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भारत की आत्मा गांवों में बसती है। गांव व अन्नदाता किसान सशक्त होंगे तो देश समृद्ध रहेगा और उत्तर प्रदेश के समावेशी विकास का लक्ष्य भी तभी प्राप्त होगा। इसी नीति को केंद्र में रखते हुए योगी सरकार ने गांव और किसान को अपनी प्राथमिकता में रखकर बीते 9 वर्ष में उत्तर प्रदेश का नव निर्माण किया है। यह नया उत्तर प्रदेश शहर व गांव के बीच अंतर को पाटता है, ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन रोकता है। इसी नीति को आगे बढ़ाते हुए योगी सरकार का बजट 2026-27 भी खेती-किसानी और ग्राम्य विकास को नई ऊंचाइयों पर ले जाता दिखाई दे रहा है। यह ग्रामीण इन्फ्रास्ट्रक्चर को प्रोत्साहन देता है। किसानों को नई तकनीकों से, नए बाजारों से जोड़ता और उद्यमिता से जोड़ता है। खेती-किसानी व इससे संबद्ध क्षेत्रों में रोजगार के नए माध्यमों को जन्म देता है। यह उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था में किसानों सिर्फ लाभार्थी नहीं, बल्कि आर्थिक प्रगति में भागीदार बनाता है।
बजट में खास ध्यान, कृषि योजनाओं के लिए 10,888 करोड़ रुपये
2017 में सत्ता संभालने के तत्काल बाद योगी सरकार द्वारा किसानों की 36 हजार करोड़ रुपये कर्जमाफी से लेकर केंद्र सरकार द्वारा पीएम किसान सम्मान निधि के 94,668.58 करोड़ रुपये स्थानांतरित करने तक, डबल इंजन सरकार ने किसानों को आर्थिक समृद्धि के केंद्र में रखा है। डीबीटी के माध्यम से योजनाओं का लाभ अकाउंट में देकर बिचौलियों का राज समाप्त किया गया। बजट 2026-27 में कृषि योजनाओं के लिए 10,888 करोड़ रुपये की व्यवस्था सरकार की प्राथमिकता स्पष्ट कर देती है। यह राशि पिछले बजट के मुकाबले 20 प्रतिशत अधिक है। सरकार ने यूपीएग्रीज परियोजना में एक्वा कल्चर आधारभूत संरचना के तहत विश्वस्तरीय हैचरी तथा विश्वस्तरीय ट्रेनिंग सेंटर की स्थापना की बाह्य सहायतित परियोजना के लिये 155 करोड़ रुपये, एग्री-एक्सपोर्ट हब की स्थापना के लिये 245 करोड़ रुपये तथा किसान उत्पादक संगठनों हेतु रिवाल्विंग फण्ड योजना के लिये 75 करोड़ रुपये की व्यवस्था की है। किसानों के डीजल पंप सेट को सोलर में परिवर्तित करने की योजना के लिए 673.84 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। ये बजट प्रावधान कृषि एवं सबद्ध क्षेत्रों के तकनीकी उन्नयन में मददगार होंगे।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को दी जा रही मजबूती
बजट में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक बार फिर मजबूती दी गई है। प्रदेश के सभी जनपदों को शामिल करते हुए 94,300 हेक्टेयर में नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फॉर्मिंग योजना संचालित है। बजट में इसके लिए 298 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। निजी नलकूपों को अनवरत बिजली आपूर्ति हो, इसका ध्यान रखा गया है। इसके लिए 2400 करोड़ प्रस्तावित हैं। पं. दीनदयाल उपाध्याय किसान समृद्धि योजना के लिए लगभग 103 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। इससे स्पष्ट है कि सरकार किसानों के लिए मजबूत सपोर्ट सिस्टम पर लगातार कार्यरत है।
ग्रामीण अर्थतंत्र में नई ऊर्जा भरेगा गन्ना
पिछली सरकारों की अनदेखी के शिकार गन्ना किसानों के जीवन में 2017 के बाद से मिठास घुल गई है। योगी सरकार ने 3.04 लाख करोड़ रुपये से अधिक के रिकॉर्ड गन्ना मूल्य का भुगतान किया। इस ऐतिहासिक निर्णय ने गन्ना किसानों को बड़ी राहत दी। पेराई सत्र 2025-26 के लिए गन्ना मूल्य में 30 रुपये प्रति कुन्तल की वृद्धि की। अगेती गन्ना प्रजाति का मूल्य 400 रुपये प्रति कुन्तल तथा सामान्य प्रजाति का मूल्य 390 रुपये प्रति कुन्तल निर्धारित किया गया। इस वृद्धि से गन्ना किसानों को लगभग ₹3,000 करोड़ का अतिरिक्त भुगतान होगा। योगी सरकार के कार्यकाल में यह चौथी बार है, जब गन्ना मूल्य में बढ़ोतरी की गई। यह निर्णय गन्ना किसानों की आमदनी में वृद्धि के साथ ही ग्रामीण अर्थतंत्र में भी नई ऊर्जा भरेगा।
दुग्ध, मत्स्य पालकों के लिए भी खोले दरवाजे
योगी सरकार ने दुग्ध व मत्स्य पालकों के लिए भी दरवाजे खोले हैं। सहकारी क्षेत्र के तहत प्रदेश में 19 दुग्ध संघों के माध्यम से दुग्धशाला विकास कार्यक्रम चलाया जा रहा है। मथुरा में पहले 30 हजार लीटर क्षमता की नवीन डेयरी परियोजना प्रस्तावित की गयी थी, लेकिन अब 1 लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता के नवीन डेयरी प्लांट की स्थापना का प्रस्ताव है। सरकार ने दुग्ध संघों के सुदृढ़ीकरण व उन्हें पुनर्जीवित करने की योजना पर भी जोर दिया है। छुट्टा गोवंश के कारण किसानों को होने वाली समस्याओं के निदान पर भी सरकार ने जोर लगाया। छुट्टा गोवंश के रखरखाव के लिए 2,000 करोड़ का प्रावधान किया है। मत्स्य पालक किसानों का भी बजट में ख्याल रखा गया है। इसके अतिरिक्त 36.87 लाख किसानों को निःशुल्क तिलहन बीज मिनीकिट, लगभग 83 हजार सोलर पंप की स्थापना, लगभग 32 हजार खेत तालाबों का निर्माण, 2.46 लाख से अधिक कृषि यंत्रों का वितरण और किसान पाठशाला में लगभग दो करोड़ किसानों की सहभागिता से भी अन्नदाता किसानों के जीवन में बदलाव लाया गया है।
योगी सरकार का किसानों की ‘आर्थिक समृद्धि’ पर विशेष जोर
धान खरीद अभियान के जरिए योगी सरकार का स्पष्ट लक्ष्य अन्नदाता किसानों की आर्थिक समृद्धि सुनिश्चित करना है। एक ओर सरकार धान की निर्बाध खरीद कर रही है, तो दूसरी ओर डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से किसानों को सीधे बैंक खातों में भुगतान किया जा रहा है। इससे बिचौलियों की भूमिका खत्म हुई और किसानों को समय पर पैसा मिल रहा है। धान खरीद की बात करें तो योगी सरकार एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) पर किसानों से यह खरीद कर रही है। धान खरीद सत्र 2025-26 में 18 फरवरी दोपहर 12 बजे तक 12.78 लाख किसानों ने पंजीकरण कराया है। इतना ही नहीं, 4869 क्रय केंद्रों के माध्यम से अब तक 10.17 लाख से अधिक किसानों से 60.98 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद की जा चुकी है।
विशेषज्ञ की राय
“योगी सरकार ने गांव व किसान को समृद्धि का आधार कहा था। सरकार ने पौने नौ साल में इसे वास्तविकता के धरातल पर उतारा भी है। चाहें बजट प्रावधान हों या किसान पाठशाला के जरिये खेती-किसानी को उन्नत तकनीक से जोड़ना, सरकार किसानों को आत्मनिर्भरता व उद्यमिता की तरफ ले जा रही है। किसी भी प्रदेश के समावेशी विकास के लिए जरूरी है कि कृषि व उससे जुड़े क्षेत्रों में कार्यरत लोग सिर्फ सरकारी अनुदान योजनाओं पर आश्रित न रहें। राज्य की अर्थव्यवस्था व समृद्धि में उनकी अन्य क्षेत्रों के समान ही हिस्सेदारी होनी चाहिए। इससे शहर व गांवों के बीच की खाई पटती है और पलायन पर रोक लगती है। योगी सरकार इस दिशा में लगातार प्रभावी काम कर रही
]]>आगरा के 1.60 लाख उपभोक्ताओं का 501 करोड़ रुपए बकाया होगा माफ
आगरा
उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने विद्युत उपभोक्ताओं को एक बड़ी सौगात देते हुए "बिजली बिल राहत योजना 2025- 26" को लागू करने का निर्णय लिया है। यह योजना 01 दिसंबर 2025 से 28 फरवरी 2026 तक तीन चरणों में लागू रहेगी और इसका उद्देश्य लंबित बिल वाले नेवर पेड और लॉन्ग अनपेड उपभोक्ताओं को बकाये से मुक्ति दिलाना है।
दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (डीवीवीएनएल) में लागू हो रही इस एक मुश्त समाधान योजना (ओटीएस) के तहत, 2 किलोवॉट तक के घरेलू (एलएमवी-1) और 01 किलोवॉट तक के वाणिज्यिक (एलएमवी-2) उपभोक्ताओं को लाभ मिलेगा। डीवीवीएनएल के मुख्य अभियंता कपिल सिंधवानी ने बताया कि इस योजना के माध्यम से केवल दक्षिणांचल में ही लगभग 501 करोड़ रुपये का बकाया माफ होने का अनुमान है, जो 1.60 लाख से अधिक उपभोक्ताओं को सीधा लाभ पहुँचाएगा।
आगरा देहात के 1.60 लाख उपभोक्ता होंगे लाभान्वित
मुख्य अभियंता कपिल सिंधवानी ने बताया कि आगरा देहात में 24,300 नेवर पेड घरेलू उपभोक्ता और 1,35,725 लॉन्ग अनपेड घरेलू उपभोक्ता (जिन्होंने 31 मार्च 2025 तक बिल जमा नहीं किया) हैं। उन्होंने योजना की छूट का विवरण देते हुए कहा कि पहली बार तीन चरणों की इस योजना में, नेवर पेड व लॉन्ग अनपेड बिजली उपभोक्ताओं को ब्याज पर 100 फीसदी और मूलधन पर 25 फीसदी तक की छूट प्रदान की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रथम चरण (01 से 31 दिसंबर 2025) में पंजीकरण कराकर 30 दिन में पूरा भुगतान करने पर ब्याज में 100% और मूल बकाए में 25% की छूट मिलेगी। द्वितीय चरण में मूलधन में छूट का दायरा 20% और तृतीय चरण में यह 15% रहेगा।
किस्त भुगतान पर भी मिलेगी राहत
किस्त में भुगतान का विकल्प चुनने वाले उपभोक्ताओं के लिए भी राहत है। मुख्य अभियंता ने बताया कि मासिक 500 या 750 रुपए की किस्त व नियमित बिल का भुगतान करने पर ब्याज में 100% छूट रहेगी। साथ ही, मूल बकाये में भी 5% से 10% तक की छूट मिलेगी। हालांकि, तीन बार किस्त बाउंस होने पर उपभोक्ता योजना से अयोग्य हो जाएगा।
जन-जन तक पहुँचें योजना का लाभ, होगा व्यापक प्रचार- प्रसार
योजना को जन-जन तक पहुँचाने के लिए योगी सरकार ने व्यापक प्रचार-प्रसार के निर्देश दिए हैं। सोशल मीडिया, एफएम रेडियो, प्रिंट/इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के साथ-साथ प्रत्येक गाँव में मुनादी कराना अनिवार्य किया गया है।
राजस्व संग्रह एजेंसियों को विशेष प्रोत्साहन
योजना की सफलता सुनिश्चित करने के लिए कलेक्शन एजेंसियों (जनसेवा केंद्र, विद्युत सखी, मीटर रीडर्स) को विशेष प्रोत्साहन देने की व्यवस्था की गई है, जिससे वे नेवर पेड उपभोक्ताओं से अधिक से अधिक वसूली कर सकें और योजना को सफल बना सकें।
योगी सरकार की ऐतिहासिक 'बिजली बिल राहत योजना पर आम लोगों की राय
"मैं 1.5 किलोवाट का घरेलू उपभोक्ता हूँ और लंबे समय से बिल नहीं भर पाया था। अब योगी सरकार ने जो ब्याज पूरी तरह माफ किया है और मूल में भी छूट दी है, उससे हम जैसे उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली है। यह योजना हमारे लिए नया जीवनदान है।" -मनोज कुमार, उपभोक्ता
"यह योजना केवल आर्थिक राहत नहीं है, बल्कि यह लाखों परिवारों को बिजली कनेक्शन कटने के डर से मुक्ति दिलाकर उन्हें मुख्यधारा में जोड़ेगी। योगी सरकार का यह कदम अत्यंत संवेदनशील और लोक-कल्याणकारी है, खासकर बिजली चोरी के प्रकरणों में राजस्व निर्धारण में छूट देने का प्रावधान सराहनीय है।" -समाजसेवी मुकेश कुमार गर्ग
]]>लखनऊ
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार युवाओं के कौशल विकास, आत्मनिर्भरता और स्थानीय रोजगार को प्राथमिकता देते हुए ठोस कदम उठा रही है। योगी सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश का हर युवा अपने कौशल के बल पर रोजगार या स्वरोजगार से जुड़कर विकसित उत्तर प्रदेश, विकसित भारत के संकल्प को साकार करे। सरकार के प्रयासों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वोकल फॉर लोकल और स्किल इंडिया मिशन को राज्य स्तर पर नई गति मिल रही है। प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन मुख्यालय, अलीगंज, लखनऊ में समीक्षा बैठक की। बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था’ लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में चल रहे कौशल विकास कार्यक्रमों की प्रगति पर चर्चा हुई।
अधिक से अधिक युवा आईटीआई से जोड़े जाएं
मंत्री अग्रवाल ने कहा कि योगी सरकार के प्रयासों से आईटीआई से पासआउट छात्रों को देश की अग्रणी कंपनियों में बेहतर प्लेसमेंट मिल रहा है, जिससे प्रदेश के युवाओं में कौशल शिक्षा को लेकर उत्साह बढ़ा है। उन्होंने निर्देश दिए कि इन सफलताओं का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए ताकि अधिक से अधिक युवा आईटीआई संस्थानों में प्रवेश लेकर अपनी रुचि के अनुसार कोर्स पूरा करें और रोजगार एवं स्वरोजगार से जुड़ सकें।
छात्रों को औद्योगिक भ्रमण कराया जाए
उन्होंने कहा कि हर जिले में विभिन्न उद्योगों से समन्वय स्थापित कर छात्रों का औद्योगिक भ्रमण (इंडस्ट्री विजिट) कराया जाए और उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण एवं प्लेसमेंट सुनिश्चित किया जाए। इसके लिए मिशन द्वारा एक इंडस्ट्री विजिट कैलेंडर और टाइम-टेबल तैयार किया जाएगा। मंत्री अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि योगी सरकार उद्योगों को कौशल विकास मिशन और आईटीआई संस्थानों से जोड़ने के लिए ठोस पहल कर रही है, ताकि छात्रों को उद्योगों की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षण मिल सके और रोजगार के अधिक अवसर उत्पन्न हों। उन्होंने स्किल मित्र पोर्टल पर छात्रों की प्लेसमेंट स्थिति अद्यतन रखने और कोर्स को इंडस्ट्री डिमांड बेस्ड बनाने के निर्देश दिए।
प्रत्येक माह की 21 तारीख को प्लेसमेंट ड्राइव
सरकार के निर्देशानुसार सभी नोडल आईटीआई संस्थान प्रत्येक माह की 21 तारीख को प्लेसमेंट ड्राइव आयोजित करेंगे। इन ड्राइव्स में डेलॉइट इंडिया की महत्वपूर्ण भूमिका होगी, जो कंपनियों की भागीदारी सुनिश्चित करेगा। अब तक Subros Ltd., Creature Industries, Dixon Technologies, Havells, Pepsico और Sona BLW जैसी प्रमुख कंपनियों में आईटीआई छात्रों का चयन और प्लेसमेंट हुआ है। इसके अलावा Gyan Dairy, Alpha Engineers (TATA Motors Ancillary), Mohannah Enterprises, Kashi Industries और Avionics Sparrow जैसी इकाइयों में औद्योगिक भ्रमण कराए गए, जिससे छात्रों को प्रत्यक्ष औद्योगिक अनुभव प्राप्त हुआ।
विभिन्न संस्थाओं के साथ योगी सरकार लगातार कर रही साझेदारी
बैठक में यह भी बताया गया कि ऑटोमोटिव स्किल्स डेवलेपमेंट काउंसिल (ASDC), फर्नीचर एंड फिटिंग सेक्टर स्किल काउंसिल (FFSC) तथा ज्ञान डेयरी जैसी संस्थाओं के साथ योगी सरकार लगातार साझेदारी कर रही है। नोएडा, गोरखपुर और सहारनपुर में फर्नीचर सेक्टर के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) स्थापित करने की दिशा में कार्य तेजी से प्रगति पर है। बैठक में प्रमुख सचिव डॉ. हरि ओम, मिशन निदेशक पुलकित खरे, अपर निदेशक प्रिया सिंह, विभागीय अधिकारीगण तथा डेलॉइट इंडिया के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री मंगलवार को उत्तर प्रदेश एग्रीकल्चर ग्रोथ एंड रूरल एंटरप्राइज इकोसिस्टम स्ट्रेंथनिंग प्रोजेक्ट (यूपी एग्रीज) की प्रगति की समीक्षा कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा है कि उत्तर प्रदेश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में कृषि क्षेत्र को आत्मनिर्भर, टिकाऊ और डिजिटल रूप से सशक्त बनाना शामिल है। उन्होंने निर्देश दिए कि राज्य में ‘डिजिटल एग्रीकल्चर इकोसिस्टम’ के निर्माण की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया जाए, ताकि फसल, मौसम, बीज, सिंचाई, उर्वरक, बीमा, बाजार, लॉजिस्टिक्स और संस्थागत सेवाओं से संबंधित सभी सूचनाएं एकीकृत प्लेटफॉर्म पर रियल टाइम उपलब्ध हो सकें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में डिजिटल कृषि नीति तैयार की जाए, जो राष्ट्रीय तकनीकी मानकों पर आधारित हो और सुरक्षित साइबर अवसंरचना तथा नवाचार आधारित अनुसंधान को प्रोत्साहित करे। उन्होंने कहा कि बीज से लेकर बाजार तक की प्रक्रिया को समग्र दृष्टिकोण से जोड़ते हुए यह परियोजना किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने और राज्य के कृषि क्षेत्र को तकनीकी रूप से उन्नत एवं डिजिटल टिकाऊ कृषि तंत्र की दिशा में आगे बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बन रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘कृषि से उद्योग तक’ की सोच के साथ कार्य करते हुए मूल्य संवर्धन, प्रसंस्करण और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन को प्राथमिकता दी जाए। निर्देश दिए कि उत्तर प्रदेश विविध कृषि सहायता परियोजना (यूपी डास्प) के समन्वयन में यूपी एग्रीज का क्रियान्वयन करते हुए कृषि विश्वविद्यालयों, कृषि विज्ञान केंद्रों और किसान उत्पादक संगठनों को भी परियोजना से जोड़ा जाए। बैठक में बताया गया कि यह परियोजना लगभग ₹4000 करोड़ (यूएस $500 मिलियन) की लागत से विश्व बैंक के सहयोग से छह वर्षों की अवधि के लिए पूर्वी उत्तर प्रदेश और बुंदेलखंड के 28 जनपदों में लागू की जा रही है। इसका उद्देश्य बदलते जलवायु परिदृश्य के अनुरूप कृषि उत्पादन में सतत वृद्धि करना और किसानों को बाजार से बेहतर रूप में जोड़ना है। परियोजना में उत्पादकता वृद्धि, संसाधनों के कुशल उपयोग, कृषि आधारित उद्योगों के विकास और कृषि उत्पादों की गुणवत्ता सुधार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि कृषि वित्तीय प्रणाली को सुदृढ़ बनाना अत्यंत आवश्यक है। इसके अंतर्गत छोटे एवं सीमांत किसानों तथा कृषि आधारित सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों को ऋण सुविधा, जोखिम प्रबंधन की सुदृढ़ व्यवस्था और निजी निवेश को प्रोत्साहन पर बल दिया जाए। बैठक में बताया गया कि परियोजना से संबंधित संस्थागत तैयारियों में ठोस प्रगति हुई है। सामाजिक एवं पर्यावरणीय मूल्यांकन का कार्य पूरा हो चुका है। मॉनिटरिंग, लर्निंग एवं इवैल्यूएशन एजेंसी तथा तकनीकी सहायता एजेंसी का चयन किया जा चुका है।
अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (इर्री) के साथ छह वर्षीय उत्पादकता कार्यक्रम के लिए अनुबंध स्वीकृत हो चुका है। किसान उत्पादक संगठनों की क्षमता निर्माण के लिए तकनीकी सहायता एजेंसी का चयन शीघ्र किया जाएगा, जबकि तकनीकी परामर्शी एजेंसी का चयन अंतिम चरण में है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस परियोजना का उद्देश्य केवल कृषि उत्पादन बढ़ाना नहीं बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने निर्देश दिए कि परियोजना के प्रत्येक घटक के परिणामों की नियमित समीक्षा की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि इसका सीधा लाभ किसानों तक पहुंचे। मुख्यमंत्री ने यूपी एग्रीज की सतत मॉनिटरिंग के लिए आवश्यक प्रबंध करने के निर्देश भी दिए।
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टैलेंट, टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप्स के माध्यम से सीएम योगी का संकल्प होगा साकार
सैकड़ों स्टार्टअप हो रहे इनक्यूबेट, गहन वैज्ञानिक अनुसंधान से जुड़ी नई खोजों पर हो रहा काम
आईआईटी कानपुर अलुमनाई डीप टेक विज़न को गति देने में देंगे अभूतपूर्व योगदान
250 से अधिक डीप टेक स्टार्टअप्स को इनक्यूबेट किए जाने का लक्ष्य निर्धारित
इन स्टार्टअप्स से आने वाले समय में 10,000 से ज्यादा डायरेक्ट रोजगार होंगे सृजित
लखनऊ
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश को डीप टेक में अग्रणी राज्य बनाने का जो संकल्प लिया है, आईआईटी कानपुर उसे पूरा करने में जुट गया है। उत्तर प्रदेश को भारत की डीप टेक कैपिटल बनाने के लिए टैलेंट, टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप को आधार बनाए जाने का प्रयास है। मुख्यमंत्री का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत को तकनीकी महाशक्ति बनाने में उत्तर प्रदेश की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी। ऐसे में योगी सरकार का फोकस है कि उत्तर प्रदेश न केवल स्टार्टअप इकोसिस्टम में अग्रणी बने, बल्कि पूरे देश के लिए इनोवेशन का इंजन साबित हो। मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप आईआईटी कानपुर ने यूपी को डीप टेक की कैपिटल बनाने के लिए लक्ष्य निर्धारित किया है। यह कहा जा सकता है कि योगी सरकार की प्रतिबद्धता, आईआईटी कानपुर की विशेषज्ञता और एल्युमनी नेटवर्क की ताकत मिलकर उत्तर प्रदेश को एक नए युग की ओर ले जाएगी। डीप टेक पर आधारित यह विज़न न केवल राज्य बल्कि पूरे देश की तकनीकी प्रगति को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगा।
सीएम योगी ने की पहल
मुख्यमंत्री योगी ने बुधवार को ही आईआईटी कानपुर में आयोजित कार्यक्रम में कहा कि भारत का पहला डीप टेक भारत 2025 उत्तर प्रदेश में आकार लेगा। इसके लिए एक प्रभावशाली शिखर सम्मेलन (समिट) का आयोजन होना चाहिए, जहां पूरे देश के वैज्ञानिक, शोधकर्ता और स्टार्टअप मिलकर ठोस रोडमैप तैयार करें। इस पहल का केंद्र आईआईटी कानपुर को बनना चाहिए, जो पहले से ही डीप टेक इनोवेशन में राष्ट्रीय नेतृत्व की क्षमता रखता है। मुख्यमंत्री ने यह भी कही कि गौतमबुद्ध नगर जिले में डीप टेक हब के लिए भूमि आवंटित कर दी गई है और डीआरडीओ, इसरो व अन्य शीर्ष संस्थाओं के साथ मिलकर इसे साकार किया जा सकता है।
गहन वैज्ञानिक अनुसंधान से जुड़ी नई खोजों पर हो रहा काम
आईआईटी कानपुर मुख्यमंत्री के इस महत्वाकांक्षी मिशन का नेतृत्व कर रहा है। यहां पहले से ही सैकड़ों स्टार्टअप इनक्यूबेट हो रहे हैं और गहन वैज्ञानिक अनुसंधान से जुड़ी नई खोजों पर काम हो रहा है। एक सर्वे के अनुसार, 410 पूर्व छात्रों (अलुमनी) में से 75% यानी 307 पूर्व छात्र स्टार्टअप्स या छात्रों को मेंटरिंग देने के लिए तैयार हैं। लगभग 63% (257) उद्योग जगत की समझ और कंसल्टेशन देने में सहयोग करेंगे, जबकि 46% (189) पार्टनरशिप और कोलैबोरेशन को बढ़ावा देंगे। इतना ही नहीं, 21% (87) अलुमनाई इंडस्ट्री को राज्य में लाने के लिए तत्पर हैं और 15% (63) फाइनेंशियल इन्वेस्टमेंट देने को तैयार हैं। यह स्पष्ट करता है कि आईआईटी कानपुर अलुमनाई डीप टेक विज़न को गति देने में अभूतपूर्व योगदान देंगे।
यूपी बनेगा भारत का इनोवेशन इंजन
स्टार्टअप इकोसिस्टम की बात करें तो उत्तर प्रदेश आज तेजी से डीप टेक स्टार्टअप कैपिटल की ओर बढ़ रहा है। 250 से अधिक डीप टेक स्टार्टअप्स को इनक्यूबेट किए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इनका कुल वैल्यूएशन 2.5 लाख करोड़ रुपये से भी अधिक होगा। अनुमान है कि इन स्टार्टअप्स से आने वाले समय में 10,000 से ज्यादा डायरेक्ट रोजगार पैदा होंगे। इससे न केवल युवाओं को प्रदेश में ही रोजगार मिलेगा बल्कि स्थानीय टैलेंट को बाहर जाने से रोककर राज्य को आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिलेगी। योगी सरकार का यह विज़न उत्तर प्रदेश को केवल एक उपभोक्ता राज्य से उत्पादक और इनोवेशन-ड्रिवन राज्य बनाने की दिशा में है। रिसर्च एंड डेवलपमेंट से जुड़े प्रोजेक्ट्स यहां न केवल प्रयोगशाला तक सीमित रहेंगे, बल्कि उन्हें प्रोडक्ट में बदलकर बाजार तक पहुंचाया जाएगा। यही प्रक्रिया उत्तर प्रदेश को आने वाले समय में भारत का इनोवेशन इंजन बना देगी।
बता दें कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर सीएम योगी ने जन्मस्थान मंदिर में कृष्ण जी के दर्शन किए. इसके बाद वे पांचजन्य सभागार पहुंचे. यहां उन्होंने बाल स्वरूप बच्चों को दुलार किया. अपने हाथों से उसे खीर भी खिलाई. इस दौरान बच्चों को उन्होंने उपहार भी दिए. इस दौरान सीएम योगी ने कहा, श्रीकृष्ण की निष्काम कर्म की प्रेरणा हमें ताकत देती है. जब तक यह प्रेरणा हमारे बीच है, कोई हमारा बाल भी बांका नहीं कर सकता.
पिछले 8 साल में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 38वीं बार श्रीकृष्ण की नगरी मथुरा का दौरा कर यह संदेश साफ कर दिया है कि प्रदेश सरकार की प्राथमिक योजनाओं में मथुरा का विकास भी अहम स्थान रखता है. मुख्यमंत्री रहते हुए इतनी बार मथुरा आने का उनका यह रिकार्ड इस बात का प्रतीक है कि उनकी सरकार सनातन आस्था के प्रति गहरा सम्मान और पूर्ण समर्पण रखती है.0 काशी और अयोध्या की तरह अब मथुरा भी योगी सरकार के विकास के प्रमुख केंद्रों में शामिल हो चुका है.
बता दें कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर सीएम योगी ने जन्मस्थान मंदिर में कृष्ण जी के दर्शन किए. इसके बाद वे पांचजन्य सभागार पहुंचे. यहां उन्होंने बाल स्वरूप बच्चों को दुलार किया. अपने हाथों से उसे खीर भी खिलाई. इस दौरान बच्चों को उन्होंने उपहार भी दिए. इस दौरान सीएम योगी ने कहा, श्रीकृष्ण की निष्काम कर्म की प्रेरणा हमें ताकत देती है. जब तक यह प्रेरणा हमारे बीच है, कोई हमारा बाल भी बांका नहीं कर सकता.
पिछले 8 साल में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 38वीं बार श्रीकृष्ण की नगरी मथुरा का दौरा कर यह संदेश साफ कर दिया है कि प्रदेश सरकार की प्राथमिक योजनाओं में मथुरा का विकास भी अहम स्थान रखता है. मुख्यमंत्री रहते हुए इतनी बार मथुरा आने का उनका यह रिकार्ड इस बात का प्रतीक है कि उनकी सरकार सनातन आस्था के प्रति गहरा सम्मान और पूर्ण समर्पण रखती है.0 काशी और अयोध्या की तरह अब मथुरा भी योगी सरकार के विकास के प्रमुख केंद्रों में शामिल हो चुका है.
उल्लेखनीय है कि राजस्व परिषद के 15 अक्टूबर 2024 तक के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में कुल 61304.504 हेक्टेयर गोचर भूमि उपलब्ध है। वहीं, 6930.619 हेक्टेयर गोचर भूमि को अवैध कब्जे के रूप में चिह्नित किया गया है। कुल मिलाकर 4740.598 हेक्टेयर गोचर भूमि को अवैध कब्जे से रिक्त कराया जा चुका है।
देवरिया में कुल 256.296 हेक्टेयर भूमि चारागाह के लिए उपलब्ध है, जिसमें 16.458 हेक्टेयर भूमि को अवैध कब्जे के रूप में चिह्नित किया गया है। इसमें 5.431 हेक्टेयर भूमि को कब्जा मुक्त करा लिया गया है, जबकि अभी 11.027 हेक्टेयर भूमि को कब्जा मुक्त कराने की प्रक्रिया जारी है।
इसी तरह, जौनपुर में कुल 1361.983 हेक्टेयर गोचर भूमि में से कब्जे वाली 70.945 हेक्टेयर भूमि पर 21.181 हेक्टेयर भूमि को कब्जा मुक्ता कराया गया है। 49.764 हेक्टेयर भूमि को कब्जा मुक्त कराने के लिए अभियान चलाया जाएगा।
शामली की बात करें तो कुल 293.577 हेक्टेयर भूमि में 105.752 हेक्टेयर पर अवैध कब्जे में से 27.056 हेक्टेयर को मुक्त करा लिया गया है, जबकि 78.696 हेक्टेयर भूमि के लिए अभियान चल रहा है। इसी तरह, बिजनौर, मऊ, संभल और गाजियाबाद में भी उपलब्ध कुल गोचर भूमि में से चिह्नित कब्जे वाली भूमि को कब्जा मुक्त कराने की कार्यवाही जारी है।
पशुपालन विभाग द्वारा गोचर भूमि पर हरा चारा उत्पादन की बात करें तो प्रदेश में कुल 6708 ग्रामीण गो आश्रय उपलब्ध हैं। इनमें टैग्ड गोचर भूमि 3060 है जो कुल गो आश्रय स्थलों का 45.62 प्रतिशत है। गो आश्रय स्थलों से टैग्ड गोचर भूमि का क्षेत्रफल 9334.17 हेक्टयर, जिसमें बोया गया हरा चारा का क्षेत्रफल 3107.11 हेक्टेयर है जो कुल टैग्ड गोचर भूमि के क्षेत्रफल का 33.29 प्रतिशत है।
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मुख्य सचिव मनोज सिंह की तरफ से यह आदेश जारी किया गया है। यही नहीं आदेश की निगरानी के लिए सरकारी कार्यालय में सुरक्षाकर्मी और सीसीटीवी की मदद ली जाएगी। दरअसल, यूपी में 15 दिवसीय सड़क सुरक्षा अभियान शुरू हुआ है। जागरूकता अभियान तेजी से चलाया जा रहा है। पहले दिन सड़क सुरक्षा के प्रति लोगों को जागरुक करती रैली निकाली गई। यह पखवाड़ा आगामी 16 अक्टूबर तक मनाया जाएगा ।
मुख्य सचिव ने अपने आदेश में कहा है कि सड़क हादसों में बढ़ती मौतें चिंता का विषय हैं। ऐसे में सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों को सीट बेल्ट और हेलमेट लगाने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने स्कूल और कॉलेज में भी जागरूक करने के निर्देश दिए हैं। उन्हें निर्देश दिया है कि ब्लैक स्पॉट चिन्हित कर लिए जाएं और वहां पर वार्निंग बोर्ड की व्यवस्था की जाए।
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