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नेपानगर में स्वच्छ भारत मिशन 2 के तहत नदियों को प्रदूषण मुक्त बनाने की पहल शुरू हो गई है। शहर में 7 करोड़ रुपए की लागत से दो सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किए जाएंगे।
पहला प्लांट मसक नदी क्षेत्र में बनेगा। दूसरा पांधार एरिया में स्थापित किया जाएगा। इन प्लांट से शहर के नाले और नालियों को जोड़ा जाएगा। गंदा पानी प्लांट में शुद्ध होकर मसक, ताप्ती और पांधार नदी में जाएगा।
वर्तमान में शहर का अशुद्ध जल सीधे नदियों में मिल रहा है। इससे जल प्रदूषण की समस्या बनी हुई है। नए प्लांट से न केवल नदियां स्वच्छ होंगी, बल्कि जीव-जंतुओं को भी शुद्ध जल मिलेगा। साथ ही घरेलू जल आपूर्ति की गुणवत्ता में भी सुधार होगा।
नगर पालिका के इंजीनियर प्रकाश बड़वाहे के अनुसार, प्लांट के लिए मंगलवार से सर्वे शुरू हो गया है। यह सर्वे चार दिन तक चलेगा। सर्वे होगा। इस परियोजना से भविष्य में नदियों को प्रदूषण से बचाया जा सकेगा और पर्यावरण संरक्षण में मदद मिलेगी।
ऐसे शुद्ध होता है दूषित पानी
एसटीपी में ब्लोअर से ऑक्सीजन छोड़ी जाती है, जिससे ऑर्गेनिक मैटर डिकंपोज होता है। बैक्टीरिया गंदगी खाते हैं और पानी शुद्ध होने लगता है। विशेषज्ञों के अनुसार दूषित पानी का ट्रीटमेंट करने के लिए प्लांट में डिफेंडर और पाइप लगाए हैं। दूषित पानी में जैविक ऑक्सीजन मांग (बीओडी) 300 तक होती है। अपग्रेड होने के बाद यह डिमांड घट कर 10 तक हाे जाएगी। उसके बाद पानी का उपयोग कृषि कार्य के लिए किया जा सकता है।
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