मध्यप्रदेश

मंडला: नक्सलियों से संबंध के आरोप में दो वन मजदूर गिरफ्तार, UAPA के तहत कार्रवाई

मंडला
 मध्य प्रदेश में दो आदिवासी मजदूरों पर UAPA लगा है। वन विभाग में काम करने वाले इन मजदूरों पर माओवादियों से संबंध होने का आरोप है। मंडला जिले में पुलिस और माओवादियों के बीच हुई गोलीबारी के बाद रविवार को इन्हें गिरफ्तार किया गया। इन पर सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने और दंगा करने का आरोप है। वन कर्मचारी संघ का कहना है कि दोनों निर्दोष हैं और उन्हें फंसाया गया है।

वन विभाग के दो मजदूरों को गिरफ्तार किया

मंडला जिले में रविवार को पुलिस और माओवादियों के बीच मुठभेड़ हुई थी। इसके बाद पुलिस ने दो आदिवासी मजदूरों, अशोक कुमार वाल्को (28) और संतोष कुमार धुर्वे (28), को गिरफ्तार कर लिया। दोनों कान्हा बाघ अभयारण्य (KTR) में अस्थायी मजदूर के रूप में काम करते थे। पुलिस का आरोप है कि इन दोनों के माओवादियों से संबंध हैं और ये उन्हें राशन पहुंचाते थे।

खटिया पुलिस थाने के निरीक्षक कैलाश सिंह चौहान ने बताया कि कान्हा बाघ अभयारण्य (KTR) में अस्थायी मजदूर के रूप में काम करने वाले दो आदिवासी लोगों को नक्सलियों के साथ उनके संबंधों और उन्हें राशन की आपूर्ति करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।

मजदूरों पर UAPA लगाया

पुलिस ने दोनों पर कठोर गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) लगाया है। UAPA एक ऐसा कानून है जिसका इस्तेमाल आतंकवाद से जुड़े मामलों में किया जाता है। इसके अलावा, इन पर भारतीय न्याय संहिता (IPC) के तहत भी सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने और दंगा करने का आरोप लगाया गया है।

पुलिस अधिकारी ने बताया कि उन पर सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने और भारतीय न्याय संहिता (IPC) के तहत दंगा करने के लिए UAPA की संबंधित धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं।

मजदूर संगठनों ने किया समर्थन

वहीं, मध्यप्रदेश वन कर्मचारी संघ, मंडला इकाई के प्रमुख बलसिंह ठाकुर ने दोनों मजदूरों का समर्थन किया है। उनका कहना है कि दोनों निर्दोष हैं और उन्हें झूठे मामले में फंसाया गया है। ठाकुर ने कहा कि हम जल्द ही मंडला पुलिस अधीक्षक से मिलेंगे और उन्हें एक याचिका सौंपेंगे ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि निर्दोष आदिवासी मजदूरों को जेल से रिहा किया जाए। वे मांग कर रहे हैं कि पुलिस इस मामले की निष्पक्ष जांच करे और निर्दोष लोगों को रिहा करे।
तीन दिन की पुलिस रिमांड

गिरफ्तारी के बाद, दोनों आरोपियों को अदालत में पेश किया गया। अदालत ने उन्हें तीन दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया। बाद में उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। पुलिस अब इस मामले की आगे की जांच कर रही है। इस मामले ने स्थानीय आदिवासी समुदाय में काफी रोष पैदा कर दिया है।

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