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छत्तीसगढ़

पीएम जनमन योजना के बाद आज भी 9 बस्तियां घोर अंधकार में हैं

खैरागढ़

आजादी के 77 साल बाद भी खैरागढ़ जिले की PVTG (विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह) बस्तियां बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं. PM-JANMAN योजना के तहत इन इलाकों को बिजली से जोड़ने का वादा किया गया था, लेकिन आज भी 9 बस्तियां घोर अंधकार में हैं. सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मूलभूत जरूरतों से कोसों दूर ये गांव विकास की दौड़ में पीछे छूट चुके हैं. जिस तरह का जीवन यहां के रहवासी जी रहे हैं, उसे देखकर आप भी हैरान रह जाएंगे..

जानिए क्या है पीएम जनमन योजना:
पीएम जनमन योजना का उद्देश्य सभी को सुरक्षित आवास, स्वच्छ पेयजल, स्वच्छता, शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण तक बेहतर पहुंच के साथ-साथ बेहतर सड़क और दूरसंचार संपर्क और पीवीटीजी घरों और आवासों में स्थायी आजीविका के अवसर जैसी आवश्यक सुविधाएं प्रदान करना है.

छत्तीसगढ़ राज्य पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (CSPDCL) के मुताबिक, झिलमिली, सिंगबोरा, ग्वालकुंडी, आमाटोला, निजामडीह , संजारी, कोहकझोरी , लवातरा और टिंगीपुर जैसी PVTG बस्तियों में अब तक बिजली कनेक्शन नहीं पहुंच सका है. यहां न सड़कें हैं, न स्वास्थ्य केंद्र और न ही रोशनी का नामो-निशान. बारिश के दिनों में ये गांव पूरी तरह कट जाते हैं, और रात होते ही यहां घना अंधेरा छा जाता है. बिजली विभाग ने इन गांवों को रोशन करने का दावा तो किया, लेकिन हकीकत कुछ और ही है. PM-JANMAN योजना के तहत इन इलाकों में बिजली पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन बिजली वनबाधा के चलते नदारद है.

हाल ही में बिजली कंपनी ने सहायक अभियंता को पत्र जारी कर जल्द से जल्द इन गांवों को बिजली से जोड़ने के निर्देश दिए हैं. लेकिन ये निर्देश सिर्फ कागजों तक सीमित रहेंगे या इन बस्तियों में सच में रोशनी पहुंचेगी? यह बड़ा सवाल है.

सरकार भले ही आदिवासियों के विकास के लिए तमाम योजनाएं चला रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत यही है कि PVTG समुदाय आज भी बुनियादी जरूरतों के लिए तरस रहा है. सरकार के दावों और हकीकत के बीच की इस खाई को पाटने के लिए प्रशासन को ठोस कदम उठाने होंगे, वरना ये आदिवासी परिवार हमेशा की तरह वादों के जाल में उलझे रहेंगे.

वहीं पूरे मामले पर विद्युत विभाग के कार्यपालक अभियंता अशोक कुमार द्विवेदी ने बताया कि जिले में कुल 47 बसाहटे थीं, जिसमें बिजली नहीं थी. लेकिन अब कई बस्तियों में बिजली पहुंच गई है. हालांकि 9 बसाहटें ऐसी हैं, जिनमें वन बाधा और घरों के बीच अत्याधिक दूरी होने के कारण बिजली नहीं पहुंच पाई है. इन्हें सोलर ऑफ ग्रिड से बिजली दिया जाना प्रस्तावित है. हमने राजनांदगांव क्रेडा को पत्र लिखा है कि इन 9 बस्तियों में जल्दी ही सोलर बिजली पहुंचाई जाए.

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