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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं के विस्तार को प्राथमिकता दी जा रही है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री मती संपतिया उइके के मार्गदर्शन में जल जीवन मिशन के माध्यम से गांव-गांव तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने के प्रयासों को गति मिली है। इसी क्रम में लागू मड़िया ग्रामीण समूह जल प्रदाय योजना के अंतर्गत सागर जिले के राहतगढ़ विकासखंड के 131 ग्राम, जैसीनगर के 145 ग्राम, सागर ब्लॉक के 26 ग्राम तथा रायसेन जिले के बेगमगंज ब्लॉक के 15 ग्रामों सहित कुल 317 ग्रामों को शुद्ध पेयजल सुविधा से जोड़ा गया है।
घर-घर नल कनेक्शन से संवरा ग्रामीणों का जीवन
ग्राम खजुरिया में लगभग 147 परिवार निवास करते हैं, जिनकी आजीविका मुख्य रूप से कृषि, मजदूरी और पशुपालन पर आधारित है। योजना लागू होने से पहले गांव में केवल दो नल और एक कुआं था, जो गर्मियों में सूख जाता था। पानी के लिए ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं और बच्चियों को एक से डेढ़ किलोमीटर तक पैदल जाना पड़ता था। पानी की समस्या का सीधा असर बच्चियों की पढ़ाई और महिलाओं के दैनिक जीवन पर पड़ता था। अब घर-घर नल कनेक्शन मिलने से ग्रामीण परिवारों को बड़ी राहत मिली है और गांव में स्वच्छता एवं स्वास्थ्य की स्थिति में भी सुधार दिखाई दे रहा है।
दिव्यांग नीरज साहू को मिला आत्मसम्मान
इस योजना ने गांव के कई लोगों के जीवन में नई उम्मीद भी जगाई है। ग्राम खजुरिया के निवासी नीरज साहू, जो एक हाथ से दिव्यांग हैं, आज गांव की जल आपूर्ति व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। रोजगार के अवसर नहीं मिलने के बीच उन्होंने ग्राम पंचायत के समक्ष बॉलमेन के रूप में कार्य करने की इच्छा व्यक्त की। ग्राम सभा की सहमति से उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी गई। आज वे गांव में जल सप्लाई व्यवस्था संभालते हुए सम्मानपूर्वक अपनी आजीविका चला रहे हैं। उनके लिए यह योजना केवल पेयजल सुविधा नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और सम्मान का माध्यम बन गई है।
जनभागीदारी बनी योजना की सबसे बड़ी ताकत
योजना में सामुदायिक सहभागिता को विशेष महत्व दिया गया है। सहयोगी संस्था आई.एस.ए. मध्य सेवा एसोसिएशन, भोपाल द्वारा जनसभाओं, ग्रामसभाओं, नुक्कड़ नाटकों और स्कूल रैलियों के माध्यम से ग्रामीणों को जागरूक किया गया। गांवों में ग्राम जल एवं स्वच्छता तदर्थ समितियों का गठन कर स्थानीय समुदाय को जल प्रबंधन से जोड़ा गया। इससे ग्रामीणों में योजना के प्रति स्वामित्व और जिम्मेदारी की भावना विकसित हुई।
महिलाओं की भागीदारी से मजबूत हुआ ग्रामीण मॉडल
ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों में महिलाओं की 50 प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित की गई है। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्गों को भी प्रतिनिधित्व दिया गया है। इससे गांवों में सहभागी विकास और सामाजिक समावेशन का प्रभावी मॉडल विकसित हो रहा है। महिलाओं की सक्रिय भागीदारी ने योजना के संचालन और रखरखाव को अधिक प्रभावी बनाया है।
हर घर नल से जल पहुंचने से सुधरा जीवन स्तर
आज खजुरिया गांव में टोंटी से शुद्ध पेयजल की उपलब्धता केवल सुविधा नहीं, बल्कि ग्रामीण जीवन में आए व्यापक बदलाव का प्रतीक बन चुकी है। स्वच्छ पेयजल मिलने से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में कमी आई है, महिलाओं के श्रम और समय की बचत हुई है तथा बच्चों को बेहतर वातावरण मिल रहा है। जल जीवन मिशन ने यह सिद्ध किया है कि जब योजनाएं संवेदनशील प्रशासनिक दृष्टिकोण और जनसहभागिता के साथ लागू होती हैं, तब उनका प्रभाव सीधे लोगों के जीवन में दिखाई देता है।
जल है तो कल है” का साकार होता संदेश
सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में हो रहा यह परिवर्तन प्रदेश में विकसित हो रहे उत्तरदायी और सहभागी ग्रामीण मॉडल की तस्वीर प्रस्तुत करता है। मड़िया ग्रामीण समूह जल प्रदाय योजना अब अन्य गांवों के लिए भी प्रेरणा का माध्यम बन रही है। खजुरिया में 'जल है तो कल है' का संदेश अब केवल एक नारा नहीं, बल्कि बदलती जिंदगी का वास्तविक अनुभव बन चुका है।
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योगी सरकार द्वारा प्रदेश में बुनियादी ढांचे और जल प्रबंधन प्रणाली को आधुनिक बनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसी के तहत राजधानी स्थित गोमती बैराज को आधुनिक और आदर्श बैराज सिस्टम के रूप में विकसित किया जा रहा है। सीएम योगी के निर्देश पर सिंचाई विभाग ने बैराज के पुराने और क्षतिग्रस्त वर्टिकल गेटों को बदलने का कार्य शुरू कर दिया है। इससे राजधानी लखनऊ की पेयजल आपूर्ति और अधिक मजबूत होगी। इसके अलावा जल सुरक्षा, बाढ़ नियंत्रण और पर्यावरणीय संतुलन को नई तकनीक के माध्यम से और मजबूती मिलेगी।
बैराज के गेटों में जैविक एवं रासायनिक क्षरण बढ़ने से कार्यक्षमता होने लगी थी प्रभावित
प्रमुख सचिव सिंचाई अनिल गर्ग ने बताया कि वर्ष 1980 से 1983 के बीच निर्मित गोमती बैराज लंबे समय से राजधानी की जल आपूर्ति व्यवस्था की रीढ़ बना हुआ है। यह बैराज कुड़िया घाट पंपिंग स्टेशन पर 105.6 मीटर का निर्धारित जल स्तर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जिससे लाखों लोगों को निर्बाध पेयजल उपलब्ध हो पाता है। इसके साथ ही बारिश के मौसम में गोमती नदी के जल प्रवाह को नियंत्रित कर शहर को बाढ़ जैसी स्थितियों से बचाने में भी यह अहम योगदान देता है। उन्होंने बताया कि समय के साथ नदी के पानी की गुणवत्ता और लगातार उपयोग के कारण बैराज के गेटों में जैविक एवं रासायनिक क्षरण बढ़ गया था। इससे गेटों की कार्यक्षमता प्रभावित होने लगी थी। इस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चरणबद्ध तरीके से गेट बदलने के निर्देश दिये थे। इसी क्रम में वर्ष 2024 में दो गेट बदले गए थे, जबकि 2025 में चार अन्य गेटों को प्रतिस्थापित किया गया। अब अंतिम चरण में शेष चार गेटों के निर्माण और स्थापना का कार्य तेजी से किया जा रहा है।
बरेली के आईएसओ प्रमाणित सिंचाई कार्यशाला में किया गया गेटों का निर्माण
मुख्य अभियंता यांत्रिक उपेंद्र सिंह ने बताया कि इन गेटों का निर्माण बरेली स्थित आईएसओ प्रमाणित सिंचाई कार्यशाला में किया गया है। प्रत्येक गेट दो स्तरों में तैयार किया गया है, जिसमें ऊपरी हिस्से का वजन लगभग 16 टन और निचले हिस्से का वजन करीब 18 टन है। सभी दस गेटों की चौड़ाई 18 मीटर तथा ऊंचाई 4.95 मीटर निर्धारित की गई है। अत्याधुनिक तकनीक और मजबूत संरचना वाले ये नए गेट लंबे समय तक बेहतर प्रदर्शन करने में सक्षम होंगे। उन्होंने बताया कि विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती गेट बदलने के दौरान राजधानी की पेयजल आपूर्ति को प्रभावित न होने देना था। इसे ध्यान में रखते हुए विभाग ने बैराज के ऊपरी हिस्से में कॉफरडैम का निर्माण कराया है, ताकि मरम्मत और प्रतिस्थापन कार्य के दौरान जल स्तर को नियंत्रित रखा जा सके। इस व्यवस्था से कुड़िया घाट पंपिंग स्टेशन तक पर्याप्त पानी पहुंचता रहेगा और शहरवासियों को पानी की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
बैराज को स्काडा तकनीक से स्वचालित रूप में संचालित करने की हो रही तैयारी
मुख्य अभियंता ने बताया कि मरम्मत और गेट प्रतिस्थापन कार्य को सुचारु रूप से पूरा करने के लिए 8 मई से 15 जून तक कुल 45 दिनों की बंदी निर्धारित की गई है। उन्होंने कहा कि गर्मी बढ़ने के कारण जल स्तर में गिरावट की संभावना को देखते हुए विभाग चौबीसों घंटे काम कर रहा है ताकि कार्य समय से पहले पूरा किया जा सके। इसके लिए इंजीनियरों और तकनीकी कर्मचारियों की विशेष टीम लगातार निगरानी कर रही है। बैराज को स्काडा तकनीक से स्वचालित रूप में संचालित करने की तैयारी की जा रही है। इससे बैराज के गेटों का संचालन डिजिटल माध्यम से किया जा सकेगा। जल स्तर की निगरानी, गेटों का नियंत्रण और आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया जैसी व्यवस्थाएं अधिक प्रभावी बनेंगी। इससे मानवीय त्रुटियों में कमी आएगी और पूरी प्रणाली अधिक सुरक्षित एवं पारदर्शी होगी।
]]>शहर के 75 फीसदी इलाकों में 16 अक्टूबर की शाम जल आपूर्ति नहीं होगी. बिजली विभाग द्वारा 33 केवी लाइन में संधारण कार्य की वजह से 6 घंटे का शटडाउन लिया जाएगा. इसके कारण फिल्टर प्लांट की बिजली आपूर्ति प्रभावित होने से शहर 42 पानी टंकियां नहीं भर पाएंगी. संधारण का कार्य पूरा होने के बाद निगम का जल विभाग शाम 5 बजे से प्रभावित टंकियों को भरना शुरू करेगा. जलभराव के बाद 17 अक्टूबर की सुबह नियमित जल आपूर्ति होने लगेगी.
दरअसल, दीपावली पर्व से पूर्व छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी 33 केव्ही लाइन के संधारण का कार्य करने जा रही है. इसके कारण 16 अक्टूबर को 6 घंटे का शटडाउन रहेगा. जल विभाग के कार्यपालन अभियंता नरसिंग फरेंद्र के मुताबिक 80 एमएलडी, 150 एमएलडी प्लांट और 80 एमएलडी के नया प्लांट से भरने वाली 42 टंकियां इससे प्रभावित होंगी. इसीलिए 16 अक्टूबर को शाम के समय जलप्रदाय नहीं होगा. सुबह के समय नियमित रूप से जल आपूर्ति के बाद प्रातः 10 बजे से शाम 4 बजे तक शटडाउन लिया जाएगा.
शहर ये टंकियां रहेंगी प्रभावित : डगनिया, गंज, गुढियारी, राजेन्द्र नगर, तेलीबांधा, शंकर नगर, खमतराई, भनपुरी, ईदगाहभाठा पुरानी टंकी और श्याम नगर, साथ ही 150 एमएलडी प्लाट से भरने वाली पानी टंकियों में भाठागांव, चंगोराभाठा, कुशालपुर, डीडी नगर, ईदगाहभाठा, सरोना, टाटीबंध, कोटा, कबीर नगर, जरवाय, गोगांव, मठपुरैना, लालपुर, अमलीडीह, अवंति विहार, मण्डी, मोवा, सड्डू, दलदल सिवनी, रामनगर, कैचना, आमासिवनी, देवपुरी, बोरियाखुर्द, जोरा, भनपुरी नया, रायपुरा, कुकुरबेडा और नया 80 एम एलडी प्लांट से भरने वाली टंकियां बैरन बाजार नया एवं देवेन्द्र नगर नया, संजय नगर एवं मोतीबाग टंकी 16 अक्टूबर को सुबह जलप्रदाय होने के पश्चात शाम को जलप्रदाय नही होगा. संधारण कार्य पूरा होने के बाद 17 अक्टूबर को सुबह जलप्रदाय नियमित रूप से होने लगेगा. इसके अलावा शहर में स्थित अन्य जलागारों एवं पावर पंपों से जलप्रदाय यथावत रहेगा.
डिमांड पर पानी टैंकर की रहेगी वैकल्पिक व्यवस्था
नगर निगम के जल विभाग द्वारा गुरुवार को शाम के समय शहर की 42 पानी टंकियों से जल आपूर्ति बाधित रहने पर प्रभावित इलाकों में डिमांड पर जोन के माध्यम से पानी टैंकर की वैकल्पिक व्यवस्था रहेगी. शहरवासियों से आग्रह किया गया है 16 अक्टूबर की सुबह नियमित जल आपूर्ति के दौरान शाम के लिए अपनी सुविधा अनुसार पानी बचाकर उपयोग के लिए सुरक्षित रख लें.