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संसद का तीन दिवसीय विशेष सत्र आज बुलाया गया है। इसमें महिला आरक्षण और परिसीमन के बिलों को रखा जाएगा। इससे मध्यप्रदेश की राजनीति आने वाले वर्षों में बड़े बदलाव की ओर बढ़ सकती है। संसद के विशेष सत्र में प्रस्तावित 33% महिला आरक्षण और परिसीमन (डिलिमिटेशन) बिल लागू होने के बाद राज्य की चुनावी तस्वीर पूरी तरह बदलने की संभावना है। नई व्यवस्था के तहत मध्यप्रदेश विधानसभा की सीटें 230 से बढ़कर करीब 345 तक पहुंच सकती हैं। इसके साथ ही सदन में महिलाओं के लिए लगभग 114 सीटें आरक्षित होने की संभावना है, जिससे महिला प्रतिनिधित्व में ऐतिहासिक बढ़ोतरी होगी। अगर यह व्यवस्था लागू होती है तो मध्यप्रदेश की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी कई गुना बढ़ जाएगी, जिससे सत्ता और संगठन दोनों के समीकरण बदल जाएंगे।
बहुमत का गणित भी बदलेगा
सीटों की संख्या बढ़ने के बाद सरकार बनाने के लिए बहुमत का आंकड़ा भी बदल जाएगा। अभी जहां 116 सीटों पर बहुमत माना जाता है, वहीं नए परिसीमन के बाद यह बढ़कर करीब 174 सीटों तक पहुंच सकता है।
कैबिनेट का आकार भी बढ़ सकता है
विधानसभा की बढ़ी हुई संख्या का असर मंत्रिमंडल पर भी पड़ेगा। नियमों के अनुसार, सदन की कुल संख्या का लगभग 15% मंत्री बनाए जा सकते हैं। ऐसे में मध्यप्रदेश में मंत्रियों की संख्या 35 से बढ़कर करीब 52 तक पहुंच सकती है।
लोकसभा में भी बढ़ेगी मध्यप्रदेश की ताकत
परिसीमन के बाद राज्य से लोकसभा सीटों की संख्या भी 29 से बढ़कर करीब 43 होने का अनुमान है। इनमें महिला सांसदों की संख्या भी मौजूदा 6 से बढ़कर लगभग 14 तक पहुंच सकती है। इन सभी प्रस्तावित बदलावों को 31 मार्च 2029 के बाद होने वाले चुनावों से लागू किए जाने की संभावना जताई जा रही है।
कैबिनेट का भी होगा विस्तार
परिसीमन का असर सिर्फ सदन की सीटों तक सीमित नहीं रहेगा। नियमों के मुताबिक, विधानसभा की कुल संख्या का 15% हिस्सा मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है। ऐसे में प्रदेश के कैबिनेट मंत्रियों की अधिकतम संख्या 35 से बढ़कर 52 हो जाएगी। यानी आने वाले समय में मध्य प्रदेश में मंत्रियों की एक बड़ी फौज नजर आएगी।
लोकसभा के मोर्चे पर भी एमपी की ताकत बढ़ेगी। राज्य से लोकसभा सांसदों की संख्या 29 से बढ़कर 43 करने का प्रस्ताव है। इनमें महिला सांसदों की संख्या भी मौजूदा 6 से बढ़कर 14 होने की उम्मीद है। यह पूरा ढांचा 31 मार्च 2029 के बाद होने वाले चुनावों से प्रभावी होने की संभावना है।
]]>लोकसभा से प्रतिनियुक्ति पर मध्य प्रदेश विधानसभा आए सचिव अरविंद शर्मा का संविलियन मध्य प्रदेश विधानसभा में हो चुका है. अब उन्हें इस माह के अंत में मध्य प्रदेश विधानसभा के प्रमुख सचिव के पद पर प्रमोट किया जाएगा. 2 साल सेवा वृद्धि और 6 महीने का संविदा नियुक्ति पूरी करके विधानसभा के मौजूदा मुख्य सचिव एपी सिंह इसी माह रिटायर होने जा रहे हैं.
मध्यप्रदेश विधानसभा के प्रमुख सचिव एपी सिंह इस महीने 30 सितंबर को रिटायर होने वाले हैं और अब उनके पुनर्नियुक्ति की संभावना नहीं है। इसे देखते हुए विधानसभा में सचिव की जिम्मेदारी निभा रहे अरविंद शर्मा को नया प्रमुख सचिव बनाए जाने की संभावना है।
प्रमुख सचिव की नियुक्ति का अधिकार विधानसभा अध्यक्ष को होता है। चूंकि अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ही अरविंद शर्मा को लोकसभा से प्रतिनियुक्ति पर लेकर आए थे, इसलिए उनका प्रमुख सचिव बनना लगभग तय माना जा रहा है।
1 अक्टूबर से मिल सकती है जिम्मेदारी
वर्तमान प्रमुख सचिव एपी सिंह को मानसून सत्र के दौरान सदन में स्वयं विधानसभा अध्यक्ष ने विदाई दी थी और विधायकों से शुभकामनाएं दिलाई थीं। इससे यह संकेत स्पष्ट हो गया था कि एपी सिंह का कार्यकाल आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। ऐसे में यह माना जा रहा है कि एपी सिंह का कार्यकाल अब नहीं बढ़ेगा और नया प्रमुख सचिव नियुक्त किया जाएगा।
अरविंद शर्मा की दावेदारी सबसे मजबूत
विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने विधानसभा चुनाव के बाद अध्यक्ष बनने के बाद अरविंद शर्मा को लोकसभा से प्रतिनियुक्ति पर लाकर विधानसभा सचिव बनाया था। एक साल की प्रतिनियुक्ति के बाद उनका संविलियन विधानसभा में हो गया। वर्तमान में वे 60 साल की उम्र पार कर चुके हैं और विधानसभा नियमों के अनुसार वे 62 साल की उम्र तक सेवा में रह सकते हैं।
इस हिसाब से यदि उन्हें प्रमुख सचिव बनाया जाता है, तो वे अगले दो सालों तक इस पद पर कार्यरत रह सकते हैं। चूंकि स्पीकर की पसंद वे स्वयं हैं, इसलिए उनकी नियुक्ति लगभग तय मानी जा रही है।
दूसरी बार सेवा हुई वृद्धि
विधानसभा के प्रमुख सचिव एपी सिंह ढाई साल पहले सेवानिवृत्ति हो रहे थे. उन्हें साल 2023-24 के लिए एक साल की सेवा वृद्धि दी गई. इसके बाद 2024-25 में दूसरी बार 1 साल की सेवा वृद्धि दी गई. यह कार्यकाल 5 महीने पहले समाप्त हो गया था. इसके बाद 6 महीने की संविधान नियुक्ति प्रमुख सचिव के पद पर दी गई थी. यह अवधि इसी महीने 30 सितंबर को खत्म हो रही है.
मध्य प्रदेश विधानसभा में हुआ संविलियन
विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने मध्य प्रदेश में विधानसभा के कामों के लिए अरविंद शर्मा को सचिव बनाकर प्रतिनियुक्ति पर मध्य प्रदेश लेकर आए थे. अब उनका संविलियन मध्य प्रदेश विधानसभा में कर दिया गया है. मध्य प्रदेश विधानसभा के मौजूदा प्रमुख सचिव एपी सिंह का इसी महीने 30 सितंबर को कार्यकाल समाप्त हो रहा है. इसके बाद अरविंद शर्मा विधानसभा के प्रमुख सचिव बन जाएंगे.
प्यासी का सबसे ज्यादा लंबा रहा कार्यकाल
मध्य प्रदेश विधानसभा के पांचवें प्रमुख सचिव के तौर पर अरविंद शर्मा जिम्मेदारी संभालने वाले हैं. इससे पहले अवधेश प्रताप सिंह, भगवान देव इसरानी, राजकुमार पांडे और ए के प्यासी मध्य प्रदेश विधानसभा के प्रमुख सचिव रह चुके हैं. सभी विधानसभा प्रमुख सचिव में सबसे लंबा डॉक्टर एके पयासी का कार्यकाल रहा है साल 2002 से लेकर 2011 तक विधानसभा प्रमुख सचिव की जिम्मेदारी में रहे थे. हालांकि की 9 से 10 साल तक अवधेश प्रताप सिंह भी प्रमुख सचिव विधानसभा की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं.
एपी सिंह को सेवा विस्तार की उम्मीद नहीं
एपी सिंह पहले ही 62 साल की उम्र में रिटायर हो चुके हैं, फिर उन्हें दो साल का विस्तार और फिर 6 महीने की संविदा सेवा दी गई थी, जो 30 सितंबर को समाप्त हो रही है। अब वे 64 साल से ज्यादा के हो चुके हैं और स्पीकर द्वारा उन्हें औपचारिक विदाई दी जा चुकी है, इसलिए सेवा बढ़ाने की संभावना नहीं बची है। हालांकि सिंह ने प्रमुख सचिव के रूप में विधानसभा में लंबा कार्यकाल पूरा किया है।
डीजे को पीएस बनाने का स्पीकर को है पावर
विधानसभा अधिनियम के तहत स्पीकर के पास यह भी अधिकार है कि वे जिला न्यायाधीश (डीजे) स्तर के अधिकारी को भी प्रमुख सचिव नियुक्त कर सकते हैं। लेकिन सूत्रों के अनुसार फिलहाल इसकी संभावना कम है, क्योंकि अरविंद शर्मा ही स्पीकर की प्राथमिकता में हैं।
विधानसभा सचिव पद की स्थिति
विधानसभा में सचिव के दो पद होते हैं। फिलहाल एक पद पर अरविंद शर्मा कार्यरत हैं जबकि दूसरा पद रिक्त है। चूंकि प्रमोशन में आरक्षण का मामला कोर्ट में लंबित है, इसलिए अगर शर्मा को प्रमुख सचिव बनाया जाता है, तो सचिव के दोनों पद कुछ समय के लिए रिक्त रखे जा सकते हैं और जिम्मेदारियां प्रभार से संचालित की जा सकती हैं।
विधानसभा में अपर सचिव के चार पद हैं, जिनमें से तीन भरे हुए हैं जबकि एक पद रिक्त है।
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प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस विधायक सेना महेश पटेल ने पुरानी पेंशन योजना का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार ने 2005 के बाद पेंशन को एनपीएस के अंतर्गत लाया। इसमें लाभ की कोई गारंटी नहीं है। सरकार ने जवाब दिया है कि हमारे पास इस पुरानी पेंशन योजना को लेकर कोई जानकारी नहीं है, कोई प्लानिंग नहीं है। क्या हमारे कर्मचारी देश की और प्रदेश की सेवा में कोई कसर छोड़ते हैं? यह सरकार की जिम्मेदारी है कि लोगों को सुरक्षा मिले। अन्य प्रदेशों में पुरानी पेंशन योजना लागू है तो मध्य प्रदेश में क्यों नहीं?
जवाब में राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने इसका जवाब दिया। उन्होंने कहा, उत्तर पटल पर रखा है। पुरानी पेंशन योजना को लागू करने का न कोई प्लान है और न ही विचार। कांग्रेस विधायक लखन घनघोरिया के ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जवाब से असंतुष्ट होकर विपक्ष ने वॉकआउट किया। जबलपुर में शासकीय विक्टोरिया अस्पताल में फर्जी नियुक्ति का आरोप लगाया था। उप मुख्यमंत्री राकेश शुक्ला के जवाब से असंतुष्ट होकर विपक्ष ने वॉकआउट किया है। सदन की कार्यवाही जारी है।
]]>मध्य प्रदेश विधानसभा में एक अनोखा नजारा देखने को मिला जब एक बीजेपी विधायक ने संस्कृत में प्रश्न पूछा और एक मंत्री ने उसी भाषा में उत्तर दिया. जबलपुर उत्तर से विधायक अभिलाष पांडे ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से पूछा कि सरकार भारत की प्राचीन भाषा के संरक्षण और संवर्धन के लिए क्या कदम उठा रही है?
विधायक ने प्रश्न संस्कृत में पढ़ा. जैसे ही स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने संस्कृत में उत्तर देना शुरू किया, सदस्यों ने मेजें थपथपाकर उनकी सराहना की.
मंत्री ने भी अपना अधिकांश उत्तर पढ़ा. कहा कि भारतीय जनता पार्टी सरकार ने इस संबंध में कई कदम उठाए हैं, जिनमें महर्षि पतंजलि संस्कृत संस्थान की स्थापना, संस्कृत के चार आदर्श आवासीय विद्यालय और 271 स्कूलों में संस्कृत की शिक्षा शामिल है.
नई शिक्षा नीति का हवाला देते हुए, विधायक पांडे ने कहा कि अंग्रेजी और हिंदी को बढ़ावा दिया जा रहा है, लेकिन संस्कृत को व्यावसायिक रूप से बढ़ावा देने के लिए कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है.
बाएं से MLA अभिलाष पांडे और शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह.
उन्होंने कहा कि सरकार को संस्कृत को बोलचाल की भाषा के रूप में बढ़ावा देने के लिए कदम उठाने चाहिए. उन्होंने पूछा कि क्या सरकार संस्कृत दिवस या संस्कृत सप्ताह मनाने की योजना बना रही है?
मंत्री ने जवाब दिया कि सरकार हर जिले में संस्कृत, वैदिक शिक्षा और योग संस्थान स्थापित करने की योजना बना रही है. उन्होंने बताया कि आदर्श आवासीय विद्यालयों में नामांकित 3500 बच्चों को 2024-25 में छात्रवृत्ति दी गई है.
पूर्व मंत्री और वरिष्ठ भाजपा सदस्य गोपाल भार्गव ने सरकार से संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने वाले संस्थानों को वित्तीय सहायता प्रदान करने का आग्रह किया. उन्होंने कहा कि वह स्वयं एक संस्कृत महाविद्यालय चलाते हैं, लेकिन उन्हें पिछले 22 वर्षों से कोई वित्तीय सहायता नहीं मिली है.
]]>मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र का बुधवार को तीसरा दिन रहा। इस दौरान सदन में चार संशोधन विधेयक पारित किए गए और संस्कृत भाषा के संरक्षण-संवर्धन पर विशेष चर्चा हुई। वहीं विपक्षी कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते हुए विभिन्न मुद्दों को लेकर सदन के भीतर और बाहर आक्रोश जताया।
सदन में चार संशोधन विधेयक पारित
उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने मध्य प्रदेश विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक सदन में प्रस्तुत किया। साथ ही वित्त मंत्री व उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने भारतीय स्टांप (मप्र संशोधन) विधेयक, रजिस्ट्री (मप्र संशोधन) विधेयक और भारतीय स्टांप (मप्र द्वितीय संशोधन) विधेयक पेश किए। चर्चा के उपरांत सभी विधेयक बहुमत से पारित हो गए।
संस्कृत भाषा पर विशेष चर्चा, मंत्री ने संस्कृत में दिया जवाब
भाजपा विधायक अभिलाष पांडे ने संस्कृत भाषा के व्यावसायिक और शैक्षणिक संवर्धन पर स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने संस्कृत में ही ध्यानाकर्षण प्रस्तुत किया, जिस पर मंत्री ने भी संस्कृत भाषा में उत्तर दिया।
मंत्री ने बताया कि सरकारी आवासीय स्कूलों में संस्कृत पढ़ने वाले विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति दी जाती है। वर्ष 2024-25 में 3500 विद्यार्थियों को इसका लाभ मिला। विधायक पांडे ने सरकार से पूछा कि नई शिक्षा नीति में हिंदी और अंग्रेजी को तो बढ़ावा मिल रहा है, लेकिन संस्कृत को व्यावसायिक रूप से क्यों नहीं बढ़ाया जा रहा?
संस्कृत भाषा का हो संवर्धन
भाजपा विधायक अभिलाश पांडे ने मध्य प्रदेश में संस्कृत भाषा के संवर्धन किए जाने की ओर स्कूल शिक्षा मंत्री का ध्यान आकर्षित किया। विधायक ने संस्कृत में अपना ध्यान आकषर्ण रखा। इस मामले पर स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने संस्कृत भाषा में अपना जवाब दिया। उन्होंने संस्कृत भाषा को लेकर आभार व्यक्त किया। मंत्री ने संस्कृत भाषा को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे कामों को बताया। वहीं अभिलाष पांडे ने कहा की नई शिक्षा नीति के तहत अंग्रेजी और हिंदी को बढ़ावा दिया जा रहा है लेकिन संस्कृत को व्यावसायिक रूप से बढ़ावा देने का प्रयास नहीं किया जा रहा है। उन्होंने मंत्री से सवाल पूछा कि संस्कृत को व्यावसायिक रूप से बढ़ावा देने के लिए सरकार क्या प्रयास कर रही है ? संस्कृत पढ़ने वालों को सरकार क्या स्कॉलरशिप उपलब्ध करा रही है। इस पर मंत्री ने जवाब दिया कि शासकीय आवासीय स्कूलों में छात्रवृत्ति की पात्रता है। विगत वर्ष 2024 25 में 3500 बच्चों को स्कॉलरशिप का लाभ दिया गया।
कांग्रेस जनता के मुद्दों पर गंभीर है तो कार्यवाही में भाग ले
भाजपा विधायक शैलेंद्र जैन ने कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन को लेकर कहा कि अगर कांग्रेस को जनता के मुद्दों से इतना ही लगाव है तो उन्हें शांतिपूर्वक विधानसभा की कार्यवाही में आकर अपनी बात रखनी चाहिए, ना कि इस तरह परिसर में हंगामा करना चाहिए। भाजपा विधायक शैलेंद्र जैन ने कहा कि अगर आदिवासियों के साथ कुछ भी गलत हो रहा है तो मुख्यमंत्री जरूर चिंतित होंगे और उचित कार्यवाही करेंगे। यह सिर्फ कांग्रेस की नहीं, हम सबकी चिंता का विषय है। सरकार आदिवासियों के हित में ठोस कदम उठा रही है।
पटल पर रखे गए प्रतिवेदन
उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने प्रोविडेंट इन्वेस्टमेंट कंपनी लिमिटेड का 2018-19, 2019-20 और 2020-21 के वर्षिक प्रतिवेदन पटल पर रखें। उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने राजा शंकर शाह विश्वविद्यालय छिंदवाड़ा का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2023-24 और मध्य प्रदेश निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग वार्षिक प्रतिवेदन एवं लेखा संपरिक्षक प्रतिवेदन 2024-25 पटल पर रखे। वहीं मंत्री प्रदयूएम सिंह तोमर ने मध्य प्रदेश विद्युत नियामक आयोग की अधिसूचना और मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत कम वितरण कंपनी लिमिटेड का 22वां वर्षिक प्रतिवेदन वित्त वर्ष 2023-24 को पटल पर रखा।
कांग्रेस विधायक ने उठाया पिछोर को जिला बनाने का मु्द्दा
विधानसभा की कार्यवाही शुरू हो गई है। विधानसभा में प्रश्नकाल चल रहा है। इस दौरान कांग्रेस विधायक प्रीतम लोधी ने पिछोर को जिला बनाने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा यह प्रश्न लगातार पूछ रहा हूं लेकिन इसका उत्तर नहीं मिल पाया है। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा था कि मुझे विधायक दो मैं पिछोर को जिला बनाऊंगा, अब तक जिला बनाने की कार्रवाई नहीं हुई। इस पर राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने जवाब दिया कि यह प्रकरण राज्य प्रशासनिक इकाई पुनर्गठन आयोग के समक्ष विचाराधीन है।
कांग्रेस लगातार कर रही विरोध
मानसून सत्र के पहले दिन से कांग्रेस सरकार का विरोध कर रही है। सदन में पहले दिन 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण का मुद्दा गूंजा था। कांग्रेस विधायकों ने हाथों में तख्तियां और खिलौने वाले गिरगिट लेकर विरोध प्रदर्शन किया था। इस दौरान गांधी प्रतिमा के सामने नारेबाजी की गई थी। बीत दिन मंगलवार को कांग्रेस ने भैंस के आगे बीन बजाकर विरोध प्रदर्शन किया था। इस दौरान एक कांग्रेस विधायक भैंस की ड्रेस पहनकर विधानसभा पहुंचे थे। ं
सड़कों पर 100 करोड़ खर्च करेगी सरकार
वित्त मंत्री और डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा ने मंगलवार को विधानसभा में अनुपूरक बजट पेश किया था। जिसमें प्रदेश सड़कों के सुधार और नई सड़कों के निर्माण के लिए 100 करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया है। इसके अलावा लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा, नगरीय विकास और पुलिस व कानून व्यवस्था पर भी 100 करोड़ खर्च किए जाएंगे।
संवर्धन पर हुई चर्चा
मध्य प्रदेश में विधानसभा का मानसून चल रहा है। बुधवार को मानसून सत्र का तीसरा दिन है। आज सदन में प्रश्नकाल, शून्यकाल और ध्यानाकर्षण के बाद अनुपूरक बजट पर चर्चा होगी। इसके लिए दो घंटे का समय तय किया गया है। सदन में आज भी विपक्षी दल कांग्रेस की ओर से हंमामे के आसार है। सत्र की शुरूआत के बाद से कांग्रेस सदन और सदन के बाहर तमाम मुद्दों को लेकर लगातार हंगामा कर रही है।
वर्षिक प्रतिवेदन पटल पर रखे गए
उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने प्रोविडेंट इन्वेस्टमेंट कंपनी लिमिटेड के वर्ष 2018-19, 2019-20, 2020-21 के वार्षिक प्रतिवेदन पटल पर रखे।
उच्च शिक्षा मंत्री ने राजा शंकर शाह विश्वविद्यालय छिंदवाड़ा और मप्र निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के प्रतिवेदन सदन में रखे।
ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने मप्र विद्युत नियामक आयोग की अधिसूचना और मप्र पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड का 22वां वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।
पिछोर को जिला बनाने की मांग दोहराई
प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस विधायक प्रीतम लोधी ने पिछोर को जिला बनाने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि यह प्रश्न कई बार पूछा गया, लेकिन अब तक कोई ठोस उत्तर नहीं मिला। इस पर राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने कहा कि मामला राज्य प्रशासनिक इकाई पुनर्गठन आयोग के विचाराधीन है।
भाजपा विधायक ने कांग्रेस के विरोध को बताया 'राजनीतिक नौटंकी'
भाजपा विधायक शैलेंद्र जैन ने कहा कि कांग्रेस अगर वाकई जनता के मुद्दों को लेकर गंभीर है, तो उसे सदन की कार्यवाही में हिस्सा लेना चाहिए, न कि परिसर में हंगामा करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आदिवासी हितों को लेकर राज्य सरकार संवेदनशील है और ठोस कदम उठा रही है।
सड़क और विकास पर 100 करोड़ से अधिक का बजट
वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने मंगलवार को सदन में अनुपूरक बजट प्रस्तुत किया, जिसमें राज्य की सड़कों के विकास व मरम्मत हेतु 100 करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया गया। साथ ही स्वास्थ्य, पुलिस, नगरीय विकास सहित विभिन्न क्षेत्रों में भी अतिरिक्त बजट का प्रस्ताव रखा गया।
कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन तीसरे दिन भी जारी
मानसून सत्र के पहले दिन से ही कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन जारी है। पहले दिन कांग्रेस विधायकों ने ओबीसी आरक्षण का मुद्दा उठाते हुए तख्तियां और गिरगिट के खिलौनों के साथ प्रदर्शन किया। मंगलवार को भैंस की ड्रेस पहनकर और बीन बजाकर विरोध जताया गया।
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मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को सदन की कार्यवाही प्रश्नकाल से प्रारंभ होगी। कार्यवाही में मुख्य रूप से वित्त मंत्री और उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा वित्त वर्ष 2025-26 का पहला अनुपूरक बजट प्रस्तुत करेंगे। इस बजट के माध्यम से राज्य सरकार विभिन्न योजनाओं और विकास कार्यों के लिए अतिरिक्त व्यय की मंजूरी लेगी। विधानसभा की कार्यवाही में विपक्ष की ओर से सामाजिक और जनहित से जुड़े मुद्दों को लेकर ध्यान आकर्षण प्रस्ताव लगाए गए हैं।
कांग्रेस विधायक अजय सिंह प्रदेश के निजी स्कूलों द्वारा मनमानी फीस वसूली को लेकर शिक्षा मंत्री का ध्यान आकर्षित करेंगे। कई निजी विद्यालय अभिभावकों से मनचाही राशि वसूल कर रहे हैं, जिससे आमजन पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। वहीं, विधायक प्रदीप लारिया ने बुजुर्गों और विधवाओं को दी जाने वाली पेंशन की राशि में वृद्धि नहीं किए जाने पर ध्यानाकर्षण लगाया है। इसके साथ ही सरकार की ओर से महिलाओं को रात में काम करने की अनुमति संबंधी एक महत्वपूर्ण विधेयक भी सदन में पेश किया जाएगा।
विधानसभा सत्र के दौरान विभिन्न विभागों के प्रतिवेदन भी पटल पर रखे जाने हैं, जिनमें बाल अधिकार आयोग, ऊर्जा विभाग, शिक्षा और नगरीय विकास विभाग की रिपोर्टें शामिल हैं। विधानसभा में कुल 20 विधायकों द्वारा सड़क निर्माण, पुलिया, विद्युत ट्रांसफार्मर, जल योजना, स्कूल मरम्मत, खेल मैदान निर्माण, और सामाजिक सेवाओं से जुड़े जनहित मुद्दों पर याचिकाएं प्रस्तुत की गईं। इन याचिकाओं में मुरैना, भिंड, रायसेन, टीकमगढ़, छतरपुर, झाबुआ, धार और मंदसौर जिलों के विकास कार्य शामिल हैं।
]]>मध्यप्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र आज 28 जुलाई से प्रारंभ होने जा रहा है, जो 8 अगस्त तक चलेगा। इस 12 दिवसीय सत्र के दौरान कुल 10 बैठकें आयोजित की जाएंगी। सत्र में 2 अगस्त (शनिवार) और 3 अगस्त (रविवार) को अवकाश रहेगा। इससे पहले विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने राजधानी भोपाल में नवीन विधायक विश्राम गृह के भूमिपूजन कार्यक्रम के दौरान मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि यह सत्र प्रदेश के हित में बेहद उपयोगी और सार्थक रहेगा। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से लाए गए विधेयकों पर गहन विचार-विमर्श किया जाएगा और पक्ष-विपक्ष दोनों मिलकर राज्य के महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करेंगे। तोमर ने कहा कि हमारा प्रयास है कि सभी दल सदन की गरिमा बनाए रखते हुए रचनात्मक बहस करें। इससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया और मजबूत होगी।
विधानसभा सचिवालय को 3377 प्रश्न प्राप्त हुए हैं, जिनमें 191 ध्यानाकर्षण सूचनाएं और एक स्थगन प्रस्ताव शामिल हैं। इस सत्र में सरकार 10,000 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट पेश करेगी। साथ ही, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष व बैतूल विधायक हेमंत खंडेलवाल की सीट बदलकर पहली पंक्ति में की गई है।
सत्र की तैयारियां पूरी
मध्य प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र सोमवार से शुरू होगा। विधानसभा सचिवालय ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। सचिवालय को 3377 प्रश्न प्राप्त हुए हैं, जो विभिन्न मुद्दों पर विधायकों द्वारा उठाए जाएंगे। इसके अलावा, 191 ध्यानाकर्षण सूचनाएं और एक स्थगन प्रस्ताव भी मिला है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि प्रश्नों की तैयारी सटीक हो और मंत्रियों को समय पर जानकारी दी जाए।
अनुपूरक बजट का ऐलान
इस सत्र में सरकार पहला अनुपूरक बजट पेश करेगी, जिसका आकार लगभग 10,000 करोड़ रुपये होगा। यह बजट विभिन्न विकास योजनाओं और प्रशासनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए लाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से बजट प्रस्तुति को लेकर स्पष्ट और पारदर्शी तैयारी करने को कहा है।
हेमंत खंडेलवाल की नई सीट
बीजेपी के नए प्रदेश अध्यक्ष और बैतूल विधायक हेमंत खंडेलवाल की विधानसभा में सीट बदल दी गई है। अब वे पहली पंक्ति में बैठेंगे, जो उनके नए पद के अनुरूप है। यह बदलाव बीजेपी संगठन और विधानसभा में उनके कद को दर्शाता है।
विधानसभा के मानसून सत्र में मोहन सरकार अनुपूरक बजट पेश करेगी। सरकार ने तय किया है कि बजट में केवल जनहित से जुड़ी योजनाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। वहीं, अनावश्यक खर्चों पर सख्ती बरती जाएगी। वित्त विभाग ने सभी विभागों से साफ कह दिया है कि अफसरों के लिए वाहन जैसी फिजूलखर्ची संबंधी प्रस्ताव न भेजें। इस सप्लीमेंट्री बजट में जनता से जुड़े कार्यों के लिए अतिरिक्त राशि का प्रावधान किया जाएगा, ताकि विकास योजनाएं रुकें नहीं और प्रदेश के हित में प्रभावी क्रियान्वयन हो सके।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सोशल मीडिया पर लिखा
”सरकार के दबाव में विधानसभा अध्यक्ष ने विधायकों को परिसर के अंदर प्रदर्शन करने और जनता की आवाज उठाने से रोका है. संविधान की धारा 194 विधायकों को जनता के हित से जुड़े मुद्दे उठाने की शक्ति देती है, लेकिन अब सरकार न तो कार्यवाही को लाइव होने दे रही है, न प्रदर्शन करने दे रही है और न ही नारे लगाने की इजाजत दे रही है. हम इसका विरोध करेंगे और जनता के मुद्दे उठाएंगे.”
मीडिया कवरेज के लिए भी सख्त नियम
– विधानसभा सचिवालय ने पत्रकारों के लिए भी नए नियम लागू किए हैं…
– कवरेज केवल एक निर्धारित जगह से ही होगी.
– सदन के सामने वीआईपी एरिया में मीडिया बाइट लेना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा.
– समिति कक्ष के सामने ही पत्रकार बयान ले सकेंगे.
– पत्रकार दीर्घा में फोटो और वीडियो बनाने पर कार्रवाई की चेतावनी.
– विधानसभा पास के साथ पहचान पत्र दिखाना अनिवार्य होगा, बिना दस्तावेज प्रवेश नहीं मिलेगा.
विधानसभा का मानसून सत्र शुरू होने से 48 घंटे पहले ही विधानसभा परिसर को सुरक्षा घेरा बना दिया गया है। विधानसभा सचिवालय के फैसले के चलते शनिवार को यहां नियमित कामकाज बंद रहा। केवल सुरक्षा प्रबंधों से जुड़े अधिकारी और कर्मचारी ही विधानसभा परिसर में प्रवेश कर सकेंगे।
धरना-प्रदर्शन पर सख्ती, परिसर में सीमित एंट्री
इस बार सत्र शुरू होने से पहले ही सुरक्षा प्रबंधों के साथ-साथ धरना-प्रदर्शन को लेकर भी सियासी गर्माहट देखने को मिल रही है। विधानसभा अध्यक्ष के निर्देश पर प्रमुख सचिव ने विधायकों द्वारा परिसर में नारेबाजी और प्रदर्शन को प्रतिबंधित कर दिया है।
अब एंट्री को लेकर भी नियम सख्त किए गए हैं। शनिवार को गेट नंबर 3 पर दिनभर पुलिस वाहनों की आवाजाही और अधिकारियों की रिहर्सल चलती रही, जबकि गेट नंबर 1, 2, 4 और 5 को बंद रखा गया।
मीडिया और अन्य कार्यालय भी रहे बंद
इस बार सत्र से पहले मीडिया कार्यालय शनिवार को बंद रहा, जो आमतौर पर खुला रहता है। इसके कारण पास बनवाने पहुंचे पत्रकारों को खाली हाथ लौटना पड़ा। उन्हें बताया गया कि पास वितरण रविवार दोपहर से शुरू होगा। यही स्थिति अन्य समितियों से संबंधित कार्यालयों की भी रही।
विधानसभा परिसर में प्रवेश के लिए नए नियम
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मध्यप्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र 28 जुलाई से प्रारंभ होने जा रहा है, जो 8 अगस्त तक चलेगा। इस 12 दिवसीय सत्र के दौरान कुल 10 बैठकें आयोजित की जाएंगी। सत्र में 2 अगस्त (शनिवार) और 3 अगस्त (रविवार) को अवकाश रहेगा। इससे पहले विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने राजधानी भोपाल में नवीन विधायक विश्राम गृह के भूमिपूजन कार्यक्रम के दौरान मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि यह सत्र प्रदेश के हित में बेहद उपयोगी और सार्थक रहेगा। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से लाए गए विधेयकों पर गहन विचार-विमर्श किया जाएगा और पक्ष-विपक्ष दोनों मिलकर राज्य के महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करेंगे। तोमर ने कहा कि हमारा प्रयास है कि सभी दल सदन की गरिमा बनाए रखते हुए रचनात्मक बहस करें। इससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया और मजबूत होगी।
विधानसभा के मानसून सत्र में मोहन सरकार अनुपूरक बजट पेश करेगी। सरकार ने तय किया है कि बजट में केवल जनहित से जुड़ी योजनाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। वहीं, अनावश्यक खर्चों पर सख्ती बरती जाएगी। वित्त विभाग ने सभी विभागों से साफ कह दिया है कि अफसरों के लिए वाहन जैसी फिजूलखर्ची संबंधी प्रस्ताव न भेजें। इस सप्लीमेंट्री बजट में जनता से जुड़े कार्यों के लिए अतिरिक्त राशि का प्रावधान किया जाएगा, ताकि विकास योजनाएं रुकें नहीं और प्रदेश के हित में प्रभावी क्रियान्वयन हो सके।
मानसून सत्र के लिए अब विधायकों लिखित सवाल नहीं पूछ पाएंगे, ऐसा इसलिए क्योंकि लिखित सवाल पूछने का समय बीत चुका है। अब विधायक ध्यानाकर्षण, शून्यकाल, याचिका या फिर अन्य माध्यम से अपने क्षेत्र के मसले सदन में उठा सकेंगे, सरकार से सवाल कर सकेंगे। हालांकि विधायकों ने इस बार सवालों की झड़ी लगा दी है। विस सचिवालय तक 3,377 लिखित सवाल पहुंचे हैं। इनमें ऑनलाइन माध्यम से सवाल सर्वाधिक पहुंचे।
बता दें, लिखित सवाल पूछने के लिए विधायकों(MP Monsoon Session) को 11 जुलाई तक का मौका था। यह तिथि बीत जाने के बाद विधायकों के अब किसी भी प्रकार के सवाल विधानसभा सचिवालय नहीं ले रहा है। सचिवालय तक जो सवाल आ चुके हैं, वे सभी सवाल राज्य सरकार को भेज दिए गए हैं, जिससे समय रहते सवालों के जवाब सरकारी महकमे विधानसभा सचिवालय को भेज सकें। विपक्षी दल कांग्रेस विधायकों ने तीखे सवाल किए हैं। प्रयास यही है कि सदन में सरकार की घेराबंदी की जा सके। इनमें भ्रष्टाचार, कमीशनखोरी, घोटाला, बेरोजगारी, बिगड़ती कानून व्यवस्था, अवैध उत्खनन, कृषि, स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े सवाल हैं।
पहले दिन रोजगार-कृषि, पंचायत पर सवाल
सत्र के पहले दिन यानी 28 जुलाई को रोजगार, कृषि, पंचायत, श्रम, खेल एवं युवा कल्याण, सहकारिता, उच्च शिक्षा, आयुष, तकनीकी शिक्षा कौशल विकास इत्यादि से जुड़े सवाल होंगे। विधानसभा सचिवालय इसकी सूचना संबंधित विभागों को भेज चुका है। मंत्रियों को भी इसी आधार पर सदन में जवाब देने की तैयारी करना होगी।
विपक्ष ने कसी कमर, सत्ता पक्ष भी तैयारी से
विपक्षी दल कांग्रेस ने सदन में सरकार को घेरने की तैयारी की है। सवालों से सरकार को आइना दिखाने का प्रयास होगा। रोजगार का वादा पूरा न होने पर सवाल पूछे जाएंगे वहीं किसानों के साथ की गई वादा खिलाफी पर भी घेराबंदी होगी। घर-घर नल से जल पहुचाने में हुए घोटाले की गूंज भी होने की संभावना है। पिछले सत्रों में भी जल जीवन मिशन में घोटाला को लेकर कांग्रेस ने घेराबंदी की थी। इस बार भी तैयारी है। वहीं सत्तारूढ़ दल भाजपा और सरकार के मंत्रियों ने भी तैयारी कर रखी है। विपक्षी सदस्यों का जवाब उन्हीं की शैली में दिया जाएगा।
22 से ली जाएंगी स्थगन, ध्यानाकर्षण सूचनाएं
विधायक यदि किसी मामले का ध्यानाकर्षण या शून्यकाल के जरिए सदन में उठाना चाहते हैं तो इसके लिए अभी मौका है। स्थगन, ध्यानाकर्षण एवं शून्यकाल की सूचनाएं 22 जुलाई से विधानसभा सचिवालय लेना शुरू करेगा। विधायकों को इसकी सूचना भेज दी गई है। सचिवालय ने कहा कि ये सूचनाएं ई-मेल के माध्यम से भी सचिवालय में भेजी जा सकती हैं। विधायक चाहें तो विधानसभा सचिवालय ने आकर भी ये सूचनाएं कार्यालय समय में दे सकते हैं।
इसी सत्र में पेश होगा सप्लीमेंट्री बजट
मानसून सत्र(MP Monsoon Session) में करीब एक दर्जन विधेयक भी सरकार सदन में पेश करेगी। अभी तक सिर्फ एक विधेयक विधानसभा तक पहुंचा है। अन्य की मौखिक सूचना सचिवालय को विभागों ने दे दी है। वहीं सप्लीमेंट्री बजट भी पेश किया जाएगा। इस सप्लीमेंट्री बजट में विभिन्न विभागों के खर्चों के लिए रकम का प्रावधान किया जा रहा है। वित्त विभाग सप्लीमेंट्री बजट की कवायद कर रहा है। विभागों से प्रस्ताव मंगाए जा चुके हैं। विभागों से स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि सप्लीमेंट्री बजट में कोई नया खर्च शामिल नहीं होगा।
इस बार ये खास
3377: सवाल विधायकों ने लिखित पूछे
2076: सवाल ऑनलाइन माध्यम से पहुंचे
1301: सवाल ऑफलाइन माध्यम से भेजे गए
12 दिन: सत्र अवधि
10 दिन: सत्र की प्रस्तावित बैठकें
बता दें कि विधानसभा के लाइव प्रसारण को लेकर कांग्रेस हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा चुकी है। कांग्रेस विधायक सचिन यादव और प्रताप सिंह ग्रेवाल की याचिका पर हाईकोर्ट सरकार को नोटिस भेज चुकी है। इंदौर हाईकोर्ट बेंच ने नोटिस भेजकर सरकार से चार हफ्ते में जवाब मांगा है। ई विधानसभा में कार्यवाही को लेकर तैयारियां जारी है। ई विधानसभा को लेकर विधानसभा की टीम (हिमाचल समिति) तीन राज्यों का कर दौरा चुकी है। विधायकों के लिए लैपटॉप खरीदने का टेंडर जल्द जारी होगा।
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