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पश्चिमी एशिया में बढ़ते संघर्ष के बीच नई दिल्ली में सोमवार को उच्चस्तरीय बैठक हुई। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी शामिल हुए। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजित डोभाल और सीडीएस अनिल चौहान के साथ बैठक की। कुछ देर बाद प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बैठक में पहुंचे। इससे पहले, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पश्चिमी एशिया के हालातों पर संसद के दोनों सदन (लोकसभा और राज्यसभा) में वक्तव्य दिया। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पश्चिम एशिया में बदलते हालात पर करीब से नजर रख रहे हैं। गल्फ देशों में भारी संख्या में भारतीय नागरिक रहते हैं। ताजा हालात को देखते हुए भारतीय नागरिकों को सुरक्षित भारत लाने का ऑपरेशन तेजी से जारी है।
उन्होंने कहा, "सरकार इस समय भारतीय नागरिकों को सपोर्ट करने के लिए प्रतिबद्ध है। लगभग 67,000 नागरिकों की सुरक्षित वापसी हुई है। आगे भी पश्चिमी एशिया से लोगों को वापस लाने की पूरी कोशिश की जा रही है।" जयशंकर ने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक रहते और काम करते हैं, इसलिए यह लड़ाई भारत के लिए खास चिंता की बात है। उन्होंने बताया, "हालात की गंभीरता को देखते हुए 1 मार्च को प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में कैबिनेट सुरक्षा समिति (सीसीएस) की मीटिंग हुई। इसमें ईरान में हुए एयरस्ट्राइक और उसके बाद कई खाड़ी देशों में हुए हमलों के बारे में जानकारी दी गई। सीसीएस इस इलाके में भारतीय समुदाय की सुरक्षा को लेकर चिंतित थी। इसने इलाके की सुरक्षा और आर्थिक और कमर्शियल गतिविधियों पर पड़ने वाले असर पर भी ध्यान दिया।"
विदेश मंत्री ने कहा, "लड़ाई लगातार बढ़ रही है और इलाके में सुरक्षा की हालत काफी खराब हो गई है। हमने देखा है कि असल में, लड़ाई दूसरे देशों में भी फैल गई है और तबाही और मौतें बढ़ रही हैं। पूरे इलाके में सामान्य जीवन और आर्थिक गतिविधियों पर साफ असर पड़ा है और कुछ मामलों में तो रुक भी गई हैं। इसलिए हमने 3 मार्च को बातचीत और डिप्लोमेसी की अपनी अपील दोहराई और लड़ाई को जल्द खत्म करने की बात कही। मुझे यकीन है कि पूरा सदन भी जानमाल के नुकसान पर दुख जताने में मेरे साथ है।"
]]>पश्चिम एशिया में गहराते सैन्य तनाव और कई देशों द्वारा अपने हवाई क्षेत्र को बंद करने का सीधा असर देश की राजधानी के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (आईजीआई) हवाई अड्डे पर पड़ा है। शुक्रवार को सुरक्षा कारणों और रूट डायवर्जन के चलते दिल्ली से संचालित होने वाली 104 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद कर दी गईं, जिससे हजारों यात्रियों का सफर अधर में लटक गया।
वैकल्पिक उड़ानों की मांग रहे जानकारी
प्राप्त जानकारी के अनुसार, रद की गई कुल उड़ानों में 62 प्रस्थान और 42 आगमन की उड़ाने शामिल हैं। विशेष रूप से खाड़ी देशों की ओर जाने वाली उड़ानों पर इसका व्यापक असर देखा जा रहा है। टर्मिनल-3 पर सुबह से ही यात्रियों की भारी भीड़ जमा हो गई और एयरलाइंस के काउंटरों पर लोग वैकल्पिक उड़ानों की जानकारी के लिए जद्दोजहद करते नजर आए।
प्रमुख एयरलाइंस की 168 उड़ानें प्रभावित हुईं
पश्चिम एशिया के एयरस्पेस में लगी पाबंदियों के कारण भारत की प्रमुख एयरलाइंस को अपनी सेवाएं सीमित करनी पड़ी हैं। इसके कारण देश की प्रमुख एयरलाइंस की 168 उड़ानें प्रभावित हुईं, इन उड़ानों ने अपने निर्धारित समय से या तो देर से उड़ान भरी या उन्हें डायवर्ट कर दिया गया या रूट बदलकर दूसरे रूट से सफर करनी पड़ी जिससे गंतव्य तक पहुंचने में अधिक समय लगा।
इसका खामियाजा यात्रियों को भोगना पड़ा। इसमें इंडिगो एयरलाइन की लगभग 72 उड़ानें, एयर इंडिया समूह की करीब 31 और एयर इंडिया एक्सप्रेस की लगभग 55 उड़ानें देरी का शिकार हुई हैं। ये उड़ानें मुख्य रूप से दुबई, अबू धाबी, दोहा, कुवैत और बहरीन जैसे शहरों के लिए निर्धारित थीं।
यूरोप जाने वाले यात्रियों की बढ़ी दूरी
हवाई क्षेत्र बंद होने के कारण यूरोप और अमेरिका जाने वाली उड़ानों को अब लंबे और वैकल्पिक रास्तों से भेजा जा रहा है। इस मार्ग परिवर्तन की वजह से यात्रा के समय में 3 से 5 घंटे की वृद्धि हो गई है। ईंधन की अधिक खपत और क्रू मेंबर्स के वर्किंग आवर्स के चलते कई लंबी दूरी की उड़ानों के समय में भी बदलाव किया गया है।
अचानक उड़ानें रद होने से उपजी स्थिति को देखते हुए एयरलाइंस ने यात्रियों को फ्री री-शेड्यूलिंग (बिना अतिरिक्त शुल्क के टिकट बदलने) या फुल रिफंड का विकल्प दिया है। हालांकि, यात्रियों के लिए परेशानी का कारण है कि पीक सीजन होने के कारण दूसरी उड़ानों में सीटें मिलना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का शेड्यूल अस्थिर
उधर, दिल्ली एयरपोर्ट प्रबंधन (डायल) ने एक आधिकारिक एडवायजरी जारी कर यात्रियों से अपील की है कि वे घर से निकलने से पहले अपनी संबंधित एयरलाइन की वेबसाइट या मोबाइल ऐप पर लाइव फ्लाइट स्टेटस जरूर चेक करें। अधिकारियों का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक स्थिति सामान्य नहीं होती, तब तक अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का शेड्यूल अस्थिर रह सकता
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