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कैलिफोर्निया के गवर्नर गैविन न्यूज़म ने वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) 2026 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर तीखा हमला बोला। सेमाफ़ोर के बेन स्मिथ के साथ इंटरव्यू में न्यूज़म ने कहा कि अमेरिका आज “रूल ऑफ डॉन” के तहत जी रहा है, जहाँ लोकतंत्र की बुनियादी संस्थाएँ कमजोर पड़ गई हैं। न्यूज़म ने कहा, “समानांतर सत्ता की शाखाएं, कानून का राज और जन-सत्ता क्या आज का अमेरिका वही है?” उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस निष्क्रिय बनी हुई है और कानून का शासन कमजोर हो रहा है।
WEF के चौथे दिन हुई चर्चा में न्यूज़म ने अमेरिकी विश्वविद्यालयों, कानून फर्मों और कॉरपोरेट नेतृत्व पर भी निशाना साधा। उन्होंने प्रतीकात्मक तौर पर लाल नी-पैड्स दिखाते हुए कहा कि जैसे कुछ संस्थान प्रशासन के आगे झुक रहे हैं, वैसे ही ये पैड्स बिक रहे हैं हालाँकि उन्होंने किसी CEO का नाम नहीं लिया। दावोस के नियमित प्रतिभागी न्यूज़म को उनके तीखे और बहसात्मक भाषणों पर तालियाँ भी मिलीं। उन्होंने बताया कि दावोस आने का एक मकसद पूँजीवाद के भविष्य पर ट्रंप के दृष्टिकोण का विरोध करना है। इस बीच, ट्रंप ने अपने दावोस भाषण में न्यूज़म का ज़िक्र करते हुए उन्हें “गुड गाइ” कहा और पुराने अच्छे संबंधों की बात की।
हालांकि, न्यूज़म को एक तय फायरसाइड चैट के बावजूद US हाउस में प्रवेश नहीं मिला, जिस पर उन्होंने X पर तंज कसते हुए लिखा “एक बातचीत से इतना डर?” बाद में मिला VIP नाइटकैप का न्योता भी उन्होंने ठुकरा दिया। विवाद यहीं नहीं रुका। US ट्रेज़री सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने न्यूज़म पर व्यक्तिगत हमला करते हुए उन्हें “आत्ममुग्ध और आर्थिक रूप से अनभिज्ञ” कहा। हाल के वर्षों में न्यूज़म रिपब्लिकन नेताओं के मुखर आलोचक रहे हैं और फ्लोरिडा गवर्नर रॉन डीसैंटिस से भी उनकी टकराहट चर्चित रही है।
दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) 2025 में भारत ने अपनी आर्थिक ताकत का प्रदर्शन करते हुए 20 लाख करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्ताव हासिल किए। इन निवेशों से देश में तेजी से विकास और करोड़ों रोजगार के अवसर सृजित होने की उम्मीद है।
इस कड़ी में महाराष्ट्र ने सबसे बड़ी सफलता हासिल की। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में राज्य ने ₹15.7 लाख करोड़ के 61 समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए जिससे 16 लाख से अधिक रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है। इसके अलावा, तेलंगाना ने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के नेतृत्व में ₹1.80 लाख करोड़ के 20 समझौतों पर हस्ताक्षर किए। केरल और उत्तर प्रदेश ने भी अपनी महत्वाकांक्षी योजनाओं को प्रस्तुत कर निवेशकों को आकर्षित किया।
आईटी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी इंफोसिस ने हैदराबाद में अपनी उपस्थिति बढ़ाने और 17,000 नए रोजगार सृजित करने की घोषणा की। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने भी विभिन्न वैश्विक कंपनियों के सीईओ से मुलाकात कर राज्य में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा की।
केंद्रीय रेल और इलेक्ट्रॉनिक्स व आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शिखर सम्मेलन में भारत के संतुलित विकास मॉडल पर जोर दिया। उन्होंने “मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड” की रणनीति के तहत भारत की उपलब्धियों को उजागर किया। वैष्णव ने कहा कि भारत जल्द ही सेमीकंडक्टर उद्योग के शीर्ष तीन डेस्टिनेशन में शामिल हो सकता है।
वैष्णव ने भारत के उभरते आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सेक्टर और वैश्विक विनिर्माण में उसकी भूमिका को भी उजागर किया। उन्होंने भारत को “यूज केस कैपिटल” बनाने की दिशा में काम करने और भारतीय कार्यबल को नई तकनीकों के लिए कुशल बनाने की सरकार की प्रतिबद्धता पर जोर दिया।
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आगे कहा कि फोरम को अधिक मानव-केंद्रित, ग्रह-अनुकूल और लचीले भविष्य को आकार देने में इसके भागीदार के रूप में कार्य करने पर गर्व है। सी4आईआर इंडिया को अक्टूबर 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लॉन्च किया गया था, जिसका उद्देश्य भारत में उभरती टेक्नोलॉजी को अपनाने और जिम्मेदारी से उन्हें बढ़ावा देने पर है।
वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम और नीति आयोग के बीच सहयोग से शुरू किए गए इस केंद्र का शुभारंभ चौथी औद्योगिक क्रांति के लिए डब्ल्यूईएफ के केंद्रों के वैश्विक नेटवर्क का हिस्सा है। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के प्रबंध निदेशक जेरेमी जुर्गेंस ने कहा, "पिछले छह वर्षों में सी4आईआर इंडिया मल्टीस्टेकहोल्डर सहयोग के लिए एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभरा है और इसने बेहतर आजीविका और स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच के माध्यम से 12.5 लाख नागरिकों के जीवन में सुधार किया है।"
जुर्गेंस ने कहा, सी4आईआर इंडिया का विस्तार जारी है और यह अब एआई, जलवायु तकनीक और अंतरिक्ष तकनीक जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।"
सी4आईआर इंडिया का लक्ष्य अपनी प्रमुख पहलों और आगामी परियोजनाओं को आगे बढ़ाते हुए 1 करोड़ नागरिकों तक पहुँचना है। इनमें ‘एआई फॉर इंडिया’ पहल शामिल है, जिसका उद्देश्य सामाजिक लाभ के लिए एआई की क्षमता का उपयोग करना है। वहीं, ‘स्पेस इकोनॉमी’ पहल का उद्देश्य भारत को स्पेस टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में अग्रणी देश के रूप में स्थापित करना है। इसके अलावा सी4आईआर इंडिया का ‘क्लाइमेट टेक्नोलॉजी’ प्रोग्राम, क्लाइमेट-स्मार्ट शहरी केंद्रों को विकसित करने पर ध्यान केंद्रित करेगा।
20-25 जनवरी को दावोस में होने वाली डब्ल्यूईएफ की वार्षिक बैठक से पहले जारी की गई रिपोर्ट में कहा गया कि वैश्विक स्तर पर 20 प्रतिशत की तुलना में भारत में 35 प्रतिशत नियोक्ता सोचते हैं कि सेमीकंडक्टर और कंप्यूटिंग तकनीकों को अपनाने से उनके परिचालन में बदलाव आएगा। वहीं, वैश्विक स्तर पर 12 प्रतिशत की तुलना में 21 प्रतिशत भारतीय नियोक्ता सोचते हैं क्वांटम और एन्क्रिप्शन तकनीकों को अपनाने से उनके परिचालन में भी बदलाव आएगा।
रिपोर्ट में कहा गया है, "भारत के तेजी से बढ़ते जॉब रोल्स में, बिग डेटा स्पेशलिस्ट, एआई-मशीन लर्निंग स्पेशलिस्ट और सिक्योरिटी मैनेजमेंट स्पेशलिस्ट शामिल हैं। जो कि ग्लोबल ट्रेंड से जुड़ा है।" भारत में काम करने वाली 67 प्रतिशत कंपनियों से यह भी अपेक्षा की जाती है कि वे डायवर्स टैलेंट पूल का इस्तेमाल करें और डिग्री आवश्यकताओं को हटाकर स्किल-बेस्ड हायरिंग (कौशल आधारित नौकरी पर रखने) को अपनाएं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि एआई कौशल की मांग को लेकर विश्व स्तर पर तेजी आई है, जिसमें भारत और अमेरिका सबसे आगे हैं। अमेरिका में, मांग मुख्य रूप से व्यक्तिगत उपयोगकर्ताओं द्वारा संचालित होती है, जबकि भारत में, कॉर्पोरेट स्पॉन्सरशिप जेनएआई ट्रेनिंग को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि डिजिटल एक्सेस में वृद्धि, भू-राजनीतिक तनाव और क्लाइमेट मिटिगेशन प्रयास प्राथमिक ट्रेंड होंगे जो 2030 तक भविष्य की नौकरियों को आकार देंगे। यह रिपोर्ट 1,000 से अधिक कंपनियों के दृष्टिकोणों को एक साथ लाती है, जो सामूहिक रूप से वैश्विक स्तर पर 14 मिलियन से अधिक श्रमिकों को रोजगार देती हैं।
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