विदेश

ट्रंप के गाजा योजना को लेकर अरब दुनिया में तीखी प्रतिक्रिया, जॉर्डन ने भी सुनाई खरी-खरी

वाशिंगटन
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के गाजा योजना को लेकर अरब दुनिया में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। अरब लीग के महासचिव अहमद अबुल गैत और जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला द्वितीय ने इस योजना को सख्ती से खारिज कर दिया है। अरब लीग के महासचिव अबुल गैत ने दुबई में वर्ल्ड गवर्नमेंट समिट में कहा कि फिलिस्तीनियों को गाजा और वेस्ट बैंक से विस्थापित करना अरब क्षेत्र के लिए अस्वीकार्य है। उन्होंने कहा, "अरब जगत पिछले 100 साल से इस विचार के खिलाफ लड़ता आ रहा है।" इसी कड़ी में जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला द्वितीय ने भी ट्रंप के साथ बैठक में दो टूक कहा कि उनका देश फिलिस्तीनियों के विस्थापन के किसी भी प्रयास को स्वीकार नहीं करेगा। हालांकि, मानवीय आधार पर उन्होंने गाजा के 2,000 बीमार बच्चों को शरण देने की पेशकश की।

ट्रंप के गाजा प्लान बढ़ा विवाद
उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में यह प्रस्ताव रखा था कि अमेरिका गाजा पर नियंत्रण कर सकता है और इसे एक शानदार पर्यटन स्थल के रूप में विकसित कर सकता है। अरब देशों को लगता है कि उनकी यह योजना फिलिस्तीनियों को उनकी भूमि से बेदखल करने पर आधारित है, जिसे अरब देशों ने पूरी तरह से अस्वीकार कर दिया है। ट्रंप ने जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला के साथ एक बैठक के दौरान कहा, "हम गाजा को अपने नियंत्रण में लेंगे और संजो कर रखेंगे।" हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि वह व्यक्तिगत रूप से वहां कोई रियल एस्टेट प्रोजेक्ट नहीं करेंगे।

किंग अब्दुल्ला ने ट्रंप को समझाने की कोशिश करते हुए कहा कि मिस्र इस मुद्दे पर एक व्यापक योजना तैयार कर रहा है, जिस पर आगे चर्चा होगी। उन्होंने कहा, "हमें इंतजार करना चाहिए कि मिस्र क्या प्रस्ताव रखता है, और फिर हम इस पर रियाद में चर्चा करेंगे।" मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी ने भी गाजा पुनर्निर्माण का समर्थन किया, लेकिन फिलिस्तीनियों के विस्थापन को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया।

क्या जॉर्डन पर दबाव बनाएंगे ट्रंप?
जॉर्डन को अमेरिका से हर साल करीब 750 मिलियन डॉलर की आर्थिक मदद और 350 मिलियन डॉलर की सैन्य सहायता मिलती है। ऐसा बताया जा रहा है कि ट्रंप इस सहायता को रोकने की धमकी देकर जॉर्डन और अन्य अरब देशों पर दबाव बना सकते हैं। हालांकि, किंग अब्दुल्ला ने यह संकेत दिया कि उनके देश का रुख अडिग रहेगा। अब सबकी नजरें आगामी रियाद बैठक पर टिकी हैं, जहां अरब देश ट्रंप के इस विवादास्पद प्रस्ताव पर अपनी साझा रणनीति तय करेंगे।

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