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प्रदेशभर के पांच लाख से अधिक सार्वजनिक वाहनों की भी अब निगरानी होगी। निजी बसों, टैक्सी और नेशनल परमिट वाले ट्रकों में वीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (वीएलटीडी) लगेगी। परिवहन विभाग ने एक जनवरी 2019 से पहले पंजीकृत वाहन स्वामियों को डिवाइस लगवाने का आदेश दिया है। वहीं, 2019 के बाद के वाहनों में वीएलटीडी एक्टीवेट करना होगा।
डिवाइस न लगवाने पर वाहनों को परमिट नहीं मिलेगा और न ही फिटनेस होगा। यात्रियों की सुरक्षा व सुविधा के सभी सार्वजनिक सेवा वाहनों में वीएलटीडी का उपयोग करना होगा। इस डिवाइस से वाहनों की लोकेशन आसानी से ट्रैक की जा सकेगी। आवागमन करने वाले लोगों व उनके सामान की लाइव जानकारी मोबाइल पर मिलती रहेगी। वाहनों पर कार्रवाई होने की दशा में भी यह डिवाइस कारगर होगी।
परिवहन निगम में यह प्रयोग सफल रहा है, वहां की अधिकांश बसों को इसी से ट्रैक किया जा रहा है। परिवहन मुख्यालय पर कंट्रोल रूम बनाया गया है और जल्द ही एप भी जारी किया जाएगा, उसी के माध्यम से आम जनता, वाहन स्वामियों और ट्रांसपोर्टरों को लाभ मिल सकेगा। परिवहन मुख्यालय के आरटीओ कमल जोशी ने बताया, निजी बसों, टैक्सी और नेशनल परमिट वाले ट्रकों में यह डिवाइस लगाने का निर्देश है।
ऐसे वाहनों की यूपी में संख्या पांच लाख से अधिक है। नए वाहनों में यह डिवाइस लगी है। सिर्फ उसे एक्टीवेट किया जाएगा, जबकि 2019 के पहले के वाहनों में इसे लगवाना होगा। विभाग ने इन वाहनों में जिन कंपनियों का डिवाइस लगना है, उनके नाम भी जारी कर दिए हैं। इस डिवाइस की कीमत साढ़े तीन से 10 हजार रुपये तक है। वाहन स्वामी को यह धनराशि वहन करनी होगी।
नए विनिर्माताओं व माडलों को मंजूरी
परिवहन राज्यमंत्री दयाशंकर सिंह ने बताया कि सार्वजनिक सेवा वाहनों में वीएलटीडी फिटमेंट और एक्टिवेशन को लेकर शासन ने बड़ा निर्णय लिया है। नए विनिर्माताओं व माडलों को मंजूरी मिली है, जबकि पूर्व स्वीकृत कंपनियों के माडलों का विस्तार, संशोधन आदि अनुमोदन हुए हैं।
वाहन स्वामी अपने वाहन निर्माता के अनुसार अधिकृत कंपनियों से संपर्क करके वीएलटीडी डिवाइस का फिटमेंट व एक्टिवेशन कराएं। प्रदेश के सभी क्षेत्रीय और आरटीओ व एआरटीओ को निर्देश का कड़ाई से पालन करने को कहा गया है।
]]>प्रदेशभर के पांच लाख से अधिक सार्वजनिक वाहनों की भी अब निगरानी होगी। निजी बसों, टैक्सी और नेशनल परमिट वाले ट्रकों में वीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (वीएलटीडी) लगेगी। परिवहन विभाग ने एक जनवरी 2019 से पहले पंजीकृत वाहन स्वामियों को डिवाइस लगवाने का आदेश दिया है। वहीं, 2019 के बाद के वाहनों में वीएलटीडी एक्टीवेट करना होगा।
डिवाइस न लगवाने पर वाहनों को परमिट नहीं मिलेगा और न ही फिटनेस होगा। यात्रियों की सुरक्षा व सुविधा के सभी सार्वजनिक सेवा वाहनों में वीएलटीडी का उपयोग करना होगा। इस डिवाइस से वाहनों की लोकेशन आसानी से ट्रैक की जा सकेगी। आवागमन करने वाले लोगों व उनके सामान की लाइव जानकारी मोबाइल पर मिलती रहेगी। वाहनों पर कार्रवाई होने की दशा में भी यह डिवाइस कारगर होगी।
परिवहन निगम में यह प्रयोग सफल रहा है, वहां की अधिकांश बसों को इसी से ट्रैक किया जा रहा है। परिवहन मुख्यालय पर कंट्रोल रूम बनाया गया है और जल्द ही एप भी जारी किया जाएगा, उसी के माध्यम से आम जनता, वाहन स्वामियों और ट्रांसपोर्टरों को लाभ मिल सकेगा। परिवहन मुख्यालय के आरटीओ कमल जोशी ने बताया, निजी बसों, टैक्सी और नेशनल परमिट वाले ट्रकों में यह डिवाइस लगाने का निर्देश है।
ऐसे वाहनों की यूपी में संख्या पांच लाख से अधिक है। नए वाहनों में यह डिवाइस लगी है। सिर्फ उसे एक्टीवेट किया जाएगा, जबकि 2019 के पहले के वाहनों में इसे लगवाना होगा। विभाग ने इन वाहनों में जिन कंपनियों का डिवाइस लगना है, उनके नाम भी जारी कर दिए हैं। इस डिवाइस की कीमत साढ़े तीन से 10 हजार रुपये तक है। वाहन स्वामी को यह धनराशि वहन करनी होगी।
नए विनिर्माताओं व माडलों को मंजूरी
परिवहन राज्यमंत्री दयाशंकर सिंह ने बताया कि सार्वजनिक सेवा वाहनों में वीएलटीडी फिटमेंट और एक्टिवेशन को लेकर शासन ने बड़ा निर्णय लिया है। नए विनिर्माताओं व माडलों को मंजूरी मिली है, जबकि पूर्व स्वीकृत कंपनियों के माडलों का विस्तार, संशोधन आदि अनुमोदन हुए हैं।
वाहन स्वामी अपने वाहन निर्माता के अनुसार अधिकृत कंपनियों से संपर्क करके वीएलटीडी डिवाइस का फिटमेंट व एक्टिवेशन कराएं। प्रदेश के सभी क्षेत्रीय और आरटीओ व एआरटीओ को निर्देश का कड़ाई से पालन करने को कहा गया है।
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