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माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के कुलगुरू विजय मनोहर तिवारी ने कहा कि जनसंपर्क का कार्य बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि जनसंपर्क के क्षेत्र में काम करने के लिए उन्होंने अधिकारियों को संवेदनशील होना आवश्यक बताया। तिवारी ने कहा कि पब्लिक रिलेशन के क्षेत्र के लोगों का पब्लिक से कनेक्शन बहुत मजबूत होना चाहिए। अगर उनके पास कोई सकारात्मक विचार हो और वे उसे मीडिया के साथ शेयर करें तो सकारात्मक समाचार तैयार हो सकते हैं और उनके विभाग की भी छवि बेहतर होती है। तिवारी ने कहा कि जनसंपर्क अधिकारियों को बहुत विनम्र होना चाहिए।
प्रथम तकनीकी सत्र में एआई विशेषज्ञ कमलेश माहेश्वरी ने डिजिटल तकनीक के माध्यम से जनसंपर्क को बेहतर ढंग से क्रियान्वित करने पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि आज हर तरफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का हस्तक्षेप बढ़ रहा है। जनसंपर्क में एआई बहुत सहायक साबित हो रही है। उन्होंने एआई की मदद से किसी प्रेस रिलीज को पाइंटस मे लिखना, उसे संपादित करना भी लाइव डेमो के माध्यम से सिखाया। चैटजीपीटी या जैमिनाई जैसे एआई टूल्स काम करते-करते खुद को अपडेट भी करते रहते हैं। माहेश्वरी ने कहा कि डिजिटल दुनिया में ऑडिएंस को टाकिंग पाइंट्स देना होता है। ऐसे में एआई यह काम बहुत अच्छे से कर सकता है। वह संदर्भों के लिए एक जैसी घटनाओं की एक सीरीज हमें दे सकता है जिसका उपयोग हम किसी सूचना को और इंटरैक्टिव बनाने के लिए कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि एआई पर काम करने के लिए प्रॉम्ट का बिल्कुल सही होना जरूरी है। माहेश्वरी ने एआई और ग्राफिकल टूल्स के बारे में भी विस्तार से समझाया।
दूसरे तकनीकी सत्र में शासन में डिजिटल नवाचार ई-आफिस पर विस्तार से जानकारी दी गई। इस सत्र में जनसंपर्क अधिकारियों को ई-आफिस और ई-एचआरएमएस साफ्टवेयर का प्रशिक्षण भी दिया गया। इस पर एनआईसी भोपाल की ओर से धर्मेंद्र जैन, शैलेंद्र सिंह तथा मैपआईटी से मुबारक खान ने प्रशिक्षण दिया। अब डिजिटल दौर में कार्यालय अधिकतर डिजिटल हो गए हैं। ऐसे में अधिकारियों को ई-फाइलिंग नॉलेज मैंनेजमेंट सिस्टम आदि विषयों की जानकारी होना आवश्यक है। धर्मेंद्र जैन ने कहा कि सरकारी कार्यालयों में भारी संख्या में दस्तावेज बनते हैं। इनका प्रबंधन बहुत महत्वपूर्ण कार्य है। मानवीय तरीके से फाइलों के प्रचलन में बहुत समय लगता है। डिजिटलीकरण और ई-ऑफिस जैसे नवाचार इसे सरल बनाते हैं।
तीसरे सत्र में सूचना के अधिकार, प्रेस अधिनियम तथा मीडिया से जुड़े कानूनों, प्रावधानों पर पूर्व सूचना आयुक्त आत्मदीप जी ने जानकारी देते हुए कहा कि सूचना का अधिकार सुशासन में सहायक है। इससे भ्रष्टाचार कम हुआ है। यह आजाद भारत का क्रांतिकारी कानून है। इससे आम आदमी को व्यवस्था से जुड़ी शीर्ष संस्थाओं से भी जानकारियां हासिल करने का अधिकार मिला है। आत्मदीप ने इस अवसर पर सूचना के अधिकार में वर्णित विविध प्रावधानों को भी विस्तार से समझाया। कई उदाहरणों के साथ उन्होंने लोकसेवकों के उत्तरदायित्वों पर भी चर्चा की। उन्होंने इस सत्र में प्रश्नोत्तर के माध्यम से भी प्रतिभागी अधिकारियों की जिज्ञासाओं का समाधान किया।
जनसंपर्क के क्षेत्र में काम करने वाले अधिकारियों को लगातार सीखते रहना चाहिए। फील्ड में रहने के कारण रोज होने वाले नए अनुभवों से हम हमेशा नई चीजें सीखते हैं। शासकीय सेवा में हमेशा नई बातें सीखने की आदत सफलता की ओर ले जाती है। ये बातें जनसंपर्क अधिकारियों एवं सोशल मीडिया हैंडलर्स की दक्षता उन्नयन के दो दिवसीय कार्यक्रम में जनसंपर्क विभाग के अपर संचालक जी.एस. वाधवा ने कही। वे इस प्रशिक्षण के उद्घाटन सत्र में बोल रहे थे। वाधवा ने कहा कि शासकीय सेवा में हमेशा नया सीखना होता है। नित नई परिस्थितियां अधिकारियों को अनुभव संपन्न बनाती हैं। उन्होंने कहा कि हम जब भी किसी किए गए कार्य का मूल्यांकन करते हैं तो हर बार लगता है कि यह काम और बेहतर ढंग से हो सकता था। इस मूल्यांकन से सीख कर हम निकट भविष्य के लिए और अच्छी योजना बनाते हैं।
अंतिम सत्र में जनसंपर्क विभाग के उप-संचालक सुनील वर्मा ने जनसंपर्क के लिए सोशल मीडिया के बेहतर उपयोग पर जानकारी दी। सोशल मीडिया का जनसंपर्क के क्षेत्र में बेहतर उपयोग के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि जनसंपर्क के क्षेत्र में काम करने वाले लोग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को अपने लक्षित वर्ग तक सूचनाएं पहुंचाने का प्रमुख माध्यम बना सकते हैं। इस माध्यम की स्पीड, एक्युरेसी और ओपननेस इसे विशेष बनाती है। वर्मा ने प्रदेश के जिला जनसंपर्क कार्यालयों द्वारा सोशल मीडिया के माध्यम से संचार और संवाद के नवाचारों पर भी चर्चा की।
विषय विशेषज्ञ वरिष्ठ पत्रकार सुनील शुक्ला ने सोशल मीडिया और जनसंपर्क विषय पर कहा कि ये माध्यम युवा वर्ग की पसंद का मीडिया हैं। इसकी विशेषता इसकी स्पीड और शेयरिंग के फीचर हैं। तमाम डिजिटल माध्यम लक्षित जनमानस तक खबरों को तुरंत पहुंचा सकने में सक्षम हैं। शुक्ला ने कहा कि इन माध्यमों पर हमें किसी भी कंटेंट को डालने से पहले भलीभांति जांच लेना चाहिए। इससे समाचारों और सूचनाओं की विश्वसनीयता बनी रहेगी।
उद्घाटन सत्र में उपस्थित अतिथियों तथा विशेषज्ञों का आभार अपर संचालक गणेश कुमार जायसवाल ने माना। इस सत्र में विश्वविद्यालय की कुलसचिव प्रो. पी. शशिकला भी उपस्थित थी। सत्र का संचालन डॉ. लोकेंद्र सिंह ने किया।
प्रशिक्षण में जनसंपर्क संचालनालय और प्रदेश के सभी जिला जनसंपर्क अधिकारी उपस्थित थे। प्रशिक्षण का आयोजन जनसंपर्क विभाग एवं एमसीयू की प्रशिक्षण शाखा के तत्वावधान में हुआ। आयोजन का समन्वय डॉ. शलभ श्रीवास्तव ने किया। दूसरे दिन इस प्रशिक्षण के अंर्तगत जनसंपर्क की नीतियों और उनके क्रियान्वयन के व्यवहारिक पहलुओं सहित वित्तीय प्रबंधन पत्र विविध सत्र आयोजित होंगे।
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