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मध्यप्रदेश भारतीय जनता पार्टी अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा आज अपने संसदीय क्षेत्र के पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ 'द साबरमती रिपोर्ट' फिल्म देखेंगे।
पार्टी की ओर से मुहैया कराई गई जानकारी के अनुसार शर्मा अपने संसदीय क्षेत्र के कार्यकर्ताओं के साथ दोपहर को खजुराहो के एनवीआर थिएटर में ये फिल्म देखेंगे।
इस दौरान शर्मा के संसदीय क्षेत्र खजुराहो के पन्ना और छतरपुर क्षेत्र के पार्टी कार्यकर्ता उपस्थित रहेंगे।
]]>जनता विकास को पसंद करती है, भाजपा के विकास कार्यों पर जनता को भरोसा-डॉ. मोहन यादव
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में भाजपा की हरियाणा सरकार ने 10 सालों में बहुत अच्छा कार्य किया है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की कार्यपद्धति का ही परिणाम है कि हरियाणा में तीसरी बार भाजपा की सरकार बन रही है। मैं सभी निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को बधाई देता हूं। मैंने खुद भी हरियाणा चुनाव प्रचार में पहुंचा था। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मैंने पहले भी कहा था कि असल में यह चुनाव कांग्रेस का नहीं था, बल्कि राहुल गांधी के फेल होने का था। भाजपा ने विकास के एजेंडे को आगे बढ़ाया है। हम सब मिलकर विकास की बात करते हैं। जनता भी विकास की बात को ही पसंद करती है और इसलिए हरियाणा में कमल खिला है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में भाजपा द्वारा किए जा रहे विकास कार्यों पर जनता ने भरोसा जताया है।
गरीब कल्याण के कार्यों को जनता ने आशीर्वाद दिया है – श्री विष्णुदत्त शर्मा
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष व सांसद श्री विष्णुदत्त शर्मा ने कहा कि आज का दिन भाजपा के लिए ऐतिहासिक दिन है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व, केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी की कुशल रणनीति और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जगत प्रकाश नड्डा जी के साथ कार्यकर्ताओं की अथक मेहनत व परिश्रम से यह परिणाम आए हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व को जनता ने आशीर्वाद दिया है। भाजपा के बूथ-बूथ के कार्यकर्ताओं ने सजग प्रहरी की तरह कार्य किया, इसी का परिणाम है कि हम हरियाणा में लगातार तीसरी बार सरकार बना रहे हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व, केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी की कुशल रणनीति और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जगत प्रकाश नड्डा जी के साथ कार्यकर्ताओं की अथक मेहनत व परिश्रम से यह परिणाम आए हैं। मैं प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी, केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी एवं पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जगत प्रकाश नड्डा जी का आभार व्यक्त करते हुए मध्यप्रदेश भाजपा के कार्यकर्ताओं की ओर से हरियाणा और जम्मू-कश्मीर के सभी कार्यकर्ताओं व पूरी टीम को बधाई एवं शुभकामनाएं प्रेषित करता हूं। हरियाणा की जनता ने विधानसभा चुनाव में लगातार तीसरी बार भाजपा पर विश्वास व्यक्त किया है। हरियाणा के चुनाव परिणाम और जम्मू-कश्मीर में भाजपा के अच्छे प्रदर्शन से स्पष्ट हो गया कि जनता ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के करीब कल्याण के कार्यों को अपना आशीर्वाद दिया है। देश की जनता प्रधानमंत्री जी के साथ है।
प्रदेश कार्यालय में मुंह मीठा कर की गई आतिशबाजी
हरियाणा में भाजपा की ऐतिहासिक विजय और जम्मू-कश्मीर में पार्टी के अच्छे प्रदर्शन पर भाजपा प्रदेश कार्यालय में आतिशबाजी कर जश्न मनाया गया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष श्री शर्मा ने कार्यकर्ताओं का मुंह मीठा कराया। कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे को पार्टी के शानदार प्रदर्शन पर बधाई दी।
इस अवसर पर वरिष्ठ नेता श्री शैलेन्द्र शर्मा, प्रदेश मंत्री श्री रजनीश अग्रवाल, प्रदेश कार्यालय मंत्री डॉ. राघवेन्द्र शर्मा एवं प्रदेश प्रवक्ता श्री अजय धवले सहित कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
]]>डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी बंगाली भद्रलोक के ऐसे प्रभावशाली परिवार में जन्मे थे, जो उस समय बंगाल में अपनी बौद्धिकता के लिए विख्यात था। मात्र 33 साल की उम्र में डॉ. मुखर्जी कलकत्ता विश्वविद्यालय के कुलपति बन गए थे। इतनी कम उम्र में कुलपति बनने वाले वो पहले भारतीय थे। उनके पिता भी कलकत्ता विश्वविद्यालय में कुलपति रह चुके थे, लेकिन डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी ने यह मुकाम अपनी योग्यता और विद्वता से हांसिल किया था। शिक्षा के शिखर से उतरकर भारतीय राजनीति में उनका पदार्पण गहन राष्ट्रीय उद्देश्यों के लिए हुआ था। डॉ. मुखर्जी उस समय बंगाल में जारी मुस्लिम लीग की विभाजनकारी और सांप्रदायिक राजनीति से काफी नाराज और विचलित थे। मुस्लिम लीग की राजनीति बंगाल को एक और विभाजन की ओर ले जा रही थी। मुस्लिम लीग सुनियोजित तरीके से ब्रिटिश-शासन की मदद से भारत के पूर्वी हिस्सों में हिन्दुओं को हाशिए पर ढकेल रही थी। डॉ. मुखर्जी ने संकल्प लिया था कि मुस्लिम लीग की कट्टरता के खिलाफ वो हिन्दू-समाज को जागृत करेंगे। इस लड़ाई को वो सामाजिक और राजनीतिक, दोनों मोर्चों पर लड़ना चाहते थे। इसी के मद्देनजर उन्होंने बंगाल में सक्रिय कृषक प्रजा पार्टी के प्रमुख फजल-उल-हक और बंगला के जाने-माने महाकवि काजी नजरूल इस्लाम के साथ इस काम को आगे बढ़ाया।
हिन्दू एकता और देश की अखंडता पर आसन्न खतरों ने उन्हें हिंदू महासभा की ओर आकर्षित किया, जिसका नेतृत्व वीर सावरकर करते थे। 1939 में वो हिंदू महासभा के अध्यक्ष बन गए। अध्यक्ष के रूप मे उन्होंने घोषणा की कि संयुक्त भारत के लिए तत्काल समग्र स्वतंत्रता हांसिल करना हिंदू महासभा का मूल उद्देश्य है। गौरतलब है कि महात्मा गांधी ने भी हिंदू महासभा में उनकी सक्रियता का स्वागत किया था। गांधी जी चाहते थे कि पंडित मदनमोहन मालवीय के निधन के बाद हिंदू-समाज के नेतृत्व के लिए किसी प्रभावशाली व्यक्ति को आगे आना चाहिए। गांधी जी डॉ. मुखर्जी को मदनमोहन मालवीय के विकल्प के रूप में देखते थे और उनके राष्ट्रवादी रूख तथा निष्ठा पर पूरा भरोसा करते थे। हिन्दू महासभा में शामिल होने के बाद जब डॉ. मुखर्जी गांधी जी से मिलने पहुंचे, तो दोनों के बीच दिलचस्प संवाद हुआ। डॉ. मुखर्जी ने गांधी जी से कहा कि आप मेरे हिन्दू महासभा में शामिल होने पर खुश नही होंगे, तो गांधीजी ने उनसे कहा था कि दृ ’’सरदार पटेल हिन्दू मनोमस्तिष्क से ओतप्रोत कांग्रेसमैन हैं, आप हिन्दू महासभाई हो, जिसका ह््रदय कांग्रेस का है। यही देश के हित में है’’। महात्मा गांधी के कहने पर ही पं. नेहरू ने डॉ. मुखर्जी को अपनी कैबिनेट में शामिल किया था। पं. नेहरू की कैबिनेट में रहते हुए डॉ. मुखर्जी ने कई बड़े काम किए। पं. नेहरू भी उनके कामों के कायल थे, लेकिन पाकिस्तान, कश्मीर या शरणार्थियों जैसे मसलों मे दोनों के बीच व्यापक और गहरी राजनीतिक असहमति थी। धारा 370, हिंदू कोड बिल और समान नागरिक संहिता जैसे मुद्दों पर भी पं. नेहरू से उनकी पटरी कभी भी नहीं बैठ पाई। ये ही वो कारण हैं, जो अन्ततः नेहरू कैबिनेट से उनके इस्तीफा का कारण बने।
आजादी के पहले बंगाल में मुस्लिम लीग के प्रभुत्व के विरुद्ध डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने जबरदस्त संघर्ष किया और देश को होने वाले नुकसान से बचा लिया। विभाजन के समय भी डॉ. मुखर्जी ने देश की जनता और नेतृत्व को आगाह किया था- ’’पाकिस्तान साम्प्रदायिक समस्या का कोई हल नही हैं। इससे वह और उग्र होगी, जिसका परिणाम गृहयुद्ध होगा। हमें इससे आंखें नहीं मूंदना चाहिए कि पाकिस्तान की लालसा का स्त्रोत वस्तुतः शासन सत्ता के रूप में इस्लाम की पुनःप्रतिष्ठा करने की इच्छा है।’’ 1953 में जनसंघ के पहले अधिवेशन में उन्होंने पंडित जवाहरलाल नेहरू की कश्मीर नीति का विरोध करते हुए कहा था कि एक देश में दो विधान,दो निशान, दो प्रधानकृनही चलेंगे,. नहीं चलेंगे। नेहरू-सरकार की नीतिय़ों से असहमत होने के बाद लोकसभा में दिया गया उनका भाषण ऐतिहासिक है। अगस्त 1952 में लोकसभा में काश्मीर के मुद्दे पर भाषण देते हुए डॉ. मुखर्जी ने कहा था- ’’दुनिया को यह पता होना चाहिए कि भारत महज एक थ्योरी या परिकल्पना नहीं है, बल्कि एक यथार्थ है…एक ऐसा देश जहां हिन्दू, मुसलमान, ईसाई और सभी बिरादरी के लोग बगैर किसी भय के समान अधिकारों के साथ रह सकेंगे। यही हमारा संविधान है,जिसे हमने बनाया है और पूरी शिद्दत, निष्ठा और ताकत से लागू करने जा रहे हैं’’।
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