मध्यप्रदेश

पी.सी.पी.एन.डी.टी. अधिनियम का प्रभावी क्रियान्वयन लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण का महत्वपूर्ण आधार: उप मुख्यमंत्री शुक्ल

भोपाल

उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि पीसीपीएनडीटी (गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व निदान तकनीक) अधिनियम का महत्व केवल एक कानून तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक सामाजिक और नैतिक संकल्प भी है, जो लिंगानुपात को संतुलित करने और कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए लागू किया गया है। इस अधिनियम का प्रभावी क्रियान्वयन लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण को सुनिश्चित करने का एक महत्वपूर्ण आधार है। यह अधिनियम उन सभी चिकित्सा प्रक्रियाओं और तकनीकों पर रोक लगाता है, जिनका दुरुपयोग भ्रूण के लिंग निर्धारण और कन्या भ्रूण हत्या के लिए किया जा सकता है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने मंत्रालय भोपाल में गर्भधारण पूर्व एवं प्रसव पूर्व निदान तकनीक (लिंग चयन प्रतिषेध) अधिनियम के तहत गठित राज्य सुपरवाईज़री बोर्ड की बैठक में अधिनियम के क्रियान्वयन की समीक्षा की।

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने पी.सी.पी.एन.डी.टी. अधिनियम अंतर्गत अनिवार्य फॉर्म- एफ़ अपलोड की स्थिति और प्रावधान अंतर्गत की गयी कार्यवाहियों की समीक्षा की। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने निर्देश दिये कि ऐसे क्षेत्र जहाँ लिंगानुपात विपरीत है वहाँ सघन कार्यवाही और नियमित मॉनिटरिंग की जाये। विधायक श्रीमती प्रियंका मीणा, प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा संदीप यादव, सहित विभागीय वरिष्ठ अधिकारी, राज्य सुपरवाईजरी बोर्ड के सदस्य उपस्थित थे।

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि कानून की सफलता केवल इसके प्रावधानों पर निर्भर नहीं करती, बल्कि इसके प्रभावी क्रियान्वयन, सख्त निगरानी और जनजागरूकता अभियानों पर भी आधारित है। यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रत्येक अल्ट्रासाउंड सेंटर, प्रसव पूर्व निदान सुविधा और चिकित्सा संस्थान कानून के तहत निर्धारित मानकों का पालन करे। कड़े कानूनी प्रावधानों के साथ-साथ लोगों को नैतिक रूप से जागरूक करना भी आवश्यक है ताकि समाज में यह संदेश स्पष्ट रूप से जाए कि हर बालिका का जीवन मूल्यवान है और उसे समान अवसर मिलना चाहिए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने प्रदेश में लिंग चयन गतिविधियों के प्रतिषेध हेतु "मुखबिर योजना" और पी.सी.पी.एन.डी.टी. अधिनियम के दण्डात्मक प्रावधानों के प्रति जन-जागरूकता के निर्देश दिए।

अर्हताधारी चिकित्सकों की पहचान की पुष्टि के लिए आधार ऑथेंटिकेशन की अधिसूचना जारी

वरिष्ठ संयुक्त संचालक डॉ. प्रज्ञा तिवारी ने बताया कि पूर्व बैठक में बोर्ड के निर्णय अनुसार वयोवृद्ध रेडियोलॉजिस्ट / सोनोलॉजिस्ट तथा ऐसे चिकित्सक जिनके द्वारा फिंगर प्रिंट की यूआईडीएआई से पुष्टि के अभाव में फॉर्म-एफ़ का अपलोड संभव नहीं हो रहा है, उनके लिए वैकल्पिक बायोमेट्रिक के तौर पर आईरिस स्कैन का विकल्प पी.सी.पी.एन.डी.टी. पोर्टल पर किया गया है। पी.सी.पी.एन.डी.टी. पोर्टल में ऑनलाइन प्रविष्टियों हेतु अर्हताधारी चिकित्सकों की पहचान पुष्टि के लिए 14 फरवरी 2025 को आधार ऑथेंटिकेशन की अधिसूचना जारी की गई। सोनोलॉजिस्ट की संख्या में वृद्धि के प्रयास किए जा रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि प्रदेश में पीसीपीएनडीटी अधिनियम के अंतर्गत कुल पंजीकृत संस्थाओं की संख्या 2884 है। अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन के तहत नियमित निगरानी कर अब तक कुल 352 कार्यवाहियाँ की गईं, जिनमें पंजीयन निरस्तीकरण और निलंबन की कार्रवाइयाँ शामिल हैं। पीसीपीएनडीटी अधिनियम के तहत 44 वैधानिक कार्यवाहियाँ की गईं हैं इनमें 5 मामलों में अपंजीकृत केंद्रों के विरुद्ध कार्रवाई की गई, जबकि 2 मामलों में अधिनियम अंतर्गत आवश्यक अभिलेखों (फॉर्म-एफ, एएनसी रजिस्टर, रेफरल स्लिप) का संधारण नहीं किए जाने के कारण वैधानिक कार्यवाही की गई। इसके अतिरिक्त, 2 मामलों में गर्भस्थ भ्रूण के लिंग की जानकारी से संबंधित संवाद करने के उल्लंघन पर कार्रवाई हुई, वहीं 107 मामलों में गर्भधारण पूर्व एवं प्रसव पूर्व निदान तकनीक के माध्यम से लिंग चयन हेतु विज्ञापन देने पर कार्रवाई की गई।

 

RO No. 13169/ 31

RO No. 13098/ 20

PRATYUSHAASHAKINAYIKIRAN.COM
Editor : Maya Puranik
Permanent Address : Yadu kirana store ke pass Parshuram nagar professor colony raipur cg
Email : puranikrajesh2008@gmail.com
Mobile : -91-9893051148
Website : pratyushaashakinayikiran.com

जनसम्पर्क विभाग – आरएसएस फीड