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जोमैटो के को-फाउंडर दीपिंदर गोयल ने अपने नए हेल्थ-टेक प्रोजेक्ट Temple को लेकर बड़ा ऐलान कर दिया है. अब इस वियरेबल डिवाइस का अर्ली ऐक्सेस ओपन कर दिया गया है और कंपनी ने बताया है कि पहले 100 युनिट तैयार हैं, जिन्हें जल्द यूजर्स तक भेजा जाएगा।
Temple को लेकर पिछले कुछ समय से चर्चा थी, लेकिन अब पहली बार इसे इस्तेमाल करने का मौका लोगों को मिलने जा रहा है. हालांकि यह अभी पूरी तरह से आम लोगों के लिए लॉन्च नहीं हुआ है. फिलहाल इसे सिर्फ चुनिंदा यूजर्स को दिया जा रहा है ताकि असली इस्तेमाल में इसका टेस्ट हो सके और फीडबैक लिया जा सके।
गौरतलब है कि पिछले साल दीपिंदर गोयल को टेंपल डिवाइस अपने माथे के साइड में लगाए हुए एक पॉडकास्ट में देखा गया. तब से इसके बारे में चर्चा शुरू हुई थी. लोगों के मन में सवाल था कि आखिर ये छोटा सा डिवाइस क्या करता है?
क्या करता है टेंपल डिवाइस?
यह डिवाइस बाकी फिटनेस बैंड या स्मार्टवॉच से काफी अलग है. टेंपल को सिर की कनपटी पर लगाया जाता है और इसका फोकस बॉडी नहीं, बल्कि दिमाग पर है।
कंपनी का दावा है कि यह दिमाग में ब्लड फ्लो को ट्रैक करता है. इससे यह समझने में मदद मिल सकती है कि इंसान का फोकस कैसा है, थकान कितनी है और उसकी मेंटल परफॉर्मेंस किस लेवल पर है।
आज तक ज्यादातर वियरेबल डिवाइस हार्ट रेट, स्टेप्स या नींद जैसी चीजें ट्रैक करते थे. लेकिन टेंपल सीधे दिमाग से जुड़ी एक्टिविटी को समझने की कोशिश कर रहा है. यही वजह है कि इसे एक नए तरह का ह्यूमन परफॉर्मेंस वियरेलबल कहा जा रहा है।
आइए जानते हैं कि ऐसी डिवाइस काम कैसे करती है. इसका जवाब जुड़ा है ब्रेन साइंस और सेंसर टेक्नोलॉजी से. ये दुनिया का पहला डिवाइस नहीं है जो ये काम करता है।
दिमाग नहीं पढ़ता है ये डिवाइस
चूंकि इसे माथे के साइड में लगाया जाता है, इसलिए एक परसेप्शन ऐसा बनता है कि ये दिमाग पढ़ने वाला डिवाइस है. लेकिन ऐसा नहीं है. ये डिवाइस आपके दिमाग को नहीं पढ़ता.
टेंपल जैसे वियरेबल आमतौर पर ऑप्टिकल सेंसर्स का इस्तेमाल करते हैं, जो स्किन के अंदर ब्लड फ्लो को मेजर हैं. इसमें हल्की इंफ्रारेड या नजदीकी रोशनी नियर इंफ्रारेड लाइट स्किन में भेजी जाती है।
जब ये लाइट अंदर जाती है, तो खून उसमें मौजूद ऑक्सीजन के हिसाब से अलग-अलग तरीके से उसे एब्जॉर्ब करता है. सेंसर इस बदलाव को पढ़ते हैं और अंदाजा लगाते हैं कि उस जगह पर ब्लड फ्लो कितना है।
इस टेक्नोलॉजी को आसान भाषा में समझें तो यह कुछ-कुछ उसी तरह काम करती है जैसे स्मार्टवॉच में हार्ट रेट सेंसर काम करता है, लेकिन यहां फोकस दिमाग के पास की नसों पर होता है।
नियर इंफ्रारेड स्पेक्ट्रोस्कॉपी
इस तरह की तकनीक को मेडिकल दुनिया में NIRS (Near-Infrared Spectroscopy) कहा जाता है, जिसका इस्तेमाल पहले से रिसर्च और अस्पतालों में किया जाता रहा है।
जब दिमाग ज्यादा एक्टिव होता है, तो वहां खून का बहाव बढ़ जाता है क्योंकि उसे ज्यादा ऑक्सीजन की जरूरत होती है. टेंपल जैसे डिवाइस इसी बदलाव को पकड़ने की कोशिश करते हैं. इसी डेटा के आधार पर यह अंदाजा लगाया जाता है कि व्यक्ति फोकस्ड है, थका हुआ है या उसकी मेंटल एनर्जी कैसी है।
हालांकि यह टेक्नोलॉजी नई नहीं है, लेकिन इसे छोटे वियरेबल डिवाइस में फिट करना और रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए आसान बनाना एक बड़ी चुनौती रही है. यही वजह है कि अभी इसे पूरी तरह परफेक्ट नहीं माना जा रहा और एक्सपर्ट्स भी इसकी सटीकता को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
दीपिंदर गोयल पहले भी इस डिवाइस को पहनकर नजर आ चुके हैं, जिससे इसकी झलक पहले मिल चुकी थी. अब कंपनी इसे धीरे-धीरे लोगों तक पहुंचाने की तैयारी में है. बताया जा रहा है कि इसके लिए पहले से एक वेटलिस्ट बनाई गई थी और उसी के आधार पर यूजर्स को एक्सेस दिया जा रहा है।
फिलहाल टेंपल शुरुआती स्टेज में है, लेकिन अगर यह सफल होता है, तो वियरेबल टेक्नोलॉजी का अगला बड़ा ट्रेंड बन सकता है. आने वाले समय में सिर्फ फिटनेस नहीं, बल्कि दिमाग की परफॉर्मेंस को ट्रैक करना भी आम बात हो सकती है।
]]>ग्वालियर में एक ऑनलाइन फूड ऑर्डर को लेकर जोमैटो और परम फूड्स को उपभोक्ता फोरम का सख्त फैसला झेलना पड़ा। उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग ने आदेश दिया कि दोनों कंपनियां मिलकर उपभोक्ता को 342 रुपए 6% ब्याज सहित लौटाएं और मानसिक पीड़ा के लिए 10 हजार रुपए का हर्जाना दें। इसके अलावा केस लड़ने का खर्च 5 हजार रुपए भी चुकाना होगा। यदि 45 दिनों में यह राशि नहीं दी गई तो अतिरिक्त 5 हजार रुपए और भरने होंगे।
ऑनलाइन फूड ऑर्डर बना परेशानी की वजह
टीकमगढ़ निवासी संदीप कुमार रिछारिया ने 9 फरवरी 2024 को अपने भांजे के जन्मदिन के लिए ग्वालियर में परम फूड्स से पनीर टिक्का और पिज्जा ऑर्डर किया था। इस ऑर्डर के लिए उन्होंने ऑनलाइन 342 रुपए 11 पैसे का भुगतान किया। डिलीवरी 30 मिनट में होनी थी, लेकिन एक घंटे बाद भी पिज्जा नहीं पहुंचा। जब उन्होंने जोमैटो हेल्पलाइन पर कॉल किया तो पता चला कि उनका ऑर्डर रद्द कर दिया गया है, जिसकी सूचना उन्हें नहीं दी गई थी। न ही भुगतान की गई राशि वापस की गई।
पिज्जा न मिलने की वजह से संदीप के भांजे का बर्थडे सेलिब्रेशन बिगड़ गया। इस धोखाधड़ी के खिलाफ उन्होंने उपभोक्ता फोरम में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद फोरम ने जोमैटो और परम फूड्स को नोटिस जारी किया।
कंपनियों ने खुद को निर्दोष बताया, लेकिन फोरम ने ठहराया दोषी
परम फूड्स ने दलील दी कि वे सीधे ऑर्डर नहीं लेते, बल्कि जोमैटो के जरिए ही बुकिंग स्वीकार करते हैं। उनके अनुसार, जोमैटो ने ऑर्डर कैंसिल किया और इसकी सूचना उन्हें भी नहीं दी गई। इसलिए वे इसमें जिम्मेदार नहीं हैं।जोमैटो की तरफ से कहा गया कि वे केवल फूड डिलीवरी का काम करते हैं, खुद खाना नहीं बेचते। उन्होंने यह भी बताया कि गलत पता या रेस्टोरेंट की समस्या के कारण ऑर्डर रद्द किया गया।
हालांकि, उपभोक्ता फोरम ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पाया कि सेवा में कमी हुई है और उपभोक्ता को मानसिक पीड़ा झेलनी पड़ी है। इसी आधार पर फोरम ने जोमैटो और परम फूड्स दोनों को जिम्मेदार ठहराते हुए कुल 15,342 रुपए का भुगतान करने का आदेश दिया।
]]>जोमैटो को जीएसटी विभाग से जो टैक्स नोटिस मिला है, उसमें 401.7 करोड़ रुपये की टैक्स डिमांड और इतनी ही राशि का जुर्माना (Penalty) और ब्याज शामिल है। यह डिमांड 29 अक्टूबर, 2019 से 31 मार्च, 2022 की अवधि के लिए बकाया कर से संबंधित है।
जोमैटो ने क्या बताया
जोमैटो ने स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में बताया, "हमारा मानना है कि हमारे पास योग्यता के आधार पर एक मजबूत मामला है, जो हमारे बाहरी कानूनी और कर सलाहकारों की राय से समर्थित है। कंपनी उचित प्राधिकारी के समक्ष आदेश के खिलाफ अपील दायर करेगी।" कंपनी को जो टैक्स डिमांड नोटिस मिला है, वह जोमैटो और स्विगी जैसे एग्रीगेटर्स द्वारा एकत्र किए गए डिलीवरी शुल्क पर टैक्स एप्लिकेबिलिटी से संबंधित है। प्लेटफ़ॉर्म ने तर्क दिया है कि गिग वर्कर डिलीवरी पार्टनर के रूप में काम करते हैं और उन्हें ऑर्डर के आधार पर भुगतान किया जाता है। यूजर्स से इस डिलीवरी के लिए शुल्क लिया जाता है, सिवाय लॉयल्टी प्रोग्राम के, जहां प्लेटफ़ॉर्म शुल्क माफ करते हैं। यह डिलीवरी शुल्क गिग वर्कर को दिया जाता है।
जीएसटी कानून क्या कहता है
जीएसटी कानूनों के तहत, फूड की डिलीवरी एक ऐसी सेवा है जिस पर 18% की दर से टैक्स लगाया जा सकता है। सरकार का मानना है कि चूंकि प्लेटफ़ॉर्म सेवा शुल्क एकत्र कर रहे हैं, इसलिए उन्हें टैक्स का भुगतान करना चाहिए। पिछले साल दिसंबर में इस मुद्दे पर जीएसटी अधिकारियों ने ज़ोमैटो को कारण बताओ नोटिस भेजा था।
लाभ कमा रही है कंपनी
जोमैटो ने बीते जुलाई-सितंबर की तिमाही में 4,799 करोड़ रुपये का ऑपरेटिंग रेवेन्यू अर्जित किया था। इसी महीने कंपनी को 176 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हुआ था।
शेयर बाजार में क्या है शेयर का हाल
बीते गुरुवार को, बीएसई पर ज़ोमैटो का शेयर मूल्य 2.4% गिरकर 284.90 रुपये पर बंद हुआ था। लेकिन आज यानी शुक्रवार को सुब 10:20 बजे बीएसई सेंसेक्स 791 अंक डाउन था। लेकिन उस समय जोमैटो 286.55 रुपये पर ट्रेड हो रहा था। यह कल के बंद के मुकाबले 1.65 रुपये या 0.58% अधिक है।
]]>ऑनलाइन फूड डिलीवरी जोमैटो के सीईओ दीपेंद्र गोयल ने नए फीचर का ऐलान किया है. इस फीचर का नाम Food Rescue है. इस फीचर के तहत यदि किसी ने अपना ऑर्डर कैंसिल किया, तो जोमैटा आसपास के ग्राहकों को ऑफर देगा कि वो इस ऑर्डर को किफायती दर पर ले सकते हैं. दीपेंद्र गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, 'जोमैटो पर हम ऑर्डर कैंसिल करने के लिए प्रोत्साहित नहीं करते, क्योंकि इससे बहुत सारा खाना बर्बाद होता है.'
चार लाख से ज्यादा ऑर्डर हो रहे कैंसिल
जोमैटो के सीईओ दीपेंद्र गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा, 'सख्त नियमों और कैंसिलेशन पर नो रिफंड पॉलिसी होने के बावजूद, चार लाख से ज्यादा अच्छे-खासे ऑर्डर कस्टमर द्वारा अलग-अलग वजहों से जोमैटो में कैंसिल कर दिए जाते हैं. हमारे लिए सबसे बड़ी चिंता है कि, रेस्टोरेंट इंडस्ट्री और यहां तक कि ऑर्डर कैंसिल करने वाले ग्राहकों की भी सबसे बड़ी चिंता है कि किसी तरह खाने की बर्बादी को रोका जाए.आज, हम एक नया फीचर ला रहे हैं (जिसे अभी लागू किया जा रहा है) – फूड रेस्क्यू!'
आस-पास के ग्राहकों को दिखेंगे कैंसिल किए ऑर्डर
दीपेंद्र गोयल ने पोस्ट में आगे लिखा, 'कैंसिल किए गए ऑर्डर अब आस-पास ग्राहकों को दिखाई देंगे. ये ऑर्डर उन्हें बेहद कम दाम पर, उनकी असली पैकेजिंग और कुछ ही मिनटों में डिलीवर होंगे. कैंसिल किया गया ऑर्डर उस डिलीवरी पार्टनर के तीन किमी दायरे में कस्टमर के ऐप पर दिखाई देगा, जो ऑर्डर लेकर जा रहा है. हालांकि, खाने की ताजगी बनी रहे, इसके लिए ऑर्डर लेने का ऑप्शन केवल कुछ ही मिनटों के लिए उपलब्ध होगा. सरकारी टैक्स को छोड़कर जोमैटो इस पर कोई भी मुनाफा नहीं कमाएगा.'
इन आइटम्स में नहीं लागू होगा फीचर
दीपेंद्र गोयल ने बताया कि आइसक्रीम, शेक, स्मूदी जैसे ऑर्डर और खराब होने वाली चीजें जैसे दूरी या टेंपरेचर के प्रति संवेदनशील प्रोडक्ट्स, इस फीचर के लिए योग्य नहीं होंगे. वहीं, रेस्टोरेंट के मालिकों को मूल कैंसिल किए गए ऑर्डर का मुआवजा पहले की तरह मिलते रहेगा. इसके साथ ही यदि नए फीचर के तहत ऑर्डर लिया जाता है तो नए कस्टमर द्वारा किए गए पेमेंट का एक हिस्सा भी मिलेगा.'
डिलीवरी पार्टनर को मिलेगा पूरा भुगतान
बकौल दीपेंद्र गोयल, 'अभी तक ज्यादातर रेस्टोरेंट ने इस सुविधा को चुन लिया है. वे जब चाहें अपने कंट्रोल पैनल से इसे आसानी से बंद कर सकते हैं. डिलीवरी पार्टनर को शुरुआती पिकअप करने से लेकर नए ग्राहक के लोकेशन पर ड्रॉप ऑफ तक पूरा भुगतान कियाजाएगा. यदि आपके लिए कोई कैंसिल किया ऑर्डर उपलब्ध है, फूड रेस्क्यू आपके होम पेज पर अपने आप दिखाई देगा. बचाए जाने वाले किसी भी नए उपलब्ध ऑर्डर की जांच के लिए अपने होम पेज को रिफ्रेश करें.'
]]>यदि इसे मंजूरी मिलती है, तो यह फूड डिलीवरी कंपनी द्वारा तीन साल पहले शेयर बाजार में लिस्ट होने के बाद पहली बार फंड जुटाने की प्रक्रिया होगी। इसके अतिरिक्त बोर्ड 22 अक्टूबर, 2024 को वित्तीय वर्ष 2024-25 की दूसरी तिमाही के वित्तीय परिणामों की भी घोषणा करेगा। बीएसई पर गुरुवार को जोमैटो के शेयर 1.29 प्रतिशत की गिरावट के साथ 270.65 रुपये प्रति शेयर के भाव पर बंद हुए। फूड एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म जोमैटो द्वारा फंड जुटाने की यह कवायद एक ऐसे समय शुरू करने की जा रही है जब फूड डिलीवरी और क्विक कॉमर्स के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा तेज हो रही है। जोमैटो की प्रतिद्वंद्वी स्विगी आरंभिक सार्वजनिक निर्गम लाने की तैयारी कर रही है। बेंगलुरु स्थित इस कंपनी ने खुलासा किया है कि वह आईपीओ के माध्यम से 45 करोड़ डॉलर तक की नई पूंजी जुटाने की योजना बना रही है।
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पेटीएम की मूल कंपनी वन 97 कम्युनिकेशंस लिमिटेड (ओसीएल) अपने मनोरंजन टिकटिंग व्यवसाय की अपनी सहायक कंपनियों ऑर्बजेन टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड (ओटीपीएल) और वेस्टलैंड एंटरटेनमेंट की 100 प्रतिशत हिस्सेदारी जोमैटो को हस्तांतरित करेगी।
पेटीएम के प्रवक्ता ने कहा कि उन्होंने समय की बाजार जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इंटरटेनमेंट टिकटिंग व्यवसाय का निर्माण किया था।
प्रवक्ता ने कहा, "यह कदम हमें अपने मुख्य क्षेत्रों में दीर्घकालिक विकास और सभी हितधारकों के लिए मूल्य सृजन पर ध्यान केंद्रित करने की अनुमति देता है।"
पेटीएम ने मूवी टिकटिंग को जमीन से ऊपर उठाया, और 2017 से 2018 के बीच कुल 268 करोड़ रुपये में टिकटन्यू और इनसाइडर का अधिग्रहण किया।
कंपनी ने मनोरंजन टिकटिंग व्यवसाय को वित्त वर्ष 2023-24 में 297 करोड़ रुपये के राजस्व और 29 करोड़ रुपये के समायोजित ईबीआईटीडीए तक बढ़ाया।
पेटीएम ने कहा, "लेनदेन का मूल्य समापन पर नकद और शुद्ध कार्यशील पूंजी समायोजन के अधीन है। लेन-देन का समापन सहमत शर्तों की संतुष्टि के अधीन है।"
मनोरंजन टिकटिंग व्यवसाय जिसमें फिल्में, खेल और कार्यक्रम शामिल हैं, 12 महीने तक की संक्रमण अवधि के दौरान पेटीएम ऐप पर उपलब्ध रहेंगे।
कंपनी के अनुसार, इस सौदे से पेटीएम को काफी लाभ होगा और नकद आय से बैलेंस शीट और मजबूत होगी।
ज़ोमैटो ने जून में पुष्टि की थी कि वह पेटीएम के साथ उसकी फिल्मों और टिकटिंग व्यवसाय के अधिग्रहण के लिए चर्चा कर रहा है। यह अधिग्रहण ज़ोमैटो की दूसरी सबसे बड़ी खरीद है। उसने 2021 में क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म ब्लिंकिट का अधिग्रहण किया था जो 4,447 करोड़ रुपये का ऑल-स्टॉक सौदा था।
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कंपनी ने कहा- यह प्रयोग था
खबर के मुताबिक कंपनी एक अधिकारी ने कहा, "यह एक प्रयोग था और किसी भी दिशा में जा सकता था। बता दें कि Xtreme लॉजिस्टिक्स सर्विस है जो व्यापारियों को पार्सल भेजने और प्राप्त करने की अनुमति देती थी। यह सर्विस केवल इंट्रासिटी पैकेज के लिए थी, जिसका अधिकतम वजन 10 किलोग्राम तय था। पैकेज की शुरुआती कीमत ₹35 थी।
सुस्त पड़ा था डंजो का कारोबार
जोमैटो का हाइपरलोकल डिलीवरी में प्रवेश ऐसे समय में हुआ जब इस सेक्टर की दिग्गज कंपनी डंजो का कारोबार मंदी से गुजर रहा था। बता दें कि डंजो रिलायंस रिटेल समर्थित कंपनी है। डंजो के संचालन में मंदी के कारण सॉफ्टबैंक समर्थित ओला ने हाइपरलोकल डिलीवरी सेगमेंट में प्रवेश किया। जोमैटो द्वारा एक्सट्रीम लॉन्च करने से कुछ समय पहले ओला पार्सल पिक-अप और ड्रॉप सेवा बेंगलुरु में लॉन्च की गई थी।
जोमैटो के शेयर का हाल
इस बीच, जोमैटो ने अपनी इंटरसिटी फूड डिलीवरी पेशकश 'लीजेंड्स' को एक बार फिर लॉन्च किया है। वहीं, जोमैटो के शेयर की बात करें तो यह 207.30 रुपये पर था। यह पिछले कारोबारी दिन से 0.41% टूटकर बंद हुआ है।
जोमैटो ने रविवार, दो जून को दोपहर 1.41 बजे एक ट्वीट किया। इसमें लिखा गया था कि जब तक बहुत जरूरी नहीं हो, कृपा कर भरी दोपहरी में आर्डर करने से बचें। माना जा रहा है कि कंपनी ने अपने ग्राहकों से यह अनुरोध इसलिए किया ताकि उनके डिलीवरी पार्टनर तपती दोपहरी में लू की चपेट में न आ जाएं।
नेटीजेन ने तरह तरह से रिएक्ट करना शुरू कर दिया
जैसे ही जोमैटो ने यह ट्वीट किया, उस पर नेटीजेन ने तरह तरह से रिएक्ट करना शुरू कर दिया। शायद उन्हें जोमैटो का यह अनुरोध रास नहीं आया। कई यूजर्स ने कहा कि सही में यदि जोमैटो अपने डिलीवरी पार्टनर्स का केयर करता है तो वह भरी दोपहरी में अपनी सेवा सस्पेंड कर दे, बजाय कि ग्राहकों को लंच का आर्डर करने से रोकने के।
जरूरी होता है तभी करते हैं आर्डर
विभोर वार्ष्णेय नाम के एक यूजर लिखते हैं को कि गैरजरूरी होने पर बाहर से खाना कौन आर्डर करता है? मुझे लगता है कोई नहीं। लोग तभी बाहर से खाना मंगाते हैं, जब उन्हें जरूरत होती है, इमर्जेंसी होती है, वह घर में खाना नहीं बना सकते हैं। उन्होंने तो एक आइडिया भी दे दिया है कि आप अपने डिलीवरी पार्टनर को इस तरह का एक रूफ उपलब्ध करा दें। महज 800 रुपये में आता है। उन्होंने इस तरह का एक फोटो भी पोस्ट किया है।
डिनर के समय लंच नहीं हो सकता
परीक्षित शाह नाम के एक यूजर ने पूछा हे, क्या यह सही है? मैं आपके विचारों की सराहना करता हूं। लेकिन लंच टाइम का आर्डर डिनर टाइम तक के लिए टालना संभव नहीं है। चाहे तो जोमैटो बहुत ही जरूरी आर्डर को आइडेंटिफाइ कर सकता है।
इसने तो डिलीट ही कर दिया
यथार्थ नाम के एक यूजर ने तो लिखा है, तो मैं आपका ऐप ही डिलीट कर रहा हूं। यह मेरे लिए महत्वहीन हो गया है।
जोमैटो के शेयर टूट गए
शेयर बाजार में आज भारी तेजी है। सुबह बीएसई का सेंसेक्स 2600 अंकों से भी ऊपर खुला। लेकिन जोमैटो का शेयरआज टूट गया। पिछले शुक्रवार को इस कंपनी का शेयर 178.90 रुपये पर बंद हुआ था। आज सुबह यह 184.10 रुपये पर खुला और ऊंचे में 185.35 रुपये तक गया। लेकिन यह तेजी जारी नहीं रह सकी। इसका शेयर शीघ्र ही टूट कर 176 रुपये पर पहुंच गया।
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