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मध्य प्रदेश में महिला आरक्षण (Women Reservation) को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच खींचतान जारी है। इसी उद्दे को लेकर सोमवार को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया गया। इसमें सीएम मोहन यादव 'नारी शक्ति वंदन' अधिनियम के तहत परिसीमन के आधार पर महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का संकल्प पेश किया। संकल्प पर चर्चा की शुरूआत राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कृष्णा गौर ने की।
संकल्प का समर्थन करते हुए इसे देश की आधी आबादी के अधिकार, सम्मान और भागीदारी से जुड़ा ऐतिहासिक कदम बताया। गौर ने इस दौरान कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों पर निशाना जमकर निशाना साधा। उन्होंने कांग्रेस को कौरव बताया और कहा कि- महिलाएं उन्हें कभी माफ नहीं करेंगी। कृष्णा गौर ने इसके बाद आरोप लगाया कि कांग्रेस में महिला आरक्षण को लेकर 3 भ्रामक दावे किए है।
विपक्ष पर साधा निशाना, कहा- उन्होंने तोड़ा महिलाओं का दिल
मंत्री कृष्णा गौर ने अपने संबोधन में कांग्रेस और विपक्षी दलों पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि ब महिलाओं को राजनीतिक रूप से सशक्त बनाने के लिए संसद में संशोधन विधेयक लाया गया था, तब पूरे देश की महिलाओं को उम्मीद जगी थी लेकिन कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने मनगढ़ंत और तर्कहीन कारणों के आधार पर इस विधेयक को पारित नहीं होने दिया। यह केवल विधेयक को गिराना नहीं था, बल्कि देश और प्रदेश की करोड़ों महिलाओं के मान-सम्मान पर प्रहार था।
ओबीसी के मुद्दे पर भी कांग्रेस को घेरा
कृष्णा गौर ने स्वयं को ओबीसी वर्ग की महिला बताते हुए कहा कि सदन में विपक्ष के द्वारा
यह दलील दी गई कि इस वर्ग को आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा, लेकिन कांग्रेस ने कभी भी ओबीसी वर्ग का वास्तविक समर्थन नहीं किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा भ्रम फैलाने का काम किया है, जबकि वर्तमान सरकार महिलाओं और पिछड़े वर्गों को वास्तविक अधिकार देने के लिए प्रतिबद्ध है।
कौरवों का उदाहरण देकर दी चेतावनी
अपने भाषण के अंत में कृष्णा गौर ने महाभारत का उदाहरण देते हुए विपक्ष को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि- भगवान श्रीकृष्ण कौरवों को समझाने गए थे, लेकिन उन्होंने बात नहीं मानी और परिणाम महाभारत के रूप में सामने आया। आज फिर एक यदुवंशी मोहन आपको समझाने की कोशिश कर रहे हैं, यदि आप नहीं समझे तो परिणाम भी वैसा ही होगा। महिलाएं आपको कभी माफ नहीं करेंगी। गौर ने विपक्ष से अपील की कि वह दलगत राजनीति से ऊपर उठकर इस संकल्प का समर्थन करे।
नारी शक्ति संशोधन विधेयक पर विधानसभा में चर्चा के दौरान राज्यमंत्री कृष्णा गौर कहा कि कांग्रेस ने इस विधेयक को रोकने के लिए भ्रामक और तर्कहीन दलीलों का सहारा लिया, लेकिन उनके सभी दावों की सच्चाई सामने आ गई।
मंत्री ने कहा कि कांग्रेस का पहला भ्रम यह था कि इस प्रस्ताव से दक्षिण भारत के राज्यों को सीटों का नुकसान होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार के प्रस्ताव में सभी राज्यों में सीटों की संख्या 50% के समान अनुपात से बढ़ाने का प्रावधान है, जिससे किसी भी राज्य को नुकसान नहीं होगा।
दूसरे मुद्दे पर उन्होंने कांग्रेस को घेरते हुए कहा कि विपक्ष यह भ्रम फैला रहा है कि ओबीसी महिलाओं को आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा। इस पर उन्होंने खुद का उदहारण दिया और कहा कि अगर किसी दल ने ओबीसी समाज को सम्मान दिया है, तो वह केवल भाजपा है। कांग्रेस ने तो कभी उन्हें संगठन और सत्ता में उचित प्रतिनिधित्व नहीं दिया।
तीसरे भ्रामक दावे को लेकर उन्होंने कांग्रेस पर मुस्लिम तुष्टिकरण”का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि संविधान में धर्म के आधार पर आरक्षण का कोई प्रावधान नहीं है, लेकिन कांग्रेस इस मुद्दे को जानबूझकर उठा रही है।
महिला आरक्षण को 2029 के लोकसभा चुनाव से ही लागू करने की तैयारी है। इसके लिए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सीटों में 50 फीसदी का इजाफा किया जा रहा है। अब तक 543 सांसद देश के लिए नीतियां बनाते थे और अब इनकी संख्या 816 हो जाएगी। फिर भी उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, बिहार और बंगाल जैसे राज्य पहले की तरह ही ताकतवर होंगे और उनके सांसदों की संख्या का अनुपात वैसा ही रहेगा। हालांकि अब कुल सीटों का ही नंबर बढ़ जाने के चलते देश के 6 राज्यों में ही इतनी सीटें होंगी कि आंकड़ा 400 पार पहुंच जाएगा।
इन राज्यों में उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बंगाल, बिहार, तमिलनाडु और मध्य प्रदेश शामिल हैं। उत्तर प्रदेश में फिलहाल 80 सांसद हैं और अब यहां से 120 सांसद चुनकर दिल्ली जाएंगे। इसी तरह बंगाल का आंकड़ा 42 से बढ़कर 63 होगा तो वहीं महाराष्ट्र में 48 की बजाय 72 सांसद चुने जाएंगे। बिहार से 40 के स्थान पर 60 लोकसभा एमपी होंगे तो वहीं मध्य प्रदेश का आंकड़ा 29 से बढ़कर 44 हो जाएगा। इस तरह इन 6 राज्यों की ही सीटों को मिला लें तो आंकड़ा 418 का होता है। ऐसे में केंद्र सरकार किस दल या गठबंधन की होगी, यह तय करने में इन 6 राज्यों का महत्वपूर्ण रोल होगा।
अब भी राजनीतिक जुमले के तौर पर कहा जाता है कि लखनऊ से ही दिल्ली का रास्ता तय होता है। इस स्थिति में कोई बदलाव अब भी नहीं होगा। इसके अलावा महाराष्ट्र, बंगाल, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश और बिहार जैसे राज्य भी पहले की तरह ही ताकतवर बने रहेंगे। इस दौरान सरकार ने यह भी साफ कर दिया है कि साउथ इंडिया के राज्यों की स्थिति में कोई बदलाव नहीं होगा। खुद होम मिनिस्टर अमित शाह ने गुरुवार को लोकसभा में बताया कि 28 सीटों वाले कर्नाटक में अब 42 सांसद चुने जाएंगे। इसके आंध्र प्रदेश की संख्या 25 से बढ़कर 38 हो जाएगी और केरल में 20 की बजाय 30 सांसद रहेंगे।
एक तिहाई सीटें पर कैसे लागू होगा महिलाओं का आरक्षण
बता दें कि महिला आरक्षण लागू होते ही सभी राज्यों की एक तिहाई सीटों से महिलाएं ही चुनी जाएंगी। इस तरह यूपी में 120 में से 40 सांसद महिला होंगी। इसके अलावा बिहार में यह आंकड़ा 20 का होगा। इस आरक्षण को रोटेशन के तहत लागू करने की तैयारी है। वहीं एससी और एसटी वर्ग की महिलाओं को उस वर्ग की तय सीटों में से ही 33 फीसदी की हिस्सेदारी दी जाएगी। हालांकि विपक्ष का कहना है कि मुस्लिम और ओबीसी वर्ग की महिलाओं के लिए भी कुछ प्रावधान किया जाए।
]]>महिला आरक्षण को 2029 के लोकसभा चुनाव से ही लागू करने की तैयारी है। इसके लिए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सीटों में 50 फीसदी का इजाफा किया जा रहा है। अब तक 543 सांसद देश के लिए नीतियां बनाते थे और अब इनकी संख्या 816 हो जाएगी। फिर भी उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, बिहार और बंगाल जैसे राज्य पहले की तरह ही ताकतवर होंगे और उनके सांसदों की संख्या का अनुपात वैसा ही रहेगा। हालांकि अब कुल सीटों का ही नंबर बढ़ जाने के चलते देश के 6 राज्यों में ही इतनी सीटें होंगी कि आंकड़ा 400 पार पहुंच जाएगा।
इन राज्यों में उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बंगाल, बिहार, तमिलनाडु और मध्य प्रदेश शामिल हैं। उत्तर प्रदेश में फिलहाल 80 सांसद हैं और अब यहां से 120 सांसद चुनकर दिल्ली जाएंगे। इसी तरह बंगाल का आंकड़ा 42 से बढ़कर 63 होगा तो वहीं महाराष्ट्र में 48 की बजाय 72 सांसद चुने जाएंगे। बिहार से 40 के स्थान पर 60 लोकसभा एमपी होंगे तो वहीं मध्य प्रदेश का आंकड़ा 29 से बढ़कर 44 हो जाएगा। इस तरह इन 6 राज्यों की ही सीटों को मिला लें तो आंकड़ा 418 का होता है। ऐसे में केंद्र सरकार किस दल या गठबंधन की होगी, यह तय करने में इन 6 राज्यों का महत्वपूर्ण रोल होगा।
अब भी राजनीतिक जुमले के तौर पर कहा जाता है कि लखनऊ से ही दिल्ली का रास्ता तय होता है। इस स्थिति में कोई बदलाव अब भी नहीं होगा। इसके अलावा महाराष्ट्र, बंगाल, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश और बिहार जैसे राज्य भी पहले की तरह ही ताकतवर बने रहेंगे। इस दौरान सरकार ने यह भी साफ कर दिया है कि साउथ इंडिया के राज्यों की स्थिति में कोई बदलाव नहीं होगा। खुद होम मिनिस्टर अमित शाह ने गुरुवार को लोकसभा में बताया कि 28 सीटों वाले कर्नाटक में अब 42 सांसद चुने जाएंगे। इसके आंध्र प्रदेश की संख्या 25 से बढ़कर 38 हो जाएगी और केरल में 20 की बजाय 30 सांसद रहेंगे।
एक तिहाई सीटें पर कैसे लागू होगा महिलाओं का आरक्षण
बता दें कि महिला आरक्षण लागू होते ही सभी राज्यों की एक तिहाई सीटों से महिलाएं ही चुनी जाएंगी। इस तरह यूपी में 120 में से 40 सांसद महिला होंगी। इसके अलावा बिहार में यह आंकड़ा 20 का होगा। इस आरक्षण को रोटेशन के तहत लागू करने की तैयारी है। वहीं एससी और एसटी वर्ग की महिलाओं को उस वर्ग की तय सीटों में से ही 33 फीसदी की हिस्सेदारी दी जाएगी। हालांकि विपक्ष का कहना है कि मुस्लिम और ओबीसी वर्ग की महिलाओं के लिए भी कुछ प्रावधान किया जाए।
]]>विधानसभा में होंगी 114 महिलाएं
प्रस्तावित बदलावों के तहत, मध्य प्रदेश विधानसभा की कुल सदस्य संख्या 230 से बढ़ाकर 345 किए जाने की योजना है। इस विस्तारित सदन में महिलाओं के लिए 114 सीटें आरक्षित होंगी, जो वर्तमान में मात्र 27 महिला विधायकों की तुलना में एक बड़ी छलांग है।सीटों की संख्या बढ़ने के साथ ही सरकार बनाने के लिए जादुई आंकड़े में भी बदलाव आएगा। अब राज्य में बहुमत साबित करने के लिए 116 के बजाय 174 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होगी। यह बदलाव न केवल छोटे दलों की भूमिका को प्रभावित करेगा, बल्कि बड़े दलों को भी अपनी चुनावी रणनीति नए सिरे से तैयार करने पर मजबूर करेगा।
कैबिनेट का भी होगा विस्तार
परिसीमन का असर सिर्फ सदन की सीटों तक सीमित नहीं रहेगा। नियमों के मुताबिक, विधानसभा की कुल संख्या का 15% हिस्सा मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है। ऐसे में प्रदेश के कैबिनेट मंत्रियों की अधिकतम संख्या 35 से बढ़कर 52 हो जाएगी। यानी आने वाले समय में मध्य प्रदेश में मंत्रियों की एक बड़ी फौज नजर आएगी।
लोकसभा के मोर्चे पर भी एमपी की ताकत बढ़ेगी। राज्य से लोकसभा सांसदों की संख्या 29 से बढ़कर 43 करने का प्रस्ताव है। इनमें महिला सांसदों की संख्या भी मौजूदा 6 से बढ़कर 14 होने की उम्मीद है। यह पूरा ढांचा 31 मार्च 2029 के बाद होने वाले चुनावों से प्रभावी होने की संभावना है।
| विधानसभा सीटें | 230 | 345 | +115 |
| बहुमत का आंकड़ा | 116 | 174 | +58 |
| महिला विधायक (आरक्षित) | 27 (अनुमानित) | 114 | ऐतिहासिक वृद्धि |
| लोकसभा सीटें | 29 | 43 | +14 |
| मंत्री परिषद की क्षमता | 35 | 52 तक | +17 |
बीजेपी सरकार 2034 के बजाय, देश में महिला आरक्षण अधिनियम को 2029 से लागू करने के बारे में सोच रही है. केंद्र (लोकसभा) और राज्य विधानसभाओं में महिला आरक्षण लाने पर विचार-विमर्श जारी है।
इंडिया टुडे/आज तक को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, सीटों में बढ़ोतरी के लिए 50% 'स्ट्रेट जैकेट फॉर्मूला' प्रस्तावित है. गृह मंत्री अमित शाह 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' को लागू करने की प्रक्रियाओं को पारित कराने के लिए पार्टियों के छोटे समूहों के साथ बैठकें कर रहे हैं।
23 मार्च को, गृह मंत्री ने NCP-SP, शिवसेना (UBT), AIMIM और YSRCP के सदस्यों के साथ बैठक की. BRS आखिरी समय में सूचना मिलने के कारण बैठक में शामिल नहीं हो सकी।
सुप्रिया सुले, अरविंद सावंत, असदुद्दीन ओवैसी और मिधुन रेड्डी उन सदस्यों में शामिल थे जिन्होंने गृह मंत्री के साथ बैठक में भाग लिया. सरकार तीन बड़े संशोधन की तैयारी में है. सरकार की राय है कि 2034 की समय सीमा के बजाय, महिला आरक्षण को 2029 के लोकसभा चुनावों से ही लागू किया जाना चाहिए।
सदस्यों को बताया गया कि केंद्र को 2027 तक जनगणना पूरी होने की उम्मीद थी. इससे 2028 तक परिसीमन प्रक्रिया पूरी हो जाती और दूसरी प्रक्रियाएं उसके बाद होतीं. हालांकि, अब 2011 की जनगणना को आधार माना जा सकता है।
50% सीटें बढ़ाने का फॉर्मूला तैयार!
इसके तहत 50% स्ट्रेट जैकेट फॉर्मूला, महिलाओं के लिए वर्टिकल आरक्षण हो. अहम बात ये है कि सरकार ने लोकसभा और विधानसभा सीटों में सीधे 50% की बढ़ोतरी करने का प्रस्ताव दिया है. इससे लोकसभा की वर्तमान संख्या में 50% का इजाफा हो सकता है और संबंधित राज्यों में विधानसभाओं की संख्या में भी 50% की बढ़ोतरी की जाएगी।
महिला आरक्षण लागू होने के बाद लोकसभा की बढ़ी हुई संख्या (लगभग 813/814) में से 33% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी. इन 33% आरक्षित सीटों के भीतर एससी/एसटी (SC/ST) आरक्षण को अलग से लागू किया जाएगा।
संवैधानिक संशोधनों के पारित होने के बाद लोकसभा और विधानसभा सीटों की परिसीमन प्रक्रिया शुरू हो सकती है. यूबीटी, एनसीपी-एसपी, वाईएसआरसीपी जैसी पार्टियों के सदस्यों को सूचित किया गया कि देश में परिसीमन की प्रक्रिया लंबित है. पिछले परिसीमन के 25 साल पूरे होने के बाद, सीटों के परिसीमन (और पुनरीक्षण) की प्रक्रिया शुरू की जानी थी।
2029 में लागू हो सकता है 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम'
लोकसभा और विधानसभा के लिए परिसीमन प्रक्रिया एक साथ शुरू की जा सकती है. बैठक में शामिल सदस्यों ने राज्यों पर प्रभाव, विधानसभा और लोकसभा क्षेत्रों के परिसीमन के मानदंडों के संबंध में कई सवाल उठाए. सूत्रों ने बताया कि एनसीपी-एसपी ने पूछा कि क्या ये बदलाव 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले होने वाले विधानसभा चुनावों में भी लागू किए जाएंगे?
कहा जा रहा है कि वाईएसआरसीपी ने आंध्र प्रदेश में लोकसभा और विधानसभा सीटों के इजाफे के बारे में इन बदलावों के प्रभाव पर सवाल उठाए हैं. एआईएमआईएम ने उस फॉर्मूले पर चिंता जाहिर की जिसका इस्तेमाल नए निर्वाचन क्षेत्रों को बनाने के लिए किया जा सकता है, विशेष रूप से उन मामलों में जहां आदिवासी, एससी और मुस्लिम मतदाताओं की संख्या काफी ज्यादा है।
दक्षिण भारत का परिसीमन पर ऐतराज
दक्षिण भारत के राजनीतिक दलों को जनसंख्या से जुड़े लोकसभा और विधानसभा सीटों के परिसीमन पर कड़ा ऐतराज रहा है. डीएमके, टीडीपी, वाईएसआरसीपी जैसी पार्टियों की राय है कि केंद्र सरकार के परिवार नियोजन कार्यक्रमों के बेहतर तरीके से लागू करने के लिए दक्षिण के राज्यों को सजा नहीं दी जानी चाहिए।
इसके अलावा, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन और उनकी पार्टी डीएमके ने 2026 के जनसंख्या आधारित परिसीमन योजनाओं का विरोध करने के लिए JAC (संयुक्त कार्रवाई समिति) मंच बनाया था. सीएम स्टालिन ने इस पर विचार-विमर्श के लिए पंजाब के सीएम भगवंत मान सहित गैर-बीजेपी हितधारकों को बुलाया था।
महिला आरक्षण को लागू करने के लिए सीटों में 50 प्रतिशत की सीधी बढ़ोतरी का फॉर्मूला और उससे जुड़ी परिसीमन प्रक्रिया इन चिंताओं को कम कर सकती है. दक्षिण के राज्यों के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, 'अगर ये जनसंख्या से जुड़ा नहीं है, तो दक्षिण के राज्यों और क्षेत्रीय दलों को परिसीमन का विरोध नहीं करना चाहिए. वरना आपने हमें बेहतर परिवार नियोजन के लिए सजा नहीं दी होती. हालांकि, परिसीमन फॉर्मूले के लागू होने से जुड़े सवाल अभी भी बने हुए हैं।
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बीजेपी सरकार 2034 के बजाय, देश में महिला आरक्षण अधिनियम को 2029 से लागू करने के बारे में सोच रही है. केंद्र (लोकसभा) और राज्य विधानसभाओं में महिला आरक्षण लाने पर विचार-विमर्श जारी है।
इंडिया टुडे/आज तक को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, सीटों में बढ़ोतरी के लिए 50% 'स्ट्रेट जैकेट फॉर्मूला' प्रस्तावित है. गृह मंत्री अमित शाह 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' को लागू करने की प्रक्रियाओं को पारित कराने के लिए पार्टियों के छोटे समूहों के साथ बैठकें कर रहे हैं।
23 मार्च को, गृह मंत्री ने NCP-SP, शिवसेना (UBT), AIMIM और YSRCP के सदस्यों के साथ बैठक की. BRS आखिरी समय में सूचना मिलने के कारण बैठक में शामिल नहीं हो सकी।
सुप्रिया सुले, अरविंद सावंत, असदुद्दीन ओवैसी और मिधुन रेड्डी उन सदस्यों में शामिल थे जिन्होंने गृह मंत्री के साथ बैठक में भाग लिया. सरकार तीन बड़े संशोधन की तैयारी में है. सरकार की राय है कि 2034 की समय सीमा के बजाय, महिला आरक्षण को 2029 के लोकसभा चुनावों से ही लागू किया जाना चाहिए।
सदस्यों को बताया गया कि केंद्र को 2027 तक जनगणना पूरी होने की उम्मीद थी. इससे 2028 तक परिसीमन प्रक्रिया पूरी हो जाती और दूसरी प्रक्रियाएं उसके बाद होतीं. हालांकि, अब 2011 की जनगणना को आधार माना जा सकता है।
50% सीटें बढ़ाने का फॉर्मूला तैयार!
इसके तहत 50% स्ट्रेट जैकेट फॉर्मूला, महिलाओं के लिए वर्टिकल आरक्षण हो. अहम बात ये है कि सरकार ने लोकसभा और विधानसभा सीटों में सीधे 50% की बढ़ोतरी करने का प्रस्ताव दिया है. इससे लोकसभा की वर्तमान संख्या में 50% का इजाफा हो सकता है और संबंधित राज्यों में विधानसभाओं की संख्या में भी 50% की बढ़ोतरी की जाएगी।
महिला आरक्षण लागू होने के बाद लोकसभा की बढ़ी हुई संख्या (लगभग 813/814) में से 33% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी. इन 33% आरक्षित सीटों के भीतर एससी/एसटी (SC/ST) आरक्षण को अलग से लागू किया जाएगा।
संवैधानिक संशोधनों के पारित होने के बाद लोकसभा और विधानसभा सीटों की परिसीमन प्रक्रिया शुरू हो सकती है. यूबीटी, एनसीपी-एसपी, वाईएसआरसीपी जैसी पार्टियों के सदस्यों को सूचित किया गया कि देश में परिसीमन की प्रक्रिया लंबित है. पिछले परिसीमन के 25 साल पूरे होने के बाद, सीटों के परिसीमन (और पुनरीक्षण) की प्रक्रिया शुरू की जानी थी।
2029 में लागू हो सकता है 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम'
लोकसभा और विधानसभा के लिए परिसीमन प्रक्रिया एक साथ शुरू की जा सकती है. बैठक में शामिल सदस्यों ने राज्यों पर प्रभाव, विधानसभा और लोकसभा क्षेत्रों के परिसीमन के मानदंडों के संबंध में कई सवाल उठाए. सूत्रों ने बताया कि एनसीपी-एसपी ने पूछा कि क्या ये बदलाव 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले होने वाले विधानसभा चुनावों में भी लागू किए जाएंगे?
कहा जा रहा है कि वाईएसआरसीपी ने आंध्र प्रदेश में लोकसभा और विधानसभा सीटों के इजाफे के बारे में इन बदलावों के प्रभाव पर सवाल उठाए हैं. एआईएमआईएम ने उस फॉर्मूले पर चिंता जाहिर की जिसका इस्तेमाल नए निर्वाचन क्षेत्रों को बनाने के लिए किया जा सकता है, विशेष रूप से उन मामलों में जहां आदिवासी, एससी और मुस्लिम मतदाताओं की संख्या काफी ज्यादा है।
दक्षिण भारत का परिसीमन पर ऐतराज
दक्षिण भारत के राजनीतिक दलों को जनसंख्या से जुड़े लोकसभा और विधानसभा सीटों के परिसीमन पर कड़ा ऐतराज रहा है. डीएमके, टीडीपी, वाईएसआरसीपी जैसी पार्टियों की राय है कि केंद्र सरकार के परिवार नियोजन कार्यक्रमों के बेहतर तरीके से लागू करने के लिए दक्षिण के राज्यों को सजा नहीं दी जानी चाहिए।
इसके अलावा, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन और उनकी पार्टी डीएमके ने 2026 के जनसंख्या आधारित परिसीमन योजनाओं का विरोध करने के लिए JAC (संयुक्त कार्रवाई समिति) मंच बनाया था. सीएम स्टालिन ने इस पर विचार-विमर्श के लिए पंजाब के सीएम भगवंत मान सहित गैर-बीजेपी हितधारकों को बुलाया था।
महिला आरक्षण को लागू करने के लिए सीटों में 50 प्रतिशत की सीधी बढ़ोतरी का फॉर्मूला और उससे जुड़ी परिसीमन प्रक्रिया इन चिंताओं को कम कर सकती है. दक्षिण के राज्यों के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, 'अगर ये जनसंख्या से जुड़ा नहीं है, तो दक्षिण के राज्यों और क्षेत्रीय दलों को परिसीमन का विरोध नहीं करना चाहिए. वरना आपने हमें बेहतर परिवार नियोजन के लिए सजा नहीं दी होती. हालांकि, परिसीमन फॉर्मूले के लागू होने से जुड़े सवाल अभी भी बने हुए हैं।
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