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केरल के वायनाड जिले में भूस्खलन की घटनाओं में अपना सब कुछ खो चुके लोगों के सरकारी दस्तावेज उन्हें दोबारा दिलाने के लिए सोमवार को आपदा प्रभावित क्षेत्रों में एक विशेष शिविर शुरू किया गया। लापता लोगों की खोज के लिए भी अभियान जारी है।
स्थानीय स्वशासन विभाग, जिला प्रशासन और केरल सूचना प्रौद्योगिकी मिशन द्वारा संयुक्त रूप से प्रमाणपत्र/दस्तावेज दिलाने के लिए अभियान चलाया जा रहा है जिसके तहत यहां मेप्पाडी के चुनिंदा स्कूलों में ये शिविर आयोजित किए गए हैं।
जिलाधिकारी ने सोमवार को सोशल मीडिया मंच ‘फेसबुक’ पर पोस्ट कर कहा कि भूस्खलन में जीवित बचे लोगों के लिए शिविरों में व्यवस्था की जा रही है ताकि वे अपने खोए हुए दस्तावेज या प्रमाण पत्र हासिल कर सकें। ये लोग या तो शिविरों या अन्य स्थानों पर आश्रय लिये हुए हैं।
इस बीच, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), पुलिस, अग्निशमन दल, नागरिक सुरक्षा दल, वन विभाग और बचाव स्वयंसेवकों की 190 सदस्यीय टीम ने आज सुबह आपदा प्रभावित क्षेत्र के पांच इलाकों में तलाशी अभियान फिर से शुरू किया।
मुंडक्कई और चूरलमाला क्षेत्रों में भारी बारिश के बाद लापता लोगों की तलाश का अभियान रविवार को रोक दिया गया था।
राज्य सरकार के अनुसार, भूस्खलन में 229 लोगों की जान चली गई, जबकि 130 से अधिक लोग अभी भी लापता हैं। उन्होंने बताया कि बरामद किए गए कुल शवों में से 51 की पहचान अभी नहीं हो पाई है।
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केरल के वायनाड में लैंडस्लाइड हुए 3 दिन बीत चुके हैं, लेकिन आज चौथे दिन भी मलबे से लाशों का निकलना जारी है. इस हादसे अब तक 308 लोगों की मौत हो चुकी है. हालांकि, रेस्क्यू में जुटे बचावकर्मियों को अब तक 195 शव ही मिले हैं. बाकी, लोगों की मौत की पुष्टि उनके बॉडी पार्ट्स से की गई है. यानी 105 लोगों के शव का कोई ना कोई हिस्सा बरामद हुआ है, जिससे उनकी मौत कंफर्म हुई है.
बता दें कि सेना, नेवी और एयरफोर्स के साथ बचावकर्मियों की 40 टीमें लोगों के रेस्क्यू में जुटे हुए हैं. रेस्क्यू ऑपरेशन को प्रभावी बनाने के लिए सर्च क्षेत्र को 6 अलग-अलग भागों में बांटने की बात चल रही है. इनमें से पहला क्षेत्र अट्टामाला और आरणमाला से बना है. दूसरा क्षेत्र मुंडकई, तीसरा क्षेत्र पुंजरीमट्टम, चौथा क्षेत्र वेल्लरमाला विलेज रोड, पांचवां क्षेत्र जीवीएचएसएस वेल्लरमाला और छठा इलाका नदी का बहाव क्षेत्र है.
रेस्क्यू दल में तैराकी में माहिर लोग
तीनों सेनाओं के अलावा NDRF,DSG और MEG की संयुक्त टीम खोजी अभियान में लगी हुई है. हर टीम के साथ तीन स्थानीय लोग और एक वन विभाग का कर्मचारी भी शामिल किया जाएगा. इसके अलावा चलियार नदी के आसपास के 8 पुलिस स्टेशनों के पुलिसवाले और तैराकी में माहिर लोग भी खोज करने जा रहे हैं. इसके अलावा हेलिकॉप्टर के जरिए भी सर्च ऑपरेशन चलाया जा जा रहा है. तटरक्षक और नौसेना के साथ वन विभाग के कर्मचारी उन जगहों पर भी खोज करने जा रहे हैं, जहां शवों के बहकर आने की संभावना है.
खोजी अभियान में ले रहे कुत्तों की मदद
सेना ने हादसे के बाद जो बेली ब्रिज बनाया है, इससे 25 एंबुलेंस मुंडकई पहुंचाई जाएंगी. मिट्टी में दबे शवों का पता लगाने के लिए दिल्ली से ड्रोन आधारित रडार शनिवार को आने वाला है. तलाशी अभियान में 6 कुत्तों की भी मदद ली जा रही है. आज तमिलनाडु से 4 और कुत्ते लाए जाएंगे.
वायनाड में कब हुई लैंडस्लाइड
बता दें कि वायनाड में पहली लैंडस्लाइड 30 जुलाई की सुबह तड़के करीब 2 बजे हुई. इसके बाद सुबह करीब 4.10 बजे फिर एक बार लैंडस्लाइड हुई. इसके साथ ही तीसरी बार फिर लैंडस्लाइड हुई. लैंडस्लाइड में वायनाड के 4 गांव मलबे के ढेर में तब्दील हो गए, जिनमें से लोगों को निकालने के लिए लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है. रेस्क्यू ऑपरेशन की प्रगति के साथ मरने वालों का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है.
वायनाड समेत कई जिलों में स्कूल और कॉलेज बंद
मौसम विभाग ने केरल में भारी बारिश की आशंका जाहिर की है। इसे देखते हुए कई जिलों में स्कूल, ट्यूशन सेंटर, कॉलेज और दूसरे शैक्षणिक संस्थानों में छुट्टी की घोषणा कर दी गई है। वायनाड के साथ ही त्रिशूर, कोझिकोड, मल्लपुरम, कासरगोड और कन्नूर जिलों में स्कूल कॉलेजों में छुट्टियों का ऐलान कर दिया गया है। राज्य मौसम विभाग की ओर शनिवार को वायनाड जिले में बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। कई स्कूलों को रीलीफ कैंप में तब्दील कर दिया गया है।
राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने लिया जायजा
कल लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने वायनाड के चूरलामल्ला क्षेत्र का दौरा किया। राहुल गांधी ने कहा कि यह वायनाड के लिए एक भयानक त्रासदी है और यहां बहुत कुछ किया जाना बाकी है। केरल के स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने बताया कि मृतकों की संख्या अब 308 हो गई है।
तैराकी के माहिर लोग भी बचाव कार्य में शामिल
एनडीआरएफ, डीएसजी और एमईजी की संयुक्त टीम के साथ तीन स्थानीय लोग और वन विभाग का एक कर्मचारी भी खोज अभियान में शामिल हैं। 8 पुलिस थानों के पुलिसकर्मी और तैराकी के विशेषज्ञ भी खोज में मदद कर रहे हैं। हेलीकॉप्टरों के माध्यम से भी खोज अभियान चलाया जा रहा है। तटरक्षक और नौसेना के साथ वन विभाग के कर्मचारी उन जगहों पर खोज कर रहे हैं जहां शवों के तैरने की संभावना है।
डॉग स्क्वैड की मदद से ढूंढ़े जा रहे शव
सेना द्वारा निर्मित बैली ब्रिज के माध्यम से मुण्डकाई में 25 एम्बुलेंस पहुंचाई जाएंगी। दिल्ली से शनिवार को ड्रोन आधारित रडार लाया जाएगा जो मिट्टी में दबे शवों का पता लगाएगा। खोज अभियान में 6 कुत्तों की भी मदद ली जा रही है और आज तमिलनाडु से 4 और कुत्ते लाए जाएंगे।
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मुंडक्कई क्षेत्र में बड़े पैमाने पर तलाश और बचाव अभियान जारी है। यह इलाका मंगलवार को बड़े पैमाने पर भूस्खलन से प्रभावित हुआ था।
बचाव कर्मियों ने शुक्रवार को पाया कि परिवार भूस्खलन के बाद अलग-थलग पड़ गया था क्योंकि उनका घर क्षेत्र के बाकी हिस्सों से कट गया था। इस परिवार में दो पुरुष और दो महिलाएं हैं।
सेना के एक जनसंपर्क अधिकारी ने बताया कि परिवार को हवाई मार्ग से निकाला जाएगा।
सूत्रों ने कहा कि फंसे हुए इस परिवार के रिश्तेदारों की सूचना पर बचाव दल इलाके में पहुंचा था।
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वायनाड में मंगलवार तड़के कुदरत का ऐसा कहर बरपा कि सैकड़ों जिंदगियां मौत के मुंह में समा गईं. कई घायल हैं और ऐसे लोगों की भी संख्या काफी बड़ी है जो परिवार से अलग हो गए हैं, अकेले रह गए हैं और बिछड़ गए हैं. बड़ी संख्या में लोग लापता भी हुए हैं और इनमें से कई ऐसे हैं, जिनकी जीवित बचे रह जाने की उम्मीद कम ही है. आंकड़ों में बात करें तो अब तक 256 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है. लैंडस्लाइड के कारण 4 गांव मलबे में तब्दील हो गए हैं और अब वहां कुछ नहीं बचा है.
इस भीषण आपदा को लेकर इसरो ने भी चिंता जताई है और अपनी एक स्टडी में कहा है कि वायनाड में जितने बड़े हिस्से पर लैंडस्लाइड का प्रभाव पड़ा है, वह भूखंड इतना बड़ा है कि इस एरिया में 13 से अधिक इंटरनेशन फुटबॉल ग्राउंड बनाए जा सकते थे. लैंड स्लाइड के कारण इतना बड़ा भूखंड इरुवाझिनझी नदी में समा गया है और इसी हिस्से पर बसे लोग मलबों के साथ बह गए. केरल के वायनाड के तीन गांवों में 250 से अधिक लोगों की मौत हो गई है.
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने भूस्खलन वाले क्षेत्र का एरियल सर्वे किया. सैटेलाइट डेटा पर बेस्ड असेसमेंट में सामने आया कि लैंडस्लाड में लगभग 86,000 वर्गमीटर एरिया धसकते हुए मलबे में तब्दील हो गया. फीफा के नियमों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय खेलों की मेजबानी के लिए फुटबॉल मैदान का आकार कम से कम 6,400 वर्गमीटर होना चाहिए. इस तरह देखा जाय तो यहां 13 से अधिक मैदान बनाए जा सकते थे.
31 जुलाई को अपने RISAT-2B सैटेलाइट द्वारा कैप्चर की गई सैटेलाइट इमेजरी के आधार पर इसरो के विश्लेषण में कहा गया है कि भूस्खलन से हुआ कीचड़, बड़े पत्थरों और उखड़े हुए पेड़ों के साथ लगभग 8 किमी तक बहता रहा और आखिरकार चेलियार नदी की एक सहायक नदी में गिर गया. इसरो ने कहा, "बहते आ रहे मलबे की तेज गति ने इरावानीफुज़ार नदी के मार्ग को चौड़ा कर दिया है, जिससे इसके किनारे टूट गए हैं."
आपदा में जो जीवित बचे वह इसकी विभीषिका बताते हुए अभी भी कांप उठते हैं. उन्होंने इस मलबे को कीचड़ की दीवार कहा है और उनका कहना है कि इसी के कारण सैकड़ों घर और कई बुनियादी ढांचे दफन हो गए.
इस आपदा के केंद्र में इरुवाझिंझी नदी है, जो मुंडक्कई से लगभग 3 किमी ऊपर पहाड़ियों से निकलती है. इसरो ने कहा कि भूस्खलन समुद्र तल से लगभग 1500 मीटर की ऊंचाई पर हुआ.
इंडिया टुडे की ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस (OSINT) टीम द्वारा किए गए इलाके के मानचित्रण से पता चला है कि आबादी वाले इलाकों के करीब पहुंचने पर नदी तेजी से और लगातार अपनी ऊंचाई खोती जा रही है. इसका मतलब यह भी है कि जैसे-जैसे यह नीचे की ओर बहती है इसकी धाराएं मजबूत होती जाती हैं. इसके रास्ते में पहला शहर, मुंडक्कई, लगभग 950 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है. इसका मतलब है कि नदी की ऊंचाई प्रोफ़ाइल लगभग 3 किमी की दूरी में लगभग 550 मीटर कम हो जाती है.
अधिकारियों ने कहा कि विथिरी में 48 घंटों में लगभग 57 सेमी बारिश हुई, जिससे विनाशकारी घटना हुई. इंडिया टुडे ने पहले रिपोर्ट किया था कि नदी में 2020 में भी इसी तरह का भूस्खलन-प्रेरित स्लश रन देखा गया था. सामने आई नई इसरो इमेजरी से पता चला है कि मंगलवार का भूस्खलन 2020 वाली जगह पर ही हुआ है, लेकिन इस बार यह काफी बड़ा और विभीषिका वाला था, जिससे नुकसान भी भीषण हुआ है.
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