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यूपी के गोरखपुर में रविवार को हेलीकॉप्टर से जा रहे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नजर रविवार को कालेसर जीरो प्वाइंट चौराहा और गीडा क्षेत्र के बरहुआं चौराहे के पास महीनों से गिराए गए नगर निगम के कचरे के ढेर पर पड़ गई। मुख्यमंत्री ने इसका कड़ा संज्ञान लिया। उसके बाद नगर निगम ने छह बड़ी जेसीबी, तीन डीसीएम और छह डम्पर की मदद से बरहुआं चौराहे के आस-पास से कचरा जमुआड़ प्लाट पर निस्तारण के लिए भिजवाया।
रविवार को मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी भाजपा के जिला प्रशिक्षण वर्ग के उद्घाटन के लिए पहुंचे। कार्यक्रम खत्म कर सड़क मार्ग से कालेसर जीरो प्वाइंट होते हुए गीडा ऑफिस के पास बने हैलीपेड से हेलिकॉप्टर से रवाना हुए। इस दौरान उनकी नजर कालेसर और बरहुआ सड़क किनारे पड़े कचरे के ढेर पर पड़ी। इस पर उन्होंने नाराजगी व्यक्त की। उनकी नाराजगी के बाद वहां तुरंत डंपर भेजकर सफाई करवाई गई।
मौके पर पहुंचे अपर नगर आयुक्त
नगर आयुक्त अजय जैन के निर्देश पर अपर नगर आयुक्त प्रमोद कुमार बरहुआं चौराहे पर पहुंचे और कचरा उठा कर तत्काल जमुआड़ प्लाट पर निस्तारण के लिए भेजने का निर्देश दिया। उन्होंने हिन्दुस्तान को बताया कि सारा डम्प कचरा हटाया जा रहा है। मौके पर उपस्थित सफाई एवं खाद्य निरीक्षक आनंद कुमार ने बताया कि उच्चाधिकारियों के आदेश के बाद कचरा हटा कर जमुआड़ भेजा जा रहा है। उधर मौके पर उपस्थित ग्राम प्रधान नागेंद्र कुमार यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार व्यक्त किया कि उनके निर्देश पर तीन माह से दिक्कत झेल रहे नागरिकों को राहत मिली है।
नगर निगम का कचरा फ्रेश वेस्ट बायो ट्रामल प्लांट जमुआड में निस्तारित किया जाता है। लेकिन कुछ वाहन चालक इस कचरा को वहां ले जाने के बजाए बरहुआ पॉवर हाउस के आसपास सड़क के किनारे खाली गढ्ढों में पिछले तीन माह से डाल रहे थे। ग्राम प्रधान नागेंद्र कुमार यादव ने बताया कि शिकायत के बाद भी निगम ने कोई सुनवाई नहीं की। लेकिन रविवार को जब अचानक कचरा उठाने निगम की गाड़ियां पहुंचीं तो सभी हैरान रह गए। सीएम की सख्ती के बाद नगर निगम के इस कदम से स्थानीय नागरिकों ने राहत की सांस ली। सभी ने सीएम का आभार व्यक्त किया है।
महापौर, डॉ. मंगलेश कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि सीएम योगी आदित्यनाथ ने बरहुआं और कालेसर जीरो प्वाइंट पर गंदगी का स्वत: संज्ञान लिया था। कड़ी नाराजगी व्यक्त की। तत्काल दोनों स्थानों पर साफ सफाई कराई गई है। आगे ईधर-उधर कचरा न डाला जाए, इसका ध्यान रखा जाएगा।
]]>यूपी में बीते दिनों आई तेज आंधी, बारिश और आकाशीय बिजली से हुई धन-जनहानि के पीड़ितों को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर शुक्रवार को मुआवजा बांटा गया। विभिन्न जिलों में प्रभारी मंत्रियों ने पीड़ितों को धनराशि का चेक सौंपा और सरकार के उनके साथ खड़े होने का भरोसा दिलाया। प्रत्येक मृतक के परिजनों को चार लाख रुपये के अलावा राहत सामग्री के साथ-साथ विभिन्न योजनाओं का लाभ भी दिया गया।
लखीमपुर खीरी के मितौली तहसील के ग्राम जमुनिया कढ़ीले में 13 मई की रात आई तेज आंधी और बारिश ने एक परिवार की दुनिया उजाड़ दी। मकान की छत भरभराकर गिरी और उसके नीचे दबकर 40 वर्षीय रतिराम पुत्र दीना की दर्दनाक मौत हो गई। हादसे के बाद गुरुवार को मुख्यमंत्री के निर्देश पर गांव पहुंचे जिले के प्रभारी मंत्री नितिन अग्रवाल ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर ढांढस बंधाया। गांव पहुंचे प्रभारी मंत्री ने पूर्व सांसद जुगुल किशोर और डीएम अंजनी कुमार सिंह की मौजूदगी में मृतक की पत्नी और बच्चों को चार लाख रुपये की दैवीय आपदा सहायता, 6500 रुपये गृह अनुदान का डेमो चेक सौंपा।
इसी तरह हरदोई में उत्तर प्रदेश सरकार के समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं जनपद हरदोई के प्रभारी मंत्री असीम अरुण ने तहसील संडीला के ग्राम आंट मजरा आंट सांट में स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ पीड़ित परिवार से भेंट कर गहरी संवेदना प्रकट की। उन्होंने मौके पर उपस्थित मृतका की माता कमला पत्नी छोटे को बताया कि उनके खाते में राहत सहायता राशि 4 लाख रुपए भेज दी गई है। इस अवसर पर सांसद अशोक रावत व विधायक राम पाल वर्मा ने भी शोकाकुल परिवार को सांत्वना दी।
अंबेडकरनगर में गिरीश चंद्र यादव ने पीड़ितों से की मुलाकात
अम्बेडकरनगर में जिले के प्रभारी मंत्री गिरीश चंद्र यादव ने ग्राम कुढ़ा मोहम्मदगढ़ में आंधी-तूफान के कारण दीवार गिरने से सुकना देवी के असामयिक निधन पर उनके परिजनों से भेंट कर अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने बताया कि इस कठिन समय में परिवार को संबल प्रदान करने हेतु प्रदेश सरकार की ओर से निर्धारित आर्थिक सहायता चार लाख रुपये की राशि प्रदान कर दी गई।
मंत्री धर्मवीर प्रजापति ने दी राहत सामग्री
सम्भल में तेज आंधी-तूफान एवं वर्षा से उत्पन्न दैवीय आपदा के कारण थाना कैलादेवी के अन्तर्गत ग्राम गंगहेटा में विद्युत पोल तथा घर की दीवार गिरने से नेमवती तथा भगवान सिंहके चपेट में आने से मौत हो गयी थी। प्रभारी मंत्री/राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार होमगार्ड्स एवं नागरिक सुरक्षा धर्मवीर प्रजापति ने गांव जाकर पीड़ित परिवारों से मुलाकात की। परिजनों से भेंट कर शोक संवेदना व्यक्त करते हुए 4-4 लाख रुपये धनराशि खाते में पहुंचने के प्रमाणपत्र तथा आपदा राहत सामग्री प्रदान की। उनके साथ जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल तथा पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई भी थे।
मंत्री गुलाब देवी ने मृतक के परिजनों को 4-4 लाख के चेक सौंपे
बदायूं के बिसौली क्षेत्र में आंधी-तूफान पीड़ित परिवारों को प्रभारी मंत्री गुलाब देवी ने प्रत्येक मृतक के परिजनों को 4-4 लाख के चेक सौंपे। वहीं, बरेली में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) सहकारिता विभाग/प्रभारी मंत्री जेपीएस राठौर की अध्यक्षता में आज आपदा राहत राशि का वितरण कार्यक्रम आंवला तहसील के सभागार में हुआ। राज्यमंत्री द्वारा जनहानि होने पर देवकी और लीपी के परिवारीजनों के खातों में चार-चार लाख रुपये की सहायता राशि दी गयी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश के विकास का ग्रोथ इंजन बना है। विकास की प्रक्रिया बिना रुके, बिना डिगे, बिना थके व बिना झुके चलती रहेगी। 2017 के पहले प्रदेश का विकास रुका था। माफिया गरीबों की संपत्तियों पर कब्जा कर रहे थे।
सपा, बसपा व कांग्रेस के शासनकाल में अयोध्या में श्रीराम मंदिर व बनारस में काशी विश्वनाथ मंदिर का निर्माण नहीं हो पाता। यह पार्टियां कार्य में स्वयं बांधा बनी थी। इसी के चलते पश्चिम बंगाल की जनता ने भी इन्हें उखाड़ फेंका।
मुख्यमंत्री योगी अदित्यनाथ शुक्रवार नौतनवा में 208 करोड़ रुपये से अधिक की 79 परियोजनाओं का शिलान्यास व लोकार्पण करने के बाद उपस्थित लोगों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के चलते डीजल, पेट्रोल व एलपीली की सप्लाई पर व्यापक असर पड़ा है। प्रतिदिन भारत सरकार को हजारों करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है।
कहा कि इस समय विपक्ष के नाकारात्मक नेरेटिव से बचना है। हमें प्रधानमंत्री के साथ खड़े रहना है। छाेटे-छोटे प्रयास कर हम डीजल व पेट्रोल के दुरुपयोग को रोक सकते हैं। उन्होंने कहा कि डबल इंजन की सरकार में तेजी से विकास हो रहा है। सड़कें बेहतर हुईं हैं। शिक्षा व चिकित्सा के क्षेत्र में बेहतर कार्य हुए हैं।
महराजगंज सहित प्रदेश के सभी जिलों में मंदिरों का भी कायाकल्प कराया गया है। पहले यह रुपया कब्रिस्तान के बाउंड्रीवाल के निर्माण के लिए खर्च किया जाता था। पूर्ववर्ती सरकारों ने स्वास्थ्य सुविधाओं के विकास पर ध्यान नहीं दिया। इंसेफलाइटिस से पूर्वी उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में नौनिहाल प्रभावित होते थे। अब डलब इंजन की सरकार में उत्तर प्रदेश बीमारू प्रदेश नहीं रह गया है। यहां के लोगों को पहचान का संकट नहीं है। देश में सबसे अधिक एक्सप्रेस -वे, मैट्रो, एयरपोर्ट यूपी में है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत व नेपाल दोनों मित्र देश के रूप में साझी विरासत का प्रतिनिधित्व करते हैं। दोनों के बीच रोटी-बेटी का संबंध है। दोनों देशों के बीच बिना किसी बांधा के आवागमन होता है। सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण इस क्षेत्र का विकास आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि नौतनवा विधानसभा में भाजपा गठबंधन के प्रत्याशी को पहली बार विजय मिली। उसी कर्ज को चुकाने के लिए जो भी प्रस्ताव यहां के विधायक व सांसद द्वारा दिया जाता है, उसे तत्काल स्वीकृत दी जाती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 के पहले की सरकारों ने वनटांगिया परिवारों की कभी सुधि नहीं ली, लेकिन भाजपा सरकार ने उन्हें भूमि का मालिकाना हक दिलाने के साथ ही सभी अधिकार प्रदान किए।
इससे पहले नौतनवा के विधायक ऋषि त्रिपाठी ने मुख्यमंत्री कार्यक्रम स्थल पर स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। जिले के प्रभारी मंत्री दयाशंकर मिश्र दयालु, पनियरा विधायक ज्ञानेंद्र सिंह, सदर विधायक जयमंगल कन्नौजिया, पूर्व विधायक बजरंग बहादुर सिंह, भाजपा जिलाध्यक्ष संजय पांडेय, जिलाधिकारी गौरव सिंह सोगरवाल, पुलिस अधीक्षक शक्ति मोहन अवस्थी नौतनवा चेयरमैन बृजेश मणि त्रिपाठी, ब्लाक प्रमुख राकेश मद्धेशिया सहित बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
]]>मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोगों से अपील की है कि वे प्रधानमंत्री के संदेश को अपनाकर देश और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में सहयोग करें. उन्होंने कहा कि ईंधन की खपत कम करें और बेवजह सोना खरीदने से बचें। सरकार स्तर पर भी सख्ती दिखाते हुए उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि मुख्यमंत्री और मंत्रियों के काफिले में तुरंत 50 फीसदी तक वाहनों की संख्या कम की जाए और अनावश्यक गाड़ियां हटाई जाएं.
योगी ने वर्क फ्रॉम होम को बढ़ावा देने की बात कही, ताकि खर्च और ईंधन दोनों की बचत हो सके. उन्होंने लोगों से पीएनजी, मेट्रो, पब्लिक ट्रांसपोर्ट और रोडवेज बसों का ज्यादा इस्तेमाल करने की अपील की. साथ ही सरकारी बैठकों, सेमिनार और कॉन्फ्रेंस को ज्यादा से ज्यादा वर्चुअल तरीके से करने पर भी जोर दिया गया है, ताकि समय और संसाधनों की बचत हो सके.
सप्ताह में दो दिन वर्क फ्रॉम होम दिया जाए
मुख्यमंत्री ने कहा कि मंत्री, सांसद, विधायक, जनप्रतिनिधि सप्ताह में एक दिन पब्लिक ट्रांसपोर्ट का उपयोग करें. सप्ताह में एक दिन नो व्हीकल डे आयोजित किया जाए. इस अभियान से सरकारी कर्मचारियों, स्कूलों-कॉलेजों के विद्यार्थियों समेत समाज के विभिन्न वर्गों को भी जोड़ें. औद्योगिक विकास विभाग व आईआईडीसी द्वारा औद्योगिक संस्थानों, बड़े स्टार्टअप्स आदि में वर्क फ्रॉम होम के लिए प्रेरित किया जाए. वहीं जहां बड़ी संख्या में कार्मिक कार्यरत हैं, उन्हें सप्ताह में दो दिन वर्क फ्रॉम होम की अनुशंसा के लिए राज्य स्तर पर एडवाइजरी जारी की जाए.
बैठकें और वर्कशॉप अब ज्यादा से ज्यादा ऑनलाइन
सीएम योगी ने कहा है कि शिक्षा विभाग के सेमिनार, बैठकें और वर्कशॉप अब ज्यादा से ज्यादा ऑनलाइन कराए जाएं. सचिवालय और निदेशालय की करीब आधी मीटिंग्स भी वर्चुअल हों. स्कूल-कॉलेजों में बसों के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जाए और जरूरत पड़ने पर रोडवेज बसों को भी जोड़ा जाए. साथ ही पीक ऑवर में भीड़ और ईंधन बचाने के लिए दफ्तरों का समय अलग-अलग शिफ्ट में करने का सुझाव दिया गया है.
पब्लिक ट्रांसपोर्ट, साइक्लिंग, कार पूलिंग और इलेक्ट्रिक वाहनों पर जोर
मुख्यमंत्री योगी ने लोगों से कहा है कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट, साइक्लिंग, कार पूलिंग और इलेक्ट्रिक वाहनों का ज्यादा इस्तेमाल करें. जिन शहरों में मेट्रो चल रही है, वहां उसका अधिक से अधिक उपयोग करने की अपील की गई है. ज्यादा भीड़ वाले रूट्स पर बस और अन्य सार्वजनिक परिवहन सेवाएं बढ़ाने की बात भी कही गई है. साथ ही उन्होंने बिजली बचाने पर जोर देते हुए कहा कि घरों, सरकारी दफ्तरों और निजी संस्थानों में बेवजह बिजली न जलाएं और रात 10 बजे के बाद सजावटी लाइटों का कम से कम इस्तेमाल करें.
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोगों से अपील की है कि वे प्रधानमंत्री के संदेश को अपनाकर देश और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में सहयोग करें. उन्होंने कहा कि ईंधन की खपत कम करें और बेवजह सोना खरीदने से बचें। सरकार स्तर पर भी सख्ती दिखाते हुए उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि मुख्यमंत्री और मंत्रियों के काफिले में तुरंत 50 फीसदी तक वाहनों की संख्या कम की जाए और अनावश्यक गाड़ियां हटाई जाएं.
योगी ने वर्क फ्रॉम होम को बढ़ावा देने की बात कही, ताकि खर्च और ईंधन दोनों की बचत हो सके. उन्होंने लोगों से पीएनजी, मेट्रो, पब्लिक ट्रांसपोर्ट और रोडवेज बसों का ज्यादा इस्तेमाल करने की अपील की. साथ ही सरकारी बैठकों, सेमिनार और कॉन्फ्रेंस को ज्यादा से ज्यादा वर्चुअल तरीके से करने पर भी जोर दिया गया है, ताकि समय और संसाधनों की बचत हो सके.
सप्ताह में दो दिन वर्क फ्रॉम होम दिया जाए
मुख्यमंत्री ने कहा कि मंत्री, सांसद, विधायक, जनप्रतिनिधि सप्ताह में एक दिन पब्लिक ट्रांसपोर्ट का उपयोग करें. सप्ताह में एक दिन नो व्हीकल डे आयोजित किया जाए. इस अभियान से सरकारी कर्मचारियों, स्कूलों-कॉलेजों के विद्यार्थियों समेत समाज के विभिन्न वर्गों को भी जोड़ें. औद्योगिक विकास विभाग व आईआईडीसी द्वारा औद्योगिक संस्थानों, बड़े स्टार्टअप्स आदि में वर्क फ्रॉम होम के लिए प्रेरित किया जाए. वहीं जहां बड़ी संख्या में कार्मिक कार्यरत हैं, उन्हें सप्ताह में दो दिन वर्क फ्रॉम होम की अनुशंसा के लिए राज्य स्तर पर एडवाइजरी जारी की जाए.
बैठकें और वर्कशॉप अब ज्यादा से ज्यादा ऑनलाइन
सीएम योगी ने कहा है कि शिक्षा विभाग के सेमिनार, बैठकें और वर्कशॉप अब ज्यादा से ज्यादा ऑनलाइन कराए जाएं. सचिवालय और निदेशालय की करीब आधी मीटिंग्स भी वर्चुअल हों. स्कूल-कॉलेजों में बसों के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जाए और जरूरत पड़ने पर रोडवेज बसों को भी जोड़ा जाए. साथ ही पीक ऑवर में भीड़ और ईंधन बचाने के लिए दफ्तरों का समय अलग-अलग शिफ्ट में करने का सुझाव दिया गया है.
पब्लिक ट्रांसपोर्ट, साइक्लिंग, कार पूलिंग और इलेक्ट्रिक वाहनों पर जोर
मुख्यमंत्री योगी ने लोगों से कहा है कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट, साइक्लिंग, कार पूलिंग और इलेक्ट्रिक वाहनों का ज्यादा इस्तेमाल करें. जिन शहरों में मेट्रो चल रही है, वहां उसका अधिक से अधिक उपयोग करने की अपील की गई है. ज्यादा भीड़ वाले रूट्स पर बस और अन्य सार्वजनिक परिवहन सेवाएं बढ़ाने की बात भी कही गई है. साथ ही उन्होंने बिजली बचाने पर जोर देते हुए कहा कि घरों, सरकारी दफ्तरों और निजी संस्थानों में बेवजह बिजली न जलाएं और रात 10 बजे के बाद सजावटी लाइटों का कम से कम इस्तेमाल करें.
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यूपी में योगी मंत्रिमंडल विस्तार की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है। बिहार, बंगाल और असम के बाद यूपी की बारी है यानी 12 मई के बाद कभी भी टीम योगी का आकार बढ़ सकता है। खास बात यह है कि यह केवल विस्तार होगा, बदलाव नहीं। मतलब ये कि मंत्रिमंडल में सिर्फ छह नये चेहरे शामिल होंगे। प्रदेश में विधानसभा चुनाव नजदीक होने के चलते किसी बड़े बदलाव पर सहमति नहीं बन सकी है। सूत्रों की मानें तो किसी मंत्री को हटाए जाने की संभावना नहीं है। विभाग बदले जाने के आसार भी कम ही हैं।
प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार का खाका लगभग तैयार है। इस पर अंतिम मुहर दिल्ली से लगना बाकी है। इसके लिए जल्द मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दिल्ली जा सकते हैं। फिलहाल, जिन नामों को मंत्री बनाए जाने की संभावना बताई जा रही है, उनमें पूजा पाल, मनोज पांडेय, सुरेंद्र दिलेर, भूपेंद्र चौधरी के नाम शामिल हैं। इनके अलावा पूर्व मंत्री महेंद्र सिंह, कृष्णा पासवान, संतोष सिंह, हंसराज विश्वकर्मा, आशा मौर्य के नाम भी रेस में शामिल बताए जा रहे हैं। इनके अलावा संगठन से जुड़े ब्राह्मण चेहरे और ब्रज के एक विधायक का नाम इस फेहरिस्त में शुमार है।
कई बुजुर्ग मंत्रियों ने ली राहत की सांस
पूजा पाल का नाम इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि पार्टी इस दांव से कई निशाने साध सकती है। महिला और पिछड़े वर्ग का कोटा पूरा करने के साथ ही भाजपा उन्हें सपा को घेरने के लिए सियासी हथियार के रूप में भी इस्तेमाल कर सकती है। मंत्रिमंडल में बड़ा बदलाव न होने की संभावनाओं ने पार्टी के उम्रदराज मंत्रियों के साथ ही उनको भी राहत दे दी है, जिनके विभाग बदले जाने की चर्चाएं तेज थीं। बीते कुछ दिनों से इनमें से कई दिल्ली दरबार हो आए थे।
चुनाव नजदीक होने के चलते बदलाव का फैसला नहीं
कुछ मंत्रियों की कार्यशैली से केंद्रीय नेतृत्व नाखुश है, तो कइयों से मुख्यमंत्री नाराज हैं। मगर चुनाव नजदीक होने के चलते इन्हें बदलने पर फैसला नहीं हो पा रहा। पार्टी का एक वर्ग यह समझाने में भी काफी हद तक सफल रहा है कि इस समय किसी मंत्री को हटाने का संदेश सही नहीं जाएगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश अब पारंपरिक और प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों के वैश्विक केंद्र के रूप में उभरने जा रहा है। आयुष प्रणालियों को नई ऊंचाई देने के लिए योगी सरकार ने प्रदेश के आयुष कॉलेजों में 2500 वर्ष पुरानी तिब्बती चिकित्सा प्रणाली ‘सोवा रिग्पा’ (अमची चिकित्सा) और दक्षिण भारत की प्रसिद्ध 'सिद्ध' पद्धति की पढ़ाई शुरू करने की ऐतिहासिक तैयारी की है। इस कदम का उद्देश्य न केवल सदियों पुरानी चिकित्सा विधाओं को पुनर्जीवित करना है, बल्कि जटिल और दीर्घकालिक बीमारियों के लिए मरीजों को किफायती और प्रभावी वैकल्पिक उपचार प्रदान करना भी है।
योगी सरकार की हरी झंडी: डिग्री के साथ मिलेगा रजिस्ट्रेशन का अधिकार
प्रमुख सचिव आयुष, रंजन कुमार के अनुसार, योगी सरकार ने इन दोनों पद्धतियों के डिग्री कोर्स शुरू करने के लिए प्रक्रिया तेज कर दी है। अब चयनित आयुष कॉलेजों में जरूरी बुनियादी ढांचे और पाठ्यक्रम का विकास किया जा रहा है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इन कोर्सों को पूरा करने वाले चिकित्सकों का विधिवत पंजीकरण (Registration) किया जाएगा। इससे डिग्री धारक डॉक्टर अधिकृत रूप से अपने क्लीनिक और उपचार केंद्र खोल सकेंगे, जिससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा बढ़ेगा और युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार खुलेंगे।
वाराणसी बनेगा रिसर्च और ट्रेनिंग का ग्लोबल हब
सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना का मुख्य केंद्र भगवान शिव की नगरी वाराणसी होगी। वाराणसी को सोवा रिग्पा के प्रमुख शोध, प्रशिक्षण और उपचार केंद्र (Hub) के रूप में विकसित किया जाएगा। चूंकि काशी पहले से ही आयुर्वेद और आध्यात्मिक चिकित्सा की जननी रही है, इसलिए यहाँ सोवा रिग्पा और सिद्ध पद्धति का एकीकरण जटिल रोगों पर वैज्ञानिक शोध को बढ़ावा देगा। यह केंद्र विशेष रूप से उन बीमारियों के उपचार पर केंद्रित होगा जहां आधुनिक चिकित्सा के साथ पूरक उपचार (Complementary Therapy) की आवश्यकता होती है।
असाध्य रोगों का रामबाण इलाज: क्या है सोवा रिग्पा और सिद्ध पद्धति?
तिब्बत से निकली 'सोवा रिग्पा' पद्धति हिमालयी क्षेत्रों में अपनी प्रभावशीलता के लिए प्रसिद्ध है, जो शरीर, मन और पर्यावरण के संतुलन पर काम करती है। यह गठिया, पाचन विकार, मानसिक तनाव और कैंसर जैसे रोगों के उपचार में सहायक मानी जाती है। वहीं, दक्षिण भारत की 'सिद्ध' पद्धति वात, पित्त और कफ के दोषों को संतुलित कर जीवनशैली और प्राकृतिक औषधियों के जरिए स्वास्थ्य लाभ प्रदान करती है। योगी सरकार का लक्ष्य आयुर्वेद, योग, यूनानी और होम्योपैथी के साथ इन पद्धतियों को मुख्यधारा में लाकर उत्तर प्रदेश को स्वास्थ्य सेवाओं का 'वन स्टॉप डेस्टिनेशन' बनाना है।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश अब पारंपरिक और प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों के वैश्विक केंद्र के रूप में उभरने जा रहा है। आयुष प्रणालियों को नई ऊंचाई देने के लिए योगी सरकार ने प्रदेश के आयुष कॉलेजों में 2500 वर्ष पुरानी तिब्बती चिकित्सा प्रणाली ‘सोवा रिग्पा’ (अमची चिकित्सा) और दक्षिण भारत की प्रसिद्ध 'सिद्ध' पद्धति की पढ़ाई शुरू करने की ऐतिहासिक तैयारी की है। इस कदम का उद्देश्य न केवल सदियों पुरानी चिकित्सा विधाओं को पुनर्जीवित करना है, बल्कि जटिल और दीर्घकालिक बीमारियों के लिए मरीजों को किफायती और प्रभावी वैकल्पिक उपचार प्रदान करना भी है।
योगी सरकार की हरी झंडी: डिग्री के साथ मिलेगा रजिस्ट्रेशन का अधिकार
प्रमुख सचिव आयुष, रंजन कुमार के अनुसार, योगी सरकार ने इन दोनों पद्धतियों के डिग्री कोर्स शुरू करने के लिए प्रक्रिया तेज कर दी है। अब चयनित आयुष कॉलेजों में जरूरी बुनियादी ढांचे और पाठ्यक्रम का विकास किया जा रहा है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इन कोर्सों को पूरा करने वाले चिकित्सकों का विधिवत पंजीकरण (Registration) किया जाएगा। इससे डिग्री धारक डॉक्टर अधिकृत रूप से अपने क्लीनिक और उपचार केंद्र खोल सकेंगे, जिससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा बढ़ेगा और युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार खुलेंगे।
वाराणसी बनेगा रिसर्च और ट्रेनिंग का ग्लोबल हब
सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना का मुख्य केंद्र भगवान शिव की नगरी वाराणसी होगी। वाराणसी को सोवा रिग्पा के प्रमुख शोध, प्रशिक्षण और उपचार केंद्र (Hub) के रूप में विकसित किया जाएगा। चूंकि काशी पहले से ही आयुर्वेद और आध्यात्मिक चिकित्सा की जननी रही है, इसलिए यहाँ सोवा रिग्पा और सिद्ध पद्धति का एकीकरण जटिल रोगों पर वैज्ञानिक शोध को बढ़ावा देगा। यह केंद्र विशेष रूप से उन बीमारियों के उपचार पर केंद्रित होगा जहां आधुनिक चिकित्सा के साथ पूरक उपचार (Complementary Therapy) की आवश्यकता होती है।
असाध्य रोगों का रामबाण इलाज: क्या है सोवा रिग्पा और सिद्ध पद्धति?
तिब्बत से निकली 'सोवा रिग्पा' पद्धति हिमालयी क्षेत्रों में अपनी प्रभावशीलता के लिए प्रसिद्ध है, जो शरीर, मन और पर्यावरण के संतुलन पर काम करती है। यह गठिया, पाचन विकार, मानसिक तनाव और कैंसर जैसे रोगों के उपचार में सहायक मानी जाती है। वहीं, दक्षिण भारत की 'सिद्ध' पद्धति वात, पित्त और कफ के दोषों को संतुलित कर जीवनशैली और प्राकृतिक औषधियों के जरिए स्वास्थ्य लाभ प्रदान करती है। योगी सरकार का लक्ष्य आयुर्वेद, योग, यूनानी और होम्योपैथी के साथ इन पद्धतियों को मुख्यधारा में लाकर उत्तर प्रदेश को स्वास्थ्य सेवाओं का 'वन स्टॉप डेस्टिनेशन' बनाना है।
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लखनऊ
योगी सरकार ने शिक्षा के मोर्चे पर बड़ा और निर्णायक कदम उठाते हुए ‘स्कूल चलो अभियान’ को उत्तर प्रदेश में मिशन मोड में लागू कर दिया है। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि अब कोई भी बच्चा स्कूल से बाहर नहीं रहेगा। इसी क्रम में अपर मुख्य सचिव, बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा, पार्थ सारथी सेन शर्मा ने प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि 6 से 14 वर्ष तक के प्रत्येक बच्चे का नामांकन हर हाल में सुनिश्चित किया जाए।
पहली मई से प्रदेशभर में विशेष अभियान चलाकर श्रमिक बस्तियों, ईंट-भट्ठों और वंचित वर्गों के बच्चों को चिह्नित कर स्कूल से जोड़ा जाएगा। यह अभियान खास तौर पर उन बच्चों पर केंद्रित होगा, जो अब तक शिक्षा की मुख्यधारा से बाहर हैं। दिव्यांग बच्चों के नामांकन को प्राथमिकता देने, आरटीई के अंतर्गत लॉटरी के माध्यम से चयनित पात्र बच्चों का आवंटित विद्यालय में शत-प्रतिशत नामांकन कराने और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में बालिकाओं के प्रवेश को बढ़ाने के निर्देश भी दिए गए हैं।
सरकार ने ड्रॉपआउट और आउट-ऑफ-स्कूल बच्चों की पहचान कर उन्हें पुनः शिक्षा से जोड़ने के लिए जमीनी स्तर पर रणनीति तैयार की है। कक्षा 5 से 6, 8 से 9 और 10 से 11 तक 100% ट्रांजिशन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि बच्चों की पढ़ाई बीच में न छूटे और शिक्षा की निरंतरता बनी रहे।
जागरूकता अभियान, स्थानीय प्रशासन की सक्रिय भागीदारी और निरंतर मॉनिटरिंग के माध्यम से इस अभियान को प्रभावी बनाने की योजना है। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश हैं कि प्रत्येक गांव, वार्ड और बस्ती स्तर पर सर्वे कर बच्चों को चिह्नित किया जाए और उन्हें विद्यालय से जोड़ा जाए। जहां पहले ड्रॉपआउट चिंता का विषय था, अब सरकार घर-घर पहुंचकर हर बच्चे को स्कूल से जोड़ रही है।
]]>मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार को नबद्वीप विधानसभा क्षेत्र से भाजपा उम्मीदवार श्रुति शेखर गोस्वामी, कटवा से बीजेपी प्रत्याशी कृष्ण घोष तथा बागदा विधानसभा क्षेत्र से भाजपा उम्मीदवार सोमा ठाकुर के समर्थन में जनसभाओं को संबोधित कर रहे थे। भीषण गर्मी में भी सीएम योगी के प्रति बंगालवासियों के लगाव में कोई कमी नहीं दिखाई दी। जनसभाओं में मौजूद हजारों की भीड़ लगातार ‘योगी-योगी’ का नारा लगाती रही। सीएम ने इस स्नेह के लिए मतदाताओं का आभार भी जताया। उन्होंने कहा कि बंगाल अब अराजकता स्वीकार नहीं करेगा। कांग्रेस, कम्युनिस्टों व टीएमसी ने बंगाल के माथे पर लूटपाट का जो कलंक लगाया है, अब उससे मुक्त होने का समय है। बंगाल के लोगों ने डबल इंजन सरकार लाने का फैसला किया है, जो डबल स्पीड से काम करेगी। टीएमसी के गुंडों से हिसाब-किताब बराबर करने के लिए बंगाल में डबल इंजन सरकार आवश्यक है।
4 मई को बंगाल में हर ओर लहराएगा केसरिया झंडा
सीएम योगी ने पहले चरण में 152 सीटों पर रिकॉर्ड मतदान के लिए मतदाताओं का अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि हर मतदाता के मन में भाव था कि बंगाल को टेरर, माफियाराज व करप्शन से मुक्ति दिलाकर फिर से भारत की पहचान का प्रतीक बनाना है और भाजपा की डबल इंजन सरकार लाना है। मतदान दिवस के नजारे बता रहे थे कि जब 4 मई को परिणाम आएंगे तो केसरिया झंडा बंगाल में हर ओर लहराता दिखाई देगा।
टीएमसी ने बंगाल के सामने खड़ा किया पहचान का संकट
सीएम योगी ने कहा कि 500 वर्ष पहले चैतन्य महाप्रभु ने हरे कृष्णा, हरे रामा… की मधुर धुन के माध्यम से दुनिया को आकर्षित कर भारत के सनातन ध्वज को वैश्विक पटल पर स्थापित करने का जो कार्य किया था, आज वही कार्य इस्कॉन के संन्यासी कर रहे हैं। यह भारत की आध्यात्मिक विरासत, गौरव, त्याग, बलिदान, साहस और स्वाभिमान की माटी है। यह भारत के अध्यात्म, देशभक्ति, कला व साहित्य की धरा है। भारत की आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक विरासत को दिशा देने में इस भूमि ने महत्वपूर्ण नेतृत्व किया। यह वही बंगाल है, जिसे कभी देश की ‘सांस्कृतिक राजधानी’ के रूप में जाना जाता था। आज वही बंगाल टीएमसी के राज में पहचान के लिए मोहताज है। यहां उद्योग-धंधे बंद हो रहे हैं, किसानों को उपज का उचित दाम, नौजवानों को रोजगार और सरकारी कर्मचारियों को पूरा वेतन नहीं मिल पा रहा। कानून-व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक और गुंडागर्दी चरम पर है। टेरर, माफियाराज व करप्शन की प्रतीक बनी टीएमसी सरकार में भाजपा कार्यकर्ता संजय भौमिक की निर्ममतापूर्वक हत्या कर दी गई और तृणमूल के गुंडे खुलेआम घूम रहे हैं। बंगाल में लैंड, सैंड, कैटल माफिया हावी हैं। पीएम मोदी विकास के लिए जो पैसे भेजते हैं, टीएमसी के गुंडे हड़प जाते हैं, लेकिन अब बंगाल जाग गया है। अब कटमनी, अराजकता का खेल समाप्त होगा।
टीएमसी ने किया था सीएए का विरोध
सीएम ने मतदाताओं से कहा कि आपके हक पर घुसपैठियों से डकैती डलवाने वाली टीएमसी सरकार से मुक्ति का समय आ गया है, क्योंकि जो काम भारत और बंगाल के हित में है, टीएमसी उसका विरोध करती है। संसद में प्रधानमंत्री जी सीएए (सिटिजनशिप अमेंडमेंट एक्ट) का प्रस्ताव लेकर आए तो टीएमसी ने विरोध किया। यह एक्ट गारंटी देता है कि पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान से किसी हिंदू, बौद्ध, जैन व सिख को प्रताड़ित कर भारत भेजा गया है और वह पांच साल से अधिक समय से यहां रह रहा है तो उसे भारत की नागरिकता मिलेगी। इसी एक्ट के कारण बंगाल के अंदर काफी संख्या में नागरिकता दी गई, लेकिन ममता दीदी को यह बुरा लगता है। उन्हें चिंता है कि हिंदू ज्यादा होगा तो सड़कों पर इफ्तारी कैसे होगी। लेकिन, यूपी में कोई सड़क पर नमाज या इफ्तार पार्टी नहीं कर सकता। वहां मस्जिद से आवाज भी नहीं आती।
पीएम मोदी के कारण सुरक्षित महसूस कर रहा मतुआ समुदाय
सीएम ने कहा कि यहां मतुआ समुदाय के लोग भारी संख्या में रहते हैं। 1947 व 1971 में ये भारत आए थे। कांग्रेस, कम्युनिस्ट व टीएमसी नहीं चाहती थी कि इन्हें भारत की नागरिकता मिले, लेकिन पीएम मोदी के कारण मतुआ समुदाय गर्व के साथ आगे बढ़कर भारत के नागरिक के रूप में सुरक्षित महसूस कर रहा है।
विस्थापितों को यूपी में मिला जमीन का अधिकार
सीएम योगी ने बताया कि मैंने बांग्लादेश से विस्थापित हिंदुओं को 12 अप्रैल को लखीमपुर खीरी में नागरिकता व जमीन अधिकार प्रमाण पत्र दिए हैं। हमारे यहां चार जनपद ऐसे हैं, जहां मतुआ समुदाय के लोग और बांग्लादेश से विस्थापित बंगाली परिवार रहते हैं। उन सभी को सीएए के कारण नागरिकता व जमीन का मालिकाना अधिकार दिया जा रहा है। यह कार्य इसलिए हो रहा है, क्योंकि पीएम मोदी ने उनके बारे में सोचा। कांग्रेस, कम्युनिस्ट व टीएमसी के पास यह सोच नहीं थी।
सबसे अधिक एक्सप्रेसवे वाला राज्य बना यूपी
मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 से पहले उत्तर प्रदेश की स्थिति बंगाल से भी बदतर थी। त्योहारों से पहले उत्साह नहीं, बल्कि आशंका का माहौल रहता था। युवाओं के लिए रोजगार नहीं था, किसान आत्महत्या करते थे, दंगे और कर्फ्यू आम थे, और कानून-व्यवस्था कमजोर थी। रामभक्तों पर गोली चलाई जाती थी। लेकिन 2017 में डबल इंजन सरकार बनने के बाद उत्तर प्रदेश में व्यापक बदलाव आया। अब प्रदेश में उपद्रव नहीं, उत्सव का माहौल है। न कर्फ्यू है, न अराजकता। यूपी में जितने माफिया कांग्रेस, सपा ने पाले थे, उनकी हड्डी-पसली कुचलने का काम बुलडोजर ने किया। आज उत्तर प्रदेश देश में सबसे अधिक एक्सप्रेसवे वाला राज्य बन चुका है। सड़कों पर कोई अव्यवस्था नहीं कर सकता। काशी जाएंगे तो एक नई भव्य काशी नजर आएगी और अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण हो चुका है, जिसका कभी कांग्रेस, टीएमसी, कम्युनिस्ट और समाजवादी पार्टी विरोध करते थे।
यूपी में 3 करोड़ से ज्यादा युवाओं को मिला रोजगार
बंगाल से यूपी की तुलना करते हुए सीएम योगी ने कहा कि हमारी सरकार ने लगभग 9 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी दी है, जिनमें बड़ी संख्या में बेटियां भी शामिल हैं। इसके अलावा 60 लाख युवाओं को बड़े उद्योगों में और 3 करोड़ से ज्यादा युवाओं को एमएसएमई यूनिट्स के माध्यम से रोजगार मिला है। इसके विपरीत, बंगाल में टीएमसी शासन के दौरान 30 लाख युवा बेरोजगार हुए हैं और उद्योग-धंधे बंद हुए हैं। जहां माफिया और भ्रष्टाचार का माहौल होता है, वहां विकास संभव नहीं होता और उद्योग भी स्थापित नहीं होते।
मां काली-मां दुर्गा की पूजा से कोई नहीं रोक सकता
सीएम योगी ने कहा कि बंगाल में ममता दीदी दुर्गा पूजा, मूर्ति विसर्जन और हिंदुओं का विरोध करती हैं। जय श्रीराम बोलने पर प्रतिबंध लगाती हैं। कोलकाता हाईकोर्ट को आदेश देना पड़ा था कि दुर्गापूजा की शोभायात्रा पर जो लोग सरेआम हमला कर रहे हैं, बंगाल में अव्यवस्था फैला रहे हैं, उन पर सख्ती की जानी चाहिए, परंतु तृणमूल सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की। लेकिन, मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि बंगाल की धरा पर मां काली-मां दुर्गा की पूजा कोई नहीं रोक सकता, ऐसा करने वालों के खिलाफ सड़कों पर आंदोलन होगा। बंगाल की धरती पर गोमाता को कटने और हिंदुओं को बंटने नहीं देंगे। ममता दीदी कहती हैं ‘खेला होबे’, लेकिन अब कहना होगा ‘खेला शेष, उन्नयन शुरू’ (खेल खत्म, विकास शुरू)।