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पूर्वोत्तर रेलवे के यात्रियों के लिए बड़ी खुशखबरी है। बहुप्रतीक्षित वाराणसी-खजुराहो-वाराणसी वंदे भारत एक्सप्रेस अब पूर्वोत्तर रेल के बेड़े में शामिल हो गई है। इस नई अत्याधुनिक ट्रेन की पहचान ट्रेन संख्या 26422 (वाराणसी-खजुराहो) और 26421 (खजुराहो-वाराणसी) के रूप में होगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आगामी 7 नवंबर को बनारस रेलवे स्टेशन से ट्रेन संख्या 26422 को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। उद्घाटन के बाद इसके नियमित परिचालन की तिथि की औपचारिक घोषणा रेलवे द्वारा शीघ्र की जाएगी। इस नई वंदे भारत एक्सप्रेस की आठ कोचों वाली रैक शनिवार रात नई दिल्ली की सकूर बस्ती से रवाना होकर बनारस पहुंच गई। ट्रेन में सात चेयरकार और एक एक्जीक्यूटिव क्लास कोच शामिल है। इन कोचों में कुल 594 यात्री एक साथ यात्रा कर सकेंगे।
समय सारिणी और ठहराव
रेलवे बोर्ड के निदेशक (कोचिंग) संजय आर. नीलम के अनुसार,
ट्रेन संख्या 26422 (वाराणसी-खजुराहो वंदे भारत एक्सप्रेस)
वाराणसी से प्रस्थान – सुबह 5:25 बजे
विंध्याचल – 6:55 बजे (1 मिनट ठहराव)
प्रयागराज छिवकी – 8:00 बजे (5 मिनट ठहराव)
चित्रकूट धाम – 10:05 बजे (2 मिनट ठहराव)
बांदा – 11:08 बजे (2 मिनट ठहराव)
महोबा – 12:08 बजे (2 मिनट ठहराव)
खजुराहो आगमन – 1:10 बजे दोपहर
वापसी में ट्रेन संख्या 26421 (खजुराहो-वाराणसी वंदे भारत एक्सप्रेस)
खजुराहो से प्रस्थान – 3:20 बजे दोपहर
महोबा – 4:18 बजे (2 मिनट ठहराव)
बांदा – 5:13 बजे (2 मिनट ठहराव)
चित्रकूट धाम – 6:13 बजे (2 मिनट ठहराव)
प्रयागराज छिवकी – 8:20 बजे (2 मिनट ठहराव)
विंध्याचल – 9:10 बजे (2 मिनट ठहराव)
वाराणसी आगमन – 11:00 बजे रात
पर्यटन को मिलेगा नया आयाम
वाराणसी से खजुराहो तक इस तेज, आरामदायक और अत्याधुनिक ट्रेन के परिचालन से धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है। पर्यटकों में इस नई सेवा को लेकर खासा उत्साह देखने को मिल रहा है।
बनारस रेल मंडल के पास अब आठ वंदे भारत
इस नई ट्रेन के शामिल होने के साथ ही बनारस रेल मंडल के पास अब कुल आठ वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनें हो जाएंगी। ये हैं:
1. वाराणसी–नई दिल्ली–वाराणसी (22415/22416)
2. वाराणसी–देवघर–वाराणसी (22500/22499)
3. वाराणसी–मेरठ–वाराणसी (22489/22490)
4. गोमतीनगर–वाराणसी–पटना (22345/22346)
5. वाराणसी–रांची–वाराणसी (20997/20888)
6. वाराणसी–नई दिल्ली–वाराणसी (22435/22436)
7. वाराणसी–आगरा कैंट–वाराणसी (20175/20176)
8. वाराणसी–खजुराहो–वाराणसी (26422/26421)
इस नई ट्रेन के संचालन से न केवल यात्रियों की सुविधा बढ़ेगी बल्कि मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच संपर्क भी और मजबूत होगा।
]]>अब आठ स्टेशनों पर रुकेगी वंदे भारत एक्सप्रेस
रेलवे द्वारा किए गए बदलाव के बाद अब यह ट्रेन पहले के 7 की बजाय 8 स्टेशनों पर रुकेगी। नई सूची में गुजरात के नवसारी स्टेशन को भी जोड़ा गया है। संशोधित स्टॉपेज इस प्रकार हैं:
ट्रेन संचालन का समय
गाड़ी संख्या 20901: मुंबई सेंट्रल से गांधीनगर कैपिटल के लिए वंदे भारत एक्सप्रेस सुबह 6:00 बजे रवाना होगी और दोपहर 12:25 बजे गांधीनगर पहुंचेगी।
गाड़ी संख्या 20902: वापसी यात्रा में यह ट्रेन गांधीनगर से दोपहर 2:05 बजे प्रस्थान करेगी और रात 8:30 बजे मुंबई सेंट्रल पहुंचेगी।
यह सेवा सप्ताह में हर दिन बुधवार को छोड़कर उपलब्ध रहेगी।
वंदे भारत एक्सप्रेस का किराया
इस ट्रेन में कुल 20 डिब्बे होते हैं।
एसी चेयर क्लास का किराया: ₹1285
एग्जीक्यूटिव चेयर कार का किराया: ₹2465
मुंबई और गांधीनगर के बीच सफर करने वालों के लिए वंदे भारत एक्सप्रेस अब और अधिक सुविधाजनक हो गई है, विशेष रूप से नवसारी स्टेशन को शामिल किए जाने से दक्षिण गुजरात के यात्रियों को अतिरिक्त लाभ मिलेगा।
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रेलवे सूत्रों के अनुसार भोपाल-लखनऊ वंदेभारत एक्सप्रेस (Bhopal Lucknow Vande Bharat Express) से जुड़ी आधिकारिक अधिसूचना इसी माह के अंतिम सप्ताह में जारी कर दी जाएगी। इसके बाद ट्रेन के संचालन की समय-सारणी, किराया और ठहराव की जानकारी भी सार्वजनिक होगी।
20 कोच की वंदे भारत एक्सप्रेस में अधिक यात्री सफर कर पाएंगे। पीआरओ नवल अग्रवाल ने बताया कि यह ट्रेन आधुनिक सुविधाओं से लैस होगी और तेज रफ्तार के साथ कम समय में यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाएगी। भोपाल और लखनऊ के मध्य में आने वाले शहरों के यात्रियों को भी इसका लाभ मिलेगा।
पिट लाइन पर अटकी है नई ट्रेन
नई वंदे भारत का रैक आने में इसलिए देर हो रही है, क्योंकि रानी कमलापति स्टेशन पर पिट लाइन मौजूद नहीं है। अभी दो पिट लाइन हैं, जो मौजूदा रैक के संधारण कार्य के लिए भी पर्याप्त नहीं हैं। ऐसे में यहां एक नई पिटलाइन पर काम चल रहा है। उसका काम पूरा होते ही रैक उपलब्ध हो जाएगा। ट्रेन की मरम्मत करने और साफ-सफाई के लिए पिटलाइन की जरूरत होती है।
]]>रेलवे सूत्रों के अनुसार भोपाल-लखनऊ वंदेभारत एक्सप्रेस (Bhopal Lucknow Vande Bharat Express) से जुड़ी आधिकारिक अधिसूचना इसी माह के अंतिम सप्ताह में जारी कर दी जाएगी। इसके बाद ट्रेन के संचालन की समय-सारणी, किराया और ठहराव की जानकारी भी सार्वजनिक होगी।
20 कोच की वंदे भारत एक्सप्रेस में अधिक यात्री सफर कर पाएंगे। पीआरओ नवल अग्रवाल ने बताया कि यह ट्रेन आधुनिक सुविधाओं से लैस होगी और तेज रफ्तार के साथ कम समय में यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाएगी। भोपाल और लखनऊ के मध्य में आने वाले शहरों के यात्रियों को भी इसका लाभ मिलेगा।
पिट लाइन पर अटकी है नई ट्रेन
नई वंदे भारत का रैक आने में इसलिए देर हो रही है, क्योंकि रानी कमलापति स्टेशन पर पिट लाइन मौजूद नहीं है। अभी दो पिट लाइन हैं, जो मौजूदा रैक के संधारण कार्य के लिए भी पर्याप्त नहीं हैं। ऐसे में यहां एक नई पिटलाइन पर काम चल रहा है। उसका काम पूरा होते ही रैक उपलब्ध हो जाएगा। ट्रेन की मरम्मत करने और साफ-सफाई के लिए पिटलाइन की जरूरत होती है।
]]>बिलासपुर-नागपुर के बीच चलने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन में यात्री कम होने पर 16 कोच को घटाकर 8 कर दी गई थी, लेकिन समर सीजन में यात्रियों की संख्या बढ़ी है। ऐसे में अब फिर से 8 की जगह 16 कोच के साथ चलाई जाएगी। यह सुविधा जून से शुरू होगी।बिलासपुर से नागपुर के लिए एग्जीक्यूटिव चेयर कार का किराया 2240 रुपए है, जबकि चेयर कार का किराया 1240 रुपए तय किया गया है।
दरअसल, वंदेभारत एक्सप्रेस की शुरुआत छत्तीसगढ़ में 11 दिसंबर 2022 को हुई थी। शुरुआत में इस ट्रेन के परिचालन को लेकर रेल प्रशासन के साथ-साथ लोगों में भी भारी उत्सुकता थी। स्वदेश में निर्मित सेमी हाई स्पीड सेल्फ प्रोपेल्ड ट्रेन में कई तरह की विशेषताएं हैं।
महंगी टिकट के चलते यात्रियों की संख्या कम थी
इसे जानने और देखने के उद्देश्य से ही बड़ी संख्या में यात्रियों ने बिलासपुर-नागपुर के बीच यात्रा की, लेकिन ट्रेन में महंगी टिकट के चलते कुछ समय बाद ही यात्रियों की संख्या कम होने लगी। इसके चलते रेलवे इसे बंद करने की तैयारी में थी।
हालांकि, रेलवे ने ट्रेन को बंद करने के बजाय अप्रैल 2023 में 16 कोच को घटाकर 8 कर दी। तब यह ट्रेन 8 कोचों के साथ ही चल रही है।
बढ़ी यात्रियों की डिमांड
रेलवे सूत्रों का कहना है कि वर्तमान में वंदे भारत ट्रेन में यात्रियों की डिमांड बढ़ गई है। विशेष कर समर सीजन में ट्रेन पैक चल रही है। टिकटों की डिमांड बढ़ने पर सीटों की उपलब्धता कम हो गई है। ऐसे में रेलवे इसे फिर से 16 कोचों के साथ चलाने की तैयारी कर रही है।
4 कोच में रिपेयरिंग का काम
बताया जा रहा है कि मुंबई डिवीजन से बिलासपुर भेजे जा रहे 8 में से 4 कोच खराब है। इनकी मरम्मत बिलासपुर में की जाएगी। मरम्मत का काम पूरा होने के तत्काल बाद इसकी सुविधा रूट के यात्रियों को मिल सकेगी। कहा जा रहा है कि कोच आते ही रेलवे पहले उसकी मरम्मत का काम प्राथमिकता से कराएगा।
कोच बढ़ने पर 1128 यात्री कर सकेंगे सफर
दावा किया जा रहा है कि जून से वंदे भारत ट्रेन में कोच की संख्या पहले की तरह यानी 16 कोच हो जाएगी। जिसके बाद इसमें कुल सीटों की संख्या बढ़कर 1128 हो जाएगी। वर्तमान में केवल 50% सीटों के साथ कुल 564 यात्री ही वंदे भारत में यात्रा कर पा रहे हैं। कोच बढ़ने से सीटों की संख्या भी दोगुनी हो जाएगी, जो सुविधा सीधे यात्रियों को मिलेगी।
जानिए वंदे भारत ट्रेन की खासियत
इस ट्रेन में सिटिंग चेयर अरेंजमेंट से लेकर सीसीटीवी, फायर सेफ्टी डिवाइस, फर्स्ट-एड बॉक्स, स्मार्ट टॉयलेट, ग्लास विंडो, ऑटोमैटिक डोर, डिस्प्ले बोर्ड, एयर कंडीशनर, डीप फ्रीजर जैसी सभी आधुनिक सुविधाएं यात्रियों के लिए उपलब्ध है।
मुंबई से बिलासपुर पहुंचे कोच
वंदे भारत के कोच मुंबई से शुक्रवार को बिलासपुर पहुंच गए है। दिन भर यार्ड में इसे रखा गया और फिर बाद में कोचिंग डिपो लाया गया। डिपो में इस रैक के सभी कोचों का परीक्षण शुरू हो गया है। बताया गया कि परीक्षण के दौरान अधिकारी भी मौजूद रहे।
उन्होंने रैक के साथ में विस्तृत जानकारी ली और यह जानने का प्रयास किया कि डिपो से इस रैक को कब फिट किया जाएगा। फिट होने के साथ कुछ अहम तैयारियां और करनी होंगी, जिनमें सबसे प्रमुख रिजर्वेशन सिस्टम में 16 कोच की जानकारी अपडेट करना शामिल है।
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झांसी रेल मंडल के जनसंपर्क अधिकारी मनोज कुमार सिंह से मिली जानकारी के अनुसार खजुराहो-निजामुद्दीन के बीच सफर करने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन नंबर 22469/22470 का दतिया हॉल्ट आगामी 13 मई से लागू होने जा रहा है. भारतीय रेलवे बोर्ड ने यह फैसला यात्रियों और श्रद्धालुओं की सुविधा को देखते हुए लिया है.
ये होगा दतिया ग्वालियर और झांसी का नया समय
वंदे भारत एक्सप्रेस के दतिया ठहराव के साथ ही रेलवे ने नई समय सारणी भी जारी की है. अब से दतिया हॉल्ट की वजह से ग्वालियर और झांसी रेलवे स्टेशन का समय भी बदलने जा रहा है. जहां खजुराहो से चलने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस 22469 का दतिया रुकने का समय शाम 6:42-6:44 का होगा, जिसकी वजह अब यह ट्रेन ग्वालियर शाम 7:28 बजे पहुंचेगी और शाम 7:33 बजे निजामुद्दीन के लिए रवाना होगी.
निजामुद्दीन से खजुराओ चलने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस 22470 निजामुद्दीन से चलकर सुबह 09:59 बजे दतिया पहुंचेगी 2 मिनट हॉल्ट के बाद 10:01 बजे आगे के लिए रवाना होगी. मंगलवार से झांसी नए समय पर सुबह 10:30 पर पहुंचेगी और 10:35 बजे खजुराहो रवाना होगी.
हर रोज पहुचते हैं लाखों श्रद्धालु
बता दें कि लंबे समय से धार्मिक स्थल पीतबारा माई शक्तिपीठ पर यात्रियों की सुविधा के दृष्टिगत वंदे भारत एक्सप्रेस के हॉल्ट की मांग की जा रही थी. क्योंकि प्रतिदिन न सिर्फ प्रदेश से बल्कि देश के कोने कोने से श्रद्धालु पीताम्बरा माता के दर्शन के लिए दतिया पहुंचते हैं. मान्यताओं के हिसाब से शनिवार को यहां आने वालों श्रद्धालुओं की संख्या लाखों की होती है. ऐसे में वंदे भारत एक्सप्रेस का ठहराव चम्बल अंचल के लिए तीर्थ और पर्यटन के लिहाज से एक बड़ी सौगात है.
]]>हाई स्पीड ट्रेन शताब्दी, राजधानी और गतिमान के बाद अब वंदे भारत एक्सप्रेस(Vande Bharat Express) की स्प्रिंग का निर्माण भी रेल स्प्रिंग कारखाना सिथौली(Sithauli) में किया जाएगा। इसके लिए इलाहाबाद मुख्यालय से मंजूरी मिलने के बाद प्रस्ताव रेलवे बोर्ड को भेजा गया है। उम्मीद है कि इस साल वंदे भारत ट्रेन के कोच भी ग्वालियर में बनी स्प्रिंग के सहारे पटरियों पर दौड़ने लगेंगे। देशभर में चलने वाली ट्रेनों के लिए स्प्रिंग का निर्माण करने वाले केवल दो कारखाने हैं, इनमें एक ग्वालियर के सिथौली में है और दूसरा आईसीएफ चैन्नई में है।
सिथौली(Sithauli) के रेल स्प्रिंग कारखाने में वर्षों से आईसीएफ (इंटीग्रल) और एलएचबी (लिंके- हॉफमैन ब्रुश) कोच की स्प्रिंग का निर्माण किया जा रहा है। इंडियन रेलवे लगातार स्प्रिंग की मांग बढ़ाता जा रहा है, इससे इस साल कारखाने का टारगेट भी पहली बार एक लाख स्प्रिंग से ऊपर चला गया है।
हर साल बढ़ रही स्प्रिंग की डिमांड
रेल स्प्रिंग कारखाना सिथौली(Sithauli) की शुरूआत 1989 में हुई थी। इसके बाद 1990 में स्प्रिंग बनना शुरू हो गई थी।यहां मांग के हिसाब से स्प्रिंगों का निर्माण किया जाता है और हर साल इसकी संया में इजाफा होता जा रहा है। इस साल पहली बार टारगेट एक लाख को पार कर गया है। फैक्ट्री में सबसे ज्यादा एलएचबी कोच की स्प्रिंग बनाई जाती हैं।
स्प्रिंग की संख्या बढ़ते ही तीन शिट में काम
45 लोगों को और मिला रोजगार 35 साल में पहली बार स्प्रिंग की संख्या बढ़ते ही दो की जगह तीन शिट में काम शुरू किया गया है। फैक्ट्री में 275 लोगों का स्टाफ है। तीसरी शिट शुरू होने से लगभग 45 लोगों को और रोजगार मिला है। यहां एक दिन में 450 से 500 स्प्रिंग बनाई जा रही हैं। जल्द ही हर दिन 600 स्प्रिंग बनाने की प्लानिंग की जा रही है।
तीन हजार स्प्रिंग से शुरू हुआ था कारखाना
सिथौली स्प्रिंग कारखाने में 1990 में स्प्रिंग का निर्माण शुरू हुआ था। पहले साल तीन हजार स्प्रिंग बनाई गईं। उसके बाद पांच हजार स्प्रिंग तैयार हुईं। मांग बढ़ते ही हर साल लक्ष्य बढ़ता गया और अब यह आंकड़ा एक लाख पार हो गया है।
50 मशीनों पर बनतीं स्प्रिंग
स्प्रिंग कारखाने में करीब 50 मशीनें लगी हुई हैं। इन मशीनों पर एक बार में दो से तीन कर्मचारी डिमांड के हिसाब से काम करते हैं। काम बढऩे पर कर्मचारी इसे आपस में बांट लेते हैं। भविष्य में और भी मशीनें आने की संभावना हैं, जिससे काम और बढ़ेगा।
सिथौली स्प्रिंग कारखाना में इस साल टारगेट एक लाख पार हो गया है। संभवत: इस साल से वंदे भारत की स्प्रिंग भी यहां बनाई जाएगी।– मनोज कुमार सिंह, पीआरओ झांसी मंडल
]]>इससे भोपाल(MP News) से लखनऊ की यात्रा करीब 6 से 7 घंटे में पूरी होने की उम्मीद है। अभी अन्य ट्रेनों से 9 से 12 घंटे लगते हैं। यह ट्रेन रानी कमलापति रेलवे स्टेशन से चलेगी। यह बीना, झांसी और कानपुर रेलवे स्टेशनों पर रुक सकती है। अधिकारियों के मुताबिक, लखनऊ भोपाल वंदे भारत ट्रेन आठ कोच की चेयर कार होगी। नई वंदेभारत एक्सप्रेस के कोच अपडेट किए जा चुके हैं। ट्रेन में प्रोटेक्शन सिस्टम कवच लगाया गया है। वंदेभारत एक्सप्रेस 4.0 में बिजली की खपत एक चौथाई कम हो जाएगी। नए कोच में एग्जीक्यूटिव चेयर क्लास सीटों के पास बैग मिलेगा। सीटों के आसपास ज्यादा जगह होगी।
मैहर में 15 ट्रेनों का अस्थायी ठहराव
पश्चिम मध्य रेलवे ने चैत्र नवरात्रि मेले को लेकर श्रद्धालुओं को सुविधा दी है। 30 मार्च से 12 अप्रेल तक मैहर स्टेशन पर 15 जोड़ी ट्रेनों को 5 मिनट का अस्थायी ठहराव देने का फैसला किया है।
इस निर्णय से मैहर के मां शारदा देवी दर्शन को आने वाले उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, झारखंड, छत्तीसगढ़ और गुजरात के यात्रियों को विशेष सुविधा मिलेगी।
लखनऊ से इन तीन रूटों पर वंदे भारत ट्रेन दौड़ाने की तैयारी
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ को जल्द ही एक बड़ी सौगात मिलने वाली है. लखनऊ से तीन और रूटों पर वंदे भारत ट्रेनों को संचालित करने का खाका तैयार किया जा रहा है. लखनऊ से सेमी हाईस्पीड वंदे भारत ट्रेनों की संख्या बढ़ने से यात्रियों को सहूलियत मिलेगी. जम्मू कश्मीर, चंडीगढ़ व भोपाल के लिए हर रोज सफर करने वाले हजारों यात्रियों को राहत मिलेगी.
पूर्वोत्तर रेलवे के मंडल रेल प्रबंधक गौरव अग्रवाल ने बताया कि गोमतीनगर से भोपाल के लिए वंदे भारत ट्रेन के बावत रेलवे बोर्ड के निर्देशों का इंतजार है. इसके अलावा चंडीगढ़ और जम्मू कश्मीर के लिए भी वंदे भारत ट्रेनों का संचालन शुरू होना है. इन ट्रेनों के प्रारंभ हो जाने से रोजाना लगभग 3200 यात्रियों को राहत मिल सकेगी. रेलवे के विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि अगले तीन माह में ये ट्रेनें पटरी पर उतर सकती हैं.
इन रूटों पर हो रहा वंदे भारत ट्रेनों का संचालन : रेलवे के अधिकारियों ने बताया कि लखनऊ से छह रूटों पर वर्तमान में वंदे भारत ट्रेनों का संचालन हो रहा है. गोमतीनगर स्टेशन से पटना के लिए वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन चलती है. चारबाग स्टेशन से मेरठ, गोरखपुर, प्रयागराज और अयोध्या के लिए वंदे भारत और लखनऊ जंक्शन स्टेशन से देहरादून के लिए वंदे भारत ट्रेन का संचालन हो रहा है.
यात्रियों को रास आ रही वंदे भारत : वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन यात्रियों की पसंदीदा ट्रेन बन रही है. गोरखपुर से अयोध्या वाया लखनऊ होते हुए प्रयागराज जाने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन की तो ऑक्यूपेंसी 90% तक रही. इसके अलावा अन्य वंदे भारत ट्रेनें भी अब 60 से 70% ऑक्यूपेंसी के साथ संचालित हो रही हैं. रेलवे प्रशासन को उम्मीद है कि अब आने वाले दिनों में वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन यात्रियों की सफर के लिए पसंदीदा ट्रेन बनेंगी. गर्मियों के दौरान वंदे भारत ट्रेनों में यात्रा करना यात्रियों को और भी ज्यादा रास आएगा.
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एमपी से यूपी के बीच सफर करनेवाले रेल यात्रियों के लिए खुशखबरी है। उन्हें अब न केवल ट्रेनों की जबर्दस्त भीड़ से निजात मिलेगी बल्कि उनके सफर में समय भी बेहद कम लगेगा। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से यूपी की राजधानी लखनऊ तक का सफर जल्द ही बहुत आसान होनेवाला है। इन दोनों महानगरों के बीच नई वंदेभारत एक्सप्रेस चलाने का प्रस्ताव है। करीब 600 किमी के सफर में नई ट्रेन लखनऊ और भोपाल सहित बीच के कई बड़े शहरों को जोड़ेगी। हालांकि नियमित ट्रेनों की तुलना में इसका किराया ढाई गुना से ज्यादा होगा। लखनऊ भोपाल वंदेभारत एक्सप्रेस यूपी के लखनऊ मंडल की ही ट्रेन होगी।
यूपी की ओर जानेवाली ज्यादातर ट्रेनों में इतनी भीड़ रहती है कि कई यात्री तो कोच के अंदर प्रवेश ही नहीं कर पाते। इन ट्रेनों में महीनों की लंबी वेटिंग भी बनी रहती है। प्रस्तावित लखनऊ भोपाल वंदेभारत एक्सप्रेस इन झंझटों से यात्रियों को छुटकारा दिला देगी।
भोपाल लखनऊ वंदे भारत में कितने कोच होंगे?
पहले मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल को नई वंदे भारत ट्रेन मिलने वाली थी. लेकिन यूपी के यात्रियों की भारी संख्या को देखते हुए इस ट्रेन को भोपाल डिविजन की जगह लखनऊ डिविजन से चलाया जाएगा. लखनऊ भोपाल वंदे भारत एक्सप्रेस एकदम नए कोच वाली प्रीमियम ट्रेन होगी, जिसमें 8 कोच का रैक होगा. माना जा रहा है कि लखनऊ भोपाल वंदे भारत एक्सप्रेस में तकरीबन 564 सीटें होंगी और ये स्लीपर हो सकती है.
लखनऊ भोपाल वंदे भारत का कितना होगा किराया?
सूत्रों की मानें तो लखनऊ और भोपाल के बीच चलने वाली इस नई वंदे भारत एक्सप्रेस का किराया प्रीमियम ट्रेनों की तरह ही रहेगा. यानी इस ट्रेन में भी राजधानी, दुरंतो आदि ट्रेनों के बराबर या उससे ज्यादा चार्ज किया जा सकता है. ऐसा इसलिए क्योंकि यह सेमी हाई स्पीड होने के साथ-साथ यात्रियों को प्रीमियम सुविधाएं और कंफर्ट देगी.
भोपाल से लखनऊ के बीच कितनी दूरी?
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से उत्तर प्रदेश की राजधानी भोपाल का डिस्टेंस लगभग 720 किमी है. फिलहाल इस रूट पर 10 से ज्यादा ट्रेनें चलती हैं, जिन्हें दोनों शहरों के बीच 9 से 12 घंटे तक का ट्रेवल टाइम लगता है. हालांकि, इतनी ट्रेनें होने के बाद भी इस रूट पर यात्रियों की जबर्दस्त भीड़ होती है.
कब शुरू होगी लखनऊ-भोपाल वंदे भारत
सीनियर डीएमई आरपी खरे ने बताया, '' भोपाल रेल मंडल से पटना और लखनउ के लिए वंदे भारत चलेगी. वंदे भारत की एक रैक बनने में करीब एक से डेढ़ महीने का समय लगता है. ऐसे में अप्रैल या शुरुआती मई तक भोपाल रेल मंडल को स्लीपर वंदे भारत की एक रैक मिल सकती है.'' गौरतलब है कि रेलवे ने हाल ही में देश को 2 और नई वंदे भारत जयपुर-उदयपुर-जयपुर और अजमेर दिल्ली अजमेर वंदे भारत दी हैं, जिसके बाद लखनऊ-भोपाल वंदे भारत के जल्द शुरू होने की उम्मीद की जा रही है. हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक घोषणा होना बाकी है.
]]>सेमी हाईस्पीड ट्रेन वंदे भारत एक्सप्रेस का डेब्यू हुए 6 साल बीत चुके हैं। 2019 से शुरू हुई रफ्तार की यह कहानी अब 136 सेवाओं तक पहुंच चुकी है। इनमें लगातार इजाफा भी जारी है। अब रेलवे वंदे भारत एक्सप्रेस के स्लीपर वर्जन को भी पटरियों पर उतारने की तैयारी कर रहा है। इसके साथ ही यात्री लंबी दूरी का सफर आराम से तय कर सकेंगे।
वंदे भारत ट्रेनें अब कई शताब्दी ट्रेन मार्गों पर उपलब्ध हैं। वंदे भारत एक्सप्रेस भारत की सबसे तेज ट्रेन है और 180 किमी/घंटा तक की गति तक पहुंचने में सक्षम है। अब तक, यह दिल्ली और वाराणसी जैसे छोटे और मध्यम दूरी के प्रमुख शहरों को जोड़ती है।
कैसे हुई शुरुआत
15 फरवरी 2019 को नई दिल्ली-कानपुर-इलाहाबाद-वाराणसी मार्ग पर 160 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चलने वाली पहली वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन को हरी झंडी दिखाई गई थी। 'मेक इन इंडिया' अभियान के तहत इन ट्रेनों को पटरियों पर उतारा गया था। आम ट्रेनों के मुकाबले वंदे भारत एक्सप्रेस रफ्तार से लेकर सुरक्षा स्तर तक कई सुविधाओं से लैस है।
क्या हैं विशेषताएं
वंदे भारत एक्सप्रेस में एग्जीक्यूटिव क्लास में रिक्लाइनिंग एर्गोनोमिक सीटें, सभी कोच में सीसीटीवी और हर सीट पर मोबाइल चार्जिंग सॉकेट, ऑटोमैटिक दरवाजे, पेंट्री में हॉट केस, वॉटर कूलर, डीप फ्रीजर, हर कोच में आपातकालीन खिड़कियां, अलार्म पुश और टॉक बैक यूनिट्स हैं। ये ट्रेने 160 किमी की रफ्तार से दौड़ सकती हैं।
स्लीपर वंदे भारत एक्सप्रेस
रेल मंत्रालय ने 3 जनवरी को बताया था कि वंदे भारत स्लीपर ट्रेन ने पिछले तीन दिनों में अपने कई परीक्षणों में 180 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम गति प्राप्त की है। जनवरी के अंत तक यह परीक्षण जारी रहेंगे। उसके बाद देश भर के रेल यात्रियों को लंबी दूरी की यात्रा के लिए यह विश्व-स्तरीय यात्रा उपलब्ध कराई जाएगी। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसका एक वीडियो भी एक्स पर पोस्ट किया था।
क्या होगा खास
इन वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों को स्वचालित दरवाजे, बेहद आरामदायक बर्थ, ऑन बोर्ड वाई-फाई और विमान जैसी डिज़ाइन जैसी सुविधाओं के साथ डिज़ाइन किया गया है। देश में यात्री पहले से ही मध्यम और छोटी दूरी पर चलने वाली 136 वंदे भारत ट्रेनों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
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