़े मुद्दे को भी आयोग के मुख्यालय में होने वाली बैठक के एजेंडे में शामिल किया जाए।
वर्मा का कहना है कि पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन इस संबंध में विद्युत अधिनियम का उल्लंघन कर मनमानी कर रहा है। लगभग 75 लाख उपभोक्ताओं के कनेक्शन बिना उनकी सहमति के पोस्टपेड से प्रीपेड मोड में कर दिए गए हैं। इनमें जिन 67 लाख से ज्यादा घरेलू उपभोक्ताओं के यहां स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए गए हैं उनमें लगभग 43 लाख एक किलोवाट जबकि 24 लाख दो किलोवाट के कनेक्शन हैं।
रिचार्ज के बाद स्वतः कनेक्शन न जुड़ने सहित अन्य तकनीकी दिक्कतों के चलते प्रदेश में स्मार्ट मीटर को लेकर व्यापक जन आक्रोश एवं विरोध की स्थिति बनी हुई है। वर्मा ने उपभोक्ताओं से आंदोलन शांतिपूर्ण करने की अपील करते हुए कहा कि समिति में चर्चा से उनके हित में ठोस निर्णय निकल सकता है।
परिषद अध्यक्ष ने कहा कि जब उपभोक्ताओं का बिजली कंपनियों पर पहले से ही लगभग 51 हजार करोड़ रुपये सरप्लस निकल रहा है तब किसी भी तरह से बिजली की दरों में बढ़ोतरी का भी कोई आचित्य नहीं है।
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